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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Fri, 29 May 2026 18:19:09 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[भारत के घरों में छिपा है अरबों डॉलर का ऐसा खजाना, जो बदल देगा देश के हर शख्स की किस्मत]]></title>
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            <pubDate>Wed, 27 May 2026 14:53:19 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;India Gold Monetization &amp;nbsp;: देश की तस्वीर बदलने वाला आखिर क्या है वो &lsquo;सीक्रेट फॉर्मूला&rsquo;? भारत के हर घर में में छिपा है ऐसा क्या खजाना, जो बदल सकता है देश का भविष्य? भारत को सुपरपावर बनाने के लिए अब क्या बदलना जरूरी है? देश के विकास में सबसे बड़ी रुकावट क्या है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksmbgxsqfck4ns44rrw00bt6,imgname-untitled-design---2026-05-27t144532.804-1779873380151.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Viksit Bharat Vision : एक समय ऐसा था कि भारत सोने की चिढ़िया कहा जाता था। यह बिलकुल सही है, अभी भी हर घर में सोना छिपा है। अगर यह बाहर आ जाए तो देश की तस्वीर ही बदल जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास 25,000 टन से ज्यादा सोना है, जो दुनिया के शीर्ष 10 केंद्रीय बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है। इसी पर कोटक म्यूचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने अपनी राय रखते हुए 'विकसित भारत' बनाने का एक सीधा-सादा फॉर्मूला बताया है। उनका कहना है कि देश को दो मोर्चों पर काम करने की जरूरत है- पहला, घरों में बेकार पड़े सोने को किसी तरह काम में लाना और दूसरा, उद्यमियों (एंटरप्रेन्योर्स) के लिए नियमों और कानूनों के बोझ को कम करना।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;25 सालों में भारत ने 510 अरब डॉलर का सोना आयात किया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मंगलवार को PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के एक कार्यक्रम में बोलते हुए शाह ने कहा कि भारत ने पिछले 25 सालों में सोना खरीदने पर भारी रकम खर्च की है। शाह ने बताया, &quot;इस सदी के पिछले 25 सालों में, हमने आधिकारिक तौर पर 510 अरब डॉलर का सोना आयात किया है।&quot; उन्होंने यह भी साफ किया कि यह आंकड़ा ज्वेलरी एक्सपोर्ट को घटाने के बाद का है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;विदेश की फ्लाइट में हर कोई लगता बप्पी लहरी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत में लोगों के पास कितना सोना है, इस पर उन्होंने कहा कि इसका कोई सटीक आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन अनुमान है कि यह करीब 25,000 टन हो सकता है। उन्होंने मज़ाक में कहा, &quot;सोने की तस्करी भी होती है। और अगर आप सिंगापुर या मिडिल ईस्ट से किसी फ्लाइट में आ रहे हैं, तो आपको छोड़कर उस फ्लाइट का हर यात्री बप्पी लहरी का रिश्तेदार लगता है, जो गहनों से लदा होता है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तिजोरी में पड़े इस सोने को कैसे करें इस्तेमाल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शाह ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हमने सोने में जितना पैसा लगाया है, उतना तो देश में नेट विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) भी नहीं आया है। शाह ने सोने को भारतीय घरों के लिए एक &quot;भावनात्मक निवेश&quot; बताते हुए कहा कि पॉलिसी बनाने वालों को ऐसे तरीके खोजने होंगे जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना इस धातु को काम पर लगाया जा सके। उन्होंने सवाल किया, &quot;तिजोरी में पड़े इस सोने को हम कैसे मॉनेटाइज या फाइनेंशलाइज करें?&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गोल्ड कैसे बदल देगा आम आदमी की तकदीर?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;शाह के मुताबिक, गोल्ड फाइनेंसिंग देश में पहले से ही एक बड़ा बिजनेस बन चुका है। उन्होंने कहा, &quot;आज, गोल्ड लोन फाइनेंसिंग छह लाख करोड़ रुपये का कारोबार है। यह पिछले एक साल में सबसे तेजी से बढ़ने वाला रिटेल बिजनेस है।&quot;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;भारतीय उद्यमियों की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से करते हुए शाह ने कहा कि हमारे स्टार्टअप और उद्यमी तमाम ढांचागत बाधाओं के बावजूद भारत को बदल रहे हैं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;उन्होंने कहा कि भले ही भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी सुधरा है, लेकिन कारोबारियों को अब भी नियमों की अड़चनों का सामना करना पड़ता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पुराने कानूनों और मुश्किल सिस्टम की आलोचना करते हुए शाह ने कहा, &quot;अंग्रेज तो चले गए, लेकिन वे अपने बनाए 'ठग-डाउन' (सख्त नियम) यहीं छोड़ गए।&quot;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;उन्होंने आगे कहा कि उद्यमियों को दुनिया में मुकाबला करने के लिए और मजबूत पॉलिसी सपोर्ट की जरूरत है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;शाह ने कहा, &quot;हमें अपने उद्यमियों को सपोर्ट करने पर ध्यान देना होगा। हमें अपने कारोबारियों को सपोर्ट करना होगा ताकि वे दुनिया के बेस्ट लोगों से मुकाबला कर सकें।&quot;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;भारत बनकर रहेग विकसित देश&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;शाह ने भारत की बढ़ती इनोवेशन क्षमता को दिखाने के लिए स्पेस स्टार्टअप 'अग्निकुल कॉसमॉस' का उदाहरण भी दिया। उन्होंने इसके फाउंडर श्रीनाथ रविचंद्रन की तारीफ करते हुए कहा कि कंपनी ने भारत में दुनिया का सबसे बड़ा 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन बनाया है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&amp;nbsp;शाह ने कहा, &quot;श्रीनाथ रविचंद्रन जैसे लोग मुझे भरोसा दिलाते हैं कि विकसित भारत तो बनके रहेगा।&quot;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में अग्निकुल कॉसमॉस समेत दो भारतीय कंपनियां दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट बूस्टर रिकवरी टेक्नोलॉजी का प्रयास करने वाली हैं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;शाह ने आखिर में कहा, &quot;ये सभी चीजें भारत में, सीमित बजट के अंदर और 'अभिमन्यु' वाली तमाम बाधाओं के साथ बनाई गई हैं।&quot;&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Arvind Raghuwanshi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[8th Pay Commission BIG UPDATE: सैलरी-पेंशन बढ़ने की तारीख पर बड़ा अपडेट, जून में तय होगी फाइनल डेट!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/8th-pay-commission-big-update-salary-pension-hike-timeline-may-confirm-in-june-july-2026/articleshow-53obbpi</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:46:38 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;8th Pay Commission Latest Update:&lt;/strong&gt; आखिर सरकारी कर्मचारियों की नई सैलरी कब से लागू होगी? पेंशन और अलाउंस में कितना बदलाव हो सकता है? जून-जुलाई में होने वाली बैठकों के बाद क्या जल्द बड़ा फैसला आएगा?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;8th Pay Commission Latest News: &lt;/strong&gt;केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को लेकर बड़ी खबर आ रही है। 8वें वेतन आयोग के काम ने अब रफ्तार पकड़ ली है। सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, भत्ते (Allowances) कितने बढ़ेंगे और पेंशन का नया स्ट्रक्चर क्या होगा, इसे लेकर एक नया और साफ शेड्यूल सामने आ गया है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाला यह पैनल अब सीधे कर्मचारियों और उनके संगठनों से मिलकर बातचीत का दौर शुरू करने जा रहा है। जून और जुलाई में बैक-टू बैक बैठकें होने जा रही हैं। जानिए नई टाइमलाइन क्या हो सकती है...&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;50 लाख कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर्स पर असर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस आयोग के फैसलों का सीधा असर देश के एक बहुत बड़े हिस्से पर पड़ने वाला है। इस नए बदलाव से लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में सुधार होगा। करीब 65 लाख पेंशनभोगियों (जिनमें रिटायर्ड फौजी और डिफेंस स्टाफ भी शामिल हैं) की पेंशन राशि बढ़ जाएगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जून और जुलाई में आपके शहर पहुंचेगा पैनल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कमेटी अलग-अलग राज्यों का दौरा करके वहां के कर्मचारी संगठनों और यूनियन से फीडबैक ले रही है। इससे पहले मई के महीने में दिल्ली, हैदराबाद, रेलवे और डिफेंस से जुड़े संगठनों के साथ शुरुआती बातचीत हो चुकी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब-कहां होगी बैठक?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;1 से 4 जून तक जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में बैठक होगी, जिनमें स्थानीय कर्मचारी संगठन और स्टेकहोल्डर्स शामिल होंगे। 8 जून को लद्दाख में बैठक होगी, जिसमें रीजनल एम्प्लॉई ग्रुप्स से चर्चा की जाएगी। 22 और 23 जून को यूपी की राजधानी लखनऊ में बैठक होगी, जिसमें राज्य के कर्मचारी और यूनियन प्रतिनिधि आएंगे। 6 और 7 जुलाई को ओडिशा के भुवनेश्वर में टीम पहुंचेगी और राज्य के केंद्रीय विभागों के प्रतिनिधि से बात करेगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब तक आएगा बढ़ा हुआ पैसा? (संभावित टाइमलाइन)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;31 मई 2026 (आखिरी तारीख):&lt;/strong&gt; आयोग के पास अपने सुझाव या मांग पत्र (Memorandum) भेजने की यह लास्ट डेट है। इसके बाद मिले सुझावों पर विचार नहीं होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;फरवरी 2027 (रिपोर्ट सौंपना):&lt;/strong&gt; नवंबर 2025 में बने इस आयोग को अपनी फाइनल रिपोर्ट और सिफारिशें तैयार करने में फरवरी 2027 तक का समय लग सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;2029 से 2030 (पूरी तरह लागू):&lt;/strong&gt; रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस पर विचार करेगी और इसे पूरी तरह जमीन पर लागू होने में 2029 से 2030 तक का समय लग सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बातचीत में किन मुख्य बातों पर रहेगा फोकस?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सैलरी हाइक (Salary Hike): &lt;/strong&gt;बेसिक पे को कितना बढ़ाया जाए ताकि महंगाई से राहत मिले।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भत्ते (Allowances): &lt;/strong&gt;हाउस रेंट, मेडिकल और बाकी मिलने वाले भत्तों में कितना सुधार हो।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पेंशन (Pensions): &lt;/strong&gt;रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए पेंशन के नियमों को कितना आसान और फायदेमंद बनाया जाए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        <item>
            <title><![CDATA[आखिर कैसे $22 Billion से Zero पर पहुंच गया Byju’s? लालच, कर्ज़ और साज़िशों की खौफनाक कहानी!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/byjus-collapse-greed-22-billion-edtech-valuation-scandal-bankruptcy-legal-case/articleshow-5b6gaxg</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:11:31 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Byju&rsquo;s $22B से शून्य-क्या यह लालच और ओवरएक्सपेंशन का सबसे बड़ा EdTech फेलियर है? क्या 2019-22 की $3B+ अधिग्रहण रणनीति ही पतन की असली जड़ थी? क्या निवेशकों, माता-पिता और कर्मचारियों के नुकसान से सिस्टम फेल हुआ? क्या बायजू रवींद्रन की कानूनी लड़ाई कंपनी को फिर बचा पाएगी?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Byju Raveendran Jail Singapore: &lt;/strong&gt;यह कहानी भारत के स्टार्टअप इतिहास के सबसे बड़े और सबसे सुनहरे सपने के टूटने की है। कभी देश की सबसे कीमती एडटेक (EdTech) कंपनी के रूप में पूजी जाने वाली Byju's, जिसका मूल्यांकन साल 2022 में आसमान छूते हुए $22 बिलियन (लगभग ₹1.8 लाख करोड़) तक पहुँच गया था, आज अर्श से फर्श पर आ गिरी है। आज इस दिग्गज कंपनी का नेटवर्थ 'शून्य' भी नहीं, बल्कि माइनस 8,245 करोड़ रुपये हो चुका है। लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब इसके संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की एक अदालत ने उनकी गैर-मौजूदगी में छह महीने की जेल की सज़ा सुना दी। कभी दुनिया के बड़े-बड़े मंचों पर ज्ञान बांटने वाला यह अरबपति आज दुबई में छिपा बैठा है। आखिर कैसे बेलगाम लालच और अंधी महत्वाकांक्षा ने इस एडटेक साम्राज्य की कब्र खोद दी?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;सिंगापुर का वो वारंट: जिसने दुबई में बैठे बायजू की नींद उड़ा दी!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सस्पेंस और कानूनी दांव-पेचों के बीच इस ताज़ा विवाद की शुरुआत तब हुई जब सिंगापुर की अदालत ने रवींद्रन को अपनी संपत्ति की जानकारी छिपाने और अदालत की अवहेलना का दोषी पाया। यह कानूनी जाल 'कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी' (QIA) की एक सहायक कंपनी ने बुना था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अदालत के सख्त आदेश के मुताबिक:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;बायजू रवींद्रन को तुरंत अधिकारियों के सामने सरेंडर करना होगा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;उन्हें लगभग ₹67 लाख (90,000 सिंगापुर डॉलर) का कानूनी खर्च चुकाना होगा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अपनी रहस्यमयी कॉर्पोरेट संस्था 'Beeaar Investco Pte' के असली मालिकाना हक का सबूत देना होगा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हालांकि, रवींद्रन ने इसे केवल एक &quot;प्रक्रियात्मक अवमानना&quot; (Procedural Contempt) बताया है और दावा किया है कि कर्जदाताओं (GLAS Trust और QIA) के साथ समझौते की बातचीत अंतिम दौर में है। लेकिन कानून का शिकंजा अब कस चुका है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;अंधी महत्वाकांक्षा का खेल: जब ₹25,000 करोड़ के 'एक्विजिशन' ने निगल लिया खुद का वजूद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणित के एक साधारण शिक्षक से अरबपति बनने वाले बायजू रवींद्रन को असली पंख कोविड-19 महामारी के दौरान मिले। जब स्कूल बंद थे, तब पैसा पानी की तरह बह रहा था। शाहरुख़ खान से लेकर लियोनेल मेसी तक कंपनी के ब्रांड एंबेसडर थे। लेकिन इसी बीच एंट्री हुई 'कॉर्पोरेट लालच' की। Byju's ने बिना मजबूत बुनियाद तैयार किए 2019 से 2022 के बीच अंधाधुंध तरीके से कंपनियों को खरीदना शुरू किया। कंपनी ने लगभग $2.5 से $3.6 बिलियन (करीब ₹20,000-₹30,000 करोड़) सिर्फ दूसरी कंपनियों को निगलने में फूंक दिए:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;आकाश एजुकेशनल सर्विसेज&lt;/strong&gt;:-$1 बिलियन&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;एपिक (Epic)&lt;/strong&gt;:-$500 मिलियन&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;व्हाइटहैट जूनियर (WhiteHat Jr)&lt;/strong&gt;:-$300 मिलियन&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;जैसे ही महामारी थमी, स्कूल खुले और ऑनलाइन पढ़ाई का गुब्बारा फूट गया। कमाई रुक गई, लेकिन कंपनियों को खरीदने का कर्ज और भारी-भरकम मार्केटिंग का खर्च बढ़ता गया। नतीजा? कंपनी को एक ही साल में 4,588 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;टारगेट का वो खूनी दबाव: जब मासूम माता-पिता और कर्मचारी बने 'बलि का बकरा'&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Byju's के एक टॉप एग्जीक्यूटिव का कबूलनामा&hellip;&ldquo;हमें पता था कि जहाज डूबने वाला है, लीडरशिप बड़े विज़न के पीछे भाग रही थी और नीचे जमीनी स्तर पर लोग अपनी सैलरी का इंतजार कर रहे थे। हमें बहुत गिल्ट (अपराधबोध) महसूस होता था...&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;साम्राज्य को ढहने से बचाने के लिए सेल्स टीम पर 14-15 घंटे काम करने का खूनी दबाव बनाया गया। टारगेट पूरा करने के लिए गरीब और कमज़ोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों को जबरन EMI के जाल में फंसाकर महंगे कोर्सेज बेचे गए। आज लाखों माता-पिता के पैसे डूब चुके हैं, और जिन टैबलेट्स को कभी हज़ारों रुपये में बेचा गया था, वे आज ग्रे मार्केट और कबाड़ के भाव बिक रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सबसे क्रूर असमानता यह रही कि जब कंपनी डूब रही थी, तब शीर्ष अधिकारियों और संस्थापकों की निजी सुख-सुविधाएं सुरक्षित थीं, जबकि छोटे कर्मचारियों को सिर्फ एक फोन कॉल के जरिए नौकरी से निकाल दिया गया और महीनों तक उनका वेतन रोक दिया गया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;क्या दोबारा जिंदा होगा यह मृत साम्राज्य, या यह अंत है?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिका की डेलावेयर बैंकरप्सी कोर्ट से लेकर भारत के दिवालियापन अदालतों तक, Byju's आज दर्जनों मुकदमों और कुप्रबंधन के आरोपों से घिरी हुई है। कर्जदार गिद्धों की तरह संपत्तियों पर झपट रहे हैं। इन सबके बीच, सस्पेंस इस बात का है कि दुबई में बैठे बायजू रवींद्रन के करीबी सहयोगियों का दावा है कि वे अब भी भारत लौटने और इस शून्य हो चुके कारोबार को फिर से खड़ा करने की उम्मीद पाले हुए हैं। लेकिन क्या ₹8,245 करोड़ के निगेटिव वैल्यूएशन, जेल की सजा और टूटे हुए भरोसे के मलबे से कोई दोबारा किंग बन सकता है? यह स्टार्टअप इतिहास का सबसे बड़ा और कड़वा सबक बन चुका है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[1 June New Rules: 1 जून से जेब खाली करने आ रहे हैं ये 7 बड़े बदलाव! LPG से ATM तक..लगेगा झटका?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/1-june-new-rules-lpg-cylinder-atm-upi-payments-pan-card-fd-and-railway-big-update/articleshow-co3cpmx</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:54:11 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;June 2026 New Rules: &lt;/strong&gt;आखिर 1 जून से कौन-कौन से बड़े नियम बदलने वाले हैं? क्या LPG सिलेंडर महंगा हो सकता है? ATM से पैसे निकालने पर ज्यादा चार्ज लगेगा? UPI, PAN और रेलवे से जुड़े बदलाव आपकी जेब पर कितना असर डालेंगे?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;New Rules From 1 June 2026: &lt;/strong&gt;जून शुरू होने वाला है और इसके साथ आपकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई नियम बदल सकते हैं। गैस सिलेंडर से लेकर ATM, UPI, बैंक, PAN कार्ड और रेलवे तक कई बड़े अपडेट सामने आ सकते हैं। इन बदलावों का असर सीधे आपकी जेब पर पड़ सकता है। अगर आपने पहले से तैयारी नहीं की, तो अगले महीने ज्यादा खर्च या परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए अभी से जान लीजिए नए महीने की पहली तारीख से क्या-क्या बदलने वाला है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;LPG सिलेंडर के दाम फिर बदल सकते हैं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां गैस सिलेंडर के नए रेट जारी करती हैं। ऐसे में जून की शुरुआत में भी LPG की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले महीने कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ था। 19 किलो वाला सिलेंडर करीब ₹993 महंगा होकर नई दिल्ली में ₹3,071.50 पर पहुंच गया था, जिसका असर होटल और छोटे कारोबारियों पर पड़ा। अब लोगों की नजर घरेलू सिलेंडर के नए रेट्स पर है। अगर आप गैस बुक करवाने वाले हैं, तो नए रेट जरूर चेक कर लें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ATM से पैसे निकालना पड़ सकता है महंगा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कुछ बैंक ATM नियमों में बदलाव कर सकते हैं। फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट, कैश निकालने की फीस और डेली लिमिट में बदलाव होने की संभावना है। अगर आप बार-बार ATM इस्तेमाल करते हैं, तो बैंक का नया नोटिफिकेशन जरूर पढ़ लें। नहीं तो अतिरिक्त चार्ज देना पड़ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;UPI पेमेंट में दिखेगा नया बदलाव&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ऑनलाइन पेमेंट करने वालों के लिए भी नया अपडेट आ सकता है। अब तक जब आप किसी को QR कोड या मोबाइल नंबर से पैसे भेजते थे, तो स्क्रीन पर वह नाम दिखता था जो यूजर ने खुद लिख रखा होता था। लेकिन नए नियम के तहत अब स्क्रीन पर वही नाम दिखाई देगा जो उस व्यक्ति के बैंक अकाउंट में रजिस्टर्ड (Verified) है। इस बदलाव का मकसद फर्जी पेमेंट और धोखाधड़ी को कम करना है। यानी अब गलत नंबर पर पैसा भेजने का खतरा थोड़ा कम हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;PAN कार्ड के नियम बदल सकते हैं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जून में पैन से जुड़े कई नए नियम लागू हो सकते हैं। कुछ जगहों पर PAN की जरूरत कम हो सकती है, जबकि बड़े लेनदेन में नियम और सख्त किए जा सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग ने पैन कार्ड से जुड़े नियमों को काफी हद तक बदल दिया है, जो जून में भी पूरी तरह लागू रहेंगे। अब कुछ छोटे-मोटे ट्रांजैक्शंस के लिए पैन कार्ड की अनिवार्यता को खत्म या आसान किया गया है। जैसे प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में पैन की लिमिट ₹10 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹20 लाख कर दी गई है। लेकिन ध्यान रहे, अगर आप ₹45 लाख से ऊपर की कोई प्रॉपर्टी डील, गिफ्ट डीड या कोई बड़ा एग्रीमेंट कर रहे हैं, तो पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, साल में ₹10 लाख से ज्यादा कैश निकालने पर भी कड़ी नजर रहेगी। अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है, तो अब पुराने फॉर्म-60 की जगह बिल्कुल नया फॉर्म-97 भरना होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;FD और बैंक ब्याज दरों में बदलाव संभव&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कई बैंक जून में FD और सेविंग अकाउंट की ब्याज दरें बदल सकते हैं। इसका असर उन लोगों पर ज्यादा पड़ेगा जिन्होंने बैंक में पैसा जमा किया हुआ है। अगर आप FD करवाने का सोच रहे हैं, तो अलग-अलग बैंकों के नए रेट जरूर तुलना करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रेलवे यात्रियों को हो सकती है परेशानी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जून के महीने में अगर आप कहीं ट्रेन से यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ट्रैक को अपग्रेड करने के लिए एक बड़ा मेगा ब्लॉक लेने जा रहा है। इसके चलते जून में करीब 77 ट्रेनें पूरी तरह रद्द रहेंगी, जबकि कई सुपरफास्ट और दूरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों के रूट बदल दिए गए हैं। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जाने वाली ट्रेनों पर पड़ेगा। इसलिए स्टेशन के लिए निकलने से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या IRCTC ऐप पर अपनी ट्रेन का करंट स्टेटस एक बार जरूर चेक कर लें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोलर पैनल वालों के लिए भी बड़ा अपडेट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप अपने घर की छत पर सरकारी सब्सिडी के साथ सोलर पैनल लगवाने की सोच रहे थे, तो आपके लिए नया अपडेट है। 1 जून से सरकार ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) के नए नियमों को सख्ती से लागू कर रही है। इसके तहत सरकारी स्कीम और सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट्स में सिर्फ उन्हीं सोलर पैनल्स का इस्तेमाल होगा जो सरकार की अप्रूव्ड लिस्ट में शामिल हैं। नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। जानकारों का कहना है कि इससे शुरुआत में सोलर पैनल लगवाना थोड़ा महंगा जरूर हो सकता है, लेकिन आपको मिलने वाले सामान की क्वालिटी बेहद शानदार और टिकाऊ होगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/business-news/1-june-new-rules-lpg-cylinder-atm-upi-payments-pan-card-fd-and-railway-big-update/articleshow-co3cpmx"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे से चमकी इस 'कॉफी कंपनी' की किस्मत, शेयर बाजार भी हैरान! क्या है लिंक?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/coffee-day-shares-surge-20-percent-siddaramaiah-resignation-dk-shivakumar-ccd-link/articleshow-eage7d1</link>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:36:28 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद Coffee Day शेयर 20% क्यों उछले? क्या DK Shivakumar&ndash;CCD फैमिली कनेक्शन ने बाजार में सट्टा बढ़ाया? क्या राजनीतिक बदलाव ही इस अपर सर्किट के पीछे असली कारण है? क्या निवेशकों की उम्मीदें और अफवाहें शेयरों को प्रभावित कर रही हैं?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kssfqhpfrjd357qpkrhvr9pw,imgname-coffee-day-shares-surge-20-percent-siddaramaiah-resignation-dk-shivakumar-ccd-link-1780045563599.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बेंगलुरु / मुंबई। &lt;/strong&gt;भारतीय राजनीति और स्टॉक मार्केट के बीच का रिश्ता हमेशा से ही बेहद संवेदनशील रहा है, लेकिन कर्नाटक के राजनीतिक ड्रामे ने दलाल स्ट्रीट पर एक ऐसी हलचल पैदा कर दी, जिसकी कल्पना शायद ही किसी निवेशक ने की होगी। गुरुवार को जैसे ही कर्नाटक के कद्दावर नेता सिद्धारमैया ने अचानक मुख्यमंत्री पद से अपने इस्तीफे की घोषणा की, वैसे ही शेयर बाजार में 'कॉफी डे एंटरप्राइजेज' (Coffee Day Enterprises) के काउंटरों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कुछ ही मिनटों में, कैफ़े कॉफ़ी डे (CCD) ब्रांड की पैरेंट कंपनी के शेयर 20% का अपर सर्किट छूकर फ्रीज हो गए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजनीति के गलियारों में हो रहे एक इस्तीफे का असर सीधे एक मशहूर कॉफी चेन कंपनी के शेयरों पर इस कदर पड़ेगा, इसने हर किसी को हैरान कर दिया। लेकिन जब इस पूरे घटनाक्रम की परतों को खोला गया, तो इसके पीछे सत्ता की कुर्सी, एक मशहूर पारिवारिक विरासत और एक वैवाहिक गठबंधन का ऐसा ताना-बाना सामने आया, जिसने निवेशकों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;किंगमेकर से 'किंग' बनने की तैयारी: डीके शिवकुमार का बढ़ता कद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद, कर्नाटक की सत्ता की कमान संभालने के लिए जो नाम सबसे आगे चल रहा है, वह है राज्य के उपमुख्यमंत्री और संकटमोचक कहे जाने वाले डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) का। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालेंगे। जैसे ही यह खबर फैली, बाजार के पंडितों ने तुरंत शिवकुमार के राजनीतिक रसूख और उनके पारिवारिक संबंधों का विश्लेषण करना शुरू कर दिया। दरअसल, डीके शिवकुमार सिर्फ एक कद्दावर राजनेता ही नहीं हैं, बल्कि वे देश के सबसे अमीर और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना मात्र से ही उन सभी व्यावसायिक हितों को बल मिलने लगा है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके करीब माने जाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;'CCD' और डीके शिवकुमार: ससुर-दामाद का वह रिश्ता जिसने बदल दी बाजार की चाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आखिर सिद्धारमैया के इस्तीफे और डीके शिवकुमार के संभावित राज्याभिषेक से कॉफी डे के शेयरों में 20% का अपर सर्किट कैसे लग गया? इस सस्पेंस का जवाब दोनों परिवारों के बीच के गहरे वैवाहिक संबंधों में छिपा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;पारिवारिक जुड़ाव की इनसाइड स्टोरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कॉफ़ी डे (CCD) के दिवंगत संस्थापक वीजी सिद्धार्थ (VG Siddhartha) के बेटे, अमर्त्य हेगड़े की शादी किसी और से नहीं, बल्कि डीके शिवकुमार की बेटी ऐश्वर्या से हुई है। इस तरह, डीके शिवकुमार और सीसीडी का मालिकाना हक रखने वाला परिवार आपस में बेहद करीबी रूप से जुड़ा हुआ है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;साल 2019 में वीजी सिद्धार्थ के दुखद निधन के बाद से ही कॉफी डे ग्रुप भारी कर्ज और कानूनी और वित्तीय संकटों से जूझ रहा है। हालांकि कंपनी ने संपत्तियों को बेचकर अपने कर्ज को काफी हद तक कम किया है, लेकिन निवेशकों को हमेशा से एक मजबूत बैकअप की तलाश थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;निवेशकों का दांव: क्या मुख्यमंत्री की कुर्सी चमकाएगी ब्रांड की किस्मत?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शेयर बाजार हमेशा भविष्य की संभावनाओं और कयासों पर चलता है। निवेशकों के बीच यह धारणा बन गई है कि यदि डीके शिवकुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उनके इस सर्वोच्च राजनीतिक रसूख का अप्रत्यक्ष लाभ कॉफी डे एंटरप्राइजेज को मिल सकता है। एक शक्तिशाली मुख्यमंत्री का दामाद होने के नाते अमर्त्य हेगड़े और उनके परिवार की कंपनी को वित्तीय हलकों और कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग में एक नया आत्मविश्वास और मजबूती मिलने की उम्मीद है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसी सस्पेंस और 'पॉवर गेम' के चलते बाजार में भारी वॉल्यूम के साथ खरीदारी हुई और शेयर रॉकेट बन गए। अब देखना यह होगा कि कर्नाटक के राजभवन से शुरू हुआ यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में सीसीडी के बिजनेस को कितनी नई ऊंचाई दे पाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ola-Uber की बढ़ी टेंशन! VinFast Limo Green की एंट्री से बदल जाएगा भारत का इलेक्ट्रिक टैक्सी मार्केट?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/vietnamese-giant-vinfast-to-launch-electric-taxi-service-in-india-challenging-ola-and-uber/articleshow-ec8delw</link>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:10:41 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;वियतनाम की कंपनी विनफास्ट भारत में इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस कब और कहां शुरू करेगी? ग्रीन एसएम का मॉडल ओला और उबर से कैसे अलग होगा? क्या विनफास्ट भारत के EV मार्केट में बड़ा बदलाव ला पाएगी? VinFast Limo Green को टैक्सी फ्लीट के लिए खास क्यों माना जा रहा है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kshx9510vx2w9mk33c0mksr2,imgname-green-sm-vinfast-1779791336480.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वियतनाम&lt;/strong&gt; की कार बनाने वाली कंपनी विनफास्ट अब भारत के कैब सर्विस मार्केट में उतरने की तैयारी में है। विनफास्ट की सब्सिडियरी कंपनी, ग्रीन एसएम (Green SM), भारत में एक इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस शुरू करने की योजना बना रही है। भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, और अब वियतनाम की यह कंपनी भी इस दौड़ में शामिल होने जा रही है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि वह भारत में सिर्फ कारें बेचना नहीं चाहती, बल्कि एक पूरा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम बनाना चाहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पहले फेज में दिल्ली-एनसीआर में शुरुआत&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शुरुआत में ग्रीन एसएम करीब 1,000 इलेक्ट्रिक कैब उतार सकती है। कंपनी का शुरुआती फोकस दिल्ली-एनसीआर पर रहेगा। इसके बाद, कंपनी बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में भी अपनी सर्विस बढ़ा सकती है। कंपनी का लक्ष्य 2026 के आखिर तक करीब 15,000 इलेक्ट्रिक टैक्सियों का नेटवर्क तैयार करना है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत के इलेक्ट्रिक टैक्सी सेक्टर को काफी हद तक बदल सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;लोगों तक सीधी पहुंच बनाने की रणनीति&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे विनफास्ट की गाड़ियां सीधे आम लोगों तक पहुंचेंगी। हजारों लोग रोज इन इलेक्ट्रिक टैक्सियों में सफर करेंगे और कंपनी की टेक्नोलॉजी, कम्फर्ट और फीचर्स को खुद महसूस करेंगे। आमतौर पर नई कार कंपनियों को भारत में भरोसा बनाने में काफी समय लगता है, लेकिन टैक्सी नेटवर्क के जरिए विनफास्ट तेजी से अपनी पहचान बना सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है ग्रीन एसएम?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ग्रीन एसएम का मतलब है ग्रीन एंड स्मार्ट मोबिलिटी (Green and Smart Mobility)। यह वियतनाम के विनग्रुप (Vingroup) इकोसिस्टम का हिस्सा है। यह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। कंपनी का दावा है कि उनकी सर्विस आरामदायक, स्मूथ और पर्यावरण के लिए अच्छी राइड देने पर फोकस करती है। विनफास्ट ब्रांड को विदेशों में पॉपुलर बनाने के लिए भी ग्रीन एसएम का इस्तेमाल किया गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में ग्रीन एसएम का मॉडल ओला-उबर जैसे एग्रीगेटर्स से थोड़ा अलग होगा। यह पूरी तरह से कंपनी के कंट्रोल वाला मॉडल होगा। इसका मतलब है कि गाड़ियों का मेंटेनेंस, ड्राइवर, चार्जिंग सिस्टम और सर्विस की क्वालिटी पर कंपनी का सीधा कंट्रोल होगा। इससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव और गाड़ियों की परफॉर्मेंस एक जैसी मिल सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कंपनी अपनी नई इलेक्ट्रिक MPV जैसी गाड़ी, विनफास्ट लिमो ग्रीन (VinFast Limo Green), को टैक्सी फ्लीट में इस्तेमाल कर सकती है। इस गाड़ी को भारत में टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है। इसे खास तौर पर शहरों में ज्यादा यात्रियों को आरामदायक सफर देने के लिए डिजाइन किया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मुकाबला और बढ़ेगा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ग्रीन एसएम के आने से भारत के इलेक्ट्रिक टैक्सी बाजार में कॉम्पिटिशन और भी कड़ा हो जाएगा। फिलहाल, इस सेक्टर में ओला और उबर जैसी कंपनियां एक्टिव हैं। एक नई विदेशी कंपनी के आने से ग्राहकों को नए ऑप्शन मिलेंगे। अगर विनफास्ट अपनी योजना में सफल होती है, तो भविष्य में भारतीय सड़कों पर उनकी इलेक्ट्रिक टैक्सियां बड़ी संख्या में दिख सकती हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Akshansh Kulshreshtha</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Indian Mango Ban: जापान को 20 साल बाद क्यों खट्टे लगे भारत के मशहूर आम? सामने आई बड़ी वजह]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/japan-bans-indian-mangoes-citing-quality-issues-exporters-allege-monopoly-bid/articleshow-g8kolwn</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:29:01 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;जापान ने भारतीय आमों के इम्पोर्ट पर रोक क्यों लगाई है? वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) क्या होता है और इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है? भारतीय आमों पर इससे पहले जापान ने कब और किस वजह से बैन लगाया था? भारत से आम खरीदने वाले टॉप 5 देशों में कौन-कौन शामिल हैं?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krqgy1fjyzdr7ftzprt393nv,imgname-mangoes-2-1778905974258.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;दु&lt;/strong&gt;नियाभर में अपने स्वाद के लिए मशहूर भारतीय आमों के लिए इस सीजन जापान के दरवाजे बंद हो गए हैं। जापान ने भारत से आने वाले आमों के इम्पोर्ट पर रोक लगा दी है। वजह बताई गई है कि भारत के प्रोसेसिंग सेंटरों में उत्पादन के दौरान कुछ गड़बड़ियां पाई गई हैं। यह बैन करीब दो दशकों के बाद लगा है। 2006 से हर साल भारत से केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी किस्मों के आम जापान भेजे जाते थे। इससे पहले 1986 में फ्रूट फ्लाई (फल मक्खी) की वजह से जापान ने भारतीय आमों पर रोक लगा दी थी, जो 20 साल बाद 2006 में हटी थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हर साल आम का सीजन शुरू होने से पहले जापान अपने इंस्पेक्टर भारत भेजता है। ये लोग यहां 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (VHT) प्रोसेस की जांच करते हैं। यह एक केमिकल-फ्री तरीका है, जिसमें गर्म और नमी वाली हवा से आमों को कीड़ों से मुक्त किया जाता है। इस साल मार्च में जापान के क्वारंटीन अधिकारियों की टीम उत्तर प्रदेश के रहमानपुर आई थी। टीम ने भारतीय प्रोसेसिंग सेंटरों में कीटाणुशोधन के तरीकों में खामियां पाईं और इसी आधार पर आम के इम्पोर्ट पर बैन लगा दिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जापान की 'योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन स्टेशन' ने साफ कर दिया है कि 25 मार्च के बाद जारी इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट वाले आम के कंसाइनमेंट अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। संस्था का कहना है कि ऑपरेशन के स्टैंडर्ड सुधरने के बाद ही आम लिए जाएंगे। उत्तर प्रदेश के एक एक्सपोर्टर अकरम बेग ने इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, &quot;भारतीय आमों की क्वालिटी बेहतर करने के लिए एक पूरा नया प्रोसेसिंग सिस्टम है। अगर सिर्फ जापान में बने सिस्टम को ही मंजूरी दी जाएगी, तो यह मोनोपॉली (एकाधिकार) और डिप्लोमेसी का मामला लगता है, न कि सिर्फ तकनीकी खामियों का।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;नाराज हैं एक्सपोर्टर्स&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जापान अपने कड़े क्वालिटी नियमों के लिए जाना जाता है। इसी वजह से भारत सरकार ने 2007 में तिरुपति में पहला VHT प्लांट शुरू किया था। तब से भारत बहुत सावधानी से प्रोसेस करने के बाद ही आम एक्सपोर्ट कर रहा है। हालांकि जापान कोई बहुत बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन यह बैन ऐसे समय में लगा है जब घरेलू बाजार में भी हालात ठीक नहीं हैं। इससे एक्सपोर्टर्स पर बोझ बढ़ गया है। बेग ने नाराजगी जताते हुए कहा, &quot;यह कैसे हो सकता है कि सभी सेंटरों के आम रिजेक्ट कर दिए जाएं? ऐसा लगता है कि इंस्पेक्शन टीम इन सेंटरों को किसी भी तरह फेल करने के इरादे से ही आई थी।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;आम खरीदने वाले टॉप 5 देश&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;पिछले साल भारत ने जापान को करीब 20 लाख डॉलर के आम (खासकर गुजरात का केसर) एक्सपोर्ट किए थे। भारत से आम खरीदने वाले टॉप 5 देश हैं&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अमेरिका (US)यूएई (UAE)यूनाइटेड किंगडम (UK)नीदरलैंड्ससऊदी अरब&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारत सरकार ने इस बैन पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, इंडियन मैंगो ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एस। इंसराम अली ने बताया कि केंद्र सरकार जापान सरकार से बातचीत कर रही है और जल्द ही समाधान निकलने की उम्मीद है। लेकिन जानकारों का मानना है कि सीजन लगभग खत्म होने को है, इसलिए इस साल बैन हटने की संभावना कम है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/business-news/japan-bans-indian-mangoes-citing-quality-issues-exporters-allege-monopoly-bid/articleshow-g8kolwn"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[EMI भरते-भरते हैं परेशान? बैंक खुद कम कर सकता है बोझ, बस करना होगा ये काम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/emi-reduce-tips-balance-transfer-loan-restructuring-guide/articleshow-ibpughl</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:41:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Monthly EMI Saving Tips: &lt;/strong&gt;हर महीने किस्त भरते-भरते जेब खाली हो जाती है? क्या बैंक आपकी EMI कम कर सकता है? कैसे आप हर महीने बैंक की मदद से अपनी ईएमआई का बोझ कम कर सकते हैं? इसके लिए क्या-क्या करना होगा?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kspxnhkammrwj8xdaqr92t72,imgname-emi-reduce-tips-1779959514730.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Loan EMI Reduce Tips:&lt;/strong&gt; हर महीने सैलरी आते ही सबसे पहले ईएमआई कट जाती है&hellip; फिर किराया, बिजली बिल, बच्चों की फीस और बाकी खर्च मैनेज करना मुश्किल लगने लगता है। महीने के आखिर तक जेब खाली हो जाती है। अगर आप भी होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI भरते-भरते परेशान हो चुके हैं, तो ये खबर आपके बहुत काम की है। बहुत कम लोगों को पता होता है कि कई बार बैंक खुद आपकी EMI का बोझ कम कर सकता है। इसके लिए किसी जुगाड़ या पहचान की जरूरत नहीं पड़ती, बस सही समय पर सही तरीका अपनाना होता है। आज हम आपको ऐसे आसान तरीके बता रहे हैं, जिनसे आपकी हर महीने की EMI कम हो सकती है और बजट थोड़ा राहत में आ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;EMI कम करवाने का सबसे आसान तरीका क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आपकी सैलरी पहले जैसी नहीं रही, खर्च बढ़ गए हैं या कई लोन एक साथ चल रहे हैं, तो आप बैंक से लोन रीस्ट्रक्चरिंग (Loan Restructuring) या EMI रिवीजन की बात कर सकते हैं। मतलब बैंक आपके लोन का टाइम बढ़ा सकता है, जिससे हर महीने कटने वाली EMI कम हो जाती है। जैसे अगर आपकी EMI ₹18,000 जा रही है, तो लोन टेन्योर बढ़ने के बाद यह घटकर कम हो सकती है, जिससे हर महीने कुछ हजार रुपए की राहत मिल सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बैंक कब EMI कम कर सकते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप कुछ तरह की परेशानी से गुजर रहे हैं, तो बैंक आपकी बात सुन सकता है। जैसे आपकी सैलरी कम हो गई हो, नौकरी बदल गई हो, बिजनेस में नुकसान हुआ हो, एक से ज्यादा लोन चल रहे हों, मेडिकल या फैमिली खर्च अचानक बढ़ गए हों। कई बैंक ऐसे मामलों में EMI कम करने का ऑप्शन देते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बैंक से क्या बोलना होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्यादातर लोग यहीं गलती कर देते हैं। वे EMI लेट होने देते हैं, फिर पेनाल्टी लगती रहती है। ऐसा करने के बजाय सीधे बैंक से बात करें और कहें कि EMI कम करवानी है, लोन अवधि बढ़ानी है, ब्याज रेट कम हो सकता है क्या या बैलेंस ट्रांसफर (Balance Transfer) का ऑप्शन चाहिए अगर आपका रिपेमेंट रिकॉर्ड अच्छा है, तो बैंक जल्दी मदद कर सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बैलेंस ट्रांसफर क्या होता है और कैसे राहत दिला सकता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आपका पुराना लोन ज्यादा ब्याज पर चल रहा है, तो आप उसे दूसरे बैंक में ट्रांसफर भी कर सकते हैं। कई बैंक नए ग्राहकों को कम ब्याज पर लोन शिफ्ट करने का ऑफर देते हैं। इससे EMI कम हो सकती है, ब्याज का बोझ घट सकता है और हर महीने कैश बच सकता है लेकिन ट्रांसफर से पहले प्रोसेसिंग फीस और बाकी चार्ज जरूर चेक करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;EMI वालों की 5 सबसे बड़ी गलतियां&lt;/h2&gt;&lt;ol&gt; &lt;li&gt;सिर्फ मिनिमम पैसा बचाना या मिनिमम अमाउंट पे करना।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;क्रेडिट कार्ड से EMI भरना&lt;/li&gt; &lt;li&gt;EMI डेट भूल जाना, जिससे लेट फीस लगती है और सिबिल स्कोर भी खराब हो सकता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पुराना लोन खत्म होने से पहले नए लोन लेते जाना।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;सबसे बड़ी गलती बैंक से बात न करनी होती है, क्योंकि कई बार बैंक खुद समाधान दे देता है।&lt;/li&gt;&lt;/ol&gt;&lt;h2&gt;EMI कम करने से पहले ये बात जरूर समझ लें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;EMI कम होने का मतलब ये नहीं कि कुल पैसा भी कम लगेगा। अगर बैंक लोन की अवधि बढ़ाता है, तो हर महीने राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लंबे समय में ब्याज थोड़ा ज्यादा देना पड़ सकता है। इसलिए फैसला सोच-समझकर लें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Income Tax Alert: बिना इन डॉक्यूमेंट्स भूलकर भी मत छूना ITR फॉर्म, वरना अटक जाएगा रिफंड]]></title>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 13:18:18 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ITR Filing 2026 Documents Checklist: &lt;/strong&gt;क्या आप भी बिना तैयारी के ITR भरने की गलती कर रहे हैं? क्या आपको पता है कि जरूरी दस्तावेज न होने पर आपका टैक्स रिफंड लंबे समय के लिए अटक सकता है? कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स इनकम टैक्स दाखिल करते समय आपके पास होने चाहिए?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ITR Filing Required Documents: &lt;/strong&gt;इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का सीजन चल रहा है और हर कोई जल्द से जल्द अपना टैक्स फाइल करने में लगा है। लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में कहीं आप बड़ी मुसीबत में न पड़ जाएं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने बिना पूरी तैयारी के आधा-अधूरा फॉर्म भरा, तो टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस सीधे आपके घर आ सकता है और आपका टैक्स रिफंड भी लंबे समय के लिए अटक सकता है. चाहे आप नौकरीपेशा (Salaried) हों, फ्रीलांसर हों, शेयर बाजार में पैसा लगाते हों या खुद का छोटा-मोटा बिजनेस चलाते हों, ITR फाइल करने से पहले कुछ जरूरी कागजात अपनी टेबल पर रखना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं वो जरूरी डॉक्यूमेंट्स, जो इस बार आपका रिफंड फटाफट आपके खाते में ट्रांसफर करवाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;1. पहचान और बेसिक डिटेल्स&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पैन कार्ड और आधार कार्ड&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;टैक्स फाइलिंग की शुरुआत ही दो सबसे जरूरी कार्ड्स से होती है। सबसे पहले यह चेक कर लें कि आपका पैन (PAN Card) और आधार (Aadhaar Card) आपस में लिंक हैं या नहीं। अगर ये लिंक नहीं हैं, तो रिटर्न दाखिल करने में बड़ी समस्या आएगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नाम और नंबर की जांच&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह जरूर देख लें कि आपके पैन कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर पर आपका नाम और जन्मतिथि (DOB) बिल्कुल एक जैसी हो, स्पेलिंग में कोई अंतर न हो।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2. सैलरीड के लिए डॉक्यूमेंट्स&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;फॉर्म 16 (Form 16)&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगर आप कहीं जॉब करते हैं, तो आपको दो कागजातों की सबसे ज्यादा जरूरत होगी। पहला फॉर्म 16 है, जो आपको आपकी कंपनी (इम्पलायर) से मिलेगा, जिसमें आपकी कुल सैलरी और कटे हुए टैक्स (TDS) का पूरा ब्रेकअप होता है। अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों से फॉर्म 16 लेना न भूलें। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि जब तक कंपनी से फॉर्म 16 न मिल जाए, तब तक ITR न भरें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;महीने की सैलरी स्लिप (Salary Slips)&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;फॉर्म 16 मिलने के बाद अपनी हर महीने की सैलरी स्लिप से उसका मिलान जरूर करें। इससे आपको बोनस, एलाउंस और पीएफ (PF) कटौती का सही-सही अंदाजा मिल जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;3. आपकी हर कमाई पर नजर रखने वाले डॉक्यूमेंट्स&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;AIS और Form 26AS&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ये दोनों डॉक्यूमेंट्स आपकी वित्तीय कुंडली हैं। आपके सेविंग्स अकाउंट पर कितना ब्याज मिला, कंपनियों से कितना डिविडेंड आया, आपने कहां-कहां शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदे-बेचे, वह सब इसमें पहले से दर्ज होता है। अगर आपकी असली कमाई और AIS (Annual Information Statement) के डेटा में थोड़ा सा भी मिसमैच (अंतर) हुआ, तो तुरंत स्क्रूटनी का नोटिस आ जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;4. बैंक खाते और कमाई के अन्य सर्टिफिकेट्स&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सभी बैंक अकाउंट्स के स्टेटमेंट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आपके जितने भी एक्टिव बैंक खाते हैं, उन सभी का पासबुक या स्टेटमेंट निकाल कर रख लें। घर का किराया आ रहा हो या कोई अन्य बिजनेस रसीद, सबका हिसाब जरूरी है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ब्याज का सर्टिफिकेट (Interest Certificate)&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बैंक या पोस्ट ऑफिस में जो आपकी एफडी (FD) या आरडी (RD) चल रही है, उस पर मिलने वाले ब्याज का सर्टिफिकेट जरूर ले लें ताकि सही टैक्स का पता चल सके।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कमाई का लेखा-जोखा (Capital Gains Statement)&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगर आप शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी के इन्वेस्टर हैं, तो अपने ब्रोकर या म्यूचुअल फंड हाउस से 'कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट' डाउनलोड कर लें। इंट्राडे और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&amp;amp;O) वाले ट्रेडर्स को अपना प्रॉफिट एंड लॉस (P&amp;amp;L) स्टेटमेंट भी पास रखना होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;5. टैक्स छूट (Deductions) दिलाने वाले रसीद और सबूत&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इन्वेस्टमेंट प्रूफ (80C): &lt;/strong&gt;पीपीएफ (PPF), एलआईसी (LIC) की प्रीमियम रसीद, सुकन्या समृद्धि योजना, टैक्स-सेविंग एफडी या बच्चों की ट्यूशन फीस की रसीदें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;हेल्थ इंश्योरेंस (80D): &lt;/strong&gt;खुद के लिए या पैरेंट्स के लिए खरीदी गई मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम रसीद।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;होम लोन स्टेटमेंट: &lt;/strong&gt;अगर होम लोन चल रहा है, तो बैंक से लोन स्टेटमेंट (ब्याज और मूलधन का ब्रेकअप) ले लें ताकि सेक्शन 24(b) और 80C के तहत छूट मिल सके।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मकान किराया (HRA): &lt;/strong&gt;एचआरए क्लेम करने के लिए मकान मालिक का पैन कार्ड (यदि किराया लिमिट से ज्यादा है), रेंट एग्रीमेंट और हर महीने की रेंट रसीद पास रखें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डोनेशन की रसीद (80G): &lt;/strong&gt;अगर किसी मान्यता प्राप्त संस्था या चैरिटी को दान दिया है, तो उसकी रसीद संभाल कर रखें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Train Side Lower Seat Booking Tricks: ट्रेन में साइड लोअर सीट चाहिए? ये 4 ट्रिक्स अपनाइए]]></title>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 10:04:12 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;How to Get Side Lower Berth in Train: &lt;/strong&gt;ट्रेन में साइड लोअर सीट आखिर कैसे मिलती है? क्या इसके लिए कुछ अलग से करना पड़ता है? टिकट बुक करते समय अपनी पसंदीदा सीट पाने के लिए आपके पास IRCTC ऐप में क्या-क्या ऑप्शंस मौजूद हैं?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Train Ticket Seat Selection Tips: &lt;/strong&gt;ट्रेन में सफर करने का असली मजा तब आता है, जब खिड़की के पास वाली सीट मिल जाए। अगर वह सीट साइड लोअर (Side Lower) हो, तो सफर का आनंद दोगुना हो जाता है। दिन में आराम से बैठकर बाहर का नजारा देखिए और रात में बिना किसी डिस्टर्बेंस के सो जाइए। ज्यादातर लोगों को लगता है कि साइड लोअर सीट मिलना सिर्फ किस्मत का खेल है, लेकिन ऐसा नहीं है! IRCTC ऐप और वेबसाइट पर कुछ ऐसे स्मार्ट तरीके और बुकिंग नियम हैं, जिनका इस्तेमाल अगर सही से किया जाए, तो साइड लोअर सीट मिलने के चांस काफी बढ़ जाते हैं। चलिए, आज सिंपल तरह से समझते हैं कि आप अपनी अगली यात्रा में यह पसंदीदा सीट कैसे पा सकते हैं...&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;'Reservation Choice' फीचर का सही इस्तेमाल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब आप IRCTC ऐप या वेबसाइट पर पैसेंजर डिटेल्स भरते हैं, तो नीचे स्क्रॉल करने पर आपको 'Other Preferences' या 'Reservation Choice' का एक ऑप्शन मिलता है। लोग अक्सर इसे बिना देखे आगे बढ़ जाते हैं, जबकि यही आपके लिए सबसे बड़ा मौका होता है। आप टिकट बुक करते समय 'Berth Preference' में Side Lower (SL) चुनें। इसके ठीक नीचे एक ड्रॉपडाउन मेन्यू होता है, जिसमें लिखा होता है- 'Book only if requested berth is allotted' यानी टिकट तभी बुक हो जब मांगी गई सीट मिले। अगर आप इसे सेलेक्ट कर लेते हैं, तो सिस्टम पूरी कोशिश करेगा कि आपको साइड लोअर ही मिले। अगर वह उपलब्ध नहीं होगी, तो आपका टिकट बुक नहीं होगा और आपके पैसे अटकने से बच जाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कोटा नियमों की मदद से&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, लोअर और साइड लोअर सीटें कुछ खास लोगों के लिए रिजर्व (आरक्षित) रखी जाती हैं। ये कोटा (Quota) 60 साल से ऊपर के पुरुष, 45 साल से ऊपर की महिलाएं और गर्भवती (Pregnant) महिलाओं के लिए होता है। अगर आप अपने माता-पिता या दादा-दादी के लिए टिकट बुक कर रहे हैं, तो हमेशा 'General Quota' की जगह 'Ladies' या 'Senior Citizen' कोटा चुनें। इस कोटे में बुकिंग करने पर सिस्टम सबसे पहले साइड लोअर और लोअर सीटें ही अलॉट करता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;टाइमिंग का भी फर्क पड़ता है&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रेलवे का सीट अलॉट करने का सॉफ्टवेयर (Algorithim) एक खास तरीके से काम करता है। वह ट्रेन का संतुलन बनाए रखने के लिए सबसे पहले कोच के बीच की सीटों को भरता है और लोअर सीटों को प्राथमिकता देता है। अगर आप सफर की तारीख से 2-3 महीने पहले (Advance Booking) टिकट बुक करते हैं, तो ट्रेन खाली होने के कारण आपके द्वारा चुनी गई 'Side Lower' प्रेफरेंस को सिस्टम तुरंत स्वीकार कर लेता है। जैसे-जैसे सीटें भरती हैं, चॉइस मिलने की उम्मीद कम हो जाती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चार्ट बनने के बाद खाली सीटों का फायदा उठाएं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कई बार ऐसा होता है कि सीनियर सिटीजन कोटे की या वीआईपी कोटे की साइड लोअर सीटें आखिरी समय तक खाली रह जाती हैं। ट्रेन छूटने से पहले जब पहला चार्ट (First Chart) बनता है, तब IRCTC ऐप पर 'Train Berth Availability' या 'Charts/Vacancy' वाले ऑप्शन पर जाएं। यहां आपको दिख जाएगा कि किस कोच में कौन सी साइड लोअर सीट खाली रह गई है। आप उसे Current Booking के जरिए तुरंत अपने नाम पर बुक कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर:&lt;/strong&gt; इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य नियमों और IRCTC के मौजूदा फीचर्स पर आधारित है। ट्रेन में सीटों का अलॉटमेंट पूरी तरह से भारतीय रेलवे के सॉफ्टवेयर (एल्गोरिदम) और सीटों की उपलब्धता (Availability) पर निर्भर करता है। इन ट्रिक्स को अपनाने से साइड लोअर सीट मिलने की संभावना (Probability) को केवल बढ़ाया जा सकता है, यह सीट मिलने की 100% कानूनी गारंटी नहीं है। यात्रा से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर नज़र बनाए रखें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Exclusive: CMOs की बंद कमरे वाली मीटिंग्स में क्या होता है? पहली बार सामने आए मार्केटिंग दुनिया के ‘कड़वे सच’]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/why-todays-cmos-are-under-more-pressure-than-ever-founder-vivek-sheth-reveals/articleshow-res13ex</link>
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            <pubDate>Wed, 27 May 2026 17:44:23 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या AI आने वाले समय में CMOs और मार्केटिंग टीमों की भूमिका पूरी तरह बदल देगा? क्या आज की मार्केटिंग इंडस्ट्री शॉर्ट-टर्म ROI के दबाव में लॉन्ग-टर्म ब्रांड वैल्यू खो रही है? क्या बड़े कॉर्पोरेट इवेंट्स और कॉन्फ्रेंस में होने वाली मार्केटिंग बातचीत सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;हर साल, मार्केटिंग इंडस्ट्री उम्मीदों और पॉज़िटिविटी से भरी-पूरी दिखती है। लेकिन जब कोई स्टेज, कोई पैनल या जज करने वाला कोई नहीं होता, तब असल में CMOs (चीफ मार्केटिंग ऑफिसर्स) क्या बात करते हैं? 'द CMO असेंबली' एक ऐसा ही एक्सक्लूसिव प्लेटफॉर्म है, जिसे खासतौर पर CMOs और कंज्यूमर-फेसिंग ब्रांड्स के सीनियर मार्केटिंग लीडर्स के लिए बनाया गया है। यह पारंपरिक पब्लिक मंचों और चिकनी-चुपड़ी बातों से हटकर है। यह प्लेटफॉर्म लीडर्स को एक भरोसेमंद माहौल देता है, जहां वे मार्केटिंग की असल मुश्किलों, सीखे हुए सबक और नए इनोवेशन पर खुलकर और ईमानदारी से बात कर सकते हैं। हाल ही में 'द CMO असेंबली' ने 'द इंडिया CMO इंडेक्स 2026' जारी किया है, जिसमें 11 इंडस्ट्रीज़ के 121 मार्केटिंग लीडर्स से गुमनाम तरीके से उनकी बेबाक राय ली गई है। यह इंडेक्स भारतीय मार्केटिंग लीडरशिप के सामने मौजूद अनोखे विरोधाभासों को दिखाता है&mdash;जिसमें शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस के दबाव और लॉन्ग-टर्म ब्रांड वैल्यू बनाने के बीच की खींचतान भी शामिल है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पेश हैं 'द CMO असेंबली' के फाउंडर विवेक शेठ के साथ हमारे एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के कुछ अंश, जिसमें उन्होंने अपनी सोच, इस ऑर्गनाइजेशन को बनाने की वजह और बहुत कुछ बताया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1. आपको भारत के मार्केटिंग इकोसिस्टम में ऐसी क्या कमी दिखी कि 'द CMO असेंबली' बनाने की ज़रूरत महसूस हुई?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: मुझे लगा कि भारत में CMOs के लिए ईमानदारी से बात करने की जगहों की भारी कमी है। यहां कॉन्फ्रेंस, पैनल, अवॉर्ड्स और नेटवर्किंग ग्रुप तो बहुत हैं, लेकिन ऐसी जगहें बहुत कम हैं जहां CMOs बिना किसी दिखावे के सच बोल सकें। ज़्यादातर बातचीत या तो बहुत बनावटी होती है, या PR से प्रभावित होती है, या फिर लेन-देन वाली होती है। सच्चाई यह है कि आज के CMOs बहुत सारी मुश्किलों से जूझ रहे हैं&mdash;बोर्ड का दबाव, AI से हो रहे बदलाव, लोगों का घटता अटेंशन स्पैन, परफॉर्मेंस का प्रेशर, ऑफिस की पॉलिटिक्स&mdash;लेकिन कोई ऐसा माहौल नहीं बना रहा था जहां वे इन सब पर अपने जैसे दूसरे लोगों से खुलकर बात कर सकें। 'द CMO असेंबली' इसी कमी को पूरा करने के लिए बनाई गई थी। यह कोई और इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद कम्युनिटी है, जहां एक जैसे दबाव झेल रहे लोग आपस में सच्ची बातें कर सकें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;2. आपने कई बार कहा है कि ज़्यादातर मार्केटिंग कम्युनिटीज़ &quot;CMOs से बात करती हैं&quot; न कि &quot;CMOs के साथ&quot;। मौजूदा मॉडल में असल में क्या गड़बड़ है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: आज के ज़्यादातर इकोसिस्टम विज़िबिलिटी (दिखने) के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, वल्नरेबिलिटी (अपनी कमज़ोरी बताने) के लिए नहीं। फॉर्मेट आमतौर पर एक जैसा होता है: एक स्टेज, एक मॉडरेटर, घिसे-पिटे सवाल, रटे-रटाए जवाब, स्पॉन्सर की बातें, और हर कोई ऐसे दिखाता है जैसे उसे सब कुछ पता है। लेकिन लीडरशिप की असली बातचीत ऐसे नहीं होती। CMOs को और ज़्यादा किताबी ज्ञान नहीं चाहिए। उन्हें अपने लेवल के लोगों से ईमानदारी भरी सलाह चाहिए। उन्हें ऐसी जगह चाहिए जहां वे कह सकें: 'यह कैंपेन फेल हो गया। मैं लॉन्ग-टर्म ब्रांड ROI साबित करने में संघर्ष कर रहा हूं। AI मेरी कंपनी को इतनी तेज़ी से बदल रहा है कि मैं उसके साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा। मुझे नहीं पता कि तीन साल बाद मार्केटिंग कैसी दिखेगी।' मौजूदा मॉडल निश्चितता को इनाम देता है। लेकिन बेहतरीन बातचीत अक्सर अनिश्चितता से ही शुरू होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;3. क्या कोई खास पल या बातचीत थी जिससे इस प्लेटफॉर्म का आइडिया आया?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: हां। मुझे याद है कि मैं इंडस्ट्री इवेंट्स के बाद CMOs से बात कर रहा था&mdash;स्टेज पर नहीं, बल्कि बाद में कॉफी या डिनर पर। उनकी प्राइवेट बातें पब्लिक में कही गई बातों से बिल्कुल अलग थीं। जो लोग स्टेज पर बहुत कॉन्फिडेंट दिख रहे थे, वे निजी तौर पर मानते थे कि वे बहुत ज़्यादा दबाव में हैं, मार्केटिंग के पुराने तरीकों पर सवाल उठा रहे हैं, बोर्ड की उम्मीदों से जूझ रहे हैं, या इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि AI इंडस्ट्री को कहां ले जाएगा। यह अंतर मेरे दिमाग में बैठ गया। मैंने महसूस किया कि भारत में मार्केटिंग की सबसे कीमती बातचीत अनौपचारिक रूप से, बंद दरवाज़ों के पीछे हो रही है। 'द CMO असेंबली' इसी सोच से पैदा हुई कि शायद उन बातों को एक असली घर मिलना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;4. आज CMOs निजी तौर पर किन बड़ी चिंताओं पर बात कर रहे हैं जो पब्लिक को नहीं दिखतीं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: तीन बातें बार-बार सामने आती हैं। पहली, रेलेवेंस (प्रासंगिकता)। कई मार्केटर्स सोच रहे हैं कि क्या ब्रांड बनाने के पारंपरिक तरीके AI-फर्स्ट और ध्यान भटकाने वाली इस दुनिया में अब भी काम करते हैं। दूसरी, मेज़रमेंट (माप)। खर्च किए गए हर रुपये का हिसाब देने का बहुत दबाव है, लेकिन हर कीमती चीज़ को तुरंत मापा नहीं जा सकता। CMOs शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस की उम्मीदों और लॉन्ग-टर्म ब्रांड बनाने के बीच फंसे हुए हैं। तीसरी, आइडेंटिटी (पहचान)। AI लीडर्स को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि भविष्य में मार्केटिंग टीमों को कैसा दिखना चाहिए। कई लोग पूछ रहे हैं: मार्केटिंग में अब इंसानों का यूनिक काम क्या बचेगा?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;5. क्या आज के CMOs पर मार्केटिंग खर्च और ROI को सही ठहराने का दबाव पहले से कहीं ज़्यादा है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: बिल्कुल। पहले मार्केटिंग के पास यह सुविधा थी कि नतीजों का असर बाद में दिखता था। आज, लीडरशिप टीमें नतीजों, एफिशिएंसी और बिजनेस पर असर के बारे में तुरंत स्पष्टता चाहती हैं। चुनौती यह है कि मार्केटिंग दो टाइमलाइन पर काम करती है: शॉर्ट-टर्म में रेवेन्यू पर असर और लॉन्ग-टर्म में ब्रांड की याद। खतरा तब होता है जब कंपनियां सिर्फ उन चीज़ों पर फोकस करती हैं जिन्हें शॉर्ट-टर्म में मापा जा सकता है। हो सकता है कि आप तिमाही नतीजों में सुधार कर लें, लेकिन धीरे-धीरे ब्रांड की पहचान को कमज़ोर करते जाएं। आज के CMOs से सिर्फ ग्रोथ लाने की उम्मीद नहीं की जाती, बल्कि उनसे हर फैसले को रियल टाइम में सही ठहराने की भी उम्मीद की जाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;6. क्या AI ने मार्केटिंग लीडर्स के बीच होने वाली बातचीत के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: पूरी तरह से। एक साल पहले, AI पर बातचीत ज़्यादातर जिज्ञासा से भरी होती थी। आज, यह अस्तित्व का सवाल बन गई है। बातचीत का टोन &quot;AI हमारी क्या मदद कर सकता है?&quot; से बदलकर &quot;अगर AI ने सब कुछ बदल दिया तो मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशंस का क्या होगा?&quot; हो गया है। CMOs अब छोटी टीमों, AI से बनी क्रिएटिविटी, सिंथेटिक कंज्यूमर्स, बड़े पैमाने पर पर्सनलाइजेशन और उपभोक्ता व्यवहार कितनी जल्दी बदल सकता है, इस पर चर्चा कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि सबसे स्मार्ट लीडर्स AI को सिर्फ एक प्रोडक्टिविटी टूल नहीं मान रहे हैं। वे इसे एक ऐसे बुनियादी बदलाव के रूप में देख रहे हैं जो ब्रांड बनाने के तरीके को ही बदल देगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;7. इन बंद कमरों की बैठकों में मार्केटर्स आखिरकार कौन सा एक कड़वा सच मान रहे हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: यह कि अब किसी को भी पूरी तरह से नहीं पता कि मार्केटिंग का भविष्य कैसा दिखेगा। सालों तक, इस इंडस्ट्री ने आत्मविश्वास और निश्चितता को इनाम दिया। लेकिन निजी तौर पर, कई लीडर्स मान रहे हैं कि पुराने तरीके अब कम भरोसेमंद होते जा रहे हैं। ग्राहकों का ध्यान बंटा हुआ है। ब्रांड के प्रति वफादारी कमज़ोर हो गई है। एल्गोरिदम तय करते हैं कि क्या दिखेगा। AI क्रिएटिविटी को नया आकार दे रहा है। और सिर्फ परफॉर्मेंस मार्केटिंग से मज़बूत ब्रांड नहीं बनाए जा सकते। कड़वा सच यह है कि सबसे अनुभवी मार्केटर्स भी अब रियल टाइम में फिर से सीख रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;8. एक-दूसरे से मुकाबला करने वाले CMOs के बीच भरोसा बनाना मुश्किल लगता है। आप ऐसा माहौल कैसे बनाते हैं जहां लोग वाकई खुलकर बात करें?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: भरोसा इरादे से आता है। जैसे ही लोगों को लगता है कि कोई प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से दिखावे, कुछ बेचने या फायदा उठाने के लिए है, ईमानदारी गायब हो जाती है। 'द CMO असेंबली' में, हम ऐसे माहौल बनाने पर बहुत ध्यान देते हैं जहां बेहतर दिखने का कोई दबाव न हो। छोटे ग्रुप्स, नॉन-रिकॉर्डेड सेशन और भी बहुत कुछ। हैरानी की बात है कि जब लोगों को यह एहसास होता है कि उन्हें किसी को इम्प्रेस करने की ज़रूरत नहीं है, तो बातचीत कहीं ज़्यादा कीमती हो जाती है। सीनियर लीडर्स को असल में और ज़्यादा नेटवर्किंग नहीं चाहिए। उन्हें कम, लेकिन ज़्यादा सार्थक बातचीत चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;9. 'द CMO असेंबली' लॉन्च करने के बाद आपको सबसे ज़्यादा किस बात ने हैरान किया?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: इस बात ने कि CMOs ईमानदारी से बात करने के लिए कितने बेताब थे। मुझे दिलचस्पी की उम्मीद थी। लेकिन मुझे CMOs से इतनी इमोशनल ओपननेस देखने की उम्मीद नहीं थी। बहुत से CMOs दबाव को बहुत निजी तौर पर झेलते हैं। बाहर से, मार्केटिंग लीडरशिप ग्लैमरस दिखती है। अंदर से, यह अकेलापन भरा हो सकता है। मुझे सबसे ज़्यादा इस बात ने हैरान किया कि जैसे ही लीडर्स को एहसास हुआ कि यह एक ऐसी जगह है जहां उन्हें 'सब कुछ कंट्रोल में है' वाली इमेज बनाए रखने की ज़रूरत नहीं है, उन्होंने कितनी जल्दी रिस्पॉन्स दिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;10. क्या सीनियर लीडर्स को एक नए, लीक से हटकर बने प्लेटफॉर्म पर भरोसा करने के लिए मनाना मुश्किल था?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: शुरुआत में, हां। क्योंकि इस क्षेत्र में भरोसा धीरे-धीरे कमाया जाता है। सीनियर लीडर्स ने बहुत सी कम्युनिटीज़ को लेन-देन वाला और बहुत ज़्यादा कमर्शियल होते देखा है। हमने कभी भी आक्रामक रूप से आगे बढ़ने या दिखावा करने की कोशिश नहीं की। हमने स्केल के बजाय गहराई पर और विज़िबिलिटी के बजाय बातचीत पर ध्यान केंद्रित किया। समय के साथ, भरोसा बढ़ता है। जब एक सम्मानित लीडर को एक सार्थक अनुभव मिलता है, तो वे दूसरों को भी लाते हैं। यह ऑर्गेनिक तरीके से भरोसा बनाना पारंपरिक ग्रोथ की तरकीबों से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;11. अब से पांच साल बाद&mdash;आप 'द CMO असेंबली' को क्या बनते देखना चाहते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: एक नेटवर्क, एक आंदोलन, एक थिंक टैंक, या कुछ बड़ा? मैं चाहता हूं कि यह इस क्षेत्र में CMOs के लिए सबसे भरोसेमंद इकोसिस्टम में से एक बन जाए&mdash;इसलिए नहीं कि यह सबसे बड़ा है, बल्कि इसलिए कि यह सबसे ईमानदार है। एक ऐसी जगह जहां इंडस्ट्री की असली सोच उभरती है, सार्थक रिसर्च होती है, भविष्य के मार्केटिंग लीडर्स तैयार होते हैं, और मुश्किल बातचीत मुख्यधारा में आने से पहले होती है। मुझे लगता है कि भविष्य उन कम्युनिटीज़ का है जो सिर्फ विज़िबिलिटी नहीं, बल्कि क्लैरिटी पैदा करती हैं। हम 'द मार्केटिंग असेंबली' नाम से भी कुछ चलाते हैं&mdash;जो पूरे मार्केटिंग इकोसिस्टम के लिए खुला है&mdash;उसका इरादा भी यही है&mdash;लोग एक-दूसरे को आगे बढ़ने में मदद करें!&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;12. अगर आप भारत के हर CMO को निजी तौर पर एक बेहद ईमानदार सवाल का जवाब देने के लिए मजबूर कर सकें, तो वह सवाल क्या होगा?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जवाब&lt;/strong&gt;: मैं पूछूंगा: अगर कोई नहीं देख रहा होता, तो आप कल से मार्केटिंग में क्या करना बंद कर देंगे? क्योंकि यह सवाल सब कुछ उजागर कर देता है: वे मेट्रिक्स जिन पर हम मन-ही-मन विश्वास नहीं करते, वे कैंपेन जो हम दिखावे के लिए चलाते हैं, वे मीटिंग्स जिनसे कोई फायदा नहीं होता, वे रिपोर्ट्स जिन्हें कोई नहीं पढ़ता, और इंडस्ट्री की वे आदतें जिन्हें हम सिर्फ इसलिए जारी रखते हैं क्योंकि बाकी सब भी ऐसा ही कर रहे हैं। यहीं से मार्केटिंग पर ईमानदार बातचीत शुरू होती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/business-news/why-todays-cmos-are-under-more-pressure-than-ever-founder-vivek-sheth-reveals/articleshow-res13ex"/>
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            <title><![CDATA[अब टैंक से बाहर निकले बिना दुश्मनों पर हमला! भारतीय सेना को मिलेगा AI वाला घातक वेपन सिस्टम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/zen-technologies-wins-85-crore-indian-army-contract-for-remote-weapon-stations/articleshow-rwv6pdi</link>
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            <pubDate>Wed, 27 May 2026 16:40:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Zen Technologies Limited ने भारतीय सेना के लिए किस टेंडर में सबसे कम बोली (L-1) लगाई है और इसकी कुल कीमत कितनी है? आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स (ARVs) पर रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम्स (RCWS) लगाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है? RCWS और Phanish प्लेटफॉर्म की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं क्या हैं?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; हैदराबाद की डिफेंस कंपनी ज़ेन टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी ने भारतीय सेना के लिए 85.21 करोड़ रुपये के एक टेंडर में सबसे कम बोली (L-1) लगाई है। यह टेंडर आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) ने रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम्स (RCWS) के लिए निकाला था। ये सिस्टम सेना के आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स (ARVs) पर लगाए जाएंगे। इस टेंडर के तहत कुल 81 रिमोट कंट्रोल वेपन स्टेशन की सप्लाई की जानी है। इन सिस्टम्स के लगने के बाद, सैनिक गाड़ी के अंदर सुरक्षित बैठकर ही मशीन गन चला सकेंगे। उन्हें दुश्मन की गोलीबारी में बाहर निकलने का खतरा नहीं उठाना पड़ेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;ARVs को हथियारों की ज़रूरत क्यों?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स असल में सपोर्ट गाड़ियां होती हैं। इनका काम जंग के दौरान खराब हुए टैंकों&mdash;जैसे सेना के T-72 और T-90 बेड़े के टैंक&mdash;को खींचकर लाना और उनकी मरम्मत करना होता है। चूंकि ये गाड़ियां सीधे जंग के मैदान में काम करती हैं, इसलिए इन पर दुश्मन की गोलीबारी, ड्रोन हमले और घात लगाकर किए जाने वाले हमलों का खतरा हमेशा बना रहता है।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक रक्षा विशेषज्ञ ने बताया, &quot;आज की मॉडर्न लड़ाई में सपोर्ट गाड़ियों का भी लड़ाकू होना ज़रूरी है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट के संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि जंग के मैदान में रिमोट वेपन सिस्टम कितने काम के हैं।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;क्या है ये टेक्नोलॉजी?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;RCWS टेक्नोलॉजी की मदद से गाड़ी का क्रू मेंबर बख्तरबंद गाड़ी के अंदर से ही हथियार को रिमोट से ऑपरेट कर सकता है। इसके लिए कैमरे, थर्मल इमेजर, दिन-रात देखने की क्षमता वाले विज़न सिस्टम और ऑटो-ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता है। माना जा रहा है कि ज़ेन टेक्नोलॉजीज़ इस प्रोजेक्ट के लिए अपना 'फनिश' (Phanish) प्लेटफॉर्म पेश करेगी। इस प्लेटफॉर्म पर 12.7mm की हेवी मशीन गन लगाई जा सकती है। यह 14 किलोमीटर तक की दूरी पर टारगेट का पता लगा सकता है और हर मौसम में दिन-रात काम करने में सक्षम है। इस सिस्टम में AI पर आधारित टारगेट पहचानने की तकनीक और फाइबर ऑप्टिक जायरो स्टेबलाइजेशन भी है, जिससे चलती गाड़ी से भी सटीक निशाना लगाया जा सकता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Credit Card Hack: जेब में रखा कार्ड दिलाएगा फ्री शॉपिंग, 90% लोग भूल जाते हैं ये ट्रिक!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/credit-card-rewards-hack-get-free-shopping-vouchers-know-how-to-use/articleshow-tkzss1m</link>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:19:05 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Credit Card Reward Points: &lt;/strong&gt;क्या आपके क्रेडिट कार्ड में ऐसे रिवॉर्ड पॉइंट्स पड़े हैं, जो फ्री शॉपिंग, फ्लाइट टिकट या होटल बुकिंग दिला सकते हैं? आखिर ज्यादातर लोग इन पॉइंट्स का फायदा क्यों नहीं उठा पाते और इन्हें चेक-रिडीम करने का सही तरीका क्या है?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Credit Card Hidden Benefits:&lt;/strong&gt; क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ महीना खत्म होने पर बिल चुकाने या पैसों की तंगी के समय करते हैं? अगर हां, तो आप अपना ही बड़ा नुकसान कर रहे हैं। आपकी जेब में जो क्रेडिट कार्ड रखा है, वो आपको फ्री में फ्लाइट की सैर करा सकता है और ब्रांडेड शोरूम से फ्री में शॉपिंग भी दिला सकता है। दिक्कत बस ये है कि ज्यादातर लोग क्रेडिट कार्ड के इन हिडन पॉइंट्स (Secret Points) को चेक करना ही भूल जाते हैं। आइए जानते हैं कि आप अपने कार्ड से ये 'मुफ्त का फायदा' कैसे उठा सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्रेडिट कार्ड को लेकर आप कहां चूक जाते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब भी आप अपने क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल डलवाते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं या रेस्टोरेंट का बिल देते हैं, तो बैंक हर ट्रांजैक्शन पर आपको कुछ पॉइंट्स देता है। इन्हें रिवॉर्ड पॉइंट्स (Reward Points) कहा जाता है। सबसे बड़ी गलती ये है कि लोग सोचते हैं कि ये पॉइंट्स किसी काम के नहीं हैं या इन्हें इस्तेमाल करना बहुत मुश्किल है। बैंक का नियम है कि एक तय समय (आमतौर पर 1 से 2 साल) के बाद ये पॉइंट्स अपने आप एक्सपायर यानी खत्म हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि आपकी गाढ़ी कमाई के बदले मिले पॉइंट्स बिना किसी इस्तेमाल के बेकार चले जाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रिवॉर्ड पॉइंट्स कैसे जमा होते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मान लीजिए आपने ₹1,000 खर्च किए और बैंक ने उस पर 10 रिवॉर्ड पॉइंट्स दिए। ऐसे-ऐसे करके पूरे साल में हजारों पॉइंट्स जमा हो सकते हैं। बाद में इन्हीं पॉइंट्स को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि रिवॉर्ड पॉइंट्स सिर्फ छोटे-मोटे गिफ्ट के लिए होते हैं, लेकिन कई कार्ड इससे कहीं ज्यादा फायदे देते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रिवॉर्ड पॉइंट्स से क्या-क्या मिल सकता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1. फ्री में फ्लाइट का सफर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगर आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं, तो अपने क्रेडिट कार्ड पॉइंट्स को एयरलाइंस के 'एयर माइल्स' (Air Miles) में बदल सकते हैं। कई बड़े बैंक आपको यह सुविधा देते हैं। आपके पॉइंट्स के बदले आपको एयर टिकट पर भारी डिस्काउंट मिल जाता है या कई बार पूरी टिकट ही मुफ्त हो जाती है। तो अगली बार जब ट्रिप प्लान करें, तो अपनी जेब से पैसे देने से पहले कार्ड ऐप जरूर चेक करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;2. ब्रांडेड वाउचर्स से फ्री शॉपिंग&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इन पॉइंट्स के बदले आप अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा या पेंटालून्स जैसे बड़े ब्रांड्स के फ्री गिफ्ट वाउचर भी ले सकते हैं। मान लीजिए आपके पास 5,000 पॉइंट्स हैं, तो बैंक आपको उसके बदले 1,000 या 2,000 रुपए का शॉपिंग वाउचर दे देगा। इससे आप बिना एक भी रुपया अपनी जेब से खर्च किए कपड़े, शूज या घर का राशन तक खरीद सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;3. कैश में बदल सकते हैं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कुछ बैंक तो इतने लीनियंट होते हैं कि वो आपके पॉइंट्स को सीधे कैश (Cashback) में बदल देते हैं। यानी जितने पॉइंट्स आपके पास हैं, उतनी रकम आपके क्रेडिट कार्ड के अगले बिल में से माइनस (कम) कर दी जाएगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इन फायदों को कैसे क्लेम करें?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;अपने बैंक की ऑफिशियल नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप (जैसे HDFC MyCards, SBI Card, ICICI iMobile) में लॉग-इन करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;मेन्यू में जाकर 'Rewards' या 'Redeem Points' के ऑप्शन पर क्लिक करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;वहां आपको वाउचर्स, फ्लाइट बुकिंग और कैश का विकल्प दिखेगा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अपनी पसंद का ऑप्शन चुनें और पॉइंट्स को तुरंत भुना लें।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर:&lt;/strong&gt; यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक, एयर माइल्स और अन्य लाभ अलग-अलग बैंक, कार्ड और ऑफर्स के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी ऑफर, रिडेम्प्शन या खरीदारी का फैसला लेने से पहले अपने बैंक या कार्ड जारीकर्ता की आधिकारिक वेबसाइट पर नियम और शर्तें जरूर जांच लें। आर्टिकल में दी गई जानकारी को वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/business-news/credit-card-rewards-hack-get-free-shopping-vouchers-know-how-to-use/articleshow-tkzss1m"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[पेट्रोल-CNG के बाद एक और बड़ा झटका! 1 जून से इतनी महंगी हो जाएंगी ये कारें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/automobile-industry-update-hyundai-india-to-increase-car-prices-by-up-to-rs-12800-from-june/articleshow-u5urkg8</link>
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            <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:34:04 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Hyundai Motor India : 1 जून से पहले कार खरीदने की क्यों मची है होड़? कार कंपनियों के लगातार बढ़ते दामों के पीछे क्या है असली वजह? जून आते ही बदल जाएंगे Hyundai के दाम, लेकिन क्यों?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksmr10xy6v65fsrt40j4fvz4,imgname-untitled-design---2026-05-27t182336.604-1779886490558.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Hyundai Car Price Hike 2026 : बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। अभी पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम लगातार बढ़ ही रहे थे कि एक और टेंशन वाली खबर सामने आ गई। &amp;nbsp;अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो देरी नहीं करें। क्योंकि Hyundai Motor India Limited ने बुधवार को ऐलान किया कि 1 जून से उसकी सारी गाड़ियां महंगी हो जाएंगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इतनी महंगी हो जाएंगी हुंडई कंपनी की कार&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&amp;nbsp;कंपनी अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपये तक की बढ़ोतरी करेगी। कंपनी ने बताया कि बढ़ती लागत, कच्चे माल की कीमतों में उछाल और ऑपरेशनल खर्च बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान पहले अप्रैल में किया गया था, लेकिन अब नई कीमतें 1 जून, 2026 से लागू होंगी।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;फाइलिंग में कहा गया, &quot;8 अप्रैल, 2026 को कारों की कीमत बढ़ाने के बारे में दिए गए हमारे पिछले पत्र के क्रम में, हम बताना चाहेंगे कि बाजार की मौजूदा स्थितियों और ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए, नई कीमतें अब 1 जून, 2026 से प्रभावी होंगी।&quot;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;मॉडल और वेरिएंट के हिसाब बढ़ेंगे रेट&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;कंपनी के मुताबिक, &quot;कीमतों में बढ़ोतरी अधिकतम 12,800 रुपये तक होगी और यह मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगी।&quot;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कीमतें बढ़ाने की वजह बताते हुए Hyundai ने कहा कि यह &quot;बढ़ती लागत, कच्चे माल की कीमतों में इजाफा और ज्यादा ऑपरेशनल खर्चों&quot; के कारण जरूरी हो गया था।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;फाइलिंग में आगे कहा गया, &quot;हालांकि हम लगातार लागत को कंट्रोल करने और ग्राहकों पर इसका असर कम से कम रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार पर डालना हमारी मजबूरी है।&quot;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&amp;nbsp;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;यह फैसला ठीक वैसे समय पर आया है, जब कुछ ही दिन पहले Maruti Suzuki India Limited ने भी लागत बढ़ने का हवाला देते हुए जून से अपनी गाड़ियों की कीमतों में 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Arvind Raghuwanshi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[21 से पहले सीख लीं ये 5 चीजें, तो 30 की उम्र में गिनेंगे नोट! जानें करोड़पति बनने का फॉर्मूला]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/how-to-become-millionaire-before-30-financial-tips-for-gen-z/articleshow-upabyi6</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 15:25:25 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Skills to Learn Before 21: &lt;/strong&gt;क्या सिर्फ डिग्री से लाइफ सेट हो जाती है? आज की दुनिया में 21 साल की उम्र से पहले अगर कोई सही हैबिट्स अपना ले, तो क्या 30 तक करोड़पति बनने के चांस बढ़ सकते हैं। वो 5 जरूरी चीजें क्या हैं, जो पूरी लाइफ बदल सकती हैं?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kspzyn1kfpvw6qtabv22cgp9,imgname-smart-money-habits-1779961910322.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Become Millionaire Before 30: &lt;/strong&gt;आज की दुनिया पहले जैसी नहीं रही। अब सिर्फ डिग्री लेने से लाइफ सेट नहीं होती है। कई लोग 40-45 की उम्र में भी पैसे के लिए परेशान हैं, जबकि कुछ लोग 30 से पहले ही अच्छा पैसा, फ्रीडम और शानदार लाइफ बना लेते हैं। फर्क सिर्फ किस्मत का नहीं होता&hellip; फर्क होता है उन चीजों और स्किल्स का, जो उन्होंने सही समय पर सीख लीं। अगर कोई 21 साल की उम्र से पहले कुछ जरूरी स्किल्स और आदतें सीख ले, तो आने वाले 10 साल उसकी पूरी लाइफ बदल सकते हैं। इससे करोड़पति बनने का चांस भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं वो 5 चीजें, जो जितनी जल्दी सीख लें, उतना फायदा हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;1. सिर्फ कमाना नहीं पैसे संभालना सीखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुत लोग पहली सैलरी आते ही खर्च शुरू कर देते हैं, लेकिन अमीर बनने वाले लोग पहले समझते हैं कि पैसा कहां जा रहा है, कितना बच रहा है और कौन-सा खर्च बेकार है। अगर आपने कम उम्र में बजट बनाना, सेविंग करना, SIP या इन्वेस्टिंग समझना सीख लिया, तो आगे बहुत फायदा मिल सकता है। छोटा पैसा भी समय के साथ बड़ा बनता है। यही गेम ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2. कोई एक हाई इनकम स्किल जरूर सीखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;2026 और आने वाले टाइम में सिर्फ डिग्री काफी नहीं है। आज ऐसे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं, जिनके पास कोई खास स्किल है। जैसे, वीडियो एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, AI टूल्स, ग्राफिक्स डिजाइन, कोडिंग, सेल्स, डिजिटल मार्केटिंग। इनमें से कोई एक स्किल अगर आपने 18-21 की उम्र में सीख ली, तो कॉलेज खत्म होने से पहले कमाई शुरू हो सकती है। आज इंटरनेट पर सीखने के हजार तरीके हैं, जहां से आराम से इन स्किल्स को सीख सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;3. लोगों से बात करना सीखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुत टैलेंटेड लोग सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे बात करने में डरते हैं, अपनी बात समझा नहीं पाते और कॉन्फिडेंस नहीं दिखा पाते हैं। कम्युनिकेशन स्किल्स हर जगह काम आती है। जॉब इंटरव्यू, बिजनेस, फ्रीलांसिंग, नेटवर्किंग और सोशल मीडिया हर जगह आपके बातचीत के अंदाज को पसंद किया जाता है। जो इंसान लोगों को समझना और सही तरीके से बात करना सीख जाता है, उसके मौके तेजी से बढ़ जाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;4. मोबाइल को टाइमपास नहीं, टूल बनाएं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आज सबसे बड़ा फर्क यही बना रहा है। कुछ लोग फोन से सिर्फ शॉर्टस देखते हैं, गेम खेलते हैं और टाइम खराब करते हैं। वहीं कुछ लोग उसी फोन से पैसे कमा रहे हैं, नई स्किल सीख रहे हैं, बिजनेस बना रहे हैं और पर्सनल ब्रांड बना रहे हैं। अगर 21 से पहले आपने मोबाइल को कमाई मशीन की तरह इस्तेमाल करना सीख लिया, तो आगे निकलने के चांस बढ़ जाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;5. डिसिप्लिन सीख लिया, तो आधी लड़ाई जीत ली&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हर सफल इंसान में एक चीज कॉमन होती है और वो है डिसिप्लिन (Discipline)। मतलब रोज थोड़ा काम करना, जल्दी हार न मानना, कंस्सिटेंसी (Consistency) बनाए रखना। बहुत लोग मोटिवेशन ढूंढते रहते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि लाइफ डिसिप्लिन से बदलती है। अगर आपने कम उम्र में टाइम मैनेज करना, रोज सीखना, फालतू चीजों से दूरी रखना सीख लिया, तो आगे बहुत फायदा हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;करोड़पति बनने का असली फॉर्मूला क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;करोड़पति बनने का कोई जादुई फॉर्मूला नहीं होता है। लेकिन सही आदतें, सही स्किल्स, सही सोच और सही समय पर शुरुआत..इन चार चीजों से लाइफ पूरी बदल सकती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ज्यादातर लोग 30 की उम्र के बाद समझते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए था। अगर कोई ये बातें 21 से पहले समझ जाए, तो उसका रास्ता बाकी लोगों से अलग हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आज से क्या शुरू करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आपकी उम्र 15, 18 या 20 साल है, तो आज से रोज 1 घंटा सीखने में लगाइए, खर्च लिखना शुरू कीजिए, एक स्किल चुनिए, मोबाइल का इस्तेमाल बदल दीजिए। छोटी शुरुआत ही आगे जाकर बड़ा रिजल्ट बनाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर: &lt;/strong&gt;यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताए गए तरीके, आदतें और स्किल्स सफलता की संभावना बढ़ा सकते हैं, लेकिन करोड़पति बनना कई चीजों पर निर्भर करता है जैसे मेहनत, समय, फैसले और परिस्थितियां। किसी भी निवेश, करियर या पैसे से जुड़े फैसले लेने से पहले अपनी समझ और जरूरत के हिसाब से निर्णय लें। किसी एक्सपर्ट की सलाह भी जरूर लें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[हाउसवाइव्स के लिए खुशखबरी: घर बैठे हर महीने मिलेंगे ₹7,000, होना चाहिए 10वीं पास]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/lic-bima-sakhi-yojana-government-scheme-for-10th-pass-housewives-earn-money-from-home/articleshow-vvyzqsu</link>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:55:37 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Sarkari Yojana 2026:&lt;/strong&gt; क्या आप घर बैठे अपनी पहचान और कमाई दोनों बनाना चाहती हैं? बिना किसी बड़ी डिग्री के हर महीने फिक्स इनकम पाना चाहती हैं? 10वीं पास महिलाओं के लिए ऐसी कौन सी स्कीम है, जो हर महीने ₹7,000 कमाने का मौका दे रही है?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Government Scheme for 10th Pass Women: &lt;/strong&gt;अगर आप घर की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ खुद की कमाई शुरू करना चाहती हैं, तो आपके लिए गोल्डन चांस है। देश की सबसे भरोसेमंद सरकारी कंपनी LIC आपके लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आई है। LIC ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बीमा सखी योजना (LIC Bima Sakhi Yojana)की शुरुआत की है। इस स्कीम की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें आपको काम सीखने के दौरान हर महीने बंधा-बंधाया पैसा (स्टाइपेंड) मिलेगा और काम करने का समय भी आप खुद तय कर सकती हैं। आइए जानते हैं यह योजना क्या है और आप इसका फायदा कैसे उठा सकती हैं..&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;LIC बीमा सखी योजना क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह महिलाओं के लिए 3 साल का एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम है। इसमें चुनी गई महिलाओं को LIC के प्रोडक्ट्स, पैसों की समझ और ग्राहकों से बात करने का तरीका सिखाया जाता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आप LIC एजेंट के रूप में आगे काम जारी रख सकती हैं और पॉलिसी बेचने पर मिलने वाले तगड़े कमीशन से अपनी कमाई को कई गुना बढ़ा सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस स्कीम में आपको कितने पैसे मिलेंगे?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;LIC इस योजना के तहत महिलाओं को लगातार 3 साल तक हर महीने एक फिक्स रकम देती है, जो आपके काम के प्रदर्शन (परफॉर्मेंस) पर निर्भर करती है। पहले साल हर महीने ₹7,000 मिलेंगे। दूसरे साल हर महीने ₹6,000 मिलेंगे और तीसरे साल हर महीने ₹5,000 मिलेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस स्कीम में फायदा क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस फिक्स पैसों के अलावा, आप जो भी इंश्योरेंस पॉलिसी बेचेंगी, उस पर मिलने वाला कमीशन सीधे आपके खाते में अलग से आएगा। यानी आपकी कमाई की कोई लिमिट नहीं है। बस ध्यान रखें कि आगे के सालों में यह फिक्स पैसा पाते रहने के लिए आपको LIC के कुछ आसान बिजनेस टारगेट पूरे करने होंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कितने घंटे काम करना होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें काम के घंटों की कोई पाबंदी नहीं है। आप जब चाहें, अपने घर के काम निपटाकर पार्ट-टाइम या अपनी मर्जी के समय पर यह काम संभाल सकती हैं। यानी बिना किसी प्रेशर के पैसे कमा सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन-कौन कर सकता है अप्लाई?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;आपकी उम्र 18 साल से 70 साल के बीच होनी चाहिए।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;आपने कम से कम 10वीं क्लास पास की हो।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;आप पहले से LIC एजेंट नहीं होनी चाहिए।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अगर आपके करीबी रिश्तेदार LIC में काम करते हैं या एजेंट हैं, तो आप इसमें भाग नहीं ले सकतीं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;ट्रेनिंग के बाद IRDAI द्वारा तय की गई एक बेहद आसान परीक्षा पास करनी होती है, जिसके बाद आप आधिकारिक एजेंट बन जाती हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;काम क्या करना होगा और क्या सीखेंगी आप?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;LIC की कौन सी पॉलिसी किस ग्राहक के लिए बेस्ट है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;ग्राहकों से अच्छे से बात कैसे करें और उनकी मदद कैसे करें।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;फॉर्म भरने के लिए कौन से कागज चाहिए?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आधार कार्ड&lt;/p&gt;&lt;p&gt;10वीं पास का सर्टिफिकेट या मार्कशीट&lt;/p&gt;&lt;p&gt;रहने का पता (एड्रेस प्रूफ)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पासपोर्ट साइज फोटो&lt;/p&gt;&lt;p&gt;चालू मोबाइल नंबर&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बैंक खाते की डिटेल्स&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अप्लाई कैसे करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आप सीधे LIC की आधिकारिक वेबसाइट (www.licindia.in) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[ALERT: 15 जून से पहले निपटा लें यह काम, वरना सरकार वसूलेगी हर महीने 1% जुर्माना!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/june-2026-financial-rules-change-for-salaried-employees-and-investors-advance-tax-deadline-rbi-sebi-penalty-update/articleshow-xflimo3</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:47:02 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;June Financial Rules 2026: &lt;/strong&gt;15 जून से पहले कौन सा जरूरी काम निपटाना होगा? क्या टैक्स, PAN और ट्रेडिंग से जुड़े नियम बदलने वाले हैं? RBI और SEBI के नए अपडेट आम लोगों की जेब और निवेश पर कितना असर डाल सकते हैं?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kspthfcwq06k0fdf1qqm2txv,imgname-financial-changes-1779956235675.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Financial Changes June 2026: &lt;/strong&gt;अगर आप सैलरीड है, शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं या फिर बैंक में पैसा बचाकर रखते हैं, तो आने वाला जून का महीना आपके लिए बेहद जरूरी होने वाला है। नए वित्तीय वर्ष (FY27) की शुरुआत के साथ ही पैसों से जुड़े कई नियम पूरी तरह बदल चुके हैं। इस महीने कुछ ऐसी जरूरी तारीखें और नियम सामने आ रहे हैं, जिन्हें अगर आपने मिस कर दिया तो सीधा आपकी जेब पर कैंची चलेगी। खासकर 15 जून की तारीख तो आपको अपने कैलेंडर में आज ही मार्क कर लेनी चाहिए। आइए जानते हैं कि अगले महीने में आपको किन बातों का सबसे ज्यादा ध्यान रखना है और क्या-क्या बदलाव हो रहे हैं...&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Advance Tax Deadline June 2026: 15 जून की डेडलाइन चूके तो जुर्माना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जून महीने का सबसे बड़ा अपडेट एडवांस टैक्स (Advance Tax) को लेकर है। नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत टैक्स चुकाने की पहली आखिरी तारीख 15 जून 2026 तय की गई है। अगर सालभर में आपकी कुल टैक्स देनदारी (Tax Liability) ₹10,000 से ज्यादा बनती है, तो आपको इस तारीख तक अपने कुल टैक्स का 15% हिस्सा एडवांस टैक्स के रूप में सरकार को जमा करना होगा। अगर आप 15 जून तक यह पेमेंट करना भूल जाते हैं, तो नए नियमों के मुताबिक आपको हर महीने 1% की दर से पेनल्टी (ब्याज) देनी पड़ेगी। इसलिए देर न करें और वक्त रहते इसे निपटा लें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जॉब करने वाले लोगों को बड़ी राहत&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप सैलरीड एम्प्लॉई (नौकरीपेशा) हैं और पुराने टैक्स सिस्टम (Old Tax Regime) का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपके लिए सरकार की तरफ से कुछ बेहद शानदार खबरें हैं। कई भत्तों (Allowances) की लिमिट को अब काफी बढ़ा दिया गया है। पहले बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाली टैक्स छूट सिर्फ ₹100 प्रति महीना थी, जिसे अब बढ़ाकर सीधे ₹3,000 प्रति महीना (पर चाइल्ड) कर दिया गया है। बच्चों के हॉस्टल के खर्च पर मिलने वाली छूट को भी बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीना कर दिया गया है। अगर आप बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद या अहमदाबाद जैसे शहरों में किराए के मकान में रहते हैं, तो अब आपको भी 50% एचआरए (HRA) टैक्स छूट की कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। इससे आपकी इन-हैंड सैलरी में अच्छी बचत होगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पोस्ट ऑफिस और सरकारी स्कीम्स: जून में कितना मिलेगा ब्याज?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप फिक्स इनकम या सुरक्षित सरकारी योजनाओं में निवेश करना पसंद करते हैं, तो वित्त मंत्रालय ने चालू तिमाही (अप्रैल से जून) के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी आपको पहले की तरह ही मजबूत रिटर्न मिलता रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किस सरकारी स्कीम पर कितना ब्याज?&lt;/h2&gt;&lt;table&gt; &lt;thead&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;th&gt;सरकारी स्कीम का नाम&lt;/th&gt;   &lt;th&gt;जून 2026 में मिलने वाला ब्याज&lt;/th&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/thead&gt; &lt;tbody&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;8.2%&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;7.7%&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;किसान विकास पत्र (KVP)&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;7.5%&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;7.1%&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;पोस्ट ऑफिस MIS&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;7.4%&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शेयर मार्केट के ट्रेडर्स पर SEBI का मार्जिन नियम और STT का बोझ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप शेयर बाजार में एक्टिव रहते हैं और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&amp;amp;O) में ट्रेडिंग करते हैं, तो सेबी के कड़े नियम जून में भी जारी रहेंगे। अब आप सिर्फ अपने पास पड़े शेयर्स को गिरवी रखकर (Pledge) पूरी ट्रेडिंग नहीं कर सकते। आपके कुल मार्जिन का कम से कम 50% हिस्सा कैश (50:50 मार्जिन रूल) या कैश के बराबर (जैसे लिक्विड फंड) होना जरूरी है। इसके साथ ही डेरिवेटिव्स पर बढ़ा हुआ सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) भी लागू रहेगा, जिसमें फ्यूचर्स पर 0.05% और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर 0.15% का चार्ज देना होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बैंक ग्राहकों के लिए खुशखबरी: ऑनलाइन फ्रॉड हुआ, तो मिलेंगे ₹50,000 वापस!&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 1 जुलाई 2026 से ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए एक बेहद कमाल का नियम लेकर आ रहा है, जिसकी तैयारी जून में ही पूरी की जा रही है। इस नए नियम के तहत, अगर आपके साथ कोई डिजिटल फ्रॉड (ऑनलाइन धोखा) होता है और आप 5 दिनों के भीतर उसकी शिकायत बैंक से कर देते हैं, तो आपको ₹50,000 तक के नुकसान की सुरक्षा (प्रोटेक्शन) मिलेगी। यानी आपका डूबा हुआ पैसा वापस मिलने की उम्मीद काफी बढ़ जाएगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hotel Booking Hacks: होटल बुकिंग का ये सीक्रेट जान लिया, तो अगली ट्रिप आधे बजट में होगी!]]></title>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 16:14:35 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;How to Book Cheap Hotels:&lt;/strong&gt; क्या आप भी होटल बुक करते समय ज्यादा पैसा दे देते हैं? क्या आप होटल बुकिंग में अपना आधा खर्च बचाना चाहते हैं? ऐसी कौन-कौन सी ट्रिक्स हैं, जो होटल बुकिंग का खर्च काफी हद तक कम कर सकती हैं और फ्री में ब्रेकफास्ट जैसी चीजें भी दिला सकती हैं?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Cheap Hotel Booking Tricks: &lt;/strong&gt;गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही हर कोई कहीं न कहीं घूमने का प्लान बनाने लगता है, लेकिन जब भी हम किसी ट्रिप पर जाते हैं, तो बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ होटल के कमरों का किराया देने में ही निकल जाता है। कई बार तो महंगे होटलों के चक्कर में लोग अपना टूर ही कैंसिल कर देते हैं। अगर आप भी इस सीजन में कहीं बाहर जाने की सोच रहे हैं, तो आज हम आपको होटल बुकिंग के कुछ ऐसे ट्रिक्स बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने ठहरने का खर्च काफी कम कर सकते हैं। ये वो तरीके हैं जो बड़ी-बड़ी ट्रेवल कंपनियां आपसे हमेशा छुपा कर रखती हैं। आइए जानते हैं कि बिना किसी परेशानी के एक शानदार होटल को सबसे सस्ते दामों में कैसे बुक किया जाए?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ऐप और वेबसाइट पर जाकर कंपेयर जरूर करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुत लोग सीधे किसी ऐप पर जाकर पहला दिखा होटल बुक कर लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती होती है। क्योंकि अलग-अलग ऐप्स पर अलग प्राइस होते हैं। कई बार होटल खुद डायरेक्ट बुकिंग पर डिस्काउंट देता है। रात और दिन में भी रेट्स बदलते रहते हैं। यानी थोड़ा कंपेयर करके बड़ा फर्क देख सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इन्कॉग्निटो मोड में होटल सर्च&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सबसे असरदार तरीका इन्कॉग्निटो मोड (Incognito Mode) माना जाता है, जिसमें होटल सर्च करना पैसे बचा सकता है। जब आप बार-बार एक ही होटल सर्च करते हैं, तो कई ट्रैवल साइट्स (Travel Sites) को पता चल जाता है कि आपको वही रूम चाहिए। इसके बाद कई बार दाम बढ़े हुए दिखने लगते हैं। लेकिन इन्कॉग्निटो मोड में सर्च करने पर फ्रेश प्राइस दिख सकता है, हिडेन डील्स (Hidden Deals) मिल सकती हैं, कई बार रूम सस्ता नजर आता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वीकेंड की बजाय वीकडेज में करें बुकिंग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वीकेंड और वीकडेज में बुकिंग में कई बार बड़ा फर्क नजर आता है। वीकेंड पर होटल सबसे महंगे होते हैं। अगर पॉसिबल हो, तो सोमवार से लेकर गुरुवार के बीच बुकिंग करें। संडे नाइट चेक-इन देखें और फेस्टिवल डेट्स हो सके तो अवॉयड करें। कई बार वही रूम वीकडेज में आधे रेट पर मिल जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;लोकेशन का चक्कर न पालें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;किसी भी टूरिस्ट प्लेस पर जो होटल मुख्य बाजार, रेलवे स्टेशन या बीच के बिल्कुल पास होते हैं, उनका किराया बहुत ज्यादा होता है। लोग सिर्फ सहूलियत के चक्कर में वहां महंगे कमरे ले लेते हैं। स्मार्ट तरीका यह है कि मुख्य सेंटर से सिर्फ 1 या 2 किलोमीटर की दूरी पर होटल तलाशें। मुख्य लोकेशन से थोड़ी ही दूरी पर आपको आधे से भी कम दाम में उससे कहीं बेहतर और शांत होटल मिल सकते हैं। जो पैसे आप यहां बचाएंगे, उससे आप आसानी से लोकल ऑटो या कैब का खर्च निकाल सकते हैं और फिर भी आपकी बड़ी बचत हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;होटल को सीधे कॉल करने कराएं बुकिंग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह एक ऐसी ट्रिक है, जो ज्यादातर मामलों में काम करती है और आपका सबसे ज्यादा पैसा बचाती है। ऑनलाइन बुकिंग ऐप्स पर होटल वाले को कंपनियों को एक मोटा कमीशन (15%-25%) देना पड़ता है। आप इंटरनेट पर उस होटल का असली नंबर निकालें और सीधे मैनेजर से बात करें। उन्हें बताएं कि आपको ऑनलाइन ऐप पर यह कमरा इतने रुपए में मिल रहा है, क्या वे डायरेक्ट बुकिंग करने पर कुछ कम दाम लगाएंगे? चूंकि सीधे बुकिंग करने पर होटल मालिक को किसी कंपनी को कमीशन नहीं देना पड़ता, इसलिए वे अक्सर आपको ऑनलाइन से कहीं ज्यादा सस्ता रेट दे सकते हैं और साथ में फ्री ब्रेकफास्ट जैसी सुविधाएं भी जोड़ सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर: &lt;/strong&gt;इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य शिक्षा और सूचना के उद्देश्य से है। यह किसी भी प्रकार की व्यावसायिक ट्रेवल एडवाइजरी, वित्तीय सलाह या कानूनी रूप से बाध्यकारी जानकारी नहीं है। होटल बुकिंग ऐप्स, वेबसाइट्स और होटलों के किराए डायनेमिक यानी बदलते रहने वाले होते हैं। सीजन, उपलब्धता और समय के अनुसार इनमें कभी भी बदलाव हो सकता है। बुकिंग करने से पहले कृपया संबंधित होटल या वेबसाइट की आधिकारिक शर्तों और अंतिम कीमतों की जांच स्वयं जरूर कर लें। यहां बताए गए तरीके सामान्य तौर पर काम करने वाले तकनीकी हैक्स हैं। किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप या वेबसाइट पर पेमेंट करते समय होने वाले किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान या फ्रॉड के लिए यह प्लेटफॉर्म जिम्मेदार नहीं होगा। अपनी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हमेशा सुरक्षित और वेरीफाइड प्लेटफॉर्म पर ही शेयर करें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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            <title><![CDATA[ATM कार्ड का PIN पता है? फिर भी नहीं निकाल सकते मृत परिजन के खाते से पैसे]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/atm-card-after-death-rules-nominee-upi-bank-account-legal-heir/articleshow-ym0m3aa</link>
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            <pubDate>Wed, 27 May 2026 19:19:26 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ATM Card Rules After Death: &lt;/strong&gt;क्या किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके ATM कार्ड या UPI का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है? नॉमिनी होने के बावजूद बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए कौन-सी प्रक्रिया जरूरी है? मृत व्यक्ति के खाते से बिना जानकारी पैसे निकालने पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ATM Card Rules&lt;/strong&gt;: घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर अपने बच्चों या करीबी रिश्तेदारों को एटीएम कार्ड और उसका पिन नंबर दे देते हैं। वजह साफ होती है, जरूरत पड़ने पर आसानी से पैसे निकाले जा सकें। परिवारों में यह व्यवस्था सामान्य मानी जाती है और शायद ही कोई इसे गलत समझता हो। लेकिन यही आदत किसी व्यक्ति की मौत के बाद बड़ी कानूनी मुसीबत बन सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बहुत कम लोग जानते हैं कि किसी परिजन के निधन के बाद उनके एटीएम कार्ड, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करना कानूनन अपराध माना जा सकता है। भले ही आप उस खाते के नॉमिनी हों या कानूनी वारिस, बिना बैंक को जानकारी दिए खाते से पैसे निकालना आपको गंभीर कानूनी कार्रवाई के दायरे में ला सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मौत के बाद क्या होता है बैंक खाते का?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बैंकिंग नियमों के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका बैंक खाता कानूनी रूप से संवेदनशील स्थिति में आ जाता है। जैसे ही बैंक को व्यक्ति के निधन की जानकारी मिलती है, खाते से जुड़े डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन की अनुमति समाप्त कर दी जाती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि खाते में जमा रकम सुरक्षित रहे और किसी भी तरह का विवाद पैदा न हो। क्योंकि कई मामलों में एक से ज्यादा कानूनी उत्तराधिकारी होते हैं और बिना प्रक्रिया के पैसा निकालना बाकी वारिसों के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह भी पढ़ें: &lt;strong&gt;PM-WANI Wi-Fi: अब QR कोड स्कैन करते ही मिलेगा इंटरनेट, सरकार लाई नए सस्ते प्लान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नॉमिनी होने का मतलब क्या तुरंत पैसे निकालने का अधिकार है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्यादातर लोगों को लगता है कि यदि वे खाते में नॉमिनी हैं, तो वे कभी भी एटीएम या यूपीआई के जरिए पैसा निकाल सकते हैं। लेकिन बैंकिंग कानून ऐसा नहीं कहता। नॉमिनी सिर्फ उस रकम का अधिकृत प्राप्तकर्ता होता है, मालिक नहीं। व्यक्ति की मृत्यु के बाद सबसे पहले बैंक को डेथ सर्टिफिकेट और जरूरी दस्तावेज देकर सूचना देना अनिवार्य होता है। इसके बाद ही बैंक कानूनी प्रक्रिया पूरी करके पैसा जारी करता है। अगर कोई व्यक्ति बैंक को जानकारी दिए बिना मृतक के खाते से पैसा निकालता है, तो इसे धोखाधड़ी या अनधिकृत लेन-देन माना जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बैंक इतने सख्त नियम क्यों लागू करते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बैंक का मुख्य उद्देश्य मृत व्यक्ति की जमा पूंजी को सुरक्षित रखना होता है। कई बार परिवार में संपत्ति और पैसों को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे में यदि कोई एक व्यक्ति चुपचाप एटीएम या यूपीआई से पूरा पैसा निकाल ले, तो दूसरे वारिसों का अधिकार प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से बैंक सभी कानूनी उत्तराधिकारियों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही रकम जारी करता है। डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसे मामलों में कानूनी विवाद भी बढ़े हैं। इसलिए अब बैंक इस तरह के मामलों में ज्यादा सतर्कता बरतते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बिना जानकारी पैसे निकाले तो क्या हो सकती है कार्रवाई?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यदि बैंक या परिवार का कोई सदस्य यह साबित कर देता है कि किसी व्यक्ति ने मृतक के खाते से बिना अनुमति पैसे निकाले हैं, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ऐसे मामलों में भारतीय कानून के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और चोरी जैसी धाराएं लगाई जा सकती हैं। दोषी पाए जाने पर जेल की सजा और आर्थिक जुर्माना दोनों हो सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कानूनी जानकारों का कहना है कि कई लोग अनजाने में यह गलती कर बैठते हैं, क्योंकि उन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती। लेकिन कानून में अनभिज्ञता को बचाव का आधार नहीं माना जाता।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सही और कानूनी प्रक्रिया क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यदि परिवार में किसी व्यक्ति का निधन हो जाता है, तो सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा में इसकी लिखित सूचना देना जरूरी है। इसके बाद बैंक की ओर से क्लेम फॉर्म दिया जाता है। आमतौर पर बैंक इन दस्तावेजों की मांग करता है:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मृत्यु प्रमाण पत्र&lt;/li&gt; &lt;li&gt;नॉमिनी या कानूनी वारिस का पहचान पत्र&lt;/li&gt; &lt;li&gt;बैंक खाते की जानकारी&lt;/li&gt; &lt;li&gt;आवश्यक कानूनी दस्तावेज&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;सभी दस्तावेजों की जांच के बाद बैंक तय प्रक्रिया के तहत रकम नॉमिनी या उत्तराधिकारियों को ट्रांसफर कर देता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;डिजिटल बैंकिंग के दौर में जागरूकता जरूरी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आज यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम का इस्तेमाल बेहद आसान हो चुका है। लेकिन सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। कई परिवार सिर्फ जानकारी के अभाव में ऐसे कदम उठा लेते हैं, जो बाद में कानूनी परेशानी का कारण बन जाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परिवारों को बैंकिंग और नॉमिनी से जुड़े नियमों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए ताकि किसी भी संकट की स्थिति में सही कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सके।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;किसी परिजन के निधन के बाद भावनात्मक स्थिति में जल्दबाजी करने के बजाय बैंक से संपर्क करना और तय नियमों का पालन करना ही सबसे सुरक्षित और कानूनी रास्ता माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह भी पढ़ें: &lt;strong&gt;अमेरिका और ईरान की जंग में कौन जीता? मीडिया सर्वे रिपोर्ट ने सब साफ कर दिया!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Akshansh Kulshreshtha</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[ITR Filing 2026: रिटर्न भरने से पहले जान लें ये 5 बड़े बदलाव, वरना फंस सकते हैं...]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/itr-filing-for-2026-27-five-major-changes-taxpayers-must-know-tax-filing-india-capital-gains-tax-unrealized-rent/articleshow-zh2knnw</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/business-news/itr-filing-for-2026-27-five-major-changes-taxpayers-must-know-tax-filing-india-capital-gains-tax-unrealized-rent/articleshow-zh2knnw</guid>
            <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:45:28 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग में कौन-कौन से बड़े बदलाव किए गए हैं? अब Income Tax Department ने दो घरों की आय दिखाने को लेकर क्या राहत दी है? ITR-4 फाइल करने वालों के लिए बैंक अकाउंट बैलेंस बताना क्यों जरूरी कर दिया गया है? गलत ITR फॉर्म चुनने पर टैक्सपेयर्स को किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ks20wm5fwef898tw4j54bd54,imgname-tamil-news--10--1779258249391.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Income Tax News: &lt;/strong&gt;इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का समय आ गया है। ज्यादातर लोग अपनी कंपनियों से फॉर्म-16 मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जो जून के मध्य तक मिल जाएगा। लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-1 और ITR-4 फॉर्म के लिए ऑनलाइन फाइलिंग और एक्सेल यूटिलिटी पहले ही जारी कर दी है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिटर्न भरते समय आपको कुछ जरूरी बदलावों का ध्यान रखना होगा। ये बदलाव पिछले साल की तुलना में काफी अहम हैं। पहली नजर में फॉर्म भले ही पुराने जैसा लगे, लेकिन अगर आपने ध्यान नहीं दिया तो इन बदलावों को समझना मुश्किल हो सकता है। यह भी ध्यान रखें कि यह पुराने इनकम टैक्स सिस्टम के तहत आखिरी रिटर्न फाइलिंग में से एक है, क्योंकि नए नियम लागू हो चुके हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;टैक्सपेयर्स इन 5 बदलावों पर जरूर ध्यान दें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1. अब दो घरों से होने वाली आय दिखा सकते हैं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जिन टैक्सपेयर्स के पास एक से ज्यादा घर हैं, उनके लिए यह एक बड़ी राहत है। पहले, सैलरी पाने वाले लोग और छोटे कारोबारी जो ITR-1 (सहज) और ITR-4 (सुगम) फॉर्म का इस्तेमाल करते थे, वे सिर्फ एक घर से होने वाली आय ही दिखा पाते थे। लेकिन अब, वे इन आसान फॉर्म में ही दो घरों तक से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें कोई दूसरा जटिल फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;2. कैपिटल गेन्स टैक्स की रिपोर्टिंग हुई आसान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगर पिछले साल कैपिटल गेन्स की रिपोर्टिंग करने में आपको कन्फ्यूजन हुआ था, तो इस बार चीजें आसान कर दी गई हैं। पिछले साल बजट में हुए बदलावों के कारण 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के ट्रांजैक्शन को अलग-अलग दिखाना पड़ रहा था। लेकिन असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए यह झंझट खत्म कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एक ही कैपिटल गेन्स टैक्स स्ट्रक्चर है, इसलिए तारीखों के हिसाब से ट्रांजैक्शन को बांटने की जरूरत नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;3. न मिले किराए को बताने के लिए नया कॉलम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह उन लोगों के लिए जरूरी है जिन्होंने अपनी प्रॉपर्टी किराए पर दी है। इस बार ITR-1 और ITR-4 फॉर्म में एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जिसमें आप उस किराए की जानकारी दे सकते हैं जो आपको नहीं मिला (Unrealized Rent)। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का मकसद किराए से होने वाली आय की जानकारी को और ज्यादा साफ और पारदर्शी बनाना है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;4. बैंक बैलेंस की जानकारी देना हुआ जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जो लोग प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम (Presumptive Taxation Scheme) के तहत ITR-4 फाइल करते हैं, उनके लिए एक नई शर्त जोड़ी गई है। सेक्शन 44AD, 44ADA, और 44AE के दायरे में आने वाले लोगों को अब 31 मार्च 2026 तक अपने सभी एक्टिव बैंक अकाउंट्स का क्लोजिंग बैलेंस बताना अनिवार्य होगा। यह जानकारी ITR-4 के कॉलम 'E21' में देनी होगी। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि गलत जानकारी देने या जानकारी छिपाने पर टैक्स नोटिस या जुर्माना लग सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;5. सही ITR फॉर्म चुनना बहुत जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सही ITR फॉर्म चुनना हमेशा से ही अहम रहा है, लेकिन इस साल इसका महत्व और भी बढ़ गया है। अगर आपकी आय कई स्रोतों से होती है, जैसे- सैलरी, किराया, कैपिटल गेन्स, फ्रीलांसिंग, ट्रेडिंग या बिजनेस, तो आपको यह पक्का करना होगा कि आप सही फॉर्म चुन रहे हैं। गलत फॉर्म चुनने पर आपको डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस मिल सकता है, रिफंड में देरी हो सकती है, टैक्स की गलत गणना हो सकती है, या फिर पिछले सालों के नुकसान को आगे ले जाने (carry forward losses) का फायदा भी आप खो सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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