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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Sun, 25 Oct 2026 14:56:42 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[PC Jeweller Share: 90% रिटर्न देकर भी नहीं थमी रफ्तार! 1 साल के हाई पर शेयर, जानें नया टारगेट]]></title>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 07:30:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PC Jeweller Share Price Target: &lt;/strong&gt;पीसी ज्वैलर शेयर में तूफानी तेजी जारी है। 2025 में भारी गिरावट के बाद 2026 में इसने 90% का छप्परफाड़ रिटर्न दिया है। कर्ज फ्री हुई कंपनी का मुनाफा 58% बढ़ा और अब मार्केट एक्सपर्ट्स ने नया टारगेट दिया है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PC Jeweller Share Price Target: &lt;/strong&gt;पीसी ज्वैलर शेयर में तूफानी तेजी जारी है। 2025 में भारी गिरावट के बाद 2026 में इसने 90% का छप्परफाड़ रिटर्न दिया है। कर्ज फ्री हुई कंपनी का मुनाफा 58% बढ़ा और अब मार्केट एक्सपर्ट्स ने नया टारगेट दिया है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पीसी ज्वैलर शेयर साल 2025 में 40% तक धड़ाम हो गया था, इस साल अब तक 90% का बंपर रिटर्न देकर सबको चौंका दिया है। दुनियाभर के बाजारों में टेंशन के बावजूद इस शेयर ने गजब की वापसी की है। गुरुवार, 22 अक्टूबर की ट्रेडिंग के दौरान इस शेयर ने ₹20.10 का अपना 1 साल का नया हाई बना लिया। सिर्फ इसी महीने में ये शेयर 36% तक चढ़ चुका है और लगातार चौथे महीने मुनाफे की तरफ बढ़ रहा है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;NSE पर गुरुवार, 22 अक्टूबर को पीसी ज्वैलस लिमिटेड का शेयर पहले रफ्तार से भाग रहा था लेकिन बाजार बंद होते-होते लाल निशान पर आ गया। ये शेयर 2.76% की गिरावट के साथ ₹18 पर बंद हुआ।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस तूफानी तेजी के पीछे कंपनी का शानदार कामकाज है। सितंबर तिमाही (Q2) में कंपनी का नेट प्रॉफिट (मुनाफा) 58% बढ़कर ₹331 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल इसी समय ₹210 करोड़ था। शादियों और त्योहारों के सीजन में भारी डिमांड के कारण कंपनी की कमाई 28% बढ़कर ₹1,054 करोड़ पर पहुंच गई। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी ये है कि कंपनी ने समय से पहले 14 बैंकों का पूरा कर्ज चुका दिया है और अब यह पूरी तरह से 'कर्ज-मुक्त' (Debt-Free) हो गई है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पीसी ज्वैलर अपने बिजनेस को तेजी से फैलाने की तैयारी में है। अगले 12 से 18 महीनों के अंदर कंपनी टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में 100 नए बड़े शोरूम खोलने जा रही है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;चार्ट्स और आंकड़ों को देखकर शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स इस शेयर पर बुलिश हैं। उनके मुताबिक, अगर ये शेयर ₹20 के लेवल को पार करके ऊपर टिक जाता है, तो जल्दी ही ₹23 और ₹27 का नया टारगेट छू सकता है। गिरावट आने पर ₹17 और ₹15.50 के लेवल पर इस शेयर को मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट ने ये भी चेतावनी दी है कि शेयर अभी 'ओवरबॉट' जोन में है यानी बहुत ज्यादा खरीदा जा चुका है, इसलिए मौजूदा भाव के आसपास थोड़ी बहुत प्रॉफिट बुकिंग भी देखने को मिल सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर: &lt;/strong&gt;ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश (Investment) से पहले अपने सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Gold-Silver Rate Today: ऑलटाइम हाई से ₹2.24 लाख टूटी चांदी, जानें एक ही दिन में कितना घटा सोना]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/gold-silver-price-today-25-october-both-precious-metal-rate-fall-before-diwali-mcx-gold-articleshow-5z5zrgm</link>
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            <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 11:24:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;धनतेरस-दिवाली से पहले सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। चांदी जहां अपने ऑलटाइम हाई से ₹2.24 लाख रुपए नीचे आ चुकी है, वहीं घरेलू बाजार में सोना भी एक ही दिन में करीब 4800 रुपए सस्ता हुआ है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01k72av84k3pa8hq781ygqt9k7,imgname-gold-silver-record-high-1759941337235.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gold-Silver Price Today 25th October: &lt;/strong&gt;फेस्टिव सीजन, खासतौर पर दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर घरेलू सर्राफा बाजार तक, दोनों कीमती धातुओं के दाम में बड़ी कमी आई है। बीते सप्ताह के सिर्फ चार कारोबारी दिनों में चांदी की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार में चांदी एक झटके में 16,000 रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई। वहीं, MCX पर चांदी अपने लाइफटाइम हाई से करीब 2.24 लाख रुपये नीचे आ चुकी है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Silver Price Crash: घरेलू बाजार में ₹16,503 सस्ती हुई चांदी&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;दिवाली और धनतेरस से पहले चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। दिल्ली समेत देशभर के घरेलू बाजारों में चांदी का भाव 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गया है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट IBJA.com के मुताबिक, घरेलू बाजार में चांदी की कीमत 16 अक्टूबर को 2,10,918 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। वहीं, शुक्रवार को इसका भाव गिरकर 1,94,415 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इस तरह महज चार कारोबारी दिनों में चांदी की कीमत 16,503 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गई। फेस्टिव सीजन में आई इस गिरावट ने कीमती धातुओं के बाजार में हलचल बढ़ा दी है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;MCX Silver Rate: वायदा बाजार में भी चांदी के भाव में बड़ी गिरावट&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;चांदी की कीमतों में गिरावट केवल घरेलू सर्राफा बाजार तक सीमित नहीं है। वायदा कारोबार में भी इसके दाम तेजी से नीचे आए हैं। MCX पर 4 दिसंबर की एक्सपायरी वाला एक किलोग्राम चांदी का कॉन्ट्रैक्ट 16 अक्टूबर को 2,11,187 रुपये पर था। शुक्रवार को इसकी कीमत गिरकर 1,96,100 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इस हिसाब से वायदा बाजार में चांदी चार कारोबारी दिनों में 15,087 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। घरेलू बाजार और MCX, दोनों जगह चांदी के भाव में आई इस गिरावट से इसकी कीमतों में बड़ी कमजोरी दिखाई दे रही है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;Silver Price Today: लाइफटाइम हाई से ₹2.24 लाख टूटी चांदी&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;चांदी की कीमत में इस सप्ताह आई भारी गिरावट के बाद इसका भाव अपने लाइफटाइम हाई से काफी नीचे आ गया है। चांदी ने इस साल जनवरी के आखिरी सप्ताह में 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अब मौजूदा कीमत से तुलना करें, तो चांदी का भाव अपने रिकॉर्ड हाई से 2,23,948 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आ चुका है। यानी जिस चांदी की कीमत कुछ समय पहले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, वह अब उस स्तर के मुकाबले आधे से भी कम भाव पर कारोबार कर रही है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;IBJA Gold Rate: घरेलू बाजार में ₹4,796 सस्ता हुआ सोना&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;घरेलू सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई है। IBJA के मुताबिक, 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 1,41,630 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इस तरह घरेलू बाजार में सोना 4,796 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया। MCX और घरेलू बाजार, दोनों में सोने की कीमतों में आई गिरावट से यह साफ है कि बीते सप्ताह कीमती पीली धातु के भाव पर दबाव बना रहा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;Gold Price Fall: सोने की कीमत में भी ₹5,768 की गिरावट&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;चांदी के बाद सोने की कीमतों में भी इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। MCX पर 4 दिसंबर की एक्सपायरी वाला 10 ग्राम सोने का कॉन्ट्रैक्ट 1,47,918 रुपये पर था। चार कारोबारी दिनों में इसकी कीमत 5,768 रुपये गिरकर 1,42,150 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इस तरह वायदा बाजार में सोने के भाव में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली है। फेस्टिव सीजन के दौरान सोने की कीमतों में आई इस गिरावट पर खरीदारों की नजर बनी हुई है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;Gold-Silver Jewellery Price: गहने खरीदते समय अतिरिक्त खर्चों का रखें ध्यान&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;अगर आप दिवाली या धनतेरस पर सोने-चांदी के गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कीमतों में आई गिरावट के साथ कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;सर्राफा बाजार में सोने के गहने खरीदते समय ग्राहकों को सोने की कीमत के अलावा लागू GST और मेकिंग चार्ज भी देना पड़ता है। मेकिंग चार्ज अलग-अलग शहरों, राज्यों और ज्वेलर्स के हिसाब से अलग हो सकता है। इसलिए सोने की खरीदारी करते समय केवल बाजार में चल रहे भाव को देखकर अंतिम कीमत का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। GST और मेकिंग चार्ज जुड़ने के बाद गहनों की कुल कीमत बढ़ जाती है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Ganesh Mishra</dc:creator>
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        <item>
            <title><![CDATA[Gold Silver Price Crash: चांदी की कीमतों में अचानक क्यों मचा हड़कंप? रिकॉर्ड हाई से लाखों रुपये नीचे आया भाव, जानें सोने का हाल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/gold-and-silver-prices-crash-heavily-ahead-of-diwali-and-dhanteras-photoshow-8lm5wqu</link>
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            <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 13:37:19 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Silver Price Today: धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। सिर्फ चार दिनों के अंदर एक किलो चांदी का भाव 16,000 रुपये तक टूट गया है। सोने की कीमतों ने भी गोता लगाया है। आइए यहां पूरी डिटेल जानते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Silver Price Today: धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। सिर्फ चार दिनों के अंदर एक किलो चांदी का भाव 16,000 रुपये तक टूट गया है। सोने की कीमतों ने भी गोता लगाया है। आइए यहां पूरी डिटेल जानते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी के शौकीनों को मार्केट ने बड़ी राहत दी है। बुलियन मार्केट में सोने और चांदी के दाम लगातार नीचे आ रहे हैं। सिर्फ चार दिन के अंदर चांदी की कीमत बुरी तरह क्रैश हो गई है। घरेलू मार्केट के साथ-साथ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी इन कीमती धातुओं के रेट भारी दबाव में टूट गए हैं। त्योहारों पर शॉपिंग करने वाले आम लोगों को इससे काफी फायदा मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के डेटा ने घरेलू मार्केट में चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दिखाई है। 16 अक्टूबर को एक किलो चांदी का रेट 2,10,918 रुपये था, जो शुक्रवार तक गिरकर 1,94,415 रुपये पर आ गया। सिर्फ चार दिन में एक किलो चांदी 16,503 रुपये सस्ती हो गई है। लंबे समय बाद चांदी का भाव 2 लाख रुपये के नीचे आया है। वहीं, MCX पर 4 दिसंबर की एक्सपायरी वाला सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट 2,11,187 रुपये से गिरकर 1,96,100 रुपये पर आ गया। MCX पर भी चांदी ने चार दिन में 15,087 रुपये की गिरावट दर्ज की है। जनवरी के आखिरी हफ्ते में चांदी ने 4,20,048 रुपये का ऑल-टाइम हाई बनाया था, जिससे अब यह 2,23,948 रुपये नीचे आ चुकी है।&lt;img&gt;चांदी की राह पर चलते हुए सोने की कीमतों ने भी गोता लगाया है। MCX पर 4 दिसंबर की एक्सपायरी वाले 10 ग्राम सोने का भाव 5,768 रुपये टूटकर 1,47,918 रुपये से 1,42,150 रुपये पर आ गया है। IBJA के आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू मार्केट में 10 ग्राम सोने का रेट 4,796 रुपये गिरकर 1,46,426 रुपये से 1,41,630 रुपये हो गया है। 10 ग्राम सोने के अलग-अलग क्वालिटी के रेट इस तरह हैं: 24 कैरेट सोना 1,41,630 रुपये, 22 कैरेट 1,38,230 रुपये, 20 कैरेट 1,26,050 रुपये, 18 कैरेट 1,14,720 रुपये और 14 कैरेट सोना 91,350 रुपये पर है।&lt;img&gt;इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मिडिल ईस्ट के तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लंबे समय तक ब्याज दरें ज्यादा रखने के संकेतों ने सोने-चांदी को नीचे गिराया है। इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 3,989.10 डॉलर के निचले स्तर पर फिसल गया और बाद में 4,026 डॉलर पर रिकवर हुआ। वहीं, इंटरनेशनल स्पॉट मार्केट में चांदी एक समय 53.8 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम लो पर आ गई थी। कोटक नियो की प्रतिनिधि कायनात चैनवाला ने बताया कि इंडस्ट्रियल इस्तेमाल ज्यादा होने के कारण चांदी पर मार्केट के हालात का असर ज्यादा पड़ता है। अगर स्पॉट मार्केट में चांदी 50 डॉलर के नीचे जाती है, तो हमारे मार्केट में एक किलो चांदी 1.90 लाख रुपये के नीचे जा सकती है।&lt;img&gt;आप त्योहारों या शादियों के लिए ज्वेलरी शॉप से सोने-चांदी के गहने खरीदते समय कुछ जरूरी बातें जरूर याद रखें। ऊपर बताए गए IBJA के रेट सिर्फ प्योर मेटल के हैं। आप जब गहने खरीदते हैं, तो राज्य और शहर के हिसाब से जीएसटी और मेकिंग चार्ज अलग से लगते हैं। इससे गहनों की फाइनल कीमत बढ़ जाती है। नोट: सोने, चांदी या ईटीएफ में पैसा लगाने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से जरूर बात करें। हमने यह जानकारी सिर्फ आपकी जागरूकता के लिए दी है।]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Post Office RD Scheme: बिना रिस्क के पैसा होगा डबल, जानें इस पोस्ट ऑफिस स्कीम की डिटेल]]></title>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:53:31 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Post Office Recurring Deposit: &lt;/strong&gt;पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम में आप हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाकर एक बड़ा फंड बना सकते हैं। सिर्फ 5 साल में मोटा रिटर्न कैसे पाएं, इसकी पूरी डिटेल यहां जानें।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Post Office Recurring Deposit: &lt;/strong&gt;पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम में आप हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाकर एक बड़ा फंड बना सकते हैं। सिर्फ 5 साल में मोटा रिटर्न कैसे पाएं, इसकी पूरी डिटेल यहां जानें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;आप अपनी सैलरी से हर महीने थोड़ा पैसा बचाकर पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में सुरक्षित निवेश कर सकते हैं। इसमें एकमुश्त रकम देने की जरूरत नहीं है। आप हर महीने पैसे जमा करके 5 साल (60 महीने) में बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। अभी इस पर 6.7% सालाना ब्याज मिल रहा है। अगर आप हर महीने 6,000 रुपये जमा करते हैं, तो 5 साल बाद आपको लगभग 4.28 लाख रुपये मिलेंगे। निवेश की रकम बढ़ाकर आप करोड़ों का फंड भी बना सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस निवेश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आपको शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव की कोई टेंशन नहीं लेनी पड़ती। सरकार पोस्ट ऑफिस आरडी पर ब्याज दरें तय करती है, इसलिए आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है। हालांकि, निवेश शुरू करने से पहले मौजूदा ब्याज दरों और नियमों को एक बार जरूर चेक कर लें। आम लोगों और नौकरीपेशा वर्ग के लिए यह एक बेहद भरोसेमंद स्कीम है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;हम आपको बताते हैं कि पोस्ट ऑफिस आरडी में हर महीने 6,000 रुपये जमा करने पर 5 साल बाद कितना पैसा मिलेगा। कैलकुलेशन के मुताबिक, 5 साल बाद आपको करीब 4,28,185 रुपये की मैच्योरिटी रकम मिलेगी। आप 60 महीनों में कुल 3,60,000 रुपये जमा करेंगे। इस पर आपको लगभग 68,185 रुपये का ब्याज मिलेगा। यह कैलकुलेशन 6.7% सालाना ब्याज दर और तिमाही चक्रवृद्धि (कंपाउंडिंग) के आधार पर किया गया है। नियमों के हिसाब से मैच्योरिटी की असली रकम में थोड़ा बहुत अंतर आ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस स्कीम में कई शानदार फीचर्स मिलते हैं। पहला, आप सिर्फ 100 रुपये की न्यूनतम रकम से भी आरडी अकाउंट खोल सकते हैं। दूसरा, इसकी अवधि आमतौर पर 60 महीने होती है। तीसरा, इसमें तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ता है। चौथी सबसे अहम बात लोन की सुविधा है। अकाउंट के 12 महीने पूरे होने के बाद आप जमा रकम का 50% तक लोन ले सकते हैं। पांचवां, जरूरत पड़ने पर आप समय से पहले भी अपना अकाउंट बंद कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;आप 3 साल पूरे होने के बाद पोस्ट ऑफिस आरडी अकाउंट को मैच्योरिटी से पहले भी बंद कर सकते हैं। अगर आप बीच में ही पैसा निकालते हैं, तो नियमों के मुताबिक आपको थोड़ा कम ब्याज मिलेगा। इन छोटी-मोटी शर्तों को छोड़ दें, तो आम मिडिल क्लास और छोटे निवेशकों के लिए यह एक बेहतरीन स्कीम है। यह स्कीम लोगों में नियमित बचत की आदत डालने में बहुत मदद करती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[DA Hike News: केंद्रीय कर्मचारियों को कब मिलेगा महंगाई भत्ते का तोहफा? अब इस तारीख पर टिकी नजरें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/da-hike-2026-july-da-increase-cabinet-meeting-october-28-articleshow-afenqnq</link>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 13:03:48 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Central Government Employees: &lt;/strong&gt;केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 की डीए और डीआर बढ़ोतरी का इंतजार है। 21 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में फैसला नहीं होने के बाद अब 28 अक्टूबर की संभावित बैठक से उम्मीदें बढ़ गई हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक डीए बढ़ोतरी की तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5ktvfvvteq8h783fskcvnwk,imgname-da-hike--1--1792740802427.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Dearness Allowance News:&lt;/strong&gt; केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 की महंगाई भत्ता (DA) बढ़ोतरी का इंतजार है। उम्मीद थी कि 21 अक्टूबर को हुई मोदी कैबिनेट की बैठक में सरकार महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का ऐलान करेगी, लेकिन बैठक में इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। अब कर्मचारियों की नजरें 28 अक्टूबर को होने वाली संभावित कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि दिवाली से पहले सरकार डीए बढ़ाकर राहत दे सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हालांकि, सरकार ने अभी तक अगली डीए बढ़ोतरी की तारीख या संभावित कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर फैसला होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में कर्मचारियों को फिलहाल औपचारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दशहरे पर क्यों थी डीए बढ़ने की उम्मीद?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उम्मीद थी कि सरकार दशहरे के आसपास जुलाई 2026 की छमाही के लिए डीए और डीआर बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। पिछले वर्षों में जुलाई वाली किस्त की घोषणा सितंबर के आखिर से लेकर अक्टूबर के मध्य या आखिरी हिस्से तक की जाती रही है। इसी पुराने रुझान के कारण इस बार भी कर्मचारियों को त्योहार से पहले खुशखबरी मिलने की उम्मीद थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;लेकिन 21 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में इस बारे में कोई निर्णय नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों का इंतजार और बढ़ गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;16 अक्टूबर को बोनस का ऐलान, डीए पर चुप्पी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस की घोषणा की थी। हालांकि, उस समय डीए या पेंशनभोगियों के महंगाई राहत यानी डीआर में बढ़ोतरी को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;डीए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मूल वेतन के आधार पर दिया जाता है, जबकि डीआर पेंशनभोगियों को मिलता है। इनका उद्देश्य महंगाई के कारण बढ़ने वाले खर्च के असर को कुछ हद तक कम करना है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अभी कितना है केंद्रीय कर्मचारियों का डीए?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछली बढ़ोतरी में डीए को मूल वेतन के 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया गया था। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी बताई गई है। अब कर्मचारियों को जुलाई 2026 से लागू होने वाली अगली छमाही की बढ़ोतरी का इंतजार है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सातवें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत डीए और डीआर में आमतौर पर साल में दो बार संशोधन किया जाता है। इसके लिए महंगाई से जुड़े आंकड़ों, खासकर औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW), को ध्यान में रखा जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;28 अक्टूबर की बैठक से क्यों बढ़ी उम्मीद?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, अगली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक 28 अक्टूबर को हो सकती है। चूंकि कैबिनेट की बैठकें अक्सर बुधवार को होती हैं, इसलिए इस तारीख को लेकर चर्चा बढ़ी है। दिवाली 8 नवंबर को होने के कारण कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार त्योहार से पहले डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हालांकि, 28 अक्टूबर की बैठक में डीए बढ़ोतरी पर फैसला होगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है। कर्मचारियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पिछले पांच साल में कब हुआ था डीए का ऐलान?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पिछले वर्षों में जुलाई वाली डीए किस्त की घोषणा अलग-अलग तारीखों पर हुई थी:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;2025: 1 अक्टूबर को 3 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;2024: 16 अक्टूबर को 3 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;2023: 18 अक्टूबर को 4 प्रतिशत बढ़ोतरी की मंजूरी।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;2022: 28 सितंबर को 4 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;2021: 21 अक्टूबर को 3 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;पिछले वर्षों का यह रुझान बताता है कि जुलाई वाली डीए किस्त का ऐलान अक्टूबर में भी हो सकता है। हालांकि, इससे यह तय नहीं होता कि 2026 में घोषणा किस तारीख को होगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें अगली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं। सरकार की ओर से आधिकारिक फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डीए में कितनी बढ़ोतरी होगी और इसका लाभ कब से मिलेगा।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[LIC Jeevan Utsav: सिर्फ 5 साल प्रीमियम भरने पर जिंदगीभर इनकम? जानें पॉलिसी की पूरी जानकारी]]></title>
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            <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 11:22:37 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;LIC Jeevan Utsav Policy: एलआईसी जीवन उत्सव पॉलिसी में आपको सिर्फ 5 साल प्रीमियम भरना होता है। इसके बाद जिंदगी भर आपको सालाना इनकम मिलती रहेगी। आइए भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की इस शानदार पॉलिसी की पूरी डिटेल जानते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5qd779h7sywtmbewnv6k3qf,imgname-lic-jeevan-utsav-policy-1792860724529.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;LIC Jeevan Utsav Policy: एलआईसी जीवन उत्सव पॉलिसी में आपको सिर्फ 5 साल प्रीमियम भरना होता है। इसके बाद जिंदगी भर आपको सालाना इनकम मिलती रहेगी। आइए भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की इस शानदार पॉलिसी की पूरी डिटेल जानते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;क्या आप रिटायरमेंट के बाद के खर्चों को लेकर टेंशन में हैं? भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) आपके लिए 'जीवन उत्सव पॉलिसी' लेकर आई है। इस स्कीम में आप सिर्फ 5 साल प्रीमियम भरकर जिंदगी भर शानदार इनकम पा सकते हैं। यह एक नॉन-लिंक्ड और नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्लान है। इसका मतलब है कि शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का आपके पैसों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसमें आपको रिस्क कवर का फायदा भी मिलता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पॉलिसीधारक अपनी सुविधा के हिसाब से 5 साल से लेकर 16 साल तक प्रीमियम भरने का विकल्प चुन सकते हैं। इस प्लान में कम से कम 5 लाख रुपये का बेसिक सम एश्योर्ड लेना जरूरी है। मान लीजिए, 30 साल का कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये का सम एश्योर्ड लेता है और 5 साल का विकल्प चुनता है, तो उसे सालाना 1,10,150 रुपये प्रीमियम देना होगा। वहीं 8 साल के लिए 72,600 रुपये, 12 साल के लिए 44,275 रुपये और 16 साल के लिए 30,025 रुपये सालाना प्रीमियम बनेगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस पॉलिसी के रेगुलर इनकम बेनिफिट ऑप्शन में आपको बेसिक सम एश्योर्ड का 10% हिस्सा हर साल मिलता है। 5 लाख रुपये के सम एश्योर्ड पर यह रकम 50 हजार रुपये सालाना बनती है। अगर आप 5 साल प्रीमियम भरने का विकल्प चुनते हैं, तो 11वें साल से आपकी इनकम शुरू हो जाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि पॉलिसीधारक के जीवित रहने तक यह पैसा हर साल लगातार मिलता रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;एलआईसी जीवन उत्सव के नियमों के मुताबिक, प्रीमियम भरने की अवधि के दौरान हर साल गारंटीड एडिशन का फायदा मिलता है। इसमें बेसिक सम एश्योर्ड के हर 1000 रुपये पर 40 रुपये जुड़ते जाते हैं। अगर आपका सम एश्योर्ड 5 लाख रुपये है, तो हर साल आपके खाते में 20,000 रुपये का गारंटीड एडिशन जुड़ेगा। यह रकम पॉलिसीधारक को मजबूत आर्थिक सुरक्षा देती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस प्लान में आपको फ्लेक्सी इनकम का फायदा भी मिलता है। आप चाहें तो अपनी सालाना इनकम तुरंत लेने के बजाय भविष्य के लिए टाल सकते हैं। इस रोकी गई रकम पर एलआईसी 5.5% सालाना के हिसाब से ब्याज देती है। इसके अलावा, पॉलिसी चालू रहने के दौरान अगर पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है, तो नॉमिनी को डेथ बेनिफिट मिलता है। जरूरत पड़ने पर आप इस पॉलिसी पर लोन भी ले सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Nikhil Kamath: निखिल कामत का ₹10 लाख वाला बिजनेस प्लान क्या है? जानिए कैसे कर सकते हैं शुरुआत]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/what-is-nikhil-kamath-business-idea-with-10-lakh-rupees-articleshow-c6l82yi</link>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:09:43 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Nikhil Kamath 10 Lakh Business Ideas: Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत का ₹10 लाख वाला बिजनेस प्लान क्या है? जानिए, क्यों कंटेंट क्रिएशन को मानते हैं नई शुरुआत की बड़ी ताकत और AI से कैसे तलाशेंगे मौके।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5kq0bj70x2m7faws4qg5rs3,imgname-nikhil-kamath-10-lakh-business-ideas-1792736767559.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nikhil Kamath Business Strategy: &lt;/strong&gt;अगर कोई बड़ा बिजनेस अचानक बंद हो जाए और हाथ में सिर्फ 10 लाख रुपये बचें, तो क्या दोबारा सफल कारोबार खड़ा किया जा सकता है? Zerodha के को-फाउंडर और निवेशक निखिल कामत का जवाब कंटेंट क्रिएशन की तरफ इशारा करता है। उनका मानना है कि आज के दौर में लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की ताकत किसी भी नए बिजनेस को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। खास बात यह है कि इस मॉडल को शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत भी नहीं होती।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;₹10 लाख बचें तो सबसे पहले क्या करेंगे निखिल कामत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;NDTV World Summit 2026 में निखिल कामत से पूछा गया कि अगर Zerodha बंद हो जाए, पुराने संपर्क खत्म हो जाएं और उनके पास सिर्फ 10 लाख रुपये बचें, तो वह अगले दिन क्या करेंगे? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जिंदगी आसान नहीं होगी, लेकिन वह कंटेंट क्रिएशन के जरिए नई शुरुआत करने के बारे में सोचेंगे। उनके जवाब का मुख्य संकेत यह है कि बिजनेस शुरू करने के लिए सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि लोगों तक पहुंच और भरोसा भी जरूरी है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Train Ticket Booking: कौन बुक कर सकता है 365 दिन पहले टिकट? जानें FTQ कोटे का नियम और प्रोसेस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कंटेंट क्रिएशन से कैसे खड़ा हो सकता है नया बिजनेस?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आज सोशल मीडिया, वीडियो और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी ऑडियंस बनाना पहले के मुकाबले आसान हुआ है। इसके लिए शुरुआत में महंगे ऑफिस या बड़े सेटअप की जरूरत नहीं होती। हालांकि, लगातार अच्छा कंटेंट बनाना और लोगों का भरोसा जीतना चुनौतीपूर्ण है। एक बार ऑडियंस तैयार हो जाए, तो उसके आधार पर कई तरह के कारोबार शुरू किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए-&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;किसी खास विषय पर आधारित डिजिटल प्रोडक्ट बेचना।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अपनी ऑडियंस की जरूरत के मुताबिक सर्विस शुरू करना।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;किसी खास कैटेगरी में कंज्यूमर ब्रांड तैयार करना।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;यानी कंटेंट केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि नए बिजनेस के लिए ग्राहक जुटाने का माध्यम भी बन सकता है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;AI के दौर में ब्रांड बनाना क्यों होगा जरूरी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कामत के मुताबिक, AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अपनी अलग पहचान बनाना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। जब टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग तक पहुंच आसान होगी, तब सिर्फ प्रोडक्ट बनाना पर्याप्त नहीं होगा। उसे सही ग्राहकों तक पहुंचाना और बाजार में अलग पहचान बनाना भी जरूरी होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Kakeibo Method: सैलरी आते ही खाली हो जाता है अकाउंट? जापान की इस ट्रिक से बचाएं हजारों रुपये&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;₹10 लाख से विदेशी बाजार में कैसे तलाशें मौके?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कामत ने एक और बिजनेस मॉडल की ओर इशारा किया। भारत में अपेक्षाकृत कम लागत पर उपलब्ध इंजीनियरिंग टैलेंट को AI और दूसरी टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर विदेशी ग्राहकों के लिए सेवाएं तैयार की जा सकती हैं। ऐसे मॉडल में लागत, गुणवत्ता और ग्राहकों की जरूरतों का सही संतुलन जरूरी होगा। कुल मिलाकर, निखिल कामत की बात का सार यह है कि सीमित पूंजी के साथ शुरुआत करने वालों के लिए कंटेंट, तकनीक और सही बाजार की समझ नए अवसर खोल सकती है। हालांकि, किसी भी बिजनेस की सफलता की गारंटी नहीं होती।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/business-news/what-is-nikhil-kamath-business-idea-with-10-lakh-rupees-articleshow-c6l82yi"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[DA Hike Calculator: सरकारी कर्मचारियों को हर महीने कितना फायदा? 18,000 रुपये बेसिक पर जानें गणना]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/da-hike-2026-salary-calculation-18000-basic-pay-articleshow-d04buc0</link>
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            <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 09:11:42 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Dearness Allowance Increase: &lt;/strong&gt;अगर महंगाई भत्ता (DA) 60% से बढ़कर 63% होता है, तो 18,000 रुपये बेसिक वेतन वाले केंद्रीय कर्मचारी को हर महीने 540 रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। इस हिसाब से 12 महीने में 6,480 रुपये का फायदा होगा। जानें DA बढ़ोतरी का पूरा गणित, सैलरी पर असर और पेंशनर्स को मिलने वाली राहत।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5nzzb48hm6dv79hbz2nd7wx,imgname-da-hike--2--1792813280392.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;DA Salary Calculation: &lt;/strong&gt;केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का इंतजार है। महंगाई के बीच कर्मचारियों के लिए DA में इजाफा उनकी मासिक सैलरी में राहत लेकर आता है। अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन 18,000 रुपये है, तो महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत होने की स्थिति में उसकी सैलरी पर कितना असर पड़ेगा? आइए आसान गणित से समझते हैं कि हर महीने कितने रुपये का फायदा हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अभी 18,000 रुपये बेसिक सैलरी पर कितना मिलता है DA?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 60 प्रतिशत DA मिलने के आधार पर गणना करें, तो 18,000 रुपये बेसिक वेतन वाले कर्मचारी का महंगाई भत्ता 10,800 रुपये होगा। यानी बेसिक सैलरी और DA को मिलाकर कुल रकम 28,800 रुपये बनती है। हालांकि, यह राशि अन्य भत्तों और कटौतियों से पहले की है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;DA 63 प्रतिशत होने पर कितनी बढ़ेगी रकम?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर सरकार महंगाई भत्ते को 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 63 प्रतिशत करने की मंजूरी देती है, तो 18,000 रुपये बेसिक वेतन पर DA की गणना इस तरह होगी:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;बेसिक सैलरी: 18,000 रुपये&lt;/li&gt; &lt;li&gt;नया DA (63 प्रतिशत): 11,340 रुपये&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पुराना DA (60 प्रतिशत): 10,800 रुपये&lt;/li&gt; &lt;li&gt;हर महीने अतिरिक्त फायदा: 540 रुपये&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;इस हिसाब से DA में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर कर्मचारी को हर महीने 540 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;साल भर में कितने रुपये का फायदा होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;DA में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के हिसाब से 18,000 रुपये बेसिक वेतन वाले कर्मचारी को हर महीने 540 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। अगर पूरे 12 महीने तक इसी दर से भुगतान होता है, तो सालाना अतिरिक्त रकम 6,480 रुपये होगी। हालांकि, वास्तविक भुगतान की अवधि और एरियर सरकार के आदेश तथा लागू होने की तारीख पर निर्भर करेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या पूरी सैलरी में 540 रुपये ही बढ़ेंगे?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह समझना जरूरी है कि 540 रुपये की बढ़ोतरी केवल महंगाई भत्ते में होगी। कर्मचारी की कुल सैलरी में HRA, परिवहन भत्ता और अन्य लागू भत्ते भी शामिल हो सकते हैं। वहीं, PF, टैक्स और दूसरी कटौतियों के कारण हाथ में आने वाली सैलरी अलग हो सकती है। इसलिए वास्तविक मासिक लाभ कर्मचारी की वेतन संरचना पर निर्भर करेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या DA बढ़ोतरी का लाभ पेंशनर्स को भी मिलेगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;केंद्र सरकार के पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत यानी DR में बढ़ोतरी की जाती है। DA और DR की दर में समान प्रतिशत की बढ़ोतरी मंजूर होने पर पेंशनर्स को भी राहत मिल सकती है। हालांकि, उनका वास्तविक लाभ बेसिक पेंशन और लागू सरकारी आदेश के आधार पर तय होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;DA बढ़ोतरी पर सरकार के फैसले का इंतजार&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर 18,000 रुपये बेसिक वेतन वाले कर्मचारी को हर महीने 540 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। लेकिन 63 प्रतिशत DA को फिलहाल गणना के उदाहरण के रूप में समझना चाहिए। वास्तविक बढ़ोतरी, लागू होने की तारीख और एरियर की जानकारी सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। कर्मचारियों को अंतिम गणना के लिए संबंधित सरकारी आदेश का इंतजार करना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;DA 60% से बढ़कर 63% होने पर 18,000 रुपये बेसिक सैलरी वालों को कितना फायदा होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर DA में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो 18,000 रुपये बेसिक वेतन वाले कर्मचारी को हर महीने 540 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;DA बढ़ने पर सालाना कितने रुपये का फायदा होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;540 रुपये प्रति माह के हिसाब से कर्मचारी को 12 महीने में कुल 6,480 रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। यह गणना पूरे साल बढ़ी हुई दर लागू रहने की स्थिति पर आधारित है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या DA बढ़ने से हाथ में आने वाली सैलरी भी बढ़ेगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;DA बढ़ने से आमतौर पर मासिक वेतन बढ़ता है। हालांकि, PF, टैक्स और अन्य कटौतियों के कारण हाथ में आने वाली वास्तविक रकम अलग हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या DA बढ़ोतरी का फायदा पेंशनर्स को भी मिलेगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;केंद्र सरकार के पेंशनर्स को महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। वास्तविक बढ़ोतरी और भुगतान सरकार की आधिकारिक घोषणा तथा लागू नियमों पर निर्भर करेंगे।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[PM Kisan 24th Installment: क्या इसी रविवार खाते में आएंगे ₹2,000? जान लें ताजा अपडेट]]></title>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 18:12:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PM Kisan 24th Installment Latest Update: &lt;/strong&gt;क्या 25 अक्टूबर को किसानों के खाते में 2,000 रुपए आएंगे? जानें 24वीं किस्त की तारीख पर ताजा अपडेट और स्टेटस चेक करने का तरीका।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01k1jw9xr3sqj383veme2ganag,imgname-pm-kisan-status-check-aadhar-card-1754054063875.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PM Kisan 24th Kist:&lt;/strong&gt; देशभर के करोड़ों किसान इन दिनों प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि 24 किस्त का इंतजार है। त्योहारों का सीजन है और दिवाली सिर पर है, तो हर किसी का सवाल है कि आखिर 2,000 रुपए कब आएंगे? इसी बीच एक चर्चा तेजी से फैल रही है कि शायद इसी रविवार यानी 25 अक्टूबर को किसानों के बैंक खातों में पैसा (PM Kisan Yojana 24th Installment) क्रेडिट हो सकता है। क्या वाकई इस वीकेंड मोदी सरकार किसानों को बड़ा गिफ्ट देने वाली है? आइए जानते हैं पूरा सच...&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पीएम किसान की 24वीं किस्त के रविवार को आने की चर्चा क्यों?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रविवार, 25 अक्टूबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और लोगों के बीच ये कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम मोदी अपने इसी दौरे से कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं और वाराणसी के मंच से ही 24वीं किस्त का बटन दबा सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या सरकार ने पीएम किसान की अगली किस्त की तारीख को कंफर्म किया है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;फिलहाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर 25 अक्टूबर की तारीख का कोई ऐलान नहीं किया है। अगर आप पीएम किसान की ऑफिशियल वेबसाइट (pmkisan.gov.in) पर जाएंगे, तो वहां भी अभी तक पैसा भेजने की किसी भी तारीख का जिक्र नहीं है। यानी रविवार को पैसे आ भी सकते हैं और नहीं भी, क्योंकि इसकी कोई ऑफिशियल जानकारी अभी नहीं दी गई है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि 24 किस्त कब आएगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप पीएम किसान योजना का पैटर्न देखें, तो हर 4 महीने के गैप पर 2-2 हजार रुपए की किस्त आती है। इससे पहले वाली 23वीं किस्त इसी साल जून में आई थी। तब करीब 9 करोड़ किसानों के खाते में पैसे गए थे। अब अगर जून से 4 महीने गिनें, तो अक्टूबर में यह समय पूरा हो रहा है। यही वजह है कि माना जा रहा है कि किस्त अक्टूबर या नवंबर में कभी भी जारी की जा सकती है। बस सरकार के फाइनल ऐलान का इंतजार है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पीएम किसान 24वीं किस्त को लेकर किसान तुरंत करें ये काम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस योजना की अगली किस्त के पैसे कभी भी आ सकते हैं, लेकिन किसानों को ये पता करना होगा कि उनका खाता पैसे लेने के लिए पूरी तरह तैयार हो। अगर आपने अपनी ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी नहीं की है या आपका बैंक खाता आधार (Aadhaar) से लिंक नहीं है, तो आपके 2000 रुपए बीच में ही अटक सकते हैं। इसलिए आज ही अपने नजदीकी CSC सेंटर जाकर अपना स्टेटस चेक कर लें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पीएम किसान का स्टेटस कैसे चेक करें?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in खोलें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;वेबसाइट पर उपलब्ध Farmers Corner सेक्शन में जाएं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;वहां 'Know Your Status' का विकल्प देखें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;मांगी गई जानकारी भरें और निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी में अपनी किस्त और भुगतान से जुड़ा स्टेटस देखें।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[EPS Pension Hike: EPFO पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! पेंशन ₹1,000 से बढ़कर ₹7,500 होगी?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/epfo-minimum-pension-increase-1000-to-7500-cbt-meeting-nov-19-articleshow-fpswgyu</link>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:00:38 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Pension increase to 7500: &lt;/strong&gt;EPFO की 19 नवंबर 2026 को होने वाली 240वीं CBT बैठक में EPS के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने और DA जोड़ने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;EPFO Pension Hike 2026: &lt;/strong&gt;कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले लाखों पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को सीधा प्रभावित कर सकती है। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के अंतर्गत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन की राशि को बढ़ाने की मांग काफी लंबे समय से चल रही है। वर्तमान में पात्र पेंशनर्स को कम से कम ₹1,000 प्रति माह की पेंशन दी जाती है, जिसे बढ़ाकर ₹7,500 करने और साथ में महंगाई भत्ता (DA) जोड़ने का प्रस्ताव लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस अहम विषय पर 19 नवंबर 2026 को होने वाली EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की 240वीं बैठक में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। यह बैठक इस बार नई दिल्ली के बजाय गुजरात के गिर में आयोजित की जा रही है, जो अपने आप में एक विशेष कदम है। पेंशनभोगी संगठन और ट्रेड यूनियन लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में मात्र ₹1,000 की राशि से बुजुर्गों का गुजारा होना बेहद मुश्किल है, इसलिए इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;240वीं बैठक और 'बाहरी' आयोजन स्थल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Hindi News प्लेटफॉर्म्स की जानकारी के अनुसार, 19 नवंबर को गुजरात में पहली बार यह बैठक होने जा रही है। इससे पहले की पांच बैठकें नई दिल्ली में हुई थीं, जबकि आखिरी &quot;बाहरी&quot; बैठक मार्च 2022 में गुवाहाटी में हुई थी। बैठक का अंतिम एजेंडा अभी तय नहीं है, लेकिन न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी का मुद्दा इसमें शामिल होने की उम्मीद है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सितंबर 2014 से लागू है ₹1,000 पेंशन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मौजूदा समय में EPS के तहत पेंशनर्स को जो ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन मिल रही है, वह सितंबर 2014 से लागू है। संगठनों का कहना है कि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, इसलिए पेंशन ₹7,500 करना समय की मांग है। सरकार ने संकेत दिया है कि पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति और भविष्य के खर्चों का आकलन करने के बाद ही प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;EPFO वेज लिमिट में बदलाव&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Personal Finance के इस मुद्दे के बीच, सरकार ने एक और बड़ा फैसला लागू किया है। सितंबर 2026 में EPFO के अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी गई, जो 17 सितंबर से प्रभावी है। दृगराज मद्धेशिया द्वारा Live Hindustan App पर साझा किए गए टिप्स स्पष्ट करते हैं कि 19 नवंबर की बैठक में चर्चा का अर्थ यह नहीं है कि ₹7,500 की पेंशन को तुरंत मंजूरी मिल जाएगी, बल्कि आधिकारिक फैसले का इंतजार करना होगा।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Wealthy Countries: दुनिया के 3 ऐसे देश जहां कोई गरीब नहीं, हर तीसरा इंसान है करोड़पति!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/richest-countries-in-the-world-with-zero-poverty-and-high-incomes-photoshow-n2qmio6</link>
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            <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 14:56:39 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[दुनिया के सबसे अमीर देशों की लिस्ट में मोनाको, लक्जमबर्ग और लिकटेंस्टीन का नाम जरूर आता है। क्या इन देशों में सच में कोई गरीबी नहीं है? इनकी खासियत क्या है? आइए यहां पूरी डिटेल जानते हैं।]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5s600nk8t02m0g4cjcqdzr9,imgname-world--2--1792920257203.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[दुनिया के सबसे अमीर देशों की लिस्ट में मोनाको, लक्जमबर्ग और लिकटेंस्टीन का नाम जरूर आता है। क्या इन देशों में सच में कोई गरीबी नहीं है? इनकी खासियत क्या है? आइए यहां पूरी डिटेल जानते हैं।&lt;img&gt;&lt;p&gt;दुनिया में दौलत, शानदार लाइफस्टाइल और आर्थिक सुरक्षा के मामले में कुछ छोटे देशों ने गजब का इम्पैक्ट डाला है। लोग अक्सर बड़े देशों की जीडीपी की बात करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ देश ऐसे भी हैं जहां गरीबी का नामोनिशान नहीं है? वहां हर कोई लग्जरी लाइफ जीता है। ये देश मोनाको, लक्जमबर्ग और लिकटेंस्टीन हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ये छोटे देश अपनी अलग टैक्स पॉलिसी, हाई सैलरी और शानदार सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के दम पर दुनिया में सबसे आगे हैं। आइए जानते हैं कि वहां के लोग कैसी लाइफ जीते हैं और वहां कोई गरीब क्यों नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;फ्रांस के पास समुद्र किनारे बसा मोनाको एक छोटा सा स्वर्ग है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यहां गरीबी दर जीरो है। इस देश की कुछ खास बातें देखिए..&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; टैक्स हेवन: यहां रहने वाले नागरिकों को डायरेक्ट इनकम टैक्स या कैपिटल गेन टैक्स बिल्कुल नहीं देना पड़ता। लोग अपनी मेहनत की पूरी कमाई अपनी जेब में रखते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; हर तीसरा इंसान करोड़पति: यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सच है। इस छोटे से तटीय देश में रहने वाला हर तीसरा इंसान करोड़पति या अरबपति है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; आसमान छूती प्रॉपर्टी: यहां जमीन और घरों की कीमतें इतनी ज्यादा हैं कि कम इनकम वाले लोग यहां रहने या किराए पर घर लेने के बारे में सोच भी नहीं सकते।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;यूरोप का लक्जमबर्ग दुनिया में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति जीडीपी वाले देशों में पहले नंबर पर आता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; पावरफुल बैंकिंग सेक्टर: यह देश ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस, बैंकिंग और बड़े इन्वेस्टमेंट्स का गढ़ है। इसलिए यहां की कंपनियां अपने कर्मचारियों को बहुत तगड़ी सैलरी देती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; 100% फ्री पब्लिक ट्रांसपोर्ट: यह दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने पूरे देश में बस, ट्रेन और ट्राम जैसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस को सभी के लिए फ्री कर दिया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; पक्की सोशल सिक्योरिटी: सरकार अपने नागरिकों को फ्री में अच्छी शिक्षा और इलाज देती है। अगर किसी के पास नौकरी नहीं है, तो सरकार उसे बेरोजगारी भत्ता देकर सपोर्ट करती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के बॉर्डर के बीच बसा लिकटेंस्टीन एक पहाड़ी देश है। एरिया में बहुत छोटा होने के बावजूद यहां आपको गरीबी बिल्कुल नहीं दिखेगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; हाई-टेक इंडस्ट्री: छोटा देश होने के बाद भी यह डेंटल/मेडिकल इक्विपमेंट और मशीनरी बनाने जैसी हाई-टेक इंडस्ट्री में सबसे आगे है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; कॉर्पोरेट फ्रेंडली टैक्स: यहां टैक्स रेट बहुत कम है। इसी वजह से दुनिया भर की कई मल्टीनेशनल कंपनियां अपना बिजनेस यहीं रजिस्टर करती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; जीरो कर्ज: यह उन गिने-चुने देशों में से एक है जिस पर कोई विदेशी कर्ज नहीं है। कम आबादी होने के कारण यहां के सभी नागरिकों को वर्ल्ड क्लास लाइफस्टाइल और मॉडर्न सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;भले ही ये तीनों देश अलग-अलग जगहों पर बसे हैं, लेकिन इनकी सफलता का फॉर्मूला एक जैसा ही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; हाई प्रोडक्टिविटी: ये देश सिर्फ बिजनेस ही नहीं, बल्कि फाइनेंशियल सर्विस और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के जरिए भी खूब दौलत कमाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; स्किल्ड आबादी: यहां क्वालिटी एजुकेशन, प्रोफेशनल स्किल्स और ट्रेनिंग को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है, जिससे हर किसी को आसानी से रोजगार मिल जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; मजबूत सरकार: स्थिर सरकार, बिजनेस फ्रेंडली नियम और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर इनकी सफलता का बड़ा कारण हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&bull; मजबूत सोशल प्रोटेक्शन: सरकार लोगों की सेहत, शिक्षा और बुनियादी जरूरतों की पूरी जिम्मेदारी लेती है, जिससे लोग कभी गरीबी में नहीं जाते।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मोनाको, लक्जमबर्ग और लिकटेंस्टीन भले ही आकार में छोटे हों, लेकिन इनकी दौलत, लाइफस्टाइल और आर्थिक नीतियां पूरी दुनिया को हैरान कर रही हैं। इनकम टैक्स हटाना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट फ्री करना और हाई-टेक इंडस्ट्री को बढ़ावा देना, इन्हीं वजहों से ये देश दुनिया के नक्शे पर अलग ही चमकते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Jio IPO Last Day: दांव लगाने का आखिरी दिन आज, जानें लेटेस्ट GMP और बाजार में आते ही कितना उछलेगा शेयर?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/jio-ipo-last-day-latest-gmp-today-listing-day-gains-target-price-photoshow-uf9wnpr</link>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 10:20:47 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jio Platforms IPO GMP Today:&lt;/strong&gt; रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में पैसा लगाने का आज शुक्रवार को आखिरी मौका है। ₹30,213 करोड़ का ये इश्यू देश का सबसे बड़ा IPO बन गया है। जानिए ताजा GMP और लिस्टिंग के बाद शेयर कितना उछलेगा..&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5khdfrvz92dnj1ae5f4c0p2,imgname-jio-platforms-ipo-1792730906395.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jio Platforms IPO GMP Today:&lt;/strong&gt; रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में पैसा लगाने का आज शुक्रवार को आखिरी मौका है। ₹30,213 करोड़ का ये इश्यू देश का सबसे बड़ा IPO बन गया है। जानिए ताजा GMP और लिस्टिंग के बाद शेयर कितना उछलेगा..&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुला था और 23 अक्टूबर 2026 को बंद हो रहा है। कंपनी इस इश्यू से ₹30,213 करोड़ जुटाने जा रही है। ये रकम हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) के ₹27,870 करोड़ के IPO से भी ज्यादा है, जो 2024 में आया था। Jio का IPO खुलने के करीब 100 मिनट के अंदर ही पूरा सब्सक्राइब हो गया था। इससे पता चलता है कि निवेशकों के बीच इस इश्यू को लेकर शुरुआत से ही दिलचस्पी रही है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;ग्रे मार्केट में जियो प्लेटफॉर्म्स शेयर का प्रीमियम ₹240 के आसपास बताया जा रहा है। अगर ये संकेत लिस्टिंग तक बना रहता है, तो ₹1,119 के इश्यू प्राइस वाला शेयर करीब ₹1,359 पर लिस्ट हो सकता है। यानी निवेशकों को करीब 21.4% के संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत मिल रहा है। हालांकि, GMP कोई गारंटी नहीं है और असली लिस्टिंग प्राइस इससे अलग हो सकता है। IPO का अपर प्राइस बैंड ₹1,119 है। एक लॉट में कुल 12 शेयर हैं और एक लॉट की कीमत ₹13,428 है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;अगर शेयर ₹1,359 पर लिस्ट होता है, तो 12 शेयरों की कुल कीमत ₹16,308 होगी। ₹13,428 के शुरुआती निवेश के मुकाबले यह ₹2,880 ज्यादा है। लेकिन ध्यान दें कि यह सिर्फ GMP पर आधारित एक उदाहरण है। इसमें टैक्स, ब्रोकरेज या अन्य लागू चार्ज शामिल नहीं हैं। अगर शेयर की लिस्टिंग उम्मीद से कम कीमत पर होती है, तो मुनाफा घट सकता है और नुकसान भी हो सकता है। GMP अनौपचारिक होता है। इसमें दिन के दौरान बदलाव हो सकता है और यह जरूरी नहीं कि शेयर बाजार में भी इसी कीमत पर लिस्ट हो।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कंपनी- &lt;/strong&gt;Jio Platforms Ltd&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;IPO में बिडिंग की लास्ट डेट- 2&lt;/strong&gt;3 अक्टूबर 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;फ्रेश शेयर-&lt;/strong&gt; 27 करोड़&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अलॉटमेंट तारीख- &lt;/strong&gt;26 अक्टूबर 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लिस्टिंग तारीख-&lt;/strong&gt; 28 अक्टूबर 2026&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;जियो प्लेटफॉर्म ने इस IPO में पुराने निवेशकों के शेयर बेचने के बजाय नए शेयर जारी किए हैं। यानी यह पूरा इश्यू फ्रेश इश्यू है। कंपनी की योजना जुटाई गई रकम में से करीब ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने या पहले से लिए गए कर्ज का भुगतान करने में करने की है। बाकी रकम सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए रखी जाएगी। इससे कंपनी को अपने कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। कम कर्ज होने से भविष्य में नए कारोबार, नेटवर्क और तकनीक पर खर्च करने की गुंजाइश भी बढ़ सकती है। हालांकि, कंपनी की आगे की कमाई इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह अपने कारोबार को कितनी तेजी से बढ़ाती है और नए निवेश से कितना फायदा कमा पाती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;कई ब्रोकरेज हाउस ने Jio Platforms के IPO को मीडियम से लॉन्ग टर्म के नजरिए से देखने की सलाह दी है। उनकी राय में कंपनी के पास सिर्फ मोबाइल सेवाओं तक सीमित रहने के बजाय कई नए क्षेत्रों में कमाई बढ़ाने का मौका है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने IPO को सब्सक्राइब करने की राय दी है। ब्रोकरेज के मुताबिक, Jio की मजबूत बाजार स्थिति, कमाई में बढ़ोतरी और ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी तथा AI जैसे क्षेत्रों में विस्तार की संभावना कंपनी के लिए अहम है। हालांकि, लंबे समय में निवेशकों को तीन चीजों पर नजर रखनी चाहिए, कंपनी हर ग्राहक से औसतन कितनी कमाई कर रही है, मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी से कमाई कितनी बढ़ती है और डिजिटल सेवाओं से कंपनी कितनी अतिरिक्त कमाई कर पाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर: &lt;/strong&gt;इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सूचना और सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी भी तरह के निवेश की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार और IPO में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या IPO में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[PM Kisan 24th Installment: किसानों का इंतजार खत्म! 30 अक्टूबर को खाते में आएंगे 2,000 रुपये]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/pm-kisan-24th-installment-date-announced-complete-ekyc-for-diwali-gift-photoshow-v5q8b83</link>
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            <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 11:21:10 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[PM Kisan 24th Installment Date 2026: सरकार 30 अक्टूबर को पीएम किसान की 24वीं किस्त जारी करेगी। योग्य किसानों के बैंक खाते में सीधे 2,000 रुपये आएंगे। अधिकारियों ने इसके लिए ई-केवाईसी को जरूरी बताया है। आइए पूरी डिटेल जानते हैं।]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m4st1h9h9hd65b3e3pe55kyr,imgname-pm-kisan-1791867536688.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[PM Kisan 24th Installment Date 2026: सरकार 30 अक्टूबर को पीएम किसान की 24वीं किस्त जारी करेगी। योग्य किसानों के बैंक खाते में सीधे 2,000 रुपये आएंगे। अधिकारियों ने इसके लिए ई-केवाईसी को जरूरी बताया है। आइए पूरी डिटेल जानते हैं।&lt;img&gt;&lt;p&gt;केंद्र सरकार दिवाली से पहले देश के करोड़ों किसानों को बड़ा तोहफा देने जा रही है। पीएम किसान सम्मान निधि का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर 30 अक्टूबर को 24वीं किस्त जारी करने का ऐलान किया है। पीएम किसान के ऑफिशियल एक्स (X) अकाउंट ने यह जानकारी दी है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;सरकार ने पिछले साल 20 जून को 23वीं किस्त का पैसा किसानों के खाते में डाला था। तब से किसान अगली किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सबको उम्मीद थी कि दशहरा पर यह पैसा मिलेगा, लेकिन कुछ कारणों से देरी हो गई। अब सरकार दिवाली और छठ महापर्व से ठीक पहले यह फंड जारी कर रही है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सरकार योग्य किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद देती है। सरकार यह पैसा हर चार महीने में 2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजती है। इस डीबीटी (DBT) सिस्टम से किसानों को बिना किसी बिचौलिए के सीधा फायदा मिलता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;बिना किसी रुकावट के पैसा पाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी काम पूरे करने होंगे। किसानों को अपना ई-केवाईसी (e-KYC) और बैंक खाते से आधार सीडिंग कराना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, लैंड वेरिफिकेशन और एनपीसीआई (NPCI) मैपिंग सही होने पर ही समय पर पैसा मिलेगा। अगर ये काम पूरे नहीं हुए, तो आपकी किस्त रुक सकती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;किसान ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आसानी से अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं। सबसे पहले पीएम किसान की वेबसाइट पर जाएं और बेनिफिशियरी स्टेटस पेज खोलें। वहां अपना आधार कार्ड या बैंक अकाउंट नंबर डालकर आप डिटेल देख सकते हैं। आप मोबाइल ऐप पर फेस ऑथेंटिकेशन या ओटीपी के जरिए घर बैठे भी ई-केवाईसी पूरी कर सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Gold Capital Of India: देश का सबसे बड़ा गोल्ड मार्केट कहां है? यहीं से निकले हैं बड़े ब्रांड्स!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/gold-capital-of-india-where-indias-biggest-jewellery-brands-originated-photoshow-vukyh9x</link>
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            <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 12:54:30 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Biggest Jewellery Market in India: भारत में सोना खरीदने का खास महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट कहां है? जानिए उस बाजार के बारे में, जहां सोने के गहनों की सबसे बड़ी रेंज और खरीदारी के शानदार विकल्प मिलते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5p80neytjc4px187hq2rk4w,imgname-gold-capital-1792821712350.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Biggest Jewellery Market in India: भारत में सोना खरीदने का खास महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट कहां है? जानिए उस बाजार के बारे में, जहां सोने के गहनों की सबसे बड़ी रेंज और खरीदारी के शानदार विकल्प मिलते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;भारत में लोग सोने से बहुत प्यार करते हैं। खासकर महिलाएं सोने के गहनों की दीवानी होती हैं। हम शादियों में कपड़ों के साथ-साथ सोने की भी जमकर खरीदारी करते हैं। देश में सोने की इस भारी डिमांड को केरल का 'त्रिशूर' (Thrissur) शहर पूरा करता है। यह शहर आधिकारिक और व्यावसायिक रूप से 'गोल्ड कैपिटल ऑफ इंडिया' (Gold Capital of India) के नाम से मशहूर है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;त्रिशूर देश में सोने के गहने बनाने, थोक व्यापार और रिटेल बिक्री का सबसे बड़ा केंद्र है। लोग इसे 'गोल्डन सिटी ऑफ इंडिया' भी कहते हैं। केरल सरकार के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि त्रिशूर राज्य में सादे सोने के आभूषण बनाने का मुख्य हब है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;प्राचीन काल से ही त्रिशूर के समुद्री मार्गों के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध रहे हैं। 18वीं सदी के अंत में राजा शक्तन तंपुरान (Raja Sakthan Thampuran) ने तत्कालीन कोचीन राज्य की राजधानी रहे इस इलाके को मुख्य स्वर्ण व्यापार केंद्र बनाया। उसी दौर में अलग-अलग जगहों से व्यापारी और पारंपरिक सुनार यहां आकर बस गए। पीढ़ियों से चली आ रही सुनारों की इसी कला ने आज इस शहर को इस मुकाम पर पहुंचाया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आज के कोडुंगल्लूर (Kodungallur) इलाके के पास स्थित प्राचीन मुजिरिस (Muziris) बंदरगाह के जरिए विदेशी व्यापार फला-फूला। अरब और रोमन व्यापारिक संबंधों ने इस इलाके के आर्थिक विकास में बड़ी मदद की। वह दौर बीत जाने के बाद भी, आज के स्थानीय सुनार अपनी कला से नए-नए डिजाइन के गहने बनाकर अपनी खास पहचान बनाए हुए हैं। हाथों से बारीक डिजाइन बनाने और पारंपरिक गहने तैयार करने का उनका यह पेशा पीढ़ियों से चला आ रहा है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;त्रिशूर को 'गोल्ड कैपिटल ऑफ इंडिया' कहने के कई कारण हैं। इस इलाके और इसके आसपास सोने के गहने बनाने वाली हजारों छोटी-बड़ी वर्कशॉप्स मौजूद हैं। देश में बिकने वाले सोने के गहनों का एक बहुत बड़ा हिस्सा यहीं तैयार होता है। हजारों स्थानीय कारीगर और दूसरे राज्यों से आए कुशल कारीगर इसी काम पर निर्भर हैं। यहां काम करने वालों में ज्यादातर सुनार ही हैं। इसके अलावा, केरल के मजबूत को-ऑपरेटिव बैंकिंग सिस्टम ने यहां के स्वर्ण व्यापारियों और निर्माताओं को आसानी से लोन दिया, जिससे यह इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ी।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;आज भारत में मौजूद कई बड़े गोल्ड ब्रांड्स इसी शहर से निकले हैं। कल्याण ज्वैलर्स (Kalyan Jewellers), जोयालुक्कास (Joyalukkas), जोस अलुक्कास (Jos Alukkas) और मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स (Malabar Gold and Diamonds) जैसी दिग्गज ज्वैलरी कंपनियों की शुरुआत यहीं से हुई थी। इन कंपनियों की मुख्य ब्रांच आज भी यहीं मौजूद हैं। इतना ही नहीं, अन्य ब्रांड्स के गहनों का भी ज्यादातर व्यापार यहीं से होता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;24 कैरेट सोना क्या है? गहने कैसे बनते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;खदानों से निकलने वाला शुद्ध सोना बहुत मुलायम होता है। इसे 24 कैरेट सोना कहते हैं। इससे सीधे गहने बनाना मुश्किल होता है, इसलिए सुनार गहने बनाते समय कुछ खास तरीके अपनाते हैं। शुद्ध सोने को थोड़ा सख्त बनाने के लिए कारीगर इसमें तांबा या चांदी मिलाते हैं। इस मिलावट की मात्रा के हिसाब से सोना 22 कैरेट (22K) या 18 कैरेट में बदल जाता है। कारीगर इस धातु के मिश्रण को ऊंचे तापमान पर पिघलाते हैं, फिर इसे पतले तारों या ब्लॉकों में बदलकर मनचाहे सांचों में ढालते हैं। इसके बाद वे गहनों पर खूबसूरत डिजाइन उकेरते हैं और उनमें पत्थर या हीरे जड़ते हैं। अंत में, गहनों में शानदार चमक लाने के लिए उन पर पॉलिश की जाती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[भारत में धड़ाधड़ बिक रही ये 7-सीटर कार, कीमत सिर्फ ₹5.28 लाख, दिवाली से पहले लगी लाइन!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/maruti-eeco-7-seater-car-price-cheapest-for-diwali-2026-articleshow-whl03e7</link>
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            <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 15:30:53 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Best Selling 7 Seater Car India : दिवाली से पहले अगर आप कम बजट में बड़ी फैमिली के लिए 7-सीटर कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो मारुति सुजुकी ईको आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹5.28 लाख है और सितंबर 2026 में इसे 11,040 ग्राहकों ने खरीदा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m5pnm4w7k9jj09kmfjm6vryk,imgname-untitled-design---2026-10-24t152520.925-1792835982215.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;दिवाली और त्योहारी सीजन में अगर आप बड़ी फैमिली के लिए सस्ती 7-सीटर कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो मारुति सुजुकी ईको आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 5.28 लाख रुपये है। सितंबर 2026 में इस वैन की 11,040 यूनिट बिकीं, जिससे यह अपने सेगमेंट में सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ी बनी। पेट्रोल और सीएनजी विकल्प, बड़ा केबिन और कम शुरुआती कीमत इसकी खासियत हैं। हालांकि, दिवाली पर इस कार पर कितना डिस्काउंट या क्या खास ऑफर मिल रहा है, इसकी पुष्टि डीलर से करना जरूरी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दिवाली पर ईको खरीदने से पहले जान लें कीमत&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मारुति सुजुकी ईको की एक्स-शोरूम कीमत करीब 5.28 लाख रुपये से शुरू होकर 6.46 लाख रुपये तक जाती है। इसकी कीमत वेरिएंट और सीटिंग कॉन्फिगरेशन के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;त्योहारी सीजन में कार कंपनियां और डीलर कई बार कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस या दूसरे लाभ देते हैं। लेकिन ईको पर दिवाली 2026 में कोई खास ऑफर उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी अपने नजदीकी मारुति सुजुकी डीलरशिप से जरूर लें। ऑफर शहर, वेरिएंट और स्टॉक के आधार पर अलग हो सकते हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;सितंबर में 11,040 यूनिट बिकीं&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मारुति सुजुकी ईको भारतीय बाजार में लंबे समय से पसंद की जाने वाली वैन है। सितंबर 2026 में इसकी 11,040 यूनिट बिकीं। बड़े परिवारों, छोटे कारोबारियों और ट्रैवल सर्विस से जुड़े लोगों के लिए यह एक उपयोगी विकल्प मानी जाती है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;ईको 5-सीटर और 7-सीटर विकल्पों में आती है। इसमें बड़ा केबिन मिलता है, जिससे यात्रियों के बैठने और सामान रखने के लिए जगह मिलती है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;पेट्रोल और CNG, दोनों का विकल्प&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;ईको में 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन मिलता है। पेट्रोल वेरिएंट करीब 80.76 bhp की पावर और 104.4 Nm का टॉर्क देता है। सीएनजी वेरिएंट में लगभग 71.65 bhp की पावर और 95 Nm का टॉर्क मिलता है। दोनों में 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया गया है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कंपनी के बताए आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल वेरिएंट का माइलेज करीब 19.71 किलोमीटर प्रति लीटर और सीएनजी वेरिएंट का माइलेज 26.78 किलोमीटर प्रति किलोग्राम तक है। असली माइलेज ड्राइविंग और सड़क की स्थिति पर निर्भर करेगा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;परिवार के लिए कितनी उपयोगी है ईको?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मारुति ईको में डुअल फ्रंट एयरबैग, ABS के साथ EBD, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसे सुरक्षा फीचर्स मिलते हैं। बड़ा केबिन और सीएनजी का विकल्प इसे रोजाना इस्तेमाल के लिए उपयोगी बना सकता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अगर आप दिवाली पर नई गाड़ी लेने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ शुरुआती कीमत देखकर फैसला न करें। ऑन-रोड कीमत, इंश्योरेंस, उपलब्ध ऑफर और अपने इस्तेमाल के हिसाब से 5-सीटर या 7-सीटर वेरिएंट की तुलना जरूर करें।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Arvind Raghuwanshi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/business-news/maruti-eeco-7-seater-car-price-cheapest-for-diwali-2026-articleshow-whl03e7"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[8th Pay Commission: हर साल 3% नहीं 6% मिलेगा इंक्रीमेंट? समझें 20 साल की नौकरी में फायदा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/8th-pay-commission-latest-news-6-percent-annual-increment-basic-salary-hike-calculation-articleshow-xzfg0kz</link>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 14:17:27 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;8th Pay Commission Latest News: &lt;/strong&gt;केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 3% की जगह 6% इंक्रीमेंट की मांग है। जानें 20 साल की नौकरी में सैलरी कैसे बढ़ेगी और रिटायरमेंट पर फायदा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kmpn1z88gttrfsa65w33jn9k,imgname-8th-pay-commission-timeline-salary-hike-arrears-fitment-factor-central-government-employees-pension-update-india-4-1774581775624.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;8th Pay Commission Salary Hike News: &lt;/strong&gt;केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी को लेकर 8वें वेतन आयोग से कई बड़ी उम्मीदें हैं। कोई बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहा है, तो कोई महंगाई के हिसाब से सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने की। इसी बीच हर साल मिलने वाले इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग भी चर्चा में है। अगर ये मांग मान ली जाती है, तो लंबे समय तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी और रिटायरमेंट फंड पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। आइए समझते हैं पूरा हिसाब...&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;8वें वेतन आयोग को लेकर क्या चल रहा है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी जारी है। आयोग 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों, यूनियनों और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है। इससे पहले आयोग ने अक्टूबर में बेंगलुरु में भी बैठक की थी। इन बैठकों का मकसद कर्मचारियों की मांगों और सुझावों को समझना है। कर्मचारी संगठनों ने वेतन, भत्तों, पेंशन और सालाना इंक्रीमेंट जैसे मुद्दों पर अपनी मांगें रखी हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हर साल 3% से 6% इंक्रीमेंट की मांग क्यों?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अभी 7वें वेतन आयोग के तहत सामान्य सालाना इंक्रीमेंट की दर 3% है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए इस दर को बढ़ाने पर विचार होना चाहिए। NC-JCM के स्टाफ साइड ने 6% सालाना इंक्रीमेंट की मांग रखी है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने भी इस दर को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इन संगठनों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों की कमाई में समय के साथ बेहतर बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 6% इंक्रीमेंट की मांग मानी जाएगी या नहीं, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;3% और 6% इंक्रीमेंट में कितना होगा अंतर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मान लीजिए किसी केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹50,000 है। अगर हर साल बेसिक सैलरी में 3% की जगह 6% की बढ़ोतरी हो, तो करीब 20 साल की नौकरी में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।&lt;/p&gt;&lt;table&gt; &lt;thead&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;th&gt;नौकरी का समय&lt;/th&gt;   &lt;th&gt;सालाना 3% इंक्रीमेंट&lt;/th&gt;   &lt;th&gt;सालाना 6% इंक्रीमेंट&lt;/th&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/thead&gt; &lt;tbody&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;शुरुआत में&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹50,000&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹50,000&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;5 साल बाद&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹57,964&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹66,911&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;10 साल बाद&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹67,196&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹89,542&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;15 साल बाद&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹77,898&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹1,19,828&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;20 साल बाद&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹90,306&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;करीब ₹1,60,357&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;h2&gt;कितना अंतर बनता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इसमें 20 साल बाद दोनों स्थितियों के बीच बेसिक सैलरी का अंतर करीब ₹70,051 महीना बनता है। ये अंतर इसलिए बढ़ता है, क्योंकि हर साल होने वाली बढ़ोतरी आगे की बढ़ोतरी के लिए भी आधार बनती है। यानी एक साल का इंक्रीमेंट सिर्फ उसी साल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आगे के सालों की बेसिक सैलरी पर भी असर डाल सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि ये गणित 6% इंक्रीमेंट की मांग को मंजूर मानकर नहीं बनाया गया है। यह सिर्फ 3% और 6% की लगातार सालाना बढ़ोतरी के बीच संभावित अंतर समझाने के लिए है। सरकारी वेतन मैट्रिक्स में वास्तविक सैलरी की गणना अलग नियमों के अनुसार हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बेसिक सैलरी बढ़ने से दूसरे फायदे भी बदल सकते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;महंगाई भत्ता (DA): &lt;/strong&gt;DA की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर होती है। अगर बेसिक पे बढ़ता है और DA की लागू दर समान रहती है, तो DA की रकम भी बढ़ सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मकान किराया भत्ता (HRA):&lt;/strong&gt; HRA की रकम लागू नियमों और शहर की कैटेगरी के आधार पर तय होती है। अगर HRA बेसिक पे के प्रतिशत के हिसाब से मिलता है, तो बेसिक बढ़ने पर इसकी रकम भी बढ़ सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पेंशन और ग्रेच्युटी: &lt;/strong&gt;रिटायरमेंट से जुड़े कुछ लाभ अंतिम सैलरी और सर्विस से जुड़े नियमों पर निर्भर करते हैं। इसलिए बेसिक पे में बदलाव का असर इन पर भी पड़ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लीव एनकैशमेंट:&lt;/strong&gt; बची हुई छुट्टियों के बदले मिलने वाली रकम पर भी लागू सेवा नियमों और सैलरी के जुड़े हिस्सों का असर पड़ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;8वें वेतन आयोग से बेसिक सैलरी पर क्या उम्मीदें हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सालाना इंक्रीमेंट के अलावा कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर में बदलाव की मांग भी रखी है। NC-JCM के स्टाफ साइड ने न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 और 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। वहीं BPMS ने न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 और 4 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। आयोग इन सुझावों और दूसरे मुद्दों पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिशें देगा। इसके बाद सरकार तय करेगी कि किन सिफारिशों को स्वीकार करना है और उन्हें किस तरह लागू करना है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब तक आ सकता है 8वें वेतन आयोग का फैसला?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं। इस हिसाब से रिपोर्ट की समय-सीमा मई 2027 के आसपास बनती है। इसके बाद सरकार इस पर फैसला करेगी और लागू करने पर विचार कर सकती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Swiggy Share Price: 1 दिन में ही 17% तक टूटा स्विगी शेयर, 52-वीक लो पर पहुंचा, अब क्या करें?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/swiggy-share-price-crash-hits-52-week-low-brokerage-target-price-what-should-investors-do-articleshow-ycg76gt</link>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 16:07:30 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Swiggy Share Crash: &lt;/strong&gt;स्विगी का शेयर 1 दिन में 17% गिरकर 52-वीक लो पर आ गया है। इंस्टामार्ट के भारी घाटे से निवेशक डरे हुए हैं, लेकिन ब्रोकरेज अभी भी इस शेयर पर बुलिश हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01k1hvhswmxn3vwx07fpfpgemf,imgname-swiggy-share-price-1754019719060.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Swiggy Share Price Target: &lt;/strong&gt;स्विगी के शेयर में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान शेयर करीब 17% तक टूटकर 52 वीक के सबसे लो लेवल ₹174.95 पर पहुंच गया। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। एक तरफ कंपनी की कमाई में अच्छी बढ़त दिख रही है, तो दूसरी तरफ क्विक कॉमर्स बिजनेस में बढ़ते घाटे ने बाजार को परेशान कर दिया है। ऐसे में सवाल है कि जिन निवेशकों के पास स्विगी के शेयर हैं, वे अब क्या करें? और क्या मौजूदा भाव पर शेयर खरीदना सही है? आइए जानते हैं ब्रोकरेज की राय...&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Swiggy Share: एक दिन में ₹7,837 करोड़ की वैल्यू घटी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शुक्रवार को स्विगी के शेयर पर बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा रहा कि शेयर दिन के कारोबार में ₹174.95 तक फिसल गया। दोपहर करीब 2 बजे NSE पर यह ₹183 के आसपास कारोबार कर रहा था। जबकि यह ₹178 पर बंद हुआ। गुरुवार को यह ₹211.40 पर बंद हुआ था। इस गिरावट का असर कंपनी की कुल बाजार वैल्यू पर भी पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, स्विगी का मार्केट कैप करीब ₹7,837 करोड़ घटकर ₹50,541.34 करोड़ रह गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्विगी शेयर 1 साल में करीब आधार रह गया है&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शेयर की गिरावट सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक शेयर करीब 53% गिर चुका है। पिछले एक साल में करीब 57% की गिरावट आई है। वहीं, पिछले एक महीने की बात करें, तो ये करीब 34% तक क्रैश हो चुका है। पिछले एक हफ्ते में ही इसकी गिरावट करीब 22% रही है। यानी जिन निवेशकों ने ऊंचे भाव पर शेयर खरीदा था, उनके लिए ये गिरावट बड़ा झटका हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्विगी शेयर में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह स्विगी के हालिया तिमाही नतीजे (Q2 Results) हैं। कंपनी की कमाई (Revenue) तो 36% बढ़कर 7,571 करोड़ रुपए हो गई है, लेकिन कंपनी का मुनाफा अभी भी गायब है। कंपनी को इस तिमाही में 922 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ है। हालांकि यह घाटा पिछले साल (1,092 करोड़ रुपए) से कम है, लेकिन असली डर 'स्विगी इंस्टामार्ट' (Quick Commerce) को लेकर है। मैक्वेरी (Macquarie) जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि 10 मिनट में सामान पहुंचाने वाले इस बिजनेस में गलाकाट कॉम्पिटिशन है। इस रेस में बने रहने के लिए स्विगी पानी की तरह पैसा बहा रही है। ग्रोथ तो दिख रही है, लेकिन जिस तरह से घाटा बढ़ रहा है, उसने बड़े निवेशकों को डरा दिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Swiggy Share खरीदें या बेचें, क्या है ब्रोकरेज की राय?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;UBS को ₹375 तक जाने की उम्मीद&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;UBS ने स्विगी के शेयर पर अपनी Buy रेटिंग बरकरार रखी है और ₹375 का टारगेट प्राइस दिया है। हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी के तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। फूड डिलीवरी बिजनेस का प्रदर्शन अनुमान के करीब रहा, लेकिन क्विक कॉमर्स में घाटा उम्मीद से ज्यादा रहा। इसके बावजूद कंपनी के कारोबार की ग्रोथ में सुधार के शुरुआती संकेत दिखाई दिए हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Bernstein ने ₹350 का टारगेट दिया&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Bernstein ने स्विगी पर अपनी Outperform रेटिंग बनाए रखी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹430 से घटाकर ₹350 कर दिया है। यानी कंपनी को लेकर पॉजिटिव नजरिया बरकरार है, लेकिन पहले के मुकाबले उम्मीदें कम हुई हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jefferies और Citi का टारगेट ₹330&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जेफरीज ने स्विगी पर Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹435 से घटाकर ₹330 कर दिया है। वहीं, Citi ने भी Buy रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन अपना टारगेट ₹390 से घटाकर ₹330 कर दिया है। दोनों ब्रोकरेज फर्मों के बदले हुए टारगेट बताते हैं कि कंपनी की आगे की ग्रोथ को लेकर उम्मीदों का दोबारा आंकलन किया गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;JPMorgan को ₹310 तक जाने की संभावना&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जेपी मॉर्गन ने स्विगी के शेयर पर ओवरवेट (Overweight) रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, उसने टारगेट प्राइस ₹360 से घटाकर ₹310 कर दिया है। इसका मतलब है कि ब्रोकरेज की राय पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुई है, लेकिन अब वह शेयर से पहले के मुकाबले कम बढ़त की उम्मीद कर रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;CLSA ने ₹262 का टारगेट रखा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;CLSA ने स्विगी पर अपनी 'Accumulate' रेटिंग बनाए रखी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस ₹312 से घटाकर ₹262 कर दिया है। ये बदलाव दिखाता है कि कंपनी के कारोबार में ग्रोथ की संभावना के बावजूद कुछ जोखिमों को ध्यान में रखा जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Bank of America और HSBC ने दिखाई सावधानी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बैंक ऑफ अमेरिका ने स्विगी पर न्यूट्रल (Neutral) रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹275 से घटाकर ₹245 कर दिया है। ब्रोकरेज ने कमजोर तिमाही नतीजों और बढ़ते घाटे को चिंता की वजह बताया है। वहीं, HSBC ने शेयर पर होल्ड (Hold) रेटिंग बनाए रखी है। उसने अपना टारगेट प्राइस ₹315 से घटाकर ₹240 कर दिया है। इन दोनों फर्मों की राय बताती है कि फिलहाल शेयर को लेकर बहुत ज्यादा आक्रामक नजरिया अपनाने से बचने की जरूरत हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Macquarie की राय सबसे सतर्क&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मैक्वरीज ने स्विगी पर अंडरपरफॉर्म (Underperform) रेटिंग बरकरार रखी है और ₹230 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी की ग्रोथ में सुधार दिख रहा है, लेकिन क्विक कॉमर्स बिजनेस में घाटा और नकारात्मक कैश फ्लो चिंता का विषय हैं। कंपनी को ग्राहकों को छूट देने, नेटवर्क बढ़ाने और कॉम्पटिशन में बने रहने के लिए लगातार निवेश करना पड़ रहा है। इससे मुनाफे तक पहुंचने में ज्यादा समय लग सकता है। मैक्वरीज के मुताबिक, फूड डिलीवरी बिजनेस अपेक्षाकृत स्थिर है, लेकिन क्विक कॉमर्स में कारोबार बढ़ने के साथ मुनाफा कमाना अभी बड़ी चुनौती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर: &lt;/strong&gt;ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सेबी रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Gold Price Bihar Today: सोने-चांदी के भाव में बड़ा उलटफेर, चांदी 9 हजार रुपये से ज्यादा टूटी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/business-news/gold-and-silver-prices-today-october-23-latest-rates-in-delhi-mumbai-articleshow-yv4t8w9</link>
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            <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 09:54:30 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gold Silver Rate Today: &lt;/strong&gt;सोने और चांदी की कीमतों में आज भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बाजार खुलने से पहले वायदा कारोबार में चांदी धड़ाम हो गई, जबकि सोने के भाव में भी हल्की गिरावट आई है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krmp6e6qbavpz2ch13xnxsxr,imgname-chatgpt-image-may-15--2026--07-34-22-am--1--1778810829014.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gold Price in India: &lt;/strong&gt;सोने और चांदी की कीमतों में लगातार हलचल मची हुई है। बाजार खुलने से पहले वायदा कारोबार में चांदी के रेट बुरी तरह गिर गए, जबकि सोने में भी हल्की नरमी आई है। इस उतार-चढ़ाव के चलते निवेशकों की नजरें अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के ट्रेंड्स पर टिक गई हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव थोड़ा गिरकर 1,43,303 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले सेशन में यह 1,43,309 रुपये पर बंद हुआ था। बुलियंस (Bullions) के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने का रेट 1,43,630 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 4,035.70 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;वहीं, ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, दिल्ली में सोने की कीमत गिरकर करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गुडरिटर्न्स (Goodreturns) के डेटा पर नजर डालें तो 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,530 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं, 22 कैरेट सोना 1,32,500 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,08,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट पर बिका।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चांदी की कीमतों में भारी गिरावट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चांदी के भाव में आज तगड़ी गिरावट देखने को मिली है। MCX पर चांदी का वायदा भाव 4.42 फीसदी (यानी 9,251 रुपये) टूटकर 1,99,917 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। पिछले ट्रेडिंग सेशन में चांदी 2,09,168 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बुलियंस के मुताबिक, घरेलू बाजार में चांदी की कीमत 2,00,380 रुपये प्रति किलोग्राम रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका रेट 54.52 डॉलर प्रति औंस रहा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने बताया कि दिल्ली में चांदी का भाव गिरकर 2,07,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। यह पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;देश के प्रमुख शहरों में सोने-चांदी के रेट&lt;/h2&gt;&lt;table&gt; &lt;tbody&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;शहर&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;सोना (22k/10g)&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;चांदी (प्रति 1kg)&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;नई दिल्ली&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;1,32,500 रुपये&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;2,25,000 रुपये&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;मुंबई&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;1,32,350 रुपये&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;2,25,000 रुपये&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;चेन्नई&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;1,32,350 रुपये&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;2,25,000 रुपये&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;कोलकाता&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;1,32,350 रुपये&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;2,25,000 रुपये&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;पटना, बिहार&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹1,31,358&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹1,99,910&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;&amp;nbsp;&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;&amp;nbsp;&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;&amp;nbsp;&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;सोने-चांदी के रेट अलग-अलग क्यों होते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अलग-अलग शहरों और बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में फर्क होता है। इसके पीछे लोकल टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च, डीलरों का मार्जिन और रेट बताने का तरीका जैसी वजहें होती हैं। MCX के वायदा भाव, अंतरराष्ट्रीय स्पॉट प्राइस और रिटेल सर्राफा रेट अलग-अलग मार्केट सेगमेंट को दिखाते हैं, इसलिए ये हमेशा एक जैसे नहीं होते।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ग्राहकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने की जूलरी की फाइनल कीमत बताए गए रेट से ज्यादा हो सकती है। इसमें मेकिंग चार्ज और टैक्स भी जुड़ते हैं। इसलिए, खरीदारी करने से पहले अपने लोकल ज्वैलर से ताजा रेट जरूर चेक कर लें ताकि आप सही फैसला ले सकें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Business</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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