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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Sat, 22 Aug 2026 19:01:37 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[हार्वर्ड ग्रेजुएट दीपक रामोला ने बताया आवाज को लेकर बुलिंग का दर्द, टीचर की एक बात ने बदल दी सोच]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/harvard-graduate-deepak-ramola-bullying-over-voice-teacher-changed-his-life-viral-instagram-video-articleshow-0nf87zs</link>
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            <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 19:01:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Deepak Ramola Bullying Story: &lt;/strong&gt;आवाज को लेकर सालों तक ताने सुनने वाले Harvard Graduate दीपक रामोला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर अपनी कहानी बताई है। यह वीडियो अब वायरल हो रहा है। जानिए उन्होंने क्या कहा, देखें वीडियो।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0mb7bvtyz3v7bhwkhn34gb8,imgname-deepak-ramola-bullying-story-1787389259642.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Instagram Viral Video:&lt;/strong&gt; &ldquo;तुम्हें अपनी आवाज पसंद है? तो उसे अपनाओ और अपनी कहानी भी।&rdquo; यही बात क्लास 11 में अंग्रेजी की शिक्षिका ने दीपक रामोला से कही थी। कभी अपनी आवाज को लेकर ताने सुनने वाले लेखक और शिक्षक, हार्वर्ड ग्रेजुएट दीपक रामोला ने अब उसी आवाज को अपनी पहचान बना लिया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए उनके वीडियो ने बुलिंग, आत्मस्वीकार और एक शिक्षक की सही समय पर कही गई बात को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। जानिए पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आवाज को लेकर बचपन से सुनते रहे ताने, क्या कहते थे लोग?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दीपक रामोला ने बताया कि स्कूल के वर्षों में उनकी आवाज का मजाक उड़ाया जाता था। उन्हें कहा जाता था कि उनकी आवाज बच्चे जैसी है, लड़की जैसी लगती है और उसमें पर्याप्त गहराई नहीं है। हाल ही में मिले एक कमेंट ने उन्हें उन पुराने दिनों की याद दिला दी, जब ऐसी बातें उन्हें भीतर तक प्रभावित करती थीं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। एक शिक्षक की संवेदनशीलता ने दीपक को अपनी उसी आवाज को अलग नजर से देखने का मौका दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन थीं वो टीचर, जिन्होंने दीपक की सोच बदल दी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;क्लास 11 में अंग्रेजी की शिक्षिका प्रगति कपूर ने दीपक को रोते हुए देखा। उन्होंने पहले पूछा कि क्या उन्हें अपनी आवाज पसंद है। जब दीपक ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कभी गंभीरता से सोचा ही नहीं, तो शिक्षिका ने उनसे एक और सवाल किया, अगर अगले दिन से वह बोल ही न पाएं तो? दीपक ने जवाब दिया कि वह ऐसा नहीं चाहेंगे, क्योंकि उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है। इसी जवाब के बाद प्रगति कपूर ने उन्हें समझाया कि अगर उन्हें अपनी आवाज पसंद है, तो उन्हें अपनी आवाज और अपनी कहानी दोनों को अपनाना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं बिहार की खुशबू कुमारी? 50% से 90% पहुंचाई स्कूल की हाजिरी, अब राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आवाज के लिए शर्मिंदगी महसूस करना छोड़ दी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दीपक के मुताबिक, उस बातचीत के बाद उन्होंने अपनी आवाज के लिए शर्मिंदगी महसूस करना छोड़ दिया। उनका कहना है कि दूसरों की टिप्पणियां किसी व्यक्ति को तब तक छोटा नहीं कर सकतीं, जब वह खुद अपनी पहचान को स्वीकार कर चुका हो। आज दीपक लेखक और शिक्षक के तौर पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनी बात रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आवाज उन्हें 40 देशों तक ले गई और दुनिया की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में पढ़ाने का मौका मिला। नीचे देखें वायरल वीडियो-&lt;/p&gt;View this post on Instagram&lt;p&gt;A post shared by Deepak Ramola (@deepakramola)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;बेटी ने मां को मैनेजर रखा, 2 हफ्ते में ही निकाला, वजह जानकर समझ आएगा परिवार-करियर का फर्क&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने दीपक की कहानी को अपनी जिंदगी से जुड़ा बताया। कुछ लोगों ने आवाज को लेकर खुद झेली गई टिप्पणियों का अनुभव साझा किया, जबकि कई लोगों ने उन्हें प्रेरणादायक बताया। एक यूजर ने लिखा कि उन्होंने भी अपनी आवाज को लेकर मजाक झेला, लेकिन बाद में उसी चीज को अपनी ताकत बना लिया।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[मुंबई के युवाओं के लिए बड़ा मौका! BMC देगी ₹61,500 महीना, जानें Gen Z Fellowship 2026 की डिटेल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/bmc-announces-gen-z-fellowship-2026-with-rs-61500-stipend-articleshow-11sephg</link>
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            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 11:57:52 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;BMC ने 'जेन Z फेलोशिप 2026' की घोषणा की है। यह 28 साल से कम उम्र के युवाओं को शहरी प्रशासन में अनुभव देगा। चयनितों को ₹61,500 का मासिक स्टाइपेंड मिलेगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kfjf653jcx9tn3rh7zwh55je,imgname-mumbai-pune-women-mayor-bmc-seat-reservation-lottery-controversy-shivsena-03-1769072694386.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;मुंबई में रहने वाले युवाओं के लिए एक बेहतरीन खबर है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने एक खास फेलोशिप प्रोग्राम का ऐलान किया है, जिसका नाम 'BMC जेन Z फेलोशिप 2026' है। इस फेलोशिप का मकसद युवाओं को शहरी प्रशासन के साथ काम करने का मौका देना है। इस प्रोग्राम की सबसे खास बात इसका स्टाइपेंड है। चुने गए उम्मीदवारों को हर महीने 61,500 रुपये दिए जाएंगे, जो किसी भी फेलोशिप के लिए काफी आकर्षक रकम है। यह उन युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर है जो अपने करियर की शुरुआत में ही एक सार्थक अनुभव और अच्छी कमाई चाहते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है ये जेन Z फेलोशिप?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जैसा कि नाम से ही जाहिर है, यह फेलोशिप विशेष रूप से 'जेन Z' यानी आज की युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। इसका उद्देश्य नए और प्रतिभाशाली युवाओं को BMC के कामकाज का हिस्सा बनाना है। इससे न केवल युवाओं को सरकारी कामकाज को करीब से देखने का मौका मिलेगा, बल्कि प्रशासन को भी नए विचारों और ऊर्जा का लाभ होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह फेलोशिप 2026 के लिए है, जो दिखाता है कि यह एक भविष्य की योजना है। इसके जरिए BMC शहर के विकास और प्रशासन में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है। यह एक तरह से प्रशासन और युवाओं के बीच एक पुल का काम करेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन कर सकता है आवेदन?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;BMC ने इस फेलोशिप के लिए उम्र सीमा तय कर दी है। जो भी युवा इस प्रोग्राम के लिए आवेदन करना चाहता है, उसकी उम्र आवेदन के समय 28 साल से कम होनी चाहिए। यह शर्त साफ तौर पर युवा और हाल ही में ग्रेजुएट हुए छात्रों को लक्षित करती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हालांकि, इस फेलोशिप के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और आवेदन की पूरी प्रक्रिया क्या होगी, इस पर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल सिर्फ उम्र सीमा और स्टाइपेंड की रकम की घोषणा की गई है। उम्मीद है कि BMC जल्द ही बाकी की जानकारी भी जारी करेगी। इसलिए, इच्छुक उम्मीदवारों को आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखनी चाहिए।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[H-1B Visa: अमेरिका में गई नौकरी, हॉस्टल में की सफाई! 15 मिनट के फोन कॉल ने बदली भारतीय की ज़िंदगी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/indian-on-h1b-visa-loses-job-in-us-works-as-cleaner-to-survive-articleshow-2120dk0</link>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 16:40:41 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;अमेरिका में H-1B नौकरी खोने पर विनय माहेश्वरी को 60 दिनों में नया काम खोजना था। वीज़ा के कारण नौकरी न मिलने और पैसे खत्म होने पर उन्होंने हॉस्टल में काम किया। भारत लौटकर उन्होंने अपने अनुभव पर 'रीराउटेड' किताब लिखी।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;अमेरिका में विनय माहेश्वरी की अच्छी-खासी जमी-जमाई ज़िंदगी चल रही थी, लेकिन सिर्फ 15 मिनट के एक फोन कॉल ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया। मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले विनय कई सालों से अमेरिका में थे, पहले एक स्टूडेंट के तौर पर और फिर एक कॉर्पोरेट जॉब में। लेकिन फिलाडेल्फिया में जब वह H-1B वीज़ा पर काम कर रहे थे, तो उनके मैनेजर का फोन आया और उन्हें बताया गया कि कंपनी उन्हें नौकरी से निकाल रही है। इस एक कॉल ने उनकी सालों की मेहनत पर अचानक ब्रेक लगा दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;60 दिनों की टेंशन!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;H-1B वीज़ा नियमों के मुताबिक, नौकरी जाने के बाद किसी व्यक्ति के पास नया काम खोजने या देश छोड़ने के लिए सिर्फ 60 दिनों का वक्त होता है। विनय के लिए ये दो महीने उनकी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल और तनाव भरे दिन थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सैकड़ों अर्जियां दीं:&lt;/strong&gt; उन्होंने सैकड़ों कंपनियों में नौकरी के लिए अप्लाई किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;खामोशी मिली:&lt;/strong&gt; शुरुआत में रिक्रूटर दिलचस्पी दिखाते, लेकिन जैसे ही वीज़ा स्पॉन्सरशिप (Work Authorization) की बात आती, वे पूरी तरह चुप हो जाते।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;दबाव का माहौल:&lt;/strong&gt; उन्हें ऐसा महसूस होता था जैसे हर दिन उनके बगल में एक टाइम बम टिक-टिक कर रहा हो।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उन्होंने कंपनी से और समय देने की गुजारिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। विनय को गुस्सा आने के बजाय, अंदर से एक अजीब सा खालीपन महसूस हो रहा था।&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;पैसे खत्म, गुज़ारे के लिए चुना नया रास्ता!&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;अमेरिका में कानूनी तौर पर कुछ और दिन रुकने के लिए उन्होंने B1/B2 विज़िटर वीज़ा के लिए अप्लाई किया। लेकिन बिना काम के दिन बीतते गए और उनकी बचत के पैसे भी तेज़ी से खत्म होने लगे। अमेरिका में टिके रहने का जब कोई और रास्ता नहीं दिखा, तो उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना के ऐशविले में एक हॉस्टल में 'वर्क एक्सचेंज' करने का फैसला किया। इसके तहत उन्हें मुफ्त रहने और खाने के बदले काम करना था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;हालात का तमाशा देखिए:&lt;/strong&gt; सिर्फ दो महीने पहले जो विनय कंपनी के काम से 'मैरियट' जैसे लक्ज़री होटलों में रुकते थे, अब वही विनय हॉस्टल के कमरे साफ करने और पोछा लगाने की स्थिति में आ गए थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मानसिक शांति मिली:&lt;/strong&gt; भले ही हालात बदल गए थे, लेकिन हॉस्टल के इन दिनों ने उन्हें एक नई ताज़गी दी। वहां मौजूद लोगों को H-1B वीज़ा या नौकरी की डेडलाइन जैसी बातों से कोई मतलब नहीं था। वीज़ा स्टेटस के तनाव के बिना, वह वहां आने वाले यात्रियों से खुलकर मिल-जुल पा रहे थे।&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;किताब 'रीराउटेड' और भारत वापसी!&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;अमेरिका में नौकरी जाने और उसके बाद की चुनौतियों के अनुभव ने उन्हें 'रीराउटेड' (Re-routed) नाम की एक किताब लिखने के लिए प्रेरित किया। पिछले साल के आखिर में वह भारत लौट आए। उन्होंने देखा कि रेडिट (Reddit) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर H-1B वीज़ा खोने वाले कई भारतीयों की कहानियां तो हैं, लेकिन मुख्यधारा में इमिग्रेशन से जुड़ी बहसों में इन बातों का ज़िक्र तक नहीं होता।&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;ज़िंदगी का नया पड़ाव!&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;विनय अपनी किताब के ज़रिए उस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके बारे में कोई बात नहीं करता। वह कहते हैं, &quot;हर कोई अमेरिका जाने की बात करता है, लेकिन वहां से लौटने की नौबत आ जाए तो क्या होता है, इस पर कोई चर्चा नहीं करता।&quot; आज विनय माहेश्वरी भारत में हैं और हिम्मत के साथ अपनी ज़िंदगी का एक नया अध्याय लिख रहे हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[फेस्टिव सीजन में 2.7 लाख नौकरियां! इन सेक्टर्स में मिलेंगे सबसे ज्यादा मौके]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/festive-season-2026-27-lakh-temporary-jobs-in-india-ecommerce-logistics-quick-commerce-retail-banking-articleshow-3gng3sg</link>
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            <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 17:49:51 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;त्योहारी सीजन में 2.5-2.7 लाख अस्थायी नौकरियां आएंगी, जो पिछले साल से 15-20% ज़्यादा हैं। ई-कॉमर्स व लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में वेतन वृद्धि के साथ मौके मिलेंगे। करीब 25% कर्मचारियों को पक्की नौकरी भी मिल सकती है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;देश में त्योहारों का मौसम फिर से आ गया है। इस बार जश्न के साथ-साथ नौकरी ढूंढ रहे लोगों के लिए भी एक बड़ी खुशखबरी है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस फेस्टिव सीजन में देश में 2.5 लाख से 2.7 लाख तक अस्थायी नौकरियां (temporary jobs) पैदा होंगी। ये मौके ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, क्विक कॉमर्स, रिटेल और बैंकिंग-फाइनेंस जैसे सेक्टर में मिलेंगे। यह रिपोर्ट मशहूर टैलेंट कंपनी Adecco India ने जारी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल फेस्टिव सीजन में 2.16 लाख लोगों को नौकरी मिली थी, जबकि इस साल इसमें 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सैलरी बढ़ेगी, कई भाषा जानने वालों की डिमांड&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नौकरियों के साथ-साथ इस फेस्टिव सीजन में सैलरी में भी बढ़ोतरी होगी। मेट्रो शहरों में 12-15% तक और दूसरे शहरों में 8-10% तक सैलरी बढ़ने की उम्मीद है। इस बार नई तरह की नौकरियों के बजाय, पहले से मौजूद सेल्स, कस्टमर सपोर्ट, फील्ड सेल्स, डिलीवरी और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेटर जैसे पदों पर ज़्यादा लोगों की ज़रूरत होगी। जिन लोगों को हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मराठी जैसी कई भाषाएं आती हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। डिजिटल जानकारी रखने वालों को भी फ़ायदा मिलेगा। जल्दी सीखने की क्षमता और अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स इस बार नौकरी पाने में अहम भूमिका निभाएंगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पक्की नौकरी का भी मौका!&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हालांकि, कंपनियों के सामने एक चुनौती भी है। उन्हें शिकायत है कि बाज़ार में नौकरियां तो बहुत हैं, लेकिन अच्छे उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। करीब 80% कंपनियां इस समस्या का सामना कर रही हैं। लेकिन जिन्हें नौकरी मिलेगी, उनके लिए एक और अच्छी खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, फेस्टिव सीजन में अस्थायी तौर पर काम शुरू करने वाले 25% लोगों को भविष्य में स्थायी नौकरी भी मिल सकती है। Adecco India ने यह रिपोर्ट अपने 100 से ज़्यादा क्लाइंट्स से मिले डेटा और भरोसेमंद मार्केट रिसर्च के आधार पर तैयार की है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[कौन हैं 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता? किस राज्य से कितने नाम, देखें पूरी लिस्ट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/national-teachers-award-2026-winners-state-wise-full-list-articleshow-8kv2c1d</link>
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            <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 11:28:32 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;National Teachers Award 2026 State Wise List:&lt;/strong&gt; 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के 48 विजेता कौन हैं? किस राज्य से कितने शिक्षक चुने गए? देखें पूरी लिस्ट, चयन प्रक्रिया और 5 सितंबर के सम्मान की खास बातें।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;National Teachers Award 2026 Full List: &lt;/strong&gt;5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाएगा। इसी मौके पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित करेंगी। इस साल की नेशनल टीचर्स अवॉर्ड लिस्ट खास है, क्योंकि इसमें देश के अलग-अलग राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के संगठनों से चुने गए शिक्षक शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को सम्मान देना है, जिन्होंने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के साथ विद्यार्थियों के जीवन पर भी उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। जानिए कौन हैं ये शिक्षक जिन्हें मिलेगा नेशनल टीचर्स अवार्ड 2026, देखें पूरी लिस्ट&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता कौन हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बार कुल 48 शिक्षकों का चयन हुआ है। इनमें 26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक हैं। पुरस्कार पाने वाले शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के 6 संगठनों से जुड़े हैं। चयन की प्रक्रिया जिला/क्षेत्रीय स्तर से शुरू होकर राज्य या संगठन स्तर और फिर स्वतंत्र राष्ट्रीय जूरी तक पहुंची। यानी नाम तय करने के लिए तीन स्तरों पर छंटनी की गई। शिक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार आवेदन ऑनलाइन सेल्फ-नॉमिनेशन के जरिए लिए जाते हैं। शिक्षकों को अपने काम से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, गतिविधियों की जानकारी, फोटो, वीडियो और अन्य प्रमाणों वाला पोर्टफोलियो भी जमा करना होता है। मूल्यांकन में प्रदर्शन से जुड़े मानदंडों को सबसे ज्यादा वजन दिया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;5 सितंबर को ही क्यों दिया जाता है राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के महान दार्शनिक, शिक्षाविद और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वह भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी रहे। इसी दिन देश के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की परंपरा भी जुड़ी हुई है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार योजना की शुरुआत 1958 में हुई थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नौकरी के लिए बार-बार कर रहे हैं Apply, फिर भी जवाब नहीं? समझिए क्या होता है 'Ghost Job'&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2026 में किन-किन शिक्षकों को मिलेगा सम्मान? पूरी लिस्ट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;1 जे प्रकाश राव- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह&lt;/p&gt;&lt;p&gt;2 राजेश कौलुरी- आंध्र प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;3 याकू तम- अरुणाचल प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;4 राजेश बोरदोलोई- असम&lt;/p&gt;&lt;p&gt;5 खुशबू कुमारी- बिहार&lt;/p&gt;&lt;p&gt;6 पुष्पा प्रसाद- बिहार&lt;/p&gt;&lt;p&gt;7 राधा राजेश- सीआईएससीई&lt;/p&gt;&lt;p&gt;8 संगीता यादव- सीबीएसई&lt;/p&gt;&lt;p&gt;9 रवि जयसवाल- चंडीगढ़&lt;/p&gt;&lt;p&gt;10 सुनीता यादव- छत्तीसगढ़&lt;/p&gt;&lt;p&gt;11 पटेल पूर्णिमा मोहनलाल- दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव&lt;/p&gt;&lt;p&gt;12 सुमन गोयल- दिल्ली&lt;/p&gt;&lt;p&gt;13 मोहम्मद जफर आलम- एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय&lt;/p&gt;&lt;p&gt;14 महादेव हनमंत शिंदे- गोवा&lt;/p&gt;&lt;p&gt;15 नितिनकुमार महेंद्रकुमार पाठक- गुजरात&lt;/p&gt;&lt;p&gt;16 अनिल कौशिक- हरियाणा&lt;/p&gt;&lt;p&gt;17 मंजरी वी महाजन- हिमाचल प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;18 मोहम्मद अयाज रैना- जम्मू और कश्मीर&lt;/p&gt;&lt;p&gt;19 मुनमुन भट्टाचार्य- झारखंड&lt;/p&gt;&lt;p&gt;20 रत्नाकुमारी एस- कर्नाटक&lt;/p&gt;&lt;p&gt;21 अमुथा जे- केन्द्रीय विद्यालय संगठन&lt;/p&gt;&lt;p&gt;22 डॉ. मनीषा खेत्रपाल- केन्द्रीय विद्यालय संगठन&lt;/p&gt;&lt;p&gt;23 सुनील कुमार केपी- केरल&lt;/p&gt;&lt;p&gt;24 मोहम्मद मुस्तफा कुमाल- लद्दाख&lt;/p&gt;&lt;p&gt;25 डॉ. अर्चना शुक्ला- मध्य प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;26 शैलेन्द्र प्रताप सिंह- मध्य प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;27 डॉ. कविता नरसिंगराव गित्ते- महाराष्ट्र&lt;/p&gt;&lt;p&gt;28 कुंडा जयवंत बच्छाव- महाराष्ट्र&lt;/p&gt;&lt;p&gt;29 वांग्लेमबम गोबिन सिंह- मणिपुर&lt;/p&gt;&lt;p&gt;30 लालनुनमावी- मिजोरम&lt;/p&gt;&lt;p&gt;31 आर रोनाल्ड मेरु- नागालैंड&lt;/p&gt;&lt;p&gt;32 वैभव वसंतराव कुलकर्णी- नवोदय विद्यालय समिति&lt;/p&gt;&lt;p&gt;33 पदराज उमाकांत नायक- ओडिशा&lt;/p&gt;&lt;p&gt;34 गणेशन एस- पुडुचेरी&lt;/p&gt;&lt;p&gt;35 दिनेश कुमार- पंजाब&lt;/p&gt;&lt;p&gt;36 डॉ. दिव्येन्दु सेन- राजस्थान&lt;/p&gt;&lt;p&gt;37 डॉ. वर्तिका गुलाटी- राजस्थान&lt;/p&gt;&lt;p&gt;38 शिवप्रसाद अरविंद टिंगरे- सैनिक स्कूल&lt;/p&gt;&lt;p&gt;39 सुषमा तमांग- सिक्किम&lt;/p&gt;&lt;p&gt;40 थंगा राज एम- तमिलनाडु&lt;/p&gt;&lt;p&gt;41 भवानी बोमपल्ली- तेलंगाना&lt;/p&gt;&lt;p&gt;42 रंजन देबनाथ- त्रिपुरा&lt;/p&gt;&lt;p&gt;43 डा. रेनू त्रिपाठी- उत्तर प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;44 डा. इफ्तखार खान- उत्तर प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;45 शालिनी कुशवाह- उत्तर प्रदेश&lt;/p&gt;&lt;p&gt;46 गबर सिंह- उत्तराखंड&lt;/p&gt;&lt;p&gt;47 पलाश चौधरी- पश्चिम बंगाल&lt;/p&gt;&lt;p&gt;48 शांतनु पात्र- पश्चिम बंगाल&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;बेटी ने मां को मैनेजर रखा, 2 हफ्ते में ही निकाला, वजह जानकर समझ आएगा परिवार-करियर का फर्क&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे देख सकेंगे नेशनल टीचर्स अवार्ड 2026 समारोह?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;5 सितंबर के पुरस्कार समारोह में सम्मानित शिक्षकों के काम और उपलब्धियों पर आधारित शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का समारोह हर साल शिक्षक दिवस पर आयोजित किया जाता है और राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति द्वारा मेधावी शिक्षकों को सम्मानित करने की परंपरा रही है। इस साल भी देशभर के शिक्षक इस समारोह पर नजर रखेंगे।नेशनल टीचर्स अवार्ड 2026 से जुड़ी पूरी जानकारी शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[कौन हैं लक्ष्मणन मेय्यप्पन? 16 साल की उम्र में रचा इतिहास, बने दुनिया के सबसे कम उम्र के चार्टर्ड एकाउंटेंट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-lakshmanan-meyyappan-youngest-chartered-accountant-at-16-education-career-family-details-articleshow-ccwlqyc</link>
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            <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 18:54:35 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Who is Lakshmanan Meyyappan: &lt;/strong&gt;लक्ष्मणन मेय्यप्पन कौन हैं? 16 साल की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के Chartered Accountant बनने वाले मेय्यप्पन की पढ़ाई, रिकॉर्ड, करियर और फैमिली के बारे में जानें।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Lakshmanan Meyyappan Chartered Accountant: &lt;/strong&gt;जब ज्यादातर बच्चे 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई और करियर को लेकर विकल्प तलाश रहे होते हैं, उसी उम्र में लक्ष्मणन मेय्यप्पन एक प्रोफेशनल अकाउंटिंग क्वालिफिकेशन पूरी कर चुके थे। दुबई के रहने वाले मेय्यप्पन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर मान्यता दी है। उन्होंने यह उपलब्धि महज 16 साल और 141 दिन की उम्र में हासिल की। जानिए लक्ष्मणन मेय्यप्पन के बारे में।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;लक्ष्मणन मेय्यप्पन कौन हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लक्ष्मणन मेय्यप्पन की कहानी की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान हुई। 10वीं की बोर्ड परीक्षा पूरी करने के बाद, लॉकडाउन के समय उनकी दिलचस्पी अकाउंटिंग में बढ़ी। PwC Academy की एक प्रोफाइल के मुताबिक, उनकी मां खुद ACCA हैं और उन्होंने घर पर मेय्यप्पन को अकाउंटिंग की शुरुआती बातें समझाईं। यहीं से मेय्यप्पन ने अकाउंटिंग को सिर्फ एक विषय की तरह नहीं, बल्कि करियर के विकल्प के तौर पर देखना शुरू किया। करीब 15 साल की उम्र में उन्होंने ACCA (Association of Chartered Certified Accountants) की पढ़ाई शुरू की और लगभग एक साल में इसे पूरा कर लिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एक रिकॉर्ड के बाद भी नहीं रुकी पढ़ाई&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ACCA पूरी करना उनके लिए मंजिल नहीं बना। इसके बाद उन्होंने CFA चार्टर हासिल किया और अब फाइनेंस में MSc की पढ़ाई कर रहे हैं। यानी कम उम्र में रिकॉर्ड बनाने के बावजूद उनका फोकस सिर्फ उपलब्धि दर्ज कराने पर नहीं रहा, बल्कि वित्तीय क्षेत्र की समझ को लगातार मजबूत करने पर बना हुआ है। मेय्यप्पन के मुताबिक, उन्होंने कभी प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन को किसी दौड़ की तरह नहीं देखा। उनके लिए असली लक्ष्य यह समझना रहा कि वित्तीय दुनिया वास्तविक परिस्थितियों में कैसे काम करती है और ऐसे स्किल डेवलप किए जाएं जो लंबे समय तक काम आएं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;करोड़ों की टेक इंडस्ट्री से स्कूल बस ड्राइवर तक पहुंचा करियर, 25 साल Adobe में काम करने वाले की कहानी वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अब दुबई में फाइनेंस प्रोफेशनल के तौर पर कर रहे काम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ मेय्यप्पन ने प्रोफेशनल दुनिया में भी कदम रखा है। वह दुबई स्थित Century Financial में Senior Research Analyst के रूप में काम कर रहे हैं। उनकी भूमिका में निवेश, रिसर्च और एनालिसिस के साथ फाइनेंशियल मार्केटिंग से जुड़े फैसलों में योगदान देना शामिल है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; ₹37 हजार महीने से ₹2.2 करोड़ तक पहुंची सैलरी, 11 साल में ऐसे बदली सॉफ्टवेयर इंजीनियर की किस्मत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पढ़ाई के बाहर भी है एक अलग शौक&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;फाइनेंस और पढ़ाई के अलावा मेय्यप्पन को घड़ियों का डिजाइन और निर्माण करना भी पसंद है। उनका यह शौक बताता है कि उनकी दिलचस्पियां सिर्फ किताबों और बाजारों तक सीमित नहीं हैं। लक्ष्मणन मेय्यप्पन की कहानी उन छात्रों के लिए खास मायने रखती है जो स्कूल के बाद पारंपरिक डिग्री के साथ-साथ प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन के विकल्प तलाश रहे हैं। उनकी यात्रा यह दिखाती है कि सही रुचि, लगातार सीखने की आदत और व्यावहारिक अनुभव के साथ कम उम्र में भी अकाउंटिंग और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में मजबूत शुरुआत की जा सकती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[रिया अहीर: ‘वायरल बस गर्ल’ से नए विवाद तक, जानिए पढ़ाई, मॉडलिंग और परिवार की पूरी कहानी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/riya-ahir-biography-who-is-viral-bus-girl-fir-controversy-education-modeling-family-career-articleshow-e8cxm4x</link>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 14:02:09 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Riya Ahir Biography: &lt;/strong&gt;मुंबई में जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान रिया अहीर की वायरल तस्वीर ने उन्हें रातोंरात चर्चा में ला दिया था। जानिए कौन हैं &lsquo;वायरल बस गर्ल&rsquo;? जानिए उनकी पढ़ाई, मॉडलिंग, परिवार और FIR विवाद की पूरी कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0f0e7t1fmf4dd5f2dz3adj1,imgname-riya-ahir-viral-bus-girl-1787210178369.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Riya Ahir Viral Bus Girl:&lt;/strong&gt; मुंबई के जुलाई वाले Gen Z प्रदर्शन की एक तस्वीर ने 27 साल की मॉडल रिया अहीर को अचानक राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया। पुलिस वाहन के सामने खड़ी रिया की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो उनकी पहचान &lsquo;वायरल बस गर्ल&rsquo; के तौर पर होने लगी। अब उनके खिलाफ दर्ज FIR और सोशल मीडिया पर कथित धमकियों को लेकर मामला फिर सुर्खियों में है। मुंबई युवा कांग्रेस ने पुलिस से मुलाकात कर FIR पर कार्रवाई और ऑनलाइन धमकियों की जांच की मांग की है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;22 जुलाई की तस्वीर ने बदली रिया अहीर की पहचान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;22 जुलाई को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में बारिश के बीच छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को ले जा रहे वाहन के सामने रिया अहीर खड़ी दिखाई दीं। उनकी तस्वीर तेजी से सोशल मीडिया पर फैली और देखते ही देखते वह चर्चा का बड़ा चेहरा बन गईं। इसके बाद रिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ प्रेस वार्ता में भी हिस्सा लिया। राजनीति में आने के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की और कहा कि इसका फैसला वक्त करेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;FIR और ऑनलाइन धमकियों पर क्या है नया विवाद?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अब रिया अहीर ने अपने खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग उठाई है। मुंबई युवा कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) मनोज शर्मा से मिला और इस मुद्दे को उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने रिया को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भेजे जा रहे आपत्तिजनक और धमकी भरे संदेशों की शिकायत भी पुलिस के सामने रखी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;रिया का कहना है कि प्रदर्शन के बाद से उन्हें लगातार ऐसे संदेश मिल रहे हैं। उनका दावा है कि शिकायत किए जाने के बावजूद उन्हें पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि FIR वापस लेने की प्रक्रिया और ऑनलाइन धमकियों पर पुलिस की अंतिम कार्रवाई को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ होना बाकी है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Who is Rhiya Ahir? आखिर क्यों खौफ में है Gen Z वायरल गर्ल रिया अहीर, पहुंचीं थाने&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रिया अहीर का एजुकेशन: पढ़ाई से थिएटर और मॉडलिंग तक का सफर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिया अहीर सिर्फ मॉडल के तौर पर ही सक्रिय नहीं रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की है और करीब 13 साल तक थिएटर से जुड़ी रही हैं। वह अभिनय के क्षेत्र में भी काम कर चुकी हैं। रिया ने दीदी (क्राइम एंड जस्टिस) नाम की शॉर्ट फिल्म में भी अभिनय किया है, जिसकी कहानी ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित सोशल ड्रामा है। मॉडलिंग के साथ रिया अपना फैशन ब्रांड Rhiyasath भी चलाती हैं। यानी उनकी पहचान केवल सोशल मीडिया की वायरल तस्वीर तक सीमित नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं रिया अहीर, जो नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट में पुलिस वैन रोक बनीं इंटरनेट सेंसेशन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रिया अहीर की फैमिली&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिया के पिता राजकुमार ITBP में अधिकारी बताए जाते हैं। उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा से जुड़ा है, जबकि परिवार मुंबई में रहता है। उनके परिवार के कई सदस्यों के सेना से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है। वायरल तस्वीर के बाद रिया की सोशल मीडिया लोकप्रियता में भी अचानक उछाल आया। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स कुछ ही दिनों में करीब 3 हजार से बढ़कर 2.2 लाख तक पहुंच गए थे। इस तरह एक प्रदर्शन की तस्वीर ने उनकी सार्वजनिक पहचान, मॉडलिंग करियर और राजनीतिक चर्चा तीनों को एक साथ नई दिशा दे दी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अब नजर इस बात पर है कि रिया अहीर के खिलाफ FIR को लेकर पुलिस क्या कदम उठाती है और कथित ऑनलाइन धमकियों की शिकायत में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[64 की उम्र में MTech कर टॉप-10 में आए, हर हफ्ते 1000 KM सफर; अब IIM Lucknow लक्ष्य]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/64-year-old-man-completes-mtech-top-10-student-now-targets-iim-lucknow-articleshow-g9bf3fd</link>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 17:34:53 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;64 year Old Man Viral Story:&lt;/strong&gt; 64 की उम्र में MTech पूरा कर टॉप-10 में जगह बनाने वाले अधिकारी की प्रेरणादायक कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। नौकरी, 1000 KM साप्ताहिक सफर के बीच अब उनका लक्ष्य IIM Lucknow में एडमिशन लेना है। जानिए&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0fgy22p9hcahzyz3sjw6sch,imgname-64-year-old-man-completes-mtech-1787227474006.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;64 Year Old Man Completes MTech: &lt;/strong&gt;64 साल की उम्र में जब ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के बाद सुकून भरी जिंदगी की ओर बढ़ते हैं, उत्तर प्रदेश के एक अधिकारी ने पढ़ाई को अपनी अगली मंजिल बना लिया। नौकरी, लगातार सफर और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने MTech पूरा किया और अपनी क्लास के टॉप 10 छात्रों में जगह बनाई। खास बात यह है कि उनकी क्लास में ज्यादातर छात्र उनसे करीब आधी उम्र के थे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रिटायरमेंट के बाद भी नहीं रुकी सीखने की चाह&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस प्रेरक कहानी को उनके बेटे शशांक श्रीवास्तव ने X पर शेयर किया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने पिछले महीने MTech की पढ़ाई पूरी की है। 64 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल करना इसलिए भी खास है क्योंकि पढ़ाई के साथ वे पूरी तरह एक्टिव नौकरी भी कर रहे थे। शशांक के मुताबिक, उनके पिता 2022 में रिटायर हुए थे। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में नगर निकायों से जुड़े नियामक निकाय में Deputy CEO की जिम्मेदारी संभाली। इस काम के तहत उन्हें हर सप्ताह सड़क मार्ग से करीब 1,000 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। वह अलग-अलग जिलों में जाकर कामकाज का जमीनी स्तर पर मूल्यांकन करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सफर के बीच पढ़ाई, परीक्षा में शानदार प्रदर्शन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इतने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को पीछे नहीं छोड़ा। लंबे सफर के बीच समय निकालकर नोट्स तैयार करना, पढ़ाई करना और परीक्षाओं की तैयारी करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। शशांक ने अपनी पोस्ट में इसी बात को सबसे खास बताया कि उनके पिता ने उम्र या व्यस्तता को सीखने की राह में बाधा नहीं बनने दिया। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि करियर और उम्र के किसी भी पड़ाव पर नई स्किल सीखने की शुरुआत की जा सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;रिया अहीर: &lsquo;वायरल बस गर्ल&rsquo; से नए विवाद तक, जानिए पढ़ाई, मॉडलिंग और परिवार की पूरी कहानी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;MTech के बाद अब IIM Lucknow का लक्ष्य&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दिलचस्प बात यह है कि MTech पूरा करना उनके लिए अंतिम पड़ाव नहीं है। शशांक के अनुसार, उनके पिता अब IIM Lucknow के एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम में एडमिशन की तैयारी कर रहे हैं। बेटे ने लिखा कि जिस उम्र में आमतौर पर लोग नए लक्ष्य तय करने से ज्यादा अपनी उपलब्धियों को पीछे मुड़कर देखते हैं, उस उम्र में उनके पिता नए कोर्स के लिए आवेदन कर रहे हैं। नीचे देखें वायरल पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;My dad completed his MTech last month. At 64. Top 10 in a class where the average student is half his age.And this is not a retired man with free time on his hands.After retiring in 2022, he joined back as Deputy CEO of the regulatory body overseeing municipal corporations in&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Shashank Srivastava (@ThatSalariedGuy) August 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;बेटी की स्कूल फीस 14 लाख रु.! मां ने वीडियो में बताया पूरा हिसाब, सुनकर उड़ जाएंगे होश&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोशल मीडिया पर लोगों ने बताया प्रेरणादायक&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;X पर इस कहानी को लोगों ने खूब सराहा। कई यूजर्स ने इसे अपनी पढ़ाई और करियर से जोड़ते हुए बताया कि यह उपलब्धि उन्हें दोबारा सीखने के लिए प्रेरित करती है। एक यूजर ने शेयर किया कि 50 की उम्र में उन्होंने भी कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई शुरू की है, लेकिन बिजनेस के कारण समय निकालना चुनौती बन रहा है। कई लोगों ने 64 वर्षीय छात्र की लगन को मिसाल बताया। इस कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और खुद को अपडेट रखने की इच्छा ही असली ताकत है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/64-year-old-man-completes-mtech-top-10-student-now-targets-iim-lucknow-articleshow-g9bf3fd"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Mandya University: 'इसे बंद कर मैसूर यूनिवर्सिटी में मिला दो!', लेक्चरर और सुविधाओं की कमी पर भड़के स्टूडेंट्स]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/mandya-university-students-protest-lack-of-teachers-and-facilities-demand-merger-with-mysore-university-articleshow-gflzqga</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/career/mandya-university-students-protest-lack-of-teachers-and-facilities-demand-merger-with-mysore-university-articleshow-gflzqga</guid>
            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:12:44 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;मांड्या यूनिवर्सिटी में लेक्चरर व सुविधाओं की कमी के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। 20 दिन बाद भी क्लास शुरू न होने से वे नाराज हैं और नियमित पढ़ाई व सिलेबस पूरा करने की मांग कर रहे हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0epszfkwq8f8m957wvzv641,imgname-mandya-university-1787200077299.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मांड्या&lt;/strong&gt;: मांड्या यूनिवर्सिटी में बदइंतजामी और क्लास शुरू न होने से नाराज सैकड़ों छात्रों ने बुधवार को भारतीय विद्यार्थी संघ के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया। शहर में मांड्या यूनिवर्सिटी के सामने धरने पर बैठे छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनकी मांग थी कि मांड्या यूनिवर्सिटी को बंद कर वापस मैसूर यूनिवर्सिटी में मिला दिया जाए। छात्रों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, &quot;एडमिन बिल्डिंग में सिर्फ खाली दीवारें हैं। न लेक्चरर हैं, न कोई सुविधा और पीने का पानी तक नहीं है।&quot; छात्रों ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि जरूरी सुविधाएं दिए बिना यूनिवर्सिटी प्रशासन उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;लेक्चरर की भारी कमी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;छात्रों ने बताया कि कॉलेज खुले 20 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हुई है। लेक्चरर की भारी कमी है। कॉलेज में साफ-सफाई का भी बुरा हाल है और पीने के पानी की किल्लत बनी हुई है। उन्होंने चिंता जताई कि मांड्या यूनिवर्सिटी में इन शैक्षणिक और बुनियादी समस्याओं के चलते उनकी पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक छात्र ने कहा, &quot;जब यह मैसूर यूनिवर्सिटी के तहत था, तब सब कुछ ठीक था। मांड्या यूनिवर्सिटी बनने के बाद क्लास में पढ़ाने के लिए लेक्चरर ही नहीं हैं। यह यूनिवर्सिटी 'ऊपर से चकाचक, अंदर से खोखला' जैसी हो गई है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;छात्रों ने मांग की कि कॉलेज की क्लासें तय टाइम-टेबल के हिसाब से नियमित रूप से शुरू की जाएं। छात्रों के लिए दोपहर के खाने का एक निश्चित समय तय हो और परीक्षा से पहले सभी विषयों का सिलेबस पूरा किया जाए।&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर को सौंपा ज्ञापन&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;छात्रों ने एक ज्ञापन सौंपकर मांग की कि परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय और सही मार्गदर्शन दिया जाए। इसके अलावा, जरूरी स्टडी मटेरियल, मॉडल क्वेश्चन पेपर और तैयारी के लिए प्री-एग्जाम भी कराए जाएं। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि 75% से ज्यादा अटेंडेंस वाले कई छात्रों के हर साल बैक-लॉग आ रहे हैं। इस समस्या को ठीक किया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;प्रदर्शन के दौरान कॉलेज के छात्र आनंद ने कहा, &quot;मांड्या के विधायक पी. रविकुमार ने कहा था कि हमें मैसूर के अधीन क्यों रहना चाहिए, हम मांड्या यूनिवर्सिटी को बचाएंगे। लेकिन यहां छात्रों को जरूरी सुविधाएं तक नहीं दी गईं। हमारे लिए कोई भी यूनिवर्सिटी मायने नहीं रखती, पढ़ाई मायने रखती है। हमें फौरन लेक्चरर और लैब की सुविधा चाहिए।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक अन्य छात्र एन.यू. हरीश ने कहा, &quot;मांड्या यूनिवर्सिटी की हालत 'ऊंची दुकान, फीके पकवान' जैसी है। दूसरे विश्वविद्यालयों में दो-दो विषय पूरे हो चुके हैं और हमारे यहां एक भी क्लास शुरू नहीं हुई है। दिसंबर में परीक्षा है, हम तैयारी कैसे करेंगे? कोई टेस्ट भी नहीं हुआ है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यूनिवर्सिटी के एक सीनियर छात्र आलोक कुमार ने आरोप लगाया, &quot;क्लास के लिए कोई टाइम-टेबल नहीं है। लंच का समय भी तय नहीं है। पहले भी सिलेबस पूरा नहीं कराया गया, जिससे छात्र फेल हो रहे हैं। कॉलेज में अनुभवहीन लेक्चरर हैं। साइंस ब्लॉक में कंप्यूटर ठीक से काम नहीं करते। क्लासरूम और टॉयलेट गंदे पड़े हैं।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कॉलेज में सुविधाएं नहीं दी गईं और पढ़ाई ठीक से शुरू नहीं हुई, तो वे आने वाले दिनों में 'स्टूडेंट पावर' दिखाएंगे। एक छात्रा नित्या ने बताया कि यूनिवर्सिटी में पीने के पानी की गंभीर समस्या है। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स, किसी भी ब्लॉक में पीने का साफ पानी नहीं है, जिससे छात्रों को काफी परेशानी हो रही है। एक और छात्रा शुभितारम ने कहा, &quot;कॉलेज खुले 20 दिन हो गए, लेकिन कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। कोई आता है, पढ़ाता है और चला जाता है। लेकिन ठीक से पढ़ाने वाले लेक्चरर नहीं हैं।&quot; छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे चार सेमेस्टर की पूरी फीस ले ली गई है, लेकिन लैब में ट्रेनिंग का मौका नहीं दिया जा रहा। इस प्रदर्शन में भारतीय विद्यार्थी संघ के बी.एस. मंजू समेत सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल हुए।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[मुंबई में 3 घर, 700 ग्राम सोना और करोड़ों की नेटवर्थ! किस्मत बदलने वाली Reddit पोस्ट वायरल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/indian-management-consultant-net-worth-1-crore-to-7-5-crore-middle-east-job-salary-viral-reddit-post-articleshow-h3hmy4a</link>
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            <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 13:11:58 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Viral Post ₹1 Crore to ₹7.5 Crore Net Worth: &lt;/strong&gt;रेडिट पर एक भारतीय कंसल्टेंट की पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे ₹1 करोड़ की नेटवर्थ से ₹7.5 करोड़ तक का सफर तय किया। 37 साल के भारतीय कंसल्टेंट ने मिडिल ईस्ट में अपने करियर, कमाई और सेविंग्स की कहानी शेयर की है। जानें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m09ttfxdjdcshxdynq1zrw4d,imgname-viral-post--1-crore-to--7.5-crore-net-worth-1787036516269.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Viral Reddit Post: &lt;/strong&gt;करियर की शुरुआत ₹10 लाख की सैलरी से करने वाले 37 वर्षीय भारतीय मैनेजमेंट कंसल्टेंट ने Reddit पर अपनी कमाई, सेविंग्स और निवेश का पूरा सफर शेयर किया है। उनका दावा है कि मिडिल ईस्ट जाने के बाद सिर्फ ढाई साल में उनकी नेटवर्थ करीब ₹6.5 करोड़ बढ़ गई। जानिए उन्होंने मिडिल ईस्ट करियर के बारे में क्या बताया और इतनी जल्दी-जल्दी कैसे बढ़ी उनकी दौलत।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;22 की उम्र में ₹10 लाख से शुरू हुआ सफर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Reddit के r/Indian_flex पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, इस प्रोफेशनल ने 22 साल की उम्र में ग्रेजुएट ट्रेनी के तौर पर करियर शुरू किया था। उस समय उनका सालाना पैकेज करीब ₹10 लाख था। इंजीनियरिंग के बाद MBA करने पर 26 की उम्र में उन्होंने मैनेजमेंट कंसल्टिंग का रुख किया और उनकी कमाई बढ़कर लगभग ₹25 लाख सालाना हो गई। इसके बाद 29 साल की उम्र में उन्होंने कंसल्टिंग छोड़कर इंडस्ट्री में नौकरी की। यहां उनकी सैलरी करीब ₹40 लाख थी, जो अगले कुछ वर्षों में बढ़कर ₹65 लाख तक पहुंच गई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भारत में बना करीब ₹1 करोड़ का नेटवर्थ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पोस्ट के अनुसार, भारत में काम करते हुए उन्होंने करीब ₹1 करोड़ की नेटवर्थ तैयार की। इसमें EPF, गोल्ड, इक्विटी और रियल एस्टेट शामिल थे। लेकिन उनके करियर और संपत्ति बनाने की रफ्तार में बड़ा बदलाव 34 साल की उम्र में आया, जब उन्होंने मिडिल ईस्ट में दोबारा मैनेजमेंट कंसल्टिंग शुरू की।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;₹3.5 करोड़ की टैक्स-फ्री कमाई ने बदली तस्वीर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Reddit पोस्ट में शख्स ने बताया कि मिडिल ईस्ट पहुंचने पर उनका सालाना पैकेज करीब ₹3.5 करोड़ यानी लगभग 4 लाख डॉलर था। उन्होंने इसे टैक्स-फ्री इनकम बताया। उनके मुताबिक, अगले करीब ढाई साल में उन्होंने लगभग ₹6.5 करोड़ बचाए। इससे उनकी कुल नेटवर्थ करीब ₹7.5 करोड़ हो गई। हालांकि, ये सभी आंकड़े केवल Reddit यूजर के खुद के दावे हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; ₹37 हजार महीने से ₹2.2 करोड़ तक पहुंची सैलरी, 11 साल में ऐसे बदली सॉफ्टवेयर इंजीनियर की किस्मत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मुंबई में तीन घर, 700 ग्राम गोल्ड और इक्विटी निवेश&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपने मौजूदा एसेट्स की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि मुंबई में उनके पास तीन पूरी तरह पेड-ऑफ प्रॉपर्टीज हैं। इसके अलावा करीब 700 ग्राम गोल्ड है, जिसमें फिजिकल गोल्ड और Sovereign Gold Bonds शामिल हैं। इक्विटी में उनका मौजूदा निवेश करीब ₹30 लाख बताया गया है और उन्होंने संकेत दिया कि आगे वह शेयर बाजार में अपना निवेश बढ़ाना चाहते हैं। नीचे देखें रेडिट पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;From ₹1 Cr at 34 to ₹7.5 Cr at 37: My Middle East Consulting Journeyby u/Nervous_Reality_5965 in Indian_flex&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हर महीने करीब 26 हजार डॉलर कमाई का दावा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब Reddit पर उनसे मौजूदा इनकम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनकी मासिक कमाई करीब 26 हजार डॉलर है, जिसमें सालाना बोनस शामिल नहीं है। विदेश में कमाई को भारत लाने के सवाल पर उन्होंने NRE और NRO अकाउंट के जरिए पैसे ट्रांसफर करने की बात कही। हालांकि, वास्तविक टैक्स और बैंकिंग नियम व्यक्ति की रेजिडेंसी, इनकम के सोर्स और ट्रांजैक्शन नेचर पर निर्भर करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;करोड़ों की टेक इंडस्ट्री से स्कूल बस ड्राइवर तक पहुंचा करियर, 25 साल Adobe में काम करने वाले की कहानी वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस पूरी कहानी का असली आकर्षण सिर्फ ₹7.5 करोड़ की नेटवर्थ तक पहुंचना नहीं है, बल्कि यह समझना भी है कि करियर में सही समय पर लिए गए फैसले, हाई-इनकम जॉब, विदेश में काम करने का मौका और लगातार बचत की आदत किस तरह किसी की संपत्ति बढ़ाने की रफ्तार को कई गुना तेज कर सकती है। भारत में करीब ₹1 करोड़ की नेटवर्थ बनाने के बाद मिडिल ईस्ट जाने से उनकी कमाई और सेविंग्स दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। हालांकि, यहां यह बात साफ रखना जरूरी है कि कमाई, निवेश, संपत्ति और बचत से जुड़े सभी आंकड़े खुद Reddit यूजर ने शेयर किए हैं। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें सत्यापित वित्तीय रिकॉर्ड या आम लोगों के लिए तय फॉर्मूले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह कहानी एक व्यक्तिगत अनुभव और करियर-बेस्ड वेल्थ जर्नी के रूप में ही समझना ज्यादा उचित है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[नौकरी के लिए बार-बार कर रहे हैं Apply, फिर भी जवाब नहीं? समझिए क्या होता है 'Ghost Job']]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/lawmakers-propose-ban-on-frustrating-ghost-job-advertisements-articleshow-iebq444</link>
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            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 19:01:41 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;'घोस्ट जॉब' वे नौकरी के विज्ञापन हैं जिनके लिए कंपनियां असल में भर्ती नहीं कर रही होतीं। यह उम्मीदवारों का समय बर्बाद करता है। इस पर लगाम लगाने के लिए एक नया कानून प्रस्तावित है, जो कंपनियों को पुराने विज्ञापन हटाने के लिए बाध्य करेगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kzdy5qgpmxc81hcjjveejwes,imgname-employee-quit-job-viral-story-1786100506134.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;आपने किसी नौकरी के लिए अप्लाई किया, महीनों बीत गए, कोई जवाब नहीं आया। लेकिन उसी नौकरी का विज्ञापन आपको बार-बार दिख रहा है। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो आप अकेले नहीं हैं। इसे 'घोस्ट जॉब' कहते हैं और अब नौकरी ढूंढने वाले इससे तंग आ चुके हैं। ये वो नौकरियां होती हैं जो असल में या तो मौजूद ही नहीं हैं, या फिर उन्हें भरने में कंपनी की कोई दिलचस्पी नहीं है। फिर भी इनके विज्ञापन लगातार चलते रहते हैं, जिससे उम्मीदवारों का कीमती वक्त और उम्मीदें दोनों बर्बाद होती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ये 'घोस्ट जॉब' का चक्कर क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;'घोस्ट जॉब' यानी वो पद जिसका विज्ञापन तो है, पर भर्ती नहीं हो रही। कई बार तो ये पद पहले ही भर चुका होता है, लेकिन कंपनी उसका विज्ञापन हटाना भूल जाती है। वहीं कई मामलों में, कंपनी सक्रिय रूप से किसी को काम पर रख ही नहीं रही होती। इसकी वजह से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों में भारी हताशा है। वे दर्जनों जगहों पर अप्लाई करते हैं और उन्हें लगता है कि कमी उन्हीं में है, जबकि असल में वो एक ऐसी दौड़ में भाग रहे होते हैं जिसकी कोई फिनिश लाइन ही नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कंपनियां ऐसा करती क्यों हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अब सवाल उठता है कि कंपनियां आखिर ऐसा करती क्यों हैं। इसके पीछे एक नहीं, बल्कि कई वजहें हैं। कुछ कंपनियां बाहर से ये दिखाना चाहती हैं कि वे लगातार तरक्की कर रही हैं और लोगों को काम पर रख रही हैं, भले ही ये सच न हो। एक और बड़ी वजह है 'कैंडिडेट पाइपलाइन' तैयार रखना। यानी कंपनी हमेशा अच्छे उम्मीदवारों की एक लिस्ट अपने पास तैयार रखना चाहती है। ताकि जब कोई कर्मचारी अचानक नौकरी छोड़े, तो तुरंत किसी को उसकी जगह पर रखा जा सके। कई बार एचआर डिपार्टमेंट सिर्फ ये देखना चाहता है कि बाजार में किस तरह का टैलेंट मौजूद है और लोग कितनी सैलरी की उम्मीद कर रहे हैं। और हां, कभी-कभी ये सिर्फ खराब मैनेजमेंट या आलस का भी नतीजा होता है, जहां पुराने विज्ञापनों को हटाने की जहमत कोई नहीं उठाता।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अब लगेगी लगाम, आ रहा है कानून&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बढ़ती समस्या को देखते हुए अब lawmakers यानी कानून बनाने वाले भी हरकत में आ गए हैं। 'घोस्ट जॉब' पर रोक लगाने के लिए एक नए कानून का प्रस्ताव रखा गया है। अगर ये कानून पास हो जाता है तो कंपनियों की मनमानी पर लगाम लग सकती है। इस प्रस्तावित कानून के तहत, कंपनियों को नौकरी भर जाने के बाद या भर्ती प्रक्रिया रोकने के बाद एक तय समय के अंदर विज्ञापन हटाना अनिवार्य होगा। इससे उन फर्जी या पुराने विज्ञापनों से छुटकारा मिलेगा जो सिर्फ नौकरी ढूंढने वालों को परेशान करने का काम करते हैं। ये उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है जो एक अच्छी नौकरी की तलाश में हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/lawmakers-propose-ban-on-frustrating-ghost-job-advertisements-articleshow-iebq444"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[कौन हैं बिहार की खुशबू कुमारी? 50% से 90% पहुंचाई स्कूल की हाजिरी, अब राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-khushboo-kumari-bihar-national-teacher-award-2026-banka-teacher-story-articleshow-k4751i1</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-khushboo-kumari-bihar-national-teacher-award-2026-banka-teacher-story-articleshow-k4751i1</guid>
            <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:45:30 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Khushboo Kumari National Teacher Award 2026:&lt;/strong&gt; बांका की खुशबू कुमारी को 5 सितंबर को राष्ट्रपति से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलेगा। जानिए खुशबू कुमारी कौन हैं और कैसे बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0m8f353ab5pfdphkf4t5yyj,imgname-khushboo-kumari-national-teacher-award-2026-1787386367138.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;National Teacher Award 2026:&lt;/strong&gt; बिहार की दो शिक्षिकाओं का चयन देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए हुआ है। इनमें बांका के बिदायडीह स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय की प्रधान शिक्षिका खुशबू कुमारी भी शामिल हैं। 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के मौके पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू चयनित शिक्षकों को सम्मानित करेंगी। इस बार देशभर से कुल 48 शिक्षकों का चयन किया गया है। जानिए खुशबू कुमारी कौन हैं और उनका योगदान।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन हैं खुशबू कुमारी और क्यों मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बांका जिले के कटोरिया प्रखंड के राधानगर की रहने वाली खुशबू कुमारी पिछले 13 वर्षों से अधिक समय से शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी हैं। फिलहाल वह उर्दू प्राथमिक विद्यालय, बिदायडीह में प्रधान शिक्षिका के तौर पर काम कर रही हैं। इससे पहले करीब 11 साल तक उन्होंने कटोरिया प्रखंड के मध्य विद्यालय कठौन में टीईटी शिक्षिका के रूप में सेवाएं दीं। उनकी पहचान सिर्फ एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि रचनात्मक और बाल-केंद्रित शिक्षण के लिए बनी। उन्होंने बच्चों को किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित रखने के बजाय गीत, अभिनय, गतिविधियों और मनोरंजक शिक्षण सामग्री को पढ़ाई का हिस्सा बनाया। खासकर छोटे बच्चों को नाच-गाकर ककहरा सिखाने का उनका तरीका चर्चा में रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे बदली बिदायडीह स्कूल की तस्वीर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब खुशबू कुमारी ने विद्यालय की जिम्मेदारी संभाली, तब स्कूल में बच्चों की उपस्थिति करीब 50 प्रतिशत थी। संसाधनों की कमी और स्थानीय स्तर की चुनौतियों के बीच उन्होंने स्कूल और अभिभावकों के बीच संवाद मजबूत करने पर जोर दिया। इसके लिए शिक्षकों, विद्यालय समिति और अभिभावकों को साथ लेकर नियमित माता-पिता शिक्षक संगोष्ठी यानी PTM शुरू की गई। लगातार संवाद का असर यह हुआ कि अभिभावकों की स्कूल में भागीदारी बढ़ी और बच्चों की उपस्थिति 90 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई। विद्यालय में बच्चों की नियमितता और अनुशासन को लेकर भी बदलाव देखने को मिला। जूते, टाई और बेल्ट जैसी स्कूल यूनिफॉर्म की जरूरी चीजों के मामले में भी अब 100 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति बताई गई है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है खुशबू कुमारी की पढ़ाने की खासियत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्राथमिक कक्षाओं में सीखने को आसान और रोचक बनाने के लिए खुशबू ने एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग का इस्तेमाल किया। उनके क्लासरूम अध्यापन के वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे हैं। इस नवाचार ने उन्हें स्थानीय स्तर से आगे राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद की। उनका मानना है कि बच्चों के लिए पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय उसे आनंददायक अनुभव बनाया जाना चाहिए। राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयन के बाद उन्होंने इसे सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि स्कूल के बच्चों और बांका की शिक्षा व्यवस्था की उपलब्धि बताया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता? किस राज्य से कितने नाम, देखें पूरी लिस्ट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बिहार से किन दो शिक्षकों का हुआ चयन?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 की जारी सूची में बिहार से दो नाम हैं-&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;खुशबू कुमारी- उर्दू प्राथमिक विद्यालय, बिदायडीह, बांका&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पुष्पा प्रसाद- मिडिल स्कूल कुचायकोट कन्या, गोपालगंज&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;दोनों शिक्षिकाओं को स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय सम्मान के लिए चुना गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता टीचर्स को क्या मिलता है? मेडल से लेकर नकद इनाम तक जानिए सबकुछ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब और कहां मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पोर्टल के अनुसार 2026 की चयन प्रक्रिया में स्वतंत्र राष्ट्रीय ज्यूरी की भूमिका रही। अंतिम चयन के बाद 48 शिक्षकों के नाम घोषित किए गए। पुरस्कार समारोह 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होगा। चयनित शिक्षकों को प्रमाणपत्र, रजत पदक और 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दिए जाने की जानकारी सामने आई है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-khushboo-kumari-bihar-national-teacher-award-2026-banka-teacher-story-articleshow-k4751i1"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[बेटी की स्कूल फीस 14 लाख रु.! मां ने वीडियो में बताया पूरा हिसाब, सुनकर उड़ जाएंगे होश]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/dubai-mom-reveals-staggering-14-lakh-annual-school-fee-for-daughter-in-viral-video-articleshow-nfz1qvs</link>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:06:53 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;दुबई में एक कंटेंट क्रिएटर ने अपनी बेटी की स्कूल फीस का खुलासा किया है। सालाना ट्यूशन फीस 55,000 दिरहम (₹14.34 लाख) है, जिसमें बस और यूनिफॉर्म जैसे अन्य खर्च शामिल नहीं हैं। इस खुलासे ने महंगी शिक्षा पर बहस छेड़ दी है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0emypmhxpfzwet9z2zdapwk,imgname-dubai-life--1--1787198134929.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;प&lt;/strong&gt;ढ़ाना-लिखाना आजकल सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बहुत महंगा हो गया है। हम अक्सर सुनते हैं कि भारत, अमेरिका या यूरोप में प्री-स्कूल से ही बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। इसी बीच, दुबई से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दुबई में रहने वाली कंटेंट क्रिएटर वेरोनिका ने अपनी बेटी की स्कूल की पढ़ाई पर होने वाले सालाना खर्च का ब्योरा सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने बताया कि बेटी की सिर्फ ट्यूशन फीस ही साल में करीब 55,000 दिरहम यानी लगभग 14।34 लाख रुपये है। इसके अलावा स्कूल बस, यूनिफॉर्म और असेसमेंट जैसी चीजों के लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;लाखों में है पढ़ाई का खर्च&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वेरोनिका ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उनसे अक्सर यह सवाल पूछा जाता है, 'दुबई के स्कूल में असल में कितना खर्च आता है?' उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने हाल ही में दुबई के GEMS International School में एडमिशन लिया है। स्कूल ने एडमिशन से पहले एक असेसमेंट के लिए 525 दिरहम (करीब 13,000 रुपये) लिए। इसके बाद, सालाना ट्यूशन फीस 55,000 दिरहम है। वेरोनिका ने यह भी साफ किया कि इस फीस को किश्तों में चुकाने की सुविधा है। लेकिन कहानी सिर्फ ट्यूशन फीस पर खत्म नहीं होती।&lt;/p&gt;इंस्टाग्राम पर यह पोस्ट देखें&lt;p&gt;वेरोनिका | दुबई  (@nika।indubai) द्वारा शेयर की गई एक पोस्ट&lt;/p&gt;&lt;p&gt;घर से स्कूल और स्कूल से घर लाने-ले जाने वाली बस के लिए साल में 12,000 दिरहम (करीब 3।12 लाख रुपये) अलग से देने पड़ते हैं। स्कूल यूनिफॉर्म पर करीब 1,000 दिरहम (लगभग 26,000 रुपये) का खर्च आता है। वेरोनिका कहती हैं कि जिस खर्च ने उन्हें सबसे ज्यादा हैरान किया, वह खाने का था। ट्यूशन फीस में खाना शामिल नहीं है। वह बताती हैं कि बेटी का लंच हर सुबह घर पर तैयार करके लंच बॉक्स में देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर, बेटी की पढ़ाई पर एक साल में करीब 14।34 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;महंगी होती पढ़ाई पर छिड़ी बहस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दुबई में पढ़ाई के खर्च को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों ने कहा कि यह रकम बहुत ज्यादा है, तो वहीं कुछ ने बताया कि दुबई में इससे कम फीस वाले स्कूल भी मौजूद हैं। इसके साथ ही, कई लोगों ने खाड़ी देशों में प्राइवेट एजुकेशन के महंगे होने पर भी अपनी राय रखी। कुछ अन्य यूजर्स ने कहा कि अब पूरी दुनिया में पढ़ाई एक महंगा सौदा बन गई है और पिछले एक दशक में यह खर्च बहुत तेजी से बढ़ा है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[बेटी ने मां को मैनेजर रखा, 2 हफ्ते में ही निकाला, वजह जानकर समझ आएगा परिवार-करियर का फर्क]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/woman-fires-mother-from-career-manager-role-after-two-weeks-articleshow-p11gtpk</link>
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            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 12:31:10 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;एक उभरती कलाकार ने अपनी माँ को करियर मैनेजर बनाया। लेकिन माँ का प्यार और चिंता प्रोफेशनल फैसलों पर भारी पड़ने लगी। इस वजह से, कलाकार को सिर्फ 2 हफ्तों में ही अपनी माँ को नौकरी से निकालना पड़ा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kx3jqkw9qehwzcns0hnadaen,imgname-new-project---2026-07-09t190855.673-1783605481353.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;कहते हैं कि परिवार और प्रोफेशन को हमेशा अलग रखना चाहिए। यह बात सुनने में जितनी आसान लगती है, असल जिंदगी में इसे निभाना उतना ही मुश्किल होता है। ऐसा ही कुछ एक महिला के साथ हुआ, जिसने अपने बढ़ते करियर को संभालने की जिम्मेदारी अपनी मां को सौंप दी, लेकिन सिर्फ दो हफ्तों के अंदर ही उन्हें नौकरी से निकालना पड़ा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह कहानी एक उभरती हुई थिएटर और संगीत कलाकार की है। जब उनका करियर उड़ान भरने लगा तो उन्हें एक मैनेजर की जरूरत महसूस हुई जो उनके काम को व्यवस्थित कर सके और उन्हें बेहतर मौके दिला सके। ऐसे में उन्होंने अपनी मां पर भरोसा जताया और उन्हें अपना करियर मैनेजर नियुक्त कर दिया। शुरुआत में यह एक बेहतरीन आइडिया लगा। आखिर मां से ज्यादा भरोसेमंद और शुभचिंतक कौन हो सकता है? लेकिन जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि मां-बेटी का रिश्ता उनके प्रोफेशनल रिश्ते पर भारी पड़ रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दो हफ्तों में ही क्यों बिगड़ी बात?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मामला तब बिगड़ना शुरू हुआ जब प्रोफेशनल फैसले लेने की बारी आई। एक मैनेजर का काम होता है कलाकार के लिए सबसे अच्छे अवसर तलाशना, भले ही उसके लिए थोड़ी सख्ती या मुश्किल भरे फैसले क्यों न लेने पड़ें। वहीं, एक मां का दिल हमेशा अपने बच्चे की सहूलियत और सुरक्षा के बारे में सोचता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बस यही टकराव इस रिश्ते में भी देखने को मिला। जहां एक मैनेजर को कलाकार को चुनौती देने और उसे उसके कम्फर्ट जोन से बाहर निकालने की जरूरत होती है, वहीं मां का प्यार और चिंता आड़े आने लगी। यह व्यवस्था सिर्फ दो हफ्ते ही चल सकी और कलाकार को यह कड़वा घूंट पीना पड़ा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;'ऐसा नहीं कि उन्हें परवाह नहीं थी'&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपनी मां को नौकरी से निकालने का फैसला लेना आसान नहीं था। महिला ने साफ किया कि उन्होंने यह कदम इसलिए नहीं उठाया कि उनकी मां को उनके करियर की परवाह नहीं थी। बल्कि, असल वजह यह थी कि वह बहुत ज्यादा परवाह करती थीं, लेकिन एक मां की तरह, मैनेजर की तरह नहीं। यह मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक भूमिकाएं जब आपस में मिलती हैं, तो चीजें उलझ जाती हैं। अंत में, कलाकार ने अपने करियर के लिए एक मुश्किल लेकिन जरूरी फैसला लिया और अपनी मां को मैनेजर की भूमिका से मुक्त कर दिया।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[NEET UG Counselling 2026: राउंड 1 सीट मिली तो आगे क्या? Free Exit से Round 2 Upgrade तक, हर सवाल का जवाब]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/neet-ug-counselling-2026-round-1-seat-allotment-result-free-exit-round-2-upgrade-rules-articleshow-p4b4sdi</link>
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            <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 15:00:06 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;MCC NEET UG Counselling 2026:&lt;/strong&gt; NEET UG Counselling 2026 में राउंड 1 सीट मिली तो क्या करें? Free Exit, Upgrade और Round 2 के नियम जानें, कहीं एक गलती भारी न पड़ जाए!&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;NEET UG Counselling 2026 Round 1 Seat Allotment Result: &lt;/strong&gt;मेडिकल काउंसलिंग में सीट मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब क्या करना है? अगर कॉलेज पसंद नहीं है तो क्या बिना नुकसान सीट छोड़ी जा सकती है? Upgrade चाहिए तो क्या करना होगा? Round 2 में सीट बदल गई तो पुरानी सीट वापस मिलेगी या नहीं? इन सभी सवालों के जवाब MCC की काउंसलिंग प्रक्रिया के नियमों में साफ हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि NEET UG Round 1 Seat Allotment के बाद उम्मीदवारों के पास कौन-कौन से विकल्प हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;NEET UG Round 1 Result आज, 19 अगस्त को: सीट मिलने के बाद जल्दबाजी न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;NEET UG Counselling 2026 राउंड 1 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाला है। रिजल्ट आने के बाद उम्मीदवार अपने MCC UG Medical Counselling Portal पर जाकर देख सकेंगे कि उन्हें MBBS या BDS की कौन-सी सीट और कौन-सा कॉलेज मिला है। लेकिन सीट अलॉट होने के बाद सिर्फ रिजल्ट देखना ही काफी नहीं है। उम्मीदवार को यह तय करना होगा कि वह मिली हुई सीट स्वीकार करना चाहता है, राउंड 2 में बेहतर सीट के लिए अपग्रेड लेना चाहता है या राउंड 1 की सीट छोड़ना चाहता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राउंड 1 में Free Exit और Upgradation के नियम क्या हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नीट यूजी काउंसलिंग 2026 में शामिल कैंडिडेट्स के लिए फ्री एग्जिट और अपग्रेडेशन के नियम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। अगर राउंड 1 में मिला कॉलेज या कोर्स आपकी पसंद के मुताबिक नहीं है और आप वहां एडमिशन नहीं लेना चाहते, तो राउंड 1 में Free Exit का फायदा लिया जा सकता है। इसके लिए उम्मीदवार को तय रिपोर्टिंग विंडो में कॉलेज में रिपोर्ट नहीं करना होगा। इस स्थिति में राउंड 1 की सीट छोड़ने पर सुरक्षा राशि यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त नहीं होगी और उम्मीदवार राउंड 2 की काउंसलिंग के लिए भी पात्र रहेगा। यानी सिर्फ राउंड 1 की सीट पसंद नहीं आने पर उम्मीदवार को उस सीट पर जबरन एडमिशन लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह बात खास तौर पर याद रखें कि Free Exit का लाभ Round 1 तक सीमित है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Round 2 में यही गलती भारी पड़ सकती है&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Round 2 में सीट मिलने के बाद नियम अलग हो जाते हैं। अगर उम्मीदवार को Round 2 में सीट अलॉट होती है और वह उस सीट पर ज्वाइन नहीं करता, तो exit with forfeiture की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि उम्मीदवार की सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त हो सकती है। इसलिए राउंड 1 में फ्री एग्जिट देखकर राउंड 2 में भी वही नियम लागू होने की उम्मीद न करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अपग्रेड चाहिए तो राउंड 1 की सीट छोड़कर घर न बैठें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर उम्मीदवार राउंड 1 में मिली सीट से बेहतर कॉलेज चाहता है, तो उसे अपग्रेडेशन का विकल्प चुनना होगा। इसके लिए केवल राउंड 2 में नई च्वाइस भर देना पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार को राउंड 1 में मिली सीट पर निर्धारित समय के भीतर फिजिकल रिपोर्टिंग करनी होगी। एडमिशन की जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, ऑरिजनल डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे, ट्यूशन फीस देनी होगी और राउंड 2 के लिए अपनी अपग्रेडेशन के लिए सहमति देनी होगी। यानी अगर आपका लक्ष्य राउंड 2 में बेहतर सीट पाना है, तो राउंड 1 की अलॉटेड सीट को सुरक्षित रखने के लिए पहले वहां एडमिशन फॉर्मलिटीज पूरी करना जरूरी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राउंड 2 में नई Choice Filling कब होगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;NEET UG Counselling 2026 Round 2 Registration 24 अगस्त 2026 से शुरू होने वाला है। उम्मीदवार 24 अगस्त से 2 सितंबर 2026 तक फ्रेश च्वाइस भर सकेंगे। राउंड 2 में च्वाइस फिलिंग करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि उम्मीदवार केवल उन्हीं कॉलेजों को प्रेफरेंस में रखें, जिन्हें वह Round 1 में मिले कॉलेज से ज्यादा पसंद करता है। उदाहरण के तौर पर, अगर राउंड 1 में कॉलेज A मिला है और उम्मीदवार कॉलेज B, C और D को A से बेहतर मानता है, तो राउंड 2 की प्रेफरेंस लिस्ट में उन्हीं बेहतर विकल्पों को रखना समझदारी होगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राउंड 2 में अपग्रेड मिल गया तो पुरानी सीट का क्या होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यहां उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। अगर राउंड 2 में आपको बेहतर सीट मिल जाती है, तो आपकी राउंड 1 की सीट अपने आप कैंसिल हो जाएगी। पुरानी सीट को बाद में वापस लेने का विकल्प नहीं रहेगा। वह सीट दूसरे उम्मीदवार के लिए उपलब्ध करा दी जाएगी। राउंड 2 में अपग्रेड मिलने के बाद उम्मीदवार को नई अलॉटेड इंस्टीट्यूशन में रिपोर्ट करना होगा और वहां एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही, राउंड 1 वाले कॉलेज से अपने ऑरिजनल डॉक्यूमेंट वापस लेने होंगे। इसलिए राउंड 2 में च्वाइस भरते समय सिर्फ वही कॉलेज चुनें जहां आप वास्तव में जाना चाहते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अपग्रेड नहीं मिला तो क्या राउंड 1 की सीट बची रहेगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हां। अगर उम्मीदवार ने राउंड 1 की सीट पर एडमिशन फॉर्मलिटीज पूरी की हैं और राउंड 2 में उसे कोई अपग्रेड नहीं मिलता, तो उसकी राउंड 1 वाली सीट बनी रह सकती है। ऐसे उम्मीदवार को उसी कॉलेज में MBBS या BDS कोर्स जारी रखने का विकल्प मिलता है। इसका मतलब है कि अपग्रेड के लिए कोशिश करने से अपने आप राउंड 1 की सीट खत्म नहीं हो जाती। सीट तभी बदलती है जब राउंड 2 में नया अलॉटमेंट यानी अपग्रेड मिलता है और उम्मीदवार उस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;21 साल की नौकरी में 25 ट्रांसफर, अब FDA में ताबड़तोड़ एक्शन... कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राउंड 1 में रिपोर्टिंग की तारीखें भी नोट कर लें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राउंड 1 की अलॉटेड सीट स्वीकार करने वाले उम्मीदवारों को 20 अगस्त से 25 अगस्त 2026 के बीच संबंधित कॉलेज में फिजिकल रिपोर्टिंग करनी होगी। रिपोर्टिंग के दौरान एडमिशन फॉर्मिलिटीज पूरी करने के साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स और फीस जमा करनी होगी। अपग्रेड की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों को इसी प्रक्रिया के दौरान अपग्रेडेशन के लिए अपनी ऑफिशियल सहमति भी देनी होगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;फिजिकल रिपोर्टिंग के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;फिजिकल रिपोर्टिंग के समय उम्मीदवारों को जरूरी ऑरिजनल दस्तावेज साथ रखने होंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;नीट यूजी 2026 स्कोरकार्ड&lt;/li&gt; &lt;li&gt;नीट यूजी 2026 एडमिट कार्ड&lt;/li&gt; &lt;li&gt;एमसीसी राउंड 1 सीट अलॉटमेंट लेटर&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कक्षा 10 का सर्टिफिकेट और मार्कशीट&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कक्षा 12 सर्टिफिकेट और मार्कशीट&lt;/li&gt; &lt;li&gt;वैध फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पासपोर्ट साइज फोटो&lt;/li&gt; &lt;li&gt;लागू होने पर कैटेगरी सर्टिफिकेट&lt;/li&gt; &lt;li&gt;लागू होने पर PwBD सर्टिफिकेट&lt;/li&gt; &lt;li&gt;सिर्फ डॉक्यूमेंट्स लेकर जाना ही पर्याप्त नहीं है। जिस उम्मीदवार को सीट स्वीकार करनी है, उसे कॉलेज की एडमिशन फॉर्मलिटीज पूरी करने और निर्धारित ट्यूशन फीस जमा करने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Swiggy Leave Policy: स्विगी के इस एक नियम ने बदल दी कर्मचारियों की मंडे मॉर्निंग, जानें पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;NEET UG Round 1 में किन सीटों पर Counselling हो रही है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एमसीसी के राउंड 1 काउंसलिंग में 15% अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) सीटों के साथ-साथ एम्स, जेआईपीएमईआर, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और डीम्ड विश्वविद्यालयों की 100% संबंधित सीटें शामिल हैं। इसलिए राउंड 1 का अलॉटमेंट रिजल्ट आने के बाद उम्मीदवार को अपने अलॉटेड कोर्स और संस्थान की जानकारी ध्यान से चेक करनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;MCC NEET UG Round 1 Result 2026 कैसे चेक करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार एमसीसी यूजी मेडिकल काउंसलिंग पोर्टल पर जाकर अलॉटमेंट की जानकारी देख सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;सबसे पहले ऑफिशियल पोर्टल खोलें और राउंड 1 के प्रोविजनल या फाइनल सीट अलॉटमेंट रिजल्ट की उपलब्ध PDF/link पर जाएं। PDF में अपने NEET UG Roll Number से अलॉटमेंट चेक किया जा सकता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसके बाद कैंडिडेट डैशबोर्ड में लॉगिन करके ऑफिशियल सीट अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करना जरूरी होगा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;सबसे जरूरी बात: Round 1 के बाद आपका फैसला क्या होना चाहिए?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Round 1 का result आने के बाद उम्मीदवारों को तीन स्थितियों को अलग-अलग समझना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;सीट पसंद है:&lt;/strong&gt; तय समय में कॉलेज जाकर रिपोर्टिंग करें, डॉक्यूमेंट्स जमा करें, फीस और एडमिशन फॉर्मिलिटीज पूरी करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;बेहतर सीट चाहिए:&lt;/strong&gt; राउंड 1 की अलॉटेड सीट पर रिपोर्ट करके एडमिशन प्रक्रिया पूरी करें और अपग्रेडेशन की सहमति दें। फिर राउंड 2 में फ्रेश च्वाइस भरें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;सीट पसंद नहीं है और आगे भी कोशिश करनी है: &lt;/strong&gt;राउंड 1 की फ्री-एग्जिट नियम का इस्तेमाल किया जा सकता है। निर्धारित रिपोर्टिंग विंडो में ज्वाइन न करने पर राउंड 1 सीट छोड़ी जा सकती है, जबकि सिक्योरिटी डिपॉजिट और राउंड 2 पात्रता प्रभावित नहीं होती। लेकिन राउंड 2 में यही रणनीति लागू नहीं होती, क्योंकि वहां नॉन-ज्वाइनिंग की स्थिति में सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त होने का जोखिम रहता है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;NEET UG Counselling 2026: एक गलती से बचें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राउंड 2 में च्वाइस फिलिंग को सिर्फ औपचारिकता न समझें। उम्मीदवार को अपनी वास्तविक प्रेफरेंस के आधार पर च्वाइस भरनी चाहिए, क्योंकि अपग्रेड मिलने पर राउंड 1 की सीट वापस नहीं मिलती। इसलिए राउंड 2 में वही कॉलेज ऊपर रखें जिन्हें आप अपनी मौजूदा राउंड 1 सीट से बेहतर मानते हैं और जहां अपग्रेड मिलने पर वास्तव में एडमिशन लेना चाहते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/neet-ug-counselling-2026-round-1-seat-allotment-result-free-exit-round-2-upgrade-rules-articleshow-p4b4sdi"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Swiggy Leave Policy: स्विगी के इस एक नियम ने बदल दी कर्मचारियों की मंडे मॉर्निंग, जानें पूरा मामला]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/swiggy-leave-policy-weekend-holiday-next-monday-off-employee-benefits-linkedin-viral-post-articleshow-sdwz5nx</link>
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            <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 10:54:17 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Swiggy Weekend Holiday Policy:&lt;/strong&gt; LinkedIn पर Swiggy Leave Policy को लेकर किया गया एक पोस्ट चर्चा में है। कंपनी में वीकेंड पर Mandatory Holiday पड़ने पर अगले दिन की जो पॉलिसी है, वह किसी भी कंपनी से बिल्कुल अलग है। जानें इस खास नियम के बारे में।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0c776842eybcka8e2ktpsvs,imgname-swiggy-holiday-policy-1787116624132.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Swiggy Holiday Policy:&lt;/strong&gt; छुट्टी के दिन अगर वीकेंड पर पड़ जाए तो अक्सर कर्मचारियों को लगता है कि एक दिन की छुट्टी बेकार चली गई। लेकिन स्विगी (Swiggy) की एक खास लीव पॉलिसी (Leave Policy) इस परेशानी को काफी हद तक दूर करती है। कंपनी में अगर कोई अनिवार्य छुट्टी (Mandatory Holiday) शनिवार या रविवार को पड़ता है, तो उसके अगले सोमवार को छुट्टी दी जाती है। Swiggy के हेड ऑफ डिजाइन सप्तर्षि प्रकाश ने इस पॉलिसी को लेकर LinkedIn पर पोस्ट किया, जिसके बाद यह चर्चा में आ गई। जानिए पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्वतंत्रता दिवस के बाद मिला एक्स्ट्रा ऑफ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस साल 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) शनिवार को पड़ा। ऐसे में देशभर के कई कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय अवकाश वीकेंड के साथ ही निकल गया। वहीं स्विगी के कर्मचारियों को इसकी भरपाई के तौर पर सोमवार को छुट्टी मिली। सप्तर्षि प्रकाश ने इसी मौके को अपनी पोस्ट में शेयर किया। उन्होंने बताया कि सोमवार की सुबह उन्हें रोज की तरह काम की भागदौड़ में शामिल होने के बजाय अपनी बेटी के साथ आराम से टहलने का समय मिला। उनके मुताबिक, कंपनी की यह व्यवस्था उन छोटी लेकिन असरदार वर्कप्लेस पॉलिसीज में से एक है, जो कर्मचारियों की रोजमर्रा की जिंदगी में वास्तविक फर्क डालती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;मुंबई में 3 घर, 700 ग्राम सोना और करोड़ों की नेटवर्थ! किस्मत बदलने वाली Reddit पोस्ट वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्विगी की छोटी पॉलिसी, बड़ा असर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सप्तर्षि प्रकाश ने स्विगी की इस व्यवस्था को कंपनी में काम करने के सबसे underrated perks में से एक बताया। उनका कहना था कि कंपनियां अक्सर बड़े एम्पलॉइ बेनिफिट्स और बड़े-बड़े काम की बात करती हैं, लेकिन कई बार ऐसी छोटी सुविधाएं कर्मचारियों के लिए ज्यादा मायने रखती हैं। इस बार अतिरिक्त छुट्टी का फायदा सिर्फ आराम करने तक सीमित नहीं रहा। सप्तर्षि प्रकाश ने इसे परिवार के साथ समय बिताने का मौका बताया। बेटी के साथ सुबह बिताया गया समय उनके लिए इस पॉलिसी की असली अहमियत बन गया। नीचे देखें पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;फेस्टिव सीजन में 2.7 लाख नौकरियां! इन सेक्टर्स में मिलेंगे सबसे ज्यादा मौके&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;LinkedIn पर लोगों ने की तारीफ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पोस्ट सामने आने के बाद LinkedIn पर कई यूजर्स ने स्विगी की लीव पॉलिसी की सराहना की। कुछ लोगों ने इसे Employee Wellbeing के प्रति सकारात्मक सोच से जोड़ा, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि ऐसी व्यवस्था ज्यादा कंपनियों में होनी चाहिए। कुछ टिप्पणियों में यह भी कहा गया कि जहां कई वर्कप्लेस में छुट्टी लेना अब भी मुश्किल माना जाता है, वहां वीकेंड पर पड़े मैंडेटरी हॉलिडे के बदले सोमवार की छुट्टी देना कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए बेहतर कदम है। यानी स्विगी की यह पॉलिसी सिर्फ एक एक्स्ट्रा डे ऑफ नहीं है। यह दिखाती है कि वर्कप्लेस में छोटी-सी सुविधा भी कर्मचारियों को अपने परिवार और निजी जिंदगी के लिए थोड़ा अतिरिक्त वक्त दे सकती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Viral Post: अंग्रेजी कमजोर थी, पर टैलेंट जबरदस्त...बॉस ने नौकरी दी, फिर जो हुआ वो कमाल था!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/founder-hires-candidate-with-poor-english-shares-viral-success-story-articleshow-sg15go8</link>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 18:44:25 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;मुंबई के उद्यमी कनन बहल ने खराब अंग्रेजी वाले एक प्रतिभाशाली युवक को नौकरी दी। काम में बेहतरीन होने के कारण, उसे क्लाइंट्स से हिंदी में बात करने की छूट मिली। यह फैसला उनकी कंपनी की सबसे सफल भर्तियों में से एक साबित हुआ।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kkdwmmahe90j0mzmah6s3590,imgname-new-project---2026-03-11t125400.143-1773213995345.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;भारत में अच्छी अंग्रेजी न बोल पाने की वजह से कितने ही काबिल लोगों को नौकरी नहीं मिलती। टैलेंट होने के बावजूद कई कंपनियां उन्हें मौका नहीं देतीं। लेकिन, मुंबई के एक आंत्रप्रेन्योर कनन बहल ने इस सोच को किनारे रखकर एक ऐसा फैसला लिया, जो अब सोशल मीडिया पर मिसाल बन गया है। उन्होंने अपना अनुभव 'X' पर शेयर किया है, जो खूब वायरल हो रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कनन ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने एक टियर-2 शहर के लड़के का इंटरव्यू लिया। उसकी अंग्रेजी बहुत खराब थी, लेकिन जब उसे एक सैंपल टास्क दिया गया, तो उसने कमाल कर दिया। कनन उसे नौकरी देने के बारे में सोचकर हिचक रहे थे, क्योंकि इस रोल में सीधे क्लाइंट्स से बात करनी थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कनन बताते हैं, &quot;मैं उन लोगों को नौकरी दे-देकर थक चुका था, जिनकी अंग्रेजी तो शानदार थी, लेकिन काम में वे पीछे रह जाते थे।&quot; इसलिए, उन्होंने उस लड़के को मौका देने का फैसला किया। उन्होंने अपने नए कर्मचारी को पूरी छूट दी कि वह क्लाइंट्स से आत्मविश्वास के साथ हिंदी में बात करे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आज कनन का कहना है कि यह उनकी कंपनी की सबसे बेहतरीन भर्तियों में से एक थी। उन्होंने कुमार विश्वास का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे वे सिर्फ अपनी मातृभाषा के दम पर लोगों का दिल जीत लेते हैं। उन्होंने जापान, चीन और कोरिया जैसे देशों का भी जिक्र किया, जहां लोग अपनी भाषा में ही कारोबार करके सफल हो रहे हैं। कनन ने साफ कहा कि अच्छी अंग्रेजी बोलना जरूरी हो सकता है, लेकिन यह किसी की बुद्धिमानी या काबिलियत का पैमाना नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने इस पर जमकर रिएक्शन दिए। कई लोगों ने भारत के वर्क कल्चर पर कमेंट करते हुए कहा कि यहां अक्सर अंग्रेजी जानने वालों को ज्यादा काबिलियत वाले लोगों पर तरजीح दी जाती है। एक यूजर ने लिखा, 'ऑस्ट्रेलिया में टेक्निकल नौकरियों में भी, जहां क्लाइंट से बात करनी होती है, कोई यह नहीं पूछता कि आपकी अंग्रेजी कैसी है।'&lt;/p&gt;&lt;p&gt;I interviewed a guy from a Tier-2 city whose English was terrible.But he was too good with his sample task.I was still overthinking about hiring him because his role involved facing the clients.I still hired him!I was tired of hiring people great with their English but&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Kanan Bahl (@BahlKanan) August 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक और यूजर ने लिखा, 'दूसरे देशों में अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा है, लेकिन भारत में इसे एक 'स्किल' माना जाता है। यह बहुत दुख की बात है।' लोगों की इन बातों से साफ है कि कनन के इस कदम ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[21 साल की नौकरी में 25 ट्रांसफर, अब FDA में ताबड़तोड़ एक्शन... कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-ias-tukaram-mundhe-21-years-25-transfers-fda-action-maharashtra-articleshow-tzg35rp</link>
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            <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Who is IAS Tukaram Mundhe:&lt;/strong&gt; 21 साल की नौकरी में 25 ट्रांसफर झेल चुके IAS तुकाराम मुंढे अब FDA में ताबड़तोड़ एक्शन से चर्चा में हैं। जानिए उनके करियर, एजुकेशन और सख्त तेवर की वजह। पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0c9akrt4jengh4w5aaama6r,imgname-ias-tukaram-mundhe-1787118833434.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Tukaram Mundhe FDA Commissioner: &lt;/strong&gt;महाराष्ट्र में इन दिनों IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे का नाम सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा में है। वजह है खाद्य सुरक्षा को लेकर उनका सख्त अभियान। 25 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA के आयुक्त का पद संभालने के बाद उनकी टीम ने होटल-रेस्तरां से लेकर दूध, पनीर, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों तक कार्रवाई तेज कर दी। 31 जुलाई तक FDA ने 3,137 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और 165 लाइसेंस निलंबित किए। करीब 55.72 करोड़ रुपये मूल्य के असुरक्षित खाद्य पदार्थ जब्त या नष्ट किए गए। जानिए IAS तुकाराम मुंढे के बारे में रोचक बातें और क्यों हैं चर्चा में।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? शुरुआती जीवन और पढ़ाई&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के जिला परिषद स्कूल से हुई। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने इतिहास में बीए और राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की। दोनों डिग्रियां उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से कीं, जो अब छत्रपति संभाजीनगर में स्थित है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, 2005 बैच में बने IAS&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;तुकाराम मुंढे ने UPSC Civil Services Examination 2004 में सफलता हासिल की और ऑल इंडिया रैंक 20 प्राप्त की। इसके बाद वह 2005 बैच के IAS अधिकारी बने और उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने का असर उनके प्रशासनिक करियर में भी देखने को मिला। आगे चलकर उन्हें सूखा प्रबंधन, जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों और जनकल्याण से जुड़े काम करने का मौका मिला। सादगी, सीधे अंदाज और नियमों को सख्ती से लागू करने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें बाकी अफसरों से अलग पहचान दी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;21 साल की नौकरी में 25 तबादले&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बात उनकी पोस्टिंग हिस्ट्री भी रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब दो दशक से ज्यादा की सेवा में उनका लगभग 25 बार तबादला हो चुका है। इसी वजह से उनकी तुलना कई बार हरियाणा कैडर के पूर्व IAS अधिकारी अशोक खेमका से भी की गई। हालांकि, बार-बार तबादलों के बावजूद उनकी सख्त प्रशासनिक छवि बनी रही।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;IAS तुकाराम मुंढे के FDA में आते ही क्यों मचा हड़कंप?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;IAS तुकाराम मुंढे की FDA में मौजूदा पारी का सबसे बड़ा पहलू है कार्रवाई का दायरा। निरीक्षण केवल पारंपरिक दुकानों और रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं रहा। दूध और डेयरी उत्पादों से लेकर बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों और क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस तक जांच पहुंची है। FDA ने गुटखा और पान मसाला के अवैध कारोबार पर भी कार्रवाई तेज की है। अगस्त में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को एक पान मसाला इलायची विज्ञापन के संबंध में नोटिस दिए जाने से मामला और सुर्खियों में आ गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lsquo;सिंघम IAS&rsquo; वाली छवि के पीछे क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;IAS तुकाराम मुंढे को &lsquo;सिंघम IAS&rsquo; कहे जाने की वजह उनकी बेबाक और कड़े फैसले लेने वाली छवि है। लेकिन उनकी मौजूदा पारी का दूसरा पहलू भी सामने आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में पुणे की एक मिठाई की दुकान का लाइसेंस निलंबित रखने के मामले में FDA को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह बहस भी तेज हुई है कि खाद्य सुरक्षा के लिए सख्ती जरूरी है, लेकिन कार्रवाई प्रक्रिया और अनुपात के दायरे में रहनी चाहिए। मुंढे ने कहा है कि FDA ने यह कदम जनहित में उठाया था और आदेश मिलने के बाद कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। यही वजह है कि तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक &lsquo;सख्त IAS अफसर&rsquo; की कहानी नहीं रह गई है। यह अब खाद्य सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कड़े Enforcement (प्रवर्तन) बनाम कारोबारी राहत की उस बहस का हिस्सा है, जिसका असर सीधे आम ग्राहक की थाली और सेहत पर पड़ता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता टीचर्स को क्या मिलता है? मेडल से लेकर नकद इनाम तक जानिए सबकुछ]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/national-teacher-award-2026-what-do-teachers-get-medal-cash-prize-honour-articleshow-unhv2w9</link>
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            <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 12:06:20 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;National Teacher Award Prize 2026:&lt;/strong&gt; राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार में विजता शिक्षकों क्या ईनाम मिलता है? मेडल, नकद इनाम और सम्मान से जुड़ी हर जरूरी जानकारी जानें, कैसे होता है चयन और सम्मान समारोह।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0m2s128cb9cy9eetrje5er8,imgname-national-teacher-award-2026-prize-money-1787380401223.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;National Teacher Award 2026 Prize Money:&lt;/strong&gt; राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार सिर्फ एक मेडल या नकद राशि का सम्मान नहीं है। यह उन शिक्षकों के काम की राष्ट्रीय पहचान है, जिन्होंने पढ़ाने के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर छात्रों की सीखने की क्षमता, स्कूल के माहौल और शिक्षा की गुणवत्ता में खास बदलाव किया है। हर साल शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर के मौके पर देश के चुनिंदा शिक्षकों को यह सम्मान दिया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता को क्या-क्या मिलता है इनाम?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले हर शिक्षक को ₹50,000 की नकद राशि, मेरिट का प्रमाणपत्र और सिल्वर मेडल दिया जाता है। यानी पुरस्कार में आर्थिक प्रोत्साहन के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली औपचारिक पहचान भी शामिल है। यह पुरस्कार शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1958 में हुई थी। 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस से इसे जोड़ा गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राष्ट्रपति के हाथों कैसे होता है शिक्षकों का सम्मान?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की सबसे खास बात इसका सम्मान समारोह है। नियमों के मुताबिक पुरस्कार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति की ओर से 5 सितंबर को प्रदान किया जाता है। हाल के वर्षों में राष्ट्रपति भवन से जुड़े कार्यक्रमों के बजाय निर्धारित राष्ट्रीय समारोह में चयनित शिक्षकों को सम्मानित किया गया है। उदाहरण के लिए, 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में चयनित शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किए थे। 2026 के लिए आधिकारिक कार्यक्रम में 4 और 5 सितंबर को रिहर्सल और अवॉर्ड सेरेमनी निर्धारित है। यानी चयनित शिक्षक सिर्फ पुरस्कार लेने नहीं पहुंचते, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के इस विशेष समारोह का हिस्सा भी बनते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता? किस राज्य से कितने नाम, देखें पूरी लिस्ट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेशनल टीचर अवार्ड के लिए शिक्षक कैसे चुने जाते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह प्रक्रिया केवल नाम भेजने तक सीमित नहीं है। शिक्षक खुद ऑनलाइन आवेदन करते हैं और अपने काम का पोर्टफोलियो जमा करते हैं। इसमें उपलब्धियों से जुड़े दस्तावेज, गतिविधियों की रिपोर्ट, फोटो, ऑडियो-वीडियो और दूसरे प्रमाण शामिल हो सकते हैं। इसके बाद चयन जिला/क्षेत्रीय, राज्य/संगठन और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ता है। सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि कुल मूल्यांकन में 90 अंक प्रदर्शन आधारित मानदंडों के लिए रखे गए हैं। इनमें सीखने के परिणाम बेहतर करने की पहल, नई शिक्षण पद्धतियां, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां, शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल और अनुभव आधारित शिक्षा जैसे काम देखे जाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; 64 की उम्र में MTech कर टॉप-10 में आए, हर हफ्ते 1000 KM सफर; अब IIM Lucknow लक्ष्य&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सिर्फ पढ़ाना नहीं, असर पैदा करना है असली कसौटी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पुरस्कार का असली मतलब यही है कि शिक्षक ने अपनी कक्षा और स्कूल में कितना बदलाव पैदा किया। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार में ₹50 हजार की राशि और सिल्वर मेडल से ज्यादा अहम वह पहचान है, जो किसी शिक्षक के वर्षों के काम को देश के सामने रखती है। यही वजह है कि शिक्षक दिवस पर मिलने वाला यह सम्मान शिक्षा क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों में गिना जाता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[करोड़ों की टेक इंडस्ट्री से स्कूल बस ड्राइवर तक पहुंचा करियर, 25 साल Adobe में काम करने वाले की कहानी वायरल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/adobe-engineer-turns-school-bus-driver-james-strawn-career-change-after-job-loss-viral-linkedin-story-articleshow-vz2kd8h</link>
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            <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 18:22:38 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Adobe Engineer Turns School Bus Driver:&lt;/strong&gt; 25 साल Adobe में काम करने के बाद नौकरी गई, उसके बाद इस शख्स ने करियर को लेकर जो फैसला लिया वह चौंकाने वाला है। आखिर क्यों इस इंजीनियर ने स्कूल बस ड्राइवर बनने का फैसला किया?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Viral LinkedIn Story: &lt;/strong&gt;लंबे समय तक टेक इंडस्ट्री में काम करने के बाद नौकरी की तलाश में जुटे जेम्स स्ट्रॉन ने अब करियर की नई राह चुनी है। 2025 में नौकरी जाने के बाद एक साल से ज्यादा समय तक मौके तलाशने के बावजूद जब बात नहीं बनी, तो उन्होंने स्कूल बस ड्राइवर की नौकरी स्वीकार कर ली। आगे पढ़िए पूरी कहानी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जून 2025 में गई नौकरी, फिर शुरू हुआ मुश्किल दौर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जेम्स स्ट्रॉन ने Adobe में 25 साल से ज्यादा समय तक सॉफ्टवेयर क्वालिटी इंजीनियर के तौर पर काम किया। जून 2025 में उनकी नौकरी चली गई। इसके बाद उन्होंने टेक सेक्टर में दोबारा काम पाने की कोशिश की, लेकिन एक साल से ज्यादा समय तक उन्हें सफलता नहीं मिली। आखिरकार स्ट्रॉन ने अपने करियर को पूरी तरह नई दिशा देने का फैसला किया। LinkedIn पर शेयर की गई पोस्ट में उन्होंने बताया कि अब वह अपने स्थानीय स्कूल डिस्ट्रिक्ट में स्कूल बस ड्राइवर के तौर पर काम शुरू कर चुके हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सैलरी कम, लेकिन काम में मिला नया सुकून&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;स्ट्रॉन ने साफ कहा कि नई नौकरी उनकी पिछली टेक जॉब के मुकाबले काफी कम कमाई देती है। इसके बावजूद वह इस बदलाव को लेकर सकारात्मक हैं। उनके मुताबिक, उन्हें काम पसंद आ रहा है, बच्चे अच्छे हैं और सहकर्मी भी सहयोगी और जमीन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने पुराने सहकर्मियों और LinkedIn कनेक्शंस का भी आभार जताया, जिन्होंने मुश्किल दौर में उनका हौसला बढ़ाया। साथ ही उन्होंने उन कंपनियों और रिक्रूटर्स पर भी नाराजगी जाहिर की, जिन्होंने उनके आवेदन नजरअंदाज किए या उन्हें जवाब तक नहीं दिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इंडिपेंडेंस डे पर अर्पिता साहू ने खुद को दी &lsquo;आजादी&rsquo;, बताया क्यों 4.5 साल बाद छोड़ी कॉरपोरेट जॉब&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;'40 फीट की बस चलाऊंगा, कंप्यूटर नहीं'&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपने संदेश में स्ट्रॉन ने टेक इंडस्ट्री के भर्ती सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि उम्मीदवारों के साथ बेहतर व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने यह भी लिखा कि पुराने नियोक्ताओं के फैसलों ने आखिरकार उन्हें एक अलग भविष्य की ओर बढ़ने का रास्ता दिखाया। अब वह Colorado District 38 के लिए स्कूल बस चला रहे हैं। स्ट्रॉन का कहना है कि यह उनकी जिंदगी का नया अध्याय है और संभवतः उनका अंतिम करियर भी हो सकता है। नीचे देखें वायरल पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Dreamum Wakeupum पर झूमते हुए बच्चों ने याद की पूरी Periodic Table, केमेस्ट्री टीचर का अंदाज हुआ वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोशल मीडिया पर लोगों ने बताया अपना अनुभव&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उनकी कहानी LinkedIn पर कई ऐसे प्रोफेशनल्स से जुड़ गई, जो लंबे अनुभव और योग्यता के बावजूद नौकरी नहीं मिलने की समस्या से गुजर रहे हैं। कुछ लोगों ने अपने करियर बदलने की मजबूरी शेयर की, जबकि दूसरों ने स्कूल बस ड्राइवर की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए स्ट्रॉन के फैसले की सराहना की।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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