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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Fri, 11 Sep 2026 21:16:02 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[नौकरी मांगने पहुंची डेवलपर, स्टार्टअप की वेबसाइट को बताया ‘Disgusting’; फाउंडर का जवाब हुआ वायरल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/linkedin-job-outreach-developer-mannlich-founder-viral-dm-articleshow-0gcd529</link>
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            <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 12:05:33 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Job Seeker Viral DM: बेंगलुरु स्टार्टअप मैनलिच के संस्थापक प्रीतम कुदेव को एक 22 वर्षीय डेवलपर ने LinkedIn पर वेबसाइट की कड़ी आलोचना करते हुए उनसे नौकरी की उम्मीद जताई। जिसके बाद फाउंड ने जो जवाब दिया उससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। जानिए पूरा मामला।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;LinkedIn Viral Message: &lt;/strong&gt;नौकरी पाने के लिए लिंक्डइन पर किसी कंपनी के फाउंडर को सीधे मैसेज करना अब नया नहीं है। लेकिन एक 22 वर्षीय महिला डेवलपर का संपर्क मैसेज (Outreach Message) इन दिनों चर्चा में है। नौकरी की तलाश कर रही इस डेवलपर ने बेंगलुरु के पुरुषों के पर्सनल केयर ब्रांड मैनलिच (Mannlich) के फाउंडर प्रीतम कुदेव को मैसेज भेजकर कंपनी की वेबसाइट की जमकर आलोचना की। दिलचस्प बात यह रही कि वेबसाइट की कमियां गिनाने के बाद उसने खुद ही उसे बेहतर बनाने के लिए काम करने की पेशकश भी कर दी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lsquo;वेबसाइट देखकर क्रिंज हुआ&rsquo;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;LinkedIn पर भेजे गए मैसेज में डेवलपर ने कहा कि उसने Mannlich की वेबसाइट और उसके प्रोडक्ट्स देखे, लेकिन वेबसाइट का अनुभव उसे बिल्कुल पसंद नहीं आया। उसने साइट को &ldquo;very repelling and borderline disgusting&rdquo; तक कह दिया। उसके मुताबिक वेबसाइट पर प्रोडक्ट को पेश करने के बजाय शर्टलेस पुरुषों और पुरुष मॉडल्स की तस्वीरों पर जरूरत से ज्यादा फोकस नजर आता है। उसने यह भी कहा कि पुरुषों के लिए स्किनकेयर का आइडिया उसे पसंद है, लेकिन मौजूदा वेबसाइट देखकर वह अपने पिता के लिए वहां से दोबारा खरीदारी करना पसंद नहीं करेगी। डेवलपर ने वेबसाइट को ज्यादा Simple, Gender-Friendly और Welcoming बनाने की सलाह दी। उसने यह भी दावा किया कि वेबसाइट की स्पीड उसे धीमी लगी। खुद को डेवलपर बताते हुए उसने कहा कि अगर कंपनी चाहे तो वह इस समस्या को ठीक करने में मदद कर सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;फाउंडर ने बताया वेबसाइट का असली मकसद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मैनलिच के संस्थापक और सीईओ प्रीतम कुदेव ने इस मैसेज का जवाब देते हुए कहा कि वेबसाइट किसी सामान्य ऑडियंस को आकर्षित करने के लिए नहीं बनाई गई है। उनका कहना था कि इसे एक खास तरह के कस्टमर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और ऐसे लोगों को &ldquo;repel&rdquo; करना भी डिजाइन रणनीति का हिस्सा है, जिन्हें कंपनी अपना टारगेट कस्टमर नहीं मानती। इसके बाद Kudev ने LinkedIn पर पूरी बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने नौकरी के लिए युवाओं को सिखाए जा रहे आउटरीच टेम्प्लेट पर व्यंग्य करते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसे टेम्प्लेट्स कौन सिखा रहा है। नीचे देखें वायरल पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Career Tips: करियर में आगे बढ़ने के 9 &lsquo;शेडी&rsquo; कॉर्पोरेट मूव्स, रिक्रूटर ने बताया तरीका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नौकरी का मौका भी दिया, लेकिन एक शर्त के साथ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ यह रहा कि आलोचना के बावजूद कुदेव ने अपनी कंपनी में संभावित उम्मीदवारों के लिए दरवाजा बंद नहीं किया। उन्होंने मार्केटिंग, कंटेंट और ऑपरेशन्स में अवसर तलाश रहे लोगों से अपना पोर्टफोलियो शेयर करने को कहा। हालांकि उनकी शर्त भी साफ थी कि उम्मीदवार को कंपनी की वेबसाइट से &ldquo;repelled&rdquo; नहीं होना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो खेमों में नजर आए। कुछ लोगों ने डेवलपर के लहजे को गैर-पेशेवर और जरूरत से ज्यादा आक्रामक बताया। उनका सवाल था कि नौकरी मांगते समय किसी कंपनी के फाउंडर को इस तरह सार्वजनिक रूप से आलोचना करना क्या सही outreach strategy है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;दूसरी तरफ, कुछ यूजर्स ने कहा कि भाषा भले ही तीखी थी, लेकिन वेबसाइट के डिजाइन और यूजर एक्सपीरिएंस को लेकर उठाए गए सवालों पर चर्चा होनी चाहिए। कुछ लोगों ने खुद वेबसाइट का अनुभव खराब होने की बात भी कही। आखिरकार यह मामला सिर्फ एक LinkedIn DM तक सीमित नहीं रहा। इसने नौकरी के लिए संपर्क, प्रोफेशनल बातचीत और स्टार्टअप ब्रांडिंग के बीच की उस महीन रेखा पर बहस छेड़ दी है, जहां बेबाक फीडबैक कब ध्यान खींचने वाली स्ट्रेटजी बन जाए, कहना मुश्किल है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; 'America अब खत्म हो चुका है!' भारतीय युवक ने US का सपना देख रहे छात्रों को क्यों दी चेतावनी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[National Engineer’s Day: AI के दौर में भी इन 5 इंजीनिरिंग फील्ड की रहेगी डिमांड, जानें क्यों?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/national-engineers-day-lesser-known-engineering-careers-articleshow-1uz1zgb</link>
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            <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 17:33:55 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;National Engineer&rsquo;s Day:&lt;/strong&gt; AI के दौर में भी इन 5 Engineering Fields में करियर का शानदार स्कोप बना रह सकता है। जानें Biomedical, Robotics, Aerospace समेत इन फील्ड्स में क्यों रहेगी एक्सपर्ट्स की जरूरत।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m25h932zy3ewwrs9edhwd0nc,imgname-national-engineer-s-day-1789039774815.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;जब भी इंजीनियरिंग की बात होती है, तो आमतौर पर सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या कंप्यूटर साइंस जैसे सब्जेक्ट पर बात होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंजीनियरिंग की दुनिया इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। AI के इस बदलते दौर, पर्यावरण, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और ऊर्जा की जरूरतों ने इंजीनियरिंग में कई ऐसे नए और खास करियर ऑप्शन पैदा किए हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।अगर आप AI के दौर में इंजीनिरिंग करने जा रहे हैं, तो कुछ खास बातों और सलेक्शन को लेकर जरूर ध्यान दें। 15 सितंबर को देशभर में नेशनल इंजीनियर डे (National Engineer&rsquo;s Day) मनाया जाएगा। जानिए इंजीनियरिंग के इन ट्रेंडिंग ऑप्शन के बारे में जरूर जानें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बायोमेडिकल इंजीनिरिंग (Biomedical Engineering)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;AI मेडिकल इमेज का एनालिसिस और डेटा प्रोसेसिंग तो बेहतरीन ढंग से करता है, लेकिन मेडिकल डिवाइस की डिजाइन, रीयल वर्ल्ड में टेस्टिंग, सेफ्टी और डॉक्टरों या मरीजों की जरूरत के हिसाब से सॉल्युशन रेडी करने में इंजीनियरिंग में एक्सपर्ट होना जरूरी रहेगी।आपको इस फील्ड को इग्नोर नहीं करना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इंवॉयरमेंटल इंजीनिरिंग (Environmental Engineering)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इंजीनिरिंग की ग्रोइंग ब्रांच में वातावरण से संबंधित इंजीनिरंग की पढ़ाई भी लोगों की पसंदीदा बन रही है। AI प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण और पूर्वानुमान लगाने में मदद कर सकता है, लेकिन पानी, कचरा, प्रदूषण नियंत्रण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्टर के इंप्लीमेंटेशन के लिए इंजीनियर चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एयरोस्पेस इंजीनिरिंग (Aerospace Engineering)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एआई एयरक्राफ्ट विमान और अंतरिक्ष यान के डिजाइन तथा परीक्षण के मॉडल तैयार करने की प्रोसेस को तेज कर सकता है। लेकिन विमान और अंतरिक्ष यान की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तंत्र के लिए मानव इंजीनियरों की विशेषज्ञता जरूरी रहेगी। अगर आपको एयरोस्पेस में दिलचस्पी है, तो ये फील्ड चुन सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;फूड इंजीनिरिंग (Food Engineering)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एआई प्रोडक्शन और क्वालिटी को ऑप्टमाइज कर सकता है, लेकिन फूड प्रोसेसिंग मशीनरी, मैन्यूफैक्चर सिस्टम, सेफ्टी स्टेंडर्ड और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए इंजीनियरों की जरूरत रहेगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रीन्यूवेबल इंजीनिरिंग (Renewable Energy Engineering)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एआई की मदद से बेहतरीन तरीके से एआई एनर्जी डिमांड और प्रोडक्शन का प्रिडिक्शन बेहतर कर सकता है लेकिन सोलर के साथ सिस्टम का डिजाइन, इंस्टालेशन, ग्रिड इंटीगेशन जैसे फिजिकल वर्क इंजीनियरिंग पर पूरी तरह से निर्भर करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;और पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कनाडा में कैसे मिलती है ट्रक ड्राइवर की नौकरी, कितनी होती है सैलरी? जानिए पूरा प्रोसेस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Bhawana Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[₹17 लाख का जॉब ऑफर मिला, फिर इस शख्स ने ऐसे बढ़वा ली सैलरी, हाथ आया ₹23 लाख का पैकेज]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/isb-alumnus-salary-negotiation-tips-increased-job-offer-from-17-lpa-to-23-lpa-viral-linkedin-post-articleshow-32lsatg</link>
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            <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 15:22:02 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Salary Negotiation Viral Post: 17 लाख रुपए का जॉब ऑफर कैसे 23 लाख रुपए के पैकेज में बदला? ISB Alum ने सैलरी नेगोशिएशन की वो रणनीति बताई, जो हर MBA फ्रेशर के काम आएगी। जानिए&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m22s5chf9qbhb25v20ce0myv,imgname-salary-negotiation-viral-linkedin-post-1788947378734.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Viral Linkedin Post:&lt;/strong&gt; नौकरी का ऑफर हाथ में आते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं कि ज्यादा पैसे मांगे तो कंपनी कहीं ऑफर ही वापस न ले ले। लेकिन Indian School of Business (ISB) के पूर्व छात्र करण गोगना की कहानी बताती है कि सही तरीके से बातचीत की जाए तो शुरुआती ऑफर और फाइनल पैकेज में बड़ा अंतर हो सकता है। इसी को लेकर करण गोगना ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट शेयर की है, जो अब वायरल हो रही है, साथ ही सैलरी नेगोशिएशन की टिप्स भी दी है। जानिए पोस्ट में क्या लिखा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;₹17 लाख का ऑफर मिला, लेकिन तुरंत हां नहीं कहा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;MBA पूरा करने के बाद करण गोगना को पहली नौकरी के लिए ₹17 लाख सालाना का ऑफर मिला था। उस समय उनके पास कोई दूसरा ऑफर नहीं था और एजुकेशन लोन भी चुकाना था। ऐसे में ऑफर स्वीकार कर लेना आसान फैसला होता। लेकिन करण गोगना ने पहले यह समझने की कोशिश की कि कंपनी इस रोल के लिए कितना भुगतान करने को तैयार है। उन्होंने HR से अपनी अपेक्षित सैलरी बताने के बजाय कंपनी की सैलरी रेंज पूछी। यही उनकी पहली सैलरी नेगोशिएशन स्ट्रेटजी थी। पहले अपनी कीमत तय करके सामने वाले को बताने के बजाय उनका ऑफर जानना।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; 64% बढ़ गई PM की सैलरी! अब सालाना मिलेंगे ₹27 करोड़, जानिए किस देश में है ये सबसे बड़ा पैकेज&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;₹17 लाख से ₹19 लाख, फिर HR से बातचीत का अगला दौर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कंपनी की ओर से ₹17 लाख का ऑफर आया तो करण गोगना ने इसे सीधे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपने अनुभव और MBA लेवल के मार्केट वैल्यू का हवाला देते हुए कहा कि उनके हिसाब से करीब ₹22 लाख का पैकेज ज्यादा उचित होगा। अगले दिन कंपनी ₹19 लाख पर आई। यह बढ़ोतरी होने के बावजूद करण गोगना ने बातचीत खत्म नहीं की। उनके सामने एक मुश्किल स्थिति थी। यही एक नौकरी का ऑफर था, लोन की जिम्मेदारी थी और अंदर से डर भी था कि कहीं ज्यादा मांगने पर कंपनी पीछे न हट जाए। फिर भी उन्होंने सोचा कि अगर वह इस भर्ती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर सकते हैं, तो आगे भी दूसरे मौके हासिल कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बेस सैलरी नहीं बढ़ी तो CTC के दूसरे हिस्से पर फोकस किया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;करण गोगना ने इसके बाद बातचीत का तरीका बदल दिया। उन्होंने इक्विटी, जॉइनिंग बोनस और रिलोकेशन अलाउंसेज जैसे विकल्पों के बारे में पूछा। खास तौर पर नौकरी के लिए दूसरी जगह शिफ्ट होने की बात रखते हुए उन्होंने रिलोकेशन सपोर्ट की मांग की। इसके बाद HR की तरफ से करीब एक दिन तक कोई जवाब नहीं आया। यही वह समय था जब उन्हें सबसे ज्यादा चिंता हुई कि कहीं ऑफर हाथ से न निकल जाए। लेकिन अगली सुबह कंपनी की तरफ से जवाब आया। बेस सैलरी भले ही सीमित थी, लेकिन जॉइनिंग बोनस और रिलोकेशन अलाउंस जोड़ दिए गए। इस तरह कुल पैकेज बढ़कर ₹23 लाख सालाना हो गया। नीचे देखें लिंक्डइन पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;अमेरिका जाने के लिए कौन सा वीजा चाहिए? घूमने से नौकरी और ग्रीन कार्ड तक हर तरह के वीजा की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सैलरी नेगोशिएशन में याद रखें ये 3 बातें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;करण गोगना की कहानी का सबसे बड़ा सबक सिर्फ ₹6 लाख की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि नेगोशिएशन का तरीका है-&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;पहला, HR अगर आपकी एक्सपेक्टेड सैलरी पूछे तो तुरंत कोई आंकड़ा बोलने के बजाय संभव हो तो सैलरी रेंज समझने की कोशिश करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;दूसरा, अगर बेस सैलरी तय है तो नेगोशिएशन वहीं खत्म नहीं होती। ज्वाइनिंग बोनस, साइन-ऑन बोनस, इक्विटी और दूसरे बेनिफिट्स पर बात की जा सकती है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;तीसरा, रिलोकेशन को सैलरी पैकेज का हिस्सा मानकर चुप न रहें। अगर नौकरी के कारण शहर बदलना पड़ रहा है तो रिलोकेशन अलाउंस के बारे में सीधे पूछना एक विकल्प हो सकता है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[IAS Success Story: कभी सब्जी बेचते थे, आज हैं धाकड़ IAS अफसर! किसान के बेटे तुकाराम मुंढे की कहानी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/inspiring-journey-of-ias-tukaram-mundhe-from-vegetable-seller-to-top-officer-articleshow-42c3zxl</link>
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            <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 08:49:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Tukaram Mundhe success story: &lt;/strong&gt;एक किसान परिवार में पले-बढ़े तुकाराम मुंढे ने मुश्किल हालातों में सब्जी बेचते हुए UPSC की तैयारी की। साल 2005 में उन्होंने परीक्षा पास की और IAS अधिकारी बने। आज वे अपनी ईमानदारी और सख्त प्रशासन के लिए जाने जाते हैं। उनकी कहानी तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m238c6190727k3eqd252rba8,imgname-ias-officer-tukaram-mundhe-1788963330079.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Tukaram Mundhe Biograph: &lt;/strong&gt;कामयाबी पाने के लिए हमेशा बड़े घर या बहुत सारी सुविधाओं की जरूरत नहीं होती। अगर मेहनत, आत्मविश्वास और अपने लक्ष्य के प्रति लगन हो, तो एक आम परिवार का इंसान भी देश के सबसे बड़े पदों तक पहुंच सकता है। महाराष्ट्र के सीनियर IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की जिंदगी इसकी एक बेहतरीन मिसाल है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किसान परिवार से IAS तक का सफर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के एक किसान परिवार से आते हैं। बचपन से ही उन्होंने गांव की जिंदगी की मुश्किलें, खेती की चुनौतियां और पैसों की तंगी को बहुत करीब से देखा था। अपने परिवार के हालात को समझते हुए उन्होंने कई तरह के काम किए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उनकी कहानी में यह बात खास तौर पर ध्यान खींचती है कि UPSC की तैयारी से पहले वे परिवार की मदद के लिए सब्जी भी बेचा करते थे। इस अनुभव ने उन्हें आम लोगों की जिंदगी, किसानों की समस्याओं और मेहनत करने वालों की तकलीफों को समझने में मदद की।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2005 में मिली UPSC में सफलता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इन चुनौतियों के बावजूद तुकाराम मुंढे ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी। लगातार पढ़ाई, अनुशासन और लक्ष्य पर पूरा ध्यान लगाकर उन्होंने 2005 में UPSC परीक्षा पास कर ली।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;IAS अधिकारी चुने जाने के बाद उनकी जिंदगी में एक बड़ा बदलाव आया। लेकिन वे अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। आम लोगों की समस्याओं को समझने की यही सोच उनके काम करने के तरीके का एक अहम हिस्सा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सख्त प्रशासन के लिए जाने जाते हैं मुंढे&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;IAS अधिकारी के तौर पर तुकाराम मुंढे ने महाराष्ट्र के कई जिलों और विभागों में सेवा दी है। वे अपनी ईमानदारी, समय की पाबंदी और नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए मशहूर हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उनके काम करने का तरीका कई बार विवादों में भी रहा, लेकिन वे लोगों की समस्याओं पर तुरंत एक्शन लेने वाले अफसर के तौर पर पहचाने जाते हैं। फिलहाल वे महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) विभाग में कमिश्नर हैं और खाद्य सुरक्षा, भ्रष्टाचार पर लगाम और कानूनी कार्रवाई पर जोर दे रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सब्जी बेचने से लेकर UPSC में सफलता तक, तुकाराम मुंढे का सफर यह दिखाता है कि हालात किसी का भविष्य तय नहीं कर सकते। अगर लक्ष्य साफ हो, तो लगातार मेहनत और आत्मविश्वास से किसी भी चुनौती पर जीत हासिल की जा सकती है। उनकी कहानी गांव-देहात के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक खास प्रेरणा है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[SSC CHS 2026 Salary: 12वीं पास के लिए 2536 पद, कितनी मिलेगी सैलरी? LDC से DEO तक जानें वेतनमान]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/ssc-chsl-2026-salary-ldc-jsa-deo-pay-scale-2536-vacancies-12th-pass-government-job-articleshow-69z16o2</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/career/ssc-chsl-2026-salary-ldc-jsa-deo-pay-scale-2536-vacancies-12th-pass-government-job-articleshow-69z16o2</guid>
            <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 16:51:36 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;SSC CHSL Salary 2026: एसएससी सीएचएसएल 2026 में 12वीं पास के लिए कुल 2536 पदों पर बंपर वैकेंसी निकली है। जानिए नौकरी मिली तो कितनी सैलरी होगी? LDC, JSA और DEO के वेतन से जुड़ी पूरी जानकारी। योग्यता आवेदन प्रक्रिया, फीस डिटेल भी पढ़ें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m20bmfc6kf3y24ynz7ngf5yz,imgname-ssc-chs-2026-salary-1788866084230.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;SSC CHSL Recruitment 2026: &lt;/strong&gt;सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे 12वीं पास युवाओं के लिए बड़ी खबर है। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने संयुक्त उच्चतर माध्यमिक (Combined Higher Secondary) (10+2) लेवल एग्जाम 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के जरिए केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों में LDC/JSA, DEO और DEO Grade &lsquo;A&rsquo; जैसे ग्रुप C पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। आयोग ने फिलहाल करीब 2,536 पदों को टेंटेटिव बताया है, यानी अंतिम रिक्तियों की संख्या बाद में बदली जा सकती है। जानिए आवेदन प्रक्रिया कब से शुरू है, कहां-कैसे अप्लाई करें, योग्यता, फीस, चयन प्रक्रिया और पोस्ट वाइज सैलरी समेत जरूरी डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;SSC CHSL 2026 आवेदन की लास्ट डेट क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;CHSL 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 7 सितंबर 2026 से हो गई है। इच्छुक उम्मीदवार 7 अक्टूबर 2026 रात 11 बजे तक SSC की वेबसाइट पर फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन शुल्क जमा करने की लास्ट डेट 8 अक्टूबर 2026 रात 11 बजे रखी गई है। अगर फॉर्म में गलती रह जाती है तो आयोग 14 से 16 अक्टूबर 2026 तक करेक्शन का मौका देगा। टियर-I और टियर-II परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन कर सकता है आवेदन?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;इस भर्ती की खास बात यह है कि इसके लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास रखी गई है। LDC/JSA और ज्यादातर DEO पदों के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। हालांकि कुछ विभागों में DEO/DEO Grade &lsquo;A&rsquo; के लिए साइंस स्ट्रीम में मैथ्स सब्जेक्ट के साथ 12वीं अनिवार्य है। 12वीं का परिणाम भी 7 अक्टूबर 2026 तक घोषित हो जाना चाहिए।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;उम्र की बात करें तो उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2026 को 18 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी जन्म 2 अगस्त 1999 से पहले और 1 अगस्त 2008 के बाद नहीं होना चाहिए। आरक्षित वर्गों को नियम के मुताबिक अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;₹100 फीस, इन उम्मीदवारों को पूरी छूट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आवेदन शुल्क 100 रुपये है। महिला उम्मीदवारों के साथ एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी और पात्र भूतपूर्व सैनिक उम्मीदवारों को फीस नहीं देनी होगी। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;2 साल तक रोज 14 घंटे काम करता रहा कर्मचारी, फिर खुला मैनेजर का ऐसा राज कि उड़ गए होश&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सैलरी कितनी मिलेगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;LDC/JSA पद पे लेवल l-2 में हैं, जिनका वेतनमान ₹19,900 से ₹63,200 है। DEO पद पे लेवल-4 और पे लेवल-5 में आते हैं, जबकि DEO Grade &lsquo;A&rsquo; पे लेवल-4 में है। संबंधित वेतनमान क्रमशः ₹25,500-₹81,100 और ₹29,200-₹92,300 हैं। नीचे देखें डिटेल ऑफिशियल नोटिफिकेशन-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;SSC CHSL Recruitment 2026 Notification Direct link&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;table&gt; &lt;tbody&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;पद&amp;nbsp;&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;Pay Level&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;वेतनमान&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;LDC / JSA&amp;nbsp;&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;Level-2&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹19,900- ₹63,200&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;DEO &lt;/td&gt;   &lt;td&gt;Level-4&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹25,500 - ₹81,100&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;DEO &lt;/td&gt;   &lt;td&gt;Level-5&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹29,200 - ₹92,300&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;DEO Grade &lsquo;A&rsquo; &lt;/td&gt;   &lt;td&gt;Level-4&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;₹25,500 - ₹81,100&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;h2&gt;SSC CHSL परीक्षा में क्या होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;SSC CHSL की चयन प्रक्रिया में टियर-I और टियर-II कंप्यूटर आधारित शामिल हैं। टियर- I में अंग्रेजी, जनरल इंटेलिजेंस, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और जनरल अवेयरनेस से प्रश्न पूछें। गलत उत्तर पर 0.50 अंक की मार्क्सिंग भी रहेगी। टियर-II के बाद पद के अनुसार स्किल टेस्ट या टाइपिंग टेस्ट लिया जाएगा। एलडीसी/जेएसए के लिए टाइपिंग टेस्ट और डीईओ पद के लिए स्किल टेस्ट महत्वपूर्ण चरण है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;SSC CHSL Recruitment 2026 Direct Link to Apply&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आवेदन करते समय इस बात का रखें खास ध्यान&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;इस बार आवेदन नई SSC वेबसाइट या my SSC मोबाइल ऐप के जरिए किया जा सकता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;जिन उम्मीदवारों ने पुरानी SSC वेबसाइट पर OTR बनाया था, उन्हें नई वेबसाइट पर दोबारा One-Time Registration (OTR) करना होगा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;आवेदन में लाइव फोटो कैप्चर की जाएगी, इसलिए अंतिम दिन का इंतजार करने के बजाय समय रहते फॉर्म भरना बेहतर रहेगा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;SSC ने खुद उम्मीदवारों को आखिरी तारीख के आसपास वेबसाइट पर अधिक लोड के कारण होने वाली परेशानी से बचने की सलाह दी है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नौकरी मांगने पहुंची डेवलपर, स्टार्टअप की वेबसाइट को बताया &lsquo;Disgusting&rsquo;; फाउंडर का जवाब हुआ वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[ऑफिस पंच इन-पंच आउट सिस्टम पर भड़की मार्केटिंग प्रोफेशनल, बोली- ये अब भी क्यों चल रहा? देखें वीडियो]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/punch-in-punch-out-system-archaic-corporate-workplace-debate-marketing-professional-instagram-viral-video-articleshow-6qmd3yy</link>
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            <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 18:20:01 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Punch In Punch Out System Viral Video: &lt;/strong&gt;क्या ऑफिस में बिताए घंटों से कर्मचारी की काबिलियत तय होनी चाहिए? &lsquo;पंच इन-पंच आउट&rsquo; सिस्टम पर मार्केटिंग प्रोफेशनल का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा है। जानिए उन्होंने क्या कहा और यूजर्स के बीच क्यों बहस तेज हुई।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m2332pdz4zp20w2cq5ayqwrd,imgname-punch-in-punch-out-system-viral-video-1788957776318.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Instagram Viral Video:&lt;/strong&gt; ऑफिस में समय पर पहुंचना, मशीन या ऐप पर अटेंडेंस लगाना और तय वक्त पर निकलना, कॉर्पोरेट वर्क कल्चर का यह तरीका लंबे समय से कर्मचारियों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। लेकिन जब काम का बड़ा हिस्सा लैपटॉप, मोबाइल और ऑनलाइन मीटिंग्स के जरिए कहीं से भी किया जा सकता है, तब एक सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या कर्मचारी की काबिलियत को ऑफिस में बिताए घंटों से मापा जाना चाहिए? मार्केटिंग प्रोफेशनल ताशी थुकराल ने सोशल मीडिया पर इसी सवाल को उठाते हुए पारंपरिक &lsquo;पंच-इन, पंच-आउट&rsquo; सिस्टम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनके एक इंस्टाग्राम वीडियो ने ऑफिस अटेंडेंस और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी। पूरी डिटेल जानने के लिए आगे पढ़ें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lsquo;ऑफिस पहुंचते ही दिमाग ऑन नहीं होता&rsquo;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;थुकराल का कहना है कि खासकर मार्केटिंग जैसे कामों में कर्मचारी की प्रोडक्टिविटी सिर्फ इस बात से तय नहीं की जा सकती कि उसने ऑफिस में कितने घंटे बिताए। उन्होंने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का दिमाग ऑफिस पहुंचने के साथ अचानक काम करना शुरू नहीं करता और ऑफिस से निकलते ही बंद भी नहीं हो जाता। उनका सवाल यह भी है कि अगर कर्मचारी से तय ऑफिस टाइम के बाहर व्हाट्सएप या दूसरे माध्यमों से काम को लेकर संपर्क किया जा रहा है, तो सिर्फ ऑफिस में मौजूदगी के घंटों का हिसाब रखना कितना तार्किक है? उन्होंने कैप्शन में इस सिस्टम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और साफ किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, जो मार्केटिंग में उनके अनुभव पर आधारित है। नीचे देखें वीडियो-&lt;/p&gt;View this post on Instagram&lt;p&gt;A post shared by taashi thukral (@taashithukrall)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;₹17 लाख का जॉब ऑफर मिला, फिर इस शख्स ने ऐसे बढ़वा ली सैलरी, हाथ आया ₹23 लाख का पैकेज&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोशल मीडिया पर दो खेमों में बंटी राय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने थुकराल की बात का समर्थन किया। कुछ लोगों ने माना कि आउटकम-बेस्ड वर्क कल्चर में कर्मचारी के काम की गुणवत्ता और परिणाम ज्यादा मायने रखते हैं। वहीं, कुछ यूजर्स ने बहस का दूसरा पहलू सामने रखा। उनके मुताबिक असली समस्या अटेंडेंस सिस्टम नहीं, बल्कि ऑफिस के तय समय के बाद भी कर्मचारियों से काम करवाने की संस्कृति है। एक यूजर ने तर्क दिया कि अगर वर्किंग आवर्स तय हैं, तो कर्मचारी के घर पहुंचने के बाद काम से जुड़े मैसेज और मांगें भी रुकनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;64% बढ़ गई PM की सैलरी! अब सालाना मिलेंगे ₹27 करोड़, जानिए किस देश में है ये सबसे बड़ा पैकेज&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;असली सवाल: अटेंडेंस या जवाबदेही?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बहस का सबसे अहम पहलू यही है कि लचीला काम और जवाबदेही एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। जिन नौकरियों में शिफ्ट, कस्टमर सर्विस, प्रोडक्टिविटी या तय समय पर मौजूदगी जरूरी है, वहां अटेंडेंस सिस्टम की भूमिका बनी रह सकती है। लेकिन ऐसे काम, जहां लक्ष्य और डिलिवरेबल स्पष्ट हैं, वहां केवल सीट पर बिताया समय पूरी तस्वीर नहीं बताता। यानी आने वाले समय में बहस शायद &lsquo;पंच-इन बनाम नो पंच-इन&rsquo; की नहीं, बल्कि काम के घंटे, कर्मचारी की निजता, जवाबदेही और रियल प्रोडक्टिविटी के बीच सही संतुलन की होगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[2 साल तक रोज 14 घंटे काम करता रहा कर्मचारी, फिर खुला मैनेजर का ऐसा राज कि उड़ गए होश]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/employee-worked-14-hours-for-2-years-manager-husband-personal-brand-viral-reddit-post-articleshow-cnsb8wv</link>
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            <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 18:51:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Manager Misused Employee Viral Reddit Post: दो साल तक रोज 14 घंटे काम करने वाले कर्मचारी ने Reddit पर मैनेजर को लेकर चौंकाने वाला दावा किया। उसने बताया कि जिस काम को ऑफिस का समझा, वह असल में ऑफिस का था ही नहीं, जानिए किसके लिए था?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1rvgfb99ewntw8hpf5b2npf,imgname-manager-misused-employee-viral-reddit-post-1788614294889.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Viral Reddit Post: &lt;/strong&gt;एक कर्मचारी ने Reddit पर अपनी नौकरी का ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने वर्कप्लेस कल्चर और मैनेजर के अधिकारों के दुरुपयोग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारी का दावा है कि उसने करीब दो साल तक रोजाना 14 घंटे तक काम किया। उसे लगता रहा कि यह सब कंपनी की नौकरी का हिस्सा है, लेकिन बाद में पता चला कि उसके काम का एक हिस्सा कथित तौर पर उसकी मैनेजर के पति के निजी ब्रांड से जुड़ा था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नौकरी के साथ शुरू हुआ एक्स्ट्रा काम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कर्मचारी के मुताबिक, कंपनी जॉइन करने के करीब एक महीने बाद ही मैनेजर ने उसे अपनी जिम्मेदारियों से अलग काम देना शुरू कर दिया। चूंकि यह उसकी पहली नौकरी थी, इसलिए उसने शुरुआत में इन अतिरिक्त कामों को भी ऑफिस की सामान्य जिम्मेदारी मान लिया। Reddit पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि अपना नियमित काम पूरा करने के बाद भी उसे मैनेजर के दिए असाइनमेंट पूरे करने पड़ते थे। काम इतना बढ़ गया कि वह अक्सर रात 10 या 11 बजे तक ऑफिस के काम में लगा रहता था। उसका कहना है कि उसे तब तक यह अंदाजा नहीं था कि जिस प्रोजेक्ट पर वह इतनी मेहनत कर रहा है, उसका संबंध कंपनी के बजाय किसी निजी ब्रांड से हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एक दिन में 40 से ज्यादा क्रिएटिव बनाने का दावा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पोस्ट के मुताबिक, मैनेजर उससे एक दिन में 40 से ज्यादा क्रिएटिव तैयार करने की उम्मीद करती थीं। कर्मचारी ने यह भी दावा किया कि उसकी छुट्टियां आसानी से मंजूर नहीं होती थीं। उसने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब उसने यात्रा के लिए दो दिन की छुट्टी मांगी तो कथित तौर पर मैनेजर ने उससे लैपटॉप साथ ले जाने और यात्रा के दौरान काम करने को कहा। उस समय भी कर्मचारी को लगा कि यह कंपनी की किसी जरूरी डेडलाइन का हिस्सा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं रोमन सैनी? IAS की कुर्सी छोड़ी, Unacademy खड़ी की और अब 206 मिलियन डॉलर की डील से फिर चर्चा में&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;खराब रेटिंग और जीरो अप्रेजल का भी आरोप&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कर्मचारी का दावा है कि दो साल तक इतनी मेहनत करने के बावजूद उसे खराब रेटिंग मिली और कोई अप्रेजल नहीं दिया गया। उसके मुताबिक, आधिकारिक जिम्मेदारियों से ज्यादा समस्या यह बताई गई कि वह मैनेजर के अतिरिक्त प्रोजेक्ट को उनकी अपेक्षा के मुताबिक पूरा नहीं कर पाया। बाद में जब उसे कथित तौर पर पता चला कि जिस काम को वह कंपनी का प्रोजेक्ट समझ रहा था, वह मैनेजर के पति के निजी ब्रांड से संबंधित था, तो उसे बड़ा झटका लगा। कर्मचारी ने अपनी स्थिति बताते हुए लिखा कि उसे महसूस हुआ जैसे वह दो साल से बिना भुगतान के एक निजी फ्रीलांसर की तरह काम कर रहा था। नीचे देखें वायरल रेडिट पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;working beyond working hours and recently discovered that overtime was for her personal brand lol how to ban her instagram account she scammed meby u/Ok_Fruit_9791 in ToxicWorkplace&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नौकरी मांगने पहुंची डेवलपर, स्टार्टअप की वेबसाइट को बताया &lsquo;Disgusting&rsquo;; फाउंडर का जवाब हुआ वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Reddit यूजर्स ने HR पर उठाए सवाल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पोस्ट के बाद कई Reddit यूजर्स ने कर्मचारी से पूछा कि उसने कंपनी के HR विभाग से शिकायत क्यों नहीं की। कुछ लोगों का कहना था कि अगर उसके पास काम से जुड़े ईमेल, मैसेज, फाइलें या अन्य रिकॉर्ड मौजूद हैं, तो वे पूरे मामले को समझने और शिकायत दर्ज कराने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हालांकि, Reddit पोस्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मैनेजर या कंपनी की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया के बिना इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। यह मामला फिर भी इस बात पर गंभीर सवाल उठाता है कि कर्मचारियों को अपनी आधिकारिक भूमिका और निजी काम के बीच अंतर साफ तौर पर समझना कितना जरूरी है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[September School Holidays: सितंबर में इतने दिन बंद रहेंगे स्कूल, 12 से 14 सितंबर तक बनेगा लंबा वीकेंड]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/september-2026-school-holidays-delhi-brics-ganesh-chaturthi-telangana-ap-maharashtra-articleshow-cxbw3c9</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:26:33 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;School Holiday List 2026: सितंबर 2026 में जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, मिलाद-उन-नबी और अनंत चतुर्दशी के कारण अलग-अलग राज्यों में स्कूलों का शेड्यूल बदलेगा। दिल्ली में 11 सितंबर को BRICS Summit तैयारी पर छुट्टी, तेलंगाना-आंध्र में 12-14 सितंबर तीन दिन का ब्रेक, महाराष्ट्र में 18 और 25 सितंबर को संभावित स्थानीय अवकाश, 22 सितंबर को मिलाद-उन-नबी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m27m1dk7tcd58hf03xwnpccf,imgname-school-holiday-1789109778023.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Delhi BRICS Summit Schools Closed: सितंबर 2026 में त्योहारों के साथ-साथ कुछ खास आयोजनों की वजह से कई राज्यों के स्कूलों के कैलेंडर में बदलाव देखने को मिल रहा है। जन्माष्टमी के बाद अब गणेश चतुर्थी, गौरी पूजन, मिलाद-उन-नबी और अनंत चतुर्दशी जैसे त्योहारों की छुट्टियां रहेंगी। वहीं, दूसरे शनिवार और रविवार के साथ त्योहार की छुट्टी जुड़ने से कुछ जगह छात्रों को लगातार तीन दिन का ब्रेक भी मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हालांकि, स्कूलों की छुट्टियां राज्य, जिले और स्थानीय प्रशासन के आदेश के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में अभिभावकों और छात्रों को अपने स्कूल की आधिकारिक सूचना जरूर देखनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दिल्ली में 11 सितंबर को स्कूल बंद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 11 सितंबर को स्कूल बंद रहे। राजधानी में होने वाले BRICS Summit की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यह अवकाश रखा गया। BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को आयोजित होना है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उच्चस्तरीय सम्मेलन के दौरान यातायात, सुरक्षा और आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए दिल्ली में कई स्तरों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। इसी के तहत 11 सितंबर को शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित रखने का फैसला लिया गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 12 से 14 सितंबर तक ब्रेक&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में छात्रों के लिए सितंबर का एक लंबा ब्रेक 12 सितंबर से शुरू हो रहा है। 12 सितंबर को दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार होने के बाद 14 सितंबर को विनायक चविथि का अवकाश है। इस तरह लगातार तीन दिनों तक नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी। दूसरे शनिवार, रविवार और त्योहार की छुट्टी एक साथ पड़ने से छात्रों को छोटा लंबा वीकेंड मिल रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;14 सितंबर को गणेश चतुर्थी की छुट्टी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सोमवार, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। महाराष्ट्र के साथ तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी गणेश उत्सव का खास महत्व है। इस दौरान स्कूलों के अलावा कई सरकारी संस्थानों और स्थानीय कार्यालयों में भी अवकाश रखा जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैदराबाद और सिकंदराबाद जैसे शहरों में गणेश उत्सव के दौरान बड़े स्तर पर आयोजन होते हैं। गणेश विसर्जन के दिन भीड़, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की ओर से अलग से अवकाश या अन्य व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;18 सितंबर को गौरी पूजन का स्थानीय अवकाश&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शुक्रवार, 18 सितंबर को महाराष्ट्र और आसपास के कुछ क्षेत्रों में गौरी पूजन के कारण स्थानीय छुट्टी हो सकती है। यह अवकाश हर राज्य या हर जिले में समान रूप से लागू नहीं होगा। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को अपने स्कूल की ओर से जारी छुट्टी की सूची देखनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गणेश उत्सव के दौरान महाराष्ट्र में गौरी पूजन का विशेष महत्व होता है और कई स्थानों पर इस अवसर पर स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश रखा जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;22 सितंबर को मिलाद-उन-नबी की छुट्टी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मंगलवार, 22 सितंबर को मिलाद-उन-नबी के अवसर पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में स्कूलों में अवकाश रहेगा। इस दिन पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिवस के रूप में मिलाद-उन-नबी मनाया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राज्यवार अवकाश सूची में इस त्योहार की तारीख और छुट्टी अलग-अलग हो सकती है, इसलिए दूसरे राज्यों के छात्रों को अपने स्थानीय स्कूल कैलेंडर के अनुसार जानकारी देखनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शुक्रवार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। महाराष्ट्र और मध्य भारत के कई हिस्सों में यह दिन गणेश विसर्जन से जुड़ा होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण है। कुछ क्षेत्रों में इस अवसर पर स्कूलों में अवकाश रखा जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान बड़े जुलूस और भीड़ रहती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से यातायात और सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों के लिए अलग निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;छात्रों को स्कूल की सूचना जरूर देखनी चाहिए&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सितंबर 2026 में छुट्टियों का पैटर्न पूरे देश में एक जैसा नहीं है। कहीं त्योहार की छुट्टी सप्ताहांत के साथ जुड़कर तीन दिन का ब्रेक बना रही है, तो कुछ जगह स्थानीय त्योहारों और प्रशासनिक फैसलों के कारण अतिरिक्त अवकाश मिल सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसलिए अभिभावकों और छात्रों को छुट्टी की योजना बनाने से पहले स्कूल, शिक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचना जरूर जांचनी चाहिए। खासकर गणेश विसर्जन और स्थानीय त्योहारों के मामले में छुट्टी का फैसला जिले के अनुसार अलग हो सकता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/september-2026-school-holidays-delhi-brics-ganesh-chaturthi-telangana-ap-maharashtra-articleshow-cxbw3c9"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[64% बढ़ गई PM की सैलरी! अब सालाना मिलेंगे ₹27 करोड़, जानिए किस देश में है ये सबसे बड़ा पैकेज]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/singapore-pm-lawrence-wong-salary-hike-64-percent-27-crore-annual-salary-articleshow-i4e6mio</link>
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            <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 12:12:18 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PM Salary Hike 2026:&lt;/strong&gt; PM की सैलरी में हुआ ऐसा इजाफा कि आंकड़ा सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। जानिए किस देश ने लिया ये बड़ा फैसला और क्या है इसके पीछे की वजह।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m22ebefnyp5ttd19wh4g8pqe,imgname-pm-salary-hike-2026-1788936042997.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PM Lawrence Wong Salary Hike:&lt;/strong&gt; दुनिया में प्रधानमंत्री का पद सिर्फ सत्ता और जिम्मेदारी के लिहाज से ही बड़ा नहीं होता, कुछ देशों में इस पद की सैलरी भी हैरान कर देती है। अब सिंगापुर ने अपने राजनीतिक पदों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के लिए सालाना सैलरी का नया बेंचमार्क S$3.6 मिलियन तय किया गया है। भारतीय रुपये में यह रकम करीब ₹27 करोड़ सालाना बैठती है। मौजूदा S$2.2 मिलियन के मुकाबले यह करीब 64 फीसदी की बढ़ोतरी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;15 साल बाद बदला सिंगापुर पीएम सैलरी स्ट्रक्चर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सिंगापुर सरकार ने करीब 15 साल बाद मंत्रियों और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों के वेतन की समीक्षा की है। नए ढांचे के मुताबिक प्रधानमंत्री का बेंचमार्क पैकेज S$2.2 मिलियन से बढ़कर S$3.6 मिलियन हो गया है। हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। 64% की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि लॉरेंस वोंग को तुरंत पूरी S$3.6 मिलियन रकम मिलने लगेगी। मौजूदा राजनीतिक पदाधिकारियों के लिए शुरुआत में 15 अक्टूबर से अधिकतम 9% का एकमुश्त समायोजन किया जाएगा। इसके बाद वेतन में बदलाव जिम्मेदारी और व्यक्तिगत प्रदर्शन से जोड़ा जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;डिप्टी PM और मंत्रियों की भी बढ़ेगी कमाई&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नए वेतन ढांचे का असर सिर्फ प्रधानमंत्री पर नहीं पड़ेगा। डिप्टी प्रधानमंत्री के लिए नया बेंचमार्क पैकेज S$3.06 मिलियन रखा गया है। वहीं कैबिनेट मंत्रियों का सालाना पैकेज उनकी वरिष्ठता और जिम्मेदारियों के आधार पर S$1.80 मिलियन से S$2.88 मिलियन के बीच होगा। सांसदों के मासिक भत्ते में भी बढ़ोतरी प्रस्तावित है। यह S$13,750 से बढ़कर S$18,500 किया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन थे राकेश मेहता, जानिए दिल्ली के पूर्व चीफ सेक्रेटरी का करियर, फैमिली में कौन-कौन?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अपनी बढ़ी हुई सैलरी खुद नहीं रखेंगे वोंग, किया बड़ा ऐलान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस फैसले के बीच प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने एक अहम ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अपनी सैलरी में होने वाली पूरी बढ़ोतरी को वह चैरिटी और सामाजिक कार्यों के लिए दान करेंगे। उनका कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है और वह दूसरे राजनीतिक नेताओं से ऐसी उम्मीद नहीं करते।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इतनी ज्यादा सैलरी देने के पीछे क्या है तर्क?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सिंगापुर सरकार लंबे समय से मानती रही है कि अच्छे और सक्षम लोगों को राजनीति में बनाए रखने के लिए राजनीतिक पदों पर प्रतिस्पर्धी वेतन जरूरी है। सरकार के मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था और प्रशासन को संभालने के लिए शीर्ष स्तर पर मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। यही वजह है कि सिंगापुर में राजनीतिक सैलरी का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहता है। एक तरफ सरकार इसे बेहतर नेतृत्व और प्रतिभा को आकर्षित करने का जरिया बताती है, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी रकम आम नागरिकों के बीच बहस का विषय भी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;अमेरिका जाने के लिए कौन सा वीजा चाहिए? घूमने से नौकरी और ग्रीन कार्ड तक हर तरह के वीजा की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;लॉरेंस वोंग ने भी माना है कि राजनीतिक वेतन एक संवेदनशील मुद्दा है। उनका तर्क है कि बहस सिर्फ नेताओं की सैलरी पर नहीं, बल्कि देश को लंबे समय तक प्रभावी तरीके से चलाने के लिए जरूरी क्वालिटी लीडरशिप पर भी होनी चाहिए।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/singapore-pm-lawrence-wong-salary-hike-64-percent-27-crore-annual-salary-articleshow-i4e6mio"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[कनाडा में कैसे मिलती है ट्रक ड्राइवर की नौकरी, कितनी होती है सैलरी? जानिए पूरा प्रोसेस]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/how-to-get-truck-driver-job-in-canada-salary-process-for-indians-articleshow-kegg9qy</link>
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            <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 16:00:05 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;How to Get Truck Driver Job in Canada: कनाडा में ट्रक ड्राइवर की नौकरी कैसे मिलती है और सैलरी कितनी होती है? जानिए लाइसेंस, वर्क परमिट, जरूरी योग्यता और भारत से आवेदन का पूरा प्रोसेस।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m25dsqpq9xem4yv9txz2r0qh,imgname-how-to-get-truck-driver-job-in-canada-1789036125910.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Canada Truck Driver Jobs:&lt;/strong&gt; अगर आप ड्राइविंग का काम जानते हैं और विदेश में नौकरी का सपना देख रहे हैं, तो कनाडा में ट्रक ड्राइवर की जॉब आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकती है। लेकिन यहां पहुंचकर सीधे ट्रक चलाना इतना आसान नहीं है। सही लाइसेंस, ड्राइविंग ट्रेनिंग, जरूरी सर्टिफिकेट और कानूनी वर्क परमिट, इन सबका इंतजाम करना पड़ता है। खास बात यह है कि कनाडा में ट्रांसपोर्ट ट्रक ड्राइवर की हजारों जॉब्स लिस्टेड हैं और देशभर में इस काम की मीडियन कमाई करीब 26.42 कनाडाई डॉलर प्रति घंटे, यानी लगभग 1,822 रुपए प्रति घंटे होती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कनाडा में ट्रक ड्राइवर को कितनी मिलती है सैलरी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कनाडा के सरकारी जॉब बैंक के मुताबिक ट्रांसपोर्ट ट्रक ड्राइवर की कमाई पूरे देश में आम तौर पर 19.45 से 37 कनाडाई डॉलर प्रति घंटे के बीच है। भारतीय रुपये में देखें तो यह करीब 1,340 रुपए से 2,550 रुपए प्रति घंटा होता है। मीडियन रेट 26.42 कनाडाई डॉलर यानी करीब 1,820 रुपए प्रति घंटा है। प्रांत के हिसाब से भी कमाई बदलती है। मसलन, अल्बर्टा में मीडियन करीब 30 डॉलर प्रति घंटा, यानी लगभग 2,070 रुपए, जबकि ब्रिटिश कोलंबिया में करीब 30.77 डॉलर, यानी करीब 2,120 रुपए प्रति घंटा है। ओंटारियो में मीडियन करीब 26 डॉलर, यानी लगभग 1,794 रुपए प्रति घंटा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगर सालाना कमाई का मोटा अंदाजा लगाएं और 40 घंटे प्रति सप्ताह के हिसाब से देखें, तो 26.42 डॉलर प्रति घंटे की मीडियन रेट करीब 54,800 कनाडाई डॉलर सालाना, यानी लगभग 37.8 लाख रुपए सालाना होती है। यह सिर्फ कैलकुलेशन है, असली कमाई काम के घंटे, रूट, कंपनी और ओवरटाइम के हिसाब से अलग हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;₹17 लाख का जॉब ऑफर मिला, फिर इस शख्स ने ऐसे बढ़वा ली सैलरी, हाथ आया ₹23 लाख का पैकेज&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भारत का हेवी मोटर व्हीकल लाइसेंस है तो क्या सीधे नौकरी मिलेगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नहीं। भारत का हेवी मोटर व्हीकल लाइसेंस और ट्रक चलाने का एक्सपीरियंस आपके लिए प्लस प्वाइंट जरूर है, लेकिन कनाडा में ट्रक चलाने के लिए वहां के प्रांत के नियमों के मुताबिक लाइसेंस लेना पड़ सकता है। बड़े ट्रेलर या लंबे कॉम्बिनेशन वाले ट्रक के लिए आम तौर पर क्लास 1 या A लाइसेंस की जरूरत होती है। एयर ब्रेक वाले वाहन चलाने के लिए एयर ब्रेक एंडोर्समेंट भी जरूरी हो सकता है। कुछ मामलों में मान्यता प्राप्त ड्राइवर ट्रेनिंग भी करनी पड़ती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भारत से कनाडा जाने वालों के लिए क्या है ट्रक ड्राइवर जॉब पाने पूरा प्रोसेस?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सबसे पहले कनाडा के सरकारी जॉब बैंक पर ट्रक ड्राइवर की वैकेंसी चेक करें। अगस्त 2026 में अपडेट हुए आंकड़ों के मुताबिक देश में ट्रांसपोर्ट ट्रक ड्राइवर के लिए 2,000 से ज्यादा जॉब्स लिस्टेड थीं। लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है। अगर आप कनाडा में पहले से काम करने के लिए अधिकृत नहीं हैं, तो हर जॉब के लिए बाहर से आवेदन नहीं किया जा सकता। ऐसे उम्मीदवारों को उन कंपनियों की वैकेंसी देखनी चाहिए जो विदेश से लोगों को भर्ती करने के लिए तैयार हों।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;64% बढ़ गई PM की सैलरी! अब सालाना मिलेंगे ₹27 करोड़, जानिए किस देश में है ये सबसे बड़ा पैकेज&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Work Permit और LMIA भी है जरूरी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत से कनाडा जाने वाले उम्मीदवार के लिए सिर्फ जॉब ऑफर काफी नहीं है। आपकी स्थिति के हिसाब से वैध वर्क परमिट की जरूरत होगी। कुछ मामलों में कंपनी को विदेशी कर्मचारी रखने के लिए LMIA की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है। यही वजह है कि किसी एजेंट के &ldquo;गारंटीड कनाडा जॉब&rdquo; या &ldquo;पक्का वीजा&rdquo; जैसे दावों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। पहले कंपनी, जॉब ऑफर और भर्ती की पूरी जानकारी वेरिफाई करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यानी रास्ता साफ है, पहले सही जॉब खोजिए, फिर लाइसेंस और जरूरी ट्रेनिंग पूरी कीजिए और उसके बाद कानूनी वर्क परमिट के जरिए कनाडा में काम शुरू कीजिए।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[कौन हैं हर्ष गोयनका, शेयर किया चंद सेकंड में मेहंदी लगाने वाली मशीन का वीडियो, जॉब पर कही बड़ी बात]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-harsh-goenka-mehendi-machine-viral-video-sparks-automation-jobs-debate-articleshow-kkc7lu1</link>
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            <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 18:46:00 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Harsh Goenka Mehendi Machine Viral Video: चंद सेकंड में मेहंदी लगाने वाली मशीन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बता दें कि इस मेहंदी लगाने वाली मशीन का वीडियो हर्ष गोयनका ने अपने एक्स अकाउंट से शेयर की है। जानिए हर्ष गोयनका कौन हैं और वीडियो शेयर करते हुए जॉब को लेकर ऐसा क्या कहा कि बहस छिड़ गई।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mehendi Machine Viral Video: &lt;/strong&gt;सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो चर्चा में है, जिसने मेहंदी लगाने जैसी पारंपरिक कला को सीधे ऑटोमेशन और नौकरियों की बहस से जोड़ दिया है। RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने X पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एक मशीन बेहद कम समय में हाथ पर जटिल मेहंदी डिजाइन बनाती दिखाई देती है। वीडियो के साथ गोयनका ने लिखा- &ldquo;Some more jobs gone.&rdquo; पोस्ट वायरल होते ही सवाल उठने लगा कि अगर मशीनें ऐसे काम भी करने लगीं, जो अब तक इंसान करते आए हैं, तो आने वाले समय में रोजगार का क्या होगा?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हर्ष गोयनका कौन हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हर्ष वर्धन गोयनका भारत के जाने-माने उद्योगपतियों में शामिल हैं और RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हैं। RPG Group की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, वह पांचवीं पीढ़ी के कारोबारी परिवार से आते हैं। उन्होंने महज 24 साल की उम्र में 1983 में CEAT के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी और बाद में RPG ग्रुप की कमान संभाली। RPG ग्रुप आज टायर, इंफ्रास्ट्रक्चर, IT, फार्मास्यूटिकल्स, एनर्जी और दूसरे क्षेत्रों में कारोबार करता है। समूह की प्रमुख कंपनियों में CEAT, KEC International, Zensar Technologies, RPG Life Sciences और Raychem RPG शामिल हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;mPHG क्या है? क्या यह नया वायरस है, जानिए mPhG का मतलब और सोशल मीडिया वायरल ट्रेंड का सच&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मशीन की रफ्तार बनाम इंसानी हुनर पर बहस&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दो हिस्सों में बंटती दिखीं। कुछ लोगों ने इसे तकनीक की तेजी और सटीकता का उदाहरण माना, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि मेहंदी सिर्फ डिजाइन बनाने का काम नहीं है। इसके साथ कलाकार का अनुभव, हाथ की बारीकी और ग्राहक से जुड़ाव भी मायने रखता है। यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मशीन इंसान से तेज काम कर सकती है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या हर ऐसा काम, जिसे तकनीक तेजी से कर सकती है, उसमें इंसान की भूमिका खत्म हो जाएगी? नीचे देखें वायरल मेहंदी मशीन का वीडियो-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Some more jobs gone  pic.twitter.com/jKiUzB8gOA&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Harsh Goenka (@hvgoenka) September 9, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या वायरल वीडियो AI से बना है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इसी बीच वीडियो की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि क्लिप AI-जेनरेटेड हो सकती है और वीडियो में उन्हें कुछ विजुअल गड़बड़ियां नजर आईं। कुछ टिप्पणियों में यह भी कहा गया कि ऐसी मशीन को हाथ की स्थिति और डिजाइन की सही अलाइनमेंट के लिए स्कैनिंग या Calibration की जरूरत हो सकती है। हालांकि, वीडियो के AI-generated होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे वास्तविक मशीन का प्रमाण या AI वीडियो बताना सही नहीं होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;क्या है 80s AI फोटो ट्रेंड? पीएम मोदी से पीयूष गोयल और कुमार विश्वास तक, नेताओं पर चढ़ा 80s का रंग, देखें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मेहंदी से शुरू हुई बहस असल में नौकरियों पर है&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हर्ष गोयनका की पोस्ट ने एक छोटे से वीडियो को बड़े सवाल में बदल दिया है, ऑटोमेशन से काम आसान होगा या रोजगार के मौके कम होंगे? मशीनें निश्चित तौर पर कई कामों को तेज और अधिक एकसमान बना सकती हैं, लेकिन मेहंदी वीडियो पर आई प्रतिक्रियाएं यह भी दिखाती हैं कि कई सेवाओं में लोग आज भी मानवीय स्पर्श, रचनात्मकता और व्यक्तिगत अनुभव को महत्व देते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-harsh-goenka-mehendi-machine-viral-video-sparks-automation-jobs-debate-articleshow-kkc7lu1"/>
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        <item>
            <title><![CDATA[जबलपुर के विनुभाई कैसे बने महंत स्वामी महाराज? पढ़ाई से BAPS के छठे गुरु तक की पूरी कहानी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/mahant-swami-maharaj-life-story-family-education-to-baps-sixth-guru-full-biography-articleshow-kr85nau</link>
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            <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 16:18:20 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahant Swami Maharaj Biography: &lt;/strong&gt;पेरिस के एफिल टावर बंद होने, महिला स्टाफ विवाद के बीच BAPS सुर्खियों में है। इस बीच जानिए BAPS गुरु महंत स्वामी महाराज की पूरी कहानी। पढ़ाई, शुरुआती जीवन, योगीजी महाराज से मुलाकात और BAPS के छठे गुरु बनने तक का पूरा सफर पढ़ें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m209qg8nc8bzwv208ate4tmj,imgname-mahant-swami-maharaj-biography-1788864086291.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahant Swami Maharaj Life Story: &lt;/strong&gt;महंत स्वामी महाराज का नाम आज BAPS स्वामीनारायण संस्था की आध्यात्मिक परंपरा के प्रमुख संतों में लिया जाता है। हाल ही में एफिल टावर महिला स्टाफ विवाद मामले में BAPS और महंत स्वामी महाराज का नाम सुर्खियों में आया। बता दें कि महंत स्वामी महाराज की पहचान सिर्फ एक धार्मिक गुरु के तौर पर नहीं है। उनका जीवन एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने पढ़ाई में उत्कृष्टता हासिल की, कृषि की पढ़ाई की और फिर आध्यात्मिक मार्ग को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्तमान में वे BAPS के छठे आध्यात्मिक गुरु और दुनिया भर में संस्था के आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं। जानिए BAPS गुरु महंत स्वामी महाराज की लाइफ स्टोरी, एजुकेश, फैमिली और संत बनने तक की कहानी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महंत स्वामी महाराज: जबलपुर में जन्म, नाम रखा गया केशव&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महंत स्वामी महाराज का जन्म 13 सितंबर 1933 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में मनिभाई नारायणभाई पटेल और दहिबेन के घर हुआ। उनका बचपन का नाम विनुभाई था। जन्म के कुछ समय बाद BAPS के संस्थापक शास्त्रीजी महाराज जबलपुर पहुंचे और उन्होंने बालक को आशीर्वाद देकर उसका नाम केशव रखा। हालांकि परिवार में उन्हें प्यार से वीनू ही कहा जाता था। उनके पिता मूल रूप से गुजरात के आनंद के रहने वाले थे और कारोबार के सिलसिले में जबलपुर आकर बसे थे। वीनुभाई ने शुरुआती पढ़ाई जबलपुर में की और बाद में आनंद लौटकर कृषि महाविद्यालय से कृषि में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान उनकी तार्किक सोच और तेज बुद्धि की काफी चर्चा थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;एफिल टावर में ऐसा क्या हुआ कि लगा ताला? BAPS कौन है और महिला स्टाफ विवाद क्या है, जानें पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;योगीजी महाराज से मुलाकात ने बदल दी जिंदगी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उनके जीवन का निर्णायक मोड़ 1951-52 के आसपास आया, जब उनका संपर्क योगीजी महाराज से हुआ। योगीजी महाराज के व्यक्तित्व, सरलता और निस्वार्थ प्रेम ने वीनुभाई को गहराई से प्रभावित किया। धीरे-धीरे उनका झुकाव सांसारिक जीवन से हटकर साधु जीवन की ओर बढ़ने लगा। 1957 में उन्होंने पार्षद दीक्षा लेकर &lsquo;वीनू भगत&rsquo; के रूप में सेवा शुरू की। इसके बाद वे योगीजी महाराज के साथ रहने लगे और उनकी यात्राओं, पत्र-व्यवहार तथा विभिन्न सेवाओं में सहयोग करने लगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;1961 में बने साधु, फिर मिला &lsquo;महंत स्वामी&rsquo; नाम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;साल 1961 में गढ़डा में आयोजित एक बड़े धार्मिक समारोह के दौरान योगीजी महाराज ने 51 शिक्षित युवाओं को भगवती दीक्षा दी। इसी अवसर पर वीनू भगत को साधु दीक्षा मिली और उनका नाम स्वामी केशवजीवनदास रखा गया। इसके बाद उन्हें मुंबई के दादर मंदिर में साधुओं का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। इसी वजह से वे आगे चलकर &lsquo;महंत स्वामी&rsquo; के नाम से प्रसिद्ध हुए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; Mahant Swami Maharaj: कौन हैं BAPS गुरु? Eiffel Tower विवाद में क्यों घिरे?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;प्रामुख स्वामी महाराज के साथ छह दशक की सेवा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;1971 में योगीजी महाराज के देहावसान के बाद महंत स्वामी महाराज ने प्रामुख स्वामी महाराज के मार्गदर्शन में अपनी सेवाएं जारी रखीं। उन्होंने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी यात्रा की और सत्संग, युवा गतिविधियों, धार्मिक आयोजनों तथा BAPS की विभिन्न परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रवचनों में आध्यात्मिक जीवन के साथ अनुशासन, नशामुक्ति, परिवार और अच्छे संस्कार जैसे विषयों पर भी जोर दिया जाता रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2012 में सामने आया उत्तराधिकारी का नाम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महंत स्वामी महाराज के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 20 जुलाई 2012 को आया। प्रामुख स्वामी महाराज ने एक पत्र के माध्यम से उन्हें अपने बाद BAPS के गुरु और अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया था। यह निर्णय उनके देहावसान के बाद 2016 में सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाया गया। 13 अगस्त 2016 को प्रामुख स्वामी महाराज के देहावसान के बाद महंत स्वामी महाराज ने BAPS की गुरु परंपरा की जिम्मेदारी संभाली। आज वे संस्था के छठे आध्यात्मिक गुरु के रूप में दुनिया भर में अनुयायियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनका जीवन शिक्षा, सेवा, साधना और गुरु-परंपरा के प्रति समर्पण की ऐसी यात्रा है, जिसने उन्हें जबलपुर के वीनूभाई से महंत स्वामी महाराज तक पहुंचाया।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Puja Essay in hindi: गणेश उत्सव पर बेस्ट + आसान निबंध, शॉर्ट से लॉन्ग तक यहां पढ़ें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/ganesh-puja-essay-in-hindi-short-medium-long-easy-ganesh-utsav-nibandh-ganesh-chaturthi-2026-articleshow-mp14fl4</link>
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            <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 12:14:31 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ganesh Chaturthi Essay in Hindi: गणेश पूजा पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में शामिल होने जा रहे हैं, तो यहां पढ़ें शॉर्ट से लॉन्ग तक, 100, 300 और 500 शब्दों में शानदार निबंध और जानें इस पर्व से जुड़ी खास बातें। जो आपके गणेश चतुर्थी पर निबंध को सबसे बेस्ट बना देंगे।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1zw3y2wp16kb7a4hxbv1gpc,imgname-ganesh-puja-essay-in-hindi-1788849813596.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Utsav 2026 Essay in Hindi: &lt;/strong&gt;इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है। गणेश चतुर्थी भारत के प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है, जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है, पूजा-अर्चना होती है और भक्त मोदक जैसे प्रसाद चढ़ाते हैं। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का सार्वजनिक रूप विशेष रूप से प्रसिद्ध है। 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे बड़े सार्वजनिक उत्सव का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह धार्मिक आयोजन सामाजिक एकता और जनजागरण का माध्यम भी बना। गणेश उत्सव पर स्कूल-कॉलेजों, विभिन्न संस्थाओं की ओर से कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, पेंटिंग, भाषण, निंबध जैसे कंपीटिशन आयोजित किए जाते हैं। यदि आप इस साल गणेश उत्सव पर निबंध प्रतियोगिता में शामिल होने जा रहे हैं, तो यहां हैं शॉर्ट से लेकर लॉन्ग तक बेस्ट गणेश पूजा निंबध। जिन्हें आप आसानी से याद कर सकते हैं और कंपीटिशन में अपनी जीत पक्की कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश पूजा पर शॉर्ट निबंध (Ganesh Puja Essay 100 Words)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेश पूजा यानी गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि, शुभता और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। इस दिन लोग घरों और पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित करते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। भगवान गणेश को मोदक प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में मोदक का विशेष महत्व है। उत्सव के अंत में गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। गणेश चतुर्थी हमें भक्ति के साथ एकता, सद्भाव और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश पूजा पर बेस्ट निबंध (Ganesh Puja Essay 300 Words)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत त्योहारों और परंपराओं का देश है। यहां मनाया जाने वाला हर पर्व अपने साथ आस्था और संस्कृति के साथ कोई न कोई महत्वपूर्ण संदेश भी लेकर आता है। गणेश चतुर्थी ऐसा ही एक लोकप्रिय त्योहार है। इसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर में आती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भगवान गणेश को हिंदू परंपरा में बुद्धि, विवेक, शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में सम्मान दिया जाता है। इसलिए किसी नए काम की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्त अपने घरों या सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित करते हैं। पूजा, आरती, भजन और प्रसाद वितरण के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मोदक को भगवान गणेश का प्रिय प्रसाद माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का विशेष महत्व है। आधुनिक सार्वजनिक गणेशोत्सव को लोकप्रिय बनाने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1893 में उन्होंने गणेश उत्सव को बड़े सार्वजनिक आयोजन का रूप देने में योगदान दिया। इसका उद्देश्य लोगों को एक मंच पर लाना और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाना भी था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गणेश उत्सव आम तौर पर कई दिनों तक चलता है और कई स्थानों पर अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। विभिन्न परिवारों और क्षेत्रों में विसर्जन की अवधि अलग-अलग हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आज गणेश पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है। यह समाज को एकजुट करने, कला-संस्कृति को बढ़ावा देने और पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का अवसर भी है। मिट्टी की प्रतिमाओं और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करके हम इस पर्व को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बना सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश पूजा पर लॉन्ग निबंध (Ganesh Puja Essay 500 Words)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत की संस्कृति में त्योहारों का विशेष स्थान है। ये त्योहार सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने, परंपराओं को आगे बढ़ाने और जीवन में सकारात्मकता लाने का काम भी करते हैं। गणेश चतुर्थी ऐसा ही एक प्रमुख पर्व है। इसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है और आमतौर पर अगस्त या सितंबर के आसपास पड़ता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भगवान गणेश को हिंदू धर्म में बुद्धि, विवेक, शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इसी वजह से किसी नए काम की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्त अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके बाद पूजा, आरती, भजन और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम होते हैं। भगवान गणेश को मोदक प्रिय माना जाता है, इसलिए इस पर्व में मोदक का विशेष महत्व दिखाई देता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व जितना बड़ा है, इसका सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी उतना ही खास है। महाराष्ट्र में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। सार्वजनिक गणेशोत्सव को आधुनिक समय में बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1893 में उन्होंने गणेश उत्सव को सार्वजनिक आयोजन का रूप देने में योगदान दिया। उस दौर में यह उत्सव लोगों को एक साथ लाने और सामाजिक तथा राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;समय के साथ गणेशोत्सव महाराष्ट्र से निकलकर देश के कई हिस्सों में लोकप्रिय हुआ। आज मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, गोवा और देश के दूसरे शहरों में भी गणेश पूजा बड़े उत्साह से की जाती है। घरों में होने वाली पूजा अपेक्षाकृत शांत और पारिवारिक होती है, जबकि सार्वजनिक पंडालों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गणेश उत्सव की एक महत्वपूर्ण परंपरा प्रतिमा विसर्जन है। कई स्थानों पर गणपति की प्रतिमा कुछ दिनों तक घर या पंडाल में रखी जाती है और फिर परंपरा के अनुसार विसर्जन किया जाता है। दस दिवसीय सार्वजनिक गणेशोत्सव का समापन आम तौर पर अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु शोभायात्रा निकालते हैं और गणपति की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में उत्सव की अवधि अलग हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आज गणेश पूजा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी तेजी से जुड़ रहा है। प्लास्टर ऑफ पेरिस और कुछ रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाओं के विसर्जन से जलस्रोतों पर असर पड़ सकता है। इसलिए मिट्टी की प्रतिमा, प्राकृतिक रंग और पर्यावरण-अनुकूल सजावट को बढ़ावा दिया जा रहा है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग भी पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव और प्राकृतिक सामग्रियों के इस्तेमाल पर जोर देता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गणेश चतुर्थी हमें यह समझाती है कि आस्था के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। भगवान गणेश को ज्ञान और शुभ शुरुआत का प्रतीक मानते हुए हमें अपने जीवन में विवेक, अनुशासन, एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान को अपनाना चाहिए। यही इस पर्व की सबसे सुंदर भावना है। गणपति की पूजा तभी और सार्थक बनती है, जब उसके साथ समाज और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी जुड़ी हो।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[कौन थे राकेश मेहता, जानिए दिल्ली के पूर्व चीफ सेक्रेटरी का करियर, फैमिली में कौन-कौन?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-was-rakesh-mehta-biography-career-education-family-ex-delhi-chief-secretary-dies-by-suicide-articleshow-pl15fol</link>
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            <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Who is IAS Rakesh Mehta: &lt;/strong&gt;राकेश मेहता कौन थे? जिन्होंने सुसाइड कर जान दी। जानिए दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता का आईएएस करियर, शिक्षा, परिवार, एमसीडी में भूमिका, 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में उनकी भूमिका और लाइफ की रोचक बातें।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Rakesh Mehta Biography:&lt;/strong&gt; दिल्ली की नौकरशाही में तीन दशक से ज्यादा समय तक अहम जिम्मेदारियां संभालने वाले पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता अब नहीं रहे। 1975 बैच के IAS अधिकारी मेहता का 6 सितंबर को नोएडा के सेक्टर-82 स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। पुलिस के मुताबिक, मौके से एक कथित सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें उन्होंने लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य और मानसिक परेशानियों का जिक्र किया था। 74 वर्षीय मेहता की अंतिम यात्रा दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट से हुई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राकेश मेहता कौन थे?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राकेश मेहता 1975 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी थे। दिल्ली सरकार में अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पद संभाले। दिसंबर 2007 में उन्हें दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया और नवंबर 2010 में रिटायर होने तक वह इस पद पर रहे। यह वह दौर था जब राजधानी में बड़े स्तर पर शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम चल रहे थे। उनका कार्यकाल तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के दौर से जुड़ा रहा। खास तौर पर 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के समय दिल्ली प्रशासन की कमान उनके हाथ में थी। इस दौरान शहर में परिवहन, बिजली, सड़कों और दूसरी नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट आगे बढ़ाए जा रहे थे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;DTC से MCD तक, राकेश मेहता ने संभाली कई बड़ी जिम्मेदारियां&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चीफ सेक्रेटरी बनने से पहले भी मेहता दिल्ली प्रशासन के कई महत्वपूर्ण हिस्सों से जुड़े रहे। वह MCD के कमिश्नर, दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) के CMD और बिजली विभाग के सचिव जैसे पदों पर रहे। प्रशासनिक कामकाज में उनकी खास दिलचस्पी शहरी व्यवस्था, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में बताई जाती है। DTC में उनकी भूमिका भी उल्लेखनीय रही। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके कार्यकाल में दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में बदलाव और लो-फ्लोर बसों को बढ़ावा देने की दिशा में काम हुआ। यही वजह है कि दिल्ली की शहरी परिवहन व्यवस्था में उनका प्रशासनिक योगदान लंबे समय तक याद किया गया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Rakesh Mehta Suicide: दिल्ली के पूर्व चीफ सेक्रेटरी ने उठाया खौफनाक कदम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;IAS राकेश मेहता का शानदार एजुकेशनल बैकग्राउंड&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राकेश मेहता की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत थी। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठितसेंट स्टीफंस कॉलेज से बीए (ऑनर्स) किया। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से एमए और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) से एमएससी की डिग्री हासिल की थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राकेश मेहता के परिवार में कौन-कौन?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिपोर्टों के अनुसार, राकेश मेहता की पत्नी भी दिल्ली कैडर की रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। उनकी पत्नी और बेटा देहरादून में रहते हैं, जबकि उनकी बेटी लंदन में रहती हैं। मेहता पिछले करीब पांच वर्षों से नोएडा के सेक्टर-82 स्थित किराये के फ्लैट में अकेले रह रहे थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं रोमन सैनी? IAS की कुर्सी छोड़ी, Unacademy खड़ी की और अब 206 मिलियन डॉलर की डील से फिर चर्चा में&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आखिरी दौर में स्वास्थ्य से जूझ रहे थे राकेश मेहता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पुलिस के मुताबिक, उनके घर से मिले कथित नोट में स्वास्थ्य और मानसिक परेशानियों को मौत की वजह बताया गया। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि वह हाइपरटेंशन, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। पुलिस मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है। राकेश मेहता का प्रशासनिक सफर उस दौर की दिल्ली की कहानी से जुड़ा रहा, जब राजधानी तेजी से बदल रही थी। चीफ सेक्रेटरी के रूप में उनका कार्यकाल, कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियां और परिवहन से लेकर नागरिक सेवाओं तक उनकी जिम्मेदारियां उनके करियर की प्रमुख पहचान बनी रहेंगी। लंबे प्रशासनिक अनुभव और दिल्ली की व्यवस्था में निभाई गई उनकी अहम भूमिकाओं के चलते उन्हें राजधानी के वरिष्ठ नौकरशाहों में गिना जाता था।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[BRICS Summit 2026: क्या है BRICS? जानिए फुल फॉर्म और इस साल की थीम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/brics-summit-2026-what-is-brics-full-form-member-countries-theme-bharat-mandapam-new-delhi-india-articleshow-qa73ogb</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 17:43:28 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;BRICS Kya Hai: ब्रिक्स सम्मेलन 2026 का आयोजन इस साल 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत में हो रहा है। जानिए ब्रिक्स क्या है, इसका फुल फॉर्म, सदस्य देश और भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन की थीम समेत जरूरी बातें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m2860pkw4r5d5y3ck63rngys,imgname-brics-summit-2026-1789128628860.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;BRICS 2026:&lt;/strong&gt; दुनिया की बदलती वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच ब्रिक्स एक बार फिर सुर्खियों में है। भारत इस साल BRICS 2026 की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन की थीम है- &ldquo;Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability&rdquo;, यानी सुदृढ़ता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण। यह सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि BRICS अब अपने शुरुआती पांच देशों तक सीमित नहीं रहा। विस्तार के बाद इसमें 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं और समूह का एजेंडा अर्थव्यवस्था से लेकर तकनीक, व्यापार, वित्त और वैश्विक शासन तक पहुंच चुका है। जानिए BRICS क्या है, इसका फुल फॉर्म, थीम समेत जरूरी बातें, जो आपको जाननी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;BRICS क्या है और इसका फुल फॉर्म क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख सहयोगी मंच है। इसका नाम शुरुआत में BRIC था। इसमें B यानी Brazil, R यानी Russia, I यानी India और C यानी China शामिल थे। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसमें S जुड़ा और इसका नाम BRICS हो गया। पहला BRIC शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था। समय के साथ संगठन का दायरा बढ़ता गया और आज यह ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करने वाले प्रमुख समूहों में गिना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;BRICS में कितने देश हैं? देखें पूरी लिस्ट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वर्तमान में BRICS के 11 सदस्य देश हैं- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और सऊदी अरब। इंडोनेशिया के शामिल होने के साथ समूह का विस्तार और मजबूत हुआ। आधिकारिक ब्रिक्स दस्तावेज के अनुसार 2024 में इंडोनेशिया को सदस्य बनने का निमंत्रण दिया गया था और उसने 2025 में पूर्ण सदस्य के रूप में प्रवेश किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; Brics Summit 2026: दिल्ली के जिस होटल में रुके व्लादिमीर पुतिन जानें उसका एक रात का किराया&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भारत के लिए 2026 की BRICS अध्यक्षता क्यों महत्वपूर्ण?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;2026 में भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में अध्यक्षता कर चुका है। इस बार भारत का जोर केवल बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि लचीलापन, नवाचार, सहयोग, सतत विकास और संस्थागत प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर है। सरकारी जानकारी के मुताबिक वर्तमान 11 ब्रिक्स देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5% आबादी, लगभग 40% वैश्विक GDP और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। यही वजह है कि ब्रिक्स समिट 2026 को वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;BRICS New Development Bank क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;BRICS की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में New Development Bank (NDB) भी शामिल है। इसकी स्थापना BRICS के पांच संस्थापक देशों ने बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। बैंक का मुख्यालय शंघाई, चीन में है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Exclusive: क्या है तिरुक्कुरल जिसे पीएम मोदी ने पुतिन को किया भेंट, 1330 दोहे वाले 'तमिल महाकाव्य' की पूरी कहानी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए याद रखें BRICS 2026 से जुड़े इंपोर्टेंट फैक्ट्स&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;BRICS: Brazil, Russia, India, China, South Africa&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पहला ब्रिक्स सम्मेलन: 2009, येकातेरिनबर्ग, रूस&lt;/li&gt; &lt;li&gt;ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता: भारत&lt;/li&gt; &lt;li&gt;18वां ब्रिक्स सम्मेलन: 12&ndash;13 सितंबर 2026&lt;/li&gt; &lt;li&gt;BRICS Summit 2026 स्थान: भारत मंडपम, नई दिल्ली&lt;/li&gt; &lt;li&gt;ब्रिक्स 2026 थीम: Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability&lt;/li&gt; &lt;li&gt;ब्रिक्स सदस्य देश: 11&lt;/li&gt; &lt;li&gt;NDB मुख्यालय: शंघाई, चीन&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;ब्रिक्स सम्मेलन 2026 ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। इसलिए यह सम्मेलन केवल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, तकनीक और ग्लोबल साउथ की भूमिका को लेकर आगे की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच भी है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/brics-summit-2026-what-is-brics-full-form-member-countries-theme-bharat-mandapam-new-delhi-india-articleshow-qa73ogb"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[अमेरिका जाने के लिए कौन सा वीजा चाहिए? घूमने से नौकरी और ग्रीन कार्ड तक हर तरह के वीजा की डिटेल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/america-jane-ke-liye-kaun-sa-visa-chahiye-which-visa-is-required-to-go-to-america-visa-types-guide-articleshow-rp11ety</link>
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            <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 18:24:51 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Which Visa is Required to Go to America: अमेरिका जाने का सपना है और आप जानना चाहते हैं कि अमेरिका जाने के लिए के लिए कौन सा वीजा चाहिए? जानिए घूमने, पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस और ग्रीन कार्ड के लिए कौन सा वीजा आपके काम आएगा और किसमें क्या है खास।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m20h1bv339892n4bvdeng7pg,imgname-america-jane-ke-liye-kaun-sa-visa-chahiye-1788871749465.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;America Jane Ke Liye Kaunsa Visa Sahi Hai: &lt;/strong&gt;अमेरिका जाने का सपना है, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि अमेरिका जाने के लिए कौन-सा वीजा चाहिए? आपके लिए कौन सा USA Visa सही रहेगा? दरअसल, अमेरिका आने के लिए कोई एक वीजा नहीं होता। आप अमेरिका घूमने जा रहे हैं, पढ़ाई करने, नौकरी तलाश रहे हैं, कंपनी के काम से जा रहे हैं या अमेरिका में लंबे समय के लिए बसना चाहते हैं, हर मकसद के लिए अलग इमिग्रेशन रास्ता है। जानिए कि अमेरिका जाने के लिए कौन सा वीजा किसके लिए है। हर प्रकार के वीजा की डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अमेरिका में घूमने और बिजनेस विजिट के लिए B1/B2&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;B1/B2 Visa: अमेरिका में घूमने, छुट्टी मनाने, रिश्तेदारों से मिलने और कुछ अस्थायी बिजनेस विजिट के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रमुख विजिटर वीजा है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;B1 Visa: बिजनेस मीटिंग, कॉन्फ्रेंस और कुछ दूसरे कारोबारी कामों के लिए होता है, लेकिन इससे अमेरिका में सामान्य नौकरी नहीं की जा सकती।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;B2 Visa: पर्यटन, छुट्टी या दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जैसे अस्थायी मकसद के लिए होता है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;USA में पढ़ाई के लिए F1 और J1&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;F1 Visa: अमेरिका की यूनिवर्सिटी, कॉलेज या योग्य शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए प्रमुख US Student Visa है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;J1 Visa: एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत आने वाले छात्रों, इंटर्न, ट्रेनी, रिसर्चर, टीचर और कुछ दूसरे प्रतिभागियों के लिए होता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;M1 Visa: वोकेशनल यानी तकनीकी या गैर-शैक्षणिक ट्रेनिंग वाले योग्य कोर्स करने वालों के लिए होता है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;Work in America: अमेरिका में काम करने के लिए कौन सा वीजा?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;H1B Visa: किसी विशेष विशेषज्ञता वाले काम में योग्य प्रोफेशनल को अमेरिकी नियोक्ता के साथ नौकरी करने का रास्ता देता है और इसमें वीजा स्पॉन्सरशिप की भूमिका अहम होती है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;L1 Visa: किसी मल्टीनेशनल कंपनी के कर्मचारी को उसके विदेशी ऑफिस से अमेरिका स्थित जुड़े ऑफिस में ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल होता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;O1 Visa: अपने क्षेत्र में असाधारण योग्यता या उपलब्धि रखने वाले कलाकार, वैज्ञानिक, खिलाड़ी, बिजनेस प्रोफेशनल और दूसरे योग्य लोगों के लिए हो सकता है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;बिना नए वीजा के इन 7 देशों की सैर करें, अगर आपके पास है अमेरिकी Visa&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एंटरप्रेन्योर और इनवेस्टर के लिए कौन-सा अमेरिकी वीजा?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;E2 Visa: कुछ तय देशों के नागरिकों को अमेरिका में पर्याप्त निवेश करके बिजनेस चलाने की अनुमति देने वाली कैटेगरी है, लेकिन भारत E2 ट्रीटी-कंट्री की सूची में शामिल नहीं है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;Entrepreneur Visa USA: अमेरिका में बिजनेस शुरू करने के लिए कोई एक सामान्य &ldquo;एंटरप्रेन्योर वीजा&rdquo; नहीं है; योग्य व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग इमिग्रेशन विकल्प देखे जाते हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;कंटेंट क्रिएटर और इन्फ्लुएंसर के लिए कौन सा वीजा?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;Content Creator Visa: अमेरिका में &ldquo;कंटेंट क्रिएटर वीजा&rdquo; नाम की कोई अलग आधिकारिक कैटेगरी नहीं है; हालांकि असाधारण उपलब्धियों वाले योग्य क्रिएटर कुछ मामलों में O1 जैसी कैटेगरी के लिए विचार योग्य हो सकते हैं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;Influencer Visa: &ldquo;इन्फ्लुएंसर वीजा&rdquo; भी कोई अलग आधिकारिक US Visa नहीं है। केवल सोशल मीडिया फॉलोअर्स या वायरल वीडियो होना अपने आप वीजा की पात्रता साबित नहीं करता।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;Artist Visa USA: अपने क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियों वाले योग्य कलाकारों के लिए O1 जैसी कैटेगरी एक संभावित रास्ता हो सकती है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;Green Card USA: अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए EB1, EB2, EB3 और EB5&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;EB1 Visa: असाधारण योग्यता वाले लोगों, कुछ उत्कृष्ट प्रोफेसर और रिसर्चर तथा योग्य मल्टीनेशनल अधिकारियों के लिए रोजगार आधारित इमिग्रेशन कैटेगरी है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;EB2 Visa: एडवांस्ड डिग्री या असाधारण योग्यता रखने वाले लोगों के लिए है, कुछ योग्य मामलों में National Interest Waiver यानी NIW का विकल्प भी हो सकता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;EB3 Visa: स्किल्ड वर्कर, प्रोफेशनल और कुछ अन्य योग्य कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का रास्ता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;EB5 Visa: अमेरिका के योग्य बिजनेस में निर्धारित निवेश और रोजगार पैदा करने की शर्तें पूरी करने वाले निवेशकों के लिए इमिग्रेंट कैटेगरी है। अमेरिका जाने के लिए आपके लिए कौन सा वीजा सही है ये जानने के लिए आप नीचे दिए गए वीडियो भी देख कर समझ सकते हैं-&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Indian in USA: भारतीयों के लिए सबसे जरूरी बात&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे भारत से आवेदन करने वालों को सबसे पहले अपना मकसद साफ करना चाहिए। Jobs in USA के लिए वर्क वीजा, Study in USA के लिए स्टूडेंट वीजा और Move to America यानी स्थायी रूप से बसने के लिए अलग इमिग्रेशन कैटेगरी होती है। सबसे बड़ी गलती यही होती है कि लोग किसी दूसरे व्यक्ति का वीजा देखकर अपनी कैटेगरी तय करने लगते हैं। USA Visa Types में से सही विकल्प आपकी योग्यता, नौकरी, पढ़ाई, उपलब्धियों, निवेश और अमेरिका जाने के उद्देश्य पर निर्भर करता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;वीजा क्या है? कैसे मिलता है और किन देशों का Visa मिलना नामुमकिन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अमेरिका जाने का आसान फॉर्मूला&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;घूमना है तो B1/B2, पढ़ाई करनी है तो F1, एक्सचेंज प्रोग्राम है तो J1, नौकरी के लिए H1B या L1 जैसी कैटेगरी, असाधारण उपलब्धि है तो O1 और स्थायी इमिग्रेशन के लिए EB कैटेगरी, यही शुरुआती तौर पर समझने का सबसे आसान तरीका है। इसलिए US Immigration को लेकर &ldquo;सबसे आसान वीजा&rdquo; खोजने के बजाय पहले यह तय करें कि आप अमेरिका क्यों जाना चाहते हैं। सही मकसद के हिसाब से सही कैटेगरी चुनना ही America Immigration Guide का पहला और सबसे जरूरी कदम है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[कौन हैं रोमन सैनी? IAS की कुर्सी छोड़ी, Unacademy खड़ी की और अब 206 मिलियन डॉलर की डील से फिर चर्चा में]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-roman-saini-ias-unacademy-founder-upgrad-206-million-dollar-deal-articleshow-se2cgv4</link>
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            <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 17:31:37 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Who is Roman Saini Unacademy: &lt;/strong&gt;IAS की नौकरी छोड़ने वाले रोमन सैनी कौन हैं? AIIMS से डॉक्टर और Unacademy तक का सफर, अब 206 मिलियन डॉलर की डील से क्यों फिर सुर्खियों में हैं? जानिए&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1rpvm11044nr0xxdqp3yp3d,imgname-who-is-roman-saini-1788609417248.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Roman Saini Biography: &lt;/strong&gt;भारत के एडटेक सेक्टर में Unacademy के upGrad को करीब 206 मिलियन डॉलर में बिकने की खबर ने एक बार फिर कंपनी के शुरुआती दिनों और उसके को-फाउंडर डॉ. रोमन सैनी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कभी डॉक्टर, फिर IAS अधिकारी और उसके बाद स्टार्टअप फाउंडर&mdash;रोमन सैनी का करियर ऐसा है जिसमें एक के बाद एक बड़े मुकाम दिखाई देते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने जिस IAS नौकरी को पाने के लिए लाखों युवा तैयारी करते हैं, उसे करीब डेढ़ साल में छोड़कर शिक्षा के कारोबार की राह चुन ली।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;16 साल की उम्र में मेडिकल एंट्रेंस, AIIMS से MBBS&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रोमन सैनी ने बेहद कम उम्र में मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास की और AIIMS New Delhi से MBBS की पढ़ाई की। मेडिकल डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने इसी संस्थान में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर भी काम किया। यानी 20 की उम्र पार करते-करते उनके पास डॉक्टर के तौर पर एक मजबूत करियर बनाने का रास्ता खुल चुका था। लेकिन सैनी ने यहीं रुकने के बजाय UPSC की तैयारी शुरू कर दी। 22 साल की उम्र में अपने पहले प्रयास में UPSC Civil Services Examination पास कर उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की। इसके बाद वह 2014 बैच के IAS अधिकारी बने और उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नौकरी मांगने पहुंची डेवलपर, स्टार्टअप की वेबसाइट को बताया &lsquo;Disgusting&rsquo;; फाउंडर का जवाब हुआ वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रोमन सैनी ने IAS की नौकरी क्यों छोड़ी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;IAS बनने के बाद भी रोमन सैनी का झुकाव शिक्षा की तरफ बना रहा। वह UPSC अभ्यर्थियों के साथ अपने अनुभव और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री साझा कर रहे थे। आखिरकार करीब एक साल आठ महीने की सेवा के बाद जनवरी 2016 में उन्होंने IAS से इस्तीफा दे दिया। उनका अगला पड़ाव था स्टार्टअप की दुनिया। गौरव मुंजाल और हेमेश सिंह के साथ मिलकर उन्होंने 2015 में Unacademy को औपचारिक बिजनेस के रूप में आगे बढ़ाया। इसकी शुरुआती सोच थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छी शिक्षा इंटरनेट के जरिए ज्यादा छात्रों तक पहुंचाई जाए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;YouTube चैनल से अरबों डॉलर की कंपनी तक&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Unacademy की शुरुआत गौरव मुंजाल के 2010 में शुरू किए गए एजुकेशनल YouTube चैनल से हुई थी। बाद में रोमन सैनी और हेमेश सिंह के जुड़ने से यह पहल एक बड़े एडटेक प्लेटफॉर्म में बदल गई। UPSC से शुरू हुआ फोकस आगे चलकर JEE, NEET और दूसरे प्रतियोगी परीक्षाओं तक पहुंचा। कोविड के दौर में ऑनलाइन शिक्षा की मांग बढ़ने के साथ कंपनी ने तेज विस्तार किया। अगस्त 2021 में Unacademy ने 440 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई और उसकी वैल्यूएशन 3.44 अरब डॉलर तक पहुंच गई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;ऋषभ सिंह संब्याल की बायोग्राफी, डैशिंग पर्सनालिटी से पढ़ाई तक जानिए सब कुछ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Unacademy की कहानी का सबसे बड़ा मोड़&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अब वही Unacademy upGrad के साथ करीब 206 मिलियन डॉलर के सौदे में शामिल हो चुकी है। यानी 2021 की पीक वैल्यूएशन से कंपनी का मूल्यांकन करीब 94% नीचे आया। यह सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं, बल्कि महामारी के बाद भारतीय एडटेक सेक्टर में आए बड़े बदलाव और वैल्यूएशन करेक्शन की भी तस्वीर है। और इसी उतार-चढ़ाव के बीच रोमन सैनी की कहानी अलग नजर आती है&mdash;एक ऐसा डॉक्टर जिसने IAS बनने का सपना पूरा किया, फिर वही नौकरी छोड़कर लाखों छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई को बदलने वाले स्टार्टअप की नींव रखने में भूमिका निभाई।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-roman-saini-ias-unacademy-founder-upgrad-206-million-dollar-deal-articleshow-se2cgv4"/>
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            <title><![CDATA[जिम में गलती से उठा लिया बॉस का तौलिया, 5 दिन बाद चली गई नौकरी! Swiss Engineer की कहानी वायरल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/switzerland-software-engineer-sauna-towel-layoff-reddit-story-articleshow-slx3or4</link>
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            <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:54:47 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Swiss Engineer Fired after Towel Incident:&lt;/strong&gt; स्विट्जरलैंड के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने Reddit पर दावा किया कि जिम सॉना में गलती से सीनियर एग्जीक्यूटिव का तौलिया इस्तेमाल करने के पांच दिन बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। जानिए पूरा मामला।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1xc1525rvay0p667rzek7ky,imgname-swiss-engineer-fired-after-towel-incident-1788765836357.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Reddit Viral Story: &lt;/strong&gt;स्विट्जरलैंड में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी इन दिनों चर्चा में है। इंजीनियर का दावा है कि जिम के सॉना में उससे एक ऐसी छोटी-सी गलती हो गई, जिसका असर उसकी नौकरी तक पहुंच गया। उसने Reddit पर अपनी पूरी कहानी शेयर करते हुए बताया कि कथित तौर पर कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी का तौलिया गलती से इस्तेमाल करने के कुछ ही दिनों बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इंजीनियर ने अपनी पोस्ट में जो घटनाक्रम बताया है, उसके मुताबिक कंपनी ने उसकी नौकरी जाने की वजह आर्थिक कारणों से छंटनी बताई थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जिम में हुई छोटी-सी गलती कैसे बनी बड़ी परेशानी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इंजीनियर के मुताबिक वह 2022 से स्विट्जरलैंड की एक बड़ी टेक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था। उसकी सालाना सैलरी करीब 1 लाख स्विस फ्रैंक (CHF) थी। वह हफ्ते में दो बार जिम जाता था और 8 मई को वर्कआउट के बाद सॉना पहुंचा। यहीं उससे गलती हो गई। उसने अनजाने में वहां रखा दूसरा तौलिया उठा लिया और उसका इस्तेमाल कर लिया। बाद में उसे पता चला कि वह तौलिया कंपनी के ऊपरी प्रबंधन में शामिल एक व्यक्ति का था। इंजीनियर का कहना है कि अधिकारी ने मौके पर नाराजगी जाहिर करने के बजाय कथित तौर पर उससे कहा कि वह नई नौकरी तलाशना शुरू कर दे। इसके बाद उसे रिसेप्शन से दूसरा तौलिया लाने के लिए भी कहा गया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं रोमन सैनी? IAS की कुर्सी छोड़ी, Unacademy खड़ी की और अब 206 मिलियन डॉलर की डील से फिर चर्चा में&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पांच दिन बाद सुबह-सुबह HR का Teams कॉल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Reddit पोस्ट के मुताबिक इस घटना के सिर्फ पांच दिन बाद, 13 मई की सुबह करीब 7:30 बजे इंजीनियर को HR के साथ Teams कॉल मिली। वहां उसे बताया गया कि कंपनी आर्थिक कारणों से कर्मचारियों की छंटनी कर रही है और उसकी नौकरी भी जा रही है। उसका कहना है कि कंपनी में उस समय बड़े स्तर पर layoffs चल रहे थे, इसलिए संभव है कि उसका नाम भी उसी प्रक्रिया में शामिल हुआ हो। लेकिन सॉना में हुई घटना के बाद अधिकारी की कथित टिप्पणी ने उसे शक जरूर पैदा किया। नीचे देखें वायरल रेडिट पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Got laid of because of a mixed up sauna towel. I am now flagged as unemployableby u/Fraktalchen in antiwork&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;2 साल तक रोज 14 घंटे काम करता रहा कर्मचारी, फिर खुला मैनेजर का ऐसा राज कि उड़ गए होश&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;'सबूत नहीं है, इसलिए कुछ नहीं कर सकता'&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इंजीनियर ने बताया कि उसने स्विट्जरलैंड में Rechtsschutzversicherung (कानूनी सुरक्षा बीमा) से भी सलाह ली। उसके अनुसार उसे बताया गया कि आर्थिक कारणों से की गई बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए ठोस सबूत जरूरी होंगे। उसने यह भी दावा किया कि सॉना में कैमरा नहीं था, इसलिए अधिकारी की कथित धमकी को साबित करना उसके लिए मुश्किल है। इसके अलावा उसने अनौपचारिक &ldquo;ब्लैकलिस्ट&rdquo; का भी आरोप लगाया, लेकिन इस दावे का भी कोई स्वतंत्र प्रमाण उसने पेश नहीं किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;करीब तीन महीने से बेरोजगार होने की बात कहते हुए इंजीनियर ने लिखा कि इस अनुभव ने उसे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि किसी कर्मचारी की नौकरी पर उसका प्रदर्शन ही हमेशा निर्णायक नहीं होता। हालांकि, तौलिया विवाद और नौकरी जाने के बीच वास्तव में कोई संबंध था या नहीं, यह फिलहाल साबित नहीं है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/switzerland-software-engineer-sauna-towel-layoff-reddit-story-articleshow-slx3or4"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hindi Diwas 2026: छात्रों के लिए आसान हिंदी दिवस भाषण, स्लोगन के साथ]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/hindi-diwas-speech-in-hindi-10-lines-bhasan-articleshow-thdethw</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 21:15:58 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hindi Diwas Speech&lt;/strong&gt;: 14 सितंबर हिंदी दिवस पर स्कूल में भाषण देने के लिए यहां पढ़ें 5 आसान, प्रभावी और शॉर्ट हिंदी स्पीच आइडियाज, जिन्हें आप स्कूल-कॉलेज के लिए विकल्प बना सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m284jqtn9msmmh01tcnw6gjm,imgname-hindi-diwas-speech-in-hindi-1789127122773.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hindi Diwas Speeches&lt;/strong&gt;: भाषा केवल शब्दों का मेल नहीं बल्कि हमारी पहचान होती है। यह मिट्टी की खुशबू, विरासत, संस्कृत को दुनिया से रूबरू कराने के साथ आपस में लोगों को जोड़ने का काम करती है। हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। अगर आप भी इस विशेष अवसर पर स्पीच देना चाहते हैं तो यहां देखें आसान 5 स्पीच आइडियाज जिन्हें विकल्प बनाया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हिंदी दिवस स्पेशल स्पीच&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्यारे भाई-बहनों&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हर साल 14 सितंबर को हम हिंदी दिवस मनाते हैं। इस अवसर पर हम अपनी भाषा के सम्मान और महत्व को याद करने के लिए एकत्र हुए हैं। हिंदी केवल शब्दों का माध्यम नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, भावनाओं और परंपरा को जोड़ने की भाषा भी है। हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए और इसके प्रयोग को दैनिक जीवन में बढ़ावा देना चाहिए। दूसरी भाषाएं सीखना अच्छी बात है लेकिन अपनी भाषा को भूल जाना हमारी पहचान को कमजोर कर सकता है। आइए, आज हम संकल्प लें कि हिंदी का सम्मान करेंगे, इसे बोलने से संकोच नहीं करेंगे और आने वाली पिढ़ियों तक इसकी समृद्ध विरासत पहुंचाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;स्लोगन- &quot;हिंदी का करें सम्मान, यही है भारत की शान&quot;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;धन्यवाद&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हिंदी दिवस के लिए भाषण&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुप्रभात सभी को,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हिंदी दिवस हमें यह दिलाता है कि भाषा केवल बातचीत का साधन नहीं बल्कि हमारी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने की पहचान भी है। हिंदी वह भाषा है, जिसमें मां की ममता, दोस्ती की मिठास और देशप्रेम की भावना सहज रूप से छुपी होती है। आज के मॉडर्न दौर में अंग्रेजी समेत कई भाषाएं सीखना जरूर हो गया है लेकिन अपनी हिंदी को सम्मान देना भी उतना जरूरी है। हमें हिंदी को केवल एक विषय नहीं बल्कि विरासत के रूप में देखना चाहिए। आइए हिंदी को अपने व्यवहार और विचारों का हिस्सा बनाएं और गर्व से कहें-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;स्लोगन- &ldquo;हिंदी बोलें, हिंदी लिखें, हिंदी से अपना मान बढ़ाएं।&rdquo;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;धन्यवाद&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शॉर्ट हिंदी दिवस भाषण&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;माननीय शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हिंदी दिवस सिर्फ एक दिन हिंदी बोलने का अवसर नहीं है, बल्कि अपनी भाषा के प्रति जिम्मेदारी समझने का भी दिन है। हिंदी में भारत के अलग-अलग क्षेत्र और संस्कृतियों को एक दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमें हिंदी को आधुनिक तकनीक, शिक्षा और रचनात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भाषा तभी जीवित रहती है, जब नई पीढ़ी उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनाती है। तो लिए हिंदी को सम्मान दें और इसके विकास में अपना योगदान दे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;स्लोगन- &ldquo;हिंदी से जुड़ेंगे, संस्कृति से जुड़ेंगे तभी तो भारत से जुड़ेंगे।&rdquo;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;धन्यवाद।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हिंदी दिवस पर भाषा पर गर्व करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नमस्कार!&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हिंदी हमारे लिए केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और भावनाओं की आवाज है। हिंदी साहित्य ने हमें कबीर, तुलसीदास, प्रेमचंद और अनेक महान साहित्यकारों की रचनाओं से समृद्ध किया है। आज आवश्यकता है कि हम हिंदी को कमतर समझने की मानसिकता बदलें। अंग्रेजी या अन्य भाषाएं सीखना हमारी क्षमता को बढ़ाता है, लेकिन हिंदी बोलने या लिखना हमारी पहचान को मजबूत करता है। आइए, हिंदी को सम्मान दें, सही तरीके से बोलें और लिखें तथा इस नई पीढ़ी तक पहुंचाएं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;स्लोगन- &ldquo;भाषण अनेक भाव एक, हिंदी से जुड़ा भारत नेक&rdquo;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;धन्यवाद।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हिंदी गौरव भी जिम्मेदारी भी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आदरणीय शिक्षक ण और मेरी सभी साथियों,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हिंदी दिवस हमें अपनी भाषा के गौरव के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों का भी एहसास कराता है। किसी भाषा का भविष्य केवल उसके इतिहास से नहीं, बल्कि इस बात से तय होता है की नई पीढ़ी उसे कितनी सहजता और गर्व के साथ अपनाती है। इसलिए हिंदी को केवल किताबों और भाषणों तक सीमित न रखें। इसे अपनी संवाद लेखन और रचनात्मक कार्यों का हिस्सा बनाएं। आई आज हम संकल्प लें की हिंदी का सम्मान करेंगे और इसके विकास में अपना योगदान देंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;स्लोगन- &ldquo;हिंदी हमारी पहचान है, हिंदी हमारा अभिमान है!&rdquo;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;धन्यवाद।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anshika Tiwari</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/hindi-diwas-speech-in-hindi-10-lines-bhasan-articleshow-thdethw"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[भारत की इकलौती रेलवे यूनिवर्सिटी: जानिए कहां है, कैसे मिलता है एडमिशन? कोर्स और फीस की पूरी डिटेल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/gati-shakti-vishwavidyalaya-railway-university-courses-fees-admission-2026-27-articleshow-ydkn0ii</link>
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            <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 15:16:51 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;गुजरात के वडोदरा में स्थित गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) भारत की इकलौती रेलवे और ट्रांसपोर्ट यूनिवर्सिटी है। 2026-27 सेशन के लिए B.Tech रेल इंजीनियरिंग, JEE Main एडमिशन प्रोसेस, कोर्स और फीस स्ट्रक्चर की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m22rz7623zqmk2783nggfryx,imgname-gati-shakti-vishwavidyalaya-railway-university-courses-fees-admission-2026-27-1788947176642.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gati Shakti Vishwavidyalaya: &lt;/strong&gt;क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी अनोखी सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी है जो खास तौर पर रेलवे और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर की पढ़ाई कराती है? बहुत से लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है। गुजरात के वडोदरा में स्थित 'गति शक्ति विश्वविद्यालय' (GSV) रेल मंत्रालय के तहत आने वाली देश की इकलौती ऐसी संस्था है, जहां युवाओं को रेलवे, एविएशन और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में करियर बनाने के लिए तैयार किया जाता है। पहले इस संस्थान को 'नेशनल रेल एंड ट्रांसपोर्टेशन इंस्टीट्यूट' (NRTI) के नाम से जाना जाता था। साल 2022 में संसद में कानून पास करके इसे गति शक्ति विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;गति शक्ति विश्वविद्यालय कहां स्थित है और यह क्या काम करता है?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गति शक्ति विश्वविद्यालय गुजरात के वडोदरा में लालबाग इलाके में स्थित है। इस यूनिवर्सिटी को बनाने का मुख्य मकसद देश में ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एजुकेशन और रिसर्च को बढ़ावा देना है। यहां सिर्फ रेलवे की ही नहीं, बल्कि एविएशन (हवाई क्षेत्र), पोर्ट्स (बंदरगाह), शिपिंग, हाईवे और लॉजिस्टिक्स जैसे विशाल क्षेत्रों को कवर करने वाली पढ़ाई कराई जाती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;GSV में कौन-कौन से कोर्स कराए जाते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्टग्रेजुएट (PG) लेवल के कई बेहतरीन प्रोग्राम उपलब्ध हैं। अगर 2026-27 एकेडमिक सेशन की बात करें, तो यहां बी.टेक (B.Tech) के ऐसे स्पेशल कोर्स ऑफर किए जा रहे हैं जो सामान्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में देखने को नहीं मिलते:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;Civil Engineering (Rail Engineering स्पेशलाइजेशन)&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;Mechanical Engineering (Rail Engineering स्पेशलाइजेशन)&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;Electrical Engineering (Rail Engineering स्पेशलाइजेशन)&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;Electronics and Communication Engineering (Rail Engineering स्पेशलाइजेशन)&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;इसके अलावा, यूनिवर्सिटी AI &amp;amp; Data Science में भी B.Tech कराती है, जिसमें स्टूडेंट्स को ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और एविएशन इंजीनियरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों में स्पेशलाइजेशन करने का मौका मिलता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Railway Engineering B.Tech: पढ़ाई में क्या खास है?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रेल इंजीनियरिंग वाले B.Tech प्रोग्राम सिर्फ सामान्य इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं हैं। उदाहरण के लिए सिविल इंजीनियरिंग के रेल स्पेशलाइजेशन में रेलवे ट्रैक सिस्टम, हाई-स्पीड रेल इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे ट्रैक के जियोमेट्रिक डिजाइन जैसे विषय शामिल हैं। इसी तरह मैकेनिकल इंजीनियरिंग के रेल स्पेशलाइजेशन में रेल प्रोपल्शन सिस्टम, हाई-स्पीड रेल सिस्टम, रोलिंग स्टॉक, रेलवे ट्रैक्शन और सिग्नलिंग सिस्टम जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में रेलवे ट्रैक्शन, हाई-स्पीड रेल सिस्टम और रेलवे कोचिंग स्टॉक के इलेक्ट्रिकल सिस्टम जैसे विषय शामिल हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;बी.टेक में कैसे मिलेगा एडमिशन? जानिए प्रवेश प्रक्रिया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप यहां से बी.टेक करने का मन बना रहे हैं, तो 2026-27 सेशन के एडमिशन के लिए कैंडिडेट को JEE Main 2026 की परीक्षा में बैठना होगा। जेईई मेन के स्कोर के आधार पर ही योग्य छात्रों को JoSAA और CSAB काउंसलिंग के जरिए सीटें अलॉट की जाती हैं। बी.टेक के अलावा जो दूसरे अंडरग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट कोर्स हैं, उनकी एडमिशन प्रक्रिया थोड़ी अलग है। उसके लिए कैंडिडेट्स को यूनिवर्सिटी के आधिकारिक एडमिशन नोटिफिकेशन को देखना होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Gati Shakti University Fees: B.Tech की फीस कितनी है?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यूनिवर्सिटी के 2026-27 फीस स्ट्रक्चर के मुताबिक, बी.टेक के नॉन-हॉस्टलर छात्रों (डे स्कॉलर्स) के लिए पहले साल की फीस ₹1,76,600 रखी गई है। वहीं, जो छात्र हॉस्टल और मेस की सुविधा लेना चाहते हैं, उन्हें पहले साल कुल ₹2,66,200 का भुगतान करना होगा। GSV अपने मेधावी और जरूरतमंद छात्रों को आर्थिक मदद भी देती है। परिवार की सालाना कमाई और छात्र की मेरिट के आधार पर स्कॉलरशिप और फाइनेंशियल ऐड दी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Day Scholar&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;पहले साल की कुल फीस: ₹1,76,600&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पहले सेमेस्टर की फीस: ₹97,550&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Hosteller&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;पहले साल की कुल फीस: ₹2,66,200&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पहले सेमेस्टर की फीस: ₹1,42,350&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि फीस में भविष्य में सक्षम प्राधिकारी की ओर से बदलाव किया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;इसे 'रेलवे यूनिवर्सिटी' क्यों कहा जाता है?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इसे आम बोलचाल में लोग 'रेलवे यूनिवर्सिटी' कह देते हैं, क्योंकि इसके लगभग हर प्रमुख बी.टेक प्रोग्राम में रेल इंजीनियरिंग का स्पेशल कंपोनेंट जुड़ा हुआ है। हालांकि, कागजों में और हकीकत में यह पूरे देश के ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने वाली पढ़ाई कराने वाला देश का इकलौता केंद्र है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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