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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Wed, 07 Oct 2026 16:53:19 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[JPMorgan पर गे कर्मचारी का गंभीर आरोप, बॉस ने कहा- ‘गे जॉब को डे जॉब’ से अलग रखो, जानें पूरा मामला]]></title>
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            <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 14:34:04 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;JPMorgan Chase Gay Employee Lawsuit: JPMorgan के गे कर्मचारी ने बॉस पर उत्पीड़न और भेदभाव के आरोप लगाए हैं। &lsquo;गे जॉब&rsquo; वाली टिप्पणी से विवाद बढ़ा और मामला कोर्ट पहुंच गया। जानिए पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3rrt47yaf3nhhp46r84r7rf,imgname-jpmorgan-gay-employee-lawsuit-1790758949118.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;JPMorgan Employee Harassment Case: &lt;/strong&gt;अमेरिका के बड़े बैंक JPMorgan Chase (जेपीमॉर्गन चेज) पर उसके एक पूर्व कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारी का कहना है कि गे होने और एलजीबीटीक्यू+ ग्रुप के लिए काम करने की वजह से उसके बॉस ने उसे परेशान किया। मामला इतना बढ़ गया कि आखिरकार उसे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, बैंक ने इन सभी आरोपों से साफ इनकार किया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Pride ग्रुप में काम करने को लेकर बॉस से विवाद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में दायर शिकायत के मुताबिक, ब्रायन लार्सन JPMorgan के दो साल वाले Chase Associate Program में सीनियर एसोसिएट थे। वह बैंक के PRIDE Tri-State नाम के कर्मचारी ग्रुप से भी जुड़े थे, जो एलजीबीटीक्यू+ कर्मचारियों से जुड़े कार्यक्रम करता है। लार्सन का आरोप है कि जून 2022 में उनके बॉस पीटर बर्गमैन ने अचानक हुई जूम मीटिंग में Pride ग्रुप के लिए उनके काम पर सवाल उठाए। शिकायत के अनुसार, बॉस ने उनसे कहा कि अपना &ldquo;गे जॉब&rdquo; और &ldquo;डे जॉब&rdquo; अलग रखें। लार्सन ने पूछा कि क्या Pride ग्रुप के काम की वजह से उनकी बैंक वाली नौकरी प्रभावित हो रही है। उनका दावा है कि जवाब मिला कि अभी काम खराब नहीं हुआ है, लेकिन आगे ऐसा हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Green Card मिला, अमेरिका में करियर बनाया, फिर भी भारत लौट आईं भारती रमेश, बताई फैसले की पूरी वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हफ्ते में 60-70 घंटे काम करने का दावा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लार्सन का कहना है कि वह बैंक की अपनी नौकरी के लिए हर हफ्ते करीब 60 से 70 घंटे काम करते थे। इसके अलावा वह Pride ग्रुप की जिम्मेदारियां भी संभाल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद उन्हें कुछ प्रोजेक्ट्स से हटा दिया गया और उनकी परफॉर्मेंस रेटिंग भी पहले के मुकाबले कम हो गई। अक्टूबर 2023 में करीब 40 डॉलर के उबर खर्च को लेकर भी उनसे सवाल-जवाब हुए। लार्सन के मुताबिक, ये खर्च Pride Month के कार्यक्रमों में जाने से जुड़े थे और उनके मैनेजर ने इन्हें बैंक के खाते में डालने की मंजूरी दी थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;HR ने इस्तीफा देने को कहा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लार्सन का दावा है कि खर्च का मामला खत्म होने के कुछ दिन बाद HR ने उन्हें कहा कि या तो वह इस्तीफा दें या फिर उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। शिकायत के मुताबिक, HR के एक कर्मचारी ने उनकी स्क्रीन देखते हुए इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी करवाई। लार्सन ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले का उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ा। शिकायत में पैनिक अटैक, डिप्रेशन, नींद की परेशानी, गंभीर चिंता और लगातार माइग्रेन जैसी दिक्कतों का जिक्र है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;2 रोटी के लिए मजदूरी से लेकर दिल्ली में फूड डिलीवरी तक, झारखंड की पूजा ने ऐसे बदली अपनी जिंदगी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;JPMorgan ने क्या कहा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;JPMorgan ने आरोपों को खारिज किया है। बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि अंदरूनी जांच में लार्सन के आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। बैंक के मुताबिक, कई मैनेजरों ने उनके काम को लेकर चिंता जताई थी और उन्हें सुधार के लिए कोचिंग भी दी गई थी। फिलहाल यह मामला कोर्ट में है और लार्सन की ओर से लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[महात्मा गांधी की वो आदतें, जिन्हें आज भी अपनाया जा सकता है: सादगी से समय की पाबंदी तक, जानिए]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/gandhi-jayanti-2026-mahatma-gandhi-habits-lifestyle-simplicity-discipline-cleanliness-self-reliance-articleshow-1o9500g</link>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 16:12:49 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Gandhi Jayanti 2026 Mahatma Gandhi Habits: गांधी जी कई आदतें आज भी लाइफ मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। जानिए उनकी दिनचर्या की वो खास बातें, जिन्हें आज भी अपनाया जा सकता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3vgv6nk0rkxkj32ba3mw0nj,imgname-gandhi-jayanti-2026-mahatma-gandhi-habits-1790851259059.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahatma Gandhi Habits:&lt;/strong&gt; महात्मा गांधी को हम अक्सर स्वतंत्रता आंदोलन, सत्य और अहिंसा के लिए याद करते हैं। लेकिन गांधी जी की जिंदगी का एक दूसरा पहलू भी था, उनकी दैनिक दिनचर्या और जीवनशैली। सादगी, अनुशासन, स्वच्छता, श्रम और आत्मनिर्भरता उनके जीवन का हिस्सा थे। गांधी जयंती 2026 के मौके पर सवाल यह है कि अगर गांधी जी आज हमारे बीच होते, तो उनकी कौन-सी आदत आधुनिक जिंदगी की भागदौड़ में हमारे सबसे ज्यादा काम आ सकती थी? जानिए&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;1. सादगी को जीवन का हिस्सा बनाना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी का जीवन दिखावे से दूर था। वे जरूरत और विलासिता के बीच अंतर करने पर जोर देते थे। आज जब उपभोग और दिखावे का प्रभाव बढ़ा है, उनकी सादगी की जीवनशैली कम चीजों में संतुष्ट रहने की याद दिलाती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2. समय और दिनचर्या का अनुशासन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी अपनी दिनचर्या को लेकर काफी अनुशासित थे। उनके जीवन में काम, प्रार्थना, अध्ययन, लेखन और लोगों से संवाद के लिए समय निर्धारित रहता था। आज की व्यस्त जिंदगी में नियमित दिनचर्या समय को व्यवस्थित करने का एक तरीका हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;3. स्वच्छता पर जोर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी स्वच्छता को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी मानते थे। वे अपने आसपास की सफाई और स्वच्छ वातावरण पर विशेष ध्यान देते थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;गांधी जयंती 2026: गांधी जी के ये 10 विचार आज भी बदल सकते हैं आपकी सोच, जानें क्या हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;4. श्रम को सम्मान देना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी का मानना था कि कोई भी ईमानदार काम छोटा नहीं होता। वे अपने दैनिक जीवन में कई काम स्वयं करने पर जोर देते थे। यह आदत आत्मनिर्भरता के साथ श्रम के सम्मान का संदेश देती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;5. आत्मनिर्भर बनने की कोशिश&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी स्थानीय उत्पादन और अपने काम के लिए खुद पर निर्भर रहने को महत्व देते थे। चरखा और खादी उनके इसी विचार के प्रतीक बने।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;6. सीमित जरूरतों में संतोष&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी की जीवनशैली में जरूरत से ज्यादा चीजें जमा करने के बजाय सीमित संसाधनों में जीवन जीने की सोच दिखाई देती है। आज इसे जागरूक उपभोग और कम बर्बादी के संदर्भ में भी देखा जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Gandhi Jayanti 2026: 2 अक्टूबर का गांधी जी से ही नहीं, पूरी दुनिया से है खास कनेक्शन, जानिए कैसे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;7. आत्मअनुशासन और आत्मसंयम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी के जीवन में आत्मसंयम का विशेष महत्व था। वे अपनी आदतों और इच्छाओं पर नियंत्रण को व्यक्तिगत विकास से जोड़ते थे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आज के दौर में क्यों खास हैं ये आदतें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी की इन आदतों को अपनाने का मतलब उनके जीवन की हूबहू नकल करना नहीं है। बल्कि सादगी, अनुशासन, स्वच्छता, श्रम और आत्मनिर्भरता जैसे सिद्धांतों को अपनी परिस्थितियों के मुताबिक जिंदगी में जगह देना है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[PhD डॉक्टर ने छोड़ी अस्पताल की नौकरी, अब डिलीवरी और पब में गाने का काम, बताई करियर छोड़ने की वजह]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/phd-doctor-left-hospital-job-now-working-as-delivery-driver-pub-singer-articleshow-5cduhlb</link>
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            <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 15:32:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Doctor Becomes Delivery Driver: 31 साल की PhD डॉक्टर ने अस्पताल की नौकरी छोड़ दी और अब वह डिलीवरी, पब सिंगिंग और पार्ट-टाइम थेरेपी कर जिंदगी जी रही हैं। जानिए उन्होंने ऐसा क्यों किया। पूरी कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PhD Doctor Career Change:&lt;/strong&gt; चीन की 31 साल की लियू जिहान ने मेडिकल में लंबी पढ़ाई के बाद एक ऐसा रास्ता चुना, जिसकी शायद किसी ने उनसे उम्मीद नहीं की थी। प्रतिष्ठित अस्पताल की नौकरी छोड़कर अब वह कभी डिलीवरी करती हैं, कभी पब में गाती हैं और साथ-साथ पार्ट-टाइम थेरेपिस्ट के तौर पर भी काम करती हैं। जानिए पूरी कहानी और हॉस्पिटल की जॉब छोड़ने की वजह।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पढ़ाई में हमेशा आगे रहीं, मेडिकल में बनाया करियर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लियू जिहान का शुरुआती जीवन पढ़ाई और प्रतियोगिता के बीच गुजरा। वह चीन के हेबेई प्रांत से हैं और उन्होंने कुछ समय हेंगशुई हाई स्कूल में पढ़ाई की। यह स्कूल अपने बेहद अनुशासित और कठिन पढ़ाई के माहौल के लिए जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने सिचुआन यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की और यूनिवर्सिटी ऑफ मकाऊ के फैकल्टी ऑफ हेल्थ साइंसेज से पीएचडी पूरी की। 2022 में 27 साल की उम्र में डॉक्टरेट पूरी करने के बाद उन्होंने अस्पताल में मनोचिकित्सक के रूप में काम शुरू किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं दिव्या मित्तल? IIT-IIM से पढ़ाई, लंदन की नौकरी छोड़ी, बनीं IAS, अब राजनीति में एंट्री&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मरीजों से जुड़ाव अच्छा लगा, लेकिन नौकरी का तरीका नहीं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लियू के मुताबिक, मरीजों के साथ सीधे और मानवीय तरीके से बात करना उन्हें पसंद था। कई मरीजों ने उनके इलाज और व्यवहार के लिए उन्हें हाथ से लिखे धन्यवाद पत्र भी दिए। लेकिन समय के साथ अस्पताल की तय दिनचर्या और काम का दबाव उन्हें परेशान करने लगा। फरवरी में उन्होंने अस्पताल की नौकरी और पोस्टडॉक्टरल रिसर्च का काम छोड़ने का फैसला किया। उनका कहना है कि पीएचडी के बाद उन्हें अच्छी नौकरी, सम्मान और आर्थिक स्थिरता मिल सकती थी, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि सिर्फ इसी रास्ते पर चलना उनकी जिंदगी की जरूरत नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अब डिलीवरी से लेकर पब में गाने तक का काम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नौकरी छोड़ने के बाद लियू ने कुछ समय यात्रा में बिताया। फिर उन्होंने अलग-अलग छोटे काम आजमाए। इनमें नाश्ता बेचना, डिलीवरी करना और पब में गाना शामिल है। इन कामों के दौरान उनकी मुलाकात रेस्टोरेंट कर्मचारियों, स्टॉल चलाने वालों, पब से जुड़े लोगों और डिलीवरी राइडर्स से हुई। लियू के मुताबिक, इन लोगों में उन्हें जिंदगी के प्रति सहजता, एक-दूसरे की मदद करने की आदत और मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ने का जज्बा दिखाई दिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Success Story: कभी दोस्तों से छिपकर पहुंचाते थे Swiggy ऑर्डर, आज खुद चलाते हैं Seafood बिजनेस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lsquo;करियर से ज्यादा जरूरी हैं रिश्ते और सुकून&rsquo;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लियू अभी पूरी तरह मेडिकल फील्ड से अलग नहीं हुई हैं। वह पार्ट-टाइम थेरेपिस्ट के तौर पर काम कर रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी का रास्ता इसलिए बदला क्योंकि वह कम तनाव में अपनी पसंद के मुताबिक जीना चाहती हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Green Card मिला, अमेरिका में करियर बनाया, फिर भी भारत लौट आईं भारती रमेश, बताई फैसले की पूरी वजह]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/bharathi-ramesh-green-card-left-us-returned-india-startup-story-articleshow-7cgo43z</link>
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            <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 14:12:57 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Green Card Holder Returns to India: Green Card और अमेरिका में करियर बनाने के बाद भारती रमेश भारत क्यों लौटीं? जानिए इस बड़े फैसले के पीछे की पूरी कहानी, जो उन्होंने इंस्टाग्राम पर खुद पोस्ट कर बताई है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Bharathi Ramesh US to India: &lt;/strong&gt;अमेरिका में पढ़ाई, EB-1A के जरिए ग्रीन कार्ड हासिल करने और वहां करियर बनाने के बाद भारती रमेश ने ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने अमेरिका की स्थायी नागरिकता का रास्ता छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया, ताकि अपने स्टार्टअप को पूरा समय दे सकें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अमेरिका गई थीं रिसर्च और न्यूट्रिशन पर काम करने&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारती रमेश 2020 में मास्टर्स की पढ़ाई के लिए अमेरिका गई थीं। उनका लक्ष्य रिसर्च को न्यूट्रिशन प्रैक्टिस से जोड़ना था। पढ़ाई के बाद उन्होंने अमेरिका में अपने करियर को आगे बढ़ाया और स्टार्टअप शुरू करने की दिशा में भी काम किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने EB-2 NIW और EB-1A के जरिए इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी की। उनका ग्रीन कार्ड EB-1A यानी Extraordinary Ability कैटेगरी के तहत मंजूर हुआ था। यह अमेरिकी इमिग्रेशन की ऐसी कैटेगरी है, जो अपने क्षेत्र में असाधारण क्षमता और उपलब्धियों वाले लोगों के लिए है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;PhD डॉक्टर ने छोड़ी अस्पताल की नौकरी, अब डिलीवरी और पब में गाने का काम, बताई करियर छोड़ने की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ग्रीन कार्ड था, लेकिन सपना कुछ और था&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ग्रीन कार्ड मिलने के बावजूद भारती को लगा कि उनकी असली प्राथमिकता कहीं पीछे छूट रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी शेयर करते हुए बताया कि वह अमेरिका में फुल-टाइम काम कर रही थीं, ताकि किराया और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे खर्च संभाल सकें। दूसरी तरफ उनका मन अपने स्टार्टअप पर काम करने में था। इसी बीच उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। हालात उस समय और मुश्किल हो गए जब उन्होंने एक पैरेंट को खो दिया। भारती के मुताबिक, लंबे समय तक लगातार लक्ष्य हासिल करने की कोशिश के बाद वह पूरी तरह थक गई थीं। इस स्थिति से बाहर आने और खुद को संभालने में उन्हें करीब आठ महीने लगे।&lt;/p&gt;View this post on Instagram&lt;p&gt;A post shared by Bharathi Ramesh | Nutrition &amp;amp; Habit Coaching (@nutritionist.bharathi)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;2 रोटी के लिए मजदूरी से लेकर दिल्ली में फूड डिलीवरी तक, झारखंड की पूजा ने ऐसे बदली अपनी जिंदगी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पति ने दिया साथ, भारत लौटकर शुरू किया नया सफर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इसके बाद उन्होंने अमेरिका छोड़कर भारत वापस आने का फैसला किया। भारती ने अपने पति से इस बारे में बात की और उन्होंने भी उनका साथ दिया। दोनों भारत लौट आए। अब भारती भारत में अपने स्टार्टअप पर काम कर रही हैं और खुद को एक फाउंडर के तौर पर आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने अपनी कहानी के जरिए बताया कि ग्रीन कार्ड हासिल करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि जरूर थी, लेकिन आखिरकार उन्होंने वही रास्ता चुना, जिसमें उन्हें अपने काम और जिंदगी की प्राथमिकताओं के साथ ज्यादा जुड़ाव महसूस हुआ। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रही। लोगों ने उनके फैसले की सराहना करते हुए उन्हें आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं दीं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ग्रीन कार्ड और नागरिकता में क्या फर्क है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। इसके धारक को कई ऐसे अधिकार मिलते हैं जो अमेरिकी नागरिकों को भी मिलते हैं, लेकिन वह अमेरिकी नागरिक नहीं होता। उदाहरण के लिए, ग्रीन कार्ड धारक आम तौर पर अमेरिकी चुनावों में वोट नहीं कर सकता।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[JPMorgan में डाटा इंजीनियर की नौकरी गई, UK छोड़ गोरखपुर लौटे कैश अंसारी, वीडियो में कही दिल की बात]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/jpmorgan-layoff-data-engineer-job-loss-kaish-ansari-leaves-uk-returns-gorakhpur-instagram-viral-video-articleshow-7fd1vp9</link>
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            <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 19:00:57 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;JPMorgan Data Engineer Viral Video: JPMorgan में Data Engineer की नौकरी जाने के बाद कैश अंसारी UK छोड़ गोरखपुर लौट आए। परिवार के बीच पहुंचकर उन्होंने अब अपने अगले कदम का खुलासा किया।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m40nnpv1j7fkzbkwbwen8ghr,imgname-jpmorgan-data-engineer-viral-video-1791024094049.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Life After JPMorgan Layoff:&lt;/strong&gt; UK में नौकरी, फिर छंटनी और अब गोरखपुर वापसी... जेपी मॉर्गन में डाटा इंजीनियर रहे कैश अंसारी की कहानी उन युवाओं से जुड़ती है, जिनके करियर में अचानक आया बदलाव उन्हें कुछ समय के लिए अपने घर और परिवार के करीब ले आता है। जानिए कैश अंसारी की पूरी कहानी और हाल ही में एक वीडियो शेयर कर उन्होंने क्या कहा और सोशल मीडिया यूजर्स का रिएक्शन।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दो साल से ज्यादा UK में रहने के बाद घर वापसी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पास रहने वाले कैश अंसारी ने ग्लासगो, स्कॉटलैंड में जेपी मॉर्गन में डाटा इंजीनियर के तौर पर काम किया। दो महीने पहले नौकरी जाने के बाद उन्होंने यूके से भारत लौटने का फैसला किया। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं और अगली नौकरी की तलाश कर रहे हैं। अंसारी ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए एक वीडियो में अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नौकरी जाने के बाद वह अपने होमटाउन गोरखपुर लौट आए हैं। वीडियो में वह अपने आसपास के बच्चों के साथ समय बिताते भी नजर आए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lsquo;जॉब आती-जाती रहती है, खुद को थोड़ा वक्त देना है&rsquo;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अंसारी ने कहा कि करियर और नौकरी जिंदगी का एक हिस्सा हैं और नौकरी जाने के बाद नई नौकरी भी मिल सकती है। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ खुश हैं और खुद को थोड़ा समय देना चाहते हैं। उनकी बात का एक अहम पहलू यह भी है कि उन्होंने नौकरी जाने के बाद तुरंत अगली नौकरी को लेकर भागदौड़ करने के बजाय कुछ समय परिवार के साथ बिताने का फैसला किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;JPMorgan पर गे कर्मचारी का गंभीर आरोप, बॉस ने कहा- &lsquo;गे जॉब को डे जॉब&rsquo; से अलग रखो, जानें पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इंटरव्यू दिए, पॉजिटिव फीडबैक का इंतजार&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अंसारी के मुताबिक, वह कुछ कंपनियों में इंटरव्यू दे चुके हैं और कुछ जगहों से उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली है। हालांकि, अभी किसी कंपनी की तरफ से अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले 1 से 3 हफ्तों में स्थिति साफ हो सकती है। नई नौकरी मिलने पर वह इसकी जानकारी भी शेयर करेंगे। नीचे देखें वायरल वीडियो-&lt;/p&gt;View this post on Instagram&lt;p&gt;A post shared by Kaish Ansari (@theengineerguy_)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Green Card मिला, अमेरिका में करियर बनाया, फिर भी भारत लौट आईं भारती रमेश, बताई फैसले की पूरी वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोशल मीडिया पर लोगों ने बढ़ाया हौसला&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अंसारी की पोस्ट पर कई लोगों ने उन्हें नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। कुछ यूजर्स ने छोटे शहर से निकलकर विदेश में करियर बनाने और फिर मुश्किल समय में परिवार के पास लौटने के उनके अनुभव से जुड़ाव महसूस किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कैश अंसारी की कहानी का सीधा संदेश यही है कि करियर में ब्रेक आना अंत नहीं है। कभी-कभी नौकरी से जुड़ा अचानक बदलाव इंसान को अपने घर, परिवार और अगली शुरुआत के लिए जरूरी वक्त भी दे सकता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/jpmorgan-layoff-data-engineer-job-loss-kaish-ansari-leaves-uk-returns-gorakhpur-instagram-viral-video-articleshow-7fd1vp9"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[नौकरी गई, 30 लाख का कर्ज बाकी... माता-पिता को नहीं बता पा रहा इंजीनियर, Reddit पर छलका दर्द]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/engineer-lost-job-30-lakh-family-loan-unable-to-tell-parents-reddit-story-articleshow-8vzqnrx</link>
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            <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 16:17:28 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Engineer Lost Job Reddit Story: अचानक नौकरी जाने के बाद इंजीनियर पर 30 लाख के लोन का ईएमआई चुकाने का बोझ बढ़ गया है। पिता 60 पार और मां बीमार हैं। ऐसे में इंजीनियर अपने माता-पिता से नौकरी जाने की बात बता नहीं पा रहा है? इंजीनियर ने रेडिट पर अपनी कहानी शेयर कर अपना दर्द बांटने की कोशिश की है। जानिए&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m45tr06ds27nadf347n54v0k,imgname-engineer-lost-job-reddit-story-1791197184204.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Reddit Viral Story:&lt;/strong&gt; नौकरी चले जाने के बाद एक इंजीनियर के सामने परिवार की जिम्मेदारियां और 30 लाख रुपये का कर्ज बड़ी चिंता बन गए हैं। उसने Reddit पर अपनी परेशानी शेयर करते हुए बताया कि उसे समझ नहीं आ रहा कि अब लोन की किस्तें कैसे भरेगा और माता-पिता को नौकरी जाने की बात कैसे बताएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;घर बनाने के लिए लिया था 30 लाख का लोन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Reddit पर South-Task-4762 नाम के यूजर ने बताया कि उसके परिवार ने घर बनाने के लिए करीब 30 लाख रुपये का लोन लिया था। इस कर्ज को छह साल में चुकाना था। इंजीनियर के मुताबिक, पिछले एक साल में वह करीब 3 लाख रुपये चुका चुका है। लेकिन अब नौकरी जाने के बाद उसकी कमाई का जरिया बंद हो गया है। ऐसे में उसे आगे की किस्तों की चिंता सता रही है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उसने अभी तक अपने माता-पिता को अपनी नौकरी जाने की बात नहीं बताई है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पिता की कमाई 17 हजार, मां भी बीमार&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इंजीनियर ने बताया कि उसके पिता 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं और नौकरी से करीब 17 हजार रुपये महीने कमाते हैं। उसे चिंता है कि बढ़ती उम्र की वजह से उनके रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ उसकी मां भी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। इसके बावजूद वह काम कर रही हैं, क्योंकि परिवार में उनकी कमाई बाकी लोगों से ज्यादा है। ऐसे में इंजीनियर को डर है कि अगर उसकी नौकरी जाने की बात सामने आई तो परिवार पर आर्थिक दबाव और बढ़ जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;JPMorgan में डाटा इंजीनियर की नौकरी गई, UK छोड़ गोरखपुर लौटे कैश अंसारी, वीडियो में कही दिल की बात&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नई नौकरी को लेकर भी बढ़ी चिंता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नौकरी जाने के बाद अब वह नई नौकरी की तलाश को लेकर भी परेशान है। उसका कहना है कि मौजूदा जॉब मार्केट आसान नहीं है और उसे नहीं पता कि अगली नौकरी कब मिलेगी। उसकी परेशानी सिर्फ बेरोजगार होने तक सीमित नहीं है। एक तरफ 30 लाख रुपये का लोन है, दूसरी तरफ माता-पिता की जिम्मेदारी और घर का खर्च है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Green Card मिला, अमेरिका में करियर बनाया, फिर भी भारत लौट आईं भारती रमेश, बताई फैसले की पूरी वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;यूजर्स बोले समय पर कदम उठाना जरूरी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इंजीनियर की पोस्ट पर रेडिट यूजर्स के भी रिएक्शन और संतावना भरे कंमेंट्स आ रहे हैं। कुछ ने कहा कि ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी है कि कर्ज की किस्त को लेकर बैंक या लोन देने वाली संस्था से समय रहते बात की जाए। अपनी बदली हुई आर्थिक स्थिति बताकर उपलब्ध विकल्पों की जानकारी ली जा सकती है। साथ ही, नई नौकरी मिलने तक गैर-जरूरी खर्चों को रोकना और आमदनी के दूसरे रास्ते तलाशना मददगार हो सकता है। एक यूजर ने लिखा- नौकरी जाना मुश्किल दौर जरूर है, लेकिन परिवार और कर्ज से जुड़ी समस्या को छिपाने के बजाय समय पर बात करना आगे की परेशानी कम कर सकता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Success Story: कभी दोस्तों से छिपकर पहुंचाते थे Swiggy ऑर्डर, आज खुद चलाते हैं Seafood बिजनेस]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/koushik-kharvi-swiggy-delivery-partner-to-seafood-business-success-story-articleshow-ehefxf6</link>
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            <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 10:50:48 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Koushik Kharvi Success Story: कभी दोस्तों से छिपकर Swiggy डिलीवरी करने वाले कौशिक खारवी की 9 साल पुरानी तस्वीरें चर्चा में हैं। जानिए Swiggy डिलीवरी ब्वॉय से कैसे पहुंचे अपने सीफूड बिजनेस तक।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3nska6ckcpxa71qxdj8zzr9,imgname-koushik-kharvi-success-story-1790659111115.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Swiggy to Entrepreneur:&lt;/strong&gt; बेंगलुरु के एंटरप्रेन्योर कौशिक खारवी की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। कभी दोस्तों की नजर से बचकर स्विगी की डिलीवरी करने वाले कौशिक आज अपना सीफुड बिजनेस चला रहे हैं। उनकी पुरानी तस्वीरों ने मेहनत, संघर्ष और करियर बदलने की कहानी फिर सामने ला दी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जब डिलीवरी से ज्यादा लोगों की नजरों का डर था&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;करीब 9 साल पहले कौशिक खारवी ने जिंदगी के मुश्किल दौर में पार्ट-टाइम स्विगी डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम शुरू किया था। हाल ही में गूगल फोटोज में पुरानी यादें सामने आने के बाद उन्होंने उन दिनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। इनमें उनका पुराना स्विगी आइडी कार्ड भी नजर आया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कौशिक ने बताया कि उस समय उन्हें काम की मेहनत से ज्यादा इस बात की चिंता रहती थी कि अगर कोई परिचित उन्हें डिलीवरी करते देख लेगा तो क्या सोचेगा। उन्होंने लिखा, &ldquo;9 years ago I used to hide from my friends while delivering Swiggy.&rdquo; उनके मुताबिक, उन्हें डर था कि दोस्त उन्हें सिर्फ एक डिलीवरी करने वाले के तौर पर देखेंगे।&lt;/p&gt;View this post on Instagram&lt;p&gt;A post shared by Koushik Kharvi (@koushh_lakshara)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; Success Story: कौन हैं नव्या तुतेजा? स्कूल में ChatGPT बैन हुआ तो 17 की उम्र में बना डाला AI स्टार्टअप&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Pickup Counter से शुरू हुआ सफर, वहीं तक नहीं रुका&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस कहानी का दिलचस्प हिस्सा यह है कि स्विगी के लिए डिलीवरी करते हुए कौशिक अक्सर बेंगलुरु के मशहूर सीफूड रेस्टोरेंट्स के पीकअप काउंटर पर जाते थे। उस समय शायद उन्होंने नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह खुद इसी कारोबार में उतरेंगे। कई साल बाद उन्होंने अपना सीफूड वेंचर शुरू किया। आज वह &ldquo;Mangalore in Bangalore&rdquo; नाम से अपना कारोबार चला रहे हैं। यानी जिस काउंटर के बाहर वह कभी ऑर्डर लेने के लिए इंतजार करते थे, उसी सीफूड इंडस्ट्री में अब उनकी अपनी पहचान बन चुकी है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Success Story: TikTok पर एक-दूसरे को भेजती थीं अचार के वीडियो, फिर छोड़ी नौकरी और खड़ा कर दिया 81 करोड़ का बिजनेस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौशिक ने स्विगी को भी दिया क्रेडिट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपनी पोस्ट में कौशिक ने इस सफर का श्रेय कस्टमर्स, पार्टनर्स और अपनी पूरी टीम को दिया। उन्होंने स्विगी का भी शुक्रिया अदा किया, क्योंकि उनके मुताबिक मुश्किल दौर में इस काम ने उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। कौशिक की पुरानी तस्वीरों और आज की पहचान के बीच का फर्क यही दिखाता है कि कोई काम छोटा नहीं होता, कभी-कभी वही अनुभव आगे की राह तैयार करते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Success Story: कौन हैं नव्या तुतेजा? स्कूल में ChatGPT बैन हुआ तो 17 की उम्र में बना डाला AI स्टार्टअप]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-navya-tuteja-17-year-old-indian-origin-student-ai-startup-success-story-articleshow-fzgg8dd</link>
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            <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 19:14:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Who is Navya Tuteja: &lt;/strong&gt;17 साल की नव्या तुतेजा कौन हैं? स्कूल में ChatGPT बैन हुआ तो उन्होंने अपना AI स्टार्टअप Raaha बना डाला। जानें नव्या तुतेजा की सफलता की कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Navya Tuteja AI startup: &lt;/strong&gt;अमेरिका में पढ़ने वाली 17 साल की भारतीय मूल की छात्रा नव्या तुतेजा इन दिनों अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI स्टार्टअप को लेकर चर्चा में हैं। वर्जीनिया के थॉमस जेफरसन हाई स्कूल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी की सीनियर नव्या ने Raaha नाम का एक प्लेटफॉर्म बनाया है, जो न्यूरोडाइवर्जेंट लोगों को नौकरी तलाशने और अपने लिए सही जॉब चुनने में मदद करता है। लॉन्च के करीब दो महीने बाद ही Raaha पर 1,000 से ज्यादा यूजर्स और करीब 20,000 जॉब लिस्टिंग जुड़ चुकी थीं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्कूल में ChatGPT पर रोक, लेकिन नव्या ने नहीं छोड़ा AI&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नव्या के स्कूल में ChatGPT, Claude और दूसरे जेनरेटिव AI टूल्स पर रोक है। इस वजह से पढ़ाई के दौरान उन्हें असाइनमेंट और परीक्षा की तैयारी काफी हद तक खुद करनी पड़ी। नव्या का मानना है कि AI को पूरी तरह बैन करने के बजाय इसके सही और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए नियम बनाए जाने चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि स्कूल के AI क्लब की प्रेसिडेंट नव्या अब पढ़ाई में AI का इस्तेमाल नहीं करतीं। हालांकि, ईमेल लिखने या ज्यादा जानकारी को जल्दी समझने जैसे रोजमर्रा के कामों में वह AI की मदद लेती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Success Story: TikTok पर एक-दूसरे को भेजती थीं अचार के वीडियो, फिर छोड़ी नौकरी और खड़ा कर दिया 81 करोड़ का बिजनेस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नौकरी खोजने वालों के लिए कैसे काम करता है Raaha?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नव्या ने देखा कि ज्यादातर नौकरी के विज्ञापनों में कंपनियां उम्मीदवार से अपनी उम्मीदों की जानकारी देती हैं, लेकिन काम का माहौल, रोज का वर्क एक्सपीरियंस और जॉब किसी व्यक्ति की जरूरतों के हिसाब से कितनी उपयुक्त हो सकती है, इसकी जानकारी कम मिलती है। Raaha इसी कमी को दूर करने की कोशिश करता है। यह जॉब लिस्टिंग को अलग-अलग पहलुओं से देखता है और एक क्विज के जरिए यूजर को संभावित जॉब फिट समझने में मदद करता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मां के अनुभव से आया स्टार्टअप का आइडिया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Raaha के पीछे नव्या का निजी अनुभव भी है। उनकी मां दीप्ति तुतेजा हार्ड ऑफ हियरिंग हैं। इसी अनुभव और न्यूरोडाइवर्जेंस से जुड़े मुद्दों को करीब से देखने के बाद नव्या ने ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का फैसला किया, जो नौकरी तलाशने वालों को आवेदन करने से पहले ज्यादा उपयोगी जानकारी दे सके। नव्या ने Raaha को खुद बूटस्ट्रैप किया है और फिलहाल इसे मुफ्त रखा है। आगे चलकर कंपनियों और वर्कफोर्स ऑर्गनाइजेशन के लिए पेड सर्विस शुरू करने का मॉडल अपनाया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;IIT Placement 2026: IITs का बड़ा एक्शन! 22 कंपनियों पर 2 साल की रोक, जानें क्यों लिया गया ये फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Raaha के अलावा भी बनाया है Legible&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नव्या का काम सिर्फ Raaha तक सीमित नहीं है। उन्होंने Legible नाम का एक टूल भी बनाया है, जो IEP और 504 प्लान जैसे जटिल स्पेशल एजुकेशन डॉक्यूमेंट्स को परिवारों के लिए आसान भाषा में समझने में मदद करता है। फिलहाल नव्या कॉलेज जाने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, अगर Raaha का ग्रोथ जारी रहता है तो वह आगे इसे फुल-टाइम बिजनेस के तौर पर चलाने पर भी विचार कर सकती हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[BPSC 72nd CCE Prelims Postponed: फिर टली 72वीं BPSC PT, 25 अक्टूबर को नहीं होगी परीक्षा, जानिए नई तारीख?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/bpsc-72nd-cce-prelims-exam-postponed-25-october-2026-new-date-latest-update-articleshow-gog3exd</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/career/bpsc-72nd-cce-prelims-exam-postponed-25-october-2026-new-date-latest-update-articleshow-gog3exd</guid>
            <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 16:53:14 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;BPSC 72nd CCE Prelims New Date: 72वीं BPSC PT को लेकर बड़ा अपडेट है। 25 अक्टूबर की परीक्षा स्थगित कर दी गई है। ऐसे में कैंडिडेट जान लें कि 72वीं बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2026 की नई तारीख को लेकर क्या लेटेस्ट अपडेट है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m4b10s95pmm7krjjfnszwdtm,imgname-bpsc-72nd-cce-new-exam-date-latest-updates-1791371535645.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;BPSC 72nd CCE: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अहम अपडेट है। आयोग ने 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित 72वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) को स्थगित कर दिया है। यानी अब अभ्यर्थियों को तय तारीख पर परीक्षा केंद्र नहीं जाना होगा। नई परीक्षा तिथि को लेकर आयोग की ओर से क्या अपडेट दी गई है, जानिए पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;25 अक्टूबर को नहीं होगी BPSC 72वीं PT&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;BPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर 72nd CCE Preliminary Competitive Examination को स्थगित करने से जुड़ा नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, नई तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है। ऐसे में सोशल मीडिया या दूसरे अनौपचारिक स्रोतों से सामने आ रही संभावित तारीखों पर भरोसा करने के बजाय अभ्यर्थियों को आयोग की वेबसाइट पर जारी नोटिस को ही अंतिम मानना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;होम गार्ड की नौकरी के लिए साड़ी में नंगे पैर दौड़ी झारखंड की कविता, 6 मिनट में पूरी की 1600 मीटर रेस, वीडियो वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पहले भी टल चुकी है यह परीक्षा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;72वीं BPSC परीक्षा को लेकर इससे पहले भी शेड्यूल में बदलाव हुआ था। आयोग के पुराने परीक्षा कैलेंडर में प्रारंभिक परीक्षा की तारीख 26 जुलाई 2026 दी गई थी। बाद में इसे बदलकर 25 अक्टूबर 2026 किया गया था। अब अक्टूबर की तारीख भी टल गई है। आयोग के मौजूदा परीक्षा कैलेंडर में भी 72वीं CCE के लिए 25 अक्टूबर की तारीख दर्ज थी, लेकिन इसे स्थगित किए जाने का अलग आधिकारिक नोटिस अब वेबसाइट पर उपलब्ध है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नरेंद्र मोदी बचपन में कैसे छात्र थे? PM ने खुद सुनाया स्कूल का वो किस्सा, जो आज भी है साथ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अभ्यर्थी अभी क्या करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नई डेट आने तक तैयारी रोकना सही नहीं होगा। बल्कि इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल BPSC PT के रिवीजन, बिहार से जुड़े करेंट अफेयर्स, सामान्य अध्ययन और मॉक टेस्ट को मजबूत करने में किया जा सकता है। परीक्षा की नई तारीख आने के बाद रिवीजन के लिए समय कम मिल सकता है, इसलिए अभी से तैयारी को परीक्षा मोड में रखना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। एक और जरूरी बात यह है कि BPSC खुद अभ्यर्थियों को परीक्षा तिथियों के लिए अपने एग्जाम कैलेंडर और हालिया नोटिस देखते रहने की सलाह देता है। 72वीं BPSC से जुड़े अपडेट के लिए अभ्यर्थियों को केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन पर नजर रखनी चाहिए।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/bpsc-72nd-cce-prelims-exam-postponed-25-october-2026-new-date-latest-update-articleshow-gog3exd"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Zepto CBO की LinkedIn प्रोफाइल में छिपी है पूरी करियर कहानी, एक पोस्ट ने खींचा सबका ध्यान]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/zepto-cbo-chandan-mendiratta-linkedin-profile-career-story-viral-articleshow-ip6gkei</link>
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            <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 17:40:48 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Chandan Mendiratta LinkedIn Profile: Zepto CBO चंदन मेंदिरत्ता की LinkedIn प्रोफाइल क्यों वायरल हुई? करियर के किस अनोखे अंदाज ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा? जानिए पूरी कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3s32j52ajvrgfp2r9yw1zje,imgname-chandan-mendiratta-linkedin-profile-1790769710948.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Zepto CBO LinkedIn Profile:&lt;/strong&gt; सोशल मीडिया पर LinkedIn प्रोफाइल आमतौर पर एक जैसे दिखते हैं- कंपनी का नाम, पद, जिम्मेदारियां और कुछ उपलब्धियां। लेकिन जेप्टो के चीफ ब्रांड अधिकारी चंदन मेंदिरत्ता का प्रोफाइल इस पैटर्न से काफी अलग है। उनकी प्रोफाइल का एक स्क्रीनशॉट X पर शेयर होने के बाद चर्चा में आ गया। वजह सिर्फ उनका पद या कंपनी नहीं, बल्कि अपने करियर को लिखने का उनका तरीका है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हर नौकरी के पीछे छिपी है एक कहानी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चंदन मेंदिरत्ता ने अपने LinkedIn प्रोफाइल में सिर्फ यह नहीं बताया कि उन्होंने किस कंपनी में क्या काम किया। उन्होंने अलग-अलग नौकरियों के साथ उस दौर के अनुभव, संयोग, फैसले और करियर से जुड़े सबक भी जोड़े हैं। X यूजर कार्तिक ने प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इसे बेहद इंगेजिंग लिंक्डइन प्रोफाइल बताया। उनके मुताबिक, चंदन ने अपने करियर को अलग-अलग नौकरियों की सूची की तरह नहीं, बल्कि एक लगातार जुड़ती कहानी की तरह पेश किया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसका सबसे दिलचस्प उदाहरण फ्यूचर्स फर्स्ट और क्लासप्लस से जुड़ा है। फ्यूचर्स फर्स्ट में काम करते हुए चंदन ने लिखा था कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को हायर किया, जिसके लिए वह आने वाले वर्षों में काम करने वाले थे। बाद में क्लासप्लस की एंट्री में उन्होंने बताया कि 2012 में जिस व्यक्ति को उन्होंने नौकरी दी थी, वही आगे चलकर उनका बॉस बना और उन्हें पहला CXO रोल मिला।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;JPMorgan पर गे कर्मचारी का गंभीर आरोप, बॉस ने कहा- &lsquo;गे जॉब को डे जॉब&rsquo; से अलग रखो, जानें पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;करियर के कमजोर दौर को भी नहीं छिपाया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्रोफाइल की खासियत यह भी है कि इसमें सिर्फ सफलता की बातें नहीं हैं। Zomato में ग्लोबल सेल्स हेड - डाइनिंग के अपने कार्यकाल को चंदन ने ज्यादा उपलब्धियों वाला दौर नहीं बताया और इसे अपने करियर का अपेक्षाकृत डल फेज कहा। उनकी प्रोफाइल में 10 महीने का करियर ब्रेक भी दर्ज है। इसके अलावा ज़ोमैटो, क्लासप्लस, गोफ्रूगल और फ्यूचर्स फर्स्ट जैसी कंपनियों में उनके अनुभव और करियर के अलग-अलग पड़ाव दिखाई देते हैं। वह IIT दिल्ली के पूर्व छात्र भी हैं। नीचे देखें वायरल पोस्ट-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;This is probably the most engaging LinkedIn profile I have read! :) Most people update their LinkedIn profile once, and then tend to it piecemeal: add the relevant details of the last job when they move, tweak a line here, add something there, and move on. Of course, there's no&hellip; pic.twitter.com/aINYXn2fPr&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Karthik  (@beastoftraal) September 30, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Green Card मिला, अमेरिका में करियर बनाया, फिर भी भारत लौट आईं भारती रमेश, बताई फैसले की पूरी वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जेप्टो चीफ ब्रांड ऑफिसर चंदन मेंदिरत्ता LinkedIn प्रोफाइल से क्या सीख मिलती है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चंदन की प्रोफाइल पर सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे रिफ्ररेशिंग और अलग अंदाज वाला बताया। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि नौकरी पाने के नजरिए से इतनी लंबी करियर स्टोरी हमेशा सबसे प्रभावी तरीका नहीं हो सकती, क्योंकि इसमें उपलब्धियों की जानकारी तलाशने के लिए ज्यादा पढ़ना पड़ता है। फिर भी इस प्रोफाइल ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है- क्या LinkedIn सिर्फ रिज्यूमे का ऑनलाइन वर्जन है या इसे अपने पूरे करियर की कहानी बताने का माध्यम भी बनाया जा सकता है? चंदन मेंदिरत्ता की प्रोफाइल फिलहाल इसी सवाल की वजह से चर्चा में है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[होम गार्ड की नौकरी के लिए साड़ी में नंगे पैर दौड़ी झारखंड की कविता, 6 मिनट में पूरी की 1600 मीटर रेस, वीडियो वायरल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/home-guard-job-jharkhand-woman-kavita-kumari-runs-barefoot-in-saree-1600-meter-race-viral-video-watch-articleshow-iqto3xo</link>
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            <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 15:21:44 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jharkhand Woman Runs Barefoot in Saree Viral Video: होम गार्ड की नौकरी के लिए झारखंड के रामगढ़ जिले की कविता साड़ी में नंगे पैर 1600 मीटर दौड़ीं और 6 मिनट में रेस पूरी की। आखिर क्या है पूरा मामला जानिए कविता की पूरी कहानी और देखें वायरल वीडियो।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m4aw23rg7nr4r05gkfzjmkgv,imgname-jharkhand-woman-runs-barefoot-in-saree-viral-video-1791366336272.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Woman Runs Barefoot in Saree: &lt;/strong&gt;झारखंड के रामगढ़ जिले की कविता कुमारी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। वजह कोई बड़ी उपलब्धि या महंगी ट्रेनिंग नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी के बीच दिखाई दी मेहनत है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता ने होम गार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में 1600 मीटर की दौड़ महज 6 मिनट में पूरी की। खास बात यह रही कि उन्होंने यह दौड़ साड़ी पहनकर और नंगे पैर पूरी की। जानिए कविता कुमार ने ऐसा क्यों किया और देखें वायरल वीडियो।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;न जूते थे, न ट्रैकसूट, फिर भी नहीं रुकी कविता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कविता कुमारी विधवा हैं और अपने दो छोटे बच्चों के साथ बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह ईंट भट्ठे पर काम करती हैं। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह दौड़ की तैयारी के लिए जूते, ट्रैकसूट या दूसरे जरूरी सामान खरीद सकें। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। बताया गया कि कविता रोज सुबह करीब 4 बजे उठकर दौड़ का अभ्यास करती थीं। कई बार उनके पास अभ्यास के लिए भी साड़ी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नरेंद्र मोदी बचपन में कैसे छात्र थे? PM ने खुद सुनाया स्कूल का वो किस्सा, जो आज भी है साथ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;होम गार्ड की नौकरी है कविता का बड़ा सहारा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कविता के लिए यह भर्ती सिर्फ एक सरकारी नौकरी पाने की कोशिश नहीं है। उनके मुताबिक, नौकरी मिलने से बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियां संभालना आसान हो सकता है। यही वजह है कि सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने शारीरिक परीक्षा की तैयारी जारी रखी। रामगढ़ में होम गार्ड भर्ती अभियान के तहत 284 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया बताई गई है। भर्ती में महिलाओं के लिए आधे पद आरक्षित हैं। इसके अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। नीचे देखें कविता का वायरल वीडियो-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Barefoot. In a saree. Under the scorching sun. &lt;/p&gt;&lt;p&gt;Kavita, a widowed mother from Ramgarh, Jharkhand, ran 1,600m for a Home Guard job &mdash; without shoes, spikes or a tracksuit.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;And she cleared the physical test with top marks. ❤️&lt;/p&gt;&lt;p&gt;She wasn&rsquo;t just running a race. She was running for a better future for her children. https://t.co/aWuPTKyhLP&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Megh Updates &trade; (@MeghUpdates) October 7, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नौकरी गई, 30 लाख का कर्ज बाकी... माता-पिता को नहीं बता पा रहा इंजीनियर, Reddit पर छलका दर्द&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वीडियो वायरल हुआ तो सामने आई कविता की कहानी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कविता के दौड़ने का वीडियो वहां मौजूद एक दर्शक ने रिकॉर्ड किया था। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने उनकी मेहनत की तारीफ की। कई यूजर्स ने इसे बच्चों और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए उनकी कोशिश बताया। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दूसरा पहलू भी उठाया। उनका कहना है कि कविता की मेहनत जरूर प्रेरक है, लेकिन एक उम्मीदवार का जरूरी खेल सामान के बिना दौड़ना आर्थिक मजबूरी और व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सामने लाता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[कौन हैं दिव्या मित्तल? IIT-IIM से पढ़ाई, लंदन की नौकरी छोड़ी, बनीं IAS, अब राजनीति में एंट्री]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/who-is-divya-mittal-ias-biography-education-career-resignation-politics-personal-life-family-articleshow-knetynb</link>
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            <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 12:02:14 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Divya Mittal Biography: IIT-IIM से पढ़ाई, लंदन की नौकरी और फिर IAS बनी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। अब राजनीति में नई पारी के ऐलान के बाद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जानिए उनके बारे में पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3nxqet8m21yfd7137wrjzac,imgname-divya-mittal-ias-biography-1790663441224.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Divya Mittal IAS:&lt;/strong&gt; IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई, लंदन में नौकरी और फिर UPSC के रास्ते IAS बनने वाली दिव्या मित्तल ने अगस्त 2026 में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया। अब उन्होंने अपनी अगली पारी को लेकर भी तस्वीर साफ कर दी है। वह राजनीति में कदम रखेंगी, लेकिन किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय लोगों के साथ मिलकर एक नया राजनीतिक मंच खड़ा करने की बात कह रही हैं। जानिए दिव्या मित्तल कौन हैं, एजुकेशन, करियर, परस्नल लाइफ से लेकर राजनीति में नई पारी शुरु करने की तैयारी तक, रोचक बातें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन हैं दिव्या मित्तल?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दिव्या मित्तल हरियाणा के रेवाड़ी से आती हैं। उनका जन्म 23 नवंबर 1983 को हुआ था। पढ़ाई के मामले में उनका सफर काफी खास रहा। उन्होंने IIT दिल्ली से B.Tech किया और इसके बाद IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी की।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;लंदन की कॉरपोरेट जॉब छोड़ बनीं IAS&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अच्छी नौकरी और आर्थिक सुरक्षा के बावजूद उन्होंने अलग रास्ता चुना। भारत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की। पहली कोशिश में उनका चयन IPS के लिए हुआ, लेकिन IAS बनने का लक्ष्य लेकर उन्होंने दोबारा परीक्षा दी। साल 2013 में उन्होंने UPSC में ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल की और IAS में चयनित होकर उत्तर प्रदेश कैडर पाया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;13 साल का IAS करियर, कई अहम जिम्मेदारियां&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक करियर में केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों स्तरों पर काम किया। वह नीति आयोग में असिस्टेंट सेक्रेटरी रहीं। इसके बाद मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, गोंडा में चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर और UPSIDC में ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। वह बरेली विकास प्राधिकरण की वाइस चेयरमैन भी रहीं। इसके बाद संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी के तौर पर काम किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मिर्जापुर की DM रहते हुए लहुरियादह गांव में पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की पहल ने उन्हें खास पहचान दिलाई। गांव में लंबे समय से पानी की समस्या थी और जल जीवन मिशन के तहत वहां पाइपलाइन और दूसरी जरूरी व्यवस्था विकसित की गई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;IAS पद से इस्तीफे के बाद क्या करेंगी दिव्या मित्तल?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;30 अगस्त 2026 को दिव्या मित्तल ने IAS से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उपलब्ध कंटेंट के मुताबिक उन्होंने निजी और पारिवारिक कारणों के साथ जीवन के नए लक्ष्यों का जिक्र किया था। उनका इस्तीफा 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अब उनकी अगली मंजिल राजनीति है। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं होंगी। उनका फोकस लोगों के साथ मिलकर ऐसा राजनीतिक मंच तैयार करने पर है, जिसमें आम लोगों की समस्याओं को केंद्र में रखा जाए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;उत्तर प्रदेश से शुरू होगी दिव्या मित्तल की नई राजनीतिक पारी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दिव्या मित्तल के मुताबिक उत्तर प्रदेश उनके लिए सिर्फ नौकरी की जगह नहीं रहा। प्रशासनिक सेवा के दौरान गांवों, शिक्षा, सड़क, पानी, जमीन और युवाओं से जुड़े मुद्दों से उनका सीधा सामना हुआ। अब वह इन्हीं अनुभवों को अपनी सार्वजनिक और राजनीतिक भूमिका का आधार बनाना चाहती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उन्होंने स्कूलों की कमी, सरकारी जमीन पर कब्जे, खराब सड़कों, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर AI के असर जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि राजनीति में आने का मकसद सिर्फ किसी व्यक्ति को बदलना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को देखने और हल करने के तरीके में बदलाव लाना है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दिव्या मित्तल का परिवार और निजी जिंदगी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दिव्या मित्तल ने अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से काफी हद तक दूर रखा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह दो बेटियों की मां हैं। उन्होंने अपने सार्वजनिक वक्तव्यों में परिवार और बच्चों के भविष्य को लेकर अपनी चिंताओं का भी जिक्र किया है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[गांधी जयंती 2026: गांधी जी के ये 10 विचार आज भी बदल सकते हैं आपकी सोच, जानें क्या हैं?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/gandhi-jayanti-2026-10-mahatma-gandhi-thoughts-that-are-still-relevant-today-articleshow-mumawf0</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/career/gandhi-jayanti-2026-10-mahatma-gandhi-thoughts-that-are-still-relevant-today-articleshow-mumawf0</guid>
            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 15:55:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Gandhi Jayanti 2026 Thoughts: गांधी जी के 10 ऐसे विचार, जो आज भी आपकी सोच बदल सकते हैं। जानिए सत्य, अहिंसा, सादगी और आत्मनिर्भरता से जुड़े ये विचार आज भी क्यों खास हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3vfxgbszn951jbmkatzpjdh,imgname-gandhi-jayanti-2026-thoughts-1790850285945.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gandhi Jayanti 2026:&lt;/strong&gt; महात्मा गांधी को आमतौर पर सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के लिए याद किया जाता है। लेकिन गांधी जी की सोच सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं थी। उनके जीवन और विचारों में ऐसी कई बातें थीं, जिन्हें आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, सोशल मीडिया और बदलते सामाजिक माहौल में भी प्रासंगिक माना जा सकता है। 2 अक्टूबर गांधी जयंती 2026 के मौके पर जानिए गांधी जी के 10 ऐसे विचार, जो आज भी हमें अपने जीवन और समाज को लेकर सोचने का मौका देते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Gandhi Jayanti Thoughts: गांधी जी के 10 विचार&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;1. सत्य: गांधी जी के जीवन में सत्य का विशेष महत्व था। उनका मानना था कि किसी भी परिस्थिति में सत्य का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;2. अहिंसा: विरोध या संघर्ष के दौरान हिंसा के बजाय अहिंसक तरीके अपनाना उनकी विचारधारा का महत्वपूर्ण हिस्सा था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;3. सादगी: गांधी जी का जीवन बेहद सादा था। जरूरत और दिखावे के बीच अंतर समझना उनकी जीवनशैली से जुड़ा महत्वपूर्ण संदेश है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;4. आत्मनिर्भरता: वे स्थानीय उत्पादन और अपने काम के लिए खुद पर निर्भर रहने को महत्व देते थे। आज इसे आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों के संदर्भ में देखा जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;5. स्वच्छता: गांधी जी स्वच्छता को व्यक्तिगत आदत के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी मानते थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;6. श्रम का सम्मान: उनके विचारों में किसी भी ईमानदार काम को छोटा या बड़ा नहीं माना गया। अपने काम को स्वयं करने पर भी उन्होंने जोर दिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;7. अनुशासन: गांधी जी के सार्वजनिक और व्यक्तिगत जीवन में समय, दिनचर्या और आत्मसंयम की महत्वपूर्ण भूमिका थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;8. सेवा: उनके लिए समाज की सेवा केवल भाषण या विचार तक सीमित नहीं थी। जरूरतमंद लोगों की मदद और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति जिम्मेदारी उनके विचारों का हिस्सा थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;9. असहमति का सम्मान: गांधी जी संघर्ष के बावजूद संवाद और शांतिपूर्ण विरोध के रास्ते पर जोर देते थे। यह विचार आज के सार्वजनिक जीवन में भी चर्चा का विषय बनता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;10. साधन और लक्ष्य: गांधी जी की सोच में केवल लक्ष्य महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि उसे हासिल करने का तरीका भी मायने रखता था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Gandhi Jayanti 2026: 2 अक्टूबर का गांधी जी से ही नहीं, पूरी दुनिया से है खास कनेक्शन, जानिए कैसे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आज के दौर में गांधी जी के इन विचारों की क्या अहमियत है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी के ये विचार आज भी अलग-अलग संदर्भों में चर्चा में आते हैं। सोशल मीडिया के दौर में सत्य और जिम्मेदार संवाद, बढ़ते उपभोग के बीच सादगी, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में आत्मनिर्भरता, और समाज में तनाव के बीच अहिंसा और संवाद जैसे विषय खास महत्व रखते हैं। गांधी जयंती 2026 पर सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हम गांधी जी को कितना जानते हैं, बल्कि यह भी है कि उनके इन विचारों में से कितने आज हमारी अपनी जिंदगी का हिस्सा हैं?&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/gandhi-jayanti-2026-10-mahatma-gandhi-thoughts-that-are-still-relevant-today-articleshow-mumawf0"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Gyanesh Kumar Family: ज्ञानेश कुमार की फैमिली में कौन-कौन? जानिए क्या करती हैं दोनों बेटियां, दामाद हैं IAS]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/gyanesh-kumar-family-daughters-what-they-do-education-career-ias-son-in-laws-life-facts-articleshow-qailkhx</link>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 11:13:07 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;CEC Gyanesh Kumar Family: ज्ञानेश कुमार की फैमिली में कौन-कौन हैं? जानिए दोनों बेटियां क्या करती हैं, दामाद कौन हैं और ज्ञानेश कुमार के पिता, भाई, परिवार के अन्य सदस्यों की डिटेल्स।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3tzmv2cp0zyk2qmqj373d8e,imgname-gyanesh-kumar-family-1790833224780.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gyanesh Kumar Family Details: &lt;/strong&gt;मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इन दिनों चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुर्खियों में हैं। लेकिन उनकी चर्चा सिर्फ संवैधानिक पद तक सीमित नहीं है। उनका पारिवारिक बैकग्राउंड भी खासा दिलचस्प है। अब ज्ञानेश कुमार की चर्चा के बीच उनका परिवार भी सुर्खियों में आ गया है। बता दें कि ज्ञानेश कुमार के परिवार में प्रशासन, राजस्व, पुलिस और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई लोग हैं। जानकारी के अनुसार ज्ञानेश कुमार की दो बेटियां हैं। जानिए ज्ञानेश कुमार की फैमिली में कौन-कौन हैं और क्या करती हैं बेटियां, उनके लाइफ की खास बातें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नोएडा की DM हैं बेटी मेधा रूपम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्ञानेश कुमार की बड़ी बेटी मेधा रूपम 2014 बैच की IAS अधिकारी हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की और UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की। मेधा रूपम की पहचान सिर्फ एक ब्यूरोक्रेट के तौर पर नहीं है। वह राष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर भी रह चुकी हैं और केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। जुलाई 2025 में उन्हें गौतम बुद्ध नगर यानी नोएडा का जिलाधिकारी बनाया गया। वह जिले की पहली महिला DM बनीं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वह अभी भी गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;SIR विवाद के बीच फिर सुर्खियों में ज्ञानेश कुमार, IIT कानपुर से IAS और गृह मंत्रालय से CEC तक का सफर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पति मनीष बंसल भी IAS, संभाल रहे आगरा की कमान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मेधा रूपम के पति मनीष बंसल भी 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने IIT दिल्ली से BTech और MTech किया और UPSC में ऑल इंडिया रैंक 53 हासिल की। फिलहाल वह आगरा के जिलाधिकारी हैं। आगरा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उनका नाम DM के तौर पर दर्ज है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;छोटी बेटी अभिश्री IRS अधिकारी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्ञानेश कुमार की छोटी बेटी अभिश्री भी सिविल सेवा में हैं। उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की और 2017 की UPSC परीक्षा के जरिए IRS में चयनित हुईं। वह आयकर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात बताई जाती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अभिश्री के पति अक्षय लबरू भी IAS अधिकारी हैं। वह जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं और फिलहाल श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर हैं। श्रीनगर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर उनका नाम इस पद पर दर्ज है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी? चुनाव आयोग में 10 महीने में 14 बार क्यों जताई आपत्ति&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;परिवार में IAS-IPS और डॉक्टर भी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्ञानेश कुमार के परिवार में उनके भाई मनीष कुमार IRS अधिकारी हैं। उनकी बहन रोली के पति उपेंद्र जैन 1991 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं। परिवार की पुरानी पीढ़ी भी सेवा क्षेत्र से जुड़ी रही है। उनके पिता डॉ. सुबोध कुमार गुप्ता उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ चिकित्सा पदों पर रहे और उनकी मां सत्यवती योग से जुड़ी रही हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मीडिया रिपोर्टों में ज्ञानेश कुमार के विस्तारित परिवार में 28 डॉक्टरों के होने का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि यह आंकड़ा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध आधिकारिक पारिवारिक रिकॉर्ड के बजाय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[नरेंद्र मोदी बचपन में कैसे छात्र थे? PM ने खुद सुनाया स्कूल का वो किस्सा, जो आज भी है साथ]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/pm-modi-25-years-service-india-narendra-modi-school-days-student-life-vadnagar-school-story-articleshow-qxae9e6</link>
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            <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:29:26 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Narendra Modi School Days Story: नरेंद्र मोदी बचपन में कैसे छात्र थे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश सेवा के 25 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में PM ने वडनगर के स्कूल के दिनों का किस्सा सुनाया और बताया, कि स्कूल के दिनों से ही उनकी एक आदत आज भी बनी हुई है। जानिए&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m4anwb4jmwv2cb15hag6adqn,imgname-prime-minister-narendra-modi-25-years-1791359855762.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PM Modi Student Life: &lt;/strong&gt;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के मौके पर अपने पुराने दिनों की कई यादें शेयर कीं। विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने छात्र जीवन का भी जिक्र किया और बताया कि वडनगर के स्कूल में पढ़ते समय उनकी एक आदत आज भी उनके साथ है, हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश। जानिए पीएम मोदी ने अपने वाडनगर स्कूल स्टूडेंट्स लाइफ के बारे में क्या-क्या बताया?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्कूल में सबसे पहले पहुंचने वाले छात्रों में था नाम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पीएम मोदी ने बताया कि वडनगर में पढ़ाई के दौरान वह उन छात्रों में शामिल थे, जो स्कूल सबसे पहले पहुंचते थे। इसकी एक वजह स्कूल में होने वाली अलग-अलग तरह की पढ़ाई भी थी। शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके में उनकी दिलचस्पी रहती थी और इसी वजह से वह समय से पहले स्कूल पहुंचने की कोशिश करते थे। उनकी इस बात से यह भी पता चलता है कि बचपन से ही पढ़ाई को लेकर उनमें जिज्ञासा थी। वह सिर्फ कक्षा में मौजूद रहने के बजाय यह जानने में रुचि रखते थे कि नया क्या सीखा जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;PM Modi 25 Years: श्री विनायक मंदिर पहुंचे PM माेदी, की पूजा, 8 PHOTOS में खास झलक?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;25 साल बाद भी खुद को मानते हैं विद्यार्थी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पीएम मोदी ने कहा कि सीखने की यह आदत धीरे-धीरे उनके जीवन का हिस्सा बन गई। जिम्मेदारियां बढ़ीं और सार्वजनिक जीवन का दायरा भी बड़ा हुआ, लेकिन नई चीजें सीखने की इच्छा बनी रही। उन्होंने कहा कि वह आज भी खुद को एक विद्यार्थी ही मानते हैं। उनके मुताबिक, जीवन में सीखने की क्षमता और इच्छा बनी रहना बेहद जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने बताया कि मंदिर में दर्शन के दौरान उन्होंने भगवान से अपने लिए भी यही प्रार्थना की कि उनकी सीखने की शक्ति कभी कम न हो।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;छात्रों के लिए भी खास संदेश&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पीएम मोदी की यह बात छात्रों के लिए भी अहम है। उनका जोर इस बात पर रहा है कि पढ़ाई का मतलब केवल परीक्षा में अच्छे नंबर हासिल करना नहीं है। पढ़ाई, स्किल, रुचि और जीवन के अनुभवों से लगातार सीखना भी उतना ही जरूरी है। &lsquo;परीक्षा पे चर्चा&rsquo; जैसे कार्यक्रमों में भी प्रधानमंत्री छात्रों से परीक्षा के दबाव को कम रखने और पढ़ाई के साथ दूसरी गतिविधियों के लिए समय निकालने की बात कहते रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;PM Modi 25 Years: &lsquo;हम यह कर दिखाएंगे&rsquo;! मोदी ने भारत के लिए कौन से 3 बड़े लक्ष्य तय किए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;देश के लिए मांगी ताकत, खुद के लिए सीखने की क्षमता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बताया कि वह सुबह दिल्ली के श्री विनायक मंदिर गए थे। वहां उन्होंने देश और करीब 140 करोड़ देशवासियों के लिए प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने ईश्वर से यह भी मांगा कि उन्हें देश की बेहतर सेवा करने के लिए शक्ति मिलती रहे। वडनगर के स्कूल से शुरू हुई यह कहानी उनके उस नजरिए को सामने रखती है, जिसमें सीखना उम्र या पद से नहीं, बल्कि लगातार आगे बढ़ने की इच्छा से जुड़ा है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[MRPL Recruitment 2026: इंजीनियर बनने का मौका! MRPL में निकली 16 पदों पर भर्ती, 14 लाख तक सैलरी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/mrpl-recruitment-2026-apply-online-for-16-engineer-posts-in-mangalore-articleshow-rh82ifm</link>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 14:47:08 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;MRPL Vacancy 2026: &lt;/strong&gt;मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने 16 इंजीनियर पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। चुने गए उम्मीदवारों को सालाना 12 से 14 लाख रुपये तक का पैकेज मिलेगा। आवेदन की अधिकतम उम्र 40 साल है। इच्छुक उम्मीदवार 29 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01k04nfmqedbqddnfgym7s0sra,imgname-whatsapp-image-2025-07-14-at-7.58.44-pm-1752503407342.jpeg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;MRPL Engineer Recruitment: &lt;/strong&gt;मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने इंजीनियर पदों पर भर्ती के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वैकेंसी की पूरी डिटेल:&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;संस्था का नाम: मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पदों की संख्या: 16&lt;/p&gt;&lt;p&gt;नौकरी की जगह: मैंगलोर, कर्नाटक&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पद का नाम: इंजीनियर&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सैलरी: 12,00,000 से 14,00,000 रुपये सालाना&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;उम्र सीमा:&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;MRPL भर्ती नोटिफिकेशन के मुताबिक, आवेदन करने वाले उम्मीदवार की अधिकतम उम्र 40 साल होनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h3&gt;उम्र सीमा में छूट:&lt;/h3&gt;&lt;p&gt;ओबीसी (OBC) उम्मीदवारों के लिए: 3 साल&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एससी/एसटी (SC/ST) उम्मीदवारों के लिए: 5 साल&lt;/p&gt;&lt;p&gt;दिव्यांग (PWD) उम्मीदवारों के लिए: 10 साल&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एप्लीकेशन फीस:&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस (EWS) उम्मीदवारों के लिए: 118 रुपये&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एससी/एसटी/दिव्यांग/पूर्व सैनिक: कोई फीस नहीं&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पेमेंट मोड: ऑनलाइन&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सिलेक्शन प्रोसेस:&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एप्लीकेशन की स्क्रीनिंग&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पर्सनल इंटरव्यू (PI)&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अप्लाई कैसे करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सबसे पहले MRPL भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें और चेक करें कि आप योग्यता पूरी करते हैं या नहीं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ऑनलाइन फॉर्म भरने से पहले अपना सही ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, आईडी प्रूफ, उम्र का प्रमाण, एजुकेशनल सर्टिफिकेट, रिज्यूमे और एक्सपीरियंस (अगर हो) जैसे डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;MRPL के ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म में मांगी गई सभी जरूरी जानकारी भरें। अपनी लेटेस्ट फोटो और जरूरी डॉक्यूमेंट्स की स्कैन कॉपी अपलोड करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अपनी कैटेगरी के हिसाब से एप्लीकेशन फीस जमा करें (अगर लागू हो)।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जरूरी तारीखें:&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आवेदन शुरू होने की तारीख: 30 सितंबर 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अप्लाई करने की आखिरी तारीख: 29 अक्टूबर 2026&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/career/mrpl-recruitment-2026-apply-online-for-16-engineer-posts-in-mangalore-articleshow-rh82ifm"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Smit Machchhar Education: टेक्सटाइल इंजीनियरिंग पढ़े, फिर कैसे बन गए पायलट? जानिए स्मित मच्छार का एजुकेशन और करियर]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/smit-machchhar-education-career-interesting-life-facts-flydubai-pilot-articleshow-syhicob</link>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 12:15:07 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Smit Machchhar Education Qualification and Career Journey: स्मित मच्छार ने क्या पढ़ाई की है? टेक्सटाइल इंजीनियरिंग से पायलट बनने तक का सफर कैसे तय किया, जानिए उनकी पढ़ाई और करियर की पूरी कहानी, Flydubai Pilot कैप्टन स्मित मच्छार के लाइफ की रोचक बातें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3v36sv28q4zjakzt7dr90am,imgname-indian-pilot-smit-machchhar-1790836959074.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Smit Machchhar Biography: &lt;/strong&gt;दुबई से तेल अवीव जा रही flydubai की फ्लाइट में हुई खौफनाक घटना के बाद जिस भारतीय पायलट का नाम पूरी दुनिया में चर्चा में है, वह हैं कैप्टन स्मित मच्छार। उड़ान के दौरान कॉकपिट में उनके साथ मौजूद दूसरे पायलट ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने ऐसा कदम उठाया, जिससे यात्रियों और क्रू को कॉकपिट तक पहुंचने का मौका मिला। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। विमान में 174 यात्री सवार थे। इस बीच जानिए कैप्टन स्मित मच्छार का एजुकेशन, अबतक का शानदार करियर और लाइफ की रोचक बातें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैप्टन स्मित मच्छार का बैकग्राउंड?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कैप्टन स्मित मच्छार एक कमर्शियल पायलट हैं, जिनका करियर टेक्सटाइल इंजीनियरिंग से शुरू होकर एविएशन तक पहुंचा। टेक्सटाइल बिजनेस से जुड़े परिवार से आने वाले स्मित ने 19 साल की उम्र में एक एविएशन सेमिनार में हिस्सा लिया, जिसके बाद उन्होंने पायलट बनने का फैसला किया। इसके बाद न्यूजीलैंड में पायलट ट्रेनिंग पूरी की और आगे चलकर बोइंग 737 फ्लीट पर 13 साल से ज्यादा का अनुभव हासिल किया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैप्टन स्मित मच्छार की एजुकेशन क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्मित मच्छार ने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई भी की। हालांकि, एविएशन से जुड़ने के बाद उन्होंने न्यूजीलैंड का रुख किया और वहां पायलट ट्रेनिंग हासिल की। उस समय उनकी ट्रेनिंग पर करीब 16-17 लाख रुपये का खर्च आया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इंडियन था इजरायल जा रही फ्लाइट का कैप्टन, चाकू का वार झेला और बचा ली 180 लोगों की जान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मुंबई से शुरू हुआ एविएशन का सफर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;स्मित मच्छार मुंबई के घाटकोपर ईस्ट से हैं। उनका एविएशन करियर करीब डेढ़ दशक से ज्यादा लंबा है। उनके प्रोफेशनल प्रोफाइल के मुताबिक, उनके पास Boeing 737-800 और 737 MAX 8/9 विमानों पर करीब 9,750 घंटे की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा भारत की एयरलाइन SpiceJet के साथ बिताया। यहां करीब 11 साल काम करने के दौरान वह सीनियर कमांडर रहे और बाद में नवंबर 2020 में लाइन ट्रेनिंग कैप्टन की जिम्मेदारी संभाली। इस भूमिका में वह दूसरे पायलटों की ट्रेनिंग और असेसमेंट से भी जुड़े रहे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2022 में flydubai से जुड़े, बने डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जून 2022 में स्मित ने flydubai जॉइन की। उनकी प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने यहां डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन के तौर पर शुरुआत की। इसका मतलब है कि पहले से कैप्टन के तौर पर अनुभव रखने वाले पायलट को दूसरी एयरलाइन सीधे कैप्टन के पद पर नियुक्त कर सकती है। SpiceJet में उनके पास 6,400 से ज्यादा घंटे पायलट-इन-कमांड के तौर पर उड़ान भरने का अनुभव भी दर्ज है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Flydubai Pilot VIDEO: भारतीय पायलट की दिलेरी पर विदेशी हुए फिदा, नेतन्याहू ने दी शानदार सलामी!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कॉकपिट में हमले के बाद भी नहीं हारी हिम्मत&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;30 सितंबर को फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर दोनों पायलटों के बीच संघर्ष की स्थिति बनी। रिपोर्टों के मुताबिक विमान कुछ ही समय में हजारों फीट नीचे चला गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों ने अंदर पहुंचकर हमलावर पायलट को काबू किया। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मोदी, नेतन्याहू ने ही नहीं ट्रंप ने भी की तारीफ, बताया- रियल हीरो&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्मित के साहस की सार्वजनिक रूप से सराहना की। स्मित का इलाज तबुक में किया गया और रिपोर्टों के अनुसार सर्जरी के बाद उनकी हालत स्थिर बताई गई है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Gandhi Jayanti 2026: 2 अक्टूबर का गांधी जी से ही नहीं, पूरी दुनिया से है खास कनेक्शन, जानिए कैसे]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/gandhi-jayanti-2026-why-october-2-is-important-international-day-of-non-violence-history-mahatma-gandhi-connection-articleshow-ugq9ebu</link>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 15:30:35 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Why 2 October is Important: 2 अक्टूबर का गांधी जी से ही नहीं, पूरी दुनिया से खास कनेक्शन है। आखिर इसी तारीख को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी क्यों मनाया जाता है? जानिए पूरी कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3vdaxhpw91xy41xnwhag275,imgname-gandhi-jayanti-2026-1790847579702.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahatma Gandhi Birthday: &lt;/strong&gt;हर साल 2 अक्टूबर को देशभर में गांधी जयंती मनाई जाती है। स्कूलों से लेकर सरकारी संस्थानों तक इस दिन महात्मा गांधी को याद किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गांधी जयंती के लिए 2 अक्टूबर की तारीख ही क्यों चुनी गई? इसके पीछे सिर्फ गांधी जी का जन्मदिन होने की वजह नहीं है, बल्कि इस तारीख का एक अंतरराष्ट्रीय महत्व भी है। जानिए कैसे?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2 अक्टूबर 1869 को हुआ था गांधी जी का जन्म&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। आगे चलकर सत्य, अहिंसा और सविनय अवज्ञा जैसे सिद्धांत उनके सार्वजनिक जीवन की पहचान बने। भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में गांधी जी ने अहिंसक आंदोलनों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा। चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा आंदोलन, असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों में उनकी भूमिका रही। इसी वजह से आजादी के बाद 2 अक्टूबर गांधी जी को याद करने का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवस बन गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में दुनिया ने भी अपनाया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गांधी जी की पहचान केवल भारत तक सीमित नहीं रही। उनके अहिंसा के सिद्धांत ने दुनियाभर में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों को प्रभावित किया। 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अक्टूबर को International Day of Non-Violence यानी अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस दिन का उद्देश्य शिक्षा और जन-जागरूकता के जरिए अहिंसा का संदेश फैलाना है। इस तरह 2 अक्टूबर एक ऐसी तारीख बन गई, जिसका संबंध एक तरफ भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन से है, तो दूसरी तरफ पूरी दुनिया में अहिंसा के विचार से।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गांधी जयंती 2026 में क्यों खास है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;2 अक्टूबर 2026 को गांधी जी की 157वीं जयंती मनाई जाएगी। इस दिन देशभर में प्रार्थना सभाओं, स्वच्छता अभियानों, श्रद्धांजलि कार्यक्रमों और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। गांधी जयंती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व को याद करने का दिन नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा, शांति और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विचारों पर दोबारा सोचने का अवसर भी है। यानी 2 अक्टूबर की कहानी पोरबंदर में जन्मे एक व्यक्ति से शुरू होकर भारत की आजादी की लड़ाई और फिर पूरी दुनिया में अहिंसा के संदेश तक पहुंचती है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[2 रोटी के लिए मजदूरी से लेकर दिल्ली में फूड डिलीवरी तक, झारखंड की पूजा ने ऐसे बदली अपनी जिंदगी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/jharkhand-puja-woman-food-delivery-rider-struggle-story-delhi-articleshow-yuqqgdo</link>
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            <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 10:49:35 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jharkhand Woman Food Delivery Rider Puja Story Delhi: 15 साल की उम्र में झारखंड से अकेली दिल्ली आईं पूजा ने रेलवे स्टेशन पर रातें गुजारीं। 2 रोटी के लिए मजदूरी की फिर एक दिन साइकिल से डिलीवरी शुरू की। जानिए झारखंड की बेटी की प्रेरणादायक कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3ph5xtkk22ebbd1a6rxsemx,imgname-jharkhand-woman-food-delivery-rider-puja-story-delhi-1790683838290.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jharkhand Woman Delivery Rider:&lt;/strong&gt; कभी दो रोटी और एक कप चाय के लिए मजदूरी करने वाली पूजा ने मुश्किल हालात को अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया। 15 साल की उम्र में झारखंड से अकेले दिल्ली पहुंचीं, रेलवे स्टेशन पर रातें गुजारीं और फिर डिलीवरी पार्टनर बनकर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी। जानिए पूरी काहानी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;13 साल की उम्र में पिता को खोया, कम उम्र में काम शुरू किया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पूजा की जिंदगी आसान नहीं रही। पिता का निधन तब हो गया था, जब वह सिर्फ 13 साल की थीं। घर चलाने की जिम्मेदारी मां पर आई तो पूजा ने भी छोटी उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया। कभी घरों में काम किया तो कभी दुकानों और होटल के रिसेप्शन की सफाई की। कई बार पूरे दिन की मेहनत के बदले सिर्फ दो रोटी और एक कप चाय ही नसीब होती थी। लेकिन गरीबी ने उनके सपनों को छोटा नहीं किया। 15 साल की उम्र में वह अकेले झारखंड से दिल्ली आ गईं। शुरुआती दिनों में रेलवे स्टेशन ही उनका ठिकाना बना।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;PhD डॉक्टर ने छोड़ी अस्पताल की नौकरी, अब डिलीवरी और पब में गाने का काम, बताई करियर छोड़ने की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महामारी में छूटा काम, फिर मिला डिलीवरी का रास्ता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दिल्ली में पूजा किसी तरह काम करके गुजारा कर रही थीं। फिर कोरोना महामारी आई और उनका काम भी बंद हो गया। इसी दौरान सड़क किनारे बैठी पूजा से एक राहगीर ने डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम करने का सुझाव दिया। उन्होंने इससे पहले किसी महिला को खाना डिलीवर करते नहीं देखा था। फिर भी उन्होंने पीछे हटने के बजाय इसे आजमाने का फैसला किया। साइकिल लेकर उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर फूड डिलीवरी शुरू कर दी। अपनी जरूरत और कमाई के लक्ष्य के हिसाब से वह काम के घंटे चुनती थीं। दरवाजे पर महिला डिलीवरी पार्टनर को देखकर कई ग्राहक हैरान होते और उनका हौसला बढ़ाते।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; Success Story: कभी दोस्तों से छिपकर पहुंचाते थे Swiggy ऑर्डर, आज खुद चलाते हैं Seafood बिजनेस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चार साल की मेहनत का मिला सम्मान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लगातार करीब चार साल काम करने के बाद पूजा की मेहनत को पहचान मिली। Zomato ने EV Bazaar नाम के अपने वार्षिक कार्यक्रम में उन्हें इलेक्ट्रिक बाइक दी। इस पहल का मकसद डिलीवरी पार्टनर्स को पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने में मदद करना है। आज पूजा दिल्ली में किराये के घर में रहती हैं और गांव में अपनी मां की मदद भी करती हैं। जिस लड़की ने कभी रेलवे स्टेशन पर रात गुजारी थी, वही आज अपनी मेहनत से दिल्ली की सड़कों पर आत्मनिर्भर होकर काम कर रही है। पूजा की कहानी सिर्फ मुश्किलों से निकलने की नहीं, बल्कि उस एक मौके को पहचानने की भी है, जिसने उनकी मेहनत को नई दिशा दे दी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[NCERT Syllabus: देवी की तलवार से जीते थे शिवाजी और कुमार कंपन, NCERT की 9वीं की किताब में शामिल हुई कहानी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/career/ncert-class-9-history-book-includes-unsung-warriors-shivaji-rani-abbakka-and-kumara-kampana-articleshow-zahosfu</link>
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            <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 13:27:17 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;NCERT Social Science Book:&lt;/strong&gt; NCERT ने अपनी 9वीं क्लास की नई सोशल साइंस की किताब में भारत के गुमनाम शूरवीरों और रानियों की बहादुरी के किस्से शामिल किए हैं। उल्लाल की रानी अब्बक्का और कुमार कंपन जैसे महान योद्धाओं की कहानी अब बच्चे पढ़ेंगे। इस बदलाव का मकसद छात्रों को भारत के असली इतिहास और महिला नेतृत्व से रूबरू कराना है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3rhg1rbta6bxbgr4sj64cj8,imgname-rani-abbakka-devi-and-naiki-devi-1790751278859.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Rani Abbakka History:&lt;/strong&gt; नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 9वीं क्लास की नई सोशल साइंस की किताब में एक बड़ा बदलाव किया है। इतिहास के पन्नों में गुम हो चुके भारत के महान योद्धाओं और वीर रानियों की शौर्य गाथाओं को अब इस किताब में जगह मिली है। नए एकेडमिक सेशन के लिए आई इस किताब का नाम 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड - पार्ट 2' है। इसमें युद्ध की पुरानी परंपराओं के साथ-साथ कर्नाटक पर राज करने वाले कई महान शासकों का खास तौर पर जिक्र किया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;उल्लाल की रानी अब्बक्का और कुमार कंपन का शौर्य&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आज के दक्षिण कन्नड़ जिले के उल्लाल पर राज करने वाली रानी अब्बक्का चौटा की कहानी इस किताब में बताई गई है। रानी अब्बक्का ने पुर्तगालियों की ताकतवर नौसेना को धूल चटा दी थी। विदेशी ताकतों के हमलों को नाकाम करते हुए उन्होंने अपने राज्य की संप्रभुता और समुद्री व्यापार के अधिकारों की रक्षा की थी। उनके इस कड़े विरोध को भारतीय इतिहास का एक अहम पड़ाव माना गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;किताब में कर्नाटक के विजयनगर साम्राज्य के राजकुमार कुमार कंपन का भी जिक्र है। उन्होंने तमिलनाडु के मदुरै सुल्तानों के खिलाफ एक बड़ा युद्ध जीता था। ऐसा माना जाता है कि यह जीत उन्हें देवी के आशीर्वाद से मिली एक दिव्य तलवार की बदौलत मिली थी। इसी तरह, छत्रपति शिवाजी महाराज को भी श्री तुलजा भवानी से एक तलवार आशीर्वाद के रूप में मिली थी। बस्तर रियासत के राजा अन्नमराज ने भी देवी माणिकेश्वरी (दंतेश्वरी) से तलवार लेकर युद्ध लड़ा था। इन सभी ऐतिहासिक घटनाओं को NCERT ने अपनी नई किताब में शामिल किया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भारत की वीर रानियों की शौर्य गाथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;किताब के 'रेजिस्टेंस एंड रेजिलिएंस' (प्रतिरोध और लचीलापन) नाम के चैप्टर में बताया गया है कि कैसे 7वीं सदी से भारत पर हुए विदेशी हमलों का हमारे शासकों ने डटकर सामना किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रानी नायकी देवी:&lt;/strong&gt; साल 1178 ईस्वी में माउंट आबू के पास कसह्रदा में एक भयंकर युद्ध हुआ था। इसमें चालुक्य/सोलंकी साम्राज्य की रानी नायकी देवी ने क्रूर हमलावर मुहम्मद गौरी को बुरी तरह हराया था। इस ऐतिहासिक घटना को किताब में प्रमुखता से बताया गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रानी रुद्रमा देवी:&lt;/strong&gt; काकतीय वंश की मशहूर शासक रुद्रमा देवी ने दिल्ली के सुल्तानों को कड़ी टक्कर दी थी। उनके इस कड़े प्रतिरोध को भी याद किया गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;हिंदू शाही, चंदेल और चौहान:&lt;/strong&gt; तुर्की हमलावरों के खिलाफ इन राजवंशों ने जो मजबूत मोर्चा खोला था, उसका भी जिक्र इस किताब में मिलता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके अलावा मुगलों और सुल्तानों को चुनौती देने वाली कई और घटनाओं को भी शामिल किया गया है। इतिहास के कुछ ऐसे दुर्लभ किस्से भी हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मुथु वीरप्पा नायक:&lt;/strong&gt; मदुरै के नायक राजा मुथु वीरप्पा ने मुगलों के दरबार से सम्मान के तौर पर भेजी गई जूतियों के सामने झुकने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने अपना पैर उन जूतियों में डालकर अपने स्वाभिमान का परिचय दिया था। यह दिलचस्प कहानी भी छात्रों को पढ़ने को मिलेगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जिंजी (सेंजी) किला:&lt;/strong&gt; तमिलनाडु के जिंजी किले पर विजयनगर के नायकों, बीजापुर के सुल्तानों, मुगलों, मराठों, फ्रांसीसियों और अंग्रेजों ने लगातार कब्जा किया था। किताब में बताया गया है कि इस ऐतिहासिक किले को यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सिलेबस में महिला नेतृत्व पर खास जोर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;NCERT अपनी सोशल साइंस की किताबों में महिला नेताओं की भूमिका को काफी अहमियत दे रहा है। इसी साल की शुरुआत में 8वीं क्लास की 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' नाम की किताब आई थी। इसमें गढ़ा/गोंड राज्य की वीर रानी दुर्गावती के शासन और उनकी बहादुरी के बारे में बताया गया था। साथ ही 'मजबूत मराठा महिलाएं' टॉपिक के तहत मराठा साम्राज्य की वीर रानी ताराबाई और मालवा की शासक अहिल्याबाई होल्कर के शानदार योगदान को भी शामिल किया गया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अब 9वीं क्लास की इस नई किताब के जरिए छात्रों को भारत के असली इतिहास और महिलाओं की बहादुरी से रूबरू कराने की एक बड़ी और शानदार कोशिश की गई है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Career</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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