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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Tue, 23 Jun 2026 14:31:14 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[Bhanu Saptami June 2026: कब है भानु सप्तमी? डेट के साथ जानें मंत्र, मुहूर्त और उपाय]]></title>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:13:37 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Bhanu Saptami June 2026 Kab Hai: जून 2026 में भानु सप्तमी कब मनाई जाएगी? भानु सप्तमी पर सूर्यदेव की पूजा किस विधि से करनी चाहिए? भानु सप्तमी पर कौन-से मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है? भानु सप्तमी पर कौन-से उपाय करें?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvhrqj44zse03mkk9b10f60g,imgname-bhanu-saptami-june-2026-1781934049412.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Bhanu Saptami 2026 Upay:&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। सूर्य पंचदेवों में से भी एक हैं जिनकी पूजा वैदिक काल से की जा रही है। सूर्य देव की पूजा से संबंधित अनेक व्रत-त्योहार सनातन धर्म में मनाए जाते हैं, जिनमें मकर संक्रांति और छठ पूजा आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा भानु सप्तमी पर भी सूर्यदेव की विशेष पूजा करने का महत्व है। जून 2026 में भी भानु सप्तमी का संयोग बन रहा है। भानु सप्तमी कब है, इसका क्या महत्व है, इस दिन सूर्यदेव की पूजा कैसे करें? आगे जानिए पूरी डिटेल&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ambubachi Mela 2026: रहस्यमयी है अंबुबाची मेला, इन 3 दिनों में क्यों बंद रहेगा कामाख्या मंदिर?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जून 2026 में कब है भानु सप्तमी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस रविवार को सप्तमी तिथि का संयोग बनता है, उसे भानु सप्तमी कहते हैं। वर्ष 2026 में यह विशेष संयोग 21 जून, रविवार को बन रहा है। इस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। 21 जून को छत्र, मित्र, सर्वार्थसिद्धि और त्रिपुष्कर नाम के 4 शुभ योग बनेंगे, जिससे इस दिन का महत्न और भी अधिक हो गया है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Belief: दरवाजे की चौखट पर भूलकर न बैठें, यूनिक है इस मान्यता की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भानु सप्तमी 2026 पूजा मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 07:26 से 09:07 तकसुबह 09:07 से 10:48 तकदोपहर 12:01 से 12:55 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 02:09 से 03:49 तक&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भानु सप्तमी पूजा विधि-मंत्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- भानु सप्तमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।- इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान सूर्यदेव की पूजा करें। सबसे पहले तांबे के लोटे से सूर्यदेव को जल चढ़ाएं।- इस पानी के लोटे में लाल फूल, चावल और थोड़ा-सा गुड़ भी डालें। अर्घ्य देते समय ऊं घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप भी करें।- शुद्ध घी के दीपक से सूर्यदेव की आरती करें। इस बात का ध्यान रखें कि सूर्यदेव को चढ़ाया जल किसी के पैरों में न आएं।- ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में किसी शांत स्थान पर बैठकर आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।- कई लोग इस दिन व्रत रखकर जरूरतमंदों को गेहूं, गुड़, तांबे के पात्र और लाल वस्त्र का दान भी करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भानु सप्तमी के उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; भानु सप्तमी पर सूर्य मंत्रों का जाप करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; इस दिन व्रत करें या एक समय भोजन करें। खाने में नमक का उपयोग न करें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; किसी ज्योतिषी से सलाह लेकर सूर्य का रत्न माणिक (रूबी) पहनें।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; ब्राह्मण को गेहूं, गुड़ और तांबे के बर्तनों का दान करें।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; अपने पिता को कुछ उपहार लाकर दें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[दिलचस्प मान्यताएंः पति के घर से निकलते ही पत्नियां भूलकर भी न करें ये 7 काम]]></title>
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            <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 06:48:11 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, पति के काम पर जाने के तुरंत बाद पत्नी को कुछ काम नहीं करने चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से परिवार की भलाई और पति की तरक्की पर असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं इन दिलचस्प मान्यताओं के बारे में।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvae63p6zwbqj589f108smg8,imgname-thumbnail---2026-06-17t145006.210-1781688110788.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, पति के काम पर जाने के तुरंत बाद पत्नी को कुछ काम नहीं करने चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से परिवार की भलाई और पति की तरक्की पर असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं इन दिलचस्प मान्यताओं के बारे में।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ज्योतिष और लोक मान्यताओं में कहा गया है कि पति के काम पर जाने के तुरंत बाद पत्नियों को कुछ काम नहीं करने चाहिए। हालांकि, इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं में इनका खास महत्व है। आइए जानते हैं कि वे कौन से काम हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि पति के घर से निकलने के तुरंत बाद पड़ोसियों को नमक, सुई, कैंची या चाकू जैसी धारदार चीजें उधार नहीं देनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इससे घर की आर्थिक समृद्धि कम होती है और पति को अपने काम में नुकसान उठाना पड़ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पति के जाने के तुरंत बाद घर के मुख्य दरवाजे पर पानी फेंकना अशुभ माना जाता है। साथ ही, पानी की बाल्टी, घड़े या दूसरे बर्तनों को पूरी तरह खाली नहीं रखना चाहिए। लोक मान्यताओं के अनुसार, अगर बर्तन खाली हैं तो उन्हें उल्टा करके रखना बेहतर होता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पति के घर से निकलते ही झाड़ू या पोंछा लगाना अशुभ माना जाता है। ज्योतिष की मान्यता है कि ऐसा करने से घर की पॉजिटिव एनर्जी चली जाती है और मां लक्ष्मी की कृपा कम हो जाती है। इसलिए, बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि ये काम कुछ देर बाद ही करने चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;कुछ ग्रंथों में जिक्र है कि अगर पति किसी जरूरी काम से बाहर गया हो, तो पत्नी को तुरंत बाल नहीं धोने चाहिए और न ही नहाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इससे पति के काम या यात्रा में रुकावटें आ सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पति के बाहर जाने के तुरंत बाद शीशे के सामने बैठकर कंघी करने या नाखून काटने से भी बचना चाहिए। माना जाता है कि इससे राहु-केतु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है और पति के काम में अचानक रुकावटें आ सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;कुछ महिलाएं पति के बाहर जाते ही अपना मेकअप या पहने हुए गहने उतार देती हैं। लेकिन लोक मान्यताओं के अनुसार, जब तक पति सुरक्षित अपनी मंजिल तक न पहुंच जाए, तब तक श्रृंगार नहीं उतारना चाहिए। इसे शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;कुछ परंपराओं में यह भी कहा जाता है कि पति के खाना खाकर निकलने के तुरंत बाद रसोई की पूरी सफाई या बर्तन नहीं धोने चाहिए। मान्यता है कि अन्नपूर्णा देवी की कृपा बनाए रखने के लिए कुछ देर इंतजार करना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;(&lt;strong&gt;Disclaimer:&lt;/strong&gt; यहां दी गई जानकारी ज्योतिष, धर्म और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसे पूरी तरह सच या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित न मानें। कोई भी व्यक्तिगत फैसला लेने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।)&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Dhumavati Jayanti 2026: कौन हैं देवी धूमावती? सुहागिन महिलाएं भूलकर न करें इनकी पूजा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/dhumavati-jayanti-2026-puja-vidhi-shubh-muhurat-mantra-and-significance/articleshow-6loeyiy</link>
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            <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 10:08:36 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;धूमावती जयंती 2026: 22 जून को धूमावती जयंती मनाई जाएगी। जानें देवी धूमावती की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पूजा करने की मनाही के कारण।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Dhumavati Jayanti 2026 Kab Hai:&lt;/strong&gt; धर्म ग्रंथों में देवी के अनेक स्वरूप बताए गए हैं। इनमें से कुछ रूपों की पूजा तंत्र-मंत्र में विशेष रूप से की जाती है। इनमें से एक देवी धूमावती भी हैं। हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को देवी धूमावती की जयंती मनाई जाती है। इस बार ये पर्व 22 जून, सोमवार को मनाया जाएगा है। देवी धूमावती 10 महाविद्याओं में से एक हैं। खास बात ये है कि सुहागिन महिलाएं देवी के इस रूप की पूजा नहीं कर सकतीं। आगे जानिए कैसे करें देवी धूमावती की पूजा, शुभ मुहूर्त आदि डिटेल&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ambubachi Mela 2026: रहस्यमयी है अंबुबाची मेला, इन 3 दिनों में क्यों बंद रहेगा कामाख्या मंदिर?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;धूमावती जयंती 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 09:07 से 10:48 तकदोपहर 12:02 से 12:55 तकदोपहर 02:09 से 03:50 तकशाम 05:30 से 07:11 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: भूलकर भी न करें इन 5 तरह के लोगों से प्रेम, जीवनभर होगा पछतावा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;देवी धूमावती की पूजा विधि-मंत्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- धूमावती जयंती की सुबह यानी 22 जून, सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में देवी धूमावती का चित्र घर में किसी साफ स्थान पर स्थापित कर पूजा शुरू करें।- सबसे पहले कुमकुम से देवी के चित्र पर तिलक करें और फूलों की माला पहनाएं। शुद्ध घी की दीपक लगाएं। इसके बाद सिंदूर, कुमकुम, चावल, फल, धूप और वस्त्र आदि चीजें एक-एक करके देवी को अर्पित करते रहें।- पूजा करते समय &lt;strong&gt;ऊं धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात् &lt;/strong&gt;मंत्र का जाप भी करते रहें। पूजा के बाद देवी धूमवती को अपनी इच्छा के अनुसार भोग लगाएं। अंत में मां धूमावती की कथा सुनें और आरती करें।- इस तरह मां धूमावती की पूजा से सभी पापों का नाश हो जाता है। तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए देवी धूमावती की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। देवी धूमावती की पूजा सुहागिन महिलाएं भूलकर भी न करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;देवी धूमावती की पूजा क्यों न करें महिलाएं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;देवी धूमावती का स्वरूप विधवा स्त्री के समान है। इसलिए ऐसी मान्यता है कि इनकी नजर जिन पर भी पड़ती है उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं और सौभाग्य में कमी आ सकती है। यही कारण है कि सुहागिन महिलाओं को देवी धूमावती की पूजा करने की मनाही है। देवी धूमावती का एक नाम अलक्ष्मी भी है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[इन 4 स्थानों पर पत्नी को भूलकर भी साथ न ले जाएं, चाणक्य से जानें वजह]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-wife-ko-in-4-jagahon-par-saath-na-le-jane-ki-salah/articleshow-6rhv6xu</link>
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            <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:17:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Chanakya Niti in Hindi: चाणक्य के अनुसार पत्नी को किन 4 स्थानों पर साथ नहीं ले जाना चाहिए? परिवार की सुरक्षा और सम्मान को लेकर चाणक्य ने क्या महत्वपूर्ण सीख दी है? शत्रुओं या विरोधियों के बीच पत्नी को साथ ले जाने से क्या नुकसान हो सकता है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti For Married Life:&lt;/strong&gt; आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में जीवन, परिवार, समाज और रिश्तों से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण बातें यानी टिप्स बताई हैं। चाणक्य की टिप्स आज के समय में भी हमें सही निर्णय लेने की सोच प्रदान करती है। चाणक्य ने अपनी एक नीति में कुछ ऐसे स्थानों के बारे में बताया है जहां पत्नी को भूलकर भी साथ नहीं ले जाना चाहिए। ऐसा करने से कुछ अनर्थ होने का भय रहता है। आगे जानिए कौन-सी हैं ये 4 जगह&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: महिलाओं की ये 5 आदतें मिट्टी में मिला देती हैं परिवार का सम्मान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शत्रु या विरोधियों के बीच&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य के अनुसार, जहां शत्रु या विरोध करने वाले लोग मौजूद हों, वहां पत्नी को साथ नहीं लेना जाना चाहिए। विरोधी व्यक्ति पत्नी को साथ देखकर आपकी कमजोरी का फायदा उठा सकते हैं। ऐसे स्थानों पर पत्नी की सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। इसलिए ऐसे स्थानों पर पत्नी को साथ न ले जाएं।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: पत्नी को अधिक देर तक दरवाजे या खिड़की पर क्यों नहीं खड़ा होना चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गोपनीय चर्चा में न ले जाएं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर पति को किसी गोपनीय चर्चा में जाना हो तो ऐसे स्थान पर भी पति को साथ नहीं ले जाना चाहिए। अगर घर पर भी ऐसी चर्चा हो तो पत्नी को उस स्थान से दूर रखना चाहिए। चाणक्य का मानना है कि किसी भी योजना की सफलता उसकी गोपनीयता पर निर्भर करती है। स्त्रियों का स्वभाव चंचल होता है, वे बातों ही बातों में गुप्त बातें भी दूसरों को बता देती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;विवाद या झगड़े वाले स्थान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जिस स्थान पर पहले से तनाव, झगड़ा या विवाद चल रहा हो, वहां पत्नी को साथ ले जाना उचित नहीं माना गया है। ऐसे स्थानों पर स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। इससे आपके साथ-साथ पत्नी की जान का खतरा हो सकता है। आप अकेले हो तो स्वयं की रक्षा कर सकते हैं लेकिन पत्नी साथ होने पर आप कमजोर हो सकते हैं। इसलिए ऐसी गलती करने से बचना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;खतरे वाली यात्रा में&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यदि आपको किसी ऐसी यात्रा पर जाना हो, जहा जान का जोखिम हो जैसे जंगल, युद्ध क्षेत्र तो पत्नी को भूलकर भी साथ न ले जाएं। पत्नी की जिम्मेदारी पूरी तरह से पति पर होती है। ऐसे स्थानों पर पत्नी का ध्यान रख पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए या तो ऐसी यात्रा को टाल दें और यदि यात्रा जरूरी हो तो पत्नी को साथ न ले जाएं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Mahakal Bhasma Aarti Today: भस्म, रुद्राक्ष और फूलों से सजे बाबा महाकाल, आप भी करें दर्शन]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahakal-bhasma-aarti-19-june-2026-baba-mahakal-divya-shringar/articleshow-8tbggta</link>
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            <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 08:06:36 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahakaleshwar Temple Ujjain: 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरा महाकालेश्वर कहां स्थित है? भगवान महाकाल के मंदिर में रोज सुबह कौन-सी विश्व प्रसिद्ध आरती की जाती है? भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल की किस तरह श्रृंगार किया जाता है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahakaleshwar Jyotirlinga Bhasma Aarti: &lt;/strong&gt;उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शुक्रवार (19 जून 2026) सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भस्म आरती श्रद्धा और परंपरा से की गई। मंदिर के कपाट खुलते ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। सबसे पहले सभा मंडप में स्थित भगवान वीरभद्र के सामने स्वस्तिवाचन कर पूजा की अनुमति ली गई। इसके बाद गर्भगृह के रजत द्वार खोले गए और बाबा महाकाल की विशेष पूजा आरंभ हुई।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से महाभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के दौरान कर्पूर आरती की गई, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;नंदी मंडप में नंदी महाराज का भी स्नान, पूजन और ध्यान किया गया। वहीं बाबा महाकाल को चंदन, भांग, भस्म और ड्रायफ्रूट अर्पित कर अलौकिक स्वरूप प्रदान किया गया। इसके बाद रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और विभिन्न आभूषणों से उनका विशेष श्रृंगार किया गया।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भस्म चढ़ाने के बाद भगवान महाकाल को चांदी से बना शेषनाग मुकुट, मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा रंग-बिरंगे सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। अंत में भगवान को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित कर आरती संपन्न हुई। भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यता है कि भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तड़के होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था और आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Nirjala Ekadashi 2026: पहली बार कर रहे निर्जला एकादशी व्रत? भूलकर न तोड़ें ये 5 नियम]]></title>
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            <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:04:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Nirjala Ekadashi 2026 Date: साल में जितने भी एकादशी व्रत होते हैं, उन सभी में निर्जला एकादशी का महत्व सबसे अधिक माना गया है। इस व्रत से जुड़े कुछ जरूरी नियम भी हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvq78m741w3d7n25mpktaad5,imgname-nirjala-ekadashi-2026-kab-hai-1782117060836.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026 Kab Hai: &lt;/strong&gt;निर्जला एकादशी साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी है। ऐसा कहते हैं कि जो व्यक्ति इस एकादशी पर व्रत करता है, उसे पूरे साल की एकादशी व्रत का फल मिलता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को किया जाएगा। साल की सबसे बड़ी एकादशी होने के कारण इसके कुछ खास नियम भी हैं। यदि आप पहली बार निर्जला एकादशी का व्रत करने जा रहे हैं तो इन जरूरी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। आगे जानिए इन नियमों के बारे में&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: कब है निर्जला एकादशी, इस दिन तुलसी को जल चढ़ाएं या नहीं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;व्रत से पहले संकल्प जरूर लें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;किसी भी व्रत को करने से पहले उसका संकल्प जरूर लेना चाहिए, ऐसा धर्म ग्रंथों में बताया गया है। अगर आप निर्जला एकादशी काव्रत करना चाहते हैं तो सुबह स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। अगर किसी खास इच्छा से ये व्रत कर रहे हैं तो वो भी जरूर बोलें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: भूलकर भी न करें इन 5 तरह के लोगों से प्रेम, जीवनभर होगा पछतावा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पानी भी न पीएं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आमतौर पर व्रत में पानी पीने की कोई मनाही नहीं होती लेकिन निर्जला एकादशी में पूरे दिन बिना पानी पीए रहना पड़ता है। इस कठोर नियम का पालन करना सभी के लिए जरूरी माना गया है। वृद्ध और रोगी इस नियम से मुक्त हैं। वे अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए पानी पी सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;निगेटिव विचारों से दूर रहें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;निर्जला एकादशी व्रत के दौरान निगेटिव विचारों से दूर रहें यानी किसी के बारे में बुरा न सोचें, न किसी पर क्रोध करें। इस दिन विवाद, झूठ और नकारात्मक सोच से दूर रहने का प्रयास करें। ऐसा करने से आपका व्रत पूर्ण होगा और शुभ फलों की प्राप्ति संभव है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भोजन के बारे में न सोचें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;निर्जला एकादशी व्रत में भोजन करना भी निषेध है। इसलिए मानसिक रूप से भी भोजन के बारे में न सोचें। ऐसा करने से भी व्रत का फल कम हो सकता है। इस दौरान जितना हो सके भगवान विष्णु के मंत्रों का मन ही मन में जाप करते रहें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जरूरतमंदों को दान करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;निर्जला एकादशी पर जल से भरा घड़ा, छाता, वस्त्र, फल या अन्न का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। बिना दान के व्रत पूरा नहीं माना जाता, इस बात का ध्यान रखें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Nirjala Ekadashi 2026: कब है निर्जला एकादशी, इस दिन तुलसी को जल चढ़ाएं या नहीं?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/nirjala-ekadashi-2026-can-you-offer-water-to-tulsi-on-ekadashi-know-the-rule/articleshow-dalugba</link>
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            <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:49:31 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Nirjala Ekadashi 2026 Kab Hai: ज्येष्ठ मास में निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। ये एकादशी अन्य सभी एकादशियों से अधिक महत्व वाली है। इस व्रत पानी पीने की भी मनाही होती है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi Facts: &lt;/strong&gt;हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इस तिथि से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपरा हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस बार ये एकादशी 25 जून, गुरुवार को है। इस व्रत में श्रद्धालु बिना अन्न और जल के व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। निर्जला एकादशी को लेकर लोगों के मन में एक सवाल अक्सर उठता है कि इस दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना चाहिए या नहीं? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानें इस सवाल का जवाब&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ambubachi Mela 2026: रहस्यमयी है अंबुबाची मेला, इन 3 दिनों में क्यों बंद रहेगा कामाख्या मंदिर?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या निर्जला एकादशी पर तुलसी को जल चढ़ा सकते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिषाचार्य पं. द्विवेदी शर्मा के अनुसार, एकादशी तिथि भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती है और तुलसी माता भी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसी तरह कई परंपराओं में इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने से भी परहेज किया जाता है। माना जाता है कि एकादशी के दिन तुलसी माता भी भगवान विष्णु के लिए व्रत करती हैं इसलिए उन्हें इस दिन जल नहीं चढ़ाना चाहिए।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Belief: दरवाजे की चौखट पर भूलकर न बैठें, यूनिक है इस मान्यता की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब चढ़ाएं तुलसी को जल?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि (26 जून, शुक्रवार) को तुलसी माता को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी की विधिवत पूजा कर जल चढ़ाने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ सकते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एकादशी तिथि पर तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए, ऐसा करना महापाप माना गया है। अगर किसी विशेष कार्य के लिए तुलसी के पत्ते चाहिए तो इन्हें एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को ही तोड़कर रखे लें और इनका उपयोग करें। तुलसी के पत्तों का उपयोग 1 से अधिक बार भी किया जा सकता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Mahesh Navmi 2026 कब है, 23 या 24 जून, कैसे करें पूजा? जानें मंत्र-मुहूर्त और महत्व]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahesh-navami-2026-date-puja-vidhi-mantra-shubh-muhurat-maheshwari-jayanti/articleshow-dw2oh8g</link>
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            <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:47:46 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahesh Navmi 2026 Date: महेश नवमी माहेश्वर समाज द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। मान्यता है कि इसी तिथि पर माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahesh Navmi Kab Hai:&lt;/strong&gt; हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर महेश नवमी का पर्व मनाया जाता है, इसे माहेश्वरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो ये सभी सभी समाजों के लोग मनाते हैं लेकिन माहेश्वर समाज में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। इस पर्व पर भगवान शिव की पूजा की जाती है। आगे जानिए साल 2026 में कब है महेश नवमी, इसकी पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: कब है निर्जला एकादशी, इस दिन तुलसी को जल चढ़ाएं या नहीं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है महेश नवमी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जून, सोमवार की दोपहर 03 बजकर 40 मिनिट से शुरू होगी, जो 23 जून, मंगलवार की शाम 04 बजकर 39 मिनिट तक रहेगी। चूंकि ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि का सूर्योदय 23 जून को होगा, इसलिए इसी दिन महेश नवमी का पर्व मनाया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: भूलकर भी न करें इन 5 तरह के लोगों से प्रेम, जीवनभर होगा पछतावा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महेश नवमी 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 09:07 से 10:48 तकसुबह 10:48 से दोपहर 12:29 तकदोपहर 12:02 से 12:55 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 12:29 से 02:09 तकदोपहर 03:50 से 05:31 तक&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महेश नवमी पूजा विधि-मंत्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- महेश नवमी की सुबह यानी 23 जून की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें और ये मंत्र बोलें-&lt;strong&gt;मम शिवप्रसाद प्राप्ति कामनया महेशनवमी-निमित्तं शिवपूजनं करिष्ये&lt;/strong&gt;- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। किसी की बुराई न करें। बुरे विचार मन में न लाएं। मन में भगवान का स्मरण करते रहें।- पूजा से पहले पूरी सामग्री एक स्थान पर लाकर रख लें। शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती की प्रतिम या चित्र स्थापित कर पूजा शुरू करें।- महादेव और माता पार्वती को तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। हाथ जोड़कर प्रणाम करें।- भगवान शिव को सफेद और देवी पार्वती को लाल वस्त्र अर्पित करें। अबीर, गुलाल, जनेऊ, सुपारी, बिल्वपत्र आदि चीजें अर्पित करें।- पूजा करते समय मन ही मन में ऊं महेश्वराय नम: मंत्र भी बोलते रहें। इसके बाद ये मंत्र बोलकर भगवान शिव से प्रार्थना करें-&lt;strong&gt;जय नाथ कृपासिन्धोजय भक्तार्तिभंजन।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;जय दुस्तरसंसार-सागरोत्तारणप्रभो॥&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;प्रसीदमें महाभाग संसारात्र्तस्यखिद्यत:।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;सर्वपापक्षयंकृत्वारक्ष मां परमेश्वर॥&lt;/strong&gt;- भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। इस प्रकार महेश नवमी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शिवजी की आरती (Shivji Aarti Lyrics in Hindi)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जय शिव ओंकारा ऊं जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा ॥एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Chanakya Niti: इन 4 तरह की स्त्रियों से पत्नी को रखें दूर, बिगड़ सकती है गृहस्थी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-women-company-to-avoid-for-peaceful-married-life/articleshow-g0bt5ri</link>
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            <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:23:54 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Relationship Tips by Chanakya: आचार्य चाणक्य ने किन लोगों की संगति से बचने की सलाह दी है? चाणक्य नीति के अनुसार गलत संगति वैवाहिक जीवन को कैसे प्रभावित कर सकती है? चाणक्य नीति में अच्छे मित्र और संगति का क्या महत्व बताया गया है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvd27vb4gwjmkb3fn99mzedg,imgname-chanakya-niti-regarding-women-1781776248164.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti for Family:&lt;/strong&gt; आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में परिवार और रिश्तों को लेकर अनेक महत्वपूर्ण लाइफ मैनेजमेंट टिप्स बताई हैं। ये टिप्स आज के समय में भी हमारे लिए बहुत काम की है। चाणक्य ने अपनी एक नीति में बताया है कि पत्नी को 4 तरह की स्त्रियों से दूर रखना चाहिए। अगर गलती से पत्नी ऐसी महिलाओं के साथ रहती है आज भी उनका साथ छुड़वा देना चाहिए। नहीं तो वैवाहिक जीवन में परेशानियां आ सकती हैं। आगे जानिए इस बारे में क्या कहते हैं आचार्य चाणक्य&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Belief: दरवाजे की चौखट पर भूलकर न बैठें, यूनिक है इस मान्यता की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चरित्रहीन स्त्री से रखें दूर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य के अनुसार चरित्रहीन प्रवृत्ति वाली स्त्रियों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए। ऐसी महिलाएं दूसरों के रिश्तों और सम्मान की परवाह नहीं करते। इनकी संगति परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए परिवार को खासतौर पर पत्नी को ऐसी स्त्रियों के संपर्क से दूर रखना बेहतर माना गया है। नहीं तो वैवाहिक जीवन में तनाव आ सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: महिलाओं की ये 5 आदतें मिट्टी में मिला देती हैं परिवार का सम्मान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पैसों का दिखावा करने वाली&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कुछ महिलाओं की आदत होती है कि वे दूसरों के सामने अपने धन का प्रदर्शन करती हैं। ऐसी महिलाओं से भी अपनी पत्नी को दूर रखना चाहिए। इसके पीछे कारण है कि ऐसी महिलाओं के साथ रहकर पत्नी आपसे भी नाजायाज मांगे कर सकती हैं जिससे लव लाइफ में टेंशन बढ़ सकती है? चाणक्य के अनुसार ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना ही बुद्धिमानी है&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गुस्सैल स्वभाव की महिलाओं के रहें दूर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गुस्सैल स्वभाव वाली महिलाएं छोटी-छोटी बातों पर विवाद खड़ा कर देती हैं। उनका व्यवहार कई बार अपमानजनक भी हो सकता है।, क्योंकि उनका क्रोध परिवार की शांति को भंग कर सकता है। ऐसी महिलाओं के साथ रहकर पत्नी का स्वभाव भी वैसा हो सकता है इसलिए ऐसी स्त्रियों से पत्नी को दूरी बनाकर रखने की सलाह दें, यही आपके लिए बेहतर है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ईर्ष्यालु और द्वेष रखने वाली महिलाएं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जो महिलाएं दूसरों की खुशियों से जलती हैं और हर समय नकारात्मक सोच रखती हैं, वे दूसरों के खुशहाल रिश्तों में दरार पैदा करने का प्रयास करती हैं। ऐसी महिलाओं के सामने परिवार की निजी बातें साझा करने से बचना चाहिए। चाणक्य नीति में ऐसी महिलाओं को सबसे खतरनाक बताया गया है। ये रिश्तों में भ्रम और गलतफहमियां पैदा कर सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर पूजा के कितने मुहूर्त? जानें विधि, मंत्र और सही डेट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/nirjala-ekadashi-2026-kab-hai-date-puja-muhurat-vidhi-mantra-significance/articleshow-g36w85a</link>
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            <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:31:11 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Nirjala Ekadashi 2026 Date: इस बार साल की सबसे बड़ी एकादशी निर्जला का व्रत जून 2026 के अंतिम सप्ताह में किया जाएगा। जानें इससे जुड़ी पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Kab Hai Nirjala Ekadashi:&lt;/strong&gt; हर ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। ये साल की सबसे बड़ी एकादशी है। इसका व्रत भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं पांडवों को बताया था। मान्यता है कि सिर्फ इसी एक एकादशी का व्रत करने से पूरे साल की एकादशी व्रत करने का फल मिल सकता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को किया जाएगा। आगे जानिए इस बार कब है निर्जला एकादशी, इस दिन कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें सहित पूरी डिटेल&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर दवाई खा सकते हैं या नहीं, क्या है नियम?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;निर्जला एकादशी 25 जून 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- सुबह 10:48 से दोपहर 12:29 तक- दोपहर 12:02 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)- दोपहर 12:29 से 02:10 तक- दोपहर 02:10 से 03:50 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: पहली बार कर रहे निर्जला एकादशी व्रत? भूलकर न तोड़ें ये 5 नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;निर्जला एकादशी व्रत-पूजा विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- निर्जला एकादशी से एक दिन पहले 24 जून, बुधवार की रात सात्विक भोजन करें, जमीन पर चटाई बिछाकर सोएं और ब्रह्मचर्य का पालन करें। 25 जून, गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी करके रख लें। पूजा स्थान पर गौमूत्र छिड़ककर पवित्र कर लें। शुभ मुहूर्त में इस स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें और इसके ऊपर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।- भगवान की प्रतिमा पर तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। भगवान विष्णु को अबीर, गुलाल, रोली, नारियल, पीले फूल, फल, दूर्वा, पूजा की सुपारी, पीले वस्त्र, हल्दी और चंदन आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें।- पूजा के दौरान ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद भगवान विष्णु को मिठाई और फलों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी के पत्ते डालना न भूलें। निर्जला एकादशी व्रत की कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें।- रात में सोएं नहीं, भजन कीर्तन करें। अगले दिन सुबह एक बार फिर से भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद व्रत का पारणा करें। इस प्रकार जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भगवान विष्णु की आरती&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे।जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे।तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे।तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ओम जय जगदीश हरे।तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ओम जय जगदीश हरे।दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे।विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे।श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Gayatri Jayanti 2026: कब है गायत्री जयंती? जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और महत्व]]></title>
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            <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 09:26:51 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Gayatri Jayanti 2026 Date: हिंदू धर्म में अनेक देवियों के बारे में बताया गया है। वेदमाता गायत्री भी इनमें से एक है। इनकी पूजा से संसार का हर सुख पाया जा सकता है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Gayatri Jayanti 2026 Kab Hai: &lt;/strong&gt;हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गायत्री जयंती का पर्व मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि पर वेदमाता गायत्री प्रकट हुई थीं। इस बार गायत्री जयंती का पर्व 24 जून, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन शिव नाम का शुभ योग दिन भर रहेगा, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक हो गया है। आगे जानिए कैसे करें देवी गायत्री की पूजा, इस दिन के शुभ मुहूर्त व अन्य खास बातें&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: पहली बार कर रहे निर्जला एकादशी व्रत? भूलकर न तोड़ें ये 5 नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गायत्री जयंती 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 07:27 से 09:08 तकसुबह 10:48 से दोपहर 12:29 तकदोपहर 03:50 से 05:31 तकशाम 05:31 से 07:11 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: कब है निर्जला एकादशी, इस दिन तुलसी को जल चढ़ाएं या नहीं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस विधि से करें देवी गायत्री की पूजा (Gayatri Jayanti Puja Vidhi)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 24 जून, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें।- घर में लकड़ी की चौकी पर देवी गायत्री की तस्वीर स्थापित करें। कुमकुम से तिलक करें और फूलों की माला पहनाएं।- शुद्ध घी का दीपक जलाएं। अबीर, गुलाल, फल, वस्त्र, रोली, फूल, पूजा की सुपारी आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं।- देवी को फल व मिठाई का भोग लगाएं-आरती करें। पूजा के बाद नीचे लिखे मंत्र का जाप 5 माला करें। ये है गायत्री मंत्र-&lt;strong&gt;भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्&lt;/strong&gt;- इस प्रकार गायत्री जयंती पर पूजा और मंत्र जाप करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;देवी गायत्री की आरती (Devi Gayatri Ki Aarti)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।सत् मार्ग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक कर्त्री ।दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र दैन्य हत्री ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे ।भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि ।अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता ।सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे ।कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी ।जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥जननी हम हैं दीन-हीन, दु:ख-दरिद्र के घेरे ।यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै ।विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता ।सत् मार्ग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता ॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[शनिवार भस्म आरती दर्शन: चंद्रमौली स्वरूप में हुआ बाबा महाकाल का श्रृंगार, देखें तस्वीरें]]></title>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 08:05:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahakal Bhasma Aarti: उज्जैन में भगवान महादेव का कौन-सा ज्योतिर्लिंग स्थापित है? महाकाल मंदिर में रोज सुबह कौन-सी विश्व प्रसिद्ध आरती की जाती है? 20 जून 2026 की सुबह भगवान महाकाल का किस स्वरूप में श्रृंगार किया गया?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvhdyjxyaansww79gtym200k,imgname-mahakal-bhasma-aarti-20-june-2026-1781922745278.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahakal Bhasma Aarti 20 June 2026:&lt;/strong&gt; उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार (20 जून 2026) सुबह भगवान महाकाल की भस्म आरती के दौरान भव्य और आकर्षक श्रृंगार किया गया। तड़के मंदिर के पट खुलने के साथ ही पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ हुआ और गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया गया।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके बाद भगवान महाकाल का कोटीतीर्थ के पवित्र जल से अभिषेक किया गया। साथ ही दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत द्वारा विशेष पूजन-अर्चन किया गया। वैदिक मंत्रों के उच्चारण और घंटियों की गूंज के बीच भगवान का दिव्य अभिषेक हुआ।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पूजन के दौरान हरि-ओम का जल अर्पित कर भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को बिल्वपत्र, रुद्राक्ष की मालाएं और रजत मुकुट अर्पित किए गए। बाबा के मस्तक पर त्रिपुण्ड धारण कराया गया तथा त्रिशूल और डमरू से उनके स्वरूप को अलंकृत किया गया।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;श्रृंगार में शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों की मालाओं का उपयोग किया गया। मस्तक पर चंद्रमा धारण किए इस स्वरूप को बाबा महाकाल का चंद्रमौली स्वरूप कहा जाता है। पूजा के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किए गए। कपूर आरती और नैवेद्य के बाद परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण की इस प्राचीन परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। आरती के समय पूरा मंदिर परिसर &quot;जय महाकाल&quot; के जयघोषों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे नजर आए। बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर भक्तों ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर दवाई खा सकते हैं या नहीं, क्या है नियम?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/nirjala-ekadashi-2026-can-you-take-medicine-during-fast-rules/articleshow-ktr1xfq</link>
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            <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 10:28:33 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Nirjala Ekadashi Dos and Donts: धर्म ग्रंथों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत से जुड़े अनेक कठोर नियम हैं। जानें क्या इस व्रत में दवाई खा सकते हैं?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvsdg4aw3mjxvsan3s816dya,imgname-nirjala-ekadashi-2026-rules-1782190707034.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026 Rules:&lt;/strong&gt; निर्जला एकादशी को साल भर की सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस बार ये व्रत 25 जून, गुरुवार को किया जाएगा। इस व्रत के नियम सबसे कठिन हैं। इस व्रत में पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए भगवान की पूजा की जाती है। इस व्रत को लेकर लोगों के मन में एक सवाल अक्सर रहता है कि यदि कोई व्यक्ति नियमित दवाएं लेता है तो क्या वह निर्जला एकादशी पर दवाई खा सकता है? आगे जानिए इस व्रत से जुड़े नियमों के बारे में&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: पहली बार कर रहे निर्जला एकादशी व्रत? भूलकर न तोड़ें ये 5 नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या निर्जला एकादशी में दवाई ले सकते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;निर्जला एकादशी व्रत में भोजन और पानी का त्याग किया जाता है। यही कारण है कि इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। हालांकि धर्म शास्त्रों में स्वास्थ्य को भी विशेष महत्व दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है या उसे नियमित रूप से दवाएं लेनी पड़ती हैं, तो वह अपनी आवश्यकता के अनुसार दवा ले सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: कब है निर्जला एकादशी, इस दिन तुलसी को जल चढ़ाएं या नहीं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किन लोगों को मिलती है छूट?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सनातन धर्म में कुछ लोगों को व्रत के कठोर नियमों से मुक्त रखा गया है जिनमें वृद्ध, रोगी, गर्भवती महिलाएं और ऐसे लोग जिनकी शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है, शामिल है। ऐसे लोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा और आवश्यक मात्रा में पानी ले सकते हैं। ऐसा करने से इनके व्रत के पुण्य पर कोई असर नहीं होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या दवा लेने से व्रत टूट जाता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विद्वानों की मानें तो बीमारी की स्थिति में दवा लेना व्रत भंग नहीं माना जाता। यदि शरीर ही ठीक नहीं रहेगा तो आप भगवान की भक्ति कैसे करेंगे? यदि दवा स्वास्थ्य की मजबूरी के कारण ली जा रही है तो भगवान विष्णु की भक्ति और श्रद्धा ही सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। व्रत का उद्देश्य संयम, आत्मशुद्धि और ईश्वर आराधना है, न कि शरीर को नुकसान पहुंचाना।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इन बातों का भी रखें ध्यान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- यदि आप स्वस्थ हैं और निर्जला व्रत करने में सक्षम हैं तो व्रत के नियमों का पालन करें।- यदि आपको सेहत से जुड़ी कोई समस्या है तो बिना झिझक आवश्यक दवा ले सकते हैं।- व्रत-पूजा का मुख्य उद्देश्य भगवान की भक्ति करना है न कि अपने शरीर को कष्ट पहुंचाना।- सेहत ठीक न हो तो एकादशी पर भगवान विष्णु का मंत्र जाप, दान-पुण्य और अच्छे काम जरूर करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Chanakya Niti: पति-पत्नी में कब बढ़ने लगती हैं दूरियां? ये हैं 4 बड़ी वजह]]></title>
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            <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 15:28:11 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Chanakya Quotes: अगर आपके वैवाहिक जीवन में दूरियां बढ़ रही है तो सावधान हो जाईए। आचार्य चाणक्य ने इसके पीछे 4 बड़ी वजह बताई है। आप भी जानें इनके बारे में।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvqc47g5hz6k4p4z0a0xe4f6,imgname-chanakya-niti-husband-wife-relationship-1782122159621.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti Husband Wife Relationship:&lt;/strong&gt; आचार्य चाणक्य भारत के महान विद्वान थे। जब हमारा देश अलग-अलग जनपदों में बंटा हुआ था तो आचार्य चाणक्य ने ही इसे एक सूत्र में पिरोया और अखंड भारत का निर्माण किया। उनकी बताई गई नीतियां आज के समय में भी हमारे लिए बहुत काम की हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में ये भी बताया है कि किन कारणों से पति-पत्नी के रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं। आगे जानिए ऐसे ही 4 कारणों के बारे में&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: भूलकर भी न करें इन 5 तरह के लोगों से प्रेम, जीवनभर होगा पछतावा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एक-दूसरे से बातचीत न करना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य के अनुसार किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए बातचीत बेहद जरूरी है। जब पति-पत्नी किसी वजह से एक-दूसरे से बात करना बंद कर देते हैं या सिर्फ जरूरी बातें ही करते हैं तो इससे उनके बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं। धीरे-धीरे ये दूरियां बहुत ज्यादा होने लगती है और बात अलग होने तक आ जाती है। इसलिए पति-पत्नी के बीच बातचीत होते रहना जरूरी है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: इन 4 तरह की स्त्रियों से पत्नी को रखें दूर, बिगड़ सकती है गृहस्थी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एक-दूसरे पर शक करना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विवाह की नींव विश्वास पर टिकी होती है। ऐसी स्थिति में अगर पति या पत्नी अपने साथी पर बेवजह शक करने लगे तो ये रिश्ता ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाता। पति-पत्नी को एक-दूसरे से कोई बात छिपानी नहीं चाहिए। ऐसी छोटी-छोटी गलतियां ही बाद में बड़े विवाद का कारण बन सकती हैं। चाणक्य का मानना है कि जहां विश्वास नहीं होता, वहां प्रेम और अपनापन भी धीरे-धीरे कम होने लगता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अहंकार का बढ़ना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब रिश्ते में प्यार से ज्यादा अहंकार हावी होने लगे, तो दूरियां होना स्वाभाविक है। यही बात पति-पत्नी के रिश्ते पर भी लागू होती है। अपनी बात को ही सही मानना, गलती होने पर भी माफी न मांगना और हर बात में खुद को श्रेष्ठ समझना हंसती-खेलती गृहस्थी को खराब कर सकता है। इसलिए पति-पत्नी दोनों को ही ऐसा करने से बचना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एक-दूसरे को सम्मान न देना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य नीति के अनुसार पति-पत्नी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। यदि किसी एक की भावनाओं, विचारों या प्रयासों को महत्व नहीं दिया जाता, तो मन में असंतोष पैदा होने लगता है। यही असंतोष समय के साथ रिश्ते में दूरी का कारण बन सकता है। ये गलती भी पति-पत्नी को नहीं करना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Ambubachi Mela 2026: रहस्यमयी है अंबुबाची मेला, इन 3 दिनों में क्यों बंद रहेगा कामाख्या मंदिर?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ambubachi-mela-2026-why-kamakhya-temple-remains-closed-for-three-days/articleshow-n5zn6or</link>
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            <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:09:02 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Kamakhya Temple Mystery: अंबुबाची मेला 2026 कब से शुरू होगा? कामाख्या मंदिर के कपाट 3 दिनों तक क्यों बंद रहते हैं? अंबुबाची मेले में तांत्रिक साधक क्यों पहुंचते हैं? कामाख्या मंदिर में सफेद वस्त्र के लाल होने की मान्यता क्या है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvfgcvc1cg7xpn9064jshph7,imgname-kamakhya-temple-interesting-facts-1781858200961.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;kamakhya temple interesting facts:&lt;/strong&gt; हमारे देश में तंत्र-मंत्र के लिए अनेक सिद्ध स्थान हैं। इन्हीं में से एक है कामाख्या मंदिर। ये मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। मान्यता है कि इसी स्थान पर देवी सती का योनी भाग गिरा था। यहां कि कुछ परंपराएं बहुत ही अजीब और रोचक हैं। हर साल जून मान में यहां एक मेला लगता है, जिसे अंबुबाची कहते हैं। इन 3 दिनों में दूर-दूर से तांत्रिक यहां आकर तंत्र साधना करते हैं। आगे जानिए इस बार कब से शुरू होगी अंबुबाची मेला और इससे जुड़ी रोचक बातें&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Belief: दरवाजे की चौखट पर भूलकर न बैठें, यूनिक है इस मान्यता की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब से शुरू होगा अंबुबाची मेला 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मिली जानकारी के अनुसार इस बार अंबुबाची मेले की शुरूआत 22 जून से होगी। इस दिन रात को विधि-विधान से पूजा करने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे, जो अगले 3 दिन तक यानी 25 जून तक बंद ही रहेंगे। इस दौरान कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं करेगा। 26 जून की सुबह मंदिर के कपाट खोलकर साफ-सफाई करने के बाद भक्त यहां दर्शन कर पाएंगे।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: इन 4 तरह की स्त्रियों से पत्नी को रखें दूर, बिगड़ सकती है गृहस्थी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों लगता है अंबुबाची मेला?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अंबुबाची मेले से जुड़ी मान्यता साल में एक बार माता कामाख्या रजस्वला (मासिक धर्म) होती हैं। इस दौरान कोई भी माता के दर्शन नहीं करता। 3 दिन बाद यानी रजस्वला समाप्ति के बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इन 3 दिनों में यहां दूर-दूर से तांत्रिक तंत्र क्रिया के लिए आते हैं। एक खास बात ये भी है कि मंदिर के कपाट बंद करने से पहले माता के योनी भाग के ऊपर एक सफेद वस्त्र रखा जाता है। 3 दिन बाद जब मंदिर के कपाट खोलते हैं तो ये वस्त्र लाल हो जाता है। ऐसा क्यों होता है, ये बात आज तक कोई समझ नहीं पाया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों खास है कामख्या मंदिर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार, देवी सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव व्याकुल होकर उनके शव को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे। तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के मृत शरीर के टुकड़े कर दिए। जहां-जहां भी देवी सती के शरीर के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। मान्यता है कि कामाख्या शक्तिपीठ पर देवी सती का योनी भाग गिरा था। ये मंदिर तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। यहां रोज सैकड़ों पशुओं की बलि दी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[रविवार भस्म आरती दर्शन: मस्तक पर त्रिपुण्ड-शरीर पर भस्म, देखें बाबा महाकाल की तस्वीरें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahakal-bhasma-aarti-darshan-today-pics-21-june-2026-mahakaleshwar-jyotirlinga-ujjain/articleshow-ne3g4g4</link>
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            <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 08:09:54 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahakal Bhasma Aarti: उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में की जाने वाली भस्मारती विश्व प्रसिद्ध है। दूर-दूर से भक्त इस आरती को देखने यहां आते हैं। ये एक बहुत ही अद्भुत अनुभव होता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvm0fn06qf61apzx0zqjeyxa,imgname-mahakal-bhasma-aarti-21-june-2026-1782009287686.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahakal Bhasma Aarti 21 June 2026:&lt;/strong&gt; प्रतिदिन की तरह 21 जून रविवार को भी विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में सुबह भगवान महाकाल की भस्म आरती की गई और इसके बाद आर्कषक श्रृंगार किया गया। सुबह पट खुलते ही बाबा की पूजा का क्रम शुरू हो गया। पंडितों ने महाकाल मंदिर के गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सबसे पहले महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का कोटीतीर्थ के पवित्र जल से अभिषेक किया गया। साथ ही दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण भी होता रहा। ये दृश्य भक्तों के लिए बहुत ही अद्भुत अनुभव जैसा था। पूजन के दौरान भक्तो ने बाबा पर हरि-ओम का जल अर्पित किया।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को सुंदर रूप में सजाया गया। बिल्वपत्र, फूल रुद्राक्ष की मालाएं और चांदी के आभूषणों बाबा महाकाल को चढ़ाएं गए। मस्तक पर चांदी का त्रिपुण्ड धारण कराया गया। भगवान महाकाल का ये रूप जिसने भी देखा, वह देखता ही रहा।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पूजा और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को तरह-तरह की मिठाई और फलों का भोग लगाया गया। कपूर आरती और नैवेद्य के साथ ही भस्म आरती संपन्न हुई। भस्म अर्पण की परंपरा को देखने के लिए नंदी हॉल और बेरीकेट्स पर बड़ी संख्या में भक्त मौजूद थे। आरती के साथ ही पूरा मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा और भक्त आस्था में डूबे नजर आए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Mahakal Bhasam Aarti Today: राजा के रूप में सजे महाकाल, देखें भस्मारती की वीडियो और तस्वीरें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahakal-bhasma-aarti-today-22-june-2026-baba-mahakal-darshan-video-photos/articleshow-ueiwisk</link>
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            <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:46:27 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahakal Darshan Today: उज्जैन में स्थित भगवान महाकाल की भस्म आरती देखने के लिए रोज हजारों लोग आते हैं। एकमात्र महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में ही भगवान महाकाल को भस्म लगाई जाती है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvpn82rbh8ktgz5vn6dp8f7b,imgname-mahakal-bhasam-aarti-today-1782098168587.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahakal Bhasma Aarti 22 June 2026:&lt;/strong&gt; विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार (22 जून 2026) तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती हुई। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना शुरू हुई। पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया, इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। जटाधारी बाबा महाकाल को चांदी के आभूषण अर्पित कर राजाधिराज स्वरूप में सजाया गया, जिससे उनका दिव्य रूप अत्यंत आकर्षक दिखाई दिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भस्म आरती की शुरुआत से पहले प्रथम घंटाल की ध्वनि के साथ पुजारियों ने भगवान का ध्यान कर पवित्र जल अर्पित किया। इसके बाद कपूर आरती की गई और भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन तथा त्रिपुंड अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर परंपरानुसार भस्म रमाई गई।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान को चांदी के शेषनाग मुकुट, मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा सुगंधित फूलों से सजाया गया। मोगरा, गुलाब और अन्य सुगंधित फूलों से किए गए मनोहारी श्रृंगार ने भगवान महाकाल के स्वरूप को और भी दिव्य बना दिया।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके बाद भगवान को विभिन्न फल, मिष्ठान और नैवेद्य का भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती में देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hindu Belief: दरवाजे की चौखट पर भूलकर न बैठें, यूनिक है इस मान्यता की वजह]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hindu-belief-why-should-not-sit-on-doorstep-chaukhat-significance/articleshow-xht5byd</link>
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            <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:57:21 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Why Not Sit on Doorstep: घर की दहलीज पर बैठना अशुभ क्यों माना जाता है? हिंदू धर्म में दहलीज पर किस देवी का वास माना गया है? वास्तु शास्त्र के अनुसार दहलीज का क्या महत्व है? घर की चौखट को पवित्र क्यों माना जाता है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;House Entrance Vastu:&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में कईं तरह की मान्यताएं है। ऐसी ही एक मान्यता ये है कि घर के दरवाजे की चौखट पर कभी बैठना नहीं चाहिए और न ही खड़े होना चाहिए। ऐसा करने अशुभ माना गया है। इसके पीछे अनेक कारण बताए जाते हैं। इनमें से कुछ धार्मिक कथाओं पर आधारित हैं तो कुछ वास्तु के नियमों पर। यही वजह है कि घर के बुजुर्ग आज भी घर की चौखट पर खड़े होने और बैठने से मना करते हैं। आगे जानिए क्या है इस मान्यता के पीछे के वजह&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;जून 2026 के चौथे सप्ताह में 3 बड़े पर्व, जानें कब है महेश नवमी, गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों न बैठें घर की चौखट पर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विद्वानों का मानना है कि घर की चौखट पर भगवान नृसिंह का वास होता है, जब कोई व्यक्ति इस स्थान पर बैठता है तो उसे भगवान नृसिंह के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उसके जीवन में नई-नई परेशानियां आ सकती हैं। ये मान्यता इसलिए प्रचलित है क्योंकि भगवान नृसिंह ने चौखट पर खड़े होकर भी राक्षसों के राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था। इसलिए ऐसा कहते हैं कि घर की चौखट पर नहीं बैठना चाहिए।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;दिलचस्प मान्यताएंः पति के घर से निकलते ही पत्नियां भूलकर भी न करें ये 7 काम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इसलिए न बैठें घर की दहलीज पर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस मान्यता से जुड़ा एक अन्य मत ये भी है कि घर की दहलीज पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। कहा जाता है कि मां लक्ष्मी इसी मार्ग से घर में प्रवेश करती हैं। इसलिए दहलीज पर बैठना या खड़े होना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से धन और समृद्धि में बाधा आ सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या कहता है वास्तु शास्त्र?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वास्तु शास्त्र की माने तो चौखट घर के अंदर और बाहर की ऊर्जा के बीच एक सीमा रेखा का कार्य करती है। यदि कोई व्यक्ति इस स्थान पर बैठता है तो घर के अंदर की पॉजिटिव एनर्जी के प्रवाह को प्रभावित करता है। इसी वजह से घर की चौखट पर बैठना या खड़े होना अशुभ माना गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इन बातों का भी रखें ध्यान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; घर की दहलीज पर बैठकर कभी भोजन नहीं करना चाहिए।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; दहलीज पर पैर रखकर खड़ा नहीं होना चाहिए। इससे परेशानियां बढ़ सकती हैं।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; शाम के समय घर की दहलीज पर कचरा या गंदगी नहीं रखनी चाहिए।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; चौखट को साफ-सुथरा रखने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Chanakya Niti: भूलकर भी न करें इन 5 तरह के लोगों से प्रेम, जीवनभर होगा पछतावा]]></title>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:04:48 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Relationship Tips by Chanakya: चाणक्य के अनुसार किन लोगों से प्रेम नहीं करना चाहिए? क्या स्वार्थी व्यक्ति के साथ रिश्ता सफल हो सकता है? झूठ बोलने वाले लोगों से प्रेम संबंध क्यों नहीं बनाना चाहिए?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti for Relationships:&lt;/strong&gt; आचार्य चाणक्य भारत के महान विद्वानों में से एक थे। उन्होंने ही एक साधारण युवक चंद्रगुप्त को अखंड भारत का सम्राट बनाया था। उन्होंने अपने नीति शास्त्र में जीवन, धन, मित्रता और रिश्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। प्रेम संबंधों को लेकर भी चाणक्य ने लाइफ मैनेजमेंट की खास टिप्स बताई है। उसके अनुसार यदि गलत व्यक्ति से प्रेम हो जाए तो इसका असर पूरे जीवन पर पड़ सकता है। चाणक्य नीति से जानिए किस तरह के लोगों से प्रेम संबंध बनाने से बचना चाहिए&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: इन 4 तरह की स्त्रियों से पत्नी को रखें दूर, बिगड़ सकती है गृहस्थी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्वार्थी लोगों से रहें बचकर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति हर रिश्ते में केवल अपना फायदा देखता है, वह कभी सच्चा साथी नहीं बन सकता। ऐसे लोग जरूरत पड़ने पर साथ छोड़ देते हैं, जिससे मानसिक और भावनात्मक कष्ट झेलना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को भूलकर भी प्रेम न करें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इन 4 स्थानों पर पत्नी को भूलकर भी साथ न ले जाएं, चाणक्य से जानें वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;झूठ बोलने वाले लोगों से दूर रहें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिश्तों की नींव विश्वास और सच्चाई पर टिकी होती है। जो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी झूठ बोलता है, उस पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। चाणक्य के अनुसार ऐसे लोगों से प्रेम संबंध भविष्य में परेशानी का कारण बन सकते हैं। ऐसे लोग धोखा देने में भी माहिर होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्रोधी लोगों से न रखें संबंध&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य की मानें तो अत्यधिक गुस्सा करने वाले लोग अक्सर बिना सोचे-समझे फैसले लेते हैं। उनका व्यवहार रिश्तों में तनाव और विवाद पैदा कर सकता है। ऐसे लोग दूसरे के मान-सम्मान को भी बार-बार आहत करते हैं, इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना ही बेहतर माना गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चरित्रहीन व्यक्ति से बचें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अच्छा चरित्र ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि कोई व्यक्ति अपने रिश्तों के प्रति ईमानदार नहीं है, तो उसके साथ प्रेम संबंध लंबे समय तक सुखद नहीं रह सकते। ऐसे लोग जीवन में किसी भी मोड़ पर लाकर आपको धोखा दे सकते हैं। इनसे बचकर रहना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;निगेटिव सोच रखने वाले लोगों से बनाएं दूरी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;निगेटिव सोच वाले लोग हर समय शिकायत करते हैं और गलत बातें सोच-सोचकर खुद भी परेशान होते हैं और दूसरों को भी करते हैं। ऐसे लोगों के साथ रहने से जीवन में तनाव और निराशा बढ़ सकती है। कईं बार ये स्थिति मानसिक बीमारी तक पहुंच सकती है। इसलिए ऐसे लोगों से संबंध न रखें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[जून 2026 के चौथे सप्ताह में 3 बड़े पर्व, जानें कब है महेश नवमी, गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/june-2026-major-hindu-festivals-kab-hai-mahesh-navami-gayatri-jayanti-nirjala-ekadashi-date/articleshow-zy9ce5t</link>
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            <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:11:05 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;June 2026 Hindu Festivals: जून 2026 के चौथे सप्ताह में कौन-कौन से बड़े धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे? महेश नवमी 2026 कब है और इसका महत्व क्या है? गायत्री जयंती किस तिथि को मनाई जाएगी?निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Festival List:&lt;/strong&gt; जून 2026 का चौथा सप्ताह धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस सप्ताह लगातार तीन महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाएंगे, जिनका सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। ये पर्व हैं- महेश नवमी, गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी। महेश नवमी भगवान शिव को समर्पित हैं, वहीं गायत्री जयंती वेदमाता गायत्री को, वहीं निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। आगे जानिए इन सभी व्रत-त्योहारों की सही डेट&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;दिलचस्प मान्यताएंः पति के घर से निकलते ही पत्नियां भूलकर भी न करें ये 7 काम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है महेश नवमी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महेश नवमी का पर्व मुख्य रूप से माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है। इस बार महेश नवमी का पर्व 23 जून, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान महेश यानी शिवजी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। देशभर में माहेश्वरी समाज द्वारा इस दिन विशेष धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इन 4 स्थानों पर पत्नी को भूलकर भी साथ न ले जाएं, चाणक्य से जानें वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है गायत्री जयंती 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;देवी गायत्री को वेदमाता कहा जाता है। हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गायत्री जयंती का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर देवी गायत्री प्रकट हुईं थीं। इस बार गायत्री जयंती का उत्सव 24 जून, बुधवार को मनाया जाएगा। वेदों में गायत्री मंत्र को सबसे शक्तिशाली और पवित्र मंत्रों में से एक माना गया है। इस दिन श्रद्धालु गायत्री मंत्र का जाप, हवन और विशेष पूजा करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है निर्जला एकादशी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इसे सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस व्रत में व्रती (व्रत करने वाला) पूरे दिन बिना जल पीए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन दान-पुण्य, जलदान और जरूरतमंदों की सहायता का विशेष महत्व बताया गया है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं क्योंकि पाण्डु पुत्र भीम पूरे साल में सिर्फ यही एक एकादशी व्रत करते थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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