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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Sun, 04 Oct 2026 18:50:05 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[Mahalakshmi Vrat 2026: कब करें महालक्ष्मी व्रत, 3 या 4 अक्टूबर? जानें मंत्र-मुहूर्त, आरती सहित पूजा विधि]]></title>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 10:17:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahalakshmi Vrat 2026 Date: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इसे हाथी पूजन भी कहते हैं क्योंकि इस व्रत में हाथी पर बैठी देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। जानें 2026 में कब है महालक्ष्मी व्रत?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hathi Pujan 2026 Kab Kare:&lt;/strong&gt; आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस दिन हाथी पर विराजमान देवी लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। इसी वजह से इसे हाथी अष्टमी या हाथी पूजन भी कहा जाता है। इस बार अष्टमी तिथि दो दिन पड़ने से महालक्ष्मी व्रत की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है। आइए जानते हैं 2026 में महालक्ष्मी व्रत कब रखा जाएगा और इसकी पूजा का सही तरीका क्या है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;3 या 4 अक्टूबर, कब रखें महालक्ष्मी व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर, शनिवार को सुबह 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 5:51 बजे तक रहेगी। चूंकि 3 अक्टूबर को अष्टमी तिथि पूरे दिन रहेगी, इसलिए इसी दिन महालक्ष्मी व्रत करना शुभ रहेगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;October 2026 Calendar: शारदीय नवरात्रि कब से? जानें दशहरा, करवा चौथ सहित पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महालक्ष्मी व्रत 2026 के शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 7:51 बजे से 9:19 बजे तकसुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तकदोपहर 12:15 बजे से 1:44 बजे तकदोपहर 3:12 बजे से शाम 4:40 बजे तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat 2026 Date: जितिया व्रत कब है 3 या 4 अक्टूबर? दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और पारण का समय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ऐसे करें महालक्ष्मी व्रत की पूजा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- महालक्ष्मी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। संकल्प के समय यह मंत्र बोलें-&lt;strong&gt;करिष्यहं महालक्ष्मि व्रतमें त्वत्परायणा,&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;तदविघ्नेन में यातु समप्तिं स्वत्प्रसादत:&lt;/strong&gt;- व्रत के दौरान नियमों का पालन करें। किसी की बुराई या विवाद से बचें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। घर में साफ-सफाई और पवित्रता बनाए रखें। इस दिन तामसिक चीजों का सेवन न करें।- पूजा के शुभ मुहूर्त से पहले घर में किसी साफ जगह की अच्छी तरह सफाई कर लें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर देवी लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। ध्यान रखें कि महालक्ष्मी व्रत में हाथी पर बैठी देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, इसलिए इसी स्वरूप की तस्वीर या प्रतिमा रखें।- देवी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद कुमकुम से तिलक करें और फूलों की माला चढ़ाएं। चंदन, अबीर, गुलाल, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, जनेऊ, लाल चुनरी और नारियल समेत पूजा की अन्य सामग्री देवी को अर्पित करें।- इसके बाद नीचे दिए मंत्र का जाप करें-&lt;strong&gt;क्षीरोदार्णवसम्भूता लक्ष्मीश्चन्द्र सहोदरा&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;व्रतोनानेत सन्तुष्टा भवताद्विष्णुबल्लभा&lt;/strong&gt;- महालक्ष्मी पूजा के बाद हाथी की पूजा करने की भी परंपरा है। इसके बाद देवी लक्ष्मी को गाय के दूध से बनी खीर का भोग अर्पित करें। अंत में विधि-विधान से महालक्ष्मी की आरती करें।- धार्मिक मान्यता के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत और पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत का महत्व कई धार्मिक ग्रंथों में भी बताया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;श्री लक्ष्मी माता की आरती (Laxmi Mata Ki Aarti Lyrics)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।मैया तुम ही जग-माता।।सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।मैया सुख सम्पत्ति दाता॥जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।मैया तुम ही शुभदाता॥कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।मैया सब सद्गुण आता॥सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।मैया वस्त्र न कोई पाता॥खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।मैया क्षीरोदधि-जाता॥रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।मैया जो कोई जन गाता॥उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ओम जय लक्ष्मी माता॥ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Jitiya Vrat 2026 Date: 3 या 4 अक्टूबर, कब करें जीवित्पुत्रिका व्रत? जानें पूजा विधि, मुहूर्त, कथा और महत्व]]></title>
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            <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 10:12:46 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jivitputrika Vrat 2026: आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत रखा जाता है। संतान की लंबी उम्र और उनकी खुशहाली की कामना से महिलाएं इस व्रत को करती हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat kab Kare:&lt;/strong&gt; बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में जितिया व्रत खास तौर पर किया जाता है। इसे जिऊतिया, जिमूतवाहन और जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। जितिया व्रत तीन दिनों तक चलने वाला पर्व है। इसकी मुख्य पूजा अष्टमी तिथि को होती है। इस साल जितिया व्रत की मुख्य पूजा 3 अक्टूबर, शनिवार को की जाएगी। व्रत रखने वाली महिलाएं संतान की लंबी उम्र और उनके सुखी जीवन के लिए पूरे दिन नियमों का पालन करती हैं। इस दौरान पूजा-पाठ के साथ जितिया व्रत की कथा सुनने की भी परंपरा है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: जीते-जी अपना श्राद्ध, सच या झूठ! जानें कौन कर सकता है स्वयं का पिंडदान?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जितिया व्रत 2026 के शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 7:51 बजे से 9:19 बजे तकसुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तकदोपहर 12:15 बजे से 1:44 बजे तकदोपहर 3:12 बजे से शाम 4:40 बजे तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mahalakshmi Vrat 2026: कब करें महालक्ष्मी व्रत, 3 या 4 अक्टूबर? जानें मंत्र-मुहूर्त, आरती सहित पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जितिया व्रत की पूजा विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 3 अक्टूबर की सुबह व्रत रखने वाली महिलाएं जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें।- पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करें। इस दौरान भोजन से परहेज किया जाता है और मन को शांत रखते हुए किसी से विवाद नहीं करना चाहिए।- शाम के समय पूजा की जगह को गाय के गोबर से लीपकर पवित्र किया जाता है। इसके बाद मिट्टी से छोटे तालाब जैसी आकृति बनाई जाती है।- तालाब के किनारे पाकड़ के पेड़ की टहनी लगाई जाती है। कुशा घास से जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा की जाती है।- मिट्टी या गोबर से चील और सियारिन की आकृतियां बनाकर उन्हें सिंदूर अर्पित किया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा की जाती है।- पूजा पूरी होने के बाद जितिया व्रत की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा के बिना व्रत की पूजा अधूरी मानी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जितिया व्रत की कथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक कथा के अनुसार, जीमूतवाहन नाम के एक राजकुमार थे। एक दिन उन्हें जंगल में एक नागिन रोती हुई मिली। उसने बताया कि परंपरा के अनुसार आज उसके बेटे को गरुड़ के लिए बलि देना है। जीमूतवाहन ने नागिन के बेटे की जान बचाने के लिए खुद को गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया। उनकी बहादुरी और त्याग से प्रसन्न होकर गरुड़देव ने नागवंश की बलि न लेने का वचन दिया। माना जाता है कि इसी घटना के बाद संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए जीमूतवाहन की पूजा की परंपरा शुरू हुई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Final Rituals: परिवार में मौत के बाद पुरुष सिर क्यों मुंडवाते हैं? जानिए इसके पीछे की मान्यता]]></title>
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            <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 14:18:59 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hindu Mourning Customs: &lt;/strong&gt;हिंदू धर्म में किसी की मौत के बाद सिर मुंडवाना सिर्फ एक धार्मिक मान्यता नहीं है, बल्कि यह दुख जताने का एक तरीका भी है। इसके पीछे शव से फैलने वाले कीटाणुओं से बचने का वैज्ञानिक कारण भी है। हालांकि, यह परंपरा हर परिवार में जरूरी नहीं होती।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Death Rituals in Hinduism: &lt;/strong&gt;जब घर में किसी का निधन होता है, तो परिवार वाले हिंदू रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार करते हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि सारे काम पूरे होने के बाद घर के पुरुष अपना सिर मुंडवा लेते हैं। लेकिन क्या आपको इस परंपरा के पीछे की असली वजह पता है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मौत के बाद होने वाले खास रीति-रिवाज&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हिंदू धर्म में अगर किसी की मौत हो जाती है, तो परिवार के लोग कुछ दिनों तक खास नियमों का पालन करते हैं। इसे सूतक का समय कहा जाता है। इस दौरान लोग पूजा-पाठ और शुभ कामों से दूर रहते हैं। फिर 10वें, 11वें, 12वें या 13वें दिन परिवार की परंपरा के हिसाब से कुछ खास काम किए जाते हैं। सिर मुंडवाना भी इन्हीं में से एक है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बाल कटवाने के पीछे की मान्यता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मरने वाले इंसान से अपना मोह खत्म करने और उसकी आत्मा की शांति के लिए कई तरह के कर्मकांड किए जाते हैं। इसी के तहत सिर के बाल भी हटाए जाते हैं। लोग बालों को शरीर का एक अहम हिस्सा मानते हैं। उनका मानना है कि बाल कटवाकर वे पुराने रिश्तों का मोह छोड़ रहे हैं और जिंदगी के एक नए पड़ाव में कदम रख रहे हैं। हालांकि, इस बात का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि आत्मा बालों के जरिए परिवार वालों से संपर्क करती है। यह सिर्फ एक धार्मिक मान्यता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दुख जताने की एक पुरानी परंपरा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सिर मुंडवाने को आप सिर्फ एक आध्यात्मिक काम नहीं कह सकते, बल्कि यह अपना दुख जाहिर करने का एक तरीका भी है। पुराने जमाने में लोग सिर मुंडवाकर समाज को यह बताते थे कि उनके घर में किसी की मौत हुई है। इसके अलावा, इसका एक मतलब यह भी है कि परिवार वाले मरने वाले की याद में कुछ दिनों के लिए अपने सजने-संवरने और सुख-सुविधाओं का त्याग कर रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इंसान की मौत के कुछ समय बाद ही शव में कीटाणुओं और बैक्टीरिया की हलचल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के लोग शव के सीधे या परोक्ष संपर्क में आते हैं। पुराने समय में आज की तरह सैनिटाइजर या कीटाणुनाशक नहीं होते थे। इसलिए, उस दौर में नहाने, कपड़े बदलने और अपने आस-पास की जगह को साफ रखने पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाता था। बालों में कीटाणु रुकने का डर रहता है, इसलिए बाल हटाना भी इसी साफ-सफाई का हिस्सा था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हर परिवार में नहीं होती यह परंपरा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सबसे अहम बात जो याद रखनी चाहिए, वह यह है कि सभी हिंदू परिवारों में सिर मुंडवाना जरूरी नहीं होता। अलग-अलग इलाकों, परिवार के रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से अंतिम संस्कार के तरीके बदल जाते हैं। कुछ लोग अपना पूरा सिर मुंडवा लेते हैं, तो कुछ लोग सिर्फ थोड़े से बाल कटवाते हैं। वहीं, कई परिवारों में यह परंपरा बिल्कुल भी नहीं निभाई जाती।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Mahalakshmi Vrat Katha: हाथी अष्टमी पर सुनें महालक्ष्मी व्रत की ये रोचक कथा, तभी मिलेगा व्रत का फल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahalaxmi-vrat-katha-2026-hathi-pujan-kyo-karte-hai-mahalakshmi-vrat-story-in-hindi-articleshow-dc3b0ac</link>
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            <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 06:00:06 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Hathi Pujan Vrat Katha: श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी पूजा की जाती है। इसे हाथी पूजा भी कहते हैं। इस दिन हाथी पर बैठी हुई देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01k4vfvn3dpx1a4knr2dbgg6x6,imgname-mahalakshmi-vrat-2025-1757564228717.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahalakshmi Vrat Katha In Hindi: &lt;/strong&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस व्रत में हाथी पर बैठी हुईं देवी लक्ष्मी की पूजा की परंपरा है। इस बार ये व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत की पूजा के साथ इसकी कथा सुनने से व्रत का महत्व और बढ़ जाता है। बिना कथा सुने इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। आगे पढ़िएं इस व्रत की रोचक कथा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hathi Pujan Kab Hai: महालक्ष्मी व्रत में हाथी की पूजा कैसे करें, क्या-क्या चढ़ाएं? जानें मुहूर्त-पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महालक्ष्मी व्रत की कथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में मंगलार्ण नाम के एक राजा थे। उनकी पत्नी का नाम पद्मावती था। तवल्लक नाम का एक ब्राह्मण भी राजा के साथ रहता था, जो धर्म-कर्म में विश्वास रखता था।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mahalakshmi Vrat 2026: महालक्ष्मी व्रत 3 अक्टूबर को, जानें मंत्र-मुहूर्त, आरती सहित पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक दिन राजा शिकार के लिए जंगल गए। इसी दौरान उन्हें बहुत तेज प्यास लगी। पानी की तलाश में तवल्लक एक तालाब के पास पहुंचे। वहां उन्होंने कुछ महिलाओं को देवी महालक्ष्मी की पूजा करते देखा।तवल्लक ने महिलाओं से पूछा कि वे कौन-सा व्रत कर रही हैं। महिलाओं ने बताया कि वे महालक्ष्मी व्रत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस व्रत को मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है। यह सुनकर तवल्लक ने भी महालक्ष्मी व्रत करने का संकल्प लिया और हाथ में पवित्र सूत्र बांध लिया।इसके बाद वह राजा के पास पानी लेकर पहुंचे। राजा की नजर तवल्लक के हाथ में बंधे सूत्र पर पड़ी तो उन्होंने उसके बारे में पूछा। तवल्लक ने उन्हें महालक्ष्मी व्रत के बारे में पूरी जानकारी दी। राजा ने भी यह व्रत करने का फैसला किया और अपने हाथ में पवित्र धागा बांध लिया।जब रानी पद्मावती ने राजा के हाथ में वह धागा देखा तो उन्होंने इसके बारे में पूछा। राजा ने उन्हें महालक्ष्मी व्रत और सूत्र की पूरी बात बता दी। कथा के अनुसार, जानकारी के अभाव में रानी ने राजा के हाथ से वह सूत्र निकालकर अग्नि में डाल दिया।इस बात से राजा बहुत नाराज हुए और उन्होंने रानी का त्याग कर दिया। इसके बाद पद्मावती को वन में जाना पड़ा। मान्यता है कि महालक्ष्मी के व्रत से जुड़े सूत्र का अपमान करने के कारण रानी को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।वन में भटकते हुए एक दिन पद्मावती की मुलाकात ऋषि वसिष्ठ से हुई। रानी ने उन्हें अपने साथ हुई पूरी घटना बताई। ऋषि वसिष्ठ ने उन्हें महालक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी। रानी ने ऋषि के बताए अनुसार श्रद्धा से महालक्ष्मी व्रत किया।व्रत के प्रभाव से रानी का मन शांत हुआ और उनका जीवन फिर से सुखमय होने लगा। कुछ समय बाद राजा मंगलार्ण शिकार करते हुए उसी वन में पहुंचे और ऋषि वसिष्ठ के आश्रम में गए। वहां उनकी मुलाकात रानी पद्मावती से हुई।ऋषि वसिष्ठ ने राजा को बताया कि पद्मावती ने महालक्ष्मी व्रत किया है और अब उनका मन शांत हो चुका है। ऋषि की बात मानकर राजा रानी को वापस अपने साथ महल ले आए। इसके बाद दोनों फिर सुखपूर्वक रहने लगे।धार्मिक मान्यता के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत श्रद्धा और नियम से करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। मान्यता है कि इस व्रत और कथा के जरिए भक्त देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahalaxmi-vrat-katha-2026-hathi-pujan-kyo-karte-hai-mahalakshmi-vrat-story-in-hindi-articleshow-dc3b0ac"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[मातृ नवमी 2026: सिर्फ मां ही नहीं, इन 4 महिलाओं का भी होता है श्राद्ध? जानें क्या है नियम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/matru-navami-2026-shubh-muhurat-shradh-rules-for-mother-grandmother-and-mother-in-law-in-pitru-paksha-articleshow-eoc3ccx</link>
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            <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 06:00:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Matru Navami 2026: &lt;/strong&gt;पितृपक्ष में मातृ नवमी को सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहते हैं। जानें मां के अलावा किन महिलाओं श्राद्ध कर सकते हैं और मृत्यु तिथि याद न होने पर क्या करें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m416av6mgs47h5ya56308rah,imgname-matru-navami-2026-1791041563859.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Matru Navami Shradh Rules: &lt;/strong&gt;पितृपक्ष की नवमी तिथि आज, 4 अक्टूबर को है। ये बेहद खास और भावुक दिन माना जाता है। इसे 'मातृ नवमी' और 'सौभाग्यवती श्राद्ध' भी कहा जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या ये दिन सिर्फ जन्म देने वाली मां के तर्पण के लिए है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस दिन परिवार की उन सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध किया जा सकता है, जिन्होंने परिवार को संवारा और जिनकी मृत्यु अपने पति के जीवित रहते यानी सुहागिन रूप में हुई हो।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मातृ नवमी 2026: आज श्राद्ध का समय कब-कब है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कुतुप मुहूर्त -&lt;/strong&gt; दोपहर 12:03 से 12:51 तक (तर्पण और पिंडदान शुरू करने का सबसे उत्तम समय)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रौहिण मुहूर्त- &lt;/strong&gt;दोपहर 12:51 से 01:39 तक (धूप-ध्यान और पितरों के नाम अर्पण का समय)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अपराह्न काल-&lt;/strong&gt; दोपहर 01:39 से शाम 04:01 तक (ब्राह्मण और जरूरतमंदों को भोजन कराने का समय)&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मातृ नवमी पर किन-किन महिलाओं का होता है श्राद्ध?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मां: &lt;/strong&gt;जन्म देने वाली दिवंगत मां का तर्पण इस दिन सबसे प्रमुख होता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;दादी और परदादी: &lt;/strong&gt;पिता की मां यानी दादी और उनकी मां का श्राद्ध भी परिवार के कुल की सुख-शांति के लिए इसी दिन किया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नानी: &lt;/strong&gt;मां के मायके यानी ननिहाल की कुलदेवी और नानी का तर्पण दौहित्र (नाती) इस दिन श्रद्धापूर्वक कर सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सास या परिवार की निसंतान ताई या चाची: &lt;/strong&gt;अगर परिवार में सास या कोई ऐसी बुजुर्ग महिला रही हों जिनका कोई बेटा न हो और वे सुहागिन संसार से विदा हुई हों, तो बहू या परिजन मातृ नवमी पर उनके नाम का भोजन और तर्पण निकाल सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अगर मृत्यु की तारीख या तिथि याद नहीं हो तो श्राद्ध कैसे करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पितृ पक्ष में श्राद्ध के लिए मृत्यु की तिथि का खास महत्व माना जाता है। लेकिन कई बार परिवार में किसी दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु की सही तारीख याद नहीं रहती है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग नियम बताए गए हैं। मातृ नवमी को भी दिवंगत महिलाओं के श्राद्ध से जुड़ी एक खास तिथि माना जाता है। इसलिए अगर आपके परिवार में किसी महिला की मृत्यु की तिथि को लेकर जानकारी नहीं है, तब भी मातृ नवमी के दिन उनका तर्पण करने से उन्हें पूर्ण तृप्ति मिलती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मातृ नवमी के दिन क्या करना सबसे शुभ माना जाता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;खीर और पूड़ी का भोग:&lt;/strong&gt; मातृ नवमी के दिन सात्विक भोजन बनाएं। इसमें चावल की खीर, पूड़ी और उड़द दाल की कचौड़ी या बड़ा जरूर शामिल करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पंचबलि भोग: &lt;/strong&gt;भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले गाय, कुत्ता, कौवा, देवादि और चींटियों के लिए पांच हिस्से निकालें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सुहागिन महिला का सत्कार:&lt;/strong&gt; किसी ब्राह्मणी या सुहागिन महिला को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन कराएं और उन्हें सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और वस्त्र भेंट करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जल और तिल से तर्पण: &lt;/strong&gt;दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हाथ में काले तिल और जल लेकर मातृ पितरों का ध्यान करें और उनसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर:&lt;/strong&gt; ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूरता के लिए है। इसमें दी गई जानकारियां और धार्मिक मान्यताएं पंचांग और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या विधि को अपनाने से पहले अपने कुल पुरोहित, पंडित या संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Jitiya Vrat 2026 Otghan: ओठगन कब होगा, क्या खाएं और कब से शुरू होगा निर्जला व्रत? जानें जरूरी नियम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jitiya-vrat-2026-otghan-time-what-to-eat-in-sargi-nirjala-vrat-rules-in-hindi-articleshow-gw1gdkt</link>
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            <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 11:07:53 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jitiya Vrat Otghan Time: जितिया व्रत 2026 में ओठगन यानी सरगी कब होगा और इसमें क्या खा सकते हैं? जानें सही समय, ओठगन की परंपरा, निर्जला व्रत के नियम और पारण से जुड़ी जरूरी बातें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3xhqs8589sb5919z8xr9mep,imgname-jitiya-vrat-otghan-time-1790919304453.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat 2026 Otghan:&lt;/strong&gt; जितिया व्रत इस साल 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है। जितिया व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए ओठगन जिसे सरगी भी कहते हैं, बेहद अहम माना जाता है। यही वह समय होता है जब निर्जला उपवास शुरू होने से पहले व्रती कुछ खा-पी सकती हैं। 2026 में जितिया का मुख्य व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को नहाय-खाय हुआ। अब 3 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले ओठगन करके दिनभर निर्जला व्रत रखा जाएगा। जानिए जितिया व्रत से जुड़े जरूरी डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ओठगन कब करना है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जितिया के दिन ओठगन सूर्योदय से पहले किया जाता है। अलग-अलग इलाकों और परिवारों में इसका समय कुछ अलग हो सकता है। कुछ स्थानीय परंपराओं में सुबह करीब 4:30 बजे से पहले ओठगन पूरा करने की बात कही गई है। इसलिए व्रती महिलाओं को अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार समय तय करना चाहिए। ओठगन के बाद पानी पीने या भोजन करने की गुंजाइश नहीं रहती। इसके बाद जितिया का निर्जला व्रत शुरू माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;जितिया व्रत 2026: पहली बार रख रही हैं जितिया? जानें नहाय-खाय, ओठगन, पूजा और पारण का सही तरीका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जितिया व्रत सरगी: ओठगन में क्या खाएं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओठगन में क्या खाया जाए, इसकी एक जैसी परंपरा हर जगह नहीं है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दूसरे क्षेत्रों में खान-पान की परंपराओं में अंतर मिलता है। आम तौर पर ये चीजें खाई जाती हैं-&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;चूड़ा-दही&lt;/li&gt; &lt;li&gt;फल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;नारियल पानी&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पारंपरिक मीठे पकवान&lt;/li&gt; &lt;li&gt;परिवार की परंपरा में शामिल सात्विक भोजन&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कुछ क्षेत्रों में ओठगन के भोजन में स्थानीय और पारंपरिक व्यंजन भी शामिल किए जाते हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jivitputrika Vrat 2026 Date: जितिया कब है 3 या 4 अक्टूबर? दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और पारण का समय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ओठगन के बाद क्या करना है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओठगन के बाद व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। इस दौरान पानी भी नहीं लिया जाता। भगवान जीमूतवाहन की पूजा और जितिया व्रत कथा सुनने की परंपरा है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से जुड़ा माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब खुलेगा जितिया का व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जितिया का पारण 4 अक्टूबर को नवमी तिथि में किया जाएगा। उपलब्ध पंचांगों में पारण का समय लगभग सुबह 7:27-7:30 बजे के बाद बताया गया है, लेकिन शहर के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए पारण के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jitiya-vrat-2026-otghan-time-what-to-eat-in-sargi-nirjala-vrat-rules-in-hindi-articleshow-gw1gdkt"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Matru Navmi 2026: कब है मातृ नवमी, इस दिन किसका श्राद्ध करें? जानें 5 खास उपाय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/matru-navmi-2026-date-shraddh-kiska-kare-upay-pitru-paksha-avidhava-shraddh-kab-hai-articleshow-gw1ti0u</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/matru-navmi-2026-date-shraddh-kiska-kare-upay-pitru-paksha-avidhava-shraddh-kab-hai-articleshow-gw1ti0u</guid>
            <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 11:12:01 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष के दौरान आने वाली नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है। इसे अविधवा नवमी के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में इस तिथि का विशेष महत्व बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3c3hqpt5earj3vvspjz6698,imgname-pitru-paksh-ann-daan.jpg-09-1790334000858.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha Matru Navmi 2026:&lt;/strong&gt; इस साल पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर तक चलेगा। पितृ पक्ष की हर तिथि किसी न किसी खास श्राद्ध कर्म से जुड़ी मानी जाती है। इस बार मातृ नवमी का श्राद्ध 4 अक्टूबर, रविवार को किया जाएगा। इस दिन किन लोगों का श्राद्ध करना चाहिए और कौन से उपाय किए जा सकते हैं, आगे जानिए&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मातृ नवमी पर किसका श्राद्ध करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, मातृ नवमी पर उन परिजनों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की नवमी तिथि को हुई हो। इसके अलावा परिवार की उन महिलाओं के लिए भी इस दिन श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु सुहागिन अवस्था में हुई थी। इसलिए इसे मातृ नवमी कहा जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: जीते-जी अपना श्राद्ध, सच या झूठ! जानें कौन कर सकता है स्वयं का पिंडदान?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मातृ नवमी पर कौन से उपाय करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1. सुहागिन महिला को भोजन करवाएं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस दिन किसी सुहागिन ब्राह्मण महिला को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें। भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुंकुम, मेहंदी, चुनरी, महावर या अन्य सुहाग सामग्री का दान करें। इसके साथ दक्षिणा भी दी जा सकती है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: जेब पर भारी नहीं पड़ेगा श्राद्ध, कम खर्च में ऐसे करें पितरों का तर्पण&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;2. जरूरतमंदों को भोजन और सामान दें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मातृ नवमी पर वृद्धाश्रम या जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करें। अपनी क्षमता के अनुसार अनाज, फल, दूध, कपड़े जैसी उपयोगी चीजों का दान भी किया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;3. घर की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;परिवार की बुजुर्ग महिलाओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें। उन्हें अपनी सामर्थ्य के अनुसार कपड़े या कोई उपयोगी उपहार देकर सम्मानित करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;4. बेटी और बहन को भोजन के लिए बुलाएं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;विवाहित बहन या बेटी को परिवार सहित घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें। उन्हें वस्त्र आदि भेंट करके सम्मान के साथ विदा करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;5. घी-गुड़ की आहुति दें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मातृ नवमी के दिन दोपहर 12 बजे से पहले जलते हुए कंडे पर घी और गुड़ की आहुति देने की परंपरा बताई गई है। इस दौरान 'ऊं मातृ देवताभ्यो नम:' मंत्र का जाप करते हुए 5 बार आहुति दें। इसके बाद हाथ में जल लेकर अंगूठे के माध्यम से जमीन पर छोड़ें और मृत परिजनों की शांति के लिए प्रार्थना करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/matru-navmi-2026-date-shraddh-kiska-kare-upay-pitru-paksha-avidhava-shraddh-kab-hai-articleshow-gw1ti0u"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Jivitputrika Vrat 2026 Date: जितिया कब है 3 या 4 अक्टूबर? दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और पारण का समय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jitiya-vrat-2026-date-3-or-4-october-correct-date-shubh-muhurat-vidhi-paran-time-articleshow-hdg6tgg</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jitiya-vrat-2026-date-3-or-4-october-correct-date-shubh-muhurat-vidhi-paran-time-articleshow-hdg6tgg</guid>
            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 11:17:04 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jitiya Vrat 2026 Date and Time: जितिया व्रत 2026 की सही तारीख को लेकर कंफ्यूजन है? 3 या 4 अक्टूबर, जानें किस दिन रखा जाएगा व्रत और कब होगा पारण, यहां पढ़ें पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3sdjc59jr5vhtee5n6ncntb,imgname-jitiya-vrat-2026-1790780715177.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat 2026: &lt;/strong&gt;जितिया व्रत को लेकर इस बार सबसे ज्यादा सवाल इसकी तारीख को लेकर है। अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह समाप्त होगी, ऐसे में कई लोगों के बीच 3 और 4 अक्टूबर को लेकर असमंजस है। पंचांग गणना के मुताबिक 2026 में जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। जानिए जितिया व्रत 2026 की सही तारीख क्या है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Jivitputrika Vrat 2026 Date: जितिया व्रत 2026 कब है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई हिस्सों में इस व्रत की खास मान्यता है। माताएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से यह कठिन व्रत करती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अष्टमी तिथि कब से कब तक?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;2026 में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर की सुबह 5:51 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर जितिया व्रत 3 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। यानी 4 अक्टूबर को व्रत रखने की जरूरत नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जितिया व्रत 2026 का पारण कब?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जितिया व्रत का पारण अगले दिन यानी 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7:28 बजे के बाद किया जाएगा। हालांकि पारण का स्थानीय समय जगह के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग को भी देखना उचित रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha Shradh: पितृ पक्ष में किस दिन करें किसका श्राद्ध? जानें अमावस्या से लेकर मातृ नवमी तक का पूरा कलेंडर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तीन दिन की होती है जितिया की परंपरा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जितिया केवल एक दिन का व्रत नहीं है। इसकी शुरुआत सप्तमी तिथि से होती है। पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद अष्टमी को महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं। तीसरे दिन नवमी में पारण के साथ व्रत पूरा होता है। कई जगह इस दौरान राजा जिमूतवाहन की कथा सुनने और पूजा करने की परंपरा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पितृ पक्ष में पड़ता है जितिया व्रत&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;2026 में जितिया व्रत पितृ पक्ष के दौरान ही पड़ रहा है। पंचांग के मुताबिक 3 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण अष्टमी और 4 अक्टूबर को कृष्ण नवमी रहेगी। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस अवधि में माताएं संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जितिया व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य और जिउतिया माता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। व्रत के दौरान माताएं निर्जला उपवास रखकर विधि-विधान से पूजा करती हैं और संतान के कल्याण की प्रार्थना करती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitra Paksha 2026: पूर्वज की मृत्यु तारीख भूल गए हैं तो कब करें श्राद्ध? पितृ पक्ष की यह तिथि है सबसे खास&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[जितिया व्रत 2026: पहली बार रख रही हैं जितिया? जानें नहाय-खाय, ओठगन, पूजा और पारण का सही तरीका]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jitiya-vrat-2026-nahay-khay-otghan-puja-samagri-vidhi-paran-time-articleshow-hf4gt1h</link>
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            <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 10:49:47 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jitiya Vrat 2026 Nahay Khay to Paran Vidhi: जितिया व्रत 2026 नहाय-खाय आज 2 अक्टूबर को है। 3 अक्टूबर को निर्जला व्रत और 4 अक्टूबर को व्रत का पारण है। ओठगन, निर्जला व्रत, पूजा सामग्री, विधि और पारण का सही समय यहां जानें। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं जरूर पढ़ें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3xgqwxn5pwdvy6pyzff6b9h,imgname-jitiya-vrat-2026-nahay-khay-to-paran-vidhi-1790918259637.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat 2026 Puja Vidhi:&lt;/strong&gt; संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाने वाला जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत इस साल 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जा रहा है। इसकी शुरुआत एक दिन पहले 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से हो रही है। इसके बाद 3 अक्टूबर को माताएं निर्जला उपवास रखेंगी और 4 अक्टूबर को पारण के साथ व्रत पूरा होगा। पहली बार जितिया व्रत रख रही हैं तो जान लें नहाय खाय, जितया पूजा से लेकर पारण तक संपूर्ण विधि और मुहूर्त।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जितिया व्रत 2026 नहाय-खाय में क्या करें?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;झिमनी के पत्ते पर सरसों का तेल, सरसों की खली और फूल रखें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;नदी या तालाब में स्नान की परंपरा है; संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान कर सकते हैं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;स्नान के बाद सरसों का तेल लगाने की स्थानीय परंपरा है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसके बाद सात्विक भोजन करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;झिमनी का पत्ता उपलब्ध न हो तो केले के पत्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jivitputrika Vrat 2026 Date: जितिया कब है 3 या 4 अक्टूबर? दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और पारण का समय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;3 अक्टूबर को जितिया व्रत पूजा सामग्री&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;फल और नारियल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;मिठाई&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पूजा के लिए फूल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;बांस का पात्र/टोकरी&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कपड़ा, जिससे पूजा सामग्री को ढका जा सके&lt;/li&gt; &lt;li&gt;परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य पूजा सामग्री&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;ओठगन में क्या खा सकते हैं?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;चूड़ा-दही&lt;/li&gt; &lt;li&gt;फल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;नारियल पानी&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पानी या परिवार की परंपरा में निर्धारित अन्य चीजें&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;नोट: ओठगन में खाए जाने वाले भोजन की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जितिया व्रत पूजा विधि: इन बातों का रखें ध्यान&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;सूर्योदय से पहले ओठगन करने की परंपरा है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें और जितिया व्रत कथा सुनें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;व्रत के दौरान चाकू, कैंची जैसी नुकीली चीजों के इस्तेमाल से बचने की स्थानीय परंपरा है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पूजा और व्रत की विधि अपने परिवार की परंपरा के अनुसार भी की जा सकती है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha Shradh: पितृ पक्ष में किस दिन करें किसका श्राद्ध? जानें अमावस्या से लेकर मातृ नवमी तक का पूरा कलेंडर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;4 अक्टूबर को ऐसे करें जितिया व्रत पारण&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;सुबह स्नान करके पूजा करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पूजा के बाद संतान से पूजा में रखे फल-मिठाई आदि से कपड़ा हटवाने की परंपरा है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कई स्थानों पर कच्चे दूध से पारण और आम के दातून की परंपरा भी मानी जाती है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;रांची समेत झारखंड में बताए गए पंचांग के अनुसार सुबह 7:29 बजे के बाद पारण किया जाएगा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जरूरी सावधानी: &lt;/strong&gt;निर्जला व्रत शरीर के लिए कठिन हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hathi Pujan Kab Hai: महालक्ष्मी व्रत में हाथी की पूजा कैसे करें, क्या-क्या चढ़ाएं? जानें मुहूर्त-पूजा विधि]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hathi-pujan-2026-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-mahalakshmi-vrat-kab-kare-articleshow-ixfgcpe</link>
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            <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 11:55:40 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahalakshmi Vrat Puja Vidhi: हर साल श्राद्ध पक्ष में महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस व्रत में देवी लक्ष्मी के साथ-साथ उनके वाहन हाथी की पूजा भी की जाती है, इसलिए इसे हाथी पूजन भी कहते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hathi Pujan 2026: &lt;/strong&gt;श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इस दिन हाथी पर बैठी देवी लक्ष्मी की पूजा की परंपरा है। महिलाएं इस दिन देवी लक्ष्मी के साथ-साथ हाथी की पूजा भी करती हैं, इसलिए इस व्रत का एक नाम हाथी पूजन भी है। इस बार महालक्ष्मी व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को किया जाएगा। मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। आगे जानिए महालक्ष्मी व्रत में हाथी पूजा कैसे करें, महत्व व अन्य बातें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हाथी पूजन 2026 के शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तकदोपहर 12:15 बजे से 1:44 बजे तकदोपहर 3:12 बजे से शाम 4:40 बजे तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mahalakshmi Vrat 2026: कब करें महालक्ष्मी व्रत, 3 या 4 अक्टूबर? जानें मंत्र-मुहूर्त, आरती सहित पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महालक्ष्मी व्रत में कैसे करें हाथी की पूजा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- महालक्ष्मी व्रत में पहले देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके बाद हाथी की पूजा का विधान है। हाथी पूजा के लिए बाजार से मिट्टी से बनी हाथी की प्रतिमा लेकर आएं।- हाथी को कुंकुम से तिलक करें, चावल लगाएं और अबीर-गुलाल आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं। फूलों की माला भी अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं।- इस व्रत में हाथी को हल्दी लगी हुई दूर्वा चढ़ाने का विशेष महत्व है। हाथी पूजन के लिए घर पर ही बेसन से हार, बाजूबंद व अन्य आभूषण बनाए जाते हैं।- इन्हें भी हाथी को अर्पित करें। इसके बाद 16 दीपक जलाकर देवी लक्ष्मी और हाथी की आरती करें। बाद हाथी की प्रतिमा को पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat 2026 Date: 3 या 4 अक्टूबर, कब करें जीवित्पुत्रिका व्रत? जानें पूजा विधि, मुहूर्त, कथा और महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महालक्ष्मी व्रत में क्यों करते हैं हाथी की पूजा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी के साथ कई दिव्य वस्तुएं और जीव प्रकट हुए थे। इनमें ऐरावत हाथी का भी उल्लेख मिलता है। ऐरावत को भगवान इंद्र का दिव्य हाथी माना जाता है। इसी वजह से हाथी को देवी लक्ष्मी और समृद्धि से जुड़ा हुआ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में हाथी को शक्ति, स्थिरता और संपन्नता का प्रतीक भी माना गया है। महालक्ष्मी व्रत के दौरान हाथी की पूजा करके लोग घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि गजराज का पूजन करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        <item>
            <title><![CDATA[Jitiya Vrat Katha: जीमूतवाहन ने कैसे बचाए नागपुत्र के प्राण? पढ़ें जीवित्पुत्रिका व्रत की ये रोचक कथा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jitiya-vrat-katha-jimutvahan-ki-kahani-jivitputrika-vrat-kyo-karte-hai-articleshow-l4nvpmp</link>
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            <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 07:42:08 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jivitputrika Vrat Katha: हिंदू धर्म में संतान की लंबी उम्र के लिए अनेक व्रत बताए गए हैं, जीवित्पुत्रिका व्रत भी इनमें से एक है। इसे जितिया और जिऊतिया के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर भारत में इस व्रत का विशेष महत्व है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kjc20qvnncg39a1e299fnvw4,imgname-amalaki-ekadashi-2026-05-1772078784373.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat Story:&lt;/strong&gt; इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को किया जाएगा। संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाने वाला यह व्रत माताओं के लिए खास माना जाता है। जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा के साथ उनकी कथा सुनने की भी परंपरा है। इस कथा में राजा जीमूतवाहन के त्याग और एक मां के बेटे को बचाने की कहानी बताई गई है। मान्यता है कि इसी घटना से जीवित्पुत्रिका व्रत की परंपरा जुड़ी है। आइए जानते हैं जितिया व्रत की पूरी कथा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat 2026 Otghan: ओठगन कब होगा, क्या खाएं और कब से शुरू होगा निर्जला व्रत? जानें जरूरी नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय राजा जीमूतवाहन अपने मित्र मित्रावसु के साथ समुद्र के किनारे स्थित वन में घूम रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक युवक दिखाई दिया, जिसके पीछे एक बुजुर्ग महिला रोते हुए आ रही थी। महिला अपने बेटे की जिंदगी को लेकर बेहद परेशान थी।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jitiya Vrat 2026 Date: 3 अक्टूबर को कब करें जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें पूजा विधि, मुहूर्त, कथा और महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जीमूतवाहन ने युवक से उसकी परेशानी पूछी। तब युवक ने बताया कि उसका नाम शंखचूड़ है और वह नागकुल से है। उस दिन उसे गरुड़ के लिए भोजन बनने के लिए समुद्र किनारे स्थित एक शिला पर जाना था।नागों और गरुड़ के बीच पुरानी दुश्मनी थी। इस वजह से नागराज वासुकि ने गरुड़ से एक समझौता किया था। इसके तहत रोज एक नाग को गरुड़ के भोजन के लिए भेजा जाता था। उस दिन शंखचूड़ की बारी थी। इसी कारण उसकी मां विलाप कर रही थी।शंखचूड़ की बात सुनकर जीमूतवाहन का मन द्रवित हो गया। उन्होंने उसकी जान बचाने का फैसला किया। जीमूतवाहन ने शंखचूड़ से कहा कि वह अपनी जगह खुद गरुड़ का सामना करेंगे और उसे अपनी मां के पास रहने के लिए कहा।इसके बाद शंखचूड़ के वहां से जाने पर जीमूतवाहन उस शिला पर जाकर बैठ गए। कुछ समय बाद गरुड़ वहां पहुंचे और जीमूतवाहन को नाग समझकर अपने साथ ले गए। गरुड़ ने जब उन्हें घायल किया, तब भी जीमूतवाहन के चेहरे पर डर की जगह शांति बनी रही।गरुड़ को कुछ संदेह हुआ। तभी शंखचूड़ भी वहां पहुंच गए और उन्होंने गरुड़ को बताया कि असली नाग वही हैं और जीमूतवाहन ने उनकी जगह खुद को बलिदान के लिए प्रस्तुत किया है।यह जानकर गरुड़ को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें जीमूतवाहन के त्याग और दूसरों की रक्षा के लिए अपने प्राण देने की भावना से बहुत प्रभावित हुए। गरुड़ ने इसके बाद नागों को अपना भोजन न बनाने का संकल्प लिया।कथा के अनुसार, जीमूतवाहन की पत्नी मलयवती की भक्ति और माता गौरी की कृपा से उन्हें नया जीवन मिला। इसके बाद गरुड़ ने अमृत की सहायता से पहले मारे जा चुके नागों को भी जीवित कर दिया। इस तरह नागों को गरुड़ के भय से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई।मान्यता है कि जीमूतवाहन के इसी त्याग और संतान की रक्षा से जुड़ी कथा के कारण जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत में उनकी पूजा की जाती है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख और सुरक्षा की कामना से रखती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Pitru Paksha 2026: क्या महिलाएं कर सकती हैं पिंडदान-तर्पण? धर्म शास्त्रों से जानें इसका जवाब]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pitru-paksha-2026-mahila-pind-daan-tarpan-kar-sakti-hai-dharm-granth-kya-kehte-hain-articleshow-m5eisfn</link>
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            <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 15:20:49 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Pitru Paksha Pind Daan: कईं बार मन में सवाल आता है कि क्या महिलाएं अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण आदि कर सकती हैं। धर्म ग्रंथों में इससे संबंधित बातें भी पढ़ने को मिलती हैं। जानें क्या लिखा है पुराणों में?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m430f47t1815m6pv79nrvtgf,imgname-pitru-paksha-2026-1791102521594.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Can Women Perform Pind Daan: &lt;/strong&gt;इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो चुका है जो 10 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान लोग अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान आदि करती हैं। आमतौर पर यह जिम्मेदारी परिवार के पुरुष सदस्य, खासतौर पर पुत्र, निभाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर परिवार में पुत्र न हो तो क्या बेटी, पत्नी या बहू पिंडदान और तर्पण कर सकती है? धर्म ग्रंथों और परंपराओं में इससे जुड़ी कईं बातें पढ़ने और सुनने को मिलती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महिलाएं कब कर सकती हैं पिंडदान?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गरुड़ पुराण में यह बताया गया है कि पुत्र के अभाव में परिवार के अन्य सदस्य श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। प्रचलित रूप से श्लोक है&mdash;&lt;strong&gt;पुत्राभावे वधू कुर्यात्, भार्याभावे च सोदरः।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;शिष्यो वा ब्राह्मणः सपिण्डो वा समाचरेत्॥&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अर्थ-&lt;/strong&gt; पुत्र के न होने पर पत्नी या बहू श्राद्ध कर्म कर सकती है। इनके अभाव में भाई, शिष्य, ब्राह्मण या अन्य सपिंड रिश्तेदार श्राद्ध कर सकते हैं। इसी आधार पर धार्मिक परंपरा में यह मत मिलता है कि परिवार में पुरुष उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में महिला भी पितृ कर्म कर सकती है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: एक्सीडेंट, आत्महत्या और हथियार से मारे गए परिजनों का श्राद्ध कब करें? जानें सही डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;माता सीता का भी मिलता है उदाहरण&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महिलाओं द्वारा पिंडदान किए जाने के पक्ष में माता सीता का उदाहरण भी दिया जाता है। धार्मिक परंपरा में प्रचलित कथा के अनुसार, गया में राजा दशरथ के श्राद्ध के दौरान श्रीराम और लक्ष्मण की अनुपस्थिति में सीता ने पिंडदान किया था। इसी प्रसंग को महिलाओं के पितृ कर्म करने के उदाहरण के तौर पर बताया जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: जेब पर भारी नहीं पड़ेगा श्राद्ध, कम खर्च में ऐसे करें पितरों का तर्पण&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस बात का रखें ध्यान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सभी परंपराओं और धर्मशास्त्रीय मतों में नियम एक जैसे नहीं हैं। इसलिए अगर परिवार में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं है और महिला पिंडदान या तर्पण करना चाहती है, तो अपने कुल की परंपरा और स्थानीय पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार विधि पूरी करना बेहतर माना जाता है। इससे संकल्प, गोत्र और श्राद्ध की सही विधि को लेकर भी स्पष्टता रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pitru-paksha-2026-mahila-pind-daan-tarpan-kar-sakti-hai-dharm-granth-kya-kehte-hain-articleshow-m5eisfn"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Pitru Paksha 2026: जेब पर भारी नहीं पड़ेगा श्राद्ध, कम खर्च में ऐसे करें पितरों का तर्पण]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pitru-paksha-2026-kam-kharch-mein-shradh-tarpan-kaise-karen-articleshow-pbp857w</link>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 10:50:14 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;How to Perform Shradh: इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो चुका है जो 10 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान लोग अपने मृत परिजनों का श्राद्ध करते हैं ताकि उनकी आत्मा को मोक्ष प्राप्त हो।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3p5q002qh0tbz5ptpyh7zyx,imgname-traditions-of-shraddh-05-1790671814658.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha Upay:&lt;/strong&gt; पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। कई लोग मानते हैं कि श्राद्ध के लिए बहुत सारी सामग्री और ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध में दिखावे से ज्यादा श्रद्धा और भावना को महत्व दिया जाता है। ऐसे में अगर आपका बजट कम है तो भी आप सीमित सामग्री के साथ घर पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानें कम से कम पैसों में कैसे करें पितरों को खुश&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कम सामान में ऐसे करें श्राद्ध&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;श्राद्ध के लिए बहुत ज्यादा सामग्री जुटाने की जरूरत नहीं होती। जल, काले तिल, कुश, चावल और फूल जैसी सामान्य चीजों से तर्पण किया जा सकता है। घर में उपलब्ध साफ बर्तन का इस्तेमाल भी पूजा के लिए किया जा सकता है। इससे अलग से पूजा का सामान खरीदने का खर्च कम हो सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: श्राद्ध में ब्राह्मण भोज से लेकर कौए को खाना खिलाने तक, जानें 5 परंपराओं का कारण&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे करें पितरों का तर्पण?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पितरों का ध्यान करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें। एक बड़े बर्तन में जल लेकर उसमें काले तिल और कुश डालकर पितरों के लिए अंगूठे के माध्यम से जल छोड़ें। ऐसा करते समय अपने पितरों को याद करें और ऊं पितृदेवताभ्यो नम: मंत्र का जाप करें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: मृत्यु और दाह संस्कार की तिथि अलग हो तो कब करें श्राद्ध? दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पिंड बनाने के लिए चावल का करें इस्तेमाल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप कम खर्च में श्राद्ध करना चाहते हैं तो चावल से पिंड बनाए जा सकते हैं। इसके लिए पके हुए चावल में थोड़ा सा काला तिल मिलाकर पिंड तैयार किए जा सकते हैं। इन्हें श्रद्धा के साथ पितरों को अर्पित किया जाता है। पिंडदान की स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यता के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भोजन में रखें सादगी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;श्राद्ध के लिए बहुत तरह के पकवान बनाने की जरूरत नहीं है। घर में उपलब्ध आटा, चावल, दाल, सब्जी और मौसमी फल से सात्विक भोजन तैयार किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भोजन सात्विक और श्रद्धा से बनाया जाना महत्वपूर्ण माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्षमता के अनुसार करें दान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;श्राद्ध के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, कपड़े अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। इसके लिए महंगी चीजें खरीदना जरूरी नहीं है। अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार छोटा दान भी किया जा सकता है। अगर इतना भी नहीं कर सकते तो पितरों की शांति के लिए गाय को चारा भी खिला सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Mahalakshmi Vrat Upay: देवी लक्ष्मी के 10 उपाय, 1 भी कर लेंगे तो दूर हो सकती है पैसों की तंगी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahalakshmi-vrat-upay-2026-10-upay-dhan-samriddhi-hathi-pujan-par-kya-upay-kare-articleshow-qlryh99</link>
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            <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 09:58:28 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahalakshmi Vrat Upay: इस बार महालक्ष्मी व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को किया जाएदा। इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन कुछ आसान उपाय करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3p3rrvmv3tkr7qkjk3z4jn6,imgname---------1790669775731.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahalakshmi Vrat Upay In Hindi:&lt;/strong&gt; धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर आश्विन कृष्ण अष्टमी तक चलता है। 16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत के अंतिम दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन हाथी पर बैठी देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, इसलिए इसे हाथी पूजन भी कहते हैं। इस दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो धन लाभ के साथ-साथ और भी फायदे हो सकते हैं&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1. घी का दीपक जलाएं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महालक्ष्मी व्रत के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान गाय के घी का दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में पॉजिटिव माहौल बना रहता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mahalakshmi Vrat Katha: हाथी अष्टमी पर सुनें महालक्ष्मी व्रत की ये रोचक कथा, तभी मिलेगा व्रत का फल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;2. मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस दिन देवी लक्ष्मी को गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाने की परंपरा है। खीर में थोड़ा केसर भी डाल सकते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hathi Pujan Kab Hai: महालक्ष्मी व्रत में हाथी की पूजा कैसे करें, क्या-क्या चढ़ाएं? जानें मुहूर्त-पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;3. लक्ष्मी मंत्र का जाप करें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मां लक्ष्मी की पूजा के साथ उनके मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। इसके लिए कमल गट्टे की माला का इस्तेमाल कर सकते हैं।ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:ऊं लक्ष्मी नम:ऊं ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:ऊं लक्ष्मी नारायणाय नम:&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;4. लाल वस्त्र और सुहाग सामग्री चढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मां लक्ष्मी को लाल वस्त्र और सुहाग से जुड़ी सामग्री अर्पित करें। पूजा के बाद इसे किसी सुहागिन महिला को दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे परेशानियां दूर होने की कामना की जाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;5. घर में महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महालक्ष्मी व्रत के दिन घर में महालक्ष्मी यंत्र स्थापित कर सकते हैं। इसके बाद नियमित रूप से इसकी पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे आर्थिक समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;6. तिजोरी में रखें चांदी की चरण पादुका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;देवी लक्ष्मी की चांदी से बनी चरण पादुका को घर की तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रखने की मान्यता है। इसे रखने के बाद नियमित रूप से पूजा भी कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;7. लक्ष्मी स्तुति का पाठ करें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनकर मां लक्ष्मी के चित्र के सामने बैठें और लक्ष्मी स्तुति का पाठ करें। अगर खुद पाठ करना संभव न हो तो किसी योग्य पंडित से इसका पाठ कराया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;8. अन्न का दान करें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महालक्ष्मी व्रत के दिन किसी लक्ष्मी मंदिर के अन्नक्षेत्र में अपनी क्षमता के अनुसार गेहूं, चावल, दाल या अन्य अनाज का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता में अन्नदान को पुण्यकारी माना गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;9. 11 दीपकों से आरती करें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महालक्ष्मी व्रत के समापन पर 11 शुद्ध घी के दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की आरती करें। इसके बाद अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा से की गई पूजा से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;10. हाथी को चारा खिलाएं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस व्रत को हाथी पूजन और हाथी अष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन हाथी को हरा चारा खिलाने का भी विशेष महत्व है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Pitru Paksha 2026: एक्सीडेंट, आत्महत्या और हथियार से मारे गए परिजनों का श्राद्ध कब करें? जानें सही डेट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pitru-paksha-2026-akal-mrityu-shraddha-chaturdashi-tithi-kab-hai-articleshow-scmfl9x</link>
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            <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 13:39:05 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Chaturdashi Shraddha 2026: इन दिनों श्राद्ध पक्ष चल रहा है जो 10 अक्टूबर, रविवार तक रहेगा। धर्म ग्रंथों में श्राद्ध पक्ष की हर तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। जानें पितृ पक्ष में उन परिजनों का श्राद्ध कब करें जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chaturdashi Shraddha Kab Hai:&lt;/strong&gt; पितृ पक्ष में हर दिन अलग-अलग तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाता है। सामान्य तौर पर जिस तिथि को किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि पर उसका श्राद्ध करने की परंपरा है। लेकिन अगर किसी परिजन की अकाल मृत्यु हुई हो जैसे एक्सीडेंट, आत्महत्या, हथियार से हमला, हिंसा या अन्य घटना में, तो उनके लिए पितृ पक्ष में विशेष तिथि बताई गई है। जानें कौन-सी है वो तिथि&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चतुर्दशी पर करें अकाल मृत्यु श्राद्ध&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मान्यता के अनुसार, जिन परिजनों की मृत्यु हथियार, एक्सीडेंट, आत्महत्या, हत्या, जहर, आग, पानी में डूबने या किसी अन्य असामान्य परिस्थिति में हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर किया जाता है। धर्मग्रंथों में अकाल या असामयिक मृत्यु के कुछ अन्य मामलों को भी इस तिथि से जोड़ा गया है। इसे शास्त्रघात मृतक श्राद्ध भी कहा जाता है। इस बार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध 9 अक्टूबर, शुक्रवार को किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Matru Navmi 2026: कब है मातृ नवमी, इस दिन किसका श्राद्ध करें? जानें 5 खास उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सामान्य मृत्यु वालों का श्राद्ध कब?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जिन लोगों की मृत्यु चतुर्दशी तिथि पर सामान्य परिस्थितियों में हुई है, उनका श्राद्ध इस तिथि पर भूलकर भी न करें। उनका श्राद्ध सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर करना चाहिए। महाभारत के अनुसार सामान्य परिस्थिति में चतुर्दशी पर मृत्यु को प्राप्त परिजन का श्राद्ध यदि उसी तिथि पर किया जाए तो घर-परिवार में अशांति बनी रहती है और तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: जीते-जी अपना श्राद्ध, सच या झूठ! जानें कौन कर सकता है स्वयं का पिंडदान?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मृत्यु की तिथि पता न हो तो क्या करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर किसी परिजन की अकाल मृत्यु हुई है और उसकी मृत्यु तिथि पता न हो तो भी चतुर्दशी तिथि पर किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का फल उन्हें जरूर मिलता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में बताया गया है। अगर किसी कारण वश आप श्राद्ध करने में असमर्थ हैं तो दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर श्रद्धा पूर्वक पितरों का स्मरण करने से भी आप पर पितरों की कृपा बनी रहेगी। समर्थ होने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध नहीं करता तो पितृ उससे नाराज हो जाते हैं।&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Indira Ekadashi 2026: 5 या 6 अक्टूबर, कब करें इंदिरा एकादशी व्रत? जानें मुहूर्त, मंत्र, पूजा विधि और आरती]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/indira-ekadashi-2026-kab-hai-5-ya-6-october-vrat-puja-vidhi-muhurat-mantra-significance-articleshow-v90lzr2</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/indira-ekadashi-2026-kab-hai-5-ya-6-october-vrat-puja-vidhi-muhurat-mantra-significance-articleshow-v90lzr2</guid>
            <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 10:58:30 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Indira Ekadashi 2026: श्राद्ध पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है। इसे इंदिरा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजा करने से हमारे पितृ प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ky9v1wcb1hz6s331s48yzdqa,imgname-devshayni-ekadashi-upay-1784889274763.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Indira Ekadashi 2026 Kab Hai: &lt;/strong&gt;हिंदू पंचांग में सालभर में 24 एकादशी आती हैं, लेकिन पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पितरों को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस एकादशी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। आइए जानते हैं 2026 में इंदिरा एकादशी कब है और इस दिन व्रत-पूजा किस तरह करनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इंदिरा एकादशी 2026 कब है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 5 अक्टूबर, सोमवार की रात 2:07 बजे से शुरू होगी और 6 अक्टूबर, मंगलवार की रात 12:34 बजे तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 6 अक्टूबर को होगा, इसलिए व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। यानी इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: एक्सीडेंट, आत्महत्या और हथियार से मारे गए परिजनों का श्राद्ध कब करें? जानें सही डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इंदिरा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- सुबह 09:19 से 10:47 तक- सुबह 01:43 से 03:11 तक- शाम 04:39 से 06:06 तक- शाम 06:06 से 07:39 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;मातृ नवमी 2026: सिर्फ मां ही नहीं, इन 4 महिलाओं का भी होता है श्राद्ध? जानें क्या है नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इंदिरा एकादशी व्रत-पूजा विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- इंदिरा एकादशी के नियम व्रत से एक दिन पहले यानी 5 अक्टूबर से ही शुरू कर दें। शाम को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।- 6 अक्टूबर की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत करने का संकल्प लें।- पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें।- भगवान को तिलक लगाकर फूलों की माला पहनाएं और घी का दीपक जलाएं।इसके बाद मौली, जनेऊ, अक्षत, अबीर, गुलाल आदि चीजें अर्पित करें।- अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान विष्णु को भोग लगाएं। पूजा पूरी होने के बाद आरती करें और इंदिरा एकादशी की कथा सुनें।- रात में सोएं नहीं बल्कि भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन या नाम जप करें। अगले दिन व्रत का पारण करने के बाद ही भोजन ग्रहण करें।- मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इंदिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों को शांति मिलती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भगवान विष्णु की आरती लिरिक्स हिंदी में&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,क्षण में दूर करे॥ ऊं जय जगदीश हरे॥माता-पिता तुम मेरे, स्वामी तुम मेरे।तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तुम करुणा के सागर, तुम सब के स्वामी।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ऊं जय जगदीश हरे॥दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ऊं जय जगदीश हरे॥विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥ ऊं जय जगदीश हरे॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/indira-ekadashi-2026-kab-hai-5-ya-6-october-vrat-puja-vidhi-muhurat-mantra-significance-articleshow-v90lzr2"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Happy Jitiya Vrat 2026 Wishes in Hindi: संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ भेजें जितिया व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं]]></title>
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            <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 19:42:52 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Happy Jitiya Vrat 2026 Wishes: जितिया व्रत 2026 पर अपनों को भेजें दिल छू लेने वाली हैप्पी जितिया व्रत 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं। यहां से भेजें सबसे बेस्ट हैप्पी जीवित्पुत्रिका व्रत शुभकामना संदेश।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3yf6ny42rqwpcv7547ac9xh,imgname-happy-jitiya-vrat-2026-wishes-1790950201284.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Happy Jitiya Vrat 2026 Wishes in Hindi: &lt;/strong&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जितिया व्रत इस साल 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है। जितिया व्रत अपन संतान के लिए माताओं के प्रेम, ममता, त्याग और आस्था का पावन पर्व है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। संतान की सुख-समृद्धि की कामना के साथ, अगर आप भी अपने परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को हैप्पी जितिया व्रत 2026, हैप्पी जीवितपुत्रिका व्रत और जीवित्पुत्रिका व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं भेजना चाहते हैं, तो यहां आपको मिलेंगे सबसे बेस्ट जितिया व्रत शुभकामना संदेश। इन खूबसूरत जितिया व्रत 2026 शुभकामना संदेश को आप व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Happy Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की पावन बेला पर,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;मां की ममता और आशीर्वाद बना रहे हर पल।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संतानों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आप सभी को हैप्पी जितिया व्रत 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;माताओं के त्याग और प्रेम का यह पावन त्योहार,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;संतानों के जीवन में लाए खुशियों की बहार।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मां जितवाहन का आशीर्वाद सदा बना रहे,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मां के व्रत की शक्ति से हर संकट दूर हो,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;संतानों का जीवन खुशियों से भरपूर हो।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;घर-आंगन में सदा सुख-शांति का वास रहे,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जितिया व्रत 2026 की शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;ममता, त्याग और आस्था का यह पावन पर्व,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर मां के जीवन में लाए खुशियों का नवसवेरा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संतान सदा स्वस्थ, दीर्घायु और प्रसन्न रहे,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;जितिया व्रत का पावन त्योहार आया है,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;मां के आंचल में खुशियों का संसार लाया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हर संतान की उम्र लंबी और जीवन सुखमय हो,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आपको जीवित्पुत्रिका व्रत की ढेरों शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;आस्था के दीप जलें, खुशियों के फूल खिलें,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;मां की ममता से हर जीवन के दुख दूर हों।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संतानों पर सदा ईश्वर की कृपा बनी रहे,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जीवित्पुत्रिका व्रत 2026।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मां के निर्जला व्रत की शक्ति अपार हो,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर संतान का जीवन सुखमय और खुशहाल हो।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;घर में प्रेम, शांति और समृद्धि बनी रहे,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जितिया व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;त्याग और तपस्या का यह पावन त्योहार,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;संतानों के जीवन में लाए खुशियों की बहार।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हर मां की मनोकामना पूरी हो बार-बार,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जितिया व्रत 2026 की शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;जितिया की पावन पूजा से घर महक उठे,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;मां के आशीर्वाद से हर सपना साकार हो।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संतानों की लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य मिले,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की हार्दिक बधाई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मां की श्रद्धा, ममता और तपस्या रंग लाए,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर संतान के जीवन में खुशियों के दीप जलाए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ईश्वर का आशीर्वाद हर परिवार पर बना रहे,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जिउतिया व्रत 2026।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मां की ममता और व्रत की शक्ति बनी रहे,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर संतान की उम्र लंबी और जीवन सुखमय रहे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;आस्था और प्रेम से सजा यह पावन त्योहार,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;संतानों के जीवन में लाए खुशियों की बहार।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जितिया व्रत 2026 की शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मां जितवाहन का आशीर्वाद सदा बना रहे,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर संतान स्वस्थ, दीर्घायु और खुशहाल रहे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;आप सभी को जितिया व्रत की हार्दिक बधाई।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;त्याग, तपस्या और ममता का यह पावन पर्व,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर मां की मनोकामना पूरी करे ईश्वर।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जीवित्पुत्रिका व्रत 2026।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; Jitiya Vrat 2026 Otghan: ओठगन कब होगा, क्या खाएं और कब से शुरू होगा निर्जला व्रत? जानें जरूरी नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;जितिया के पावन पर्व पर खुशियों के फूल खिलें,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;संतानों के जीवन में सुख-समृद्धि के रंग भरें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मां की श्रद्धा से हर संकट टल जाए,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;संतानों के जीवन में खुशियों का उजाला छा जाए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जिउतिया व्रत 2026।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;ममता की शक्ति और आस्था का यह त्योहार,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर संतान को मिले लंबी उम्र और सुख अपार।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जितिया व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;व्रत की पवित्रता से घर-आंगन खुशहाल रहे,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर संतान पर ईश्वर की कृपा बनी रहे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जीवित्पुत्रिका व्रत।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;जितिया व्रत 2026: पहली बार रख रही हैं जितिया? जानें नहाय-खाय, ओठगन, पूजा और पारण का सही तरीका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;जितिया का यह पावन पर्व प्रेम और विश्वास बढ़ाए,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;हर मां की गोद खुशियों से भर जाए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जीवित्पुत्रिका व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;मां की ममता का आशीर्वाद सदा संतानों पर रहे,&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;उनका जीवन स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु रहे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हैप्पी जितिया व्रत 2026।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Pitru Paksha 2026: श्राद्ध में ब्राह्मण भोज से लेकर कौए को खाना खिलाने तक, जानें 5 परंपराओं का कारण]]></title>
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            <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 15:15:40 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Pitru Paksha Traditions: हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष को बहुत ही पवित्र समय माना गया है। इन दिनों में पितरों की आत्मा की शांति के लिए कईं तरह के उपाय किए जाते हैं। श्राद्ध से जुड़ी कईं परंपराएं भी हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m3p5m1cshe3maqg7cccsh9m9,imgname-traditions-of-shraddh-01-1790671717784.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Pitru Paksha Traditions: हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष को बहुत ही पवित्र समय माना गया है। इन दिनों में पितरों की आत्मा की शांति के लिए कईं तरह के उपाय किए जाते हैं। श्राद्ध से जुड़ी कईं परंपराएं भी हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Shradh Traditions: श्राद्ध पक्ष वैसे तो 16 दिनों का होता है लेकिन इस बार तिथि क्षय होने से ये 15 दिनों का ही रहेगा। इसकी शुरूआत 26 सितंबर से हो चुकी है, जो 20 अक्टूबर तक रहेगा। श्राद्ध के दौरान लोग अपने पितरों का शांति के लिए पिंडदान और तर्पण आदि उपाय करते हैं। श्राद्ध पक्ष से जुड़ी कईं परंपराएं भी हैं जिनके पीछे कोई न कोई कारण छिपा है। आगे जानिए ऐसी ही 5 परंपराओं के बारे में&hellip;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध में ब्राह्मणों को भोजन कराना जरूरी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि ब्राह्मणों के साथ वायु रूप में पितृ भी भोजन ग्रहण करते हैं। इसलिए श्रद्धा और सम्मान के साथ भोजन कराने पर पितृ प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। भोजन के बाद ब्राह्मणों को आदरपूर्वक विदा करने की भी परंपरा है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;श्राद्ध में खीर बनाने की परंपरा पितरों के सम्मान और तृप्ति से जुड़ी मानी जाती है। जैसे अतिथियों को मिठाई के साथ भोजन कराया जाता है, उसी भावना से पितरों के लिए खीर बनाई जाती है। एक मान्यता यह भी है कि वर्षा ऋतु के बाद खीर-पूड़ी जैसे पौष्टिक भोजन शरीर को ऊर्जा देते थे, इसलिए यह परंपरा शुरू हुई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: मृत्यु और दाह संस्कार की तिथि अलग हो तो कब करें श्राद्ध? दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों में कौए को पितरों और यम का प्रतीक माना गया है, इसलिए उन्हें भोजन कराया जाता है। गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है, जबकि कुत्ता यमराज का पशु माना गया है। इसी कारण श्राद्ध के भोजन का एक अंश इन जीवों को देने की परंपरा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;October 2026 Calendar: शारदीय नवरात्रि कब से? जानें दशहरा, करवा चौथ सहित पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;श्राद्ध कर्म के समय अनामिका उंगली में कुशा (एक प्रकार की विशेष घास) की अंगूठी धारण की जाती है। कुशा को पवित्र माना गया है और मान्यता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। कुशा की अंगूठी पहनने का अर्थ है कि व्यक्ति पवित्र भाव से पितरों के लिए श्राद्ध कर रहा है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;श्राद्ध में तर्पण करते समय अंगूठे से जल देने की परंपरा है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अंगूठे के पास का स्थान पितृ तीर्थ कहलाता है। मान्यता है कि इस स्थान से दिया गया जल पितरों तक पहुंचता है और उन्हें तृप्ति प्रदान करता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Karwa Chauth 2026: 28 या 29 अक्टूबर, कब करें करवा चौथ व्रत? जानें चंद्रोदय का समय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/karwa-chauth-2026-date-28-or-29-october-chandroday-time-shubh-muhurat-karva-chauth-kab-hai-articleshow-xd9qi7p</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/karwa-chauth-2026-date-28-or-29-october-chandroday-time-shubh-muhurat-karva-chauth-kab-hai-articleshow-xd9qi7p</guid>
            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 13:35:01 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Karwa Chauth Kab Hai: कार्तिक मास में हर साल करवा चौथ का व्रत किया जाता है। महिलाओं में इस व्रत का बहुत ही क्रेज रहता है। इस व्रत में महिलाएं कुछ भी खाती-पीती नहीं है और शाम को चंद्रोदय होने पर अपना व्रत पूर्ण करती हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01k76perf2ggdkgc4m8mdsec0n,imgname-karwa-chauth-puja-04-1760087728610.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Karwa Chauth 2026 Date:&lt;/strong&gt; सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को करवा माता, भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। इस बार करवा चौथ की तारीख को कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानिए करवा चौथ 2026 की सही डेट क्या है&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है करवा चौथ 2026 की सही डेट?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर, बुधवार की रात 01 बजकर 06 बजे से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 29 अक्टूबर, गुरुवार की रात 10 बजकर 09 बजे तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 29 अक्टूबर को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shukra Vakri 2026: शुक्र चलेगा टेढ़ी चाल, 4 राशियों का बिगड़ेगा बजट, नौकरी में डिमोशन-लव लाइफ होगी डिस्टर्ब&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;करवा चौथ 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;करवा चौथ पर चंद्रोदय से पहले भगवान श्रीगणेश और करवा माता की पूजा की जाती है। 29 अक्टूबर को पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 51 मिनिट से 07 बजकर 07 मिनिट तक रहेगा। यानी महिलाओं को पूजा के लिए 1 घंटे 16 मिनिट का समय मिलेगा। इस दिन सूर्य और बुध एक ही राशि में होने से बुधादित्य नाम का राजयोग भी बनेगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ketu Nakshatra Gochar 2026: 3 राशियां सावधान! केतु के नक्षत्र बदलने से शुरू होंगे बुरे दिन-पैसा, पद, प्रमोशन सब जाएगा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब उदय होगा करवा चौथ का चांद?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;करवा चौथ के दिन व्रत खोलने के लिए चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर को चंद्रोदय रात करीब 08 बजकर 38 मिनिट पर होगा। इसके बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोल सकती हैं। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में आंशिक अंतर देखने को मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Pitru Paksha 2026: जीते-जी अपना श्राद्ध, सच या झूठ! जानें कौन कर सकता है स्वयं का पिंडदान?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jeevit-vyakti-pind-daan-atma-shraddh-hindu-dharm-parampara-articleshow-zbczqpq</link>
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            <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 16:28:27 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Pind Daan in Hinduism: पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने मृत परिजनों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं हिंदू धर्म में जीवित व्यक्ति के पिंडदान की भी परंपरा है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hindu Shraddha Rituals:&lt;/strong&gt; आमतौर पर पिंडदान की परंपरा मृत व्यक्ति और पितरों की आत्मा की शांति के लिए की जाती है। लेकिन हिंदू धर्म की कुछ विशेष परंपराओं में व्यक्ति के जीवित रहते हुए उसके द्वारा स्वयं का पिंडदान यानी आत्म-पिंडदान करने के बारे में भी बताया गया है। हालांकि, यह सामान्य पिंडदान से अलग होता है और इसे हर व्यक्ति के लिए जरूरी या सामान्य धार्मिक कर्म नहीं माना जाता। आगे जानिए व्यक्ति कब स्वयं का पिंडदान कर सकता है&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;संन्यासी करते हैं स्वयं का श्राद्ध&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक परंपराओं में संन्यास लेने की स्थिति में आत्मश्राद्ध का विशेष महत्व बताया गया है। जब कोई व्यक्ति गृहस्थ जीवन और सांसारिक जिम्मेदारियों का त्याग करके संन्यास की राह अपनाता है, तो कुछ संन्यास परंपराओं में दीक्षा से पहले उसका श्राद्ध और पिंडदान कराया जाता है। इसका भाव पुराने सांसारिक जीवन का त्याग करना माना जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: जेब पर भारी नहीं पड़ेगा श्राद्ध, कम खर्च में ऐसे करें पितरों का तर्पण&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जब मृत्यु के बाद श्राद्ध करने वाला कोई न हो&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कुछ परंपराओं में ऐसी स्थिति में भी आत्म-पिंडदान की मान्यता बताई गई है, जब व्यक्ति की कोई संतान या ऐसा उत्तराधिकारी न हो जो भविष्य में उसके लिए श्राद्ध और पिंडदान कर सके। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद होने वाले कर्मों को लेकर विशेष धार्मिक अनुष्ठान कर सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Final Rituals: परिवार में मौत के बाद पुरुष सिर क्यों मुंडवाते हैं? जानिए इसके पीछे की मान्यता&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गया में मिलती है विशेष परंपरा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बिहार के गया में पिंडदान की प्राचीन परंपरा है। यहां कुछ विशेष स्थानों पर जीवित व्यक्ति द्वारा स्वयं के निमित्त पिंडदान करने की परंपरा भी है। इसे सामान्य पितृ पिंडदान से अलग माना जाता है। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इसमें व्यक्ति अपने लिए पिंड अर्पित करता है और भगवान को साक्षी मानकर विशेष कर्मकांड करता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मृत्यु के बाद श्राद्ध होने की संभावना न हो&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर किसी व्यक्ति को ऐसा लगे कि उसकी मृत्यु के बाद उसके परिजन ठीक से श्राद्ध, पिंडदान नहीं कर पाएंगे तो भी व्यक्ति अपनी संतष्टि के लिए जीवित रहते अपना पिंडदान करने का अधिकारी है। इसके लिए भी विशेष नियम हमारे धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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