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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Sun, 13 Sep 2026 08:57:49 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[Ganpati Mantra: गणेश चतुर्थी पर अपनों को भेजें गणपति जी के 10 मंत्र, विघ्नहर्ता का मिलेगा आशीर्वाद]]></title>
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            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:35:10 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesha Mantra Chanting: &lt;/strong&gt;गणेश चतुर्थी पर प्रियजनों को भेजें भगवान गणेश के 10 सरल मंत्र। जानें हर गणपति मंत्र का खास महत्व और इसके पीछे की धार्मिक मान्यता।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश का भक्त विधि-विधान से घर में स्वागत करते हैं और साथ ही सुख-समृद्धि, बुद्धि और विघ्नों से मुक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का स्मरण और उनके मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है। इस गणेश चतुर्थी पर आप अपने प्रियजनों को भगवान गणेश के छोटे और सरल मंत्र भेजकर उन्हें इस खास दिन की शुभकामनाएं दे सकते हैं। जानें कुछ खास मंत्रों और उनके अर्थ के बारे में।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ऊं गं गणपतये नमः&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह भगवान गणेश के सबसे प्रसिद्ध और सरल मंत्रों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसका जाप भगवान गणेश का स्मरण करने और जीवन के विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना के रूप में किया जाता है। गणेश चतुर्थी पर यह मंत्र किसी वाट्सअप या इंस्टाग्राम के जरिए आप शेयर कर सकते हैं।&lt;/p&gt;View this post on Instagram&lt;p&gt;A post shared by SS VASTU &amp;amp; TIPS (@ssvastutips)&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वक्रतुण्ड महाकाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मंत्र: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस मंत्र में भगवान गणेश से सभी शुभ कार्यों को बिना किसी बाधा के पूरा करने की प्रार्थना की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए किसी नए काम की शुरुआत या शुभ अवसर पर इस मंत्र का स्मरण किया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ॐ एकदन्ताय विद्महे&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मंत्र: ऊं एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह गणेश गायत्री मंत्र के रूप में प्रसिद्ध है। इसमें एकदंत और वक्रतुण्ड भगवान गणेश का ध्यान करते हुए बुद्धि और सही दिशा की कामना की जाती है। बच्चों और विद्यार्थियों को यह मंत्र भेजकर ज्ञान और एकाग्रता की शुभकामना दी जा सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;और पढ़ें:&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; Ganesh Chaturthi Stories: गणेश चतुर्थी पर बच्चों को भेजें गणपति जी से जुड़ी ये 4 छोटी कहानियां, भक्ति के साथ मिलेगी सीख&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ऊं श्री गणेशाय नमः&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस मंत्र का जाप भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और समर्पण के भाव से किया जाता है। गणेश चतुर्थी पर इसे परिवार और दोस्तों को भेजकर उनके जीवन में मंगल और सुख की कामना की जा सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ॐ गणाधिपतये नमः&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भगवान गणेश का एक नाम है, जिसका अर्थ गणों के अधिपति या प्रमुख से जुड़ा है। इस मंत्र में भगवान गणेश को नमन किया जाता है। धार्मिक आस्था के अनुसार, गणपति का स्मरण शुभता और सकारात्मकता का भाव जगाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ॐ विघ्नेश्वराय नमः&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भगवान गणेश को विघ्नेश्वर भी कहा जाता है, अर्थात विघ्नों के ईश्वर। इस मंत्र के माध्यम से भक्त गणपति से जीवन की बाधाओं को दूर करने और शुभ कार्यों में सफलता प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ॐ सिद्धिविनायकाय नमः&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सिद्धिविनायक भगवान गणेश का एक प्रसिद्ध नाम है। इस मंत्र में सिद्धि प्रदान करने वाले गणपति को नमन किया जाता है। गणेश चतुर्थी पर यह मंत्र भेजकर आप अपने प्रियजनों के जीवन में सफलता, उन्नति और शुभ फल की कामना कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ॐ लंबोदराय नमः&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लंबोदर भगवान गणेश के प्रमुख नामों में से एक है। इस मंत्र में लंबोदर स्वरूप वाले गणपति को नमन किया जाता है। गणेश जी के अलग-अलग नामों का स्मरण करना उनकी विभिन्न विशेषताओं को याद करने का भी एक माध्यम माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ॐ गजाननाय नमः&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गजानन का अर्थ है हाथी के समान मुख वाले। भगवान गणेश के इस नाम में उनके स्वरूप का वर्णन मिलता है। गणेश चतुर्थी पर इस छोटे मंत्र को भेजकर आप गणपति बप्पा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणपति अथर्वशीर्ष का मंत्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह गणपति अथर्वशीर्ष में भगवान गणेश के स्वरूप और महत्व का वर्णन करने वाले अंशों में से एक है। गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ गणेश उपासना में विशेष महत्व रखता है। इसे श्रद्धा के साथ पढ़ना या सुनना भगवान गणेश के ध्यान का एक पारंपरिक तरीका माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;और पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026 Upay: चाहिए मनचाहा लाइफ पार्टनर तो करें राशि अनुसार उपाय, शिव-पार्वती करेंगे इच्छा पूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Bhawana Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Ganpati Bappa Morya Meaning: गणपति बप्पा मोरया का क्या मतलब है? जानें इस जयघोष का इतिहास और महत्व]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganpati-bappa-morya-meaning-history-significance-ganesh-chaturthi-2026-articleshow-0h740w1</link>
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            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:24:55 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;What is the Meaning of Ganpati Bappa Morya: गणेश चतुर्थी 2026 इस बार 14 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस पूजा में गणपति बप्पा मोरया का जयघोष किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका मतलब क्या है? जानिए इस जयघोष के पीछे अनसुना इतिहास और इसका महत्व।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: &lt;/strong&gt;गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन से शुरू गणेशोत्सव पूरे 10 दिनों तक चलेगा।&lt;strong&gt; &lt;/strong&gt;गणेशोत्सव शुरू होते ही गली-मोहल्लों से लेकर बड़े पंडालों तक एक ही आवाज सुनाई देने लगती है- &ldquo;गणपति बप्पा मोरया!&rdquo; बप्पा की आरती हो या विसर्जन की विदाई, ढोल-ताशे बज रहे हों या भक्तों की टोली आगे बढ़ रही हो, यह जयघोष गणेश भक्ति की सबसे पहचान वाली आवाज बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि &ldquo;गणपति बप्पा मोरया&rdquo; का असल मतलब क्या है? &lsquo;मोरया&rsquo; आखिर किसके लिए कहा जाता है? अगर आपको लगता है कि &lsquo;मोरया&rsquo; गणपति का ही कोई दूसरा नाम है या इसका संबंध मौर्य वंश से है, तो कहानी कुछ अलग है। इसके पीछे महाराष्ट्र की पुरानी गणेश भक्ति, मोरगांव के मयूरेश्वर गणपति और संत मोरया गोसावी से जुड़ी परंपरा का उल्लेख मिलता है। जानिए पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जानिए &lsquo;गणपति बप्पा मोरया&rsquo; का मतलब&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lsquo;गणपति&rsquo; भगवान गणेश का नाम है। वहीं &lsquo;बप्पा&rsquo; प्यार और सम्मान से पिता या अपने प्रिय संरक्षक के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला संबोधन है। इसलिए &lsquo;गणपति बप्पा&rsquo; का भाव हुआ, हमारे पूजनीय गणपति, हमारे अपने बाप्पा। गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि किसी शुभ काम की शुरुआत से लेकर गणेशोत्सव और विसर्जन तक उनका नाम श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वहीं &lsquo;मोरया&rsquo; शब्द संत मोरया गोसावी से जुड़ी है। मोरया गोसावी को गणेश का अनन्य भक्त माना जाता है। उनकी साधना और मोरगांव के मयूरेश्वर से जुड़ी भक्ति-परंपरा ने उनके नाम को गणेश आराधना के साथ जोड़ दिया। समय के साथ &ldquo;गणपति बप्पा मोरया&rdquo; एक लोकप्रिय धार्मिक जयघोष बन गया। इसका भाव भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा जताने के साथ उनके महान भक्त मोरया गोसावी को भी स्मरण करना माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर गलती से दिख गया चौथ का चांद? तुरंत करें ये उपाय, नहीं लगेगा मिथ्या कलंक!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मोरगांव और मयूरेश्वर का क्या कनेक्शन है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पुणे जिले का मोरगांव अष्टविनायक यात्रा का पहला और आखिरी पड़ाव माना जाता है। यहां भगवान गणेश के मयूरेश्वर स्वरूप की पूजा होती है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के मुताबिक, अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत और समापन इसी मंदिर से होता है। &lsquo;मयूरेश्वर&rsquo; नाम के पीछे भी एक पौराणिक कथा है। मान्यता है कि गणेश ने मोर को अपना वाहन बनाकर दैत्य सिंधु का वध किया था, इसलिए यहां उन्हें मयूरेश्वर कहा गया। मोरगांव नाम को भी इस इलाके में कभी बड़ी संख्या में मोरों की मौजूदगी से जोड़ा जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;विसर्जन पर क्यों कहते हैं &lsquo;पुढच्या वर्षी लवकर या&rsquo;?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेश विसर्जन के समय जयघोष अक्सर इस तरह पूरा होता है- &ldquo;गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या।&rdquo; मराठी के इस वाक्य का अर्थ है- &ldquo;गणपति बप्पा, अगले वर्ष जल्दी आइए।&rdquo; यहां एक भावनात्मक बात छिपी है। भक्त गणपति को विदा जरूर करते हैं, लेकिन यह विदाई स्थायी नहीं मानी जाती। विसर्जन के बीच यही उम्मीद रहती है कि बप्पा अगले साल फिर घर आएंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: क्यों न करें गणेश प्रतिमा की पीठ के दर्शन, गलती से हो जाएं तो क्या करें?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;एक जयघोष में भगवान भी, भक्त भी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इसलिए &ldquo;गणपति बप्पा मोरया&rdquo; सिर्फ उत्साह में लगाया जाने वाला नारा नहीं है। इसके भीतर भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, &lsquo;बप्पा&rsquo; कहकर अपनापन और &lsquo;मोरया&rsquo; के जरिए गणेश भक्ति की एक पुरानी परंपरा, नों भाव दिखाई देते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[भगवान गणेश की परिक्रमा का रहस्य: माता-पिता की परिक्रमा करके कैसे जीती प्रतियोगिता?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-how-lord-ganesha-won-competition-by-circumambulating-parents-story-articleshow-0sk2dbp</link>
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            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 17:00:11 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;How Lord Ganesha Won Competition by Circumambulating His Parents: भगवान गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर प्रतियोगिता कैसे जीती? जानिए गणेश और कार्तिकेय की पौराणिक कथा, इसका रहस्य और इसके पीछे छिपे बुद्धि का संदेश।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Why Ganesha Circumambulated His Parents:&lt;/strong&gt; गणेश चतुर्थी 2026 इस साल 14 सितंबर को। इसी दिन से 10 दिवसीय गणेश उत्सव 2026 की शुरुआत होगी। भगवान गणेश की बुद्धिमत्ता से जुड़ी एक पौराणिक कथा आज भी लोगों को यह समझाती है कि हर चुनौती का जवाब सिर्फ ताकत और तेजी नहीं, बल्कि सही सोच भी हो सकती है। इसी कथा में गणेश जी ने अपने भाई कार्तिकेय से प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और माता-पिता भगवान शिव व माता पार्वती की परिक्रमा करके जीत हासिल की। जानिए गणेश चतुर्थी 2026 पर भगवान गणेश की परिक्रमा का रहस्य क्या था और उन्होंने कैसे माता-पिता की परिक्रमा करके प्रतियोगिता जीत ली थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कार्तिकेय निकल पड़े पृथ्वी की परिक्रमा पर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार गणेश और कार्तिकेय के बीच यह तय करने की बात सामने आई कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। इसके लिए उनके सामने पृथ्वी की परिक्रमा कर सबसे पहले लौटने की चुनौती रखी गई। प्रतियोगिता शुरू होते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर निकल पड़े। दूसरी ओर गणेश जी ने अपने वाहन मूषक और अपनी शारीरिक गति को देखा। वे जानते थे कि इस तरह की दौड़ में कार्तिकेय को मात देना आसान नहीं होगा। यहीं से कथा में उनकी बुद्धि और विवेक की भूमिका सामने आती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganpati Bappa Morya Meaning: गणपति बप्पा मोरया का क्या मतलब है? जानें इस जयघोष का इतिहास और महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश जी ने बदल दिया चुनौती का अर्थ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेश जी ने दौड़ लगाने के बजाय भगवान शिव और माता पार्वती के सामने जाकर उनकी परिक्रमा की। कई प्रचलित संस्करणों में यह परिक्रमा तीन बार बताई गई है, जबकि कुछ परंपराओं में संख्या अलग मिलती है। इसके बाद गणेश जी ने तर्क दिया कि माता-पिता ही संतान के लिए पूरा संसार हैं। इसलिए माता-पिता की परिक्रमा करना उनके लिए पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है। कथा के अनुसार, शिव-पार्वती ने उनके इस तर्क और बुद्धिमत्ता को स्वीकार किया और उन्हें विजेता माना।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर गलती से दिख गया चौथ का चांद? तुरंत करें ये उपाय, नहीं लगेगा मिथ्या कलंक!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस कथा का असली संदेश क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;गणेश और कार्तिकेय की यह पौराणिक कथा केवल एक प्रतियोगिता की कहानी नहीं है। इसका सबसे बड़ा संदेश यह है कि किसी समस्या को हल करने से पहले उसके मूल अर्थ को समझना जरूरी है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कार्तिकेय ने चुनौती को गति से पूरा किया, जबकि गणेश ने उसी चुनौती को अलग नजरिए से समझा। यही वजह है कि यह कथा आज भी गणेश जी की बुद्धि, माता-पिता के सम्मान और विवेकपूर्ण निर्णय के प्रतीक के रूप में सुनाई जाती है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अलग-अलग ग्रंथों और धार्मिक परंपराओं में इस प्रसंग का विवरण एक जैसा नहीं मिलता। इसलिए इसे एक प्रचलित पौराणिक कथा के रूप में समझना अधिक उचित है, न कि इतिहास की प्रमाणित घटना के तौर पर।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: दाईं या बाईं, किस ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा होती है शुभ?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-ganesh-ji-ki-sund-kis-disha-mein-shubh-articleshow-3k8mh4p</link>
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            <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 15:11:23 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ganesh idol trunk direction: इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन घर-घर में भगवान श्रीगणेश की प्रतिम स्थापित की जाती है। गणेशजी की प्रतिमा लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m25b0rtb8tdg9qpm17ycgzf8,imgname-ganesh-idol-buying-tips-1789033210699.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Idol Buying Tips: &lt;/strong&gt;भगवान गणेश को सुख-समृद्धि, बुद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ काम से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घर में गणपति की प्रतिमा स्थापित करते हैं। ऐसे में मूर्ति लेते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए जैसृ गणेश जी की सूंड किस दिशा में होनी चाहिए आदि? आगे जानिए गणेश प्रतिमा लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किस ओर हो गणेशजी की सूंड?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए आमतौर पर बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को शुभ माना जाता है। ऐसी प्रतिमा को गृहस्थ जीवन के लिए अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक माहौल बना रहता है। बाईं सूंड वाले गणेश जी की पूजा के नियम भी अपेक्षाकृत आसान माने जाते हैं।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर गलती से भी न करें ये 5 काम, नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;श्रीगणेश की बैठी प्रतिमा लें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बाजार में भगवान श्रीगणेश के अनेक रूप-रंग और आकार वाली प्रतिमाएं मिलती हैं। कुछ प्रतिमाओं में श्रीगणेश बैठे हुए तो कुछ में खड़े हुए होते हैं। घर में हमेशा बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है। इसे स्थिरता और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026 Tithi: कब है गणेश चतुर्थी? जानिए मूर्ति स्थापना और विसर्जन मुहूर्त, मुंबई में भव्य तैयारियां&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश प्रतिमा खंडित न हो&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय यह जरूर देख लें कि उसमें कहीं से टूट-फूट या दरार न हो। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के लिए हमेशा साफ-सुथरी और पूर्ण प्रतिमा ही लेनी चाहिए। खंडित प्रतिमा की पूजा का कोई भी फल नहीं मिलता, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किस रंग की हो गणेश प्रतिमा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेशजी की प्रतिमा लेते समय रंगों पर भी विचार जरूर करना चाहिए। लाल या सिंदूरी रंग की गणेश प्रतिमा सबसे शुभ मानी जाती है। वहीं पीले औप सुनहरे रंग की प्रतिमा सुख, समृद्धि का प्रतीक होती है। गहरे डार्क रंग की गणेश प्रतिमा लेने से बचना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मिट्टी की हो गणेश प्रतिमा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आजकल बाजार में पीओपी की गणेश प्रतिमाएं अधिक संख्या में देखने को मिलती हैं लेकिन हमें मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की स्थापना ही घर में करनी चाहिए क्योंकि ये प्राकृतिक होती हैं। पीओपी अनेक केमिकल को मिलाकर बनाया जाता है। इससे बनी गणेश प्रतिमा लेने से बचना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ramdev Jayanti 2026: कौन हैं राजस्थान के लोक देवता बाबा रामदेव, कब है जयंती? जानें रोचक कथा]]></title>
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            <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 08:02:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ramdevra Mela 2026: हमारे देश में अनेक लोक देवताओं की मान्यता है, बाबा रामदेव भी इनमें से एक हैं। बाबा रामदेव को सिर्फ धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि सामाजिक समानता के संदेश के लिए भी याद किया जाता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m2c9kddgh7wmyfh9bk2jk4rf,imgname-ramdev-jayanti-2026-1789266605488.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ramdev Jayanti 2026 Date:&lt;/strong&gt; राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता बाबा रामदेव की जयंती इस साल 13 सितंबर, रविवार को मनाई जाएगी। बाबा रामदेव को राजस्थान में बेहद श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। उनकी समाधि राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामदेवरा में स्थित है। हर साल बाबा रामदेव के प्राकट्य दिवस पर यहां बड़ा मेला लगता है, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई भक्त तो पैदल यात्रा करके रामदेवरा पहुंचते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन थे बाबा रामदेव?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत में कई ऐसे लोकदेवता हुए हैं, जिनके प्रति लोगों की गहरी आस्था है। राजस्थान के बाबा रामदेव भी इन्हीं में से एक हैं। उन्हें रामसा पीर के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म के अनुयायी उन्हें बाबा रामदेव के रूप में पूजते हैं, वहीं मुस्लिम समाज में भी उनके प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है। मान्यता है कि बाबा रामदेव ने अपना पूरा जीवन जरूरतमंदों की मदद और समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए समर्पित किया था।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganpati Bappa Morya Meaning: गणपति बप्पा मोरया का क्या मतलब है? जानें इस जयघोष का इतिहास और महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जानें बाबा रामदेव की जन्म और जीवन कथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लोक मान्यताओं के अनुसार बाबा रामदेव का जन्म 14वीं शताब्दी में तंवर राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम अजमलजी और माता का नाम मैणादे बताया जाता है। कहा जाता है कि उनका परिवार पहले जैसलमेर के वारूछांह गांव में रहता था और बाद में रुणीचा आकर बस गया। बाबा रामदेव के गुरु ऋषि बालीनाथ माने जाते हैं। उन्हें महान तपस्वी और सिद्ध पुरुष बताया गया है। बाबा रामदेव का विवाह अमरकोट के राजा दलजी सोढ़ा की पुत्री नेतलदे से हुआ था।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganpati Mantra: गणेश चतुर्थी पर अपनों को भेजें गणपति जी के 10 मंत्र, विघ्नहर्ता का मिलेगा आशीर्वाद&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;समाज सुधार के लिए किए कईं काम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बाबा रामदेव ने अपने जीवन में लोगों की सेवा और समाज सुधार के कई काम किए। इसी वजह से धीरे-धीरे उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। भक्त उन्हें दिव्य शक्तियों से संपन्न मानते हैं। कुछ धार्मिक मान्यताओं में बाबा रामदेव को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी माना गया है। उन्होंने जात-पात, छुआछूत और भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध किया। उन्होंने सभी लोगों को समान मानने और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राक्षस के आतंक से लोगों को दिलाई मुक्ति&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बाबा रामदेव से जुड़ी कई लोक कथाएं राजस्थान में प्रचलित हैं। ऐसी ही एक मान्यता के अनुसार, पुराने समय में पोकरण क्षेत्र में भैरव नाम के राक्षस का आतंक था। उसके डर से लोग काफी परेशान रहते थे। जब बाबा रामदेव को इस बारे में पता चला तो वे पोकरण पहुंचे। मान्यता है कि उन्होंने अपनी शक्ति से उस राक्षस को उत्तर दिशा में स्थित एक पहाड़ी की गुफा में बंद कर दिया। इसके बाद लोगों को उसके आतंक से मुक्ति मिली। इस घटना के बाद बाबा रामदेव की प्रसिद्धि और भी बढ़ गई और लोग उन्हें चमत्कारी एवं अवतारी पुरुष मानने लगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: गणेश उत्सव 10 दिन ही क्यों, इससे कम या ज्यादा दिन क्यों नहीं?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-ganesh-utsav-10-din-kyon-manate-hai-articleshow-4vf8vcp</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 13:44:57 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026 Date: &lt;/strong&gt;गणेश उत्सव हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। ये त्योहार 1 नहीं बल्कि पूरे 10 दिनों तक मनाया जाता है। ये पर्व 10 दिनों ही क्यों मनाते हैं, इसके पीछे रोचक फैक्टस छिपे हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m27qxmxdr6wvs2g43kj789rv,imgname-seed-ganesha-idols--2--1789113848749.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Utsav History:&lt;/strong&gt; हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश उत्सव की शुरुआत होती है। ये गणेश उत्सव 10 दिन तक मनाया जाता है। गणेश उत्सव के पहले दिन और पंडालों में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। 10 दिन के बाद यानी अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणेश उत्सव के लिए 10 दिन ही क्यों तय किए गए? आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आगे जानिए इससे जुड़ी खास बातें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस बार कब है गणेश चतुर्थी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इसी दिन गणपति की प्रतिमा स्थापित कर गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। इसके बाद 10 दिनों तक अलग-अलग विधियों से भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाएगी। उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Sthapana Vidhi: पहली बार घर ला रहे हैं गणेश जी, तो जानें स्थापना से पूजा तक की पूरी विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पहले एक दिन ही मनाते थे गणेश चतुर्थी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आज गणेश उत्सव का जो भव्य रूप देखने को मिलता है, पुराने समय में ऐसा नहीं था। कई साल पहले तक गणेश चतुर्थी मुख्य रूप से एक दिन का ही पर्व माना जाता था। उस समय सार्वजनिक गणेश उत्सव और बड़े-बड़े पंडालों की परंपरा भी आज जैसी नहीं थी। लोग अपने घरों में भगवान गणेश की पूजा करते थे और इसी के साथ पर्व का समापन हो जाता था। सार्वजनिक स्तर पर गणेश उत्सव मनाने की परंपरा बाद में काफी लोकप्रिय हुई।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: दाईं या बाईं, किस ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा होती है शुभ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे हुई 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरूआत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय अंग्रेजों का शासन था और बड़ी संख्या में लोगों का एक जगह इकट्ठा होना आसान नहीं था। गणेश उत्सव के जरिए लोगों को धार्मिक आयोजन के नाम पर एक साथ आने का मौका मिला। इस दौरान सामाजिक और देश से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होती थी। धीरे-धीरे सार्वजनिक गणेश उत्सव महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में लोकप्रिय होता गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश उत्सव 10 दिन का क्यों होता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की स्थापना के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी के बीच करीब 10 दिनों का अंतर होता है। इसी वजह से गणेश उत्सव को 10 दिवसीय उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा ज्यादा प्रचलित हुई। इन 10 दिनों में भक्त रोज भगवान गणेश की पूजा करते हैं, आरती करते हैं और उन्हें अलग-अलग तरह के भोग लगाए जाते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी पर विधि-विधान से गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Hartalika Teej 2026: 13 सितंबर को पूरे दिन रहेगी तृतीया तिथि तो व्रत 14 को क्यों? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से जानें सही डेट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hartalika-teej-2026-date-13-or-14-september-correct-date-ganesh-chaturthi-articleshow-b735cl1</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 11:47:42 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Hartalika Teej 2026 Date: इस बार हरतालिका तीज को लेकर ज्योतिषी और पंचांगों में मतभेद की स्थिति बन रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि का संयोग 13 और 14 सितंबर दोनों दिन बन रहा है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m27htf2p4w3rrpvsd4krf45x,imgname-hartalika-teej-2026-dates.jpg-1789107453013.jpeg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 13 or 14 September 2026: &lt;/strong&gt;हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है। ये व्रत महिलाओं में बहुत लोकप्रिय है। इस व्रत का इंतजार महिलाओं का साल भर से रहता है। इस दिन महिलाएं बिना कुछ खाए-पीए अपने परिवार और पति की सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। इस बार तृतीया तिथि का संयोग 2 दिन यानी 13 और 14 सितंबर दोनों दिन बन रहा है, इसलिए इस व्रत की सही डेट को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए हरतालिका तीज की सही डेट क्या है&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हरतालिका तीज को लेकर क्यों है कन्फ्यूजन?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार इस बार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर, रविवार की सुबह 07 बजकर 08 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 14 सितंबर, सोमवार की सुबह 07 बजकर 06 मिनिट तक रहेगी। इस तरह तृतीया तिथि का संयोग 13 और 14 सितंबर दोनों दिन बन रहा है। 13 सितंबर को तृतीया तिथि दिन भर रहेगी जबकि 14 सितंबर को सुबह कुछ देर तक।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026: 4 राशि वाली महिलाओं की चमकेगी किस्मत, नौकरी-करियर में सक्सेस, मिलेगा मनचाहा गिफ्ट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है हरतालिका तीज 2026 की सही डेट?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्मशास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत हमेशा चतुर्थी युक्ता तृतीया (वह तृतीया तिथि जो चतुर्थी से जुड़ी हो) में किया जाना सर्वाधिक शुभ और फलदायी माना गया है। विधान यह है कि यदि दिन में तृतीया तिथि केवल 'एक मुहूर्त' (लगभग 48 मिनट) के लिए भी रहे और उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाए, तो भी यह व्रत चतुर्थी युक्ता मानकर उसी दिन किया जाता है। ऐसा संयोग 14 सितंबर, सोमवार को बन रहा है, इसलिए इसी दिन हरतालिका तीज का व्रत करना शास्त्र सम्मत है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर गलती से भी न करें ये 5 काम, नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन क्यों?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीगणेश का प्राकट्य मध्याह्न (दोपहर) काल में हुआ था। इसीलिए गणेश चतुर्थी की पूजा और स्थापना के लिए पंचांग में उस दिन को ग्रहण किया जाता है, जब चतुर्थी तिथि दोपहर के समय मौजूद हो। 14 सितंबर, सोमवार को चतुर्थी तिथि सुबह 07 बजकर 06 मिनिट के बाद पूरे दिन रहेगी। इसलिए गणेश चतुर्थी का पर्व भी 14 सितंबर को मनाया जाना उचित है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Hartalika Teej 2026 Date: हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और आसान विधि]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hartalika-teej-2026-date-kab-hai-14-september-shubh-muhurat-puja-vidhi-samagri-list-articleshow-bud56ix</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 14:54:09 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026 Kab Hai: &lt;/strong&gt;हरतालिका तीज 2026 कब है? डेट को लेकर कंफ्यूजन दूर करें। जानें सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और आसान पूजा विधि, पारण समेत डिटेल।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m22z8xp4b8tvpjgm7gpd20wr,imgname-hartalika-teej-2026-kab-hai-1788953786052.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026 Date: &lt;/strong&gt;हरतालिका तीज को लेकर इस साल एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि हरतालिका तीज व्रत 13 सितंबर 2026 को रखा जाएगा या 14 सितंबर को? पंचांग की गणना के मुताबिक, तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह समाप्त होगी। ऐसे में महिलाएं असमंजस में हैं कि तीज का व्रत 13 को रखें या 14 सितंबर को। अगर आप भी हरितालिका तीज की डेट को लेकर कंफ्यूज हैं, तो जानिए इस बार यह व्रत कब है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हरतालिका तीज 2026 कब है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे से शुरू होगी और 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तक रहेगी। चूंकि 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार इसी दिन हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत खास तौर पर अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से किया जाता है। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं और कई जगह अविवाहित युवतियां भी भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हरतालिका तीज पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;14 सितंबर को शिव-पार्वती की पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक बताया गया है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 से 5:19 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा। हालांकि, पूजा का स्थानीय समय सूर्योदय और स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej Upay 2026: शादी की अड़चन से दांपत्य जीवन की परेशानी तक, तीज पर करें ये 3 सरल उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हरतालिका तीज पूजा सामग्री लिस्ट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पूजा के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या बालू/शुद्ध मिट्टी से बनाई गई प्रतिमाएं रखी जा सकती हैं। पूजा में गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा, मंदार के फूल, फल और मिठाई जैसी सामग्री रखी जाती है। माता पार्वती को मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर समेत सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। बिहार की महिलाएं इस पूजा में ठेकुआ और गुझिया जैसे प्रसाद भी चढ़ाती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;हरतालिका तीज पर पढ़ें ये मंत्र और श्लोक, शिव-पार्वती की पूजा में मिलेगा अखंड सौभाग्य&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हरतालिका तीज पूजा विधि?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;व्रती महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसके बाद पूजा स्थल पर शिव-पार्वती और गणेश जी की स्थापना कर विधि-विधान से पूजन करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;भगवान शिव को बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें, जबकि माता पार्वती को सुहाग सामग्री चढ़ाई चढ़ाएं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पूजा के बाद आरती और हरतालिका तीज की कथा सुनें और आरती करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कई जगहों पर रात में जागरण, भजन-कीर्तन और अलग-अलग प्रहर में शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;व्रत पूरा होने पर अगले दिन सूर्योंदय के बाद पारण करें।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;हरतालिका तीज पूजा में ये 5 गलतियां न करें&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;पूजा की तैयारी अधूरी न छोड़ें: पूजन सामग्री और श्रृंगार की चीजें पहले से व्यवस्थित कर लें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पूजा के दौरान मन को भटकने न दें: शिव-पार्वती का ध्यान करते हुए श्रद्धा और एकाग्रता से पूजा करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;गलत या खंडित पूजा सामग्री का इस्तेमाल न करें: साफ-सुथरी और सही सामग्री का ही प्रयोग करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;व्रत में अपनी सेहत की अनदेखी न करें: निर्जला व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पूजा के नियमों को लेकर जल्दबाजी न करें: स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से पूजा करें।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hartalika-teej-2026-date-kab-hai-14-september-shubh-muhurat-puja-vidhi-samagri-list-articleshow-bud56ix"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी की डेट को लेकर कन्फ्यूजन, जानें क्या है सही तारीख, 15 या 16 सितंबर?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/rishi-panchami-2026-date-15-or-16-september-puja-vidhi-mahatva-significance-articleshow-c838klf</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 10:05:09 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Rishi Panchami 2026 Date: भाद्रपद मास में महिलाओं से संबंधित अनेक व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं, ऋषि पंचमी भी इनमें से एक है। इस बार ऋषि पंचमी पर्व किस दिन मनाया जाएगा, इसे लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01k3k35aqjatv9mv33265a7nx0,imgname-rishi-panchami-2025-04-1756208737010.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Rishi Panchami Vrat Importance:&lt;/strong&gt; हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। ये व्रत सिर्फ वहीं महिलाएं करती हैं जो रजस्वला होती हैं यानी जिनके पीरियड आते हैं। धर्म ग्रंथों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का संयोग 2 दिन बन रहा है जिसके चलते ये व्रत किस दिन किया जाए, इसे लेकर संशय की स्थिति बन रही है। आगे जानिए ऋषि पंचमी व्रत की सही डेट, महत्व व अन्य बातें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब करें ऋषि पंचमी व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 15 सितंबर, मंगलवार की सुबह 07 बजकर 44 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन 16 सितंबर, बुधवार की सुबह 08 बजकर 59 मिनिट तक रहेगी। ऋषि पंचमी की पूजा दोपहर में करने की परंपरा है और ये स्थिति 15 सितंबर को बन रही है, इसलिए इसलिए इसी दिन यानी 15 सितंबर, मंगलवार को ही ये व्रत किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: पिता, माता या अन्य परिजन का श्राद्ध किस तिथि को? यहां देखें पूरा कैलेंडर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों करते हैं ऋषि पंचमी व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं से अनजाने में कुछ ऐसे काम हो सकते हैं, जिन्हें शास्त्रों में दोष या पाप माना गया है। इन दोषों से मुक्ति और प्रायश्चित के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से मासिक धर्म से जुड़े दोषों का प्रायश्चित हो जाता है। इसी वजह से परंपरा में ऋषि पंचमी का व्रत खास तौर पर मासिक धर्म वाली महिलाओं के लिए बताया गया है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: दाईं या बाईं, किस ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा होती है शुभ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किसकी पूजा करें ऋषि पंचमी व्रत में?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करती हैं। हिंदू धर्म में इन सात ऋषियों को बहुत पूजनीय माना गया है। सप्त ऋषियों के नाम वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज बताए गए हैं। मान्यता है कि ऋषि पंचमी पर इन सप्त ऋषियों की विधि-विधान से पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए दोषों का प्रायश्चित होता है। इस व्रत में खान-पान को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन अनाज और फल का सेवन नहीं करती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026 एक ही दिन क्यों? जानिए दोनों पर्व एक ही दिन मनाना सही या गलत]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hartalika-teej-ganesh-chaturthi-2026-same-day-why-date-puja-muhurat-details-articleshow-d3sc0lg</link>
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            <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 16:51:16 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Why Hartalika Teej and Ganesh Chaturthi 2026 Same Day: हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026 एक ही दिन क्यों हैं? जानिए तिथि का पूरा खेल, व्रत की डेट, पूजा और गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त। एक्सपर्ट से यह भी जानिए कि धार्मिक दृष्टि से हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाना सही है या नहीं?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m25gqraq56qjga2tdyza4kfe,imgname-why-hartalika-teej-and-ganesh-chaturthi-2026-same-day-1789039206743.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej Ganesh Chaturthi 2026: &lt;/strong&gt;इस साल हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026 में एक ही दिन, 14 सितंबर सोमवार को मनाई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब हरितालिका तीज तृतीया तिथि पर और गणेश चतुर्थी चतुर्थी तिथि पर होती है, तो दोनों पर्व एक ही तारीख को कैसे मनाए जाएंगे? इसका जवाब हिंदू पंचांग की तिथि व्यवस्था में छिपा है। जानिए इस साल हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026 एक ही दिन क्यों है और क्या दोनों पर्व एक ही दिन मनाना सही है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तृतीया खत्म होते ही शुरू हो जाएगी चतुर्थी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दरअसल, हिंदू पंचांग में तिथि अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख की तरह रात 12 बजे बदलती नहीं है। चंद्रमा की स्थिति के आधार पर तिथि का समय तय होता है और एक ही सूर्योदय वाले दिन में दो अलग-अलग तिथियां आ सकती हैं। 14 सितंबर 2026 की सुबह करीब 7:06 बजे तक शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगी। चूंकि 14 सितंबर के सूर्योदय के समय तृतीया मौजूद है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार हरितालिका तीज इसी दिन मनाई जाएगी। इसके कुछ ही समय बाद चतुर्थी लगने से उसी तारीख को गणेश चतुर्थी भी पड़ रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej Upay 2026: शादी की अड़चन से दांपत्य जीवन की परेशानी तक, तीज पर करें ये 3 सरल उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाना सही है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष एक्सपर्ट के अनुसार 2026 में हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक ही तारीख पर पड़ना पंचांग के अनुसार सही है। इसकी वजह यह है कि हिंदू पर्व अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख से नहीं, बल्कि तिथि और उसके सूर्योदय के समय की स्थिति से तय होते हैं। 14 सितंबर 2026 को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण हरितालिका तीज का व्रत रखा जाएगा, जबकि सुबह तृतीया समाप्त होने के बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगी। इसी वजह से उसी तारीख को गणेश चतुर्थी भी पड़ रही है। यानी इसमें किसी तरह की तारीख की गलती या पर्वों के नियम में बदलाव नहीं है। हां, दोनों की पूजा का समय अलग रहेगा और अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और आसान विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हरितालिका तीज 2026: कब है व्रत और पूजा का मुहूर्त?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बार हरितालिका तीज व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार तीज पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। तृतीया तिथि 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। हरितालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की कामना से यह व्रत करती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश चतुर्थी 2026: बप्पा की स्थापना कब करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;तृतीया समाप्त होने के बाद 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी शुरू हो जाएगी। गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह करीब 7:06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। गणपति स्थापना और पूजा के लिए मध्यान्ह का समय खास माना जाता है। पंचांग के अनुसार गणेश मूर्ति स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यानी इस बार दिन की शुरुआत हरितालिका तीज के व्रत और शिव-पार्वती पूजन से होगी और बाद में गणपति बप्पा की स्थापना की जाएगी। यही वजह है कि 2026 में दो बड़े हिंदू पर्व एक ही तारीख पर मनाए जा रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या पहली बार बना है ऐसा संयोग?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ऐसा नहीं है कि 2026 में पहली बार हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही हैं। पंचांग की तिथियों के खिसकने की वजह से पहले भी ऐसा संयोग बन चुका है। उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के मुताबिक 2000, 2006 और 2009 में भी दोनों पर्व एक ही तारीख पर आए थे और अगला ऐसा संयोग 2032 में बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi Signs: गणेश चतुर्थी पर दिखे चूहा तो क्या है मतलब? गणपति का वाहन देता है ये खास संकेत!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/significance-of-seeing-a-mouse-during-ganesh-chaturthi-2026-photoshow-dez02sy</link>
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            <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 08:57:47 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के दिन अगर अचानक घर में चूहा दिख जाए, तो इसका क्या मतलब है? क्या यह शुभ संकेत है या अशुभ? यहां जानिए इससे जुड़ी खास जानकारी और गणपति का वाहन क्या संकेत देता है।]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m2bn9nszggdazpfthns70njn,imgname-whatsapp-image-2026-09-13-at-2.04.39-am-1789245314879.jpeg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के दिन अगर अचानक घर में चूहा दिख जाए, तो इसका क्या मतलब है? क्या यह शुभ संकेत है या अशुभ? यहां जानिए इससे जुड़ी खास जानकारी और गणपति का वाहन क्या संकेत देता है।&lt;img&gt;&lt;p&gt;पूरे देश में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान लोग गणपति को घर लाते हैं या सार्वजनिक पंडालों में उनकी मूर्ति स्थापित कर पूजा करते हैं। इस साल यह त्योहार 14 सितंबर, 2026, सोमवार को है। बाजारों में अभी से ही त्योहार की रौनक और तैयारियां दिखने लगी हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;इस दिन भगवान गणेश की पूजा होती है और उनके वाहन 'मूषक' (चूहे) का भी खास महत्व होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर चूहे का दिखना कुछ शुभ या अशुभ संकेत देता है। आइए, इन संकेतों के बारे में और जानते हैं।&lt;img&gt;ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, गणेश चतुर्थी पर घर से बाहर जाते हुए चूहे को देखना एक शुभ शगुन माना जाता है। यह इस बात का संकेत है कि चूहा आपके घर की गरीबी और परेशानियां अपने साथ लेकर जा रहा है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है।&lt;img&gt;गणेश चतुर्थी के दिन सफेद चूहा देखना बहुत शुभ शगुन माना जाता है। सफेद चूहा सकारात्मकता का प्रतीक है। इसका दिखना यह बताता है कि आपके घर की सभी समस्याएं जल्द ही खत्म होने वाली हैं।&lt;img&gt;अगर गणेश चतुर्थी के दिन कोई चूहा गणपति की मूर्ति के पास घूमता हुआ दिखे, तो यह एक बहुत अच्छा संकेत है। यह बताता है कि भगवान गणेश आपकी पूजा से प्रसन्न हैं।&lt;img&gt;स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर गणेश चतुर्थी पर आपको चूहे का सपना आता है, खासकर ऐसा सपना जिसमें चूहा पिंजरे से निकलकर भाग रहा हो, तो इसका मतलब है कि आप जल्द ही किसी बड़ी मुश्किल से छुटकारा पाएंगे। यह संकेत है कि आपकी जिंदगी बेहतर होने वाली है।]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Pitru Paksha 2026: पिता, माता या अन्य परिजन का श्राद्ध किस तिथि को? यहां देखें पूरा कैलेंडर]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pitru-paksha-2026-shradh-tithi-calendar-father-mother-and-family-member-articleshow-gr2gu0d</link>
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            <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:06:11 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Pitru Paksha 2026: &lt;/strong&gt;पिता, माता या अन्य परिजन का श्राद्ध किस तिथि को करें? जानें पितृपक्ष की पूरी श्राद्ध तिथि, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या की डेट।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m252xcrrvfvv03yennb7h8m2,imgname-pitru-paksha-1789024711447.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;पितृपक्ष हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है। इस दौरान पितरों के स्मरण और उनके श्राद्ध, तर्पण व दान करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। परिवार के दिवंगत सदस्यों का श्राद्ध उनकी मृत्यु की हिंदू तिथि के अनुसार किया जाता है। ऐसे में अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि 2026 में पिता, माता या किसी अन्य परिजन का श्राद्ध किस दिन करना है, तो पितृपक्ष का पूरा कैलेंडर देखना बेहद जरूरी है। हम आपको सितंबर और अक्टूबर की उन तारीखों के बारे में बताएंगे, जब पितृ पक्ष पड़ेगा। साल 2026 में पितृपक्ष की मुख्य अवधि 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक रहेगी। वहीं 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जानें पितृपक्ष का पूरा कैलेंडर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;श्राद्ध के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि जिस हिंदू तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृपक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है। यानी पिता, माता, दादा-दादी, नाना-नानी या परिवार के किसी अन्य दिवंगत सदस्य के लिए उनकी मृत्यु की तिथि देखी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पिता का श्राद्ध किस तिथि को करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पिता का श्राद्ध भी उनकी मृत्यु की हिंदू तिथि के अनुसार किया जाता है। यदि उनकी मृत्यु पितृपक्ष की किसी तिथि, जैसे सप्तमी, दशमी या द्वादशी को हुई थी, तो उसी तिथि के श्राद्ध वाले दिन विधि-विधान से श्राद्ध किया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;और पढ़ें:&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; Pithori Amavasya 2026: पिठोरी अमावस कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;माता का श्राद्ध किस दिन करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;माता के श्राद्ध के लिए भी उनकी मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध करना सामान्य नियम है। हालांकि पितृपक्ष में नवमी तिथि को मातृ नवमी का विशेष महत्व माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;विशेष: &lt;/strong&gt;अगर किसी कारण से मृत्यु की तिथि याद नहीं है या तिथि का पता नहीं चल पा रहा है, तो सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;और पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर गलती से भी न करें ये 5 काम, नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Bhawana Tripathi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Varaha Jayanti 2026: 13 या 14 सितंबर, कब है वराह जयंती? जानें पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त और कथा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/varaha-jayanti2026-13-ya-14-september-date-puja-vidhi-mantra-muhurat-katha-articleshow-kb9q6kc</link>
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            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 15:07:23 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Varaha Jayanti 2026 Date: &lt;/strong&gt;हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 13 सितंबर, रविवार को मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m2afa5v76j20p54kdghqhhvf,imgname-varaha-jayanti-2026-1789205485415.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Varaha Jayanti Puja Vidhi Mantra: &lt;/strong&gt;भगवान विष्णु के दशावतारों में वराह अवतार का विशेष स्थान माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र की गहराई में छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह यानी सूअर का रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया था। इसी अवतार के प्रकट होने की खुशी में हर साल वराह जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान वराह की विशेष पूजा की जाती है। जानें वराह अवतार की पूजा विधि, मंत्र और महत्व&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: क्यों न करें गणेश प्रतिमा की पीठ के दर्शन, गलती से हो जाएं तो क्या करें?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वराह जयंती 2026 पूजा मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वराह जयंती पर यानी 13 सितंबर, रविवार को पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 31 मिनिट से शाम 04 बजे तक रहेगा। यानी इस दिन भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 29 मिनट का समय मिलेगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganpati Mantra: गणेश चतुर्थी पर अपनों को भेजें गणपति जी के 10 मंत्र, विघ्नहर्ता का मिलेगा आशीर्वाद&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वराह जयंती की पूजा विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 13 सितंबर, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके वहां भगवान विष्णु या वराह भगवान की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।- चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान की प्रतिमा को जल अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर पीले फूल, चंदन, चावल और तुलसी दल चढ़ाएं।- अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें भी एक-एक चढ़ाएं। भगवान को फल, मिठाई और गुड़ आदि का भोग लगाएं। पूजा करते समय ऊं वराहाय नमः मंत्र का जाप भी मन ही मन में करते रहें।- अंत में परिवार के साथ भगवान की आरती करें। संभव हो तो व्रत रखें। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, अनाज और कपड़े आदि का दान करें। उससे आपको शुभ फल मिलेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है वराह अवतार की कथा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्याक्ष नाम का एक शक्तिशाली असुर पृथ्वी को समुद्र की गहराई में ले गया था। इससे पूरी सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा। देवताओं ने भगवान विष्णु से पृथ्वी को बचाने की प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण किया और समुद्र में उतरकर पृथ्वी को खोज निकाला। उन्होंने अपने दांतों पर पृथ्वी को उठाकर उसे फिर से उसके स्थान पर स्थापित किया। इसके बाद भगवान वराह और हिरण्याक्ष के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। इस तरह पृथ्वी को संकट से बचाया गया और सृष्टि का संतुलन दोबारा कायम हुआ।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Sthapana Vidhi: पहली बार घर ला रहे हैं गणेश जी, तो जानें स्थापना से पूजा तक की पूरी विधि]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-me-pehli-baar-ganpati-sthapana-puja-vidhi-articleshow-mh2s4hk</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:18:57 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: &lt;/strong&gt;पहली बार घर में गणपति बप्पा ला रहे हैं तो जानें गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना, पूजा विधि, जरूरी सामग्री और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m27js47yrd2g8j391ryct81x,imgname-ganesh-sthapana-vidhi-1789108457725.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर दिन सोमवार को मनाई जाएगी। ये त्योहार भगवान गणेश के स्वागत और उनकी भक्ति का पर्व है। महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सो में लोग हर साल घर में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं और फिर उनकी विदाई भी धूमधाम से की जाती है। अगर आप पहली बार गणेश जी को घर ला रहे हैं, तो मूर्ति कहां रखें, स्थापना कैसे करें, पूजा में क्या सामग्री चाहिए आदि सवाल मन में जरूर आ रहे होंगे। जानिए गणेश चतुर्थी पूजा विधि के बारे में।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश चतुर्थी में गणेश प्रतिमा कैसे घर लाएं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पहली बार गणपति स्थापना कर रहे हैं तो ऐसी प्रतिमा चुनें जिसे आप श्रद्धा और अपनी सुविधा के अनुसार विधि-विधान से पूज सकें। मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमा पर्यावरण की दृष्टि से अच्छा विकल्प रहेगी। आप चाहे तो घर पर ही मिट्टी की मदद से ईको फ्रेंडली गणपति बप्पा की मूर्ति बना सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;घर में कहां करें गणपति की स्थापना?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेश जी की स्थापना के लिए घर का साफ-सुथरा और शांत स्थान चुनें। पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद वहां चौकी रखें और उस पर साफ लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी को फूलों और आसपास रंगोली से सजा सकते हैं। मूर्ति को ऐसी जगह रखें जहां परिवार के लोग पूजा कर सके। स्थापना के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा की जगह को साफ करें और चौकी पर वस्त्र बिछाएं। इसके बाद पूजा की जरूरी सामग्री पास में रख लें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री में क्या खरीदें?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;गणेश जी की प्रतिमा&lt;/li&gt; &lt;li&gt;चौकी और साफ वस्त्र&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कलश&lt;/li&gt; &lt;li&gt;जल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अक्षत यानी चावल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;रोली या कुमकुम&lt;/li&gt; &lt;li&gt;हल्दी&lt;/li&gt; &lt;li&gt;दूर्वा&lt;/li&gt; &lt;li&gt;लाल या पीले फूल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;माला&lt;/li&gt; &lt;li&gt;धूप और दीपक&lt;/li&gt; &lt;li&gt;नैवेद्य&lt;/li&gt; &lt;li&gt;मोदक या लड्डू&lt;/li&gt; &lt;li&gt;फल&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पंचामृत की सामग्री&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;ऐसे करें गणपति की स्थापना&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;सबसे पहले पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर कपड़ा बिछाएं। इसके बाद कलश स्थापित करें। कलश में जल भरकर उसमें आवश्यकता के अनुसार अक्षत और सुपारी आदि रखी जा सकती है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा भी कई घरों में है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसके बाद श्रद्धापूर्वक गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। भगवान को पुष्प, दूर्वा, अक्षत और रोली अर्पित करें। दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद गणेश जी का ध्यान करते हुए पूजा और संकल्प करें।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;गणपति बप्पा को दूर्वा अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं। आप भोग में अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और भोग में मोदक, लड्डू, फल या घर में बनाया हुआ सात्विक प्रसाद चढ़ा सकते हैं।इसके बाद धूप और दीप से आरती करें।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;और पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: दाईं या बाईं, किस ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा होती है शुभ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश जी की पूजा में करें मंत्र जाप&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पूजा के दौरान भगवान गणेश के सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है।&lsquo;ॐ गं गणपतये नमः&rsquo;। इसके अलावा गणेश जी की आरती और परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य स्तोत्र या मंत्रों का पाठ भी किया जा सकता है।रोजाना अपनी सुविधा के अनुसार गणेश जी की पूजा और आरती करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणपति का विसर्जन&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;डेढ़ दिन बाद &ndash; स्थापना के अगले दिन विसर्जन।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;3 दिन बाद &ndash; तीसरे दिन विसर्जन।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;5 दिन बाद &ndash; पांचवें दिन विसर्जन।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;7 दिन बाद &ndash; सातवें दिन विसर्जन।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;10वें दिन &ndash; अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन सबसे अधिक प्रचलित है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;और पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026 एक ही दिन क्यों? जानिए दोनों पर्व एक ही दिन मनाना सही या गलत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Bhawana Tripathi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-me-pehli-baar-ganpati-sthapana-puja-vidhi-articleshow-mh2s4hk"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[थाली में जूठा दही छोड़ना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/dahi-jutha-chhodna-kyon-mana-hai-dharmik-manyata-articleshow-oia3wx8</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 15:13:51 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Dahi Jhootha Chhodna: दही-चीनी की परंपरा से लेकर पंचामृत, स्कंद पुराण के काशी खंड में रात में दही से बचने का उल्लेख, दही गिरने के शकुन-अपशकुन और थाली में जूठा दही छोड़ने से जुड़ी मान्यताएं जानें। ज्योतिष में चंद्र-राहु का संदर्भ और भोजन नष्ट न करने की सीख भी पढ़ें।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kz91syg1kmvmbrzz0y21aa4b,imgname-eating-curd-in-monsoon-5--1--1785936542209.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Thali Mein Jhootha Dahi: &lt;/strong&gt;भारतीय घरों में दही का इस्तेमाल सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं होता, बल्कि इसे शुभता और समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। पूजा-पाठ से लेकर मांगलिक कार्यों तक दही की अपनी खास जगह है। यही वजह है कि कई परिवारों में थाली में जूठा दही छोड़ने या इसे व्यर्थ करने से बचने की सीख दी जाती है। लेकिन आखिर इसके पीछे धार्मिक मान्यता क्या है और इसका व्यवहारिक पक्ष क्या कहता है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पूजा और शुभ कार्यों में दही का खास महत्व&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दही को भारतीय परंपरा में सात्त्विक आहार माना गया है। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल होता है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष महत्व माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में भी माखन और दही का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से दही को कई परंपराओं में पवित्र और शुभ भोजन के रूप में देखा जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दही-चीनी खिलाने की परंपरा क्यों है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;किसी शुभ काम, परीक्षा या यात्रा पर निकलने से पहले दही-चीनी खिलाने की परंपरा भारत के कई हिस्सों में आज भी प्रचलित है। इसे शुभ शुरुआत और सकारात्मक सोच से जोड़कर देखा जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके पीछे वैज्ञानिक रूप से सफलता की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन परंपरा के स्तर पर यह व्यक्ति का मनोबल बढ़ाने और अच्छे भाव के साथ काम शुरू करने का प्रतीक जरूर माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ज्योतिष में दही का चंद्रमा से संबंध&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिषीय मान्यताओं में दही को चंद्रमा से संबंधित माना गया है। मान्यता है कि दही का सेवन या उससे जुड़े कुछ उपाय कमजोर चंद्रमा से संबंधित स्थितियों में किए जा सकते हैं। वहीं, कुछ धार्मिक मान्यताओं में राहु से जुड़े दोषों के उपाय के तौर पर दही और काले तिल के दान का उल्लेख मिलता है। हालांकि, ऐसी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय विश्वासों का हिस्सा हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रात में दही खाने को लेकर क्या मान्यता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कुछ धार्मिक ग्रंथों और पारंपरिक मान्यताओं में रात के समय दही खाने से बचने की सलाह मिलती है। स्कंद पुराण के काशी खंड से भी इस संदर्भ को जोड़ा जाता है। इसे भारतीय परंपरा में भोजन के समय, मात्रा और दिनचर्या से जुड़े नियमों के रूप में समझा जा सकता है। हालांकि, आज के समय में भोजन से जुड़े ऐसे नियमों को व्यक्ति की सेहत और जरूरत के अनुसार समझना जरूरी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दही गिरना या जूठा छोड़ना क्यों माना जाता है अशुभ?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लोक मान्यता में दही का अचानक गिर जाना, खासकर किसी महत्वपूर्ण काम के लिए निकलते समय, अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोग चंद्र देव का स्मरण करते हैं और आगे सावधानी बरतते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसी तरह थाली में जूठा दही छोड़ने को भी कई परिवारों में अच्छा नहीं माना जाता। कुछ लोक मान्यताओं में इसे आयु पर विपरीत प्रभाव से जोड़ा गया है, लेकिन इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;असल में इसके पीछे एक व्यवहारिक सीख भी समझी जा सकती है। भारतीय संस्कृति में अन्न को सम्मान देने और भोजन की बर्बादी से बचने पर जोर दिया गया है। इसलिए जितनी जरूरत हो, उतना ही दही लेना और खाने के बाद उसे व्यर्थ न छोड़ना एक अच्छी आदत है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई धार्मिक, ज्योतिषीय और लोक मान्यताएं परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य या अंतिम सत्य न मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/dahi-jutha-chhodna-kyon-mana-hai-dharmik-manyata-articleshow-oia3wx8"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: क्यों न करें गणेश प्रतिमा की पीठ के दर्शन, गलती से हो जाएं तो क्या करें?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-ganesh-pratima-ki-peeth-ke-darshan-kyun-ashubh-mane-jate-hain-articleshow-pufsgsk</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-ganesh-pratima-ki-peeth-ke-darshan-kyun-ashubh-mane-jate-hain-articleshow-pufsgsk</guid>
            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 12:08:39 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Why Ganesh Idol Back Side Is Inauspicious: इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। गणेशजी से जुड़ी अनेक मान्यताएं हमारे समाज में प्रचलित हैं। इन मान्यताओं से जुड़ी कईं कथाएं भी ग्रंथों में मिलती हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m27qxmxbx4awp11qa8gp8jbe,imgname-seed-ganesha-idols--1--1789113848747.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Myths related to Shri Ganesha:&lt;/strong&gt; भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले गणेशजी की पूजा करने की परंपरा है। गणेश जी की पूजा से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक है गणेशजी की प्रतिमा की पीठ के दर्शन न करना। ऐसा करना अशुभ माना गया है। इसके पीछे कईं मान्यताएं और कथाएं छिपी हुई हैं। जानें क्या इस मान्यता से जुड़े फैक्ट्स&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेशजी की पीठ पर किसका वास है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेशजी की प्रतिमा की पीठ को देखना शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए पूजा के दौरान कोशिश करनी चाहिए कि गणेशजी की प्रतिमा के पीछे की तरफ से दर्शन न हों। मान्यता है कि भगवान गणेश की पीठ पर अलक्ष्मी यानी दरिद्रता का वास होता है। इसलिए गणेशजी के पीठ के दर्शन न करने की मान्यता प्रचलित है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganpati Mantra: गणेश चतुर्थी पर अपनों को भेजें गणपति जी के 10 मंत्र, विघ्नहर्ता का मिलेगा आशीर्वाद&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों नहीं करने चाहिए गणेश प्रतिमा के पीठ के दर्शन?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भगवान गणेश को सुख, समृद्धि, बुद्धि और सौभाग्य का देवता माना गया है। वहीं, उनकी पीठ को लेकर एक अलग धार्मिक मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि गणेशजी की पीठ पर दरिद्रता का वास होता है। गणेश प्रतिमा की पीठ के दर्शन करने से सुख-समृद्धि में कमी आ सकती है या धन हानि के योग भी बन सकते हैं। अगर अनजाने में गणेशजी की पीठ दिखाई दे जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान गणेश का स्मरण करके उनसे क्षमा मांग सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर गलती से दिख गया चौथ का चांद? तुरंत करें ये उपाय, नहीं लगेगा मिथ्या कलंक!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश प्रतिमा की पीठ के दर्शन हो जाएं तो क्या करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर गलती से श्रीगणेश प्रतिमा के पीठ के दर्शन हो जाएं तो इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है। ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है। अगर आपके साथ भी जैसा कुछ हो जाए तो उसी समय ऊं गं गणपत्यै नम: मंत्र का जाप करते हुए श्रीगणेश के मुख के दर्शन कर लें। श्रीगणेश को मंगल मूर्ति भी कहते हैं, जिसके अर्थ है कल्याण करने वाला। ऐसा करने से आपके दोष दूर हो सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-ganesh-pratima-ki-peeth-ke-darshan-kyun-ashubh-mane-jate-hain-articleshow-pufsgsk"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: गणपति लाने से पहले जान लें ये जरूरी बात, इस समय चांद देखना है वर्जित]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-date-muhurat-preparations-moon-sighting-articleshow-uco40nt</link>
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            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 09:15:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: &lt;/strong&gt;गणेश चतुर्थी 2026 इस बार 14 सितंबर को मनाई जाएगी। गणपति स्थापना और पूजा के लिए सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं, चतुर्थी पर सुबह 9:01 से रात 8:08 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m27s5v3mtkanyhvw0wnqk7m3,imgname-ganesh-chaturthi-moon-sighting-remedy-1789115165812.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026 Date:&lt;/strong&gt; गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर होने वाले इस पर्व के लिए लोग पहले से घर की सफाई, पूजा स्थल की सजावट और गणपति स्थापना की तैयारियां शुरू कर देते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश चतुर्थी 2026 की तारीख और पूजा मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;14 सितंबर को चतुर्थी तिथि सुबह 7:06 बजे से शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। गणेश पूजन के लिए मध्याह्न का समय विशेष माना जाता है। 2026 में मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणपति स्थापना के लिए क्या रखें तैयारी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणपति स्थापना से पहले पूजा स्थल और घर की अच्छी तरह सफाई कर लें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर फूल, रंगोली, तोरण और दीपों से सजावट की जा सकती है। पूजा के लिए दुर्वा, फूल-माला, मोदक, फल, दीपक, कपूर, रोली-कुमकुम, अक्षत, कलश, नारियल और पंचामृत जैसी सामग्री पहले से तैयार रखें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसी गणेश प्रतिमा घर लाएं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;घर में गणपति स्थापित करने के लिए प्रतिमा का आकार उपलब्ध स्थान के अनुसार चुनना बेहतर रहता है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को प्राथमिकता दी जा सकती है। विसर्जन के लिए घर पर या निर्धारित स्थान पर उचित व्यवस्था पहले से तय कर लेने से अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों माना जाता है वर्जित?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से जुड़ी एक पारंपरिक मान्यता भी है। इसके अनुसार चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक या मिथ्या दोष लगने का भय माना जाता है। 2026 में चंद्र दर्शन से बचने का समय सुबह 9:01 बजे से रात 8:08 बजे तक बताया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पूजा से पहले इन बातों का रखें ध्यान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;स्थापना के दिन पूजा सामग्री और प्रतिमा को मुहूर्त से पहले तैयार रखें। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को व्यवस्थित रखें। मध्याह्न पूजा के समय जल्दबाजी न हो, इसके लिए सजावट से लेकर प्रसाद और विसर्जन की योजना पहले ही बना लेना बेहतर रहेगा। इससे गणेश उत्सव की शुरुआत श्रद्धा और सुकून के साथ की जा सकेगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hartalika Teej 2026 Upay: चाहिए मनचाहा लाइफ पार्टनर तो करें राशि अनुसार उपाय, शिव-पार्वती करेंगे इच्छा पूरी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hartalika-teej-2026-rashi-anusar-upay-manchaha-jeevansathi-remedies-zodiac-signs-articleshow-xf0xtsi</link>
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            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:31:22 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Hartalika Teej Rashi Anusar Upay: हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं यानी दिन भर कुछ भी खाती-पीती नहीं हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m29zs3hdkhqvd87yg4e2axwy,imgname-hartalika-teej-upay.jpg-1789189197356.jpeg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej Remedies zodiac signs: &lt;/strong&gt;इस बार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा। कुंवारी लड़कियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से इस दिन व्रत रखती हैं और भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन राशि अनुसार कुछ आसान उपाय करने से सभी की मनोकामना पूरी हो सकती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानिए व्रत करने वाली लड़कियां इस दिन राशि अनुसार कौन-सा उपाय करें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मेष राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस राशि की लड़कियां हरतालिका तीज पर माता पार्वती को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। इसके बाद लाल चंदन मिला हुआ जल भगवान शिव को अर्पित करें। इससे इनकी मनोकामना पूरी हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वृष राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;माता पार्वती को सिल्वर कलर की चुनरी अर्पित करें। साथ ही भगवान शिव को सफेद कपड़े चढ़ाएं। इस उपाय को मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से शुभ माना जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026: 13 सितंबर को पूरे दिन रहेगी तृतीया तिथि तो व्रत 14 को क्यों? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से जानें सही डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मिथुन राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस राशि की लड़कियां तीज के दिन माता पार्वती को पिस्ते से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ भांग मिले जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। जिससे इन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिल सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर गलती से भी न करें ये 5 काम, नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कर्क राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भगवान शिव और माता पार्वती का गाय के दूध से अभिषेक करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय से मनोकामना पूरी होने में शीघ्रता होती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सिंह राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मनपसंद जीवनसाथी की इच्छा से शिव-पार्वती को केसरिया रंग के फूल चढ़ाएं। इसके बाद केसर वाली खीर का भोग लगाएं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कन्या राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;माता पार्वती को हरे रंग की चूड़ियां और चुनरी अर्पित करें। भगवान शिव को बिल्व पत्र और धतूरा चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तुला राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;माता पार्वती को गुलाब का इत्र अर्पित करें। वहीं, भगवान शिव को मोगरे का इत्र चढ़ाएं। मान्यता है कि यह उपाय जीवन लव लाइफ में सकारात्मकता बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वृश्चिक राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;माता पार्वती का कुंकुम मिले जल से अभिषेक करें। भगवान शिव को चंदन मिश्रित जल अर्पित करें। इस उपाय को मनोकामना पूर्ति के लिए किया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;धनु राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अच्छे जीवनसाथी की कामना से शिव-पार्वती को पीले रंग के फलों का भोग लगाएं। इसमें केला, आम और पपीता शामिल कर सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मकर राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस राशि की लड़कियां शिव-पार्वती को ड्राय फ्रूट से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद श्रद्धा के साथ ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कुंभ राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद किसी जरूरतमंद महिला को सुहाग का सामान जैसे लाल चुनरी, चूड़ी और मेहंदी का दान करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मीन राशि हरतालिका तीज उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस राशि की लड़कियां माता पार्वती को पीले रंग की चुनरी अर्पित करें। साथ ही भगवान शिव के मंदिर में केसरिया ध्वज लगवाना शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर क्यों नहीं देखते चांद? जानें चंद्र दर्शन से जुड़ी कथा और उपाय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-chand-na-dekhne-ka-karan-chandra-darshan-upay-articleshow-xhg9txl</link>
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            <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 14:58:38 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026 Facts&lt;/strong&gt;: गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन क्यों वर्जित माने जाते हैं? जानें भगवान गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी पौराणिक कथा और गलती से चांद दिख जाए तो क्या उपाय करें।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;गणेश चतुर्थी इस साल 14 सितंबर को मनाई जाएगी। मंदिरों से लेकर घरों में तैयारियां अंतिम चरणों पर हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और उनके स्वागत का विधान है। घर-घर में बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है और विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह दिन अपने आप में खास है लेकिन क्या आप जानते हैं विनायक चतुर्थी पर रात में चांद देखने से मना किया जाता है। आइए जानते हैं ऐसा क्यों हैं ?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखा जाता ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार जब भगवान गणेश अपने वाहन मूषक पर सावर होकर यात्रा कर रह थे, उसी दौरान मूषक का संतुलन बिगड़ गया और गणेश जी नीचे गिर पड़े। उस वक्त वहां पर चंद्रदेव भी मौजूद थे। इस दृश्य को देखकर चंद्र देव गणेश जी का उपहास उड़ाने लगे। चंद्रमा के इस व्यवहार से क्रोधित होकर गणेश जी ने श्राप दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो भी व्यक्ति चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर झूठ का कलंक लगेगा। बाद में चंद्रदेव ने अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। जिसके बाद गणेश जी ने श्राप के प्रभाव को सीमित कर दिया। तभी से विनायक चतुर्थी पर चंद्रमा न देखने की परंपरा चली आ रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt; पहली बार घर ला रहे हैं गणेश जी, तो जानें स्थापना से पूजा तक की पूरी विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;गलती से चंद्रमा देखने पर क्या उपाय करें ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आपने किसी कारणवश गलती से या अनजाने में गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देख लिया है तो घबराने की बजाय धार्मिक परंपराओं से जुड़े कुछ उपाय कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;भगवान गणेश से क्षमा मांगे-&lt;/strong&gt; सबसे पहले भगवान के सामने श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें और अनजाने में की गई गलती के लिए माफी मांगे। आप चाहे तो बप्पा को दूर्वा भी अर्पित कर सकते हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;बप्पा के लिए घर में सजावट, 5 डेकोरेशन देख कहेंगे वाह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;मंत्र जाप करें- &lt;/strong&gt;गलती की माफी मांगने के लिए भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंत्र ओम गण गणपतये नम: का जाप कर सकते हैं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;मोदक का भोग-&lt;/strong&gt; भगवान गणेश को मोदक प्रिय हैं। चंद्र दर्शन की क्षमा मांगने और गणपति को प्रसन्न करने के लिए मोदक का भोग भी लगा सकते हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;अनजाने में चंद्रमा दर्शन हो जाने पर डरने या तनाव लेने की जरूरत नहीं है। यह एक धार्मिक मान्यता है। श्रद्धा के साथ भगवान की पूजा और उनसे क्षमा-प्रार्थना मांगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anshika Tiwari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर गलती से दिख गया चौथ का चांद? तुरंत करें ये उपाय, नहीं लगेगा मिथ्या कलंक!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganesh-chaturthi-2026-chouth-ka-chand-galti-se-dikh-jaye-to-kya-karen-mithya-dosh-upay-articleshow-ysspdga</link>
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            <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:33:46 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ganesh Chaturthi Moon Sighting Remedy: गणेश चतुर्थी पर गलती से चौथ का चांद दिख जाए तो क्या करें? जानें मिथ्या दोष से बचने का मंत्र और आसान उपाय, जिन्हें धार्मिक मान्यता में जरूरी माना गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m2a3d9z2103k7qp4hk5kcpyg,imgname-ganesh-chaturthi-moon-sighting-remedy-1789193005026.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi Mithya Dosha Remedy: &lt;/strong&gt;गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन करने को लेकर हिंदू धर्म में एक खास मान्यता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से &lsquo;मिथ्या दोष&rsquo; लगने की आशंका मानी जाती है। यही वजह है कि इस तिथि को कई जगह कलंक चतुर्थी या पत्थर चौथ भी कहा जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। जानिए गणेश चतुर्थी पर गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश चतुर्थी पर गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर गणेश चतुर्थी के दिन अनजाने में चंद्रमा दिखाई दे जाए तो सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में इसके निवारण के लिए भगवान गणेश की पूजा और विशेष मंत्र जाप का उल्लेख मिलता है। सबसे प्रचलित उपाय है &lsquo;स्यमंतक मणि&rsquo; से जुड़ा मंत्र पढ़ना। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से चंद्र दर्शन से जुड़े मिथ्या दोष का निवारण किया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मंत्र:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस मंत्र का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और स्यमंतक मणि की कथा से बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण पर स्यमंतक मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था और इसके पीछे चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को कारण बताया गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश जी की पूजा और दूर्वा अर्पित करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चंद्र दर्शन हो जाने पर उसी दिन भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करना भी पारंपरिक उपाय माना जाता है। गणेश जी को दूर्वा, फल और नैवेद्य अर्पित कर उनसे मिथ्या दोष से मुक्ति की प्रार्थना की जा सकती है। कई धार्मिक परंपराओं में गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठ अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। इसके साथ जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi 2026: गणपति लाने से पहले जान लें ये जरूरी बात, इस समय चांद देखना है वर्जित&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्यमंतक मणि की कथा सुनना भी माना गया है उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चंद्र दर्शन से जुड़े इस प्रसंग में केवल मंत्र ही महत्वपूर्ण नहीं है। धार्मिक परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण, जाम्बवंत और स्यमंतक मणि की कथा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार इस कथा को सुनने या पढ़ने से मिथ्या दोष से बचाव होता है। ध्यान रखें कि ये सभी उपाय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाता।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026 एक ही दिन क्यों? जानिए दोनों पर्व एक ही दिन मनाना सही या गलत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से क्यों किया जाता है परहेज?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश ने चंद्रमा को उसके अहंकार के कारण शाप दिया था। इसी कथा से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर चंद्र दर्शन न करने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु विशेष रूप से चंद्रमा देखने से बचते हैं। 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है और चतुर्थी तिथि 14 सितंबर से 15 सितंबर की सुबह तक रहने की जानकारी पंचांगों में दी गई है। गणेश चतुर्थी 2026 में सुबह 9:01 बजे से रात 8:08 बजे तक चंद्र दर्शन वर्जित बताया गया है। चंद्र दर्शन से बचने का सटीक समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना सबसे उचित रहेगा।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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