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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Tue, 02 Jun 2026 16:03:10 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[Morning Mantra: आंख खुलते ही बोलें 10 सेकंड का ये मंत्र, किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/morning-mantra-karagre-vasate-lakshmi-mantra-for-positive-energy-and-good-luck/articleshow-1vqc1x9</link>
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            <pubDate>Sun, 31 May 2026 11:36:41 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Subah Uthkar Kon Sa Mantra Bole: सुबह उठते ही कौन-सा मंत्र बोलना चाहिए? क्या सचमुच मंत्रों में शक्ति होती है? वो कौन-सा मंत्र है जिसे सुबह-सुबह बोलने से किसी की भी किस्मत चमक सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksya8effp2nyp4g30yvqw2sb,imgname-subah-uthkar-kon-sa-mantra-bole-1780207598063.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Powrefull Mantra:&lt;/strong&gt; धर्म ग्रंथों में अनेक ऐसे मंत्र बताए गए हैं, जो किसी की भी किस्मत चमका सकते हैं। इन मंत्रों को बोलने का समय भी निश्चित है। कहा जाता है कि अगर सुबह उठते ही एक खास मंत्र बोल जाए तो दिन भर पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है और कुछ ही दिनों में सौभाग्य में वृद्धि होने लगती है। इस मंत्र का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में भी बताया गया है। आगे जानिए कौन-सा है वो मंत्र और जाप कैसे करें, साथ ही इससे मिलने वाले फायदों के बारे में&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Numerology: सरकारी नौकरी का सपना होगा पूरा या नहीं? डेट ऑफ बर्थ से जानें जवाब&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सुबह उठते ही कौन-सा मंत्र बोलें?&amp;nbsp;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखकर नीचे लिखा मंत्र बोलना चाहिए&mdash;&lt;strong&gt;कराग्रे वसते लक्ष्मीः। करमध्ये सरस्वती।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;करमूले तु गोविन्दः। प्रभाते करदर्शनम्॥&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;अर्थ-&lt;/strong&gt; हाथों के अग्रभाग में माता लक्ष्मी, मध्य भाग में माता सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु का निवास है। इसलिए सुबह उठकर हाथों का दर्शन करना और इस मंत्र का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना गया है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Gemstone: करनी है लव मैरिज तो पहनें ये रत्न, फटाफट बनेंगे प्रेम विवाह के योग!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस मंत्र को क्यों मानते हैं किस्मत चमकाने वाला?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी की कृपा से ही हमें धन, संपत्ति की प्राप्ति होती है। वहीं माता सरस्वती ज्ञान, बुद्धि और विवेक प्रदान करती हैं। भगवान विष्णु जीवन में हर तरह के सुख हमें प्रदान करते हैं और दुर्भाग्य दूर करते हैं। इस एक मंत्र से इन तीनों देवी-देवताओं की स्तुति हो जाती है। इसलिए ऐसा कहते हैं कि सुबह-सुबह ये मंत्र बोलने से दिन भर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और सौभाग्य और सफलता भी प्राप्त होती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे करें इस मंत्र का जाप?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह जैसे ही नींद खुले तो बिस्तर से नीचे पैर न रखें। पहले दोनों हथेलियों को जोड़कर ध्यानपूर्वक देखें और श्रद्धा भाव से इस मंत्र को बोलें। इसके बाद भगवान का स्मरण करते हुए दैनिक कामों की शुरुआत करें। पूरा मंत्र बोलने में लगभग 10 सेकंड का समय लगता है, लेकिन इसका महत्व बहुत अधिक माना गया है। नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से दुर्भाग्य दूर होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[June 2026 Hindu Calendar: जून में कब है सोमवती अमावस्या और निर्जला एकादशी? जानें पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/june-2026-hindu-festival-list-nirjala-ekadashi-somvati-amavasya-kab-hai/articleshow-2hqgvcg</link>
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            <pubDate>Mon, 25 May 2026 13:01:48 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;June 2026 Hindu Calendar In Hindi: साल 2026 के छठे महीने जून में कईं बड़े व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे। इनमें गायत्री जयंती, निर्जला एकादशी आदि प्रमुख हैं। इस महीने में 15 तारीख तक ज्येष्ठ का अधिक मास रहेगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksf0a4hvtzq4v3fm75b4pkn0,imgname-june-2026-hindu-calendar-1779693851195.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Hindu Festival List:&lt;/strong&gt; साल 2026 का छठा महीना जून बहुत ही खास रहेगा क्योंकि इस महीने की 15 तारीख तक ज्येष्ठ का अधिक मास रहेगा। इसके बाद ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा। इस महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे, जिनमें कमला एकादशी, गायत्री जयंती, निर्जला एकादशी आदि प्रमुख हैं। इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से इस महीने का विशेष महत्व है। आगे जानिए जून 2026 में कब, कौन-सा त्योहार मनाया जाएगा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Religious Belief: ऑनलाइन पूजा-पाठ का पूरा फायदा मिलता है या नहीं? जानें उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Padmini Ekadashi 2026: कब है अधिक मास की पद्मिनी एकादशी, 27 या 28 मई? नोट करें सही डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जून 2026 के व्रत-त्योहार (Fasts and festivals of June 2026)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;3 जून, बुधवार- गणेश चतुर्थी व्रत11 जून, गुरुवार- कमला एकादशी12 जून, शुक्रवार- प्रदोष व्रत13 जून, शनिवार- मासिक शिवरात्रि14 जून, रविवार- श्राद्ध अमावस्या15 जून, सोमवार- सोमवती अमावस्या अधिक मास17 जून, बुधवार- रंभा तीज व्रत18 जून, गुरुवार- विनायकी चतुर्थी व्रत20 जून, शनिवार- विंध्यवासिनी पूजा23 जून, मंगलवार- महेश नवमी24 जून, बुधवार- गायत्री जयंती25 जून, गुरुवार- निर्जला एकादशी27 जून, शनिवार- प्रदोष व्रत29 जून, सोमवार- स्नान दान व्रत पूर्णिमा&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;साल की सबसे बड़ी एकादशी इस महीने&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जून 2026 में साल की सबसे बड़ी एकादशी का व्रत किया जाएगा, जिसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इस बार निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से साल भर की जाने वाली एकादशी का पुण्य प्राप्त हो जाता है। महाभारत के अनुसार पांडु पुत्र भीम सिर्फ यही एक एकादशी का व्रत करते थे, इसलिए इसका एक नाम भीमसेनी एकादशी भी है। इस व्रत में बिना पानी पीए व्रत करने का नियम है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अधिक मास में सोमवती अमावस्या का संयोग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्येष्ठ के अधिक मास के अंतिम यानी 15 जून को सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। ऐसा संयोग कईं दशकों में एक बार बनता है। इस शुभ संयोग में नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन देश की पवित्र नदियों में भक्त स्नान-दान के लिए आते हैं। इसी दिन ज्येष्ठ के अधिक मास का समापन भी होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Mahabharata Facts: गांधारी के सामने भीम ने किया था खुलासा, कैसे पिया दु:शासन का खून?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahabharata-facts-bhim-revealed-truth-about-dushasan-blood-before-gandhari/articleshow-3t4x7b8</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 15:58:17 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mahabharata Interesting Facts: भीम ने दु:शासन का रक्त पीने की प्रतिज्ञा क्यों ली थी?कौरव सभा में द्रौपदी के साथ क्या हुआ था? क्या भीम ने सचमुच दु:शासन का खून पिया था? युद्ध के बाद गांधारी ने भीम से क्या सवाल पूछा था?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Untold Stories of the Mahabharata:&lt;/strong&gt; महाभारत में ऐसे अनेक रहस्य छिपे हैं जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। ये बात ये तो सभी जानते हैं कि युद्ध के दौरान भीम ने दु:शासन का वध कर दिया और अपनी प्रतिज्ञा का अनुसार उसका खून भी पिया था। लेकिन ये अधूरा सच है। स्वयं भीम ने इस घटना की सच्चाई गांधारी को बताई थी। जिसे सुनकर उनका क्रोध शांत हो गया था। आगे जानिए क्या है भीम द्वारा दु:शासन के खून पीछे की सच्चाई&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Adhik Maas Purnima 2026: अधिक मास पूर्णिमा का व्रत कब करें? जानें सही डेट और मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भीम ने ली थी दु:शासन का खून पीने की प्रतिज्ञा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कौरव सभा में जब दुर्योधन के कहने पर दु:शासन पांडवों की द्रौपदी को घसीसते हुए लाया और भरी सभा में उसका चीरहरण किया तो भीम ने उसी समय क्रोधित होकर ये प्रतिज्ञा ली थी कि वे युद्ध में दु:शासन का वध करेंगे और उसकी छाती का रक्त पिएंगे। भीम की प्रतिज्ञा सुनकर पूरी सभा में सन्नाटा छा गया था। भीष्म के बाद भीम की इस प्रतिज्ञा को सबसे भीषण माना जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Hindu Calendar: जून में कब है सोमवती अमावस्या और निर्जला एकादशी? जानें पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भीम ने पूरी की अपनी प्रतिज्ञा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कुरुक्षेत्र युद्ध में जब भीम और दु:शासन आमने-सामने आए, तब भीम ने गदा युद्ध में उसे पराजित कर दिया। और दु:शासन का सीना चीरकर उसका खून पिया था। ये दृश्य देखकर पूरी कौरव सेना में खलबली मच गई है। सभी लोग भीम के इस रूप को देखकर डरकर इधर-उधर भागने लगे थे। इसके बाद भीम ने दु:शासन के खून से द्रौपदी के बाल भी धोए थे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गांधारी के सामने भीम ने किया खुलासा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;युद्ध समाप्त होने के बाद जब पांडव हस्तिनापुर गए थो गांधारी उनसे बहुत क्रोधित थी। गांधारी की नजर पड़ते ही युधिष्ठिर के पैरों के नाखून काले पड़ गए थे। ये देख किसी की भी हिम्मत गांधारी के पास जाने की नहीं हुई। बाद में श्रीकृष्ण ने गांधारी को समझाया और उनका क्रोध शांत किया। जब गांधारी ने भीम से पूछा कि उसने दु:शासन का खून क्यों पिया तो भीम ने बताया कि दु:शासन का उनके दांतों से नहीं गया। सिर्फ प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Sawan 2026 Start Date: क्यों 1 महीना देर से आएगा सावन, कब से शुरू होगा, कितने सोमवार होंगे?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/sawan-2026-start-date-kab-se-shuru-hoga-kitne-somwar-honge-raksha-bandhan-date/articleshow-56ybaq9</link>
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            <pubDate>Sun, 31 May 2026 14:31:05 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Sawan 2026 Kab Se Shuru Hoga: सावन 2026 कब से शुरू होगा? इस बार सावन एक महीने देरी से क्यों आएगा? सावन 2026 में कितने सोमवार होंगे? इस बार रक्षाबंधन का पर्व किस तारीख को मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Sawan 2026:&lt;/strong&gt; हिंदू पंचांग के पांचवें महीने को सावन कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार ये महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। सावन में भक्त अलग-अलग तरीकों से महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। भगवान शिव की कथाओं का प्रवचन भी होता है वहीं प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। साल 2026 में सावन एक महीने देरी से आएगा। ऐसा क्यों होगा, सावन किस दिन से शुरू होगा और कब तक रहेगा? आगे जानिए इन सभी सवालों के जवाब&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Morning Mantra: आंख खुलते ही बोलें 10 सेकंड का ये मंत्र, किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों एक महीने देर से आएगा सावन?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार हिंदू वर्ष की शुरूआत चैत्र मास से होती है। इसके बाद वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ और फिर सावन मास आता है। आमतौर पर जून के अंत में या जुलाई की पहले सप्ताह में शुरू हो जाता है लेकिन लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। इसके पीछे की वजह से ज्येष्ठ का अधिक मास। यानी इस बार ज्येष्ठ मास 30 नहीं बल्कि 60 दिनों का होगा। इसके कारण सावन मास एक महीने देरी से शुरू होगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Somvati Amavasya 2026: साल की पहली सोमवती अमावस्या कब है, इस दिन कौन-सा दुर्लभ संयोग बनेगा?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब से कब तक रहेगा सावन 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार इस बार सावन मास की शुरूआत जुलाई के अंतिम सप्ताह में 30 जुलाई, गुरुवार से होगी। भगवान शिव को प्रिय ये महीना 28 अगस्त, शुक्रवार तक रहेगा। इस बार सावन पूरे 30 दिनों का रहेगा। इस दौरान अनेक व्रत-त्योहार भी मनाए जाएंगे। जिसके चलते सावन मास का महत्व और भी अधिक हो जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सावन 2026 में कितने सोमवार?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बार सावन 2026 में 4 सोमवार का संयोग बन रहा है। ये सभी सोमवार अगस्त महीने में रहेंगे। सावन का पहला सोमवार 3 तारीख को, दूसरा 10 को, तीसरा 17 और चौथा व अंतिम सोमवार 24 तारीख को रहेगा। इनमें से 10 अगस्त को प्रदोष व्रत और 17 को नागपंचमी का उत्सव मनाया जाएगा। जिसके चलते इन सोमवार का महत्व और भी अधिक माना जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है रक्षाबंधन 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सावन के अंतिम दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसके पहले सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। हरियाली अमावस्या का उत्सव 12 अगस्त को और हरियाली तीज 15 अगस्त को रहेगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Mahabharata Facts: गुरु दक्षिणा में अंगूठा देने के बाद कहां गया एकलव्य, क्या हुआ उसके साथ?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/eklavya-after-giving-thumb-in-guru-dakshina-interesting-mahabharata-facts/articleshow-6edgg5u</link>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:19:18 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Interesting Facts About Eklavya: एकलव्य किसका पुत्र था? द्रोणाचार्य ने एकलव्य को शिष्य बनाने से क्यों मना कर दिया था? अंगूठा देने के बाद एकलव्य कहां गया था? एकलव्य किस राजा की सेना में शामिल हुआ था?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahabharata Interesting Facts:&lt;/strong&gt; एकलव्य महाभारत के उन पात्रों में से एक है जिनके बारे में लोग जानते तो हैं लेकिन पूरी तरह से नहीं। एकलव्य द्वारा गुरु दक्षिणा में अंगूठा काट कर देने की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है, इसलिए उसे गुरु का श्रेष्ठ शिष्य भी कहा जाता है। उनकी गुरु भक्ति और त्याग की कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है। अंगूठा दान में देने के बाद एकलव्य का क्या हुआ, ये बहुत कम लोगों को पता है। आगे जानिए कौन था एकलव्य और उसके जीवन से जुड़ी रोचक बातें&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Adhik Maas Purnima 2026: 30 या 31 मई, कब है अधिक मास पूर्णिमा? जानें पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन था एकलव्य?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महाभारत के अनुसार एकलव्य निषाद राज हिरण्यधनु का पुत्र था और बचपन से ही महान धनुर्धर बनना चाहता था। उसकी इच्छा थी कि वह उस समय के सबसे बड़े गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा प्राप्त करे। जब एकलव्य द्रोणाचार्य के पास पहुंचा तो उन्होंने उसे शिष्य बनाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह राजवंश से नहीं था। तब एकलव्य ने जंगल में द्रोणाचार्य की मिट्टी की प्रतिमा बनाई और उसी को गुरु मानकर धनुर्विद्या का अभ्यास शुरू कर दिया। लगातार अभ्यास से वह कुशल धनुर्धर बन गया।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mahabharata Facts: गांधारी के सामने भीम ने किया था खुलासा, कैसे पिया दु:शासन का खून?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गुरु द्रोणाचार्य ने क्यों मांगा एकलव्य का अंगूठा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब द्रोणाचार्य को पता चला कि एकलव्य उनकी प्रतिमा के सामने अभ्यास करके महान धनुर्धर बन गया है, तो उन्होंने गुरु दक्षिणा के रूप में उसके दाहिने हाथ का अंगूठा मांग लिया ताकि वो सबसे महान धनुर्धर न बन सके क्योंकि द्रोणाचार्य ने अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर का वरदान दिया था। एकलव्य ने बिना किसी सवाल किए अपना अंगूठा काटकर द्रोणाचार्य को दे दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अंगूठा देने के बाद कहां गया एकलव्य?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अंगूठा देने के बाद भी एकलव्य ने अभ्यास नहीं छोड़ा और उंगलियों से तीर चलाने का अभ्यास करता रहा। धीरे-धीरे उसने फिर से युद्ध कौशल हासिल कर लिया और एक शक्तिशाली योद्धा बन गया। बाद में एकलव्य मगध के राजा जरासंध की सेना से जुड़ गया था। जरासंध के साथ मिलकर उसने अनेक युद्ध किए और अपनी वीरता का परिचय दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किसने किया एकलव्य का वध?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जरासंध भगवान श्रीकृष्ण को अपना परम शत्रु मानता था। इसलिए बार-बार मथुरा पर आक्रमण करता था। एक बार जब जरासंध ने मथुरा पर आक्रमण किया तो एकलव्य भी उसके साथ था। श्रीकृष्ण ने इस युद्ध में जरासंध के अनेक सहयोगियों को मार गिराया। एकलव्य से भी श्रीकृष्ण का युद्ध हुआ। इस युद्ध में एकलव्य श्रीकृष्ण के हाथों मारा गया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Padmini Ekadashi 2026: पद्मिनी एकादशी कब है, कैसे करें व्रत-पूजा? जानें मंत्र-मुहूर्त, आरती और महत्व]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/padmini-ekadashi-2026-date-shubh-muhurat-puja-vidhi-paran-time-adhik-maas-vrat-significance/articleshow-7w8fp7u</link>
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            <pubDate>Tue, 26 May 2026 10:13:16 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Padmini Ekadashi 2026 Date: पद्मिनी एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। ये एकादशी तीन साल में एक बार यानी अधिक मास में ही आती है। इस बार पद्मिनी एकादशी का व्रत मई 2026 में किया जाएगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksh9fgymt7aw2865hb49qjc1,imgname-padmini-ekadashi-2026-1779770573780.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Kab Hai Padmini Ekadashi 2026:&lt;/strong&gt; ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से शुरू हो चुका है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। ये एकादशी 3 साल में एक बार आती है। पद्मिनी एकादशी का महत्व अन्य एकादशियों से कहीं अधिक बताया गया है। मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। जानें इस बार कब है पद्मिनी एकादशी, कैसे करें व्रत, पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Premanand Maharaj Video: प्रेमानंद महाराज ने भक्तों से क्यों कहा- &ldquo;मैं रहूं या ना रहूं&hellip;&rdquo;? भावुक संदेश हुआ वायरल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है पद्मिनी एकादशी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 मई, मंगलवार की सुबह 05:10 से शुरू होगी, जो 27 मई, बुधवार की सुबह 06:21 तक रहेगी। दशमी तिथि युक्त एकादशी में व्रत करना शुभ नही होता इसलिए पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई को द्वादशी तिथि के संयोग में किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Hindu Calendar: जून में कब है सोमवती अमावस्या और निर्जला एकादशी? जानें पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पद्मिनी एकादशी पारण शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विद्वानों के अनुसार व्रत के अगले दिन पारण करना जरूरी है तभी उसका पूरा फल मिलता है। पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई को किया जाएगा तो इसका पारण दूसरे दिन यानी 28 मई, गुरुवार को किया जाएगा। पारण का मुहूर्त सुबह 05:25 से 07:56 तक रहेगा। यानी भक्तों को व्रत के पारण के लिए 2 घंटे 31 मिनिट का समय मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पद्मिनी एकादशी पूजा मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 09:04 से 10:44 तक&amp;nbsp;सुबह 10:44 से दोपहर 12:23 तक&amp;nbsp;दोपहर 11:57 से 12:50 तक (अभिजीत मुहूर्त)&amp;nbsp;दोपहर 12:23 से 02:03 तक&amp;nbsp;दोपहर 03:42 से शाम 05:22 तक&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे करें पद्मिनी एकादशी व्रत-पूजा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- पद्मिनी एकादशी से एक दिन पहले यानी 26 मई, मंगलवार की रात को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। 27 मई, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लें।&amp;nbsp;- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। यानी किसी से झूठ न बोलें, किसी पर क्रोध न करें। जिस स्थान पर पूजा करनी है उसकी साफ-सफाई करें और गंगा जल या गौमूत्र छिड़ककर पवित्र कर लें।&amp;nbsp;- ऊपर बताए किसी भी शुभ मुहूर्त में पूजा स्थान पर लकड़ी का पटिया रख इस पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू करें। भगवान की प्रतिमा को तिलक लगाकर हार पहनाएं।&amp;nbsp;- शुद्ध घी का दीपक लगाएं। इसके बाद कुंकुम, चावल, रोली, अबीर, गुलाल, फूल आदि चीजें भी एक-एक करके भगवान को अर्पित करें। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप भी मन ही मन में करते रहें।&amp;nbsp;- भगवान को अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं, इसमें तुलसी के पत्ते जरूर रखें। परिवार के साथ विधि-विधान से भगवान की आरती करें। रात को सोएं नहीं, भजन-कीर्तन करें।&amp;nbsp;- अगले दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दक्षिणा देकर पारणा करें। इस तरह पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी और हर तरह का सुख भी जीवन में मिलता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भगवान विष्णु की आरती लिरिक्स हिंदी में&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।&amp;nbsp;सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।&amp;nbsp;तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी।&amp;nbsp;पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।&amp;nbsp;मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।&amp;nbsp;किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।&amp;nbsp;अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।&amp;nbsp;श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&amp;nbsp;श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।&amp;nbsp;स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥&amp;nbsp;ओम जय जगदीश हरे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Mahabharata Facts: महाभारत का वो कौन-सा श्राप है, जिसके कारण महिलाएं आज भी परेशान हैं?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mahabharata-facts-why-yudhishthira-cursed-women-secret-cannot-remain-hidden-story/articleshow-cbkzlhu</link>
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            <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 16:43:12 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;The Curses of the Mahabharata: महाभारत में किसने दिया था महिलाओं को श्राप? महिलाओं के पेट में क्यों कोई बात नहीं टिकती, इसके पीछे क्या कारण है? धर्मराज युधिष्ठिर ने किस बात से नाराज होकर महिलाओं को श्राप दिया था?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kt1e6drwmsm15x0ykd24yrgg,imgname-mahabharata-interesting-facts-1780312389404.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahabharata Interesting Facts:&lt;/strong&gt; महाभारत की कथा जितनी रोचक है उतनी ही रहस्यमयी भी है। इसमें बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को पता है। महाभारत में एक ऐसे श्राप के बारे में जानकारी मिलती है जिसके कारण महिलाएं आज भी परेशान हैं। सुनने में ये बात अजीब लगे लेकिन इसे पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता है। ये श्राप और किसी ने नहीं बल्कि स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर ने महिलाओं को दिया था। आगे जानिए क्या है इस श्राप से जुड़ी कथा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: 2 दिन रहेगी निर्जला एकादशी, किस दिन करें व्रत-पूजा? जानें सही डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कुंती ने युधिष्ठिर को कौन-सा सच बताया?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महाभारत के शांति पर्व के अनुसार, जब युद्ध समाप्त हो गया तो युधिष्ठिर आदि सभी पांडव अपने मृत परिजनों का श्राद्ध आदि कर्म कर रहे थे। उस समय उनकी माता कुंती ने युधिष्ठिर से दानवीर कर्ण का श्राद्ध करने को भी कहा। जब युधिष्ठिर ने पूछा कि &lsquo;कर्ण तो भरतवंशी नहीं और न ही हमारे कोई रिश्तेदार हैं तो उनका श्राद्ध मैं कैसे कर सकता हूं?&rsquo;युधिष्ठिर की बात सुनकर कुंती ने कहा &lsquo;कर्ण और कोई नहीं मेरा सबसे बड़ा पुत्र था, इसलिए तुम्हें उसका श्राद्ध करना चाहिए तभी उसकी आत्मा को भी मोक्ष प्राप्त हो।&rsquo;अपनी माता के मु्ख से कर्ण के जन्म की कथा सुन युधिष्ठिर को बहुत दुख हुआ और अपनी माता कुंती से कहा &lsquo;ये बात अगर आप पहले बता देतीं तो हम अपने भाई की मृत्यु के पाप से बच जाते।&rsquo;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Sawan 2026 Start Date: क्यों 1 महीना देर से आएगा सावन, कब से शुरू होगा, कितने सोमवार होंगे?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;युधिष्ठिर ने दिया महिलाओं को श्राप?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस घटना के बाद युधिष्ठिर ने पूरी महिला जाति को श्राप देते हुए कहा &lsquo;आज के बाद कोई भी स्त्री अपने पेट में कोई राज की बात नहीं छिपा पाएगी अर्थात वे किसी रहस्य को लंबे समय तक छिपाकर नहीं रख पाएंगी।&rsquo; मान्यता है कि युधिष्ठिर का ये श्राप आज के समय में भी अपना असर दिखा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इसलिए महिलाएं हैं परेशान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महिलाओं के बारे में आज भी ये बात कही जाती है कि कोई भी राज की बात वे ज्यादा समय तक छिपा तक नहीं रख सकती है। किसी न किसी बहाने वे इस राज की बात को बता ही देती हैं। इसके पीछे युधिष्ठिर के श्राप को ही कारण माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Ganga Dussehra Katha: राजा सगर के पुत्रों को कैसे मिला मोक्ष? यहां पढ़ें गंगा दशहरा की रोचक कथा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ganga-dussehra-katha-in-hindi-raja-sagar-putra-ko-kaise-mila-moksha/articleshow-cysb236</link>
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            <pubDate>Sun, 24 May 2026 16:10:26 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ganga Dussehra 2026: हर साल ज्येष्ठ मास में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि यही वो दिन है जब देवनदी गंगा धरती पर आई थी। इसलिए इस दिन गंगा नदी में स्नान करने और पूजा का विशेष महत्व माना गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Kab Hai Ganga Dussehra:&lt;/strong&gt; धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। इसीलिए हर साल इस तिथि पर गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस बार गंगा दशहरा का पर्व 25 मई, सोमवार को मनाया जाएगा। इस पर्व का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। गंगा दशहरा से जुड़ी एक रोचक कथा भी है जिसे सुनकर ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़ें गंगा दशहरा की रोचक कथा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganga Dussehra 2026: घर में गंगाजल रखने के क्या हैं नियम? भूलकर भी न करें ये 1 गलती&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है गंगा दशहरा की कथा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वाल्मीकि रामायण के अनुसार, प्राचीन समय में राजा सगर नाम के एक पराक्रमी राजा थे। उन्होंने एक बार अश्वमेध यज्ञ कराया। उस यज्ञ के घोड़े को देवराज इंद्र ने चोरी करके कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। राजा सगर के 60 हजार पुत्र जब घोड़े की तलाश करते हुए कपिल मुनि के आश्रम तक पहुंचे तो उन्हें लगा कि कपिल मुनि ने ही ये घोड़ा चुराया है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ganga Dussehra 2026: 7 साल बाद गंगा दशहरा पर दुर्लभ संयोग, जानें सही डेट, मुहूर्त, पूजा विधि और आरती&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ऋषि कपिल उनकी बातों से क्रोधित हो गए और अपनी तपस्या के प्रभाव से उन्हें भस्म कर दिया। ऐसा होने से उन राजकुमारों की आत्माओं को मुक्ति नहीं मिल पाई। सिर्फ देवनदी गंगा के स्पर्श से ही उन्हें मुक्ति मिल सकती थी। तब कई पीढ़ियों बाद राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कठोर तपस्या की और मां गंगा को धरती पर आने के लिए मना लिया।गंगा नदी का वेग इतना तेज था कि पृथ्वी उसे सहन नहीं कर सकती थी। तब भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसके बाद मां गंगा भगीरथ के पीछे-पीछे चलती हुई उस स्थान तक पहुंचीं, जहां राजा सगर के पुत्रों की अस्थियां थीं।गंगाजल के स्पर्श से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। जिस दिन गंगा नदी धरती पर आई, उस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी। तभी से गंगा दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Adhik Maas Purnima 2026: अधिक मास पूर्णिमा का व्रत कब करें? जानें सही डेट और मुहूर्त]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/adhik-maas-purnima-2026-vrat-date-shubh-muhurat-kya-kare-kya-na-kare/articleshow-dgcha1u</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:55:43 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Adhik Maas Purnima 2026 Date: अधिक मास पूर्णिमा 2026 का व्रत किस दिन किया जाएगा? अधिक मास की पूर्णिमा 2026 की सही तिथि और समय क्या है? अधिक मास पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksptxcgn6ype94t049yamv9n,imgname-adhik-maas-purnima-2026-1779956625941.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Adhik Maas Purnima Kab Hai:&lt;/strong&gt; इन दिनों ज्येष्ठ का अधिक मास चल रहा है। अधिक मास की पूर्णिमा का संयोग 3 साल में एक बार बनता है। इसलिए धर्म ग्रंथों में इसका विशेष महत्व बताया गया है। इस बार अधिक मास की पूर्णिमा का संयोग 2 दिन बन रहा है। जिसके चलते लोगों के मन में ये कन्फ्यूजन है कि अधिक मास की पूर्णिमा का व्रत-पूजा, उपाय आदि किस दिन करें। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानिए अधिक मास की पूर्णिमा की सही डेट व अन्य जानकारी&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Hindu Calendar: जून में कब है सोमवती अमावस्या और निर्जला एकादशी? जानें पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है अधिक मास पूर्णिमा की सही डेट?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि 30 मई, शनिवार की सुबह 11 बजकर 57 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 31 मई, रविवार की दोपहर 2 बजकर 14 मिनिट तक रहेगी। यानी दोनों ही दिन पूर्णिमा तिथि का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार चूंकि पूर्णिमा तिथि का चंद्रोदय 30 मई, शनिवार को होगा, इसलिए इसी दिन अधिक मास की पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Budh Gochar May 2026: बुध बढ़ाएगा 4 राशियों की टेंशन, धन-करियर पर डालेगा बुरा असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अधिक मास 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 07:25 से 09:04 तकसुबह 12:24 से 02:04 तकदोपहर 11:57 से 12:50 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 03:43 से शाम 05:23 तकशाम 07:43 से 09:04 तक&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अधिक मास की पूर्णिमा पर क्या करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और धन का दान करें।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य दें और चंद्र दर्शन करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अधिक मास की पूर्णिमा पर क्या नहीं करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा का सेवन न करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; किसी से विवाद या कटु वचन बोलने से बचें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; घर में गंदगी और नकारात्मक माहौल बिल्कुल न रखें।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; किसी का भी मजाक न उड़ाएं और अपमान करने से बचें।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; देर तक सोने और आलस्य करने से बचना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Adhik Maas Purnima 2026: 30 या 31 मई, कब है अधिक मास पूर्णिमा? जानें पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/adhik-maas-purnima-2026-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-vrat-rules-in-hindi/articleshow-gau8opa</link>
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            <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:37:32 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Adhik Maas Purnima Kab Hai: अधिक मास पूर्णिमा पर किसकी पूजा करनी चाहिए? अधिक मास पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त क्या है? पूर्णिमा व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? अधिक मास पूर्णिमा पर स्नान-दान का क्या महत्व है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kssfsgnzh8m83js790hg5fqe,imgname-adhik-maas-purnima-2026-date-1780045628095.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Adhik Maas Purnima 2026 Date: इन दिनों ज्येष्ठ का अधिक मास चल रहा है। इस मास की पूर्णिमा तिथि बहुत ही खास मानी गई है क्योंकि ये 3 साल में एक बार आती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर जरूरतमंदों को दान देने का विशेष महत्व है। साथ ही अनेक देवताओं का पूजन भी इस दिन किया जाता है। मान्यता है कि अधिक मास की पूर्णिमा पर किए गए स्नान-दान और पूजन से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस बार अधिक मास की पूर्णिमा का पर्व 30 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। आगे जानिए इस दिन किसकी पूजा करें, शुभ मुहूर्त व अन्य जानकारी&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mahabharata Facts: गांधारी के सामने भीम ने किया था खुलासा, कैसे पिया दु:शासन का खून?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अधिक मास पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 07:25 से 09:04 तकसुबह 12:24 से 02:04 तकदोपहर 11:57 से 12:50 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 03:43 से शाम 05:23 तकशाम 07:43 से 09:04 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Hindu Calendar: जून में कब है सोमवती अमावस्या और निर्जला एकादशी? जानें पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अधिक मास पूर्णिमा व्रत-पूजा विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 30 मई, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।- इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूलकर व्रत का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का विधि-विधान से पालन करें।- ऊपर बताए शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें। सबसे पहले बाजोट पर कलश स्थापना कर भगवान श्रीगणेश का पूजन करें।- देवी पार्वती सहित भगवान शिव की भी पूजा-अर्चना करें। इस दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी की पूजा का भी विधान है।- रात में चंद्रमा के उदय होने पर उनको भी अर्घ्य देकर पूजा करें। श्रद्धापूर्वक पूर्णिमा व्रत की कथा का पाठ सुनें- पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा भी जरूर सुननी चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।- जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा से अधिक मास की पूर्णिमा का व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अधिक मास की पूर्णिमा पर क्या खाएं-क्या नहीं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अधिक मास की पूर्णिमा का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस दिन उपवास में जल, फल तथा दूध से बनी सात्विक चीजें खा सकते हैं। इनके अलावा सभी प्रकार के अनाज, मसाले, तम्बाकू, चाय-कॉफी आदि चीजें इस दिन भूलकर भी न खाएं-पीएं। किसी की बुराई न करें और न ही किसी पर क्रोध करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Padmini Ekadashi Vrat Katha: पद्मिनी एकादशी व्रत से मिला अजेय पुत्र, जिसे रावण को भी हराया! पढ़ें रोचक कथा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/padmini-ekadashi-vrat-katha-in-hindi-ravan-ko-harane-wale-putra-ki-kahani/articleshow-gtzbvgp</link>
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            <pubDate>Wed, 27 May 2026 07:56:21 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Padmini Ekadashi Story: कब है पद्मिनी एकादशी? इस व्रत में किसकी पूजा की जाती है? कार्तवीर्य अर्जुन ने किस राक्षस राजा को बंदी बनाया था? पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से क्या होता है?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Padmini Ekadashi Vrat Katha In Hindi:&lt;/strong&gt; इन दिनों ज्येष्ठ का अधिक मास चल रहा है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। इस एकादशी को धर्म ग्रंथों में बेहद पुण्यदायी माना गया है। इस बार पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई, बुधवार को है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। पद्मिनी एकादशी से जुड़ी एक कथा भी है, जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे जानिए पद्मिनी एकादशी व्रत की पूरी कथा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Padmini Ekadashi 2026: पद्मिनी एकादशी 27 मई को, जानें मंत्र-मुहूर्त, आरती और महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पद्मिनी एकादशी व्रत की कथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;त्रेतायुग में महिष्मती नगरी में कार्तवीर्य नाम के एक राजा राज्य करते थे। उनकी सौ रानियां थीं, लेकिन किसी से भी उन्हें योग्य पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। पुत्र की इच्छा से राजा ने अनेक यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान करवाए, परंतु कोई लाभ नहीं मिला। अंत में राजा ने कठोर तपस्या करने का निश्चय किया और अपनी पत्नी प्रमदा के साथ गंधमादन पर्वत पर चले गए।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Hindu Calendar: जून में कब है सोमवती अमावस्या और निर्जला एकादशी? जानें पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजा और रानी ने वहां दस हजार वर्षों तक कठिन तप किया, लेकिन भगवान प्रसन्न नहीं हुए। तपस्या के कारण राजा का शरीर बहुत कमजोर हो गया। यह देखकर रानी प्रमदा दुखी हुईं और महासती अनसूया से इसका कारण पूछा। तब देवी अनसूया ने बताया कि अधिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की परम एकादशी बहुत पुण्यदायी होती हैं। इन व्रतों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ण करते हैं।देवी अनसूया के कहने पर रानी प्रमदा ने पद्मिनी एकादशी का व्रत किया और रातभर जागरण किया। रानी की भक्ति से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। रानी ने अपने पति के लिए पुत्र का वरदान मांगा। तब भगवान विष्णु ने राजा को ऐसा पुत्र मिलने का आशीर्वाद दिया, जो देवता, दानव और मनुष्यों से अजेय हो।कुछ समय बाद राजा के यहां कार्तवीर्य अर्जुन नामक महान पुत्र का जन्म हुआ। वह बहुत पराक्रमी और शक्तिशाली थे। उन्होंने रावण जैसे बलशाली राजा को भी युद्ध में पराजित कर बंदी बना लिया था। इस प्रकार पद्मिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा को महान पुत्र की प्राप्ति हुई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Adhik Maas 2026: कैसे होते हैं अधिक मास में जन्मे लोग, इनमें क्या विशेषता होती है?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/adhik-maas-2026-kaise-hote-hain-adhik-maas-mein-janme-log/articleshow-h93zwrm</link>
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            <pubDate>Sun, 31 May 2026 16:14:45 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Adhik Maas 2026: अधिक मास में जन्म लेने वाले लोग कैसे होते हैं? अधिक मास में जन्म लेने वाले लोगों में कौन सी विशेषता होती है? क्या अधिक मास में जन्म लेने वाले लोगों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksyt5aqk9ac28p5bfy9trhed,imgname-adhik-maas-birth-astrology-1780224273139.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Adhik Maas Birth Astrology: &lt;/strong&gt;इन दिनों ज्येष्ठ का अधिक मास चल रहा है, जो 15 जून तक रहेगा। अधिक मास हर 3 साल में आता है। धर्म ग्रंथों में इसे बहुत ही पवित्र माना गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। मान्यता है कि अधिक माह में जन्म लेने वाले लोगों में कुछ विशेष गुण होते हैं जो इन्हें औरों से अलग बनाते हैं। ऐसा भी कहते हैं इस महीने में जन्मे लोगों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। आगे जानिए क्यों खास होते हैं अधिक मास में जन्मे लोग&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Sawan 2026 Start Date: क्यों 1 महीना देर से आएगा सावन, कब से शुरू होगा, कितने सोमवार होंगे?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;धार्मिक होते हैं अधिक मास में जन्मे लोग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में जन्मे लोग जन्म से ही धार्मिक स्वभाव के होते हैं। इन झुकाव पूजा-पाठ, धर्म और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर अधिक होता है। ये लोग आध्यात्म के गहरे अर्थ को समझने की कोशिश करते हैं। ये लोग कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोते। वे सोच-समझकर निर्णय लेने में विश्वास रखते हैं। ये लोग परिवार का नाम रौशन करते हैं।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Morning Mantra: आंख खुलते ही बोलें 10 सेकंड का ये मंत्र, किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दयालु और परोपकारी स्वभाव&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अधिक मास में जन्मे लोग दूसरों की मदद करने वाले और संवेदनशील होते हैं। जरूरतमंदों की सहायता करने में इन्हें विशेष संतोष मिलता है। ऐसे लोग अपने संबंधों और रिश्तों को महत्व देते हैं और इन्हें निभाने में हमेशा आगे रहते हैं। यही कारण है परिवार में सभी लोग इन्हें बहुत पसंद करते हैं। इन पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा मानी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;संघर्ष के बाद मिलती है सफलता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ये लोग अगर किसी गरीब परिवार में भी जन्म लेते हैं तो अपनी मेहनत से सफलता प्राप्त करते हैं। इन लोगों को जीवन में सफलता थोड़ी देर से मिल सकती है, लेकिन मेहनत और लगन के दम पर वे अपने लक्ष्य हासिल कर लेते हैं। ये किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते हैं और जीवन में हमेशा अपने आदर्शों का पालन करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसा होता है अधिक मास में जन्मे लोगों का भविष्य?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अधिक मास में जन्मे लोगों का भविष्य बहुत ही अच्छा होता है। इनके जीवन में पैसों की कमी नहीं होती। ऐसे लोग भगवान विष्णु की कृपा से हर तरह का सुख भोगते हैं और नाम भी कमाते हैं। इनका पारिवारिक जीवन भी सुखमय होता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Somvati Amavasya 2026: साल की पहली सोमवती अमावस्या कब है, इस दिन कौन-सा दुर्लभ संयोग बनेगा?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/somvati-amavasya-2026-date-significance-adhik-maas-mithun-sankranti-upay-niyam/articleshow-pwq578m</link>
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            <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:42:05 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Somvati Amavasya 2026: साल 2026 की पहली सोमवती अमावस्या कब पड़ रही है?, अधिक मास में आने वाली सोमवती अमावस्या को दुर्लभ क्यों माना जाता है?, सोमवती अमावस्या के दिन कौन-से शुभ कार्य करने चाहिए?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksw2afw9e122qf6xs8dxc7az,imgname-somvati-amavasya-2026-date-1780132167561.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Somvati Amavasya 2026 Date:&lt;/strong&gt; धर्म ग्रंथों में अमावस्या को बहुत ही खास तिथि बताया गया है। इस तिथि पर पितरों की शांति के लिए उपाय, पूजा आदि किए जाते हैं। जिस सोमवार को अमावस्या तिथि का संयोग बनता है, उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस बार जून 2026 में सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। ये सोमवती अमावस्या बहुत ही दुर्लभ मानी जा रही है। आगे जानिए कब है ये सोमवती अमावस्या और क्यों ये इतनी खास है&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;June 2026 Hindu Calendar: जून में कब है सोमवती अमावस्या और निर्जला एकादशी? जानें पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है 2026 की पहली सोमवती अमावस्या?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, साल 2026 में पहली सोमवती अमावस्या का संयोग 15 जून को बन रहा है। ये ज्येष्ठ के अधिक मास की अमावस्या रहेगी। चूंकि अधिक मास 3 साल में एक बार आता है, इसलिए इस महीने में सोमवती अमावस्या का संयोग बहुत ही दुर्लभ है। साथ ही साल 2026 की पहली सोमवती अमावस्या भी रहेगी।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mahabharata Facts: गांधारी के सामने भीम ने किया था खुलासा, कैसे पिया दु:शासन का खून?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों खास है ये सोमवती अमावस्या?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विद्वानों के अनुसार 3 बाद अधिक मास का संयोग बनता है। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं यानी भगवान विष्णु की महीना। इस महीने में सोमवती अमावस्या का संयोग कईं दशकों में एक बार बनता है। इस बार 15 जून को ये दुर्लभ संयोग बन रहा है, इसलिए इसे बहुत ही खास माना जा रहा है। 15 जून को ही सूर्य वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। इसलिए इस दिन मिथुन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या करें सोमवती अमावस्या?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; सोमवती अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान कर जरूरतमंदों को दान करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा जरूर करनी चाहिए।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; अमावस्या पितरों की तिथि है इसलिए इस दिन पितरों की शांति के लिए पूजा करें।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; अमावस्या पर पशु-पक्षियों के लिए खाने का इंतजाम भी करना चाहिए।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; अमावस्या पर योग्य ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा देकर विदा करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोमवती अमावस्या पर क्या न करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; सोमवती अमावस्या पर तामसिक चीजें जैसे मांस, मछली आदि का उपयोग न करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; इस दिन किसी भी तरह के नशे जैसे शराब आदि से बचें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; अमावस्या पर किसी भी बुजुर्ग की अपमान न करें।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; इस तिथि पर काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; अमावस्या तिथि पर रात में सुनसान स्थान पर न जाएं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/somvati-amavasya-2026-date-significance-adhik-maas-mithun-sankranti-upay-niyam/articleshow-pwq578m"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[आज का राशिफल: 28 मई 2026 को 4 राशि वाले रहें सावधान, हो सकता है कुछ बुरा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/aaj-ka-rashifal-horoscope-today-in-hindi-all-12-rashi-mesh-to-meen-correct-prediction-for-28-may-2026/photoshow-reff8b4</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 06:00:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Aaj Ka Rashifal In Hindi: 28 मई 2026 को कौन-कौन से शुभ-अशुभ योग बन रहे हैं? इस दिन किस राशि के लोगों को रुका हुआ धन मिलने के संकेत हैं? किन राशियों के लिए नौकरी और बिजनेस में सफलता के योग हैं? आगे राशिफल से जानिए इन सभी सवालों के जवाब...&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kskne2egv5ysa695yfga975n,imgname-rashifal-28-may-2026-1779850217936.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Aaj Ka Rashifal In Hindi: 28 मई 2026 को कौन-कौन से शुभ-अशुभ योग बन रहे हैं? इस दिन किस राशि के लोगों को रुका हुआ धन मिलने के संकेत हैं? किन राशियों के लिए नौकरी और बिजनेस में सफलता के योग हैं? आगे राशिफल से जानिए इन सभी सवालों के जवाब...&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;28 May 2026 Ka Rashifal: 28 मई 2026 गुरुवार को ज्येष्ठ अधिक मास की द्वादशी तिथि रहेगी। इसी दिन पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। गुरु प्रदोष का व्रत भी इसी दिन किया जाएगा। गुरुवार को वरियान, परिघ, चर और सुस्थिर नाम के 4 शुभ-अशुभ योग बनेंगे, जिनका असर सभी राशियों पर होगा। आगे जानें किस राशि के लिए कैसा रहेगा दिन&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Numerology: लकी नंबर और कलर से चुनें कपड़े, वॉलेट और मोबाइल! मिलेगा भाग्य का साथ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;आज का दिन आपके लिए शुभ रहेगा। बिजनेस में लाभ मिलने के योग हैं। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। किसी शुभ समाचार से मन उत्साहित रहेगा। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ सकती है। युवाओं को करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Vakri 2026: 138 दिन शनि रहेगा वक्री, 5 राशि वालों को मिलेगी राहत-जेब में आएगा पैसा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों को पुराने निवेश से फायदा होने की संभावना है। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए दिन अनुकूल रहेगा। कामकाज में व्यस्तता अधिक रहेगी। लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने के संकेत हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों के घर में मेहमानों का आगमन हो सकता है। मानसिक तनाव से बचने की कोशिश करें। सेहत सामान्य रहेगी। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। विद्यार्थियों को मेहनत का परिणाम मिल सकता है। संतान सुख मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;कार्यक्षेत्र में रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है। कारोबार में नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। दोस्तों की मदद से कोई जरूरी काम पूरा होगा। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। यात्रा में सावधानी रखें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;आज ऑफिस में आपके काम की प्रशंसा होगी। व्यापार में नए संपर्क लाभदायक साबित होंगे। परिवार के साथ यात्रा की योजना बन सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। किसी करीबी से मनमुटाव होने की आशंका है। सेहत का ध्यान रखें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों को नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। खानपान संतुलित रखें नहीं तो पेट दर्द की समस्या होगी। महत्वपूर्ण निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। दोस्तों की सलाह आपके काम आएगी।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों को आज भाग्य का साथ मिलेगा। नौकरी में अधिकारियों से सराहना मिल सकती है। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। नया काम शुरू करने के लिए दिन शुभ है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों का समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी। माता-पिता के साथ संबंध मधुर रहेंगे। सेहत का ध्यान रखें। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों को आज बड़ा फायदा हो सकता है। बिजनेस में नई डील फाइनल हो सकती है। दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताएंगे। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। अनावश्यक खर्च से बचें। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;आज आपको मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलेगा। परिवार के साथ संबंध मजबूत होंगे। नौकरी और व्यापार में सफलता मिलने के योग हैं। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। परिवार के साथ घूमने जा सकते हैं। युवाओं को इंटरव्यू में सफलता मिल सकती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों को नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। आर्थिक मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। सेहत को लेकर सतर्क रहें। यात्रा के दौरान सावधानी रखें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस राशि के लोगों को बिजनेस में प्रगति देखने को मिलेगी। जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य में सुधार महसूस करेंगे। विद्यार्थियों के लिए दिन लाभदायक रहेगा। मानसिक तनाव से दूरी बनाकर रखें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Premanand Maharaj Video: प्रेमानंद महाराज ने भक्तों से क्यों कहा- “मैं रहूं या ना रहूं…”? भावुक संदेश हुआ वायरल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/premanand-maharaj-emotional-message-viral-video-health-update/articleshow-smgik5z</link>
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            <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:10:00 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Premanand Maharaj Viral Video: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वे अपने भक्तों से भावुक अपील करते नजर आ रहे हैं। बाबा का ये वीडियो बहुत तेजी से ट्रेंड हो रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ksf4mpprnqc47fdtdmvhnypt,imgname-premanad-maharaj-viral-video-1779698391768.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Premanand Maharaj: &lt;/strong&gt;वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज पिछले कईं दिनों से गंभीर रूप से बीमार हैं जिसके चलते 17 मई से उनकी पदयात्रा भी नहीं निकाली जा रही है। इस बीच इनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से शेयर किया जा रहा है जिसमें वे अपने भक्तों से एक भावुक अपील करते नजर आ रहे हैं। जानें प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा अपने वीडियो में&hellip;&lsquo;मैं रहूं या ना रहूं, मेरी चिंता छोड़िए, श्रीजी में ध्यान लगाईए। आप जो भी सेवा कर रहे हैं, उसे करते रहें। भगवान के नाम का जाप लगातार करें सब अच्छा होगा। आपका गुरुदेव आपके मन में हमेशा रहेगा। आप बिना किसी डर के भजन करें। जब हमारा मन करेगा, हम फिर से बात करेंगे।&rsquo;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;17 मई से संत प्रेमानंद की रात्रि पदयात्रा बंद है। तबियत खराब बताई गई है। अब उन्होंने भावुक Video जारी करके कहा&ndash; &quot;बिलकुल चिंता नहीं करनी है। मैं मिलूँ न मिलूं, बोलूं न बोलूं, आऊं न आऊं। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे, देख लेना&quot; pic.twitter.com/3tVMkT2fhf&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Sachin Gupta (@Sachingupta) May 25, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;प्रेमानंद महाराज ने क्यों की अपील?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ऐसा माना जा रहा है कि प्रेमानंद महाराज ने ये संदेश अपने स्वास्थ्य और जीवन की अनिश्चितता को लेकर कहा है। इस वीडियो के जरिए वे भक्तों से कहना चाह रहे हैं कि एकमात्र भगवान ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं। इसी में आप सभी का कल्याम और मंगल होगा। सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल होने के बाद भक्तों की भावुक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली रही हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों इतने फेमस हैं प्रेमानंद महाराज?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्रेमानंद महाराज वर्तमान समय के सबसे प्रसिद्ध संतों में से एक है। उनकी सबसे बड़ी खास बात ये है कि वृद्ध ही नहीं युवा पीढ़ी भी उनके प्रवचनों की दिवानी है। उनके प्रवचनों में रिश्ते, क्रोध, तनाव, अहंकार और भगवान के नाम जप जैसे विषयों पर सरल भाषा में बातें की जाती हैं। यही कारण है कि Gen Z audience भी उनके वीडियो से तेजी से कनेक्ट कर रही है। सोशल मीडिया पर #PremanandMaharaj और #RadheRadhe जैसे hashtags लगातार ट्रेंड में रहते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या बीमारी है प्रेमानंद महाराज को?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्रेमानंद महाराज को दोनों किडनिया काफी लंबे समय से खराब हैं। प्रतिदिन डायलिसिस करवाने के बाद भी प्रेमानंद महाराज अपने भक्तों से मिलते हैं और उन्हें भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। प्रेमानंद महाराज ने अपने किडनियों के नाम राधा और कृष्ण रखे हैं। बिगड़ती सेहत के चलते पिछले 17 मई से उनकी दैनिक यात्रा भी नही हो पा रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[चाणक्य नीति: इन 7 जगहों पर चुप रहना ही है समझदारी, बोलना पड़ेगा भारी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/webstories/religious-news/chanakya-niti-stay-silent-in-these-7-places-for-success-and-respect-chanakya-neeti-tips-ti8v0ee</link>
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            <pubDate>Mon, 25 May 2026 11:34:42 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: &lt;/strong&gt;चाणक्य नीति के अनुसार सफलता और सम्मान पाना है, तो हर बात पर बोलना जरूरी नहीं होता। सही समय पर चुप रहना रिश्तों, करियर और पर्सनालिटी को बेहतर बनाता है। जानें किन 7 हालातों में चुप रहना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[इन 5 खर्चों पर आज ही लगाएं लगाम, कभी खाली नहीं होगा बैंक अकाउंट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-money-saving-tips-control-these-5-expenses-to-growbank-balance/articleshow-uqo6axr</link>
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            <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:50:31 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य के अनुसार किन खर्चों पर नियंत्रण रखकर बचत बढ़ाई जा सकती है? क्या दिखावे के लिए किया गया खर्च आपकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है? ऑनलाइन शॉपिंग की आदत बैंक बैलेंस पर कैसे असर डालती है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti Money Saving Tips:&lt;/strong&gt; आज के समय अच्छी कमाई होना आर्थिक स्थिरता की गारंटी नहीं है क्योंकि कई लोग अच्छी-खासी सैलरी मिलने के बाद भी पैसों की कमी महसूस करते हैं। जबकि कुछ लोग सीमित आय में भी अच्छी बचत कर लेते हैं। आपका बैंक बैलेंस यानी बचत लगातार बढ़ती रहे इसके लिए आपको अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। ऐसा करने से आपका बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ सकता है और यही बचट भविष्य में आपके काम आ सकती है। आचार्य चाणक्य से जानें ऐसे 5 खर्चों के बारे में, जिन पर लगाम लगाकर आप अपनी बचत को बेहतर बना सकते हैं&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: 2 दिन रहेगी निर्जला एकादशी, किस दिन करें व्रत-पूजा? जानें सही डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दिखावे पर बिल्कुल खर्च न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कुछ लोग दूसरों को प्रभावित करने के चक्कर में कईं बार अपनी कैपेसिटी से अधिक खर्च कर देते हैं। यही खर्च उनके महीने भर का बजट बिगाड़ देता है। महंगे कपड़े, ब्रांडेड सामान और स्टेटस दिखाने वाली चीजों पर ज्यादा पैसा खर्च करना आपके बैंक बैलेंस को जीरो कर सकता है। इसलिए इनकम को ध्यान में रखते हुए खर्च करें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Morning Mantra: आंख खुलते ही बोलें 10 सेकंड का ये मंत्र, किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ऑनलाइन शॉपिंग की आदत न डालें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मोबाइल हाथ में आने के बाद लोगों में ऑनलाइन शॉपिंग की आदत बहुत तेजी से बढ़ती है। कईं बार ई कामर्स कंपनिया डिस्काउंट का ऑफर देकर आपको खरीदी करने पर मजबूर कर देती हैं। बस यहीं आपसे गलती हो जाती है। यही गैरजरूरी खरीदी आपकी बचत को खत्म कर देती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बाहर खाने-पीने से बचें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कुछ लोग स्वयं को हाई स्टैंडर्ड दिखाने के चक्कर में हर वीकेंड बाहर खाना खाने चले जाते हैं या घर पर ही खाना आर्डर कर लेते हैं। कभी-कभी बाहर खाना ठीक है लेकिन हर वीकेंड ऐसा करना आपकी जेब हल्की कर सकता है। ध्यान रखें घर का बना भोजन सेहत और बजट दोनों के लिए बेहतर होता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बिना बजट खर्च न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लाइफ में घूमना-फिरना और मनोरंजन जरूरी है, लेकिन इसके लिए बजट निश्चित होना चाहिए। बिना बजट बनाए फिल्में देखना, पार्टियां करना आपके ऊपर आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। इसलिए मनोरंजन और बचत के बीच संतुलन बनाकर रखें। ऐसा करने से आपका बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ता रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;छोटे खर्च का भी हिसाब रखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दैनिक जीवन में छोटी-छोटे खर्च भी काफी महत्व रखते हैं। क्योंकि यही छोटे खर्च महीने और साल के अंत में बड़ी राशि बन जाते हैं। चाय, स्नैक्स, अनावश्यक सब्सक्रिप्शन और अन्य छोटे खर्चों का हिसाब रखने से अच्छी बचत की जा सकती है। यही बजट बैंक बैलेंस के रूप में आपका नजर आएगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-money-saving-tips-control-these-5-expenses-to-growbank-balance/articleshow-uqo6axr"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[विभुवन संकष्टी चतुर्थी कब, 3 या 4 जून? जानें सही डेट, मंत्र, पूजा विधि  मुहूर्त और चंद्रोदय का समय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vibhuvan-sankashti-chaturthi-2026-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-chandroday-time/articleshow-wgcleku</link>
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            <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:03:07 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026: अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। ये चतुर्थी 3 साल में एक बार आती है इसलिए धर्म ग्रंथों में इसका विशेष महत्व बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kt3y9n9ad5ntae3j04xh6b54,imgname-vibhuvan-sankashti-chaturthi-vrat-2026-1780396381482.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Vibhuvan Sankashti Chaturthi Vrat 2026: &lt;/strong&gt;इन दिनों ज्येष्ठ का अधिक मास चल रहा है। इस महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। चूंकि अधिक मास 3 साल में एक बार आती है इसलिए इस चतुर्थी का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस बार विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत जून 2026 में किया जाएगा। आगे जानिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी की डेट, पूजा विधि, शुभ योग, मुहूर्त आदि की जानकारी&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इन 5 खर्चों पर आज ही लगाएं लगाम, कभी खाली नहीं होगा बैंक अकाउंट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब करें विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जून, बुधवार की रात 09 बजकर 21 मिनिट से शुरू होगी जो 04 जून, गुरुवार की रात 11 बजकर 30 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 3 जून, बुधवार को होगा, इसलिए इसी दिन विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय रात 10 बजकर 4 मिनिट पर होगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nirjala Ekadashi 2026: 2 दिन रहेगी निर्जला एकादशी, किस दिन करें व्रत-पूजा? जानें सही डेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 10:44 से दोपहर 12:25 तकदोपहर 03:45 से शाम 05:25 तकशाम 05:25 से 07:05 तक&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत-पूजा विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 3 जून, बुधवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर किसी से झूठ न बोलें, गलत विचार मन में न लाएं।- पूरे दिन निराहार रहें यानी कुछ भी खाएं-पीएं नहीं। ऐसा करना अगर संभव न हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं या गाय का दूध पी सकते हैं।- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें और सामग्री एकत्रित कर लें। घर में साफ स्थान पर बाजोट पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें।- सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक लगाएं फिर फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक भी जरूर जलाएं।- इसके बाद रोली, दूर्वा, वस्त्र, जनेऊ, अबीर, गुलाल, पान, चावल आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं। भगवान को नारियल के लड्&zwnj;डू का भोग लगाएं।- भगवान श्रीगणेश की पूजा करते समय मन ही मन ऊं गं गणपतये नम: का जाप भी करते रहें। ऐसा करने से आपको शुभ फल जरूर मिलेंगे।- पूजा के बाद भगवान श्रीगणेश की आरती करें। चंद्रमा उदय हो जाए तो जल से अर्ध्य दें और फूल-चावल व कुमकुम चढ़ाकर पूजा करें।- इसके बाद प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करें। इस तरह विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गणेशजी की आरती लिरिक्स हिंदी में&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवामाता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥एक दंत दयावंत, चार भुजाधारीमाथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥अंधन को आंख देत, कोढ़िन को कायाबांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवालड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारीकामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Nirjala Ekadashi 2026: 2 दिन रहेगी निर्जला एकादशी, किस दिन करें व्रत-पूजा? जानें सही डेट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/nirjala-ekadashi-2026-date-25-june-vrat-puja-shubh-yog-significance-in-hindi/articleshow-x9xzgtg</link>
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            <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:46:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी का सभी एकादशी में सबसे श्रेष्ठ क्यों कहते हैं? निर्जला एकादशी पर किन चीजों का दान करना चाहिए? निर्जला एकादशी 2026 पर कौन-कौन से शुभ योग बनेंगे?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kt177weh2sjyxa780dhqzk1r,imgname-kab-hai-nirjala-ekadashi-1780305097169.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Kab Hai Nirjala Ekadashi:&lt;/strong&gt; ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का महत्व साल भर में आने वाली अन्य सभी एकादशियों से कहीं अधिक माना गया है। ऐसा कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से कर लें उसे पूरे साल की एकादशी का फल प्राप्त हो जाता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत जून 2026 में किया जाएगा। आगे जानिए निर्जला एकादशी की सही डेट और महत्व&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Sawan 2026 Start Date: क्यों 1 महीना देर से आएगा सावन, कब से शुरू होगा, कितने सोमवार होंगे?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;2 दिन रहेगी एकादशी तिथि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून, बुधवार की शाम 6 बजकर 12 मिनिट से शुरू होगी जो 25 जून, गुरुवार की रात 8 बजकर 9 मिनिट तक रहेगी। इस तरह एकादशी तिथि का संयोग 24 और 25 जून दोनों दिन बन रहा है। इसी वजह से लोगों के मन में कन्फ्यूजन है कि निर्जला एकादशी का व्रत किस दिन करें?&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Morning Mantra: आंख खुलते ही बोलें 10 सेकंड का ये मंत्र, किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है निर्जला एकादशी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं, नलिन शर्मा के अनुसार, कोई भी व्रत हमेशा उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 25 जून, गुरुवार को होगा, इसलिए इसी व्रत निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। गुरुवार को एकादशी होने से इसका महत्व और भी अधिक माना जाएगा। इस दिन शिव, सिद्ध, सुस्थिर और वर्धमान नाम के 4 शुभ योग भी बनेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इसे क्यों कहते हैं निर्जला एकादशी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सालभर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त कर सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;निर्जला एकादशी का महत्व&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। निर्जला एकादशी पर जल से भरे घड़े, छाता, वस्त्र, पंखा, फल और अन्य जरूरत की वस्तुओं का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[अजमेर के जन्नती दरवाज़े में छिपा ऐसा क्या रहस्य, जिसे देखने सुबह 4 बजे से लगीं कतारें, विदेश से आए मुसलमान]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/eid-al-adha-celebrations-see-massive-crowds-at-ajmer-sharif-dargah-jannati-darwaza-opened-on-bakrid/articleshow-xu1edl4</link>
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            <pubDate>Thu, 28 May 2026 10:32:11 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ajmer Sharif Dargah : बकरीद पर अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह में ऐसा क्या हुआ कि सुबह 4 बजे से लग गई लंबी कतारें? दुआ मांगने वालों ने क्यों कहा- यहां हर मुराद पूरी होती है? क्या है अजमेर दरगाह के जन्नती दरवाज़े का रहस्य, जिसे देखने विदेशों से भी आते हैं लोग?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kspf7fpphr4wf2zvvckzyzy3,imgname-untitled-design---2026-05-28t101406.946-1779944373974.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Eid al-Adha Prayers IN Jannati Darwaza : ईद-उल-अज़हा के खास मौके पर राजस्थान के अजमेर में मौजूद ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह का मशहूर जन्नती दरवाज़ा गुरुवार सुबह 4 बजे खोल दिया गया। इस दरवाज़े से गुज़रकर दुआ मांगने के लिए पूरे भारत से हज़ारों श्रद्धालु दरगाह पहुंचे। सुबह से ही अजमेर शरीफ दरगाह में भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने नमाज़ अदा की और अमन-चैन और भाईचारे का पैगाम दिया। &amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जन्नत का दरवाजा देखने विदेश से भी आते हैं लोग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ANI से बात करते हुए, अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम दौलत चिश्ती ने बताया कि इस मौके पर देश-विदेश से लोग गहरी आस्था के साथ यहां आते हैं।&amp;nbsp;चिश्ती ने कहा, &quot;दूर-दूर से, भारत के कोने-कोने से और विदेशों से भी ज़ायरीन बड़ी अकीदत के साथ यहां आते हैं। वे इस दरवाज़े से गुज़रकर अपनी दुआएं मांगते हैं और सजदा करते हैं।&quot;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ईद पर कश्मीर से आते हैं हजारों मुसलमान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दरगाह के एक और खादिम, जीशान चिश्ती ने बताया कि बाड़मेर, जैसलमेर और कश्मीर जैसे सीमावर्ती इलाकों से भी लोग इस जश्न में शामिल होने के लिए दरगाह पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, &quot;ईद के इस दिन, खासकर बाड़मेर, जैसलमेर और कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों से लोग गरीब नवाज़ की दरगाह पर अपनी गहरी श्रद्धा लेकर आते हैं। जैसे कल हज की रस्में पूरी हुईं, वैसे ही आज यहां प्यार और भाईचारे में बंधे श्रद्धालुओं का जमघट लगा है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों मनाया जाती है बकरीद?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ईद-उल-अज़हा, जिसे कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है, पैगंबर इब्राहिम की अल्लाह के हुक्म पर कुर्बानी देने की इच्छा की याद में मनाया जाता है। यह इस्लामी चंद्र कैलेंडर के आखिरी महीने, ज़ुल-हिज्जा के 10वें दिन मनाया जाता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Arvind Raghuwanshi</dc:creator>
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