<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="yes"?>
<rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" version="2.0">
    <channel>
        <title>Asianet News Hindi</title>
        <link>https://hindi.asianetnews.com</link>
        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
        <image>
            <url>https://static-assets.asianetnews.com/images/ogimages/OG_Hindi.jpg</url>
            <width>143</width>
            <height>100</height>
            <link>https://hindi.asianetnews.com</link>
            <title>Asianet News Hindi</title>
        </image>
        <lastBuildDate>Tue, 14 Jul 2026 09:26:17 +0530</lastBuildDate>
        <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/rss/religious-news" rel="self" type="application/rss+xml"/>
        <item>
            <title><![CDATA[गुरु पूर्णिमा 2026 कब है? 28 और 29 जुलाई को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/guru-purnima-2026-date-28-or-29-july-significance-puja-vidhi-upay-photoshow-0y8kzea</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/guru-purnima-2026-date-28-or-29-july-significance-puja-vidhi-upay-photoshow-0y8kzea</guid>
            <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 14:38:22 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Guru Purnima 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए हर साल आषाढ़ मास में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव जुलाई 2026 में मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kwvaefz9d8wa9et2spjggfft,imgname-guru-purnima-2026-kab-hai-1783328358376.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Guru Purnima 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए हर साल आषाढ़ मास में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव जुलाई 2026 में मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Guru Purnima 2026 Date: सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए बहुत ही खास माना गया है। हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस बार कई लोगों के मन में भ्रम है कि गुरु पूर्णिमा 28 जुलाई को है या 29 जुलाई को। आगे जानिए गुरु पूर्णिमा की सही डेट क्या है और इसका महत्व&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: ये 4 लोग डालते हैं पति-पत्नी के रिश्तों में दरार, समय रहते बना लें दूरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार इस बार आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई, मंगलवार की शाम 6 बजकर 19 मिनिट से शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 29 जुलाई, बुधवार की रात 8 बजकर 5 मिनिट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन प्रीति और आयुष्मान नाम के 2 शुभ योग भी रहेंगे जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Aniruddhacharya Maharaj Video: &lsquo;पति शॉपिंग के लिए पैसे नहीं देते, क्या करूं?&rsquo; अनिरुद्धाचार्य महाराज ने बताया उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हुआ था। उन्होंने वेदों का विभाजन किया और महाभारत सहित अनेक ग्रंथों की रचना की। इसी कारण इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्हीं की स्मृति में हर साल गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;गुरु पूर्णिमा की सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का पूजन करें। गुरु को वस्त्र, फल, मिठाई या अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा भी दें। यदि आपके गुरु जीवित नही है तो उनके चित्र की पूजा कर आशीर्वाद लें। इस दिन दान-पुण्य, सत्संग और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन भी शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; गुरु पूर्णिमा के दिन गरीबों को अनाज, कपड़ा और भोजन का दान करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; इस दिन सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान कर सूर्य देव को अर्ध्य दें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; गुरु पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा का भी विशेष महत्व है।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; अगर आपका कोई गुरु न हो तो देवगुरु बृहस्पति की पूजा करें।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; गुरु पूर्णिमा पर केले का पौधा लगाएं और इसकी देख-भाल करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/guru-purnima-2026-date-28-or-29-july-significance-puja-vidhi-upay-photoshow-0y8kzea"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hanuman Puja Rules: कब न करें हनुमानजी की पूजा, क्या न चढ़ाएं? ये गलतियां भूलकर न करें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hanuman-puja-rules-what-not-to-offer-and-common-mistakes-to-avoid-photoshow-353gh7q</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hanuman-puja-rules-what-not-to-offer-and-common-mistakes-to-avoid-photoshow-353gh7q</guid>
            <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 14:57:49 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Hanuman Worship Rules: मंगलवार को हनुमानजी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। लेकिन हनुमानजी की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kxdcms0sbah27xfkm30swx39,imgname-hanuman-puja-rules-1783934641177.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Hanuman Worship Rules: मंगलवार को हनुमानजी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। लेकिन हनुमानजी की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Tuesday Hanuman Puja: मंगलवार हनुमानजी की पूजा के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन लाखों श्रद्धालु बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल और लड्डू अर्पित कर उनकी कृपा पाने की कामना करते हैं। धर्म ग्रंथों में हनुमानजी की पूजा से जुड़े कुछ नियम भी बताए गए हैं। मान्यता है कि हनुमानजी को कुछ चीजें अर्पित करने से बचना चाहिए। आगे जानिए हनुमानजी पूजा में किन चीजों का उपयोग न करें...&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Tradition: पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा क्यों बिछाते हैं, क्यों इस रंग को मानते हैं इतना शुभ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; तुलसी को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। लेकिन हनुमानजी की पूजा में तुलसी का उपयोग करने की मनाही है।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; हनुमानजी की पूजा में कभी भी बासी और मुरझाए फूल न चढ़ाएं। हमेशा ताजे फूलों का ही उपयोग करें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; हनुमानजी को भोग लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसमें लहसुन-प्याज का उपयोग न किया गया हो।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; हनुमानजी को पान चढ़ाने की परंपरा भी है लेकिन ध्यान रखें कि इस पान में तंबाकू सुपारी न हो।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Monday Facts: सप्ताह के पहले दिन का नाम &lsquo;सोमवार&rsquo; ही क्यों, इस दिन शिवजी की पूजा क्यों करते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; हनुमानजी की पूजा कभी भी अस्वच्छ अवस्था में न करें यानी स्नान करने के बाद ही पूजा करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; हनुमानजी की पूजा करते समय कपड़े भी साफ-सुथरे होना चाहिए। गंदे कपड़ों में पूजा न करें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; महिलाएं रजस्वला काल के दौरान हनुमानजी की पूजा करने से बचें, संभव हो तो अपनी छाया भी इस दौरान देव प्रतिमा पर न पड़ने दें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; अगर हनुमानजी प्रतिमा खंडित हो जाए तो इसकी पूजा न करें। ऐसी प्रतिमा को सम्मान पूर्वक नदी में प्रवाहित कर दें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; सुंदरकांड, हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें तो उसे बीच में न छोड़ें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; परिवार में किसी के जन्म या मृत्यु हो तो 13 दिनों तक भगवान की पूजा न करें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;वैसे तो हनुमानजी की पूजा किसी भी दिन की जा सकती है लेकिन मंगलवार को हनुमानजी की पूजा का विशेष महत्व है। इसके पीछे मान्यता है कि हनुमानजी का जन्म मंगलवार को ही हुआ था। मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करने से मंगल ग्रह से संबंधित दोष भी दूर होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hanuman-puja-rules-what-not-to-offer-and-common-mistakes-to-avoid-photoshow-353gh7q"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Gupt Navratri 2026: दुर्लभ संयोग में शुरू होगी गुप्त नवरात्रि, इस बार कितने दिनों की, 8 या 9?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/gupt-navratri-july-2026-start-date-shubh-yog-muhurat-significance-gajkesri-budh-pushya-yog-photoshow-3tbksdu</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/gupt-navratri-july-2026-start-date-shubh-yog-muhurat-significance-gajkesri-budh-pushya-yog-photoshow-3tbksdu</guid>
            <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:51:55 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ashadha Gupt Navratri 2026: इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत बहुत ही शुभ योग में होगी, जिसके चलते इसका महत्व और भी अधिक हो गया है। इस बार गुप्त नवरात्रि पूरे 9 दिन की रहेगी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kke49j4asfh93sk784as4xjs,imgname-chaitra-navratri-2026-start-date-1773222021258.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Ashadha Gupt Navratri 2026: इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत बहुत ही शुभ योग में होगी, जिसके चलते इसका महत्व और भी अधिक हो गया है। इस बार गुप्त नवरात्रि पूरे 9 दिन की रहेगी।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Ashadha Gupt Navratri July 2026 Date: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर साल आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। ये नवरात्रि बहुत ही खास होती है क्योंकि इसमें तंत्र-मंत्र से देवी को प्रसन्न किया जाता है। इसलिए प्रमुख तंत्र स्थानों पर इन दिनों तांत्रिकों को भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत बहुत ही शुभ योग में हो रही है जिसके चलते इसका महत्व और भी अधिक हो गया है। आगे जानिए गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कौन-सा शुभ योग बनेगा&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Halharini Amavasya 2026: हलहारिणी और हरियाली अमावस्या, क्या ये दोनों एक ही हैं? दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत 15 जुलाई से होगी। ये पर्व पूरे 9 दिनों तक यानी 23 जुलाई तक मनाया जाएगा। गुप्त नवरात्र के पहले दिन यानी 15 जुलाई को चंद्रमा और गुरु कर्क राशि में साथ में रहेंगे जिससे गजकेसरी नाम का राजयोग बनेगा। चूंकि गुरु 12 साल बाद कर्क राशि में हैं इसलिए ये गुप्त नवरात्रि के पहले दिन ये शुभ योग बहुत ही खास माना जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;गुरु पूर्णिमा 2026 कब है? 28 और 29 जुलाई को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार 15 जुलाई को बुधवार के दिन पुष्य नक्षत्र पूरे दिन रहेगा जिससे बुध पुष्य का शुभ योग भी बनेगा। बुधवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग बहुत ही खास माना जाता है। इस दिन बुध और सूर्य मिथुन राशि में होने से बुधादित्य नाम का राजयोग भी बनेगा, जिससे इस पर्व का महत्व और भी अधिक हो जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन भड़ली नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 23 जुलाई को है। इस दिन बिना मुहूर्त के शुभ कार्य जैसे विवाह आदि करने की मान्यता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा क्योंकि 16 जुलाई को ही गुरु तारा अस्त हो जाएगा। इस कारण इस अवधि में विवाह के मुहूर्त मान्य नहीं रहेंगे और न अन्य कोई मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे। वहीं 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक कार्य अगले चार माह तक नहीं किए जाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/gupt-navratri-july-2026-start-date-shubh-yog-muhurat-significance-gajkesri-budh-pushya-yog-photoshow-3tbksdu"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Broom Vastu Rules: झाड़ू कब लगाएं, कहां रखें, नई कब खरीदें? जानें जरूरी नियम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vastu-tips-jhadu-rules-where-to-keep-broom-when-to-buy-and-laxmi-related-mistakes-photoshow-5faz2la</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vastu-tips-jhadu-rules-where-to-keep-broom-when-to-buy-and-laxmi-related-mistakes-photoshow-5faz2la</guid>
            <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 14:30:37 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Broom Vastu Rules: हिंदू धर्म में झाड़ू का बहुत ही खास महत्व है। इसे देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। दीपावली पर झाड़ू की पूजा भी की जाती है। झाड़ू से अनेक नियम भी हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kwrqq50ttqhmvbctt1dnd74t,imgname-broom-religious-rules-01-1783241610266.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Broom Vastu Rules: हिंदू धर्म में झाड़ू का बहुत ही खास महत्व है। इसे देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। दीपावली पर झाड़ू की पूजा भी की जाती है। झाड़ू से अनेक नियम भी हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Broom Religious Rules: हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में झाड़ू को सिर्फ सफाई का साधन नहीं, बल्कि मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि झाड़ू से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है, जबकि इनकी अनदेखी करने पर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आगे जानिए झाड़ू से जुड़े कुछ प्रमुख धार्मिक और वास्तु नियम&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shukra Gochar 2026: 4 राशियों पर मंडराया संकट, प्रेम-पैसा और सम्मान में कमी के संकेत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;मान्यता के अनुसार सुबह सूर्योदय के बाद घर में झाड़ू लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर की निगेटिव एनर्जी दूर होती है और सकारात्मकता बनी रहती है। वहीं सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से बचने चाहिए। यदि किसी विशेष परिस्थिति में रात में सफाई करनी पड़े तो कूड़ा बाहर फेंकने के बजाय सुबह तक घर के एक कोने में रख दें। ऐसा न करने से घर की बरकत चली जाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, जानें डेट, टाइम सहित पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;झाड़ू को हमेशा ऐसी जगह रखें जहां वह सबकी नजर में न आए। इसे दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है। झाड़ू को कभी भी पूजा घर, रसोई या बेडरूम में नहीं रखना चाहिए। साथ ही इसे हमेशा जमीन पर सीधा या लेटाकर रखें, खड़ा करके रखने से भी बचें। वास्तु के अनुसार झाड़ू को सीधे रखना परेशानी का कारण बन सकता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;नई झाड़ू खरीदने के लिए शनिवार, अमावस्या या दीपावली जैसे शुभ अवसरों को अच्छा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों खरीदी गई झाड़ू घर में सुख-समृद्धि और धन के आगमन का प्रतीक बनती है। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पुरानी झाड़ू को इधर-उधर न फेंके नहीं तो इससे भी दोष लगता है और परिवार में अशांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू पर पैर रखना या उसे लांघना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का अपमान होता है और आर्थिक तंगी आने की आशंका बढ़ती है। गलती से भी ऐसा कोई काम न करें जिससे कि झाड़ू का अपमान हो। अगर गलती से झाड़ू पर पैर लग जाए तो उसे छूकर माफी मांग लें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vastu-tips-jhadu-rules-where-to-keep-broom-when-to-buy-and-laxmi-related-mistakes-photoshow-5faz2la"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Jagannath Rath Yatra 2026: कब निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा, कहां से देखें, कैसे पहुंचें पुरी? जानें पूरी डिटेल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jagannath-rath-yatra-2026-date-route-puri-travel-guide-rath-yatra-darshan-tips-photoshow-alszggw</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jagannath-rath-yatra-2026-date-route-puri-travel-guide-rath-yatra-darshan-tips-photoshow-alszggw</guid>
            <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:08:58 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Jagannath Rath Yatra Guide: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा इस बार जुलाई 2026 में निकाली जाएगी। इसे देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लाखों भक्त यहां आते हैं। जानें रथयात्रा से जुड़ी पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kxa9tm4jrr5cxjmq1q8syzwa,imgname-jagannath-rath-yatra-guide-1783831023761.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Jagannath Rath Yatra Guide: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा इस बार जुलाई 2026 में निकाली जाएगी। इसे देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लाखों भक्त यहां आते हैं। जानें रथयात्रा से जुड़ी पूरी डिटेल।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Jagannath Rath Yatra 2026 Date: ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर चार धामों में से एक है। हर साल आषाढ़ मास में यहां विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस रथयात्रा से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। इस बार रथयात्रा कब निकलेगी, आप कैसे इसके दर्शन कर सकते हैं आदि जानकारी के लिए आगे पढ़ें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि पर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू होती है। इस साल ये रथयात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने भव्य रथों में विराजमान होकर मंदिर से निकलेंगे। ये रथ यात्रा गुंडिचा मंदिर तक जाएगी। 8 दिन बाद यहां से रथयात्रा की वापसी होगी, जिसे बहुड़ा यात्रा कहते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Tradition: पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा क्यों बिछाते हैं, क्यों इस रंग को मानते हैं इतना शुभ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;- पुरी ओडिशा के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। भुवनेश्वर से पुरी की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है, जिसे कार, टैक्सी या बस से लगभग 1.5 घंटे में तय किया जा सकता है। अन्य शहरों से पुरी के लिए निजी बसें उपलब्ध रहती हैं।- पुरी के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, चेन्नई और पटना आदि से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। यदि आपके शहर से पुरी के लिए सीधी ट्रेन नहीं है, तो पहले भुवनेश्वर या खुर्दा रोड पहुंचकर वहां से पुरी के लिए ट्रेन ले सकते हैं।- पुरी से सबसे नजदीकी बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (भुवनेश्वर) है, जो पुरी से लगभग 60&ndash;65 किलोमीटर दूर है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Belief: पूजा करते समय दीपक बुझ जाए तो क्या करें, क्या ये अपशकुन है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;रथयात्रा पुरी की प्रसिद्ध ग्रैंड रोड (बड़ा डांडा) से गुजरती है। अगर आराम से दर्शन करना चाहते हैं तो इस रोड पर स्थित किसी भी होटल में पहले से बुकिंग कर लें ताकि बाद में परेशानी न हो। बिना बुकिंग के जाने वाले श्रद्धालुओं को उस मार्ग पर सुबह जल्दी पहुंचकर अपनी जगह बना लेनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के भीतर 'ब्रह्म पदार्थ' स्थापित है, जिसे श्रीकृष्ण के दिव्य तत्व का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, रथ खींचने का अवसर सभी धर्म और जाति के लोगों के लिए खुला रहता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि रथ खींचने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/jagannath-rath-yatra-2026-date-route-puri-travel-guide-rath-yatra-darshan-tips-photoshow-alszggw"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Masik Shivratri 2026: 12 या 13 जुलाई, कब करें शिवरात्रि व्रत? सही डेट के साथ जानें मुहूर्त, मंत्र और आरती]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/masik-shivratri-july-2026-date-puja-vidhi-muhurat-mantra-aarti-lyrics-hindi-significance-photoshow-b9c8t3u</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/masik-shivratri-july-2026-date-puja-vidhi-muhurat-mantra-aarti-lyrics-hindi-significance-photoshow-b9c8t3u</guid>
            <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 14:58:47 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;महादेव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं, मासिक शिवरात्रि व्रत भी इनमें से एक है। इसे शिव चतुर्दशी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kx87fwny2kb2t2v1gjnennp6,imgname-masik-shivratri-july-2026-1783761466045.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;महादेव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं, मासिक शिवरात्रि व्रत भी इनमें से एक है। इसे शिव चतुर्दशी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Masik Shivratri July 2026: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाता है। मान्यता है कि ये व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस बार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 दिन रहेगी जिसके चलते ये व्रत कब करें, इसे लेकर कन्फ्यूजन हो रहा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट से जानें जुलाई 2026 में मासिक शिवरात्रि की सही डेट, पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त की डिटेल&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Vrat Rules: व्रत पूरा होने के बाद सबसे पहले क्या खाएं? जानें पारण के सही नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, इस बार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 12 जुलाई, रविवार की रात 10 बजकर 30 मिनिट से शुरू होगी जो 13 जुलाई, सोमवार की शाम 06 बजकर 49 मिनिट तक रहेगी। चूंकि मासिक शिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा रात में की जाती है, इसलिए ये व्रत 12 जुलाई, रविवार को ही किया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Tradition: पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा क्यों बिछाते हैं, क्यों इस रंग को मानते हैं इतना शुभ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;मासिक शिवरात्रि में महादेव की पूजा रात में 4 बार की जाती है, लेकिन ऐसा न कर पां तो निशिता काल में एक बार पूजा करके भी आप इस व्रत का पूरा फल पा सकते हैं। 12 जुलाई, रविवार को निशिता काल का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 07 मिनिट से 12 बजकर 47 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 40 मिनिट का समय मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;- 12 जुलाई, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन व्रत के नियमों का पूरी श्रद्धा से पालन करें।- रात में शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की सभी सामग्री एक स्थान पर रख लें। सबसे शिवलिंग का गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें।- इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, और चंदन अर्पित करें।- घी का दीपक जलाकर धूप-दीप से पूजा करें। पूजा में बिल्व पत्र जरूर चढ़ाएं। इसके बिना महादेव की पूजा अधूरी मानी जाती है।- पूजा करते समय मन ही मन में ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। भगवान शिव को अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं।- इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव की आरती करें। रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करना भी शुभ माना जाता है।- अगले दिन सुबह यानी 13 जुलाई, सोमवार की सुबह व्रत का पारण कर जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;ऊं जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ऊं जय शिव ओंकारा॥एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ऊं जय शिव ओंकारा॥दो भुज चार चतुर्भुज, दशभुज अति सोहे।तीनों रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ऊं जय शिव ओंकारा॥अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी॥ऊं जय शिव ओंकारा॥श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे।सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥ऊं जय शिव ओंकारा॥कर के मध्य कमंडलु, चक्र त्रिशूलधारी।सुखकारी दुःखहारी, जगपालनकारी॥ऊं जय शिव ओंकारा॥ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥ऊं जय शिव ओंकारा॥काशी में विश्वनाथ विराजत, नन्दी ब्रह्मचारी।नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ऊं जय शिव ओंकारा॥त्रिगुणस्वामी की आरती, जो कोई नर गावे।कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ऊं जय शिव ओंकारा॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/masik-shivratri-july-2026-date-puja-vidhi-muhurat-mantra-aarti-lyrics-hindi-significance-photoshow-b9c8t3u"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Premanand Maharaj Videos: ‘क्या भूत- प्रेत की तरह भगवान भी शरीर में आते हैं’? सुनें प्रेमानंद महाराज का जवाब]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/premanand-maharaj-videos-kya-bhagwan-insaan-ke-sharir-me-pravesh-karte-hain-articleshow-eky484l</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/premanand-maharaj-videos-kya-bhagwan-insaan-ke-sharir-me-pravesh-karte-hain-articleshow-eky484l</guid>
            <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 16:07:09 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Premanand Maharaj Viral Video: प्रेमानंद महाराज के पास आने वाले भक्त तरह-तरह के सवाल करते हैं। इनमें से कुछ सवाल बहुत ही रोचक होते हैं। प्रेमानंद बाबा उनका जवाब भी उसी तरह से देते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kwvfzhsmqad9xcfxeh14a3ex,imgname-premanand-maharaj-s-latest-video-1783334160180.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Premanand Maharaj's latest video:&lt;/strong&gt; वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन और सत्संग के लिए रोज हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि सभी लोगों को उनसे सीधे प्रश्न पूछने का अवसर नहीं मिल पाता। जो भक्त उनसे मिलते हैं, वे जीवन, धर्म और आध्यात्म से जुड़े कई रोचक सवाल पूछते हैं। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला ने भगवान और भूत-प्रेत से जुड़ा सवाल पूछा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Aniruddhacharya Maharaj Video: &lsquo;पति शॉपिंग के लिए पैसे नहीं देते, क्या करूं?&rsquo; अनिरुद्धाचार्य महाराज ने बताया उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;वीडियो में महिला प्रेमानंद महाराज से पूछती है, &quot;क्या भूत-प्रेत की तरह भगवान भी इंसानों के शरीर में प्रवेश करते हैं?&quot; यह सवाल सुनकर प्रेमानंद महाराज ने बहुत सरल और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इसका उत्तर दिया।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;गुरु पूर्णिमा 2026 कब है? 28 और 29 जुलाई को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान किसी के शरीर में बाहर से प्रवेश नहीं करते, क्योंकि वे पहले से ही प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान हैं। वेद और शास्त्रों में भी बताया गया है कि परमात्मा सभी प्राणियों के भीतर मौजूद हैं। भले ही हम उन्हें अपनी आंखों से न देख सकें या सामान्य रूप से महसूस न कर पाएं, लेकिन हमारे जीवन का आधार वही हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उन्होंने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का भजन, नाम-स्मरण और साधना करता है, तो उसके भीतर छिपी दिव्य चेतना जागृत होने लगती है। इसी आध्यात्मिक शक्ति के प्रभाव से कई संत और महापुरुष ऐसे कार्य कर जाते हैं, जिन्हें देखकर लोगों को लगता है कि उनके भीतर स्वयं भगवान प्रकट हो गए हैं। वास्तव में यह भगवान की कृपा और भक्ति की शक्ति होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भूत-प्रेत के विषय में प्रेमानंद महाराज ने बताया कि मनुष्य के अपने कर्म ही उसके सुख-दुख का मुख्य कारण होते हैं। जब व्यक्ति को अपने बुरे कर्मों का फल भोगना होता है, तब उसे भूत-प्रेत जैसी बाधाओं का अनुभव हो सकता है। जैसे ही कर्मों का हिसाब पूरा हो जाता है, ये बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। इसलिए भय में जीने के बजाय अच्छे कर्म, भगवान का स्मरण और सत्कर्म करने पर ध्यान देना चाहिए। यही जीवन को सुखी और शांत बनाने का सबसे अच्छा मार्ग है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/premanand-maharaj-videos-kya-bhagwan-insaan-ke-sharir-me-pravesh-karte-hain-articleshow-eky484l"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Yogini Ekadashi 2026: कब करें योगिनी एकादशी व्रत? जानें सही डेट, मंत्र और मुहूर्त सहित पूरी पूजा विधि]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/yogini-ekadashi-2026-vrat-paran-time-kab-hai-puja-vidhi-mantra-shubh-muhurat-aarti-lyrics-significance-photoshow-g1fmb5p</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/yogini-ekadashi-2026-vrat-paran-time-kab-hai-puja-vidhi-mantra-shubh-muhurat-aarti-lyrics-significance-photoshow-g1fmb5p</guid>
            <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:09:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Yogini Ekadashi Kab Hai: धर्म ग्रंथों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। इन सभी का नाम, महत्व और कथा आदि भी अलग-अलग होते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kx2j6vb1hxh3xrt9jdxrh9rn,imgname-yogini-ekadashi-kab-hai-1783571377505.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Yogini Ekadashi Kab Hai: धर्म ग्रंथों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। इन सभी का नाम, महत्व और कथा आदि भी अलग-अलग होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Yogini Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। हर महीने में 2 बार ये व्रत किया जाता है। इनमें से आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस बार योगिनी एकादशी का व्रत कब करें, इसकी विधि क्या है और शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा, इसकी डिटेल आगे जानिए&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Gupt Navratri 2026: दुर्लभ संयोग में शुरू होगी गुप्त नवरात्रि, इस बार कितने दिनों की, 8 या 9?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई, शुक्रवार की सुबह 8 बजकर 16 मिनिट से शुरू होगी जो 11 जुलाई, शनिवार की सुबह 5 बजकर 22 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि 10 जुलाई को दिन भर रहेगी, इसलिए इसी दिन योगिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन 11 जुलाई को होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Daily Aarti Benefits: घर में रोज क्यों करें भगवान की आरती? जानें मंत्र, विधि और 5 बड़े फायदे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;सुबह 07:32 से 09:12 तकदोपहर 12:05 से 12:58 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 12:32 से 02:12 तकशाम 05:32 से 07:12 तक&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। जैसा व्रत आप करना चाहें वैसा ही संकल्प लें।- ऊपर बताए गए किसी भी शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें। इसके पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें।- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। लकड़ी के आसन पर कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।- गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और भगवान विष्णु को चंदन, चावल, रोली, अबीर फूल, धूप आदि अर्पित करें।- पूजा के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप मन ही मन में करते रहें। इसके बाद भोग लगाएं।- भोग में तुलसी के पत्ते जरूर डालें। इसके बिना भोग अधूरा माना जाता है। भगवान विष्णु की आरती करें।- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें जैसे झूठ न बोलें, किसी को परेशान न करें, किसी पर क्रोध न करें।- अगले दिन 11 जुलाई को द्वादशी तिथि में जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण करें।- धार्मिक मान्यता है कि इस तरह योगिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ओम जय जगदीश हरे॥जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनशे मन का।सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ओम जय जगदीश हरे॥मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ओम जय जगदीश हरे॥तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ओम जय जगदीश हरे॥तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ओम जय जगदीश हरे॥तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ओम जय जगदीश हरे॥दीनबन्धु दुःखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ओम जय जगदीश हरे॥विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ओम जय जगदीश हरे॥तन-मन-धन सब कुछ है तेरा।तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥ओम जय जगदीश हरे॥ओम जय जगदीश हरे॥ ओम जय जगदीश हरे॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/yogini-ekadashi-2026-vrat-paran-time-kab-hai-puja-vidhi-mantra-shubh-muhurat-aarti-lyrics-significance-photoshow-g1fmb5p"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Halharini Amavasya 2026: कब है हलहारिणी अमावस्या, इस दिन किसकी पूजा करें? जानें मुहूर्त और महत्व]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/halharini-amavasya-2026-kab-hai-puja-vidhi-shubh-muhurat-mahatva-hal-puja-niyam-articleshow-kkb0eoh</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/halharini-amavasya-2026-kab-hai-puja-vidhi-shubh-muhurat-mahatva-hal-puja-niyam-articleshow-kkb0eoh</guid>
            <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 11:15:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Halharini Amavasya 2026 Kab Hai: आषाढ़ मास की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। धर्म ग्रंथों में इस तिथि का विशेष महत्व बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kxczz7yyyg9gr1940474patk,imgname-halharini-amavasya-2026-date-1783921352670.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Halharini Amavasya 2026 Date: &lt;/strong&gt;हर महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है। इस दिन सूर्य व चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं। ज्योतिष के साथ-साथ इस तिथि का धार्मिक महत्व भी है। इस तिथि के देवता पितृ हैं, इसलिए इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष उपाय व पूजा की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। ये अमावस्या बहुत ही खास होती है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Monday Facts: सप्ताह के पहले दिन का नाम &lsquo;सोमवार&rsquo; ही क्यों, इस दिन शिवजी की पूजा क्यों करते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हलहारिणी अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 09:13 से 10:53 तकसुबह 10:53 से दोपहर 12:32 तकदोपहर 12:06 से 12:59 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 12:32 से 02:12 तकदोपहर 03:52 से 05:31 PM&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jagannath Rath Yatra 2026: कब निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा, कहां से देखें, कैसे पहुंचें पुरी? जानें पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है हलहारिणी अमावस्या 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि 13 जुलाई, सोमवार की शाम 06 बजकर 49 मिनिट से शुरू होगी, जो 14 जुलाई, मंगलवार की दोपहर 03 बजकर 13 मिनिट तक रहेगी। चूंकि अमावस्या तिथि का सूर्योदय 14 जुलाई को होगा, इसलिए इसी दिन हलहारिणी अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुस्थिर, वर्धमान और हर्षण नाम के 3 शुभ योग बनेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों खास है हलहारिणी अमावस्या? (Significance of Halharini Amavasya)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस अमावस्या में हल शब्द का उपयोग किया गया है जिसका उपयोग खेती में किया जाता है। दरअसल आषाढ़ मास में ही किसान अपनी फसल की बोबनी करता है। इस दौरान हल का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। हल के महत्व को समझते हुए भी हमारे विद्वानों ने इस अमावस्या को ये नाम दिया। किसान इस दिन अपने हल की पूजा कर उसके प्रति अपना आभार प्रकट करता है और ये कामना करता है कि इस बार उसकी फसल अच्छी हो।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे करें हल की पूजा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हलहारिणी अमावस्या की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद शुभ मुहूर्त में पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले हल को कुमकुम से तिलक लगाएं। फूलों की माला पहनाएं। आरती करें। हल के साथ खेती में उपयोग आने वाले अन्य उपकरणों व अपने बैलों की पूजा भी इस दिन करें। इसके बाद फसल अच्छी होने की प्रार्थना भगवान से करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/halharini-amavasya-2026-kab-hai-puja-vidhi-shubh-muhurat-mahatva-hal-puja-niyam-articleshow-kkb0eoh"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Halharini Amavasya 2026: हलहारिणी और हरियाली अमावस्या, क्या ये दोनों एक ही हैं? दूर करें कन्फ्यूजन]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/halharini-amavasya-2026-vs-hariyali-amavasya-date-importance-difference-in-hindi-photoshow-ky5cqng</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/halharini-amavasya-2026-vs-hariyali-amavasya-date-importance-difference-in-hindi-photoshow-ky5cqng</guid>
            <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:06:57 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Halharini Amavasya 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या होती है। एक साल में कुल 12 अमावस्या होती है। इन सभी का महत्व और नाम अलग-अलग है जो इन्हें खास बनाते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kwxqezk1qaqqbc7nae5c5qne,imgname-halharini-amavasya-2026-1783409114720.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Halharini Amavasya 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या होती है। एक साल में कुल 12 अमावस्या होती है। इन सभी का महत्व और नाम अलग-अलग है जो इन्हें खास बनाते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Hariyali Amavasya 2026 Kab Hai: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना गया है। सालभर में आने वाली हर अमावस्या का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ हैं, इसलिए इस तिथि पर पितरों की शांति के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। कुछ लोगों को अक्सर हलहारिणी और हरियाली अमावस्या को लेकर कन्फ्यूजन रहता है कि ये दोनों एक ही हैं या अलग-अलग? आगे दूर कीजिए अपना कन्फ्यूजन&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;गुरु पूर्णिमा 2026 कब है? 28 और 29 जुलाई को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;हर साल आषाढ़ मास में हलहारिणी अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। ये वर्षा काल की शुरूआत में आती है। हलहारिणी अमावस्या के दिन किसान अपने हल व खेती में काम आने वाले अन्य चीजों की पूजा करते हैं। कुछ स्थानों पर हलहारिणी अमावस्या के दिन ही बोवनी करने की परंपरा भी है। इसलिए हलहारिणी अमावस्या का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस बार हलहारिणी अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Sawan 2026: सावन में कितने सोमवार 4 या 5, कब से शुरू होगा महादेव का प्रिय महीना? जानें सटीक जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;हिंदू पंचांग के पांचवें महीने का नाम सावन है। इस महीने की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं। इस समय तक काफी वर्षा हो चुकी होती है और प्रकृति हरी-भरी दिखाई देती है, जिसके चलते ही इस अमावस्या का नाम हरियाली अमावस्या रखा गया है। इस दिन पौधारोपण विशेष रूप से किया जाता है, मान्यता है कि ऐसा करने से पितरो की आत्मा को शांति मिलती है। इस बार हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अमावस्या तिथि पर सूर्य व चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं, ऐसा संयोग महीने में सिर्फ एक ही दिन देखने को मिलता है।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; ऐसी मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर निगेटिव शक्तियों जैसे भूत-प्रेत आदि का प्रभाव अधिक हो जाता है।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; अमावस्या तिथि पर बाल कटवाना, नाखून काटना, मांस-मदिरा आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में परेशानी आ सकती है।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है, वे यदि अमावस्या तिथि पर खास उपाय करें तो उनकी परेशानियां कम हो सकती हैं।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; अमावस्या तिथि पर जरूरतमंदों को दान करने का भी विशेष महत्व है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/halharini-amavasya-2026-vs-hariyali-amavasya-date-importance-difference-in-hindi-photoshow-ky5cqng"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Amavasya Kab Ki Hai: कब है आषाढ़ अमावस्या? जानें भौमवती अमावस्या की डेट, शुभ मुहूर्त और उपाय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ashadha-amavasya-2026-date-bhaumvati-amavasya-shubh-muhurat-upay-significance-in-hindi-articleshow-l83gpg5</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ashadha-amavasya-2026-date-bhaumvati-amavasya-shubh-muhurat-upay-significance-in-hindi-articleshow-l83gpg5</guid>
            <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 08:12:35 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Ashadha Amavasya 2026 Date: आषाढ़ मास की अमावस्या को हलहारिणी कहते हैं। इस बार ये अमावस्या जुलाई 2026 में है। इस अमावस्या का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में भी बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kf2mfn1jr8c3saz4tsxkhqa1,imgname-mauni-amawasya-2026-02-1768541377586.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Bhaumvati Amavasya July 2026:&lt;/strong&gt; अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव हैं। इसलि इस तिथि पर पितरों की शांति के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। एक साल में कुल 12 अमावस्या होती है, इन सभी के नाम और महत्व आदि अलग-अलग हैं। इनमें से आषाढ़ मास की अमावस्या का नाम हलहारिणी है। इस बार ये अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार को अमावस्या होने से ये भौमवती अमावस्या कहलाएगी। इसका महत्व अन्य अमावस्या से काफी अधिक माना गया है। आगे जानिए भौमवती अमावस्या से जुड़े रोचक फैक्ट&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hanuman Puja Rules: कब न करें हनुमानजी की पूजा, क्या न चढ़ाएं? ये गलतियां भूलकर न करें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों खास है भौमवती अमावस्या?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार जब किसी मंगलवार को अमावस्या का संयोग बनता है तो इसे भौमवती अमावस्या कहते हैं। ये अमावस्या संक्रांति के समान ही शुभ फल देने वाली मानी गई है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने का विशेष महत्व है। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Jagannath Rath Yatra 2026: कब निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा, कहां से देखें, कैसे पहुंचें पुरी? जानें पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भौमवती अमावस्या 14 जुलाई 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 09:13 से 10:53 तकसुबह 10:53 से दोपहर 12:32 तकदोपहर 12:06 से 12:59 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 12:32 से 02:12 तकदोपहर 03:52 से 05:31 PM&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भौमवती अमावस्या के उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; भौम का अर्थ है मंगल, इसलिए भौमवती अमावस्या पर मंगलदेव से संबंधित उपाय करने चाहिए। इस दिन मंगलदेव के मंत्रों का जाप करने से शुभ फल मिलते हैं।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो भौमवती अमावस्या पर किसी योग्य विद्वान की सलाह लेकर भात पूजन करवाएं। इससे आपकी परेशानी दूर हो सकती हैं।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; भौमवती अमावस्या पर मंगल ग्रह से संबंधित चीजों जैसे मसूर की दाल, लाल चंदन, लाल कपड़े और लाल फलों का दान जरूरतमंदों को करें।&lt;strong&gt;4. &lt;/strong&gt;अगर आप जमीन से संबंधित व्यापार करते हैं तो भौमवती अमावस्या पर अपने घर में मंगल यंत्र स्थापित कर रोज इसकी पूजा करें।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव हैं। भौमवती अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान आदि करें। इससे पितरों की कृपा आप पर बनी रहेगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/ashadha-amavasya-2026-date-bhaumvati-amavasya-shubh-muhurat-upay-significance-in-hindi-articleshow-l83gpg5"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Aniruddhacharya Maharaj Video: लड़की बोली ‘काश! घर वालों की बात मान ली होती‘, अनिरुद्धाचार्य महाराज ने लव मैरिज पर दी बड़ी सीख]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/aniruddhacharya-maharaj-love-marriage-husband-second-marriage-woman-story-articleshow-loe1og3</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/aniruddhacharya-maharaj-love-marriage-husband-second-marriage-woman-story-articleshow-loe1og3</guid>
            <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Aniruddhacharya Maharaj Viral Video: अनिरुद्धाचार्य महाराज के सत्संग में एक महिला ने बताया कि परिवार की मर्जी के खिलाफ लव मैरिज करने के बाद उसके पति ने दूसरी शादी कर ली। इस पर महाराज ने परिवार की सहमति का महत्व बताया।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kx5pk0288wbnrwqgyzrdp2mv,imgname-aniruddhacharya-viral-video-1783676633160.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Aniruddhacharya Viral Video:&lt;/strong&gt; वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के सत्संग में अक्सर लोग अपनी निजी परेशानियां साझा करते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक लड़की अपनी शादीशुदा जिंदगी का दर्द बयां करती नजर आ रही है। लड़की की कहानी सुनने के बाद अनिरुद्धाचार्य महाराज ने भी रिश्तों और परिवार को लेकर महत्वपूर्ण बात कही।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;वीडियो में लड़की बताती है कि करीब पांच साल पहले उसने अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद वह अपना घर छोड़कर उत्तर प्रदेश में अपने पति के साथ रहने लगी। शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन समय बीतने के साथ दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगे। इस दौरान उनके दो बच्चे भी हुए।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Premanand Maharaj Videos: &lsquo;क्या भूत- प्रेत की तरह भगवान भी शरीर में आते हैं&rsquo;? सुनें प्रेमानंद महाराज का जवाब&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;लड़की के अनुसार, घरेलू विवाद लगातार बढ़ते गए और आखिरकार उसके पति ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई और वह समाधान की उम्मीद लेकर अनिरुद्धाचार्य महाराज के पास पहुंची।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Aniruddhacharya Maharaj Video: &lsquo;पति शॉपिंग के लिए पैसे नहीं देते, क्या करूं?&rsquo; अनिरुद्धाचार्य महाराज ने बताया उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बातचीत के दौरान अनिरुद्धाचार्य महाराज ने लड़की से पूछा कि क्या उसने प्रेम विवाह करने से पहले अपने माता-पिता की सहमति ली थी। इस पर लड़की ने स्वीकार किया कि परिवार के विरोध के बावजूद उसने अपनी मर्जी से शादी की थी। लड़की ने यह भी कहा कि इस फैसले से उसके माता-पिता बहुत आहत हुए। उसने बताया कि पिता इस घटना के बाद लंबे समय तक दुखी रहे और बाद में उनका निधन हो गया। लड़की ने इसे अपनी सबसे बड़ी भूल बताते हुए कहा कि आज उसे अपने फैसले पर पछतावा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके बाद अनिरुद्धाचार्य महाराज ने लड़की से पूछा कि वह दूसरी लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी। जवाब में लड़की ने कहा कि यदि कोई प्रेम विवाह करना चाहता है तो पहले परिवार की सहमति लेने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। अगर माता-पिता तैयार न हों, तो जल्दबाजी में ऐसा फैसला लेने से बचना चाहिए, क्योंकि बाद में पछताना पड़ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने भी परिवार के सम्मान और माता-पिता की भावनाओं का ध्यान रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि जीवन के बड़े फैसले सोच-समझकर और परिवार के साथ संवाद करके लेने चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/aniruddhacharya-maharaj-love-marriage-husband-second-marriage-woman-story-articleshow-loe1og3"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Pradosh Vrat July 2026: कब करें प्रदोष व्रत, कितनी देर रहेगा मुहूर्त? जानें डेट, मंत्र सहित पूरी पूजा विधि]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pradosh-vrat-july-2026-ravi-pradosh-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-katha-photoshow-ogm4147</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pradosh-vrat-july-2026-ravi-pradosh-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-katha-photoshow-ogm4147</guid>
            <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 08:06:01 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Pradosh Vrat Kab Hai: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं। प्रदोष व्रत भी इनमें से एक है। ये व्रत हर महीने में 2 बार किया जाता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01khb90hfp20r6hrrdzq831qv4,imgname-pradosh-vrat-feb-2026-03-1770978821622.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Pradosh Vrat Kab Hai: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं। प्रदोष व्रत भी इनमें से एक है। ये व्रत हर महीने में 2 बार किया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Pradosh Vrat July 2026 Date: धर्म ग्रंथों में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत-पूजा की जाती है, जिसे प्रदोष व्रत कहते हैं। इस बार 12 जुलाई 2026, रविवार को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने से रवि प्रदोष व्रत किया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और आसान पूजा विधि&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Aniruddhacharya Maharaj Video: लड़की बोली &lsquo;काश! घर वालों की बात मान ली होती&lsquo;, अनिरुद्धाचार्य महाराज ने लव मैरिज पर दी बड़ी सीख&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार 12 जुलाई 2026, रविवार को प्रदोष काल में पूजा का शुभ समय शाम 7 बजकर 22 मिनिट से रात 9:24 बजे तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 2 घंटे 2 मिनिट का समय मिलेगा। इस दिन वृद्धि, ध्रुव और सौम्य नाम के शुभ योग होने से इस व्रत का महत्व और बढ़ जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Vrat Rules: व्रत पूरा होने के बाद सबसे पहले क्या खाएं? जानें पारण के सही नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;- रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें और मन ही मन में भगवान के मंत्र ऊं नम: शिवाय का जाप करते रहें।- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें और पूजा स्थान पर गंगाजल या गौमूत्र छिपड़कर अच्छी तरह सफाई कर लें।- शुभ मुहूर्त में शिवलिंग का पहले शुद्ध जल, फिर गाय के दूध और उसके बाद दोबारा जल से अभिषेक करें।- इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भस्म, चंदन और पुष्प अर्पित करें। भगवान को भोग भी लगाएं।- अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।- इस प्रकार जो व्यक्ति प्रदोष व्रत में महादेव की पूजा करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;किसी समय में एक गांव में गरीब ब्राह्मण अपने परिवार के साथ रहता था। ब्राह्मण की पत्नी भगवान शिव की परम भक्त थी और हर प्रदोष व्रत पूरी श्रद्धा से करती थी। एक बार उनका बेटा गंगा स्नान के लिए जा रहा था। जब वह रास्ते में आराम कर रहा था, तभी राजा के सैनिकों ने डाकू समझकर उसे पकड़ लिया।बिना पूरी बात जाने राजा ने उसे जेल भेज दिया। उसी रात भगवान शिव की कृपा से राजा को स्वप्न आया कि वह बालक निर्दोष है। यदि उसे तुरंत मुक्त नहीं किया गया तो राज्य पर संकट आ जाएगा। अगली सुबह राजा ने लड़के के माता-पिता को बुलाया और सम्मानपूर्वक रिहा कर दिया।साथ ही गरीब ब्राह्मण परिवार की मदद के लिए उन्हें पांच गांव दान में दिए। इस तरह शिवजी की कृपा से गरीब ब्राह्मण सुख से रहने लगा। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से प्रदोष व्रत करने पर भगवान शिव अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pradosh-vrat-july-2026-ravi-pradosh-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-katha-photoshow-ogm4147"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Yogini Ekadashi Vrat Katha: कैसे एक कोढ़ी को मिला सुंदर शरीर? पढ़ें योगिनी एकादशी की रोचक कथा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/yogini-ekadashi-vrat-katha-in-hindi-hemamali-kuber-story-significance-articleshow-p6dcs4h</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/yogini-ekadashi-vrat-katha-in-hindi-hemamali-kuber-story-significance-articleshow-p6dcs4h</guid>
            <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:39:25 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Yogini Ekadashi Story Hindi Mai: आषाढ़ मास की योगिनी एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इसकी कथा भी बहुत रोचक है, जिसे सुनकर इस व्रत का पूरा फल मिलता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kjc20qvemd9brs6fjapynb2n,imgname-amalaki-ekadashi-2026-01-1772078784366.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Yogini Ekadashi Vrat Katha In Hindi:&lt;/strong&gt; इस बार 10 जुलाई, शुक्रवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। धर्म ग्रंथों में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। योगिनी एकादशी से जुड़ी एक रोचक कथा भी है जिसे सुने बिना इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। आगे पढ़ें योगिनी एकादशी की ये कथा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Yogini Ekadashi 2026: कब करें योगिनी एकादशी व्रत? जानें सही डेट, मंत्र और मुहूर्त सहित पूरी पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;योगिनी एकादशी व्रत की कथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्रचलित कथा के अनुसार, अलकापुरी नाम की नगरी में धन के देवता राजा कुबेर का शासन था। वे भगवान शिव के परम भक्त थे। उनके पास हेममाली नाम का एक यक्ष सेवक था, जिसका काम हर दिन मानसरोवर से सुंदर फूल लाकर शिव पूजा के लिए देना था।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Daily Aarti Benefits: घर में रोज क्यों करें भगवान की आरती? जानें मंत्र, विधि और 5 बड़े फायदे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हेममाली की पत्नी विशालाक्षी बहुत सुंदर थी। एक दिन वह फूल तो ले आया, लेकिन पत्नी के प्रेम में इतना खो गया कि समय का ध्यान ही नहीं रहा। इसी कारण वह समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए फूल नहीं पहुंचा सका। जब दोपहर तक फूल नहीं पहुंचे तो राजा कुबेर को बहुत क्रोध आया। उन्होंने हेममाली को बुलाकर कहा कि उसने भगवान शिव की पूजा में बाधा डालकर बड़ा अपराध किया है। क्रोधित होकर कुबेर ने उसे शाप दिया कि वह अपनी पत्नी से बिछड़ जाएगा, पृथ्वी पर जाकर कोढ़ी बनेगा और अनेक कष्ट सहेगा।शाप मिलते ही हेममाली स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर पड़ा और कोढ़ से पीड़ित हो गया। पत्नी का साथ भी छूट गया। दुखी होकर वह भटकता-भटकता हिमालय पहुंचा, जहां उसकी मुलाकात महर्षि मार्कण्डेय से हुई। हेममाली ने उन्हें अपनी पूरी कहानी सुनाई और इस दुख से मुक्ति का उपाय पूछा।महर्षि ने कहा कि यदि वह आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का श्रद्धापूर्वक व्रत करेगा, तो उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे। हेममाली ने ऋषि के बताए अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसका कोढ़ समाप्त हो गया, उसे अपना सुंदर शरीर वापस मिल गया और वह अपनी पत्नी से भी मिल गया। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है, दुख दूर होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/yogini-ekadashi-vrat-katha-in-hindi-hemamali-kuber-story-significance-articleshow-p6dcs4h"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Vrat Rules: व्रत पूरा होने के बाद सबसे पहले क्या खाएं? जानें पारण के सही नियम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vrat-rules-what-to-eat-after-fast-paran-niyam-photoshow-praz78c</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vrat-rules-what-to-eat-after-fast-paran-niyam-photoshow-praz78c</guid>
            <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:52:40 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;What to Eat After Fast: हिंदू धर्म में व्रत से जुड़े अनेक नियम बताए गए हैं। व्रत के बाद क्या खाएं और क्या खाने से बचें, ये बातें भी इन नियमों में शामिल हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kx5h9dtmhmee7r8jhw5y7j9j,imgname-fast-breaking-rules-01-1783671076692.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;What to Eat After Fast: हिंदू धर्म में व्रत से जुड़े अनेक नियम बताए गए हैं। व्रत के बाद क्या खाएं और क्या खाने से बचें, ये बातें भी इन नियमों में शामिल हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Fast Breaking Rules: हिंदू धर्म में व्रत केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि शरीर और मन को संयमित रखने का भी माध्यम भी माना जाता है। एक दिन उपवास करने के बाद शरीर को दोबारा सामान्य भोजन की आदत डालने के लिए सही तरीके से पारण करना बहुत जरूरी होता है। कई लोग व्रत खत्म होते ही भारी भोजन कर लेते हैं, जिससे पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए धर्म और आयुर्वेद दोनों में व्रत के बाद हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी गई है। आगे जानिए व्रत पूरा होने पर सबसे पहले क्या खाएं और किन चीजों से परहेज करें&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Belief: पूजा करते समय दीपक बुझ जाए तो क्या करें, क्या ये अपशकुन है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;व्रत पूरा होने के बाद सबसे पहले थोड़ा सामान्य पानी पिएं। कई लोग नारियल पानी, नींबू पानी या घर का बना मीठा शरबत भी लेते हैं। इससे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलने लगती है और डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती। आयुर्वेद भी यही कहता है कि लंबे समय तक भूखा रहने के बाद पहले तरल चीजें लेनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Daily Aarti Benefits: घर में रोज क्यों करें भगवान की आरती? जानें मंत्र, विधि और 5 बड़े फायदे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पानी पीने के कुछ समय बाद मौसमी फल, केला, पपीता या सेब जैसे हल्के फल खा सकते हैं। यदि फल उपलब्ध न हों तो दही या थोड़ी मात्रा में मखाने भी लिए जा सकते हैं। इससे पाचन तंत्र पर अचानक अधिक दबाव नहीं पड़ता और पेट भी खराब नहीं होता।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;व्रत के बाद पहला मुख्य भोजन हल्का और सात्विक होना चाहिए जैसे मूंग की दाल, खिचड़ी, दलिया या सादा दाल-चावल। इनके अलावा रोटी के साथ हरी सब्जी भी आप खा सकते हैं। भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं जिससे इसे पचाने में आंतों को अधिक मेहनत न करना पड़े।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद तुरंत पूड़ी, कचौरी, चाट, फास्ट फूड या बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन करने से गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या हो सकती है। इसलिए व्रत पूरा होने के बाद ऐसे भोजन से कुछ समय तक बचना बेहतर माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vrat-rules-what-to-eat-after-fast-paran-niyam-photoshow-praz78c"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Daily Aarti Benefits: घर में रोज क्यों करें भगवान की आरती? जानें मंत्र, विधि और 5 बड़े फायदे]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/daily-aarti-at-home-significance-correct-aarti-vidhi-mantra-and-benefits-photoshow-sdv4u1u</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/daily-aarti-at-home-significance-correct-aarti-vidhi-mantra-and-benefits-photoshow-sdv4u1u</guid>
            <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:34:17 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Aarti Benefits in Hindi: हिंदू धर्म में कोई भी पूजा बिना आरती के पूरी नहीं होती। इसलिए अगर आप घर में भी रोज भगवान की पूजा करते हैं तो आरती जरूर करें। इससे आपको कईं फायदे मिल सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kwy3m95jsdte8mhn17gdcq09,imgname-daily-aarti-benefits-1783421871282.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Aarti Benefits in Hindi: हिंदू धर्म में कोई भी पूजा बिना आरती के पूरी नहीं होती। इसलिए अगर आप घर में भी रोज भगवान की पूजा करते हैं तो आरती जरूर करें। इससे आपको कईं फायदे मिल सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Daily Aarti at Home: सनातन धर्म में पूजा-पाठ के बाद भगवान की आरती करने की परंपरा है। माना जाता है कि आरती के बिना पूजा पूर्ण नहीं होती। धर्म ग्रंथों में भी सुबह और शाम आरती करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा कहते हैं कि नियमित रूप से आरती करने से न केवल भगवान की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि घर के वातावरण में भी पॉजिटिविटी बनी रहती है। आगे जानिए घर में रोज भगवान की आरती क्यों करनी चाहिए, इसकी विधि-मंत्र और फायदे&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;गुरु पूर्णिमा 2026 कब है? 28 और 29 जुलाई को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;हिंदू धर्म में पूजा से जुड़े अनेक नियम बताए गए हैं। उसके अनुसार कोई भी पूजा तब तक पूरी नहीं होती जब तक आरती न हो। आरती के बाद ही पूजा पूर्ण मानी जाती है और उसका फल हमें प्राप्त होता है। आरती के दौरान ताली, शंख और घंटी बजाने की परंपरा भी है। ऐसा करने से भक्त अपनी श्रद्धा और समर्पण की भावना व्यक्त करता है। इसलिए पूजा के बाद आरती जरूर करनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Halharini Amavasya 2026: हलहारिणी और हरियाली अमावस्या, क्या ये दोनों एक ही हैं? दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की आरती की एक खास विधि है। उसी के अनुसार आरती करनी चाहिए। विद्वानों की मानें तो किसी भी देवी-देवता की आरती कुल 14 बार एक विशेष विधि से उतारनी चाहिए। सबसे पहले 4 बार पर चरणों से, 2 बार नाभि से, 1 बार मुख से और 7 बार पूरे शरीर से आरती की थाली घुमाएं। इसके बाद कर्पूर आरती करें। इस तरह आरती करने से भगवान प्रसन्न होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;दीपक से आरती करने के बाद कर्पूर आरती की जाती है। कर्पूर आरती करते समय एक विशेष मंत्र बोला जाता है, जो इस प्रकार है-&lt;strong&gt;कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि।।&lt;/strong&gt;अर्थ- जो कपूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं। जो इस संसार के सार हैं, शेषनाग को हार के रूप में धारण करते हैं। जो सदैव कमल रूपी मेरे हृदय में निवास करते हैं। उन माता पार्वती सहित भगवान शिव को मेरा प्रणाम है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; जिस घर में रोज भगवान की आरती होती है, वहां सुख-समृद्धि और पॉजिटिविटी बनी रहती है।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; रोज आरती करने से घर की निगेटिविटी और ऊपरी बाधा दूर होती है।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; भगवान के आरती करने से मन शांत होता है और टेंशन कम होती है।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; जिस घर में रोज आरती होती है वहां रहने वाले लोगों में आपसी सामंजस्य और प्रेम बना रहता है।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; रोज घंटी और शंख बजाकर आरती करने से हानिकारक बैक्टीरिया-वायरस का प्रभाव कम होता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/daily-aarti-at-home-significance-correct-aarti-vidhi-mantra-and-benefits-photoshow-sdv4u1u"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Monday Facts: सप्ताह के पहले दिन का नाम ‘सोमवार’ ही क्यों, इस दिन शिवजी की पूजा क्यों करते हैं?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/why-monday-is-called-somwar-and-why-lord-shiva-is-worshipped-on-this-day-photoshow-w0mgngk</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/why-monday-is-called-somwar-and-why-lord-shiva-is-worshipped-on-this-day-photoshow-w0mgngk</guid>
            <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 14:54:16 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Monday Significance: ज्योतिष शास्त्र और धर्म ग्रंथों में सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन महादेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट भी हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kxat37sf489y2ebzrygkr94d,imgname-monday-significance-1783848083247.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Monday Significance: ज्योतिष शास्त्र और धर्म ग्रंथों में सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन महादेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट भी हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Why Monday is Dedicated to Lord Shiva: सप्ताह का पहला दिन सोमवार होता है। इस दिन भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है। सोमवार से जुड़े कईं नियम और परंपराएं धर्म ग्रंथों में बताई गई है। इन नियमों का ध्यान रखा जाए तो जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है, ऐसी मान्यता है। कईं बार लोगों के मन में ये सवाल आता है कि सप्ताह के पहले दिन का नाम सोमवार ही रखा गया कुछ और क्यों नहीं? इसका जवाब ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है। आगे जानिए सोमवार से जुड़े रोचक फैक्ट&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Tradition: पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा क्यों बिछाते हैं, क्यों इस रंग को मानते हैं इतना शुभ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक दिन 24 घंटे का होता है। इन घंटों को ज्योतिष में होरा कहा जाता है। प्रत्येक होरा का एक विशेष ग्रह से संबंध होता है। होरा के नियम के अनुसार, जो ग्रह दिन के पहले घंटे (सूर्योदय के समय) का स्वामी होता है, वही उस पूरे दिन का राजा या वार का स्वामी कहलाता है। रविवार के बाद अगले दिन (सूर्योदय) का 25वां घंटा चंद्रमा की होरा में आता है। चंद्रमा का एक नाम सोम भी है, इसलिए सप्ताह के पहले दिन का नाम सोमवार है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Vrat Rules: व्रत पूरा होने के बाद सबसे पहले क्या खाएं? जानें पारण के सही नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;सोमवार को शिवजी की पूजा का विशेष महत्व है। इसके पीछे कारण है कि इस दिन पर चंद्रमा का प्रभाव सबसे अधिक होता है। चंद्रमा महादेव के मस्तक पर विराजमान है। इस दिन शिवजी की पूजा करने से चंद्रमा की पूजा अपने आप ही हो जाती है। इसलिए सोमवार को महादेव की पूजा का महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;- सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें।- दिन भर सात्विक जीवन जीएं, यानी किसी पर क्रोध न करें और किसी का बुरा सोचें।- किसी शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।- शिवलिंग का अभिषेक पहले शुद्ध जल से, फिर दूध और एक बार फिर जल से करें।- शिवजी को बेलपत्र, सफेद चंदन, धतूरा, आक के फूल मौसमी फल आदि अर्पित करें।- इसके बाद भोग लगाएं और आरती करें। इससे आपकी मनोकामना जरूर पूरी होगी।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;सोमवार को भगवान शिव का दिन होने इस दिन महादेव के मंत्रों का जाप बहुत ही शुभ फल देने वाला माना गया है। इस दिन आप नीचे लिखे किसी भी मंत्र का जाप कर सकते हैं-&lt;strong&gt;- ऊं नमः शिवाय&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;- ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;- ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष शास्त्र में हर दिन का कुछ खास चीजें दान करने का महत्व बताया गया है। इन चीजों का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। सोमवार को इन चीजों का दान करना बहुत शुभ माना गया है- सफेद वस्त्र, चावल, दूध, मिश्री, दही, सफेद फूल, चांदी। ये सभी चीजें चंद्रमा से संबंधित हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/why-monday-is-called-somwar-and-why-lord-shiva-is-worshipped-on-this-day-photoshow-w0mgngk"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Chanakya Niti: ये 4 लोग डालते हैं पति-पत्नी के रिश्तों में दरार, समय रहते बना लें दूरी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-4-people-who-create-problems-between-husband-wife-relationship-photoshow-w1uq59t</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-4-people-who-create-problems-between-husband-wife-relationship-photoshow-w1uq59t</guid>
            <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:36:33 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Chanakya Niti For Married Life: आचार्य चाणक्य ने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनके अनुसार कुछ लोगों का जरूरत से ज्यादा दखल पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kwrvftp38gmq7fcsgz64thee,imgname-chanakya-niti-for-married-life-01-1783245564611.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Chanakya Niti For Married Life: आचार्य चाणक्य ने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनके अनुसार कुछ लोगों का जरूरत से ज्यादा दखल पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Chanakya Niti for Husband Wife: आचार्य चाणक्य के अनुसार पति-पत्नी के बीच प्यार और भरोसा तभी बना रहता है, जब वे अपने रिश्ते से जुड़ी बातों को समझदारी से संभालें। कई बार कुछ लोगों का दखल रिश्ते में गलतफहमियां बढ़ा देता है जिसके कारण लव लाइफ में धीरे-धीरे दूरी आने लगती है। इसी वजह से पति-पत्नी का रिश्ता टूट भी सकता है। आगे जानिए ऐसे 4 लोगों के बारे में, जिनसे पति-पत्नी को सावधान रहना चाहिए&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: कौन-से 4 काम पत्नी को पति के सामने नहीं करने चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;चाणक्य नीति के अनुसार जो लोग एक की बात दूसरे तक पहुंचाने का काम करते हैं, उनसे हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए। ऐसे लोग छोटी-सी बात को बड़ा बनाकर पति-पत्नी के बीच गलतफहमियां पैदा कर सकते हैं। इनकी बातों पर आंख बंद करके भरोसा करना रिश्ते के लिए नुकसानदायक हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: किन 5 लोगों के घर भूलकर न करें भोजन? जानें वजह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;कुछ लोगों की आदत होती है कि वे दूसरों के मामले में दखल देने की कोशिश करते हैं और बिना मांगे हर बात में सलाह देने लगते हैं। चाणक्य के अनुसार पति-पत्नी को अपने निजी फैसले खुद लेने चाहिए। अगर हर छोटी-बड़ी बात में किसी तीसरे व्यक्ति को शामिल किया जाए तो रिश्ते में तनाव बढ़ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;जो लोग आपकी खुशियां देखकर जलते हैं, वे कई बार रिश्तों में भी खटास पैदा करने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोग गलत बातें फैलाकर या भड़काकर पति-पत्नी के बीच विवाद करा सकते हैं। इसलिए ऐसे लोगों से जितना हो सके दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;चाणक्य के अनुसार इंसान की संगत उसके व्यवहार पर सीधा असर डालती है। अगर पति या पत्नी ऐसे लोगों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, जिनकी आदतें गलत हैं या जो रिश्तों की अहमियत नहीं समझते, तो उसका असर उनके वैवाहिक जीवन पर भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसे लोगों से समय रहते दूरी बना लेनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-4-people-who-create-problems-between-husband-wife-relationship-photoshow-w1uq59t"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hindu Belief: पूजा करते समय दीपक बुझ जाए तो क्या करें, क्या ये अपशकुन है?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hindu-belief-about-deepak-pooja-mein-deepak-bujh-jaye-to-kya-kare-photoshow-wrdfgp4</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hindu-belief-about-deepak-pooja-mein-deepak-bujh-jaye-to-kya-kare-photoshow-wrdfgp4</guid>
            <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:22:51 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Hindu Belief About Deepak: हिंदू धर्म में हर शुभ काम से पहले दीपक जलाने की परंपरा है। सुबह-शाम पूजा के दौरान भी दीपक जलाते हैं। अगर ये दीपक बार-बार बुझने लगे तो क्या ये कोई अपशकुन होता है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kx37nybtk6s0nbw7jdtpt2hc,imgname-hindu-belief-about-deepak-1783593892218.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Hindu Belief About Deepak: हिंदू धर्म में हर शुभ काम से पहले दीपक जलाने की परंपरा है। सुबह-शाम पूजा के दौरान भी दीपक जलाते हैं। अगर ये दीपक बार-बार बुझने लगे तो क्या ये कोई अपशकुन होता है?&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Pooja Deepak Significance: हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। दीपक को ज्ञान और पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक माना जाता है। कईं बार पूजा करते समय जलता हुआ दीपक अचानक बुझ जाता तो कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगता है कि क्या यह कोई अशुभ संकेत है और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानिए पूजा करते समय दीपक का बुझना किस बात का इशारा है&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Daily Aarti Benefits: घर में रोज क्यों करें भगवान की आरती? जानें मंत्र, विधि और 5 बड़े फायदे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;कईं बार पूजा करते समय अचानक दीपक बुझ जाता है, कुछ लोग इसे अशुभ मानते हैं लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। दीपक बुझने के कईं कारण हो सकते हैं जैस तेज हवा, दीपक का ठीक से न जल पाना या बत्ती में कोई दोष होना। ऐसी स्थिति में दीपक बुझ जाए तो इसे अशुभ संकेत नहीं माना जाता। ये एक सामान्य स्थिति है जो किसी के साथ भी बन सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Broom Vastu Rules: झाड़ू कब लगाएं, कहां रखें, नई कब खरीदें? जानें जरूरी नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;अगर पूजा करते समय बार-बार दीपक बुझे तो इसे सामान्य घटना नहीं समझना चाहिए। इसके पीछे कोई खास वजह हो सकती है। पूजा के दौरान बार-बार दीपक का बुझना निकट भविष्य में आने वाले संकट की ओर इशारा भी हो सकता है। शकुन शास्त्र में इसके बारे में बताया गया है। ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, किसी विद्वान की सलाह लेकर उपाय करें।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; अपने कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा करें और भविष्य में होने वाली अशुभ घटना को रोकने के लिए प्रार्थना करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; अगर आपके कोई धार्मिक गुरु हैं तो उनसे इस बारे में चर्चा कर समाधान के बारे में पूछें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; महादेव के मंत्र जाप से भी आने वाले अनिष्ट को टाला जा सकता है। इसके लिए ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप पूरी श्रद्धा से करें।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; अपने राशि स्वामी से संबंधित उपाय करें। जैसे अगर आपकी राशि सिंह है तो आपकी राशि के स्वामी सूर्य हैं। सूर्य के मंत्रों का जाप करें, सूर्य से संबंधित चीजों का दान करें।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे आप आने वाले संकट से बच सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hindu-belief-about-deepak-pooja-mein-deepak-bujh-jaye-to-kya-kare-photoshow-wrdfgp4"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hindu Tradition: पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा क्यों बिछाते हैं, क्यों इस रंग को मानते हैं इतना शुभ?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hindu-tradition-puja-tips-why-red-cloth-is-used-on-puja-chowki-religious-and-astrology-reason-photoshow-x4rgf54</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hindu-tradition-puja-tips-why-red-cloth-is-used-on-puja-chowki-religious-and-astrology-reason-photoshow-x4rgf54</guid>
            <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:18 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Importance of Red Colour in Hinduism: हिंदू धर्म में रंगों का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ में लाल रंग की चीजों का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है जैसे कुमकुम और लाल रंग के कपड़े। इसके पीछे भी खास वजह है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kx82adkqaepgtwnqz2ggmggp,imgname-importance-of-red-colour-in-hinduism-01-1783756043895.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Importance of Red Colour in Hinduism: हिंदू धर्म में रंगों का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ में लाल रंग की चीजों का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है जैसे कुमकुम और लाल रंग के कपड़े। इसके पीछे भी खास वजह है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Puja Mein Lal Kapda Kyu Use Hota Hai: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान लाल रंग का विशेष महत्व माना गया है। मंदिरों में देवी-देवताओं को लाल वस्त्र चढ़ाने से लेकर पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाने तक की लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में लाल रंग के कपड़े का ही उपयोग क्यों किया जाता है? धर्म ग्रंथों और ज्योतिष में इसके पीछे की वजह बताई गई है। आगे जानिए इन कारणों के बारे में&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Vrat Rules: व्रत पूरा होने के बाद सबसे पहले क्या खाएं? जानें पारण के सही नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;हिंदू धर्म में लाल रंग को बहुत ही शुभ माना गया है क्योंकि ये ऊर्जा, शक्ति, साहस और मंगल ग्रह का प्रतीक है। मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पूजा में लाल कपड़ा उपयोग करने से पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Hindu Belief: पूजा करते समय दीपक बुझ जाए तो क्या करें, क्या ये अपशकुन है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लाल रंग देवी शक्ति का प्रतीक है। इसलिए नवरात्रि, लक्ष्मी पूजा, गणेश पूजा और कई अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में लाल वस्त्र, लाल चुनरी और लाल आसन का उपयोग किया जाता है। इससे पूजा का पुण्य फल बढ़ता है और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर कलश, नारियल, भगवान की प्रतिमा और अन्य पूजन सामग्री रखी जाती है। ऐसा करने से पूजा का स्थान व्यवस्थित और पवित्र माना जाता है। यह धार्मिक परंपरा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी अन्य रंग के कपड़े को इतना अधिक शुभ नहीं माना जाता।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष शास्त्र में लाल रंग का संबंध सूर्य और मंगल ग्रह से माना गया है। ये दोनों ग्रह ऊर्जा, आत्मविश्वास और साहस के कारक हैं। मान्यता है कि पूजा में लाल कपड़ा उपयोग करने से इन ग्रहों की शुभता बढ़ती है और व्यक्ति के जीवन में पॉजिटिविटी बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/hindu-tradition-puja-tips-why-red-cloth-is-used-on-puja-chowki-religious-and-astrology-reason-photoshow-x4rgf54"/>
        </item>
    </channel>
</rss>
