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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Sun, 23 Aug 2026 15:12:30 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[Raksha Bandhan Kab Hai: 2 दिन रहेगी सावन की पूर्णिमा, कब रखें व्रत-कब मनाएं रक्षाबंधन? दूर करें कन्फ्यूजन]]></title>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:24:00 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। ये पर्व हर साल श्रावण मास के अंतिम दिन मनाय जाता है। इस दिन महिलाएं पूर्णिमा का व्रत भी करती हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0evk09pqw6rp1fya6apmk6k,imgname-raksha-bandhan-2026-date-1787205091638.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026 Date:&lt;/strong&gt; सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण त्योहारों के लिए भी खास माना जाता है। इन्हीं में से एक है रक्षाबंधन। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक यह पर्व हर साल सावन पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस बार सावन पूर्णिमा की तिथि दो दिन तक रहने के कारण लोगों के बीच रक्षाबंधन की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। आगे जानिए साल 2026 में रक्षाबंधन कब मनाया जाएगा और पूर्णिमा व्रत कब रखें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सावन पूर्णिमा तिथि कब से कब तक रहेगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन मास की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार की सुबह 09 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी जो 28 अगस्त, शुक्रवार की सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इस तरह पूर्णिमा तिथि का संयोग 2 दिन होने से ये कन्फ्यूजन हो रहा है कि व्रत कब करें और रक्षाबंधन कब मनाएं?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब करें सावन पूर्णिमा व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का व्रत हमेशा चंद्रोदय तिथि में किया जाता है। चूंकि श्रावण पूर्णिमा तिथि का चंद्रोदय 27 अगस्त, गुरुवार को होगा, इसलिए इसी दिन सावन पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा। व्रत से संबंधित सभी कार्य इसी दिन करना शुभ रहेगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानें डेट और टाइम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब मनाएं रक्षाबंधन 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार रक्षा बंधन का पर्व उस दिन मनाया जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो और ये स्थिति 28 अगस्त, शुक्रवार को बन रही है। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा। इस दिन पहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना करेंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा? यहां जानें पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रक्षाबंधन पर कब से कब तक रहेगी भद्रा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रक्षा बंधन पर अक्सर भद्रा का संयोग बनता है। भद्रा एक अशुभ समय होता है जिसमें रक्षा बंधन पर्व मनाना शुभ नहीं माना जाता। लेकिन इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा एक दिन पहले यानी 27 अगस्त की शाम को ही खत्म हो जाएगी। ऐसी स्थिति में भद्रा का रक्षा बंधन पर्व पर कोई असर नहीं होगा। बहनें दिन भर शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा? यहां जानें पूरी डिटेल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/kajari-teej-2026-date-30-or-31-august-ratjaga-time-significance-articleshow-51hkrng</link>
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            <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 13:21:07 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Kajari Teej Date 2026: भाद्रपद मास में कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। इसका महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस पर्व में देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m01hn8de73ghgdceqwxsh0cv,imgname-hariyali-teej-famous-songs-1786758472110.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Kajari Teej Kab Hai: &lt;/strong&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। इसे बड़ी तीज, कजली तीज, सातुड़ी तीज आदि नामों से भी जाता है। इस पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कुछ स्थानों पर इस दिन नीम के पेड़ की पूजा भी की जाती है और नवविवाहित महिलाओं के मायके से पूजा के लिए विशेष सामग्री भी आती है। जानें इस बार कब है कजरी तीज और कब करें रतजगा&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Lunar Eclipse 2026: इस रात चंद्रमा का एक हिस्सा हो जाएगा गायब! जानें कब और कहां दिखेगा ग्रहण, NASA ने बताई पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है कजरी तीज 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त, रविवार की सुबह 09 बजकर 37 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 31 अगस्त, सोमवार की सुबह 08 बजकर 51 मिनिट तक रहेगी। चूंकि तृतीया तिथि का सूर्योदय 31 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन ये पर्व मनाया जाएगा। इस दिन ग्रहों की स्थिति से कईं शुभ योग बनेंगे जिससे इस दिन का महत्व और भी अधिक माना जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर भद्रा, पंचक और चंद्र ग्रहण का संयोग! राखी बांधने से पहलें जानें जरूरी बातें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब करें कजरी तीज 2026 का रतजगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;परंपरा के अनुसार कजरी तीज के एक दिन पहले महिलाएं रात भर जागकर भगवान शिव और देवी पार्वती के भजन करती हैं। व्रत करने वाली महिलाएं पूरी रात जागती हैं, सोती बिल्कुल नहीं है, इसे रतजगा कहते हैं। चूंकि कजरी तीज 31 अगस्त को है तो इसके दिन पहले यानी 30 अगस्त, रविवार की रात को कजरी तीज का रतजगा किया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों मनाते हैं कजरी तीज का पर्व?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कजरी तीज का पर्व महिला प्रधान हैं। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती है वहीं कुंवारी लड़कियां मनपसंद जीवन साथी पाने की कामना से शिवजी और देवी पार्वती की पूजा विशेष रूप से करती हैं। कजरी तीज को बूढ़ी तीज, सतवा तीज आदि नामों से भी जाना जाता है। कुंवारी लड़कियों को इस पर्व का विशेष रूप से इंतजार रहता है। धर्म ग्रंथों में भी इस पर्व का विशेष महत्व बताया गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Ekadashi Kab Ki Hai: कब करें पुत्रदा एकादशी व्रत 2026? नोट करें पारण का मुहूर्त, शुभ योग और महत्व]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/putrada-ekadashi-2026-date-paran-muhurat-shubh-yog-pavitra-ekadashi-kab-ki-hai-articleshow-61fk2k3</link>
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            <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 08:34:23 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;is mahine mein ekadashi kab ki hai: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। धर्म ग्रंथों में इसे पवित्रा एकादशी भी कहा गया है। इस बार पुत्रदा एकादशी का व्रत अगस्त 2026 में किया जाएगा।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ekadashi gyaras kab ki hai:&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। इन सभी का अलग-अलग नाम, महत्व, कथा के बारे में धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इनमें से श्रावण यानी सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पुत्रदा है। कुछ ग्रंथों में इसे पवित्रा भी कहा गया है। सावन में शिव पूजा के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है। इसलिए ये एकादशी बहुत ही खास मानी गई है। जानें पुत्रदा एकादशी 2026 की सही डेट&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है पुत्रदा एकादशी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, इस बार सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 22 अगस्त, शनिवार की रात 02 बजे से शुरू होगी, जो 24 अगस्त की सुबह 04:18 तक रहेगी। यानी 23 अगस्त को पूरे दिन एकादशी तिथि का संयोग बना रहेगा। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 23 अगस्त, रविवार को होगा, इसलिए इसी दिन पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पुत्रदा एकादशी 2026 पर कौन-से शुभ योग बनेंगे?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बार पुत्रदा एकादशी पर कईं शुभ योग बन रहे हैं जिसके चलते इस व्रत का महत्व और भी अधिक हो गया है। ज्योतिषियों के अनुसार 23 अगस्त, रविवार को सर्वार्थसिद्धि योग दिन भर रहेगा। इस योग में की गई पूजा, उपाय आदि सभी सिद्ध होते हैं यानी इनका शुभ फल मिलता है। इसके अलावा शुभ और प्रीति नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन रहेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब करें पुत्रदा एकादशी 2026 का पारण?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 24 अगस्त, सोमवार को किया जाएगा। इस दिन व्रत पारण के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 41 मिनिट से शाम 04 बजकर 16 मिनिट तक रहेगा। इस दौरान व्रत का पारण किया जा सकता है। पारण से पहले जरूरतमंदों को दान अवश्य दें। तभी व्रत का पूरा फल मिलता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों करते हैं पुत्रदा एकादशी व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो लोग योग्य संतान की इच्छा रखते हैं उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। जिन दंपत्ति को विवाह के लंबे समय के बाद भी यदि संतान प्राप्ति न हो तो उनके लिए भी ये व्रत मनचाहा फल देने वाला माना गया है।&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Chanakya Niti: कौन-से 4 काम करने के बाद तुरंत नहाएं? आचार्य चाणक्य ने बताई वजह]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-4-kaam-ke-baad-nahana-kyun-jaruri-articleshow-7gtv0ub</link>
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            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 15:54:21 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Chanakya Niti in Hindi: शरीर की शुद्धि के लिए स्नान करना सबसे आसान तरीका है। आचार्य चाणक्य के अनुसार कुछ खास काम करने के बाद नहाना बहुत जरूरी है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Quotes: &lt;/strong&gt;आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें आज भी लोग अपनाते हैं। उनकी नीतियों में साफ-सफाई और दैनिक जीवन की आदतों को लेकर भी कई बातें मिलती हैं। चाणक्य नीति के एक श्लोक में चार ऐसे कामों का जिक्र है, जिन्हें करने के बाद स्नान करना जरूरी बताया गया है। इन 4 कामों को करने के बाद नहाने की वजह भी चाणक्य ने बताई है। आगे जानिए कौन-से हैं ये 4 काम&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;चाणक्य नीति के अनुसार&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;तैलाभ्यङ्गे चिताधूमे मैथुने क्षौरकर्मणि।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;तावद् भवति चाण्डालो यावत् स्नानं न चाचरेत्।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अर्थ-&lt;/strong&gt; तेल मालिश, श्मशान से लौटना, काम क्रिया और क्षौर कर्म यानी बाल या दाढ़ी बनाने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तेल मालिश के बाद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य के अनुसार शरीर पर तेल लगाने या मालिश करने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए। मालिश के बाद शरीर पर तेल लगा रहता है और पसीने व धूल के साथ चिपचिपाहट भी हो सकती है। इसलिए नहाने से शरीर साफ और तरोताजा हो जाता है। तेल मालिश करने से शरीर का मैल भी बाहर निकलता है। इस स्थिति में यदि नहाएंगे नहीं तो शरीर की अशुद्धि बनी रहेगी।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: पति के बिना पत्नी को नहीं करने चाहिए ये 4 काम, लव लाइफ हो सकती है बर्बाद&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;श्मशान से लौटने के बाद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हिंदू धर्म में किसी की अंतिम यात्रा या श्मशान से घर लौटने के बाद स्नान करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। चाणक्य नीति में भी इसे जरूरी बताया गया है। इसके पीछे एक वजह स्वच्छता भी मानी जा सकती है, क्योंकि अंतिम संस्कार के स्थान से लौटने के बाद कपड़ों और शरीर पर श्मशान का धुआं या दूसरे कण लग सकते हैं। जो व्यवहारिक दृष्टि से ठीक नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानें डेट और टाइम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;काम क्रिया के बाद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चाणक्य के अनुसार स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंध के बाद भी स्नान जरूर करना चाहिए। प्राचीन समय में इसे शारीरिक और धार्मिक शुद्धता से जोड़कर देखा जाता था। इसलिए इस स्थिति के बाद स्नान को जरूरी माना गया। मैथुन करने के बाद शरीर तब तक शुद्ध नहीं होता जब तक आप स्नान न करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बाल या दाढ़ी कटवाने के बाद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बाल कटवाने या शेविंग कराने के बाद शरीर पर छोटे-छोटे बाल चिपक जाते हैं। इन्हें अच्छी तरह साफ करने के लिए स्नान करना आसान तरीका है। क्योंकि ऐसा न करने से ये बाल हमारे भोजन में भी गिर सकते हैं। आचार्य चाणक्य ने इसीलिए क्षौर कर्म करने के बाद स्नान करने की सलाह दी गई है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Raksha Bandhan Thali: रक्षा बंधन की थाली में भूलकर न रखें ये 5 चीजें! जानें वजह]]></title>
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            <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 14:27:36 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Raksha Bandhan 2026 Date: हर साल श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा बंधन पर्व मनाया जाता है। ये पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इससे जुड़ी कईं मान्यताएं और परंपरां हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026: &lt;/strong&gt;इस बार रक्षा बंधन का 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं और उन्हें उपहार देते हैं। रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने के लिए पूजा की थाली भी विशेष रूप से सजाई जाती है। इस थाली को सजाते समय कुछ चीजों को रखने से बचना चाहिए। आगे जानिए कौन-सी हैं ये 5 चीजें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;टूटे हुए चावल न रखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राखी की थाली में अक्षत यानी चावल का विशेष महत्व माना जाता है। तिलक के बाद भाई के माथे पर चावल लगाए जाते हैं। मान्यता है कि अक्षत पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए थाली में हमेशा साबुत चावल ही रखने चाहिए। टूटे हुए चावल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;काला कपड़ा या रूमाल न रखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं में शुभ कार्यों के दौरान काले रंग से परहेज करने की परंपरा रही है। इसलिए रक्षा बंधन की पूजा की थाली में काला कपड़ा या काले रंग की वस्तु रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके बजाय लाल, पीले या गुलाबी रंग के कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा? यहां जानें पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;टूटी-फूटी या खराब राखी न रखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राखी भाई-बहन के रिश्ते और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। इसलिए राखी पूरी और सही स्थिति में होनी चाहिए। अगर राखी टूट गई है या उसका कोई हिस्सा खराब हो गया है, तो उसे थाली में रखने के बजाय दूसरी राखी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा रहेगी या नहीं? जानें उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सूखे या खराब फूल भी न रखें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रक्षा बंधन की थाली में फूल भी रखे जाते हैं। फूलों को शुभता और पॉजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए थाली में मुरझाए, सूखे या खराब फूल रखने से बचना चाहिए। पूजा के लिए ताजे और साफ फूलों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस्तेमाल की हुई पूजा सामग्री&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रक्षा बंधन की थाली में रखी जाने वाली पूजा सामग्री साफ और नई या अच्छी स्थिति में होनी चाहिए। पहले से इस्तेमाल की गई या गंदी पूजा सामग्री को थाली में रखने से बचना चाहिए। पूजा की थाली को स्वच्छ रखना शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Bahula Chaturthi 2026: कब करें बहुला चतुर्थी व्रत? जानें सही डेट, चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/bahula-chaturthi-2026-date-chandrodaya-time-shubh-muhurat-significance-articleshow-8igx0o0</link>
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            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 13:46:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Bahula Chaturthi Date 2026: धर्म ग्रंथों में बहुला चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत करने से सभी तरह से सुख मिलते हैं और नि:संतान व्यक्ति को संतान की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0hp726ezbrvt4ze1zvev83a,imgname-bahula-chaturthi-2026-1787300120782.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Bahula Chaturthi Chandrodaya Time: &lt;/strong&gt;हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस तिथि के स्वामी भगवान श्रीगणेश हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी का जाती है। ये साल में आनेवाली 4 सबसे बड़ी चतुर्थी में से एक है। महिलाएं इस दिन अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के लिए व्रत-पूजा करती हैं। आगे जानिए 2026 में कब है बहुला चतुर्थी&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है बहुला चतुर्थी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अगस्त, सोमवार की सुबह 08 बजकर 50 मिनिट से शुरू होगी जो 1 सितंबर, मंगलवार की सुबह 07 बजकर 41 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रमा 31 अगस्त को उदय होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। कजरी तीज का पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बहुला चतुर्थी पर कब होगा चंद्रोदय?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुल चतुर्थी में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है। चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही महिलाओं का ये व्रत पूर्ण होता है, इसलिए इस दिन महिलाओं को चंद्रोदय का विशेष रूप से इंतजार रहता है। पंचांग के अनुसार 31 अगस्त को चंद्रोदय रात करीब 8 बजकर 25 मिनिट पर होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में कुछ अंतर हो सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan Kab Hai: 2 दिन रहेगी सावन की पूर्णिमा, कब रखें व्रत-कब मनाएं रक्षाबंधन? दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बहुला चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुल चतुर्थी में भगवान श्रीगणेश की पूजा भी शुभ मुहूर्त देखकर करनी चाहिए। ये हैं 31 अगस्त, सोमवार के दिन भर के शुभ मुहूर्त&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सुबह 09:19 से 10:53 तकदोपहर 12:02 से 12:52 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 14:00 से 03:34 तकशाम 05:08 से 06:41 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा?&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बहुला चतुर्थी का क्या महत्व है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एक साल में 4 प्रमुख चतुर्थी मानी जाती हैं। इनमें भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी भी एक है। इसे बहुला चतुर्थी, बहुला चौथ, हेरंब चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति इन चारों चतुर्थी पर व्रत करता है तो उसे पूरे साल की चतुर्थी व्रत का फल मिलता है। ये व्रत संतान की रक्षा और उनकी लंबी आयु की कामना से किया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Sawan Pradosh Vrat 2026: कब है सावन का दूसरा प्रदोष व्रत, 25 या 26 अगस्त? जानें मुहूर्त-मंत्र और पूजा विधि]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/sawan-pradosh-vrat-2026-date-25-or-26-august-puja-vidhi-muhurat-mantra-articleshow-b3gl6kh</link>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:39:16 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Sawan Mai Pradosh Vrat Kab Hai: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हर महीने की त्रयोदशी तिथि को व्रत किया जाता है। इसे प्रदोष व्रत कहते हैं। इस व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01khb90hfa790j0atbg5e39xm7,imgname-pradosh-vrat-feb-2026-01-1770978821610.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Sawan Pradosh Vrat 2026 Date: &lt;/strong&gt;सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस महीने में शिव पूजन के लिए कईं विशेष अवसर आते हैं, प्रदोष व्रत भी इनमें से एक है। ये व्रत दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को हो चुका है। अब दूसरा प्रदोष व्रत कब है? इसे लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है। आगे जानिए सावन का दूसरा प्रदोष व्रत कब किया जाएगा, साथ ही पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और पूजा विधि के बारे में&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानें डेट और टाइम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है सावन 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त, मंगलवार की सुबह 06 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी जो 26 अगस्त, बुधवार की सुबह 07 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। प्रदोष व्रत में शिवजी की पूजा शाम को की जाती है और ये स्थिति 25 अगस्त को बन रही है। इसलिए इसी दिन सावन का दूसरा प्रदोष व्रत किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा? यहां जानें पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;25 अगस्त 2026 प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सावन के दूसरे प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 24 मिनिट से रात 08 बजकर 39 मिनिट तक रहेगा। इस दौरान आप विधि-विधान से शिवजी की पूजा कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;प्रदोष व्रत में कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- प्रदोष व्रत की सुबह यानी 25 अगस्त को स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन उपवास रखें। ऐसा संभव हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं।- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, फूल, सफेद वस्त्र, भांग, शहद भगवान शिव को अर्पित करें।- गाय के घी का दीपक जलाएं। पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। इस तरह पूजा करने के बाद महादेव की विधि-विधान से आरती करें और प्रसाद बांटें।- संभव हो तो पूजा स्थान पर ही बैठकर शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इस तरह प्रदोष व्रत पर शिवजी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Raksha Bandhan 2026 Date: रक्षा बंधन 27 या 28 अगस्त को? जानिए दो दिनों का कन्फ्यूजन क्यों, भद्रा का समय और शुभ मुहूर्त]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/raksha-bandhan-2026-date-27-or-28-august-correct-date-bhadra-time-shubh-muhurat-sawan-purnima-tithi-articleshow-bh4i7s4</link>
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            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 12:10:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026 Date 27 or 28 August: &lt;/strong&gt;27 या 28 अगस्त को रक्षाबंधन 2026 कब है? जानें सही तारीख, भद्रा का समय, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और क्यों इस बार सावन पूर्णिमा तिथि को लेकर कन्फ्यूजन है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0hghbb976yhy6xtn6f55bth,imgname-raksha-bandhan-2026-date-27-or-28-august-1787294166377.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026 Kab Hai: &lt;/strong&gt;रक्षाबंधन 2026 की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच काफी कन्फ्यूजन है। सवाल है कि भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का त्योहार रक्षा बंधन इस बार 27 अगस्त को मनाया जाएगा या 28 अगस्त को? वजह है पूर्णिमा तिथि दो दिन पड़ना। इसके साथ ही 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण की चर्चा ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में जानिए कि 27 या 28 अगस्त इस साल रक्षा बंधन की सही डेट क्या है, राखी कब बांधना ज्यादा उचित रहेगा, भद्रा कब तक रहेगी और राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त कब से कब तक है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रक्षाबंधन 2026 कब है, 27 या 28 अगस्त?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हिंदू पंचांग में त्योहारों की तारीख तय करने में तिथि की भूमिका सबसे अहम होती है। इस बार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। इसी वजह से दो तारीखों को लेकर असमंजस पैदा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं और उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को है। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;28 अगस्त को ही क्यों मनाया जाएगा राखी का त्योहार?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दरअसल, पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह तक बनी रहेगी। ऐसे में उदय तिथि को महत्व देते हुए रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाने की सलाह दी जा रही है। यही वजह है कि 27 अगस्त को पूर्णिमा शुरू होने के बावजूद उस दिन राखी का त्योहार नहीं मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;28 अगस्त को सुबह का समय राखी बांधने के लिए सबसे शुभ है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह 6:24 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधी जा सकती है। कोशिश करें कि इसी अवधि में रक्षासूत्र बांधने की रस्म पूरी कर ली जाए। अगर किसी वजह से सुबह का समय निकल जाए तो दोपहर 12:01 बजे से 1:05 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांधने का विकल्प बताया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या रक्षाबंधन पर भद्रा रहेगी?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राखी के त्योहार पर भद्रा को लेकर भी लोगों के मन में सवाल रहता है। इस बार राहत की बात यह है कि बताई गई गणना के मुताबिक भद्रा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से रात 9:32 बजे तक रहेगी। रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा, इसलिए उस दिन भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। यानी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए भद्रा की चिंता नहीं करनी होगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें भारत में असर और राखी बांधने का शुभ समय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राखी बांधते समय इस पारंपरिक मंत्र का उच्चारण किया जाता है-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके बाद बहन भाई का तिलक कर आरती करें और मिठाई खिलाएं। राखी बंधवाने के बाद भाई भी अपनी बहन की सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करते हुए उसे उपहार दें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राखी बांधते समय किन बातों का ध्यान रखें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;परंपरा के अनुसार भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाना शुभ माना जाता है। तिलक के साथ अक्षत लगाने और आरती करने की भी परंपरा है। रक्षासूत्र यानी मौली बांधने के बाद डिजाइनर राखी बांधी जा सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: रक्षाबंधन पर होगा चंद्रग्रहण, कब से कब तक रहेगा सूतक, क्या बहनें बांध सकेंगी राखी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सबसे जरूरी बात यह है कि त्योहार को लेकर अनावश्यक भ्रम में न पड़ें। रक्षाबंधन 2026 के लिए 28 अगस्त की तारीख और सुबह का मुहूर्त सबसे प्रमुख विकल्प है। हालांकि अलग-अलग स्थानों के पंचांग में मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर संभव है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय का मिलान करना बेहतर रहेगा।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/raksha-bandhan-2026-date-27-or-28-august-correct-date-bhadra-time-shubh-muhurat-sawan-purnima-tithi-articleshow-bh4i7s4"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Nag Panchami 2026: कैसे हुई नागों की उत्पत्ति? जानिए कौन थे इनके माता-पिता, महाभारत में मिलता है पूरा वर्णन]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/nag-panchami-2026-how-were-nagas-born-who-are-their-parents-mahabharata-story-articleshow-dt721qv</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/nag-panchami-2026-how-were-nagas-born-who-are-their-parents-mahabharata-story-articleshow-dt721qv</guid>
            <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 12:02:23 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Naga Origin Story: &lt;/strong&gt;नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि&lt;strong&gt; &lt;/strong&gt;नागों की उत्पत्ति कैसे हुई और इनके माता-पिता कौन थे? महाभारत में कद्रू, कश्यप और नागों से जुड़ी इस रोचक कथा का पूरा रहस्य जानिए।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m076fqjbzy7pmsbe6w31pvj2,imgname-birth-of-nagas-in-hindu-mythology-1786948083275.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Birth of Nagas in Hindu Mythology: &lt;/strong&gt;नाग पंचमी 2026 का त्योहार इस बार 17 अगस्त को मनाया जा रहा है। नाग पंचमी के मौके पर नाग देवताओं की पूजा की जाती है। लेकिन नागों की उत्पत्ति कैसे हुई और हिंदू धर्मग्रंथों में बताए गए प्रमुख नागों के माता-पिता कौन थे? इसका जवाब महाभारत के आदिपर्व में मिलने वाली एक प्राचीन पौराणिक कथा में मिलता है। इस कथा के केंद्र में महर्षि कश्यप, उनकी पत्नी कद्रू और विनता हैं। यहीं से नागों, अरुण और गरुड़ के जन्म की कहानी आगे बढ़ती है। जानिए आखिर नागों की उत्पत्ति कैसे हुई? माता-पिता कौन थे?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;महर्षि कश्यप और कद्रू से हुई नागों की उत्पत्ति&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महाभारत के अनुसार, दक्ष प्रजापति की पुत्रियों कद्रू और विनता का विवाह महर्षि कश्यप से हुआ था। जब कश्यप ने दोनों को वर मांगने का अवसर दिया, तब कद्रू ने एक हजार ऐसे पुत्रों की इच्छा जताई जो तेज, शक्ति और पराक्रम से संपन्न हों। वहीं विनता ने दो पुत्रों की कामना की, लेकिन उनकी इच्छा थी कि ये दोनों कद्रू के पुत्रों से भी अधिक शक्तिशाली और तेजस्वी हों। कश्यप ने दोनों की इच्छाएं स्वीकार कर लीं। इसके बाद कद्रू ने एक हजार अंडे दिए और विनता ने दो अंडे। लंबे समय बाद कद्रू के अंडों से एक-एक करके नाग पुत्रों का जन्म हुआ। इस तरह पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि कश्यप नागों के पिता और कद्रू उनकी माता थीं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जल्दबाजी में फूटा अंडा, जन्मे अरुण&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विनता के दोनों अंडों से काफी समय तक संतान बाहर नहीं आई। इंतजार से परेशान होकर उन्होंने एक अंडा समय से पहले खोल दिया। उसमें से अरुण प्रकट हुए, लेकिन उनका शरीर पूरी तरह विकसित नहीं था। अरुण ने अपनी माता की अधीरता पर नाराजगी जताई और उन्हें कद्रू की दासी बनने का शाप दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि दूसरा पुत्र ही उन्हें इस दासता से मुक्ति दिलाएगा। बाद में विनता के दूसरे अंडे से गरुड़ का जन्म हुआ। आगे चलकर गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन बने।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;नाग पंचमी 2026: क्या जीवित नाग की पूजा करनी चाहिए? जानें शास्त्रों में क्या है सही तरीका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कद्रू की चाल से विनता बनीं दासी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कथा में आगे समुद्र मंथन से प्रकट हुए दिव्य घोड़े उच्चैःश्रवा का प्रसंग आता है। उसके रंग को लेकर कद्रू और विनता के बीच शर्त लग गई। कद्रू ने अपने नाग पुत्रों को घोड़े की पूंछ से लिपटने का आदेश दिया, जिससे वह काली दिखाई देने लगे। कई नागों ने अपनी माता की बात मानने से इनकार किया। इससे क्रोधित होकर कद्रू ने उन्हें श्राप दिया कि राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ में वे अग्नि में भस्म हो जाएंगे। कर्कोटक नाग ने कद्रू का साथ दिया और घोड़े की पूंछ काली दिखाई देने लगी। शर्त हारने के बाद विनता को कद्रू की दासी बनना पड़ा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर चूल्हे पर क्यों नहीं रखते तवा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गरुड़ ने छुड़ाया माता को दासता से&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब गरुड़ को अपनी माता की स्थिति का पता चला, तो उन्होंने उन्हें मुक्त कराने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने नागों की शर्त पूरी करने के उद्देश्य से अमृत प्राप्त किया। इसके बाद विनता दासता से मुक्त हुईं। महाभारत की इस कथा में कद्रू से नागों की उत्पत्ति और विनता से अरुण तथा गरुड़ के जन्म का वर्णन मिलता है। आगे की पौराणिक परंपरा में शेषनाग, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक और कालिया जैसे प्रमुख नागों का उल्लेख मिलता है। इस तरह नाग पंचमी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि नागों की उत्पत्ति से जुड़ी इन प्राचीन कथाओं को याद करने का अवसर भी है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Sugar Price Hike: किस ग्रह की शांति के लिए किया जाता है शक्कर का दान? जानें ज्योतिष में चीनी का महत्व]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/sugar-price-hike-shakkar-daan-upay-significance-shukra-grah-shanti-kaise-kare-articleshow-gpm7psf</link>
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            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 11:52:00 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;chini ka rate: चीनी यानी शक्कर का रेट पिछले कुछ दिनों में काफी बढ़ गया है। ज्योतिष शास्त्र में भी चीनी का विशेष महत्व बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0hfn9yv8rn9rs4rcq2pgxmp,imgname-sugar-price-hike-1787293247451.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Sugar Donation Astrology:&lt;/strong&gt; पिछले साल एक किलो शक्कर की कीमत जहां 40 से 45 रूपए के बीच थी, वहीं अब इसकी कीमत 50 से 55 रुपए तक पहुंच गई है। एक साल में चीनी की कीमत करीब 13% बढ़ने से आम जन पर इसका सीधा असर हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में भी चीनी का विशेष महत्व बताया गया है। शक्कर का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आने के योग बनते हैं, ऐसा विद्वान कहते हैं। आगे जानिए किस ग्रह की शांति के लिए शक्कर का दान किया जाता है और इसका ज्योतिषिय महत्व&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शुक्र ग्रह के लिए करें शक्कर का दान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र नवग्रहों में से एक है। ये ग्रह प्रेम, सौंदर्य, सुख-सुविधा, वैवाहिक जीवन, कला और भौतिक सुखों का कारक है। शक्कर का संबंध शुक्र ग्रह से ही है। इसलिए कुंडली में शुक्र कमजोर हो या उससे जुड़ी परेशानियां चल रही हों, तो शक्कर का दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में तनाव, आर्थिक परेशानियां दूर हो सकती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;पुत्रदा एकादशी 2026: कब है सावन की अंतिम एकादशी, 23 या 24 अगस्त? जानें मुहूर्त-मंत्र सहित पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब करें शक्कर का दान?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष के विद्वानों के अनुसार शक्कर का दान शुक्रवार को करना चाहिए। इसके लिए शुक्रवार की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें। पूजा के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को शक्कर का दान करें। इसके अलावा आप किसी भंडारे या अन्नक्षेत्र में भी शक्कर का दान कर सकते हैं। दान हमेशा अपने सामर्थ्य के अनुसार करें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan Kab Hai: 2 दिन रहेगी सावन की पूर्णिमा, कब रखें व्रत-कब मनाएं रक्षाबंधन? दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शक्कर का दान करने से क्या लाभ होता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मान्यता है कि शक्कर का दान करने से शुक्र ग्रह से जुड़े सकारात्मक परिणाम बढ़ सकते हैं। इससे आर्थिक स्थिति बेहतर होने, दांपत्य जीवन में मधुरता आने और घर में सुख-शांति बढ़ने के योग बनते हैं। प्रेम संबंधों में चल रही परेशानियों को दूर करने के लिए भी यह उपाय किया जाता है। शक्कर का दान करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह जरूर लें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Chandra Grahan 2026: क्या भारत में दिखेगा 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण, कितनी देर रहेगा सूतक? जानें 5 जरूरी बातें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chandra-grahan-2026-28-august-india-sutak-kaal-raksha-bandhan-lunar-eclipse-photoshow-ny0urld</link>
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            <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 15:12:27 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Lunar Eclipse 2026:&lt;/strong&gt; सूर्य व चंद्र ग्रहण खगोलीय घटनाएं हैं लेकिन भारत में इसे ज्योतिष और धर्म से जोड़कर देखा जाता है जिसके चलते इनका विशेष महत्व है। ग्रहण से जुड़ी कईं मान्यताएं हैं जो इन्हें खास बनाती हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0pz11xycn8xj14mqrke89t3,imgname-chandra-grahan-2026-1787477133246.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Lunar Eclipse 2026:&lt;/strong&gt; सूर्य व चंद्र ग्रहण खगोलीय घटनाएं हैं लेकिन भारत में इसे ज्योतिष और धर्म से जोड़कर देखा जाता है जिसके चलते इनका विशेष महत्व है। ग्रहण से जुड़ी कईं मान्यताएं हैं जो इन्हें खास बनाती हैं।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;Chandra Grahan 2026: साल 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को होने जा रहा है। खास बात यह है कि इसी दिन रक्षा बंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में चंद्र ग्रहण की तारीख, समय, भारत में इसकी दृश्यता और सूतक काल को लेकर कई सवाल हैं। आइए जानते हैं 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण से जुड़ी 5 जरूरी बातें, जो आपके लिए जानना जरूरी हैं&hellip;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार सुबह 08 बजकर 03 मिनिट से शुरू होगा जो यह 11 बजकर 21 मिनिट पर समाप्त होगा। ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव करीब सुबह 9:42 बजे दिखाई देगा। ये आंशिक चंद्र ग्रहण होगा जो लगभग 3 घंटे 18 मिनट का रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस ग्रहण को लेकर सबसे बड़ी बात यही है कि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए देश के किसी हिस्से से इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। यह ग्रहण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के बड़े हिस्सों के अलावा यूरोप और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में दिखाई देगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें भारत में असर और राखी बांधने का शुभ समय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;चंद्र ग्रहण को लेकर सबसे ज्यादा सवाल सूतक काल को लेकर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आमतौर पर जिस स्थान से ग्रहण दिखाई देता है, वहां सूतक के नियमों का पालन किया जाता है। चूंकि 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सामान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा? यहां जानें पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;28 अगस्त को रक्षा बंधन और चंद्र ग्रहण एक ही दिन पड़ रहे हैं। हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं माना जा रहा है। ऐसे में रक्षा बंधन पर इस चंद्र ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। बहनें शुभ मुहूर्त में भाइयों को राखी बांध सकेंगी।&lt;/p&gt;&lt;img&gt;&lt;p&gt;वैज्ञानिकों की मानें तो चंद्र ग्रहण को देखना सूर्य ग्रहण की तरह आंखों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता। लेकिन फिर भी इसे देखना ठीक नहीं कहा जाता है। धार्मिक मान्याताओं के अनुसार ऐसा करना अशुभ होता है जो जीवन में नई परेशानियों का कारण बन सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Chanakya Niti: पति के बिना पत्नी को नहीं करने चाहिए ये 4 काम, लव लाइफ हो सकती है बर्बाद]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chanakya-niti-pati-ke-bina-patni-ko-nahi-karne-chahiye-ye-4-kaam-articleshow-o3lrg8u</link>
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            <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 16:16:42 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti Husband Wife:&lt;/strong&gt; आचार्य चाणक्य ने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कईं सूत्र बताए हैं। चाणक्य ने अपनी एक नीति में ये भी बताया है कि पत्नी को कौन-से काम पति के बिना नहीं करने चाहिए।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0fc6nbbw1mbtvbncckjzsrf,imgname-chanakya-niti-1787222513003.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti Tips for Women:&lt;/strong&gt; आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनकी नीतियों में रिश्ते, धन, व्यवहार, परिवार और दांपत्य जीवन को लेकर भी कई तरह की सीख मिलती है। चाणक्य ने अपनी एक नीति में ऐसे 4 कामों के बारे में बताया है जो पत्नी को पति के बिना नहीं करनी चाहिए। नहीं तो लव लाइफ पर इसका बुरा असर हो सकता है। आगे जानिए कौन-सी हैं ये 4 बातें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बिना सोचे-समझे बड़ा फैसला न लें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गृहस्थ जीवन में कईं बार बड़े फैसले लेने पड़ते हैं अगर पत्नी के सामने ऐसी स्थिति बने तो पति से बिना पूछे ऐसा कोई भी फैसला न लें। अगर पत्नी ऐसा करती है तो पति ये बात खटक सकती है और इससे वैवाहिक जीवन में परेशानी खड़ी हो सकती है। ये छोटी सी बात बड़े विवाद की कारण भी बन सकती है, इसलिए ऐसा करने से बचें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पर पुरुष से बात न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर पति साथ में न हो तो पत्नी को किसी भी पर पुरुष से बात नहीं करनी चाहिए चाहे वो घर का सदस्य ही क्यों न हो। पति के सामने रहते हुए पत्नी अगर किसी पुरुष से बात करे तो इसमें कोई दोष नहीं है। पति की गैरमौजूदगी में पर पुरुष से हंस-हंसकर बात करना और सामाजिक नियमों को अनदेखा करना वैवाहिक जीवन पर असर डाल सकता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan Kab Hai: 2 दिन रहेगी सावन की पूर्णिमा, कब रखें व्रत-कब मनाएं रक्षाबंधन?&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कोई यज्ञ-हवन और दान न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथ कहते हैं कि पत्नी को अपने पति के बिना कोई भी हवन-यज्ञ और दान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से उसके उस कार्य का कोई भी शुभ फल नहीं मिलता। इस तरह के सभी धार्मिक कार्य पति-पत्नी को साथ मिलकर करना चाहिए। तभी जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानें डेट और टाइम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पैसों का लेन-देन न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गृहस्थ जीवन बिना पैसों के नहीं चलता। धन कमाकर लाना पति की जिम्मेदारी है और इन पैसों से परिवार चलाना पत्नी की। साथ ही पत्नी को इन पैसों में से थोड़ा पैसा बचाकर भी रखना चाहिए, ऐसा विद्वान कहते हैं। अगर कभी इन पैसों का लेन-देन करने की जरूरत पड़े तो पति को इस बारे में जरूर बताना चाहिए। नहीं तो लव लाइफ पर इसका बुरा असर हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें भारत में असर और राखी बांधने का शुभ समय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chandra-grahan-2026-28-august-time-india-effect-raksha-bandhan-shubh-muhurat-articleshow-pgpuna3</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chandra-grahan-2026-28-august-time-india-effect-raksha-bandhan-shubh-muhurat-articleshow-pgpuna3</guid>
            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:55:28 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026 Date Time:&lt;/strong&gt; 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा। जानें ग्रहण कितने बजे शुरु होगा और कब समाप्त होगा, भारत में असर, सूतक काल और राखी बांधने का शुभ समय क्या है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0hca0kegxk1mdcznkfx3mmz,imgname-lunar-eclipse-28-august-2026-1787289731694.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Lunar Eclipse 28 August 2026: &lt;/strong&gt;28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन आसमान में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्रहण कितने बजे लगेगा, क्या इसका रक्षाबंधन पर असर पड़ेगा और क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा? जानिए 28 अगस्त 2026 को रक्षा बंधन के दिन लगने जा रहे चंद्र ग्रहण को लेकर मन में उठ रहे हर सवाल का सटीक जवाब।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कितने बजे से शुरू होगा चंद्र ग्रहण&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;खगोलीय गणना के मुताबिक 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण सुबह 8 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा। इसका अधिकतम प्रभाव करीब 9 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जबकि आंशिक ग्रहण का चरण लगभग 11 बजकर 21-22 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इससे पहले उपच्छाया चरण सुबह करीब 6:55 बजे शुरू होगा और करीब 12:30 बजे तक चलेगा। नासा के आंकड़ों के अनुसार यह 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण है और इसकी अधिकतम अवस्था में पृथ्वी की छाया चंद्रमा के बड़े हिस्से को ढक लेगी। यह एक डीप पार्टियल लूनर एक्लिप्स होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ग्रहण का समय भारतीय घड़ी के हिसाब से दिन में पड़ रहा है और उस दौरान भारत से चंद्रमा क्षितिज के ऊपर दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत के किसी हिस्से में यह चंद्र ग्रहण नजर नहीं आएगा। ग्रहण का दृश्य प्रभाव अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों समेत उन क्षेत्रों में देखा जा सकेगा जहां उस समय चंद्रमा आकाश में मौजूद होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन पर क्या पड़ेगा असर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक परंपराओं के अनुसार भारत में ग्रहण से जुड़ा सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि रक्षाबंधन के त्योहार पर ग्रहण की वजह से अलग से कोई रोक लागू नहीं होगी। राखी बांधने का समय स्थानीय पंचांग में दिए गए भद्रा और शुभ मुहूर्त के अनुसार तय कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;रक्षाबंधन के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण, क्या भारत में मान्य होगा सूतक? जानें राखी पर कितना पड़ेगा असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चंद्र ग्रहण का सूतक कब से माना जाता?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सामान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले शुरू माना जाता है। लेकिन जब ग्रहण संबंधित स्थान से दिखाई ही न दे, तो वहां सूतक मानने की परंपरा लागू नहीं होती। इसलिए भारत में 28 अगस्त 2026 के इस ग्रहण के लिए अलग से सूतक काल नहीं रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राखी बांधने का शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है। इस मुहूर्त की कुल अवधि करीब 3 घंटे 51 मिनट है। यानी रक्षाबंधन के दिन लगने जा रहा चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, जिसके कारण सूतक मान्य नहीं होगा और राखी का पर्व सामान्य धार्मिक नियमों के अनुसार मनाया जा सकेगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें- &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: रक्षाबंधन पर होगा चंद्रग्रहण, कब से कब तक रहेगा सूतक, क्या बहनें बांध सकेंगी राखी?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Anita Tanvi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chandra-grahan-2026-28-august-time-india-effect-raksha-bandhan-shubh-muhurat-articleshow-pgpuna3"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Onam 2026 Kab Hai: कब है ओणम, 25 या 26 अगस्त, क्यों मनाते हैं? जानें मान्यता और रोचक इतिहास]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/onam-2026-date-25-or-26-august-onam-kab-hai-mahabali-katha-significance-tradition-articleshow-q4id4n0</link>
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            <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 12:22:53 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Onam 2026 Date: दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में ओणम का विशेष स्थान है। खासतौर पर केरल में इस पर्व की रौनक देखते ही बनती है। ओणम का उत्सव कई दिनों तक चलता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0pp80agxk76pcwtjceenb4r,imgname-onam-2026-date-1787467923791.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Onam 2026 Kab Hai: ओणम सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के कई हिस्सों में उत्साह के साथ मनाया जाता है। देश के अलग-अलग शहरों में रहने वाले मलयाली समुदाय के लोग भी इस अवसर पर विशेष आयोजन करते हैं। आइए जानते हैं 2026 में ओणम कब मनाया जाएगा, इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस दिन कौन-कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं। इस पर्व से जुड़ी अनेक मानयताएं और परंपराएं हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है ओणम 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, इस बार ओणम का मुख्य पर्व 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। ओणम के आसपास कई दिनों तक अलग-अलग कार्यक्रम और पारंपरिक आयोजन होते हैं। केरल में इस दौरान घरों को सजाने, फूलों की रंगोली बनाने और विशेष पकवान तैयार करने की परंपरा है। ओणम के अवसर पर देश के कई शहरों में मलयाली संगठन भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनमें पारंपरिक नृत्य, संगीत और अन्य कार्यक्रम देखने को मिलते हैं।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Bahula Chaturthi 2026: कब करें बहुला चतुर्थी व्रत? जानें सही डेट, चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों मनाया जाता है ओणम?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओणम से जुड़ी सबसे प्रमुख मान्यता राजा महाबली से संबंधित है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा महाबली अपनी प्रजा के बेहद प्रिय और दानवीर राजा थे। उनके शासन में लोग सुखी और समृद्ध थे। राजा महाबली ने एक महान यज्ञ किया। उनके बढ़ते प्रभाव को देखकर देवताओं को चिंता हुई। इसके बाद भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा महाबली के पास पहुंचे। वामन भगवान ने महाबली से तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। उन्होंने पहले कदम में पूरी धरती और दूसरे कदम में आकाश नाप लिया। तीसरा कदम रखने के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान वामन ने तीसरा कदम उनके सिर पर रखा और उन्हें सुतल लोक भेज दिया। लेकिन महाबली की दानवीरता और अपनी प्रजा के प्रति प्रेम से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें सुतल लोक का राजा बना दिया। मान्यता है कि राजा महाबली वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आते हैं। उनके स्वागत और आगमन की खुशी में ही ओणम का पर्व मनाया जाता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें भारत में असर और राखी बांधने का शुभ समय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे मनाते हैं ओणम?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओणम का उत्सव कई दिनों तक चलता है। इस दौरान लोग अपने घरों की साफ-सफाई करके उन्हें सजाते हैं। महिलाएं घर के आंगन में फूलों से सुंदर पूक्कलम यानी रंगोली बनाती हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को ओणम की शुभकामनाएं देते हैं। इस पर्व पर पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं। केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला विशेष भोजन ओणम साद्या काफी प्रसिद्ध है। इसमें कई तरह की सब्जियां, चटनी, दाल, मिठाई और अन्य पारंपरिक पकवान शामिल होते हैं। ओणम के दौरान केरल में प्रसिद्ध वल्लमकली यानी नाव दौड़ का भी आयोजन किया जाता है। इसके अलावा पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस त्योहार की खास पहचान हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा रहेगी या नहीं? जानें उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/raksha-bandhan-2026-bhadra-rahegi-ya-nahi-ujjain-jyotishacharya-articleshow-qc5yhbp</link>
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            <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 11:42:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Rakhi Kab Hai: रक्षा बंधन पर लगभग हर साल भद्रा का संयोग बनता है। भद्रा को अशुभ समय मानते हैं इसलिए इस दौरान राखी बांधना ठीक नहीं माना जाता। जानें क्या इस बार भी रक्षा बंधन पर भद्रा का संयोग बनेगा?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0m1h8g5v5ahnt1yb77fmczt,imgname-raksha-bandhan-bhadra-2026-1787379098117.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan Bhadra 2026: &lt;/strong&gt;रक्षा बंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। ये पर्व हर साल श्रावण मास के अंतिम दिन यानी पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। रक्षा बंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले भद्रा का समय जरूर देखा जाता है क्योंकि मान्यता है कि भद्रा के समय में रक्षा बंधन मनाना शुभ नहीं होता। क्या साल 2026 के रक्षा बंधन पर्व पर भी भद्रा का संयोग बन रहा है? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. जय शर्मा से जानें भद्रा का समय और इससे जुड़ी खास बातें&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है रक्षा बंधन 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार सावन मास की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार की सुबह 09:08 से शुरू होगी जो 28 अगस्त, शुक्रवार की सुबह 09:48 तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय 28 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग भी रहेंगे, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी अधिक रहेगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें भारत में असर और राखी बांधने का शुभ समय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या रक्षा बंधन 2026 पर रहेगी भद्रा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, इस बार भद्रा 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा तिथि के साथ ही शुरू हो जाएगी, जो शाम को लगभग 7 बजे तक रहेगी। जबकि रक्षा बंधन का पर्व अगले दिन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। यानी इस साल रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा का बिल्कुल भी असर नहीं होगा। महिलाएं बिना भद्रा देखे भी पूरे दिन अपने भाई को राखी बांध सकेंगी।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shukra Gochar 2026: शुक्र देगा पैसा ही पैसा, 3 राशियों का शुरू होगा अच्छा समय, नौकरी-बिजनेस में भी होगा फायदा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भद्रा को क्यों माना जाता है अशुभ?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हिंदू पंचांग में भद्रा को एक विशेष काल माना गया है, जिसमें कई शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान किए गए शुभ कार्यों में बाधा आने की आशंका मानी जाती है। रक्षाबंधन के मामले में भी शास्त्रीय परंपरा के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी वजह से जब सावन की पूर्णिमा के साथ भद्रा का संयोग बनता है, तो राखी बांधने के लिए भद्रा समाप्त होने के बाद का समय चुना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Last Sawan Somwar 2026: कब है सावन का अंतिम सोमवार? जानें जलाभिषेक का मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/last-sawan-somwar-2026-date-jalabhishek-muhurat-puja-vidhi-upay-articleshow-t22ciqw</link>
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            <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:18:40 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Sawan Somwar 2026: धर्म ग्रंथों में सावन सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन की गई शिव पूजा का फल कहीं अधिक मिलता है, ऐसी मान्यता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01khb90hfp20r6hrrdzq831qv4,imgname-pradosh-vrat-feb-2026-03-1770978821622.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Sawan Somwar Puja Vidhi: &lt;/strong&gt;भगवान शिव का प्रिय सावन मास कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है। इस महीने का अब एक ही सोमवार शेष है। सावन का अंतिम सोमवार होने से भी इसका विशेष महत्व माना जा रहा है। इस दिन शिवजी के मंदिरों में शिव भक्तों की काफी भीड़ उमड़ेगी। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है। आगे जानिए कब है सावन 2026 का अंतिम सोमवार, जलाभिषेक का मुहूर्त व उपाय&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है सावन 2026 का अंतिम सोमवार?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बार सावन में 4 सोमवार का संयोग बना है। इनमें से 3 सोमवार निकल चुके हैं। सावन का अंतिम सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन प्रीति और आयुष्मान नाम के 2 शुभ योग दिन भर रहेगें, वहीं सिंह राशि में बुध और सूर्य के साथ होने से बुधादित्य नाम का राजयोग भी रहेगा। इन शुभ योगों के चलते सावन के अंतिम सोमवार का महत्व और भी बढ़ गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;24 अगस्त 2026 जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वैसे तो सावन सोमवार को पूरे दिन शिवलिंग का जलाभिषेक किया जा सकता है लेकिन अगर ये काम शुभ मुहूर्त में किया जाए तो और भी अधिक शुभ फल मिलते हैं। 24 अगस्त को जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:34 से 05:22 तकअभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:54 तकअमृत काल: दोपहर 03:06 से शाम 04:53 तकप्रदोष काल: शाम 06:55 से 07:15 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा रहेगी या नहीं? जानें उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सावन सोमवार की पूजा विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- सावन सोमवार की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।- ऊपर बताए शुभ मुहूर्त में शिवलिंग का साफ जल से अभिषेक करें। दूध से अभिषेक करने के बाद फिर जल चढ़ाएं।- शिवलिंग के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, भांग आदि चीजें अर्पित करें।- इसके बाद कुछ देर ऊं नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ भी कर सकते हैं।- भगवान महादेव को अपनी इच्छा अनुसार फल, मिठाई का भोग लगाएं और इच्छा पूर्ति के लिए प्रार्थना भी करें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Bahula Chaturthi 2026: कब करें बहुला चतुर्थी व्रत? जानें सही डेट, चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सावन सोमवार के उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए 108 बार ऊं नमः शिवाय का जाप करें। इससे आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; धन लाभ के लिए जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न या वस्त्र का दान करें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; जल्दी विवाह के लिए शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करें और माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।&lt;strong&gt;4. &lt;/strong&gt;मानसिक शांति के लिए शिवलिंग पर जल अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; किसी गौशाला में हरे चारे का दान करें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/last-sawan-somwar-2026-date-jalabhishek-muhurat-puja-vidhi-upay-articleshow-t22ciqw"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[पुत्रदा एकादशी 2026: कब है सावन की अंतिम एकादशी, 23 या 24 अगस्त? जानें मुहूर्त-मंत्र सहित पूरी डिटेल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/putrada-ekadashi-2026-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-sawan-pavitra-ekadashi-significance-articleshow-v72lz5w</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/putrada-ekadashi-2026-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-sawan-pavitra-ekadashi-significance-articleshow-v72lz5w</guid>
            <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 10:30:43 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Putrada Ekadashi 2026 Date: सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा और पवित्रा एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से योग्य पुत्र मिलता है। इस एकादशी का महत्व अनेक पुराणों में बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ky1zqr64wyd8vqjwetzgy4p9,imgname-devshayani-ekadashi-2026-date-1784625750212.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Putrada Ekadashi Kab Hai: &lt;/strong&gt;धर्म ग्रंथों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस एकादशी के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं। साल में कुल 24 एकादशी होती है इनमें से सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पुत्रदा है। इसे पवित्रा एकादशी भी कहते हैं। कहते हैं कि इस व्रत को करने से योग्य पुत्र प्राप्त होने के योग बनते हैं। इस बार ये व्रत अगस्त 2026 में किया जाएगा। आगे जानिए पुत्रदा एकादशी व्रत की सही डेट, पूजा विधि, मंत्र आदि पूरी डिटेल&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है पुत्रदा एकादशी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 22 अगस्त, शनिवार की रात 02 से 24 अगस्त, सोमवार की सुबह 04 बजकर 18 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 23 अगस्त, रविवार को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। इस दिन सर्वार्थसिद्धि, शुभ और प्रीति नाम के 3 शुभ योग दिन भर रहेंगे, जिससे इस व्रत का महत्व और भी अधिक हो जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पुत्रदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुबह 07:44 से 09:19 तकसुबह 09:19 से 10:54 तकदोपहर 12:04 से 12:54 तक (अभिजीत मुहूर्त)दोपहर 02:04 से 03:39 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Chanakya Niti: पति के बिना पत्नी को नहीं करने चाहिए ये 4 काम, लव लाइफ हो सकती है बर्बाद&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पुत्रदा एकादशी की पूजा-व्रत विधि&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- पुत्रदा एकादशी व्रत के एक दिन पहले यानी 22 अगस्त, शनिवार की रात सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।- 23 अगस्त की सुबह स्नान आदि करें। हाथ में जल, चावल-फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें।- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें। मुहूर्त शुरू होने पर घर में साफ स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।- भगवान को फूलों की माला पहनाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद चावल, फूल, अबीर, गुलाल, आदि चीजें चढ़ाएं।- भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें। पूजा करते समय मन ही मन में ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करते रहें।- मौसमी फल, खीर, मिठाई, पंचामृत, नारियल आदि चीजों का भोग लगाएं। पूजा पूरी होने पर भगवान की आरती करें और प्रसाद बांट दें।- रात को सोएं नहीं, भजन-कीर्तन करें। 24 अगस्त, सोमवार की सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और जरूरतमंदों को दान करें।- इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह जो व्यक्ति पुत्रदा एकादशी का व्रत करता है उसे योग्य संतान की प्राप्ति होती है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan Kab Hai: 2 दिन रहेगी सावन की पूर्णिमा, कब रखें व्रत-कब मनाएं रक्षाबंधन? दूर करें कन्फ्यूजन&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भगवान विष्णु की आरती लिरिक्स हिंदी में&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,क्षण में दूर करे॥ ऊं जय जगदीश हरे॥माता-पिता तुम मेरे, स्वामी तुम मेरे।तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तुम करुणा के सागर, तुम सब के स्वामी।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ऊं जय जगदीश हरे॥दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ऊं जय जगदीश हरे॥विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ऊं जय जगदीश हरे॥तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥ ऊं जय जगदीश हरे॥&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/putrada-ekadashi-2026-date-puja-vidhi-shubh-muhurat-sawan-pavitra-ekadashi-significance-articleshow-v72lz5w"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Putrada Ekadashi Vrat Katha: राजा को कैसे मिली योग्य संतान? पढ़ें पुत्रदा एकादशी की ये कथा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/putrada-ekadashi-vrat-katha-2026-23-august-pavitra-ekadashi-story-in-hindi-significance-articleshow-weg2mu8</link>
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            <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 06:00:17 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Putrada Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। हर एकादशी की अलग कथा है, जिसे सुनने के बाद ही उस एकादशी का पूरा फल मिलता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01ky9cxtzmhertz4r516j3y8c9,imgname-devshayani-ekadashi-2026-1784874462196.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Putrada Ekadashi 2026:&lt;/strong&gt; सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। इस साल पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026, रविवार को है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से संतान सुख की कामना पूरी होती है। संतान की इच्छा रखने वाले लोगं के लिए यह एकादशी विशेष फलदायी मानी गई है। इस व्रत से जुड़ी एक कथा भी है, जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़ें पुत्रदा एकादशी व्रत की रोचक कथा&hellip;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पुत्रदा एकादशी की कथा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;द्वापर युग के आरंभ में महिष्मती नगरी में महाजित नामक राजा राज्य करते थे। वे बहुत धर्मात्मा और प्रजा का पुत्र के समान पालन करने वाले थे, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। पुत्र न होने के कारण राजा हमेशा चिंतित और दुखी रहते थे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए कई उपाय किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।एक दिन राजा ने अपनी सभा में मंत्रियों से कहा कि उन्होंने कभी अन्याय नहीं किया, प्रजा को कष्ट नहीं दिया और हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते हुए शासन किया। फिर भी उन्हें संतान सुख क्यों नहीं मिल रहा, यह उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने मंत्रियों से इस समस्या का समाधान खोजने के लिए कहा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा रहेगी या नहीं? जानें उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजा के दुख का कारण जानने के लिए मंत्री वन में पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात महर्षि लोमश से हुई। मंत्रियों ने उन्हें राजा की समस्या बताई। ऋषि ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म के कर्मों को देखा।महर्षि लोमश ने बताया कि पिछले जन्म में राजा बहुत उद्दंड थे। एक बार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन वे दो दिनों से भूखे थे। दोपहर में पानी पीने के लिए एक तालाब पर पहुंचे। वहां एक प्यासी गाय अपने बछड़े के साथ पानी पी रही थी। राजा ने गाय को वहां से हटा दिया और स्वयं पानी पी लिया। इसी कर्म के कारण उन्हें इस जन्म में पुत्रहीन होने का कष्ट भोगना पड़ रहा है। हालांकि उस दिन भूखे रहने से उन्हें एकादशी व्रत का पुण्य भी मिला, जिसके कारण उन्हें राजपद प्राप्त हुआ।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;पुत्रदा एकादशी 2026: कब है सावन की अंतिम एकादशी, 23 या 24 अगस्त? जानें मुहूर्त-मंत्र सहित पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मंत्रियों ने पाप का निवारण पूछा तो महर्षि ने श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य राजा को समर्पित करने की सलाह दी। मंत्रियों ने विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और उसका फल राजा को समर्पित कर दिया। इसके पुण्य प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और नौ महीने बाद एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख की इच्छा रखने वालों के लिए विशेष फलदायी होता है। इस व्रत से पापों का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानें डेट और टाइम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chandra-grahan-2026-28-august-date-time-sutak-india-mai-dhikhega-ya-nahi-lunar-eclipse-articleshow-yct02lf</link>
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            <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:47:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;August Lunar Eclipse 2026: अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह में साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। इसे लेकर लोगों के मन में कईं सवाल है जैसे क्या ये भारत में दिखाई देगा, इसके सूतक का समय क्या रहेगा?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kwnrzpstk88dzrwehsr2qxj2,imgname-chandra-grahan-2026-03-1783142275898.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chandra Grahan in India: &lt;/strong&gt;साल 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। इनमें से पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को हो चुका है और अब साल का दूसरा चंद्र ग्रहण अगस्त के अंतिम सप्ताह में होगा। खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह ग्रहण खास रहने वाला है, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा का एक बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरेगा। क्या ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा? आगे जानिए ऐसे ही सवालों के जवाब&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर भद्रा, पंचक और चंद्र ग्रहण का संयोग! राखी बांधने से पहलें जानें जरूरी बातें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब होगा साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को होगा। यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। भारतीय समय के अनुसार ये चंद्र ग्रहण सुबह 08 बजकर 4 मिनिट से शुरू होगा, जो 11 बजकर 22 मिनिट तक रहेगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 17 मिनिट की रहेगी। ग्रहण का मध्य काल सुबह 09 बजकर 43 मिनिट रहेगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shadashtak Yog 2026: सूर्य-शनि का योग 4 राशियों के लिए अशुभ, बनेंगे दुर्घटना के योग-बड़े नुकसान की आशंका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या भारत में दिखेगा 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;28 अगस्त को होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां इसका कोई भी नियम जैसे सूतक आदि मान्य नहीं होगा। ये चंद्र ग्रहण अंटार्कटिका, अफ्रीका, यूरोप, एशिया के कुछ देश, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अंटलांटिक महासागर के देशों में देखा जा सकेग। जिन देशों में ये ग्रहण दिखाई देगा, सिर्फ वहीं इसका सूतक मान्य होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चंद्र ग्रहण पर रक्षा बंधन का संयोग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;28 अगस्त, शुक्रवार को श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि रहेगी। इस दिन रक्षा बंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। इसी दिन चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। ऐसा दुर्लभ संयोग कईं दशकों में एक बार बनता है। हालांकि भारत में ये ग्रहण दिखाई न देने से रक्षा बंधन पर्व पर इसका कोई भी प्रभाव नहीं माना जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या होता है आंशिक चंद्र ग्रहण?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आंशिक चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी उम्ब्रा में प्रवेश करता है। इस दौरान चंद्रमा का पूरा भाग अंधेरे में नहीं जाता। नासा के अनुसार पृथ्वी की छाया का कुछ हिस्सा चंद्रमा पर पड़ने के कारण इसका एक भाग सामान्य से अलग दिखाई दे सकता है। 28 अगस्त को भी ऐसी ही खगोलीय घटना देखने को मिलेगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/chandra-grahan-2026-28-august-date-time-sutak-india-mai-dhikhega-ya-nahi-lunar-eclipse-articleshow-yct02lf"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर भद्रा, पंचक और चंद्र ग्रहण का संयोग! राखी बांधने से पहलें जानें जरूरी बातें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/raksha-bandhan-2026-bhadra-panchak-chandra-grahan-time-effect-rules-articleshow-z92alfn</link>
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            <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 11:04:53 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Raksha Bandhan Bhadra 2026: इस बार रक्षा बंधन पर काफी खास रहेगा क्योंकि चंद्र ग्रहण के साथ-साथ इस बार पंचक का संयोग भी बन रहा है, वहीं भद्रा के बारे में भी सभी लोग जानना चाहते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Raksha Bandhan-Chandra Grahan 2026:&lt;/strong&gt; हर साल श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है। ये त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुखी और सफल जीवन की कामना करती हैं वहीं भाई अपनी बहन को उम्र भर रक्षा करने का वचन देते हैं। साल 2026 में रक्षा बंधन पर कईं अशुभ संयोग बन रहे हैं जैसे पंचक और चंद्र ग्रहण। इनका रक्षा बंधन पर्व पर क्या असर होगा? आगे जानिए&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Lunar Eclipse 2026: इस रात चंद्रमा का एक हिस्सा हो जाएगा गायब! जानें कब और कहां दिखेगा ग्रहण, NASA ने बताई पूरी डिटेल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है रक्षा बंधन 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार श्रावण पूर्णिमा तिथि 2 दिन यानी 27 और 28 अगस्त को रहेगी। ऐसे में सवाल ये उठता है कि रक्षा बंधन कब मनाएं। विद्वानों की मानें तो श्रावण पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय 28 अगस्त, शुक्रवार को होगा, इसलिए इसी दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। वहीं पूर्णिमा तिथि का व्रत 27 अगस्त, गुरुवार को किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;रक्षाबंधन के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण, क्या भारत में मान्य होगा सूतक? जानें राखी पर कितना पड़ेगा असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रक्षा बंधन 2026 पर भद्रा का समय क्या रहेगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार रक्षा बंधन से एक दिन पहले यानी 27 अगस्त, गुरुवार की सुबह 09 बजकर 09 मिनिट से भद्रा शुरू होगी जो रात 09 बजकर 32 मिनिट तक रहेगी। जबकि रक्षा बंधन 28 अगस्त को है। ऐसे में इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं माना जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रक्षा बंधन 2026 पर पंचक का क्या असर होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार रक्षा बंधन से एक दिन पहले यानी 27 अगस्त से पंचक शुरू होगा जो 31 अगस्त की रात तक रहेगा। विद्वानों का मत है पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्य करने की ही मनाही होती है अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इसलिए पंचक का रक्षा बंधन पर्व पर कोई अशुभ प्रभाव नहीं होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रक्षा बंधन 2026 पर चंद्र ग्रहण क्या प्रभाव होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विद्वानों के अनुसार इस बार रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है लेकिन ये ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक आदि प्रभाव नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में बिना किसी डर के आप रक्षा बंधन का पर्व मना सकते हैं। चंद्र ग्रहण का रक्षा बंधन पर्व पर कोई प्रभाव नहीं होगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
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