<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="yes"?>
<rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" version="2.0">
    <channel>
        <title>Asianet News Hindi</title>
        <link>https://hindi.asianetnews.com</link>
        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
        <image>
            <url>https://static-assets.asianetnews.com/images/ogimages/OG_Hindi.jpg</url>
            <width>143</width>
            <height>100</height>
            <link>https://hindi.asianetnews.com</link>
            <title>Asianet News Hindi</title>
        </image>
        <lastBuildDate>Thu, 14 May 2026 17:34:21 +0530</lastBuildDate>
        <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/rss/religious-news" rel="self" type="application/rss+xml"/>
        <item>
            <title><![CDATA[Vat Savitri Vrat 2026: क्यों करते हैं वट सावित्री व्रत, इस बार कब है? जानें मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vat-savitri-amavasya-vrat-2026-date-rituals-puja-time-significance-and-why-married-women-observe-this-fast/articleshow-25rkk47</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vat-savitri-amavasya-vrat-2026-date-rituals-puja-time-significance-and-why-married-women-observe-this-fast/articleshow-25rkk47</guid>
            <pubDate>Thu, 14 May 2026 10:01:25 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Savitri Amavasya Vrat 2026 Date, Puja Muhurat, Rituals, Significance, Vrat Katha &amp;amp; Why Married Women Observe it in Odisha: हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में वट सावित्री व्रत किया जाता है। धर्म ग्रंथों में भी इस व्रत का महत्व बताया गया है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krjbd00vj1nqpdwfh4w54kzf,imgname-vat-savitri-vrat-2026-1778732400667.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Vat Savitri Vrat 2026 Date: &lt;/strong&gt;धर्म ग्रंथों में ज्येष्ठ मास की अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि इसी दिन वट सावित्री व्रत किया जाता है। महिलाओं को इस व्रत का विशेष रूप से इंतजार रहता है। मान्यता है इस व्रत को करने से पति की सेहत ठीक रहती है और उसकी उम्र भी बढ़ती है, साथ ही घर-परिवार में भी सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत की शुरूआत ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तिथि से होती है। मुख्य पूजा अमावस्या तिथि पर की जाती है। जानें इस बार कब करें वट सावित्री व्रत, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि डिटेल&hellip;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;View this post on Instagram&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;p&gt;A post shared by Pt. Manish Sharma Ujjain | Astrologer (@panditmanishsharma_official)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब करें वट सावित्री व्रत 2026? जानें सही डेट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 मई, गुरुवार को है, इसलिए इसी दिन से वट सावित्री व्रत की शुरूआत होगी। वहीं ज्येष्ठ अमावस्या तिथि यानी 16 मई, शनिवार को मुख्य पूजा की जाएगी।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026: 16 मई को इन 5 गलतियों से बचें, वरना बर्बाद कर देंगे शनिदेव&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वट सावित्री व्रत 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वैसे तो वट सावित्री व्रत की पूजा पूरे दिन की जा सकती है लेकिन अगर ये काम मुहूर्त देखकर किया जाए तो और भी शुभ फल मिलते हैं। 16 मई के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-- दोपहर 11:56 से 12:49 तक (अभिजीत मुहूर्त)- सुबह 07:27 से 09:06 तक- दोपहर 12:23 से 02:01 तक&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026 से पहले घर से हटा दें ये 5 चीजें, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे करें वट सावित्री व्रत-पूजा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 16 मई, शनिवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। मन में कोई बुरा विचार न लाएं। शुभ मुहूर्त से पहले पूरी पूजन सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें।- पूजा के लिए एक टोकरी में 7 प्रकार का अनाज रखें और इसके ऊपर ब्रह्मा-सावित्री की प्रतिमा या चित्र रखकर बरगद के पेड़ के नीचे इनकी पूजा करें। इनके साथ शिव-पार्वती, यमराज और सावित्री-सत्यवान की पूजा भी करें।- नीचे लिखा मंत्र बोलकर देवी सावित्री को जल से अर्घ्य दें-&lt;strong&gt;अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्ध्यं नमोस्तुते।।&lt;/strong&gt;- बरगद के पेड़ पर जल चढ़ाएं और मंत्र बोलें-&lt;strong&gt;वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमै:।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोसि त्वं महीतले।&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;तथा पुत्रैश्च पौत्रैस्च सम्पन्नं कुरु मां सदा।।&lt;/strong&gt;- इसके बाद बरगद के पेड़ पर कच्चा सूत लपेटते हुए 11 परिक्रमा करें। आरती करें और उसी स्थान पर बैठकर सावित्री-सत्यवान की कथा भी सुनें। इसके बाद अपने परिवार की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद भी जरूर लें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वट सावित्री व्रत की कथा (Story of Vat Savitri Vrat)&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन समय में अश्वपति नाम के एक राजा थे। उनकी पुत्री का नाम सावित्री था, वह सर्वगुण संपन्न थी। सावित्री का विवाह राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान से हुआ। लेकिन शत्रुओं द्वारा हारए जाने के कारण राजा द्युमत्सेन जंगल में अपने परिवार के साथ रहते थे।विवाह से पहले से नारद मुनि ने सावित्री को बता दिया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम है। इसके बाद भी सत्यवती ने सत्यवान से ही विवाह करना स्वीकार किया। जिस दिन सत्यवान की मृत्यु होने वाली थी, उस दिन सावित्री भी अपने पति सत्यवान के साथ जंगल में गई।जंगल में लकड़ी काटते-काटते सत्यवान की मृत्यु हो गई और यमराज उसके प्राण निकालकर ले जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे-पीछे यमलोक की ओर चल पड़ी। सावित्री के पतिव्रत को देख यमराज ने उसे कईं वरदान दिए और आखिरकार सत्यवान के प्राण भी छोड़ने पड़े।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/vat-savitri-amavasya-vrat-2026-date-rituals-puja-time-significance-and-why-married-women-observe-this-fast/articleshow-25rkk47"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Premanand Maharaj Viral Video: तीर्थ दर्शन से भी नहीं मिला सुकून! प्रेमानंद बाबा ने बताए 3 कारण]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/premanand-maharaj-viral-video-why-no-peace-after-pilgrimage/articleshow-2fi16h2</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/premanand-maharaj-viral-video-why-no-peace-after-pilgrimage/articleshow-2fi16h2</guid>
            <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:25:38 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Premanand Maharaj Video: वृंदावन के प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें एक भक्त उनसे पूछ रहा है &lsquo;तीर्थ यात्रा के बाद भी शांति क्यों नहीं मिलती।&rsquo;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kange5wghap1rdm8k275mfb3,imgname-premanand-maharaj-5-1763805960080.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Premanand Maharaj:&lt;/strong&gt; सोशल मीडिया पर रोज प्रेमानंद महाराज के वीडियो वायरल होते हैं। इनमें से अधिकांश वीडियों में भक्तों द्वारा पूछे गए सवाल और उनके जवाब होते हैं। प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो इन दिनों तेजी से शेयर किया जा रहा है जिसमें एक भक्त उनसे पूछ रहा है &lsquo;चारधाम यात्रा, ज्योतिर्लिंग दर्शन और अमरनाथ यात्रा करने के बाद भी मन को शांति क्यों नहीं मिलती?&rsquo; इस सवाल के जवाब को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। कई यूजर्स ने कमेंट कर कहा कि यह संदेश आज के समय में हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। आगे पढ़ें प्रेमानंद महाराज का इस सवाल का सटीक जवाब&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी कब है? नोट करें व्रत की डेट, महत्व और उपाय&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तीर्थ यात्रा से पहले छोड़ें अपने अवगुण&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भक्त के सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा &lsquo;केवल तीर्थ यात्रा कर लेने से मन शांत नहीं होता। उन्होंने बताया कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयों, अहंकार, क्रोध और लालच को नहीं छोड़ता, तब तक उसे वास्तविक सुख और शांति नहीं मिल सकती। इसलिए तीर्थ यात्रा से पहले अपने इन अवगुणों का त्याग जरूर करें।&rsquo;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: राजा भी नहीं समझ पाया तीन पुतलों का रहस्य, मंत्री ने ऐसे सुलझाई पहेली&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मन की शुद्धता जरूरी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्रेमानंद महाराज ने कहा &lsquo;बहुत से लोग धार्मिक यात्राएं तो करते हैं, लेकिन उनका मन सांसारिक इच्छाओं में उलझा रहता है। ऐसे में यात्रा का पूरा फल नहीं मिल पाता। उन्होंने समझाया कि भगवान के दर्शन के साथ-साथ मन की शुद्धता भी जरूरी है। इसके बिना तीर्थ यात्रा या भगवान के भजन करना बेकार है।&rsquo;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कैसे मिलेगी सच्ची शांति?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा &lsquo;सच्ची भक्ति का मतलब सिर्फ मंदिर जाना नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार में भी बदलाव लाना है। अगर व्यक्ति दूसरों के प्रति प्रेम, दया और सेवा की भावना रखे तो उसे जीवन में सच्ची शांति मिल सकती है। इन गुणों को अपनाकर भगवान की भक्ति को पाया जा सकता है। तीर्थ यात्रा से पहले इन तीनों बातों को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/premanand-maharaj-viral-video-why-no-peace-after-pilgrimage/articleshow-2fi16h2"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Motivational Story: किन लोगों को मिलती है सक्सेस? किसान और कुत्ते की कहानी से जानें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-sant-farmer-dog-story-success-life-lesson-focus-on-goal-life-management/articleshow-9tskww8</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-sant-farmer-dog-story-success-life-lesson-focus-on-goal-life-management/articleshow-9tskww8</guid>
            <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:23:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Motivational Story In Hindi: अगर आप जीवन में सफलता चाहते हैं तो बेवजह के विवाद, लालच और ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहें। अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर लगाएं, तभी आपको सफलता मिल सकती है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krdbtp3xswwp3m0yc0f5gka3,imgname-motivational-story-of-a-dog-and-a-farmer-1778565077117.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Short Motivational Story In Hindi:&lt;/strong&gt; जीवन में सफल वही लोग होते हैं जो अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखते हैं। कई बार व्यक्ति अपने काम से ज्यादा दूसरों की बातों, विवादों, लालच या बेवजह की चीजों में उलझ जाता है। इसका नतीजा ये होता है कि उसका समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद हो जाते हैं। &lt;strong&gt;Asianetnews Hindi&lt;/strong&gt; की &lt;strong&gt;Motivational Story&lt;/strong&gt; सीरिज में आज एक ऐसा प्रेरणादायक प्रसंग बता रहे हैं, जो सिखाता है कि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रास्ते की बेकार बातों से दूर रहना जरूरी है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: संत ने चोर को रंगे हाथ पकड़ा, फिर जो किया वो सोच भी नहीं सकते&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किसान ने संत से मांगी मदद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एक गांव में एक संत रहते थे, जिनके पास लोग अपनी परेशानियों का समाधान लेने आते थे। एक दिन एक गरीब किसान उनके पास पहुंचा और बोला, &ldquo;मेरे जीवन में बहुत परेशानियां हैं। मैं अपने लक्ष्य को पूरा करना चाहता हूं, लेकिन बार-बार दूसरे कामों में उलझ जाता हूं और सफलता नहीं मिलती।&rdquo;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: कैसे मिलेगी मन को शांति? साधु और महिला की इस कहानी में छिपा है जवाब&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;किसान की बात सुनकर संत ने कहा, &ldquo;मैं जल्द ही तुम्हारे घर आऊंगा और तुम्हें इसका समाधान बताऊंगा।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगले दिन संत किसान के घर पहुंचे, लेकिन उस समय किसान खेत पर गया हुआ था। किसान की पत्नी ने संत का सम्मान किया और अपने बेटे को किसान को बुलाने भेजा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कुछ देर बाद किसान घर पहुंचा। उसके साथ उसका पालतू कुत्ता भी था, जो बहुत तेज-तेज सांस ले रहा था और काफी थका हुआ नजर आ रहा था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संत ने किसान से पूछा, &ldquo;क्या तुम्हारा खेत बहुत दूर है?&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;किसान ने जवाब दिया, &ldquo;नहीं, खेत तो घर के पास ही है, लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संत बोले, &ldquo;तुम बिल्कुल सामान्य दिख रहे हो, लेकिन तुम्हारा कुत्ता बहुत ज्यादा थका हुआ है। ऐसा क्यों?&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;किसान ने कहा, &ldquo;मैं तो सीधे रास्ते से घर आया हूं, लेकिन ये रास्ते में मिलने वाले दूसरे कुत्तों के पीछे भागता रहा, उन पर भौंकता रहा और उन्हें भगाने की कोशिश करता रहा। इसी वजह से ये ज्यादा थक गया।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संत बोले, &ldquo;इंसान की जिंदगी भी ऐसी ही होती है। जो व्यक्ति अपने लक्ष्य को छोड़कर हर छोटी-बड़ी बात में उलझता रहता है, वह जल्दी थक जाता है और अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाता। सफलता उसी को मिलती है जो बिना भटके अपने रास्ते पर आगे बढ़ता रहता है।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कहानी की सीख&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जो लोग धैर्य, अनुशासन और फोकस के साथ लगातार आगे बढ़ते रहते हैं, वही अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं। इसलिए अपनी ऊर्जा सही जगह लगाएं, समय की कीमत समझें और उन कामों पर फोकस करें जो आपके भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। यही सफल जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-sant-farmer-dog-story-success-life-lesson-focus-on-goal-life-management/articleshow-9tskww8"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Hindu Tradition: घर में बनने वाली अंतिम रोटी क्यों है खास, इसे किसे खिलाएं? बुजुर्गों से जानें राज]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/akhiri-roti-kise-khilaye-last-roti-for-dog-yamraj-connection-hindu-tradition/articleshow-c1m9fdx</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/akhiri-roti-kise-khilaye-last-roti-for-dog-yamraj-connection-hindu-tradition/articleshow-c1m9fdx</guid>
            <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:05:08 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Akhiri Roti Niyam: हिंदू धर्म में भोजन को देवी अन्नपूर्णा का रूप माना गया है। इसलिए घर में बनने रोटी को भी बहुत आदर दिया जाता है। घर में बनने वाली अंतिम रोटी किसे देना चाहिए, ये जानना भी सभी के लिए जरूरी है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krk0tbk8f7kz6eg0tc2bm2h0,imgname-akhiri-roti-kise-khilaye-1778754858599.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Akhiri Roti Kise Khilaye:&lt;/strong&gt; भारतीय परंपराओं में रसोई को सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि अन्नपूर्णा का स्थान माना गया है। यही वजह है कि हमारे बुजुर्ग भोजन और रोटी से जुड़े कई नियमों का पालन करने की सलाह देते हैं। आपने अक्सर सुना होगा कि घर में बनी पहली रोटी गाय को खिलानी चाहिए, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिरी रोटी किसे दी जाती है? जानिए घर में बनने वाली अंतिम रोटी से जुड़ी खास बातें...&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026: 16 मई को इन 5 गलतियों से बचें, वरना बर्बाद कर देंगे शनिदेव&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पहली रोटी गाय को क्यों?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रसोई की पहली रोटी गाय के लिए बनाई जाती है। गाय को पवित्र माना गया है और उसमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास बताया गया है। मान्यता है कि गाय को पहली रोटी खिलाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और अन्न की कभी कमी नहीं होती।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ेे-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Surya Gochar 2026: 15 मई से चमकेगी 5 राशि वालों की किस्मत, मिलेगा पैसा-नौकरी और मान-सम्मान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अंतिम रोटी किसे खिलाएं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रसोई में बनने वाली आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाना चाहिए। बड़े बुजुर्गों की मानें तो कुत्ता यमराज का दूत माना गया है। इसके अलावा कुत्ते का संबंध भैरव से भी बताया जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाता है, उसके घर पर आने वाली परेशानियां कम होती हैं और अकाल मृत्यु का भय भी दूर रहता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कुत्ते को रोटी खिलाने के फायदे&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, घर की अंतिम रोटी कुत्ते को खिलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। खासतौर पर शनिवार को काले कुत्ते को रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; जो व्यक्ति रोज घर की अंतिम रोटी कुत्ते रोटी खिलाता है, उस पर यमराज की कृपा बनी रहती है। इसे कुकर बलि भी कहा जाता है। ऐसा करने से घर में किसी की अकाल मृत्यु नहीं होती।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; जो लोग भगवान भैरव की उपासना करते हैं, उन्हें भी रोज कुत्ते को घर में बनने वाली अंतिम रोटी खिलाना चाहिए। इससे इनके ईष्टदेव की कृपा इन पर बनी रहती है।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; कुत्ते को रोटी खिलाने से घर में ऊपरी बाधाओं से भी बचा जा सकता है।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; कुत्ते को रोटी खिलाने से केतु के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/akhiri-roti-kise-khilaye-last-roti-for-dog-yamraj-connection-hindu-tradition/articleshow-c1m9fdx"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Shani Jayanti 2026 से पहले घर से हटा दें ये 5 चीजें, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/shani-jayanti-2026-vastu-tips-remove-these-5-things-from-home-before-shani-jayanti/articleshow-dbesoyn</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/shani-jayanti-2026-vastu-tips-remove-these-5-things-from-home-before-shani-jayanti/articleshow-dbesoyn</guid>
            <pubDate>Sat, 09 May 2026 15:16:00 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Shani Jayanti Vastu Tips: इस बार 16 मई, शनिवार को शनि जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व से पहले घर से कुछ चीजें हटा दें तो बेहतर रहेगा नहीं तो आपके जीवन की परेशानियां और भी बढ़ सकती हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kr62244jnemfm9mx92betm5x,imgname-shani-jayanti-ke-upay-1778319954066.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti Ke Upay:&lt;/strong&gt; हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 16 मई को मनाया जाएगा। खास बात ये है कि इस बार ये पर्व शनिवार को पड़ रहा है जिससे इसका महत्व और भी अधिक हो गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में कुछ बेकार या नकारात्मक वस्तुएं रखी हों तो ये शनि दोष को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में शनि जयंती से पहले इन चीजों को घर से हटा दें नहीं तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026: 13 साल बाद शनि जयंती पर दुर्लभ संयोग, साढ़ेसाती-ढैय्या वाले न चूकें ये मौका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जंग लगा लोहे का सामान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आपके घर में लोहे की ऐसी चीजें हैं जिन पर जंग लग चुका है और वे किसी काम में भी नहीं आ रही तो ऐसी चीजों को शनि जयंती से पहले या तो ठीक करवा लें या घर से बाहर कर दें। वरना ये चीजें आपके घर के वास्तु को खराब कर सकती हैं। शनिदेव भी ऐसे घर पर नाराज रहते हैं।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Gochar 2026: 4 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, 17 मई से शुरू होगा गोल्डन टाइम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बंद ताले और खराब घड़ी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुत से लोग अपने घरों में बंद पड़े ताले और खराब घड़ी रखते हैं जिनका कोई भी उपयोग नहीं होता है। ये चीजें घर में निगेटिविटी फैलाती हैं जिसका असर घर में रहने वाले लोगों पर हो सकता है। इसलिए इन चीजों को भी शनि जयंती से पहले घर से बाहर निकाल दें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पुराने जूते-चप्पल&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष शास्त्र में जूते-चप्पल को भी शनिदेव से जोड़कर देखा जाता है। अगर आपके घर में पुराने जूते-चप्पल हैं जिनका कोई उपयोग नहीं है तो इन्हें भी घर से बाहर निकाल दें। साथ ही घर के स्टोर रूम की भी अच्छे से साफ-सफाई करें। इससे शनिदेव की कृपा आप पर बनी रहेगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सूखा हुआ शमी का पौधा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शमी का पौधा शनिदेव से संबंधित हैं। अगर ये आपके घर में है और सूख चुका है तो इसे भी किसी नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें और इसके स्थान पर दूसरा पौधा लाकर घर में रखें। शमी के पौधे को रोज पानी देने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;टूटे-फूटे व खराब बर्तन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;घर में कुछ ऐसे बर्तन भी होते हैं जो टूट-फूट चुके होते हैं। इनका कोई उपयोग भी नहीं होता है। ऐसे बर्तनों को भी घर से हटा देना चाहिए। शनि जयंती से पहले ऐसा जरूर करें ताकि शनिदेव आप पर प्रसन्न हो सकें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/shani-jayanti-2026-vastu-tips-remove-these-5-things-from-home-before-shani-jayanti/articleshow-dbesoyn"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Somnath Amrit Mahotsav: 75 साल बाद फिर चर्चा में क्यों है सोमनाथ मंदिर?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/somnath-amrit-mahotsav-live-pm-modi-rudrabhishek-75-years-somnath-temple/articleshow-e5w4h4u</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/somnath-amrit-mahotsav-live-pm-modi-rudrabhishek-75-years-somnath-temple/articleshow-e5w4h4u</guid>
            <pubDate>Mon, 11 May 2026 12:00:01 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Somnath Amrit Mahotsav 2026: 11 मई 2026 को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर यहां &lsquo;सोमनाथ अमृत महोत्सव&rsquo; मनाया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री Narendra Modi भी शामिल हुए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kravmttfammf6y9ef48wgw5r,imgname-somnath-amrut-mahotsav-1778480999245.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;Somnath Live Darshan: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री ने मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में कुंभाभिषेक, ध्वजारोहण और कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी दर्शन के लिए पहुंच रही है। जो भक्त मंदिर नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे घर बैठे भी Somnath Amrit Mahotsav Live Darshan&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Somnath Temple Facts: कई बार टूटा, फिर भी नहीं मिटा अस्तित्व... जानें सोमनाथ मंदिर के 10 दिलचस्प फैक्ट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मंदिर में विशेष साज सज्जा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमृत महोत्सव के मौके पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए पहुंच रहे हैं। इस कार्यक्रम के अवसर पर ₹75 का स्मारक सिक्का भी जारी किया गया। यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि यह केवल मंदिर के 75 साल पूरे होने का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी माना जा रहा है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Somnath Temple: पंडित नेहरू क्यों थे सोमनाथ मंदिर के खिलाफ? जहां आज PM मोदी करेंगे 'कुंभाभिषेक'&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;11 पवित्र तीर्थों के जल से अभिषेक&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;देश के 11 पवित्र तीर्थ स्थलों से लाए गए जल से मंदिर शिखर पर विशेष कुंभाभिषेक किया जा रहा है। इसके लिए एक विशेष पात्र को शिखर तक पहुंचाया गया। सोमनाथ मंदिर के शिखर पर विशेष ध्वजारोहण कार्यक्रम भी रखा गया है, जिसे इस आयोजन का बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम एयर शो करने वाली है, जो इस कार्यक्रम को और खास बना रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्यों खास है सोमनाथ मंदिर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;Somnath Temple को देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों का शिकार हुआ, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। वर्तमान मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने की थी और 11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इसकी प्राण प्रतिष्ठा में हिस्सा लिया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/somnath-amrit-mahotsav-live-pm-modi-rudrabhishek-75-years-somnath-temple/articleshow-e5w4h4u"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Motivational Story: संत ने चोर को रंगे हाथ पकड़ा, फिर जो किया वो सोच भी नहीं सकते]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/saint-and-thief-motivational-story-life-management-lesson-good-company-behavior-change/articleshow-ezxrou5</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/saint-and-thief-motivational-story-life-management-lesson-good-company-behavior-change/articleshow-ezxrou5</guid>
            <pubDate>Mon, 11 May 2026 10:10:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;motivational story in hindi: एक चोर संत के आश्रम में चोरी करने गया। संत ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। लेकिन फिर भी उसे कोई सजा नहीं दी बल्कि कुछ ऐसा किया कि उससे चोर भी हैरान हो गया।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kran2f7zw3jbqet6wpwnr0fp,imgname-a-saint-s-story-of-life-management-1778474106110.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;short motivational story in hindi:&lt;/strong&gt; कहते हैं इंसान जिस संगत में रहता है, उसका असर उसके स्वभाव और सोच पर जरूर पड़ता है। अच्छी संगति व्यक्ति को सही रास्ता दिखाती है, जबकि गलत लोगों का साथ उसे बुरी आदतों की ओर ले जा सकता है। Asianet News Hindi की Motivational Story सीरीज में आज पढ़िए एक ऐसा प्रेरणादायक प्रसंग, जो बताता है कि संगत का असर किस तरह से व्यक्ति पर होता है। आगे पढ़ें संत और चोर की ये रोचक कहानी&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: कैसे मिलेगी मन को शांति? साधु और महिला की इस कहानी में छिपा है जवाब&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चोर और संत की प्रेरणादायक कहानी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुत समय पहले एक जंगल में एक संत रहते थे। वे बेहद सरल, शांत और दयालु स्वभाव के थे। उनके आश्रम में दूर-दूर से लोग आशीर्वाद लेने आते थे। संत हमेशा दूसरों की मदद करने और अच्छे विचार फैलाने का काम करते थे।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: पागलखाने की ये कहानी हंसने पर कर देगी मजबूर, बदल देगी सोचने का नजरिया&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक रात जब संत अपने आश्रम में सो रहे थे, तभी एक चोर चोरी करने के इरादे से वहां पहुंच गया। उसने आश्रम में रखा कीमती सामान इकट्ठा किया और उसे एक बड़ी गठरी में बांध लिया। जब वह सामान लेकर जाने लगा तो गठरी का वजन अधिक होने के कारण वह उसे उठा नहीं सका।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उसी समय संत की आंख खुल गई। उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति उनका सामान लेकर जाने की कोशिश कर रहा है। गुस्सा करने या शोर मचाने की बजाय संत ने शांत स्वर में कहा, &ldquo;यदि यह सामान तुम्हारे काम आ सकता है तो इसे ले जाओ, मैं गठरी उठाने में तुम्हारी मदद कर देता हूं।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;संत की बात सुनकर चोर हैरान रह गया। संत ने सच में उसकी मदद की और वह सामान लेकर अपने घर पहुंच गया। घर जाकर उसने पूरी घटना अपनी पत्नी को बताई। पत्नी ने उसे समझाया कि उसने एक नेक इंसान के साथ गलत किया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;पत्नी की बात सुनकर चोर को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह तुरंत आश्रम पहुंचा, संत को सामान लौटाया और माफी मांगी। संत ने उसे क्षमा कर दिया। इस घटना के बाद चोर ने चोरी छोड़ दी और अच्छे जीवन का रास्ता चुन लिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कहानी की सीख&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अक्सर लोग बुरी आदतों या गलत रास्तों पर परिस्थितियों, लालच या गलत संगति की वजह से चले जाते हैं। ऐसे लोगों को केवल सजा देकर हमेशा नहीं सुधारा जा सकता, बल्कि कई बार प्रेम, समझदारी और अच्छे व्यवहार से भी उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/saint-and-thief-motivational-story-life-management-lesson-good-company-behavior-change/articleshow-ezxrou5"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Apra Ekadashi 2026: दूध पीने से भी टूट सकता है एकादशी व्रत! क्या कहते हैं नियम?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-2026-vrat-rules-can-drinking-milk-break-ekadashi-fast/articleshow-gr6xxrd</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-2026-vrat-rules-can-drinking-milk-break-ekadashi-fast/articleshow-gr6xxrd</guid>
            <pubDate>Tue, 12 May 2026 10:57:58 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Apra Ekadashi 2026 Date:धर्म ग्रंथों में दूध को फलाहारी माना गया है यानी व्रत के दौरान इसे पी सकते हैं लेकिन इससे जुड़े कुछ नियम भी हैं। इन नियमों की अनदेखी की जाए तो दूध पीने से भी व्रत टूट सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krdach0p4y0qz5hch4bs6qxq,imgname-apra-ekadashi-kab-hai-1778563564566.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Apra Ekadashi Kab Hai:&lt;/strong&gt; ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा और अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार ये व्रत 13 मई, बुधवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत से जुड़े नियम धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। इस व्रत में लोग फलाहार कर सकते हैं। दूध भी फलाहार के अंतर्गत ही आता है। इसलिए लोग व्रत के दौरान दूध और इससे बनी चीजों जैसे छाछ और दही का उपयोग भी करते हैं। लेकिन उपवास के दौरान दूध से जुड़े कुछ नियम भी हैं जिनका पालन जरूर करना चाहिए। आगे जानिए क्या दूध पीने से भी एकादशी व्रत टूट सकता है?&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ekadashi Kab Ki Hai: अपरा एकादशी 2026 की सही डेट, पूजा मुहूर्त, मंत्र और पारण समय जानें अभी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या व्रत में पी सकते हैं दूध?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नियमों के अनुसार व्रत के दौरान दूध पी सकते हैं लेकिन ये दूध गाय का होना चाहिए। भैंस या बकरी का दूध व्रत के दौरान नहीं पीना चाहिए। गाय का दूध सबसे शुद्ध और सात्विक माना जाता है। कई धार्मिक ग्रंथों और व्रत नियमों में इसकी जानकारी मिलती है। गाय के दूध से शास्त्रों में अमृत के समान माना गया है। व्रत के दौरान इसे पीने से मन में सात्विकता और पवित्रता बनी रहती है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026: 16 मई को इन 5 गलतियों से बचें, वरना बर्बाद कर देंगे शनिदेव&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गाय का दूध ही क्यों पवित्र?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों में गाय को देवतुल्य माना गया है। गाय का उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई मानी जाती है। हवन आदि धार्मिक कामों में भी गाय के दूध का ही उपयोग किया जाता है। गाय को दूध को अमृत के समान माना गया है। मेडिकल साइंस के अनुसार भी गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और ये आसानी से पच भी जाता है। यही कारण है कि व्रत के दौरान गाय का दूध ही पीना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भैंस-बकरी का दूध क्यों न पीएं?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धर्म ग्रंथों में भैंस-बकरी आदि के दूध को पूरी तरह से शुद्ध नहीं माना गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि भैंस-बकरी का दूध पीने से मन में बुरे विचार आ सकते हैं जिससे व्रत भंग हो सकता है। इसलिए व्रत-उपवास के दौरान भैंस और बकरी के दूध का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि ये दूध उतने सात्विक नहीं माने जाते जितना गाय का दूध। इसलिए व्रत की शुद्धता बनाए रखने के लिए गाय के दूध को प्राथमिकता दी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-2026-vrat-rules-can-drinking-milk-break-ekadashi-fast/articleshow-gr6xxrd"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Apra Ekadashi Vrat Katha: राजा के प्रेत को कैसे मिली मुक्ति? पढ़ें अपरा एकादशी की ये रोचक कथा]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-vrat-katha-raja-mahidhwaj-preta-moksha-story-in-hindi/articleshow-i05zeol</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-vrat-katha-raja-mahidhwaj-preta-moksha-story-in-hindi/articleshow-i05zeol</guid>
            <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:34:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Apra Ekadashi 2026: 13 मई, बुधवार को अपरा एकादशी का व्रत किया जाएगा। कुछ ग्रंथों में इसे अचला एकादशी भी कहते हैं। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है जिने सुनकर ही इसका पूरा फल प्राप्त किया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krdpvjphzvwj3q7ppqca0jjm,imgname-apra-ekadashi-vrat-katha-1778576640720.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Apra Ekadashi Vrat Katha In Hindi:&lt;/strong&gt; ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या, प्रेतयोनि, दूसरे की निन्दा आदि से पापों का नाश हो जाता है। इस एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है। व्रती (व्रत करने वाले) को इस कथा को सुनना जरूरी है, तभी उसे पूरा पुण्य मिलता है। आगे आप भी पढ़ें अपरा एकादशी की ये रोचक कथा&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Apra Ekadashi 2026: दूध पीने से भी टूट सकता है एकादशी व्रत! क्या कहते हैं नियम?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राजा महीध्वज और उसके भाई की कहानी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;प्राचीन समय में महीध्वज नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। वे अपनी प्रजा से पुत्र समान प्रेम करते थे और हमेशा धर्म के रास्ते पर चलते थे। उनके छोटे भाई का नाम वज्रध्वज था, जो स्वभाव से ईर्ष्यालु और अधर्मी था। वह अपने बड़े भाई से गहरी दुश्मनी रखता था।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ekadashi Kab Ki Hai: अपरा एकादशी 2026 की सही डेट, पूजा मुहूर्त, मंत्र और पारण समय जानें अभी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक रात वज्रध्वज ने छलपूर्वक राजा महीध्वज की हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने राजा के शव को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे दबा दिया। अकाल मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा को शांति नहीं मिली और वह प्रेत योनि में भटकने लगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजा महीध्वज की आत्मा उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगी और वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशान करने लगी। एक दिन उसी रास्ते से धौम्य ऋषि गुजर रहे थे। उन्होंने अपनी तपस्या की शक्ति से उस आत्मा को देखा और उसके दुख का कारण जान लिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;धौम्य ऋषि ने राजा की आत्मा को मुक्ति दिलाने के लिए अपरा एकादशी का व्रत किया। व्रत पूरा होने के बाद उन्होंने उसका पुण्य राजा महीध्वज की आत्मा को समर्पित कर दिया। इस पुण्य के प्रभाव से राजा प्रेत योनि से मुक्त हो गए और स्वर्ग लोक को प्राप्त हुए। वहां भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें मोक्ष मिला।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-vrat-katha-raja-mahidhwaj-preta-moksha-story-in-hindi/articleshow-i05zeol"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Mother's Day 2026 पर मां को दें 5 गिफ्ट, किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/webstories/religious-news/mothers-day-2026-gift-ideas-for-mother-good-luck-jyotish-upay-kcw9lac</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/webstories/religious-news/mothers-day-2026-gift-ideas-for-mother-good-luck-jyotish-upay-kcw9lac</guid>
            <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:08:42 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Mother's Day Gift Idea: इस बार मदर्स डे 10 मई, रविवार को है। इस दिन अगर मां को कुछ खास चीजें गिफ्ट में दी जाएं तो उनके साथ-साथ आपकी किस्मत भी चमक सकती है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kr6jbka62sw8j76q7ngg70xb,imgname-mothers-day-2026-gifts-cover-1778337041734.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/webstories/religious-news/mothers-day-2026-gift-ideas-for-mother-good-luck-jyotish-upay-kcw9lac"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Motivational Story: कैसे मिलेगी मन को शांति? साधु और महिला की इस कहानी में छिपा है जवाब]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/life-management-saint-story-about-peace-and-happiness-in-life/articleshow-lfnmb22</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/life-management-saint-story-about-peace-and-happiness-in-life/articleshow-lfnmb22</guid>
            <pubDate>Sun, 10 May 2026 10:32:29 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;motivational story in hindi: अपने जीवन में सुख और शांति तो हर व्यक्ति चाहता है, लेकिन इसके लिए उसे क्या करना चाहिए, ये बात बहुत कम लोगों को पता होती है। इसके लिए सबसे पहले आपको अपने मन को निर्मल करना होगा यानी बुरे विचारों को बाहर निकालना होगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kr847pyh7qtxfywppmveqa1t,imgname-the-sage-s-life-management-story-1778389343185.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;short motivational story in hindi: &lt;/strong&gt;हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति और संतोष चाहता है, लेकिन इसे पाने का सही तरीका बहुत कम लोग समझ पाते हैं। अक्सर इंसान बाहरी चीजों में खुशी ढूंढता है, जबकि असली शांति हमारे मन की स्थिति पर निर्भर करती है। जब तक मन में क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और नकारात्मक विचार भरे रहते हैं, तब तक जीवन में सुकून मिल पाना मुश्किल होता है। Asianet News Hindi की Motivational Story सीरीज में आज पढ़िए एक ऐसा प्रेरणादायक प्रसंग, जो बताता है कि सच्ची शांति पाने के लिए सबसे पहले अपने मन की सफाई जरूरी है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: पागलखाने की ये कहानी हंसने पर कर देगी मजबूर, बदल देगी सोचने का नजरिया&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;साधु ने महिला को बताया सच्चे सुख का उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एक साधु प्रतिदिन लोगों के घर जाकर भिक्षा मांगते थे और उसी से अपना जीवन चलाते थे। एक दिन वे एक घर के बाहर पहुंचे और भिक्षा मांगी। घर की महिला भोजन लेकर आई। भोजन देते समय उसने साधु से पूछा, &ldquo;महाराज, जीवन में सच्चा सुख और मानसिक शांति कैसे मिल सकती है? कौन-सी पूजा करने से मन की बेचैनी खत्म होती है?&rdquo;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: राजा भी नहीं समझ पाया तीन पुतलों का रहस्य, मंत्री ने ऐसे सुलझाई पहेली&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;साधु मुस्कुराए और बोले, &ldquo;तुम्हारे सवाल का जवाब मैं कल दूंगा।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगले दिन महिला साधु के आने का इंतजार करने लगी। उसने पूरे घर की अच्छी तरह सफाई की, स्वादिष्ट खीर बनाई और साधु के बैठने के लिए एक साफ-सुथरा ऊंचा आसन तैयार किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कुछ देर बाद साधु वहां पहुंचे और भिक्षा मांगी। महिला बहुत सम्मान के साथ उन्हें घर के अंदर बुलाने लगी, लेकिन साधु ने अंदर आने से मना कर दिया। उन्होंने अपना कमंडल आगे बढ़ाया और कहा, &ldquo;खीर इसमें डाल दो।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जैसे ही महिला ने कमंडल में खीर डालने की कोशिश की, उसने देखा कि कमंडल के अंदर धूल-मिट्टी और कचरा भरा हुआ है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महिला ने तुरंत कहा, &ldquo;महाराज, यह कमंडल तो गंदा है। अगर इसमें खीर डालूंगी तो खीर खराब हो जाएगी।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;साधु ने शांत स्वर में कहा, &ldquo;कोई बात नहीं, तुम इसी में खीर डाल दो।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;महिला बोली, &ldquo;नहीं महाराज, पहले मैं इसे साफ करूंगी, तभी इसमें खीर डालना ठीक होगा।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;तब साधु ने समझाया, &ldquo;यही तुम्हारे सवाल का जवाब है। जिस तरह गंदे बर्तन में अच्छा भोजन नहीं रखा जा सकता, उसी तरह जिस मन में क्रोध, लालच, ईर्ष्या, मोह और नकारात्मक विचार भरे हों, वहां शांति और ज्ञान नहीं टिक सकते। पहले मन को साफ करना जरूरी है, तभी जीवन में सुख और शांति आती है।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कहानी की सीख&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब तक मन बुरी भावनाओं और इच्छाओं से भरा रहेगा, तब तक सच्ची खुशी नहीं मिल सकती। सकारात्मक सोच और पवित्र मन ही शांत और सुखी जीवन की कुंजी है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/life-management-saint-story-about-peace-and-happiness-in-life/articleshow-lfnmb22"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी कब है? नोट करें व्रत की डेट, महत्व और उपाय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/kab-hai-apara-ekadashi-2026-date-parana-time-puja-vidhi-significance/articleshow-livwhcs</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/kab-hai-apara-ekadashi-2026-date-parana-time-puja-vidhi-significance/articleshow-livwhcs</guid>
            <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:26:28 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Apara Ekadashi Kab hai: धर्म ग्रंथों में कुल 16 तिथियां बताई गई हैं। इनमें से एकादशी तिथि को बहुत ही शुभ माना गया है। इस बार मई 2026 में अपरा एकादशी का संयोग बन रहा है। इस एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kr3ce4x48z3q1b6gxb5fd3qb,imgname-apara-ekadashi-2026-1778230170532.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Apara Ekadashi 2026 Date:&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने दो एकादशी पड़ती हैं और भगवान विष्णु की पूजा के लिए ये दिन बेहद शुभ माना जाता है। साल में कुल 24 एकादशी होती है। इनमें से ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आगे जानिए कब करें अपरा एकादशी व्रत&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Vat Savitri Vrat 2026 Date: 16 या 17 मई, कब करें वट सावित्री व्रत? जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है अपरा एकादशी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई 2026, मंगलवार की दोपहर लगभग 02 बजकर 52 मिनिट से होगी, ये तिथि 13 मई 2026, बुधवार की दोपहर 01 बजकर 30 मिनिट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत 13 मई 2026, बुधवार को किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: राजा भी नहीं समझ पाया तीन पुतलों का रहस्य, मंत्री ने ऐसे सुलझाई पहेली&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अपरा एकादशी 2026 पारण समय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपरा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 14 मई 2026, गुरुवार को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 31 मिनिट से 8 बजकर 14 मिनिट तक रहेगा। श्रद्धालु इस दौरान अपना व्रत पूर्ण कर पारण कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अपरा एकादशी का महत्व&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को तीर्थ स्नान, दान और यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अपरा एकादशी के दिन क्या करें?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; अपरा एकादशी की सुबह उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें। संभव हो तो विष्णु मंत्रों का जाप भी करें।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; एकादशी तिथि पर जरूरतमंदों को दान देने का विशेष महत्व है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/kab-hai-apara-ekadashi-2026-date-parana-time-puja-vidhi-significance/articleshow-livwhcs"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Motivational Story: राजा भी नहीं समझ पाया तीन पुतलों का रहस्य, मंत्री ने ऐसे सुलझाई पहेली]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-in-hindi-life-management-prernadayak-kahani-teen-putlon-ki-kahani/articleshow-nbmhpdl</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-in-hindi-life-management-prernadayak-kahani-teen-putlon-ki-kahani/articleshow-nbmhpdl</guid>
            <pubDate>Fri, 08 May 2026 09:37:53 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;motivational story in hindi: कुछ लोग होते हैं जो बिना सोचे-समझे सुनी-सुनाई बातों को इधर से उधर कर देते हैं। बिना सच्चाई जाने ऐसा करने से न सिर्फ हमारी इमेज खराब होती है बल्कि बुरे परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kr2vtpzfwb4745s4sm9gpghk,imgname-the-mystery-of-the-statue-1778212756462.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;short motivational story in hindi:&lt;/strong&gt; दूसरों की बुराई करना और गलत प्रचार करना कुछ लोगों का स्वभाव होता है। जबकि कुछ लोग बातों को पहले समझते हैं, उसकी सच्चाई जानते हैं, इसके बाद ही किसी को उसके बारे में बताते हैं। ऐसे लोग बहुत कम होते हैं। एशियानेट न्यूज हिंदी अपने रीडर्स के लिए Motivational Story की सीरीज लेकर आया है, जिसमें रोज आप लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र रोचक कहानियों के माध्यम से जान पाएंगे। इस सीरीज के अंतर्गत आज हम आपको ऐसी कहानी बता रहे हैं जिसका सार यही है किसी के बारे में कुछ भी बोलने से पहले उन बातों की सच्चाई जरूर बता करें। इसके बाद ही अपनी प्रतिक्रिया दें।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: दिमाग की बत्ती जला देगी संत-व्यापारी की ये कहानी, सोचने पर कर देगी मजबूर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मंत्री ने सुलझाया तीन मूर्तियों का रहस्य&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बहुत समय पहले एक राज्य का राजा अनोखी और दुर्लभ वस्तुएं इकट्ठा करने का शौकीन था। जब भी कोई व्यापारी उसके राज्य में आता, राजा उसकी वस्तुएं जरूर देखता था।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Vat Savitri Vrat 2026 Date: 16 या 17 मई, कब करें वट सावित्री व्रत? जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक दिन एक व्यापारी राजदरबार में पहुंचा। उसने राजा से कहा,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;महाराज, आज मैं आपके लिए ऐसी वस्तु लाया हूं, जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजा ने उत्सुक होकर कहा,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;जल्दी बताओ, क्या लाए हो?&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;व्यापारी ने अपने थैले से तीन सुंदर मूर्तियां निकालीं। तीनों देखने में बिल्कुल समान थीं। उसने कहा,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;महाराज, इन तीनों मूर्तियों की कीमत अलग-अलग है। पहली मूर्ति की कीमत एक लाख स्वर्ण मुद्राएं है, दूसरी की कीमत एक हजार स्वर्ण मुद्राएं और तीसरी की कीमत केवल एक स्वर्ण मुद्रा।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजा यह सुनकर चौंक गया। उसने तीनों मूर्तियों को ध्यान से देखा, लेकिन उसे उनमें कोई अंतर दिखाई नहीं दिया। दरबारियों ने भी जांच की, मगर कोई रहस्य समझ नहीं पाया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;तब राजा ने अपने सबसे बुद्धिमान मंत्री को बुलाया और कहा,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;इन मूर्तियों की अलग-अलग कीमत का कारण पता लगाइए।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मंत्री ने मूर्तियों को गौर से देखा और एक सेवक से पतली सी सलाई मंगवाई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सबसे पहले उसने पहली मूर्ति के कान में सलाई डाली। सलाई अंदर गई और हृदय तक पहुंचकर रुक गई। मंत्री ने कहा,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;यह मूर्ति उन लोगों का प्रतीक है, जो किसी बात को सुनकर उसे अपने मन में रखते हैं, समझते हैं और सही समय आने पर ही बोलते हैं। ऐसे लोग बहुत मूल्यवान होते हैं।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;फिर उसने दूसरी मूर्ति के कान में सलाई डाली। सलाई सीधे दूसरे कान से बाहर निकल गई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मंत्री ने कहा,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;यह मूर्ति उन लोगों जैसी है, जो बातें सुनते तो हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं देते। उनके लिए हर बात समान होती है।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अंत में उसने तीसरी मूर्ति के कान में सलाई डाली। सलाई उसके मुंह से बाहर आ गई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;मंत्री ने समझाया,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&ldquo;यह मूर्ति उन लोगों का प्रतीक है, जो कोई भी बात सुनते ही तुरंत दूसरों को बताने लगते हैं। वे बिना सच्चाई जाने अफवाह फैलाते हैं, इसलिए उनका महत्व सबसे कम होता है।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजा अपने मंत्री की बुद्धिमानी से बहुत खुश हुआ। उसने पहली मूर्ति खरीद ली और कहा कि वह हमेशा ऐसे लोगों को अपने पास रखेगा, जो समझदारी से काम लेते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कहानी का लाइफ मैनेजमेंट&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हमें हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए। हर सुनी-सुनाई बात पर भरोसा करके उसे दूसरों तक पहुंचाना नुकसानदायक हो सकता है। समझदार वही है, जो पहले सच जाने और फिर सही निर्णय ले।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-in-hindi-life-management-prernadayak-kahani-teen-putlon-ki-kahani/articleshow-nbmhpdl"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Motivational Story: पागलखाने की ये कहानी हंसने पर कर देगी मजबूर, बदल देगी सोचने का नजरिया]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-inspirational-life-management-about-facing-problems-with-confidence/articleshow-nepf4a3</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-inspirational-life-management-about-facing-problems-with-confidence/articleshow-nepf4a3</guid>
            <pubDate>Sat, 09 May 2026 09:25:46 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;motivational story in hindi: लाइफ में मुसीबतों का आना-जाना लगा रहता है। कुछ लोग बिना सोचे-समझे मुसीबतों से भागना शुरू कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि ये परेशानी तो बहुत छोटी थी जिसे आसानी से हल किया जा सकता था, इसलिए पहले परेशानी का परखना चाहिए।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kr5dn4dj4m67jz52fcqydct2,imgname-life-management-story-from-a-mental-asylum-1778298556849.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;short motivational story in hindi:&lt;/strong&gt; जीवन में अक्सर ऐसे पल आते हैं, जब कोई समस्या हमें बहुत बड़ी और डरावनी लगने लगती है। उस समय हम घबराकर उससे दूर भागने या बचने के उपाय ढूंढने लगते हैं। लेकिन कई बार वास्तविकता हमारी कल्पना से बिल्कुल अलग होती है। जब हम साहस के साथ परेशानियों का सामना करना सीख लेते हैं, तो वही मुश्किलें धीरे-धीरे छोटी नजर आने लगती हैं। &lt;strong&gt;Asianetnews Hindi&lt;/strong&gt; की &lt;strong&gt;Motivational Story&lt;/strong&gt; सीरीज में आज हम आपको एक ऐसा प्रेरणादायक प्रसंग बता रहे हैं, जो यह समझाता है कि हर परेशानी उतनी बड़ी नहीं होती, जितनी हम अपने डर की वजह से मान लेते हैं।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: राजा भी नहीं समझ पाया तीन पुतलों का रहस्य, मंत्री ने ऐसे सुलझाई पहेली&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पागलखाने में मिली जिंदगी की सबसे बड़ी सीख&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एक व्यक्ति को मानसिक चिकित्सालय में नई नौकरी मिली। नौकरी का पहला दिन होने के कारण वह काफी उत्साहित था। जैसे ही वह अस्पताल पहुंचा, उसने वहां का माहौल देखा तो हैरान रह गया। कोई मरीज जोर-जोर से गाना गा रहा था, कोई तालियां बजा रहा था, तो कोई अपने आप से बातें कर रहा था। हर कोई अपनी ही दुनिया में खोया हुआ था।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: दिमाग की बत्ती जला देगी संत-व्यापारी की ये कहानी, सोचने पर कर देगी मजबूर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसी बीच उसकी नजर एक ऐसे मरीज पर पड़ी, जो बाकी लोगों से अलग एक कोने में बैठा था। वह कुछ अजीब हरकतें कर रहा था। उस व्यक्ति को शरारत सूझी और उसने सोचा कि क्यों न इस मरीज के साथ थोड़ा मजाक किया जाए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;वह उसके पास गया और उसे डराने की कोशिश करने लगा, लेकिन मरीज पर इसका कोई असर नहीं हुआ। फिर उसने मजाक में उस मरीज के पेट पर अपनी उंगली रख दी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह देखते ही मरीज अचानक गुस्से में उठ खड़ा हुआ और उसकी ओर बढ़ने लगा। यह देखकर वह व्यक्ति डर गया और वहां से तेजी से भागने लगा। मरीज भी उसके पीछे दौड़ पड़ा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भागते-भागते वह एक ऐसी जगह पहुंच गया, जहां आगे जाने का कोई रास्ता नहीं था। पीछे मरीज खड़ा था। डर के कारण उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और सोचा कि अब उसकी पिटाई तय है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;तभी मरीज उसके पास आया, उसने भी उसी तरह उसकी पेट पर उंगली रखी और तुरंत वहां से भाग गया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह देखकर वह व्यक्ति समझ गया कि जिससे वह बड़ी परेशानी समझकर भाग रहा था, असल में वह उतनी बड़ी नहीं थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कहानी का लाइफ मैनेजमेंट&amp;nbsp;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जीवन में समस्याओं से डरकर भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए, क्योंकि कई बार हमारी कल्पना का डर हकीकत से कहीं ज्यादा बड़ा होता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/motivational-story-inspirational-life-management-about-facing-problems-with-confidence/articleshow-nepf4a3"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Pradosh Vrat May 2026: 14 या 15 मई, कब करें प्रदोष व्रत, कैसे करें पूजा? जानें मंत्र और मुहूर्त]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pradosh-vrat-may-2026-date-puja-muhurat-shiv-mantra-guru-pradosh/articleshow-o143ayx</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pradosh-vrat-may-2026-date-puja-muhurat-shiv-mantra-guru-pradosh/articleshow-o143ayx</guid>
            <pubDate>Thu, 14 May 2026 02:32:15 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Pradosh Vrat May 2026: मई 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रदोष व्रत किया जाएगा। ये प्रदोष व्रत 14 मई को करें या 15 को? इसे लेकर मतभेद है। आगे जानें मई 2026 में कब करें प्रदोष व्रत?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krgcdtt6bxr38w3nd4g8xwee,imgname-guru-pradosh-vrat-may-2026-1778666367812.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Guru Pradosh Vrat May 2026 Shubh Muhurat: &lt;/strong&gt;प्रदोष व्रत रहने महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए इस व्रत का नाम प्रदोष है। इस बार मई 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। ये व्रत 14 मई को किया जाएगा या 15 मई को? इसे लेकर संशय हैं। आगे जानिए मई 2026 में प्रदोष व्रत की सही डेट क्या है, साथ ही पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल&hellip;&lt;img&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: किन लोगों को मिलती है सक्सेस? किसान और कुत्ते की कहानी से जानें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है प्रदोष व्रत की सही डेट?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 मई, गुरुवार की सुबह 11 बजकर 20 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 15 मई, शुक्रवार की सुबह 08 बजकर 31 मिनिट तक रहेगी। चूंकि प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम को की जाती है और ये स्थिति 14 मई, गुरुवार को बन रही है तो इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। गुरुवार को प्रदोष व्रत होने से ये गुरु प्रदोष कहलाएगा।&lt;img&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Motivational Story: कैसे मिलेगी मन को शांति? साधु और महिला की इस कहानी में छिपा है जवाब&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;14 मई 2026 प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार 14 मई, गुरुवार को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनिट से शुरू होगा जो रात 09 बजकर 09 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 05 मिनट का समय मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;इस विधि से करें गुरु प्रदोष व्रत-पूजा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 14 मई, गुरुवार की सुबह स्नान करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें और कुछ भी खाएं नहीं। यदि ऐसा करना संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।- मुहूर्त से पहले पूजन सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें। सबसे पहले शिवजी का अभिषेक जल से, फिर गाय के दूध से और फिर एक बार शुद्ध जल से करें। महादेव को बिल्व पत्र, फूल, धतूरा आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करें।- पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप मन ही मन में करते रहें। इच्छा अनुसार महादेव को भोग लगाएं और शुद्ध घी के दीपक से आरती करें। पूजा के बाद गरीबों को दान करें और इसके बाद सात्विक भोजन करें।- रात में ब्रह्मचर्य का पालन करें। संभव हो तो भजन कीर्तन भी कर सकते हैं। अगर सोना चाहते हैं को जमीन पर ही सोएं। इस प्रकार जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से प्रदोष व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/pradosh-vrat-may-2026-date-puja-muhurat-shiv-mantra-guru-pradosh/articleshow-o143ayx"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Masik Shivratri Kab Hai: मासिक शिवरात्रि व्रत कब है, 15 या 16 मई? तारीख के साथ जानें मंत्र-मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/masik-shivratri-may-2026-date-puja-time-mantra-vidhi-correct-date-15-or-16-may/articleshow-pzhdfgr</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/masik-shivratri-may-2026-date-puja-time-mantra-vidhi-correct-date-15-or-16-may/articleshow-pzhdfgr</guid>
            <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:32:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Masik Shivratri May 2026: मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष में किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा रात में की जाती है। इसलिए इसे शिवरात्रि कहते हैं। जानें मई 2026 में कब करें मासिक शिवरात्रि व्रत?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krk5ktq2bt3dm6dm3y6key8x,imgname-masik-shivratri-may-2026-1778759887586.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;May 2026 Mai Masik Shivratri Vrat Kab Kare: &lt;/strong&gt;फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव पहली बार लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए हर महीने की इस तिथि पर शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। इसे मासिक शिवरात्रि और शिव चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। मई 2026 में ज्येष्ठ मास का मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाएगा। ये व्रत 15 मई को करें या 16 को, इसे लेकर कन्फ्यूजन है। आगे जानिए मई 2026 में मासिक शिवरात्रि व्रत की सही डेट क्या है, साथ ही पूजा विधि, मंत्र सहित शुभ मुहूर्त की पूरी डिटेल भी&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Vat Savitri Vrat 2026: क्यों करते हैं वट सावित्री व्रत, इस बार कब है? जानें मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब&lt;/strong&gt;&lt;img&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मई 2026 में कब है मासिक शिवरात्रि?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई, शुक्रवार की सुबह 08 बजकर 31 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 16 मई, शनिवार की सुबह 05 बजकर 11 मिनिट तक रहेगी। चूंकि मासिक शिवरात्रि व्रत की पूजा रात में की जाती है और ये स्थिति 15 मई को बन रही है इसलिए इसी दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाएगा और रात में पूजा की जाएगी।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026 से पहले घर से हटा दें ये 5 चीजें, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;15 मई 2026 शिवरात्रि व्रत शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मासिक शिवरात्रि में रात में 4 बार यानी चारों प्रहर में शिवजी की पूजा की जाती है। अगर कोई रात्रि जागरण न कर पाएं तो निशिथ काल में एक समय पूजा करके भी इस व्रत का पूरा फल पा सकता है। 15 मई, शुक्रवार को शिवरात्रि व्रत का पूजा मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनिट से 12 बजकर 33 मिनिट तक रहेगा।&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जानें शिवरात्रि व्रत की पूजा विधि-मंत्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 15 मई, शुक्रवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें।- मुहूर्त शुरू होने से पहले पूजा सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें और मुहूर्त शुरू होने पर पूजा शुरू करें।- सबसे पहले शिवजी का अभिषेक जल से करें फिर गाय के दूध और एक बार फिर से जल से अभिषेक करें।- इसके बाद महादेव को फूल चढ़ाएं और चंदन से तिलक लगाएं। गाय के शुद्ध घी का दीपक भी लगाएं।- फूल, बिल्व पत्र, धतूरा आदि चीजें महादेव को अर्पित करें। ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें।- महादेव को फल व अन्य चीजों का भोग लगाएं और आरती करें। रात में ब्रह्मचर्य का पालन करें।- अगले दिन यानी 16 मई, शनिवार की सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करें।- इस तरह विधि-विधान से व्रत करने से जीवन में हर सुख मिल सकता है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/masik-shivratri-may-2026-date-puja-time-mantra-vidhi-correct-date-15-or-16-may/articleshow-pzhdfgr"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Somnath Temple Facts: कई बार टूटा, फिर भी नहीं मिटा अस्तित्व... जानें सोमनाथ मंदिर के 10 दिलचस्प फैक्ट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mystery-of-somnath-temple-10-interesting-facts-history-amrit-mahotsav-prime-minister-narendra-modi/articleshow-qbgqmr6</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mystery-of-somnath-temple-10-interesting-facts-history-amrit-mahotsav-prime-minister-narendra-modi/articleshow-qbgqmr6</guid>
            <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:27:37 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Somnath Temple History: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में चल रहे अमृत महोत्सव में शामिल होंगे। खास बात ये है कि गुजरात के सोमनाथ में मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 साल पूरे हो रहे हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01krasb4m2k1p5v7fjg8zgfx6z,imgname-somnath-temple-facts-1778478584450.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mystery Of Somnath Temple: &lt;/strong&gt;गुजरात में स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। इसका इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही रहस्यमयी भी। मान्यता है कि विदेशी आक्रांताओं ने इस मंदिर को 17 बार तोड़ा, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। वर्तमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 11 मई 1951 को हुई थी। अब इसके 75 साल पूरे होने पर यहां &lsquo;सोमनाथ अमृत महोत्सव&rsquo; मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं सोमनाथ मंदिर से जुड़े 10 रोचक तथ्य&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Somnath Temple: पंडित नेहरू क्यों थे सोमनाथ मंदिर के खिलाफ? जहां आज PM मोदी करेंगे 'कुंभाभिषेक'&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दुनिया का पहला ज्योतिर्लिंग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सोमनाथ को दुनिया का पहला ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। चंद्रमा का ही एक नाम सोम है। चंद्रमा के इसी नाम पर इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा। 12 ज्योतिर्लिंगों में भी सोमनाथ का स्थान प्रथम है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Ekadashi Kab Ki Hai: अपरा एकादशी 2026 की सही डेट, पूजा मुहूर्त, मंत्र और पारण समय जानें अभी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;यहां लगा है रहस्यमयी बाण स्तंभ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सोमनाथ मंदिर के परिसर में एक बाण स्तंभ है, जिस पर लिखा है कि यहां से दक्षिण ध्रुव तक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है। हजारों साल पहले जब सेटेलाइट की सुविधा नहीं थी तब ये बात उस समय के लोगों ने कैसे जानी? ये आज भी एक रहस्य बना हुआ है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कई बार टूटा, फिर हर बार बना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इतिहासकारों के अनुसार सोमनाथ मंदिर को विदेश आक्रांताओं ने 17 बार ध्वस्त किया लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। इसलिए इसे &quot;Shrine Eternal&quot; भी कहा जाता है। साल 1025-26 में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर हमला किया था, जिसे इतिहास की बड़ी घटनाओं में गिना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भगवान कृष्ण से भी जुड़ा है संबंध&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सोमनाथ मंदिर के पास ही भालका तीर्थ स्थित है, माना जाता है कि यही वो स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने देह त्यागी थी। महाशिवरात्रि और सावन के दौरान सोमनाथ मंदिर में भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सोने, चांदी और लकड़ी से भी बन चुका है मंदिर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सोमनाथ मंदिर को लेकर मान्यता है कि सबसे पहले चंद्रदेव ने इसे सोने से बनवाया था, फिर रावण ने चांदी से और भगवान श्रीकृष्ण ने चंदन की लकड़ी से इसका निर्माण कराया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दिन में कई बार बदलते हैं ध्वज&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आमतौर पर किसी भी मंदिर की ध्वजा काफी समय बाद या किसी खास मौके पर बदली जाती है लेकिन सोमनाथ मंदिर की ध्वजा दिन में कई बार बदली जाती है और इसे बेहद शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मंदिर के पास है त्रिवेणी संगम&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सोमनाथ मंदिर के पास ही 3 नदियों का संगम है जिससे इस स्थान का महत्व और भी अधिक है। यहां हिरण, कपिला और सरस्वती नदियों का संगम माना जाता है, जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;प्राचीन ग्रंथों में भी वर्णन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सोमनाथ मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण, शिव पुराण और कई अन्य धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, प्राचीन समय में मंदिर बेहद समृद्ध था और यहां भारी मात्रा में सोना-चांदी दान में मिलता था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;विदेशी यात्रियों ने भी किया जिक्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कई विदेशी यात्रियों और इतिहासकारों ने अपने लेखों में सोमनाथ मंदिर का उल्लेख किया है। आज का मंदिर बेहद भव्य चालुक्य शैली में बना है। कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष मेला लगता है इस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सरदार पटेल ने कराया पुनर्निर्माण&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आज जो भव्य मंदिर दिखाई देता है, उसके पुनर्निर्माण की पहल लोहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद की थी। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को मंदिर का उद्घाटन किया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/mystery-of-somnath-temple-10-interesting-facts-history-amrit-mahotsav-prime-minister-narendra-modi/articleshow-qbgqmr6"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ekadashi Kab Ki Hai: अपरा एकादशी 2026 की सही डेट, पूजा मुहूर्त, मंत्र और पारण समय जानें अभी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-2026-kab-hai-date-shubh-muhurat-puja-vidhi-parna-time-significance/articleshow-t619fnb</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-2026-kab-hai-date-shubh-muhurat-puja-vidhi-parna-time-significance/articleshow-t619fnb</guid>
            <pubDate>Mon, 11 May 2026 10:02:33 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Achala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी का व्रत किया जाता है। कुछ ग्रंथों में इसे अचला एकादशी भी कहा गया है। इस बार अपरा एकादशी का व्रत मई 2026 में किया जाएगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kramxn9d1ke1hmyphmehj764,imgname-apara-ekadashi-2026-date-1778473948461.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Apra Ekadashi 2026 Kab Hai: &lt;/strong&gt;धर्म ग्रंथों में कुल 16 तिथियां बताई गई हैं। इनमें से एकादशी तिथि को सबसे ज्यादा पवित्र माना गया है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। अधिक मास होने पर इनकी संख्या 26 हो जाती है। इनमें से ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अचला और अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार अपरा एकादशी का व्रत मई 2026 में किया जाएगा। आगे जानिए अचला एकादशी की सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि की जानकारी&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026 से पहले घर से हटा दें ये 5 चीजें, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है अपरा एकादशी 2026?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 मई, मंगलवार की दोपहर लगभग 02 बजकर 52 मिनिट से होगी जो 13 मई, बुधवार की दोपहर 01 बजकर 30 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 13 मई, बुधवार को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026: 13 साल बाद शनि जयंती पर दुर्लभ संयोग, साढ़ेसाती-ढैय्या वाले न चूकें ये मौका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अचला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त&amp;nbsp;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- सुबह 05:50 से 07:28 तक- सुबह 07:28 से 09:06 तक- सुबह 10:45 से दोपहर 12:23 तक- दोपहर 03:39 से शाम 05:17 तक- शाम 05:17 से 06:55 तक&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अपरा एकादशी 2026 पारण मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपरा एकादशी व्रत का पारण 14 मई 2026, गुरुवार को किया जाएगा। पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 31 मिनिट से 8 बजकर 14 मिनिट तक रहेगा। श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से पारण कर अपना अपना पूरा कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अचला एकादशी व्रत-पूजा विधि&amp;nbsp;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;- 13 मई, गुरुवार की सुबह स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें।- पूजा के लिए तय स्थान की साफ-सफाई कर गंगा जल छिड़कें। शुभ मुहूर्त में पूजा स्थान पर लकड़ी का पटिया रखकर इस पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।- सबसे पहले भगवान की प्रतिमा को तिलक लगाएं और हार पहनाएं। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक लगाएं। वस्त्र के रूप में भगवान को रक्षा सूत्र यानी पूजा का धागा अर्पित करें।- इसके बाद कुंकुम, चावल, रोली, अबीर, गुलाल, फूल आदि चीजें भी भगवान को अर्पित करें। पूजा करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप भी मन में करते रहें।- भगवान को भोग लगाएं, इसमें तुलसी के पत्ते जरूर रखें। फिर आरती उतारें। रात को सोएं नहीं, भजन-कीर्तन करें। अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दक्षिणा देकर पारणा करें।- पारण के बाद प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करें और भोजन करें। इस तरह अपरा एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी और हर तरह का सुख भी जीवन में मिलता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भगवान विष्णु की आरती&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे।जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे।तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे।तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ओम जय जगदीश हरे।तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ओम जय जगदीश हरे।दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे।विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे।श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/apra-ekadashi-2026-kab-hai-date-shubh-muhurat-puja-vidhi-parna-time-significance/articleshow-t619fnb"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Shani Jayanti 2026: 16 मई को इन 5 गलतियों से बचें, वरना बर्बाद कर देंगे शनिदेव]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/shani-jayanti-2026-date-16-may-these-5-mistakes-can-upset-shani-dev-know-what-no-to-do/articleshow-y51qtgg</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/shani-jayanti-2026-date-16-may-these-5-mistakes-can-upset-shani-dev-know-what-no-to-do/articleshow-y51qtgg</guid>
            <pubDate>Sun, 10 May 2026 16:14:08 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Shani Jayanti 2026 Kab Hai: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य पुत्र शनिदेव का जन्म हुआ था। इस दिन कुछ गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kr8qrmsx749nsgm3gffa53eb,imgname-shani-jayanti-2026-1778409820989.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026 Date:&lt;/strong&gt; इस बार शनि जयंती का पर्व 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन शनिदेव की पूजा करने, तेल अर्पित करने और दान-पुण्य करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं। शनि जयंती के दिन कुछ ऐसे काम बताए गए हैं जिन्हें करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इन गलतियों से शनिदेव नाराज हो सकते हैं। आइए जानते हैं कौन-से हैं वो 5 काम&hellip;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026 से पहले घर से हटा दें ये 5 चीजें, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गरीब और जरूरतमंद का अपमान न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। शनिदेव गरीब और जरूरतमंद लोगों के प्रतिनिधि माने जाते हैं, इसलिए शनि जयंती के दिन किसी गरीब, बुजुर्ग, मजदूर या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करता है, उसे शनिदेव के क्रोध का सामना करना पड़ता है।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Jayanti 2026: 13 साल बाद शनि जयंती पर दुर्लभ संयोग, साढ़ेसाती-ढैय्या वाले न चूकें ये मौका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;लोहे की वस्तु खरीदने से बचें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती के दिन लोहे से बनी वस्तुएं खरीदना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा तेल भी शनि जयंती पर नहीं खरीदना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये चीजें शनिदेव से संबंधित हैं। इसलिए शनि जयंती पर इन चीजों को खरीदने से बचें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तामसिक भोजन न करें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर आप तामसिक प्रवृत्ति के हैं यानि मांस और शराब आदि का सेवन करते हैं तो शनि जयंती के दिन ऐसा भूलकर भी न करें। इस दिन शराब, मांसाहार और तामसिक भोजन से दूरी बनानी चाहिए। शनि जयंती पर सात्विक भोजन ही करें नहीं तो निकट भविष्य में आपकी परेशानी बढ़ सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पीपल और शमी वृक्ष को नुकसान न पहुंचाएं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पीपल और शमी, ये दोनों ही शनिदेव से संबंधित माने जाते हैं। शनि जयंती पर पीपल और शमी वृक्ष की पूजा करना चाहिए। इस दिन इन पेड़-पौधों को काटना या नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है। ऐसी गलती भूलकर भी न करें।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;झूठ और क्रोध से बचें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शनिदेव कर्मों के अनुसार ही हमें अच्छे और बुरे फल देते हैं। इसलिए शनि जयंती पर किसी से झूठ न बोलें, किसी को भी धोखा न दें और न ही किसी पर गुस्सा करें। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसके जीवन में समस्याएं बनी रहती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/shani-jayanti-2026-date-16-may-these-5-mistakes-can-upset-shani-dev-know-what-no-to-do/articleshow-y51qtgg"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Bada Mangal 2026: दूसरा बड़ा मंगल कब है? नोट करें सही डेट, पूजा मुहूर्त और उपाय]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/religious-news/bada-mangal-2026-dusra-bada-mangal-kab-hai-date-puja-muhurat-upay-significance/articleshow-zvgtw3l</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/religious-news/bada-mangal-2026-dusra-bada-mangal-kab-hai-date-puja-muhurat-upay-significance/articleshow-zvgtw3l</guid>
            <pubDate>Sat, 09 May 2026 13:53:30 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Bada Mangal 2026 Date: ज्येष्ठ मास के हर मंगलवार को बड़ा मंगल कहते हैं। इस दिन हनुमानजी की विशेष पूजा व उपाय किए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से हनुमानजी की कृपा हम पर बनी रहती है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kk8tpk5vs1wfkefw87z405qx,imgname-hanuman-ji-tuesday-remedy-1773044190395.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Dusra Bada Mangal Kab Hai:&lt;/strong&gt; धर्म ग्रंथों में हनुमानजी को कलयुग का जीवंत देवता कहा गया है यानी वे आज भी जीवित हैं और किसी गुप्त स्थान पर रहकर तपस्या कर रहे हैं। ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को हनुमानजी की विशेष पूजा की जाती है। इसे बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहते हैं। मान्यता है कि बड़ा मंगल पर बजरंगबली की पूजा व उपाय करने से जीवन का हर संकट दूर हो सकता है। आगे जानिए ज्येष्ठ मास 2026 का दूसरा बड़ा मंगल कब है और इस दिन कौन-से उपाय करें&hellip;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Mangal Gochar 2026: खत्म होगा विस्फोटक योग, 5 राशि वालों को मिलेगी खुशियां-बढ़ेगा बैंक बैलेंस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कब है दूसरा बड़ा मंगल?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हिंदू पंचांग के अनुसार, दूसरा बड़ा मंगल 12 मई को है। इस दिन ज्येष्ठ मास की दशमी और एकादशी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। साथ ही कईं शुभ योग जैसे सिद्धि, बुधादित्य आदि भी इस दिन रहेंगे, जिससे इस दिन का महत्व और भी अधिक माना जाएगा।&lt;strong&gt;ये भी पढ़ें-&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;Shani Gochar 2026: 4 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, 17 मई से शुरू होगा गोल्डन टाइम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;12 मई 2026 शुभ मुहूर्त&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वैसे तो दूसरे बड़े मंगल यानी 12 मई को सुबह से लेकर शाम तक आप हनुमानजी की पूजा कर सकते हैं। लेकिन अगर ये काम मुहूर्त में किया जाए तो और अधिक शुभ फल मिल सकते हैं। ये हैं दूसरे बड़े मंगल के शुभ मुहूर्त&hellip;सुबह 09:07 से 10:45 तकसुबह 10:45 से दोपहर 12:23 तकदोपहर 11:57 से 12:49 तकदोपहर 12:23 से 02:01 तकदोपहर 03:39 से शाम 05:17 तक&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दूसरा बड़ा मंगल पर करें ये अचूक उपाय&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;1.&lt;/strong&gt; दूसरे बड़े मंगल के दिन सुबह स्नान कर लाल या केसरिया पहनकर हनुमानजी की पूजा करें।&lt;strong&gt;2.&lt;/strong&gt; हनुमानजी को गुड़-चना या बूंदी के लड्&zwnj;डू का प्रसाद चढ़ाएं।&lt;strong&gt;3.&lt;/strong&gt; हनुमानजी के मंदिर में बैठकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।&lt;strong&gt;4.&lt;/strong&gt; बंदरों को केला या गुड़ खिलाएं। इससे भी आपको शुभ फल मिलेंगे।&lt;strong&gt;5.&lt;/strong&gt; हनुमानजी के मंत्रों का जाप करने से भी आपकी परेशानी दूर हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बड़ा मंगल का महत्व&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बड़ा मंगल का पर्व वैसे तो पूरे देश में मनाया जाता है लेकिन उत्तर प्रदेश में इसका विशेष महत्व है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही हनुमानजी पहली बार भगवान श्रीराम से मिले थे। इसलिए इस महीने के हर मंगलवार को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाता है?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Disclaimer&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>Religion</category>
            <dc:creator>Manish Meharele</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/religious-news/bada-mangal-2026-dusra-bada-mangal-kab-hai-date-puja-muhurat-upay-significance/articleshow-zvgtw3l"/>
        </item>
    </channel>
</rss>
