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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Fri, 04 Sep 2026 22:09:15 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[Nepal Floods: 'हरे कृष्ण' मंत्र ने बचाई जान, 9 दिन सुरंग में फंसे संजय साह की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-trishuli-hydropower-tunnel-rescue-sanjay-sah-9-days-hare-krishna-mantra-krishna-janmashtami-articleshow-2d787w9</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 17:08:59 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;नेपाल की त्रिशूली हाइड्रोपावर सुरंग में 9 दिन फंसे संजय साह कृष्ण जन्माष्टमी पर जिंदा बचाए गए। उन्होंने बताया कि इस दौरान 'हरे कृष्ण' मंत्र का जाप किया।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1p3db6bt9e652n86hznmts2,imgname-sanjay-sah-nepal-trishuli-tunnel-survivor-1788521917643.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal Trishuli Tunnel Survivor: &lt;/strong&gt;नेपाल के त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में 9 दिनों तक फंसे रहने के बाद 30 साल के वर्कर संजय साह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सुरंग में फंसे रहने के दौरान साह लगातार 'हरे कृष्ण' महामंत्र का जाप करते रहे। उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। संजय साह उन दो वर्करों में शामिल हैं, जिन्हें शुक्रवार कृष्ण जन्माष्टमी (4 सितबर) के दिन जिंदा बचाया गया। सुरक्षित बाहर निकलने के फौरन बाद साह ने सुरक्षाकर्मियों से कहा, &quot;मैं पिछले नौ दिनों से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दूसरों की मदद के लिए पीछे रुके थे संजय साह&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के कर्मचारी और मधेस प्रांत के सप्तरी जिले के फोरमैन संजय साह ने बताया कि हादसे के समय वह कंट्रोल रूम में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह इसलिए पीछे रुके, क्योंकि उन्हें वहां मौजूद दूसरे लोगों की सुरक्षा की चिंता थी। साह ने कहा, &quot;मैं कंट्रोल रूम में काम कर रहा था। मेरी जिम्मेदारी सबकी जान बचाना थी।&quot; साह ने बताया कि ऊपर की तरफ हादसा होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दूसरे लोगों को भागने के लिए चेतावनी दी थी। लेकिन जब वह खुद वहां से निकलने के लिए मुड़े, तब तक काफी देर हो चुकी थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;9 दिनों तक सुरंग के अंधेरे में फंसे रहे&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;संजय साह 9 दिनों तक सुरंग के अंदर अंधेरे में फंसे रहे। इस दौरान वह आसपास मौजूद तीन या चार अन्य वर्करों से बातचीत या आवाज के जरिए संपर्क बनाए रखने में सफल रहे।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;उन्होंने बताया, &quot;वहां केवल तीन या चार लोग थे, जिनसे हम पास में ही बातचीत करके या आवाज करके संपर्क कर पाए।&quot;&lt;/li&gt; &lt;li&gt;साह ने आशंका जताई कि सुरंग के अंदर और भी लोग फंसे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पावरहाउस के आसपास मौजूद लोग भी बाहर नहीं निकल पाए होंगे।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;साह के मुताबिक, &quot;हो सकता है कि हर कोई भाग न पाया हो। सुरंग बहुत लंबी है।&quot; उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ के पानी का तेज बहाव कुछ लोगों को सुरंग के और अंदर ले गया होगा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;MIRACLE AFTER 9 DAYS! After 9 long days trapped inside the Trishuli 3A tunnel, Sanjay Shah has finally been rescued alive. This is more than a rescue - this is a miracle that has brought tears, hope, and an entire nation together. ❤️&zwj;According to the initial assessment,&hellip; pic.twitter.com/5CW1CBZ369&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Ananda Nepali (@anandanepali99) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;दो वर्करों को जिंदा बचाया गया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रेस्क्यू अभियान के दौरान संजय साह के अलावा एक और वर्कर को सुरक्षित बचाया गया। दूसरे वर्कर की पहचान 45 वर्षीय कबीर महर्जन के रूप में हुई है। वह प्रोजेक्ट में मैकेनिकल सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हैं। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण कबीर महर्जन को एयरलिफ्ट करके काठमांडू के छाउनी स्थित नेपाली सेना अस्पताल ले जाया गया। वहीं, संजय साह को त्रिशूली के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;900 लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अधिकारियों का मानना है कि त्रिशूली नदी के किनारे मौजूद छह जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों में कम से कम 900 लोग फंसे हो सकते हैं। नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 600 से अधिक लोग लापता हैं। रेस्क्यू टीमों की ओर से लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और सुरंगों में फंसे लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अचानक आई बाढ़ ने नेपाल में मचाई भारी तबाही&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। तिब्बत (चीन) की सीमा के पास स्थित इलाकों में घर, सड़कें और स्कूल बाढ़ के पानी में बह गए। इस आपदा में नेपाल में कम से कम 1,287 लोगों की मौत होने की बात कही गई है। फिलहाल 5,083 लोगों के लापता होने की खबर है, जबकि हजारों अन्य लोग विस्थापित हुए हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Ganesh Mishra</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Yemen Houthis: बाब अल-मंदेब की ओर बढ़े हूती, 81 की मौत...Red Sea पर बढ़ा खतरा, भारत पर क्या असर?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/yemen-houthi-red-sea-clashes-bab-al-mandab-mokha-violence-81-killed-articleshow-ep7rxz1</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 15:16:01 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Yemen में Houthis और सरकारी सेना के बीच भीषण लड़ाई में 81 लड़ाकों की मौत हुई। हूथी Bab al-Mandab के करीब बढ़ रहे हैं। जानिए Red Sea, Saudi Arabia और अहम Shipping Route पर इसका क्या असर होगा।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1nwvzv9318ttjcszaxdtnmv,imgname-yemen-houthi-red-sea-clashes-bab-al-mandab-mokha-violence-81-killed-1788515057513.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Yemen Houthis:&lt;/strong&gt; यमन से एक बार फिर बहुत ही परेशान करने वाली खबर आ रही है। वहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के समर्थन वाली सरकारी सेना के बीच अचानक भीषण झड़पें शुरू हो गई हैं। शुक्रवार को मिली सैन्य और मेडिकल रिपोर्ट बताती हैं कि इस ताज़ा लड़ाई में करीब 81 लोग मारे जा चुके हैं। असल चिंता की बात यह है कि हूती विद्रोही लगातार उस इलाके की तरफ पैर पसार रहे हैं जो लाल सागर (रेड सी) का सबसे संकरा और रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री रास्ता माना जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Yemen Houthi Red Sea Clashes: कैसे शुरू हुई यह ताज़ा लड़ाई?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सबकी शुरुआत गुरुवार से हुई। हूती विद्रोहियों ने तटीय इलाकों को निशाना बनाकर एक साथ ज़मीनी हमला बोला, जिसमें रॉकेट्स और आत्मघाती ड्रोन्स का जमकर इस्तेमाल किया गया। उनका सीधा लक्ष्य लाल सागर के दक्षिणी छोर पर मौजूद बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandeb) जलडमरूमध्य पर किसी तरह अपनी पकड़ जमाना है। पिछले कुछ हफ्तों से वैसे भी हूती इस रास्ते से गुजरने वाले सऊदी अरब के तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। असल में, जब से ईरान ने होर्मुज की खाड़ी वाले रास्ते को प्रभावित किया है, तब से खाड़ी देशों से तेल निकालने और भेजने के लिए रेड सी ही एकमात्र सबसे बड़ा और सुरक्षित विकल्प बचा था। लेकिन अब विद्रोही दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक को पूरी तरह ठप करने पर आमादा दिख रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;⚠️ यमन में फिर युद्ध का खतरा गहरायाहूथियों के ड्रोन हमले का नया वीडियो सामने आया, संघर्ष में बड़ी संख्या में हताहत।#Yemen #Houthis #DroneAttack #SaudiArabia #MiddleEast #War #BreakingNews pic.twitter.com/Gdrydmpbc9&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Journalist Jyoti magan  (@jyotimagan555) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Mokha Port and Taiz Battle: ज़मीन पर क्या हैं हालात और कितना हुआ नुकसान?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सैन्य सूत्रों का कहना है कि हूतियों का पूरा प्लान सरकार के नियंत्रण वाले बंदरगाह शहर 'मोखा' को बाकी हिस्से से अलग-थलग करने का है। मोखा पर पिछले कई हफ्तों से लगातार छोटे-बड़े हमले हो ही रहे थे, पर अब वे बाब अल-मंदेब से सटे इलाकों को घेर रहे हैं। ताइज़ (Taiz) के एक स्थानीय अधिकारी और सैन्य सूत्रों ने बताया कि विद्रोहियों ने तटीय शहर खोखा और अंदरूनी ताइज़ शहर के ऊपर स्थित कई ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। यह बेहद खतरनाक स्थिति है, क्योंकि इन पहाड़ियों पर बैठकर हूती बड़ी आसानी से नीचे समुद्र में तैरते जहाजों को अपनी मिसाइलों या तोपों से निशाना बना सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस झड़प में दोनों पक्षों को भारी नुकसान पहुंचा है:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;सरकारी सेना: &lt;/strong&gt;तट पर तैनात अधिकारियों के मुताबिक उनके 24 जवान शहीद हुए हैं, जबकि ताइज़ इलाके में 15 और सैनिकों की जान गई है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;हूती विद्रोही: &lt;/strong&gt;हूती नियंत्रण वाले इलाकों के अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, कम से कम 42 हूती लड़ाके भी इस दौरान मारे गए हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Bab al-Mandeb Strait Strategic Value: सऊदी अरब ने भेजी अतिरिक्त सेना, क्यों खास है यह रास्ता?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अदन में बैठी यमन सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि तटीय इलाकों पर बड़े हमले से पहले हूतियों की नज़र बाब अल-मंदाब और मोखा के आसपास की ऊंची पहाड़ियों पर ही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब के निर्देश पर अदन से ताइज़ के लिए फौरन अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियां (Reinforcements) रवाना की गई हैं। जब से ईरान की तरफ से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने जैसी स्थिति बनी है, तब से बाब अल-मंदाब का महत्व कई गुना बढ़ गया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर निकलता है। यह एक ऐसा संकरा समुद्री रास्ता है जो लाल सागर और स्वेज़ नहर को सीधे हिंद महासागर से जोड़ता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Yemen Conflict: टूटा संघर्ष-विराम, फिर तेज हुई लड़ाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हालांकि हूती अभी बाब अल-मंदाब के बिल्कुल मुहाने पर पूरी तरह काबिज़ नहीं हैं, लेकिन उत्तर में मौजूद बड़े बंदरगाह शहर 'होदेइदाह' पर उनका पहले से ही कड़ा नियंत्रण है। जुलाई के महीने में दोनों पक्षों के बीच बना सीजफायर तब पूरी तरह टूट गया था, जब विद्रोहियों ने सना (Sanaa) में ईरान से आए एक विमान का स्वागत किया था। इसके बाद से ही हूतियों ने सऊदी जहाजों की नाकेबंदी करने का ऐलान कर दिया था। पिछले एक दशक से अंदरूनी गृहयुद्ध में झुलस रहा यमन अब सीधे-सीधे पूरे मिडिल ईस्ट के बड़े क्षेत्रीय युद्ध की लपटों में घिरता नज़र आ रहा है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[PM Modi Meloni: मोदी ने 'दोस्त' मेलोनी को क्यों दी बधाई? 1,413 दिन के रिकॉर्ड का क्या है राज?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/pm-modi-meloni-friendship-italy-longest-serving-pm-melodi-india-italy-relations-articleshow-oauybaa</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:04:46 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;PM Modi ने Giorgia Meloni को इटली के युद्ध बाद इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार 1413 दिन तक PM रहने का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। मोदी ने उन्हें &lsquo;दोस्त&rsquo; बताया। जानें Melodi Connection और India-Italy ties की कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1nrq0n2kmp18szswfnv8gac,imgname-pm-modi-meloni-friendship-italy-longest-serving-pm-melodi-india-italy-relations-1788510700194.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;PM Modi Meloni:&lt;/strong&gt; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को एक खास उपलब्धि पर बधाई दी। मेलोनी इटली के द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने वाली नेता बन गई हैं। उनकी सरकार ने 1,413 दिन पूरे कर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मेलोनी को अपनी &ldquo;दोस्त&rdquo; बताते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि इटली के लोगों का मेलोनी के नेतृत्व पर कितना भरोसा और विश्वास है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;PM Modi ने Meloni को क्यों दी बधाई?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि इटली के युद्ध के बाद के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर वह अपनी दोस्त प्रधानमंत्री मेलोनी को बधाई देते हैं। उनके मुताबिक, यह उपलब्धि मेलोनी के नेतृत्व में इटली की जनता के भरोसे को दिखाती है। मोदी ने भारत और इटली के रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मेलोनी की दोस्ती ने भारत-इटली Special Strategic Partnership को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वह दोनों देशों के लोगों के लिए एक समृद्ध भविष्य बनाने के उद्देश्य से इटली के साथ करीबी सहयोग जारी रखने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने मेलोनी के आने वाले वर्षों के लिए निरंतर सफलता की शुभकामनाएं भी दीं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Congratulations to my friend Prime Minister Meloni on becoming the longest continuously serving Prime Minister in Italy's postwar history. This milestone is a reflection of the trust and confidence of the Italian people in her leadership.&amp;nbsp;Her friendship has also been&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Narendra Modi (@narendramodi) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Giorgia Meloni का 1,413 दिन का रिकॉर्ड&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जियोर्जिया मेलोनी ने इटली के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। उनकी सरकार ने लगातार 1,413 दिन सत्ता में रहते हुए युद्ध के बाद के दौर में इटली की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार का रिकॉर्ड बनाया। मेलोनी ने इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की सरकार का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा है। बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार जून 2001 से अप्रैल 2005 तक 1,412 दिन चली थी। मेलोनी ने एक दिन ज्यादा सत्ता में रहकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह उपलब्धि इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इटली की राजनीति में सरकारों का लंबे समय तक टिकना आसान नहीं रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से देश में कई बार सरकारें बदली हैं और गठबंधन सरकारों के सामने स्थिरता एक बड़ी चुनौती रही है। मेलोनी ने अक्टूबर 2022 में इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। अब उनकी सरकार ने लगातार बने रहने के मामले में युद्ध के बाद का नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Modi-Meloni Friendship: कैसे मजबूत हुए भारत-इटली रिश्ते?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पीएम मोदी और जियोर्जिया मेलोनी की दोस्ती और दोनों देशों के बढ़ते रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार चर्चा में रहे हैं। मोदी ने अपने ताजा संदेश में भी इस दोस्ती को भारत-इटली Special Strategic Partnership को मजबूत करने से जोड़ा। भारत और इटली ने 2026 में अपने द्विपक्षीय रिश्तों को और आगे बढ़ाते हुए संबंधों को Special Strategic Partnership के स्तर तक पहुंचाया है। दोनों देश व्यापार, निवेश, तकनीक, कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग समेत कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने अपने संदेश में साफ कहा कि मेलोनी की दोस्ती ने दोनों देशों के बीच इस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने आने वाले समय में भी करीबी सहयोग जारी रखने की बात कही।&lt;/p&gt;View this post on Instagram&lt;p&gt;A post shared by Giorgia Meloni (@giorgiameloni)&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Modi-Meloni 'Melodi' Connection फिर चर्चा में&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मोदी और मेलोनी की दोस्ती का एक अनौपचारिक नाम &ldquo;Melodi&rdquo; भी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है। यह नाम Narendra Modi और Giorgia Meloni के नामों को मिलाकर बनाया गया है। दोनों नेताओं की मुलाकात जब भी होती है, सोशल मीडिया पर &ldquo;Melodi&rdquo; फिर चर्चा में आ जाता है। 2026 के G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों की गर्मजोशी भरी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा था। G7 की फैमिली फोटो के दौरान मेलोनी ने पीएम मोदी से दोबारा मिलने पर खुशी जताई थी। बातचीत के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर दोनों की लोकप्रियता को लेकर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी भी की थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Parle Melody Chocolate से फिर वायरल हुआ था 'Melodi'&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मोदी-मेलोनी की दोस्ती का &ldquo;Melodi&rdquo; कनेक्शन उस समय और चर्चित हो गया था जब पीएम मोदी ने इटली यात्रा के दौरान मेलोनी को Parle Melody चॉकलेट का पैकेट दिया था। मेलोनी ने इस पल का वीडियो अपने Instagram अकाउंट पर शेयर किया था। इसके साथ उन्होंने गिफ्ट के लिए धन्यवाद भी कहा था। वीडियो में दोनों नेताओं को चॉकलेट का पैकेट पकड़े देखा गया था। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, मेलोनी की पोस्ट वाले इस वीडियो को 276 मिलियन से ज्यादा व्यूज और 13.2 मिलियन लाइक्स मिले। इसके बाद &ldquo;Melodi&rdquo; नाम एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। मोदी और मेलोनी के नामों से बना यह शब्द दोनों नेताओं की सार्वजनिक मुलाकातों और तस्वीरों के साथ अक्सर वायरल होता रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;भारत-इटली संबंधों में क्यों अहम है Modi-Meloni Bond?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पीएम मोदी और मेलोनी की नजदीकी सिर्फ सोशल मीडिया की चर्चा तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं। भारत और इटली ने अपने रिश्तों को Special Strategic Partnership तक पहुंचाया है, जिससे रक्षा, व्यापार, तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। मेलोनी के रिकॉर्ड और पीएम मोदी की बधाई के बीच एक बात साफ है-दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों के साथ भारत-इटली के रणनीतिक रिश्ते भी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। मोदी ने अपने संदेश में इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Pig Kidney Transplant: कौन है वो शख्स? जो 271 दिन बिना डायलिसिस रहा, जानिए Xenotransplant का कमाल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/pig-kidney-transplant-us-patient-tim-andrews-271-days-human-kidney-xenotransplantation-articleshow-551hyf4</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 12:03:05 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;अमेरिका के Tim Andrews को जेनेटिकली एडिटेड सुअर की किडनी लगी। वह 271 दिन बिना डायलिसिस रहे और बाद में उन्हें इंसानी किडनी मिली। जानिए Xenotransplantation कैसे बना नया मेडिकल ब्रिज।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1nhkg3t7rn7c4sjmsc394q7,imgname-pig-kidney-transplant-us-patient-tim-andrews-271-days-human-kidney-xenotransplantation-1788503244922.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Pig Kidney Transplant: &lt;/strong&gt;अंगों की कमी से जूझ रही दुनिया के लिए अमेरिका से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। पहली बार किसी इंसान में जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीन-एडिटेड) सुअर की किडनी लगाई गई, जिसने करीब 9 महीने यानी 271 दिनों तक बिना किसी डायलिसिस के बिल्कुल सही काम किया। इसके बाद जब वो किडनी खराब हुई, तो मरीज़ को एक मृत डोनर से इंसानी किडनी भी सफलतापूर्वक लगा दी गई। 'द लैंसेट' में छपी इस रिपोर्ट ने मेडिकल साइंस में एक नया रास्ता खोल दिया है। डॉक्टरों को उम्मीद जगी है कि सुअर के अंगों को इंसानी अंग मिलने तक एक अस्थायी &quot;पुल&quot; (Bridge) की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;कौन हैं टिम एंड्रयूज और उनके साथ क्या हुआ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिका के रहने वाले टिम एंड्रयूज (66 वर्ष) किडनी की आखिरी स्टेज की बीमारी से जूझ रहे थे। इंसानी किडनी का इंतज़ार बहुत लंबा था, इसलिए उन्होंने इस एक्सपेरिमेंटल प्रोसीजर (ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन) को चुना। जनवरी 2025 में उन्हें यूकाटन मिनिएचर प्रजाति के सुअर की जीन-एडिटेड किडनी लगाई गई। ट्रांसप्लांट होते ही किडनी ने काम करना शुरू कर दिया और टिम को पूरे 271 दिनों तक थकाने वाले डायलिसिस से छुट्टी मिल गई। बाद में जब इंफेक्शन के चलते सुअर की किडनी का काम बिगड़ने लगा, तो उसे निकाल दिया गया। एंड्रयूज कुछ समय डायलिसिस पर रहे और फिर जनवरी 2026 में उन्हें एक इंसानी किडनी मिल गई। सबसे अच्छी बात यह रही कि सुअर की किडनी लगाने की वजह से उनके शरीर ने इंसानी किडनी को खारिज नहीं किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;सुअर की किडनी में आखिर क्या बदलाव किए गए थे?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इंसानी इम्यून सिस्टम किसी भी जानवर के अंग को तुरंत रिजेक्ट कर देता है। इसलिए वैज्ञानिकों ने सुअर के जीनोम में 69 बदलाव (Gene Edits) किए थे:&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;3 पिग ग्लाइकन एंटीजन हटाए गए: &lt;/strong&gt;ताकि इंसान का इम्यून सिस्टम उस पर हमला न करे।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;7 इंसानी जीन डाले गए:&lt;/strong&gt; ताकि अंग इंसानी शरीर के साथ आसानी से तालमेल बिठा सके।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;वायरस को निष्क्रिय किया गया:&lt;/strong&gt; सुअर से इंसान में किसी भी पोर्सिन एंडोजेनस रेट्रोवायरस (PERVs) के फैलने के खतरे को खत्म किया गया।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;271 दिनों की सफलता के मायने क्या हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह पहली बार नहीं है जब सुअर की किडनी इंसान में लगाई गई हो। मार्च 2024 में मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में पहला ऐसा ट्रांसप्लांट हुआ था, लेकिन तब मरीज़ की मौत 52 दिनों में दिल की बीमारी से हो गई थी। लेकिन टिम एंड्रयूज का मामला दिखाता है कि यह तरीका सिर्फ चंद दिनों की ज़िंदगी नहीं बढ़ाता, बल्कि इंसानी अंग मिलने तक मरीज़ को सुरक्षित रख सकता है। यह उन लाखों लोगों के लिए बड़ी उम्मीद है जो ऑर्गन डोनर के इंतज़ार में डायलिसिस पर दिन काट रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;भारत और दुनिया में अंगों की भारी कमी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल लगभग 1,50,000 ऑर्गन ट्रांसप्लांट होते हैं, जो असल ज़रूरत का 10% से भी कम है। भारत की बात करें तो नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन (NOTTO) के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में कुल 18,911 ट्रांसप्लांट हुए थे। अकेले जनवरी से सितंबर 2024 के बीच ही 10,140 से ज़्यादा किडनी ट्रांसप्लांट हुए, जिनमें ज़्यादातर ज़िंदा रिश्तेदारों द्वारा दिए गए थे। ऐसे में अगर सुअर की किडनी का विकल्प तैयार होता है, तो भारत जैसे देश में भी लाखों जानें बचाई जा सकेंगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Organ Transplant की कमी के बीच क्यों बढ़ी उम्मीद?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दुनिया में इंसानी अंगों की कमी ट्रांसप्लांट मेडिसिन की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इसी वजह से वैज्ञानिक वर्षों से xenotransplantation यानी जानवर के अंग को इंसान में लगाने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग ने इस रिसर्च को नई दिशा दी है। अब लक्ष्य सिर्फ जानवर के अंग को इंसान में लगाने का नहीं, बल्कि उसके जीन को इस तरह बदलने का है कि इंसानी शरीर उसे कम से कम रिजेक्ट करे। Massachusetts General Hospital की रिसर्च में गैर-मानवीय प्राइमेट्स में भी जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की किडनी को लंबे समय तक काम करते हुए देखा गया है। इससे मानव परीक्षणों की दिशा में आगे बढ़ने का आधार मिला है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;अभी क्या-क्या चुनौतियां बाकी हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भले ही यह प्रयोग सफल रहा, लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि अभी सुअर की किडनी पूरी तरह इंसानी किडनी की जगह नहीं ले सकती। लंबे समय तक अंग को बनाए रखना, इंफेक्शन का डर और इम्यून सिस्टम का रिजेक्शन अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरीके को आम इलाज का हिस्सा बनाने से पहले अभी कई बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स करने होंगे। फिलहाल, इंसान का अंग दान करना ही सबसे बड़ा और सुरक्षित जरिया है, लेकिन भविष्य में सुअर की किडनी इस कमी को पूरा करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिस्क्लेमर:&lt;/strong&gt; इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और वैज्ञानिक घटनाक्रम को समझाने के उद्देश्य से है। यह किसी भी तरह की चिकित्सकीय सलाह या डॉक्टर की राय का विकल्प नहीं है। किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ से सलाह लें।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Nepal Flood Rescue: कुदरत के कहर के बीच चमत्कार, 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले 2 लोग, फिर आई आवाज!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-flood-trishuli-3a-tunnel-rescue-operation-two-workers-alive-after-nine-days-articleshow-cuun0nk</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 10:33:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के 9 दिन बाद त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। जानिए नेपाली सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन का पूरा अपडेट।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1ncftdea44skbjtnk90szer,imgname-nepal-flood-trishuli-3a-tunnel-rescue-operation-two-workers-alive-after-nine-days-1788497881518.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal Trishuli Hydropower Tunnel Rescue: &lt;/strong&gt;नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने जो तबाही मचाई है, उससे हर तरफ मातम छाया हुआ है। इस आपदा में अब तक 1,400 से ज़्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लेकिन इस भयानक त्रासदी और निराशा के बीच रसुवा ज़िले के त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर स्टेशन से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे देश में उम्मीद की नई किरण जगा दी है। आपदा के पूरे नौ दिन बीत जाने के बाद, बेहद मुश्किल हालात में सुरंग के अंदर फंसे दो कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Trishuli 3A Rescue: मौत के मुहाने से बाहर आए संजय और कबीर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बेहद जटिल और ख़तरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल रहे सांसद और इंजीनियर श्री राम न्यूपाने ने बताया कि सुरंग से बचाए गए दोनों कर्मचारियों की पहचान मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइज़र कबीर महर्जन के रूप में हुई है। रेस्क्यू टीम सबसे पहले संजय साह तक पहुँचने में कामयाब रही और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला, जिसके ठीक बाद कबीर महर्जन को भी बाहर खींच लिया गया। 26 अगस्त को जब कुदरत ने कहर बरपाया था, तब से त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट से कम से कम 40 लोग लापता हैं। अगर पूरे देश की बात करें तो छह अलग-अलग हाइड्रोपावर प्लांट्स से करीब 900 से अधिक कर्मचारियों का अब तक कोई अता-पता नहीं चला है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Nepal Tunnel Rescue: 'घबराओ मत, हम आ रहे हैं...' और अंदर से आया जवाब!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सांसद न्यूपाने ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस चमत्कारिक पल का ज़िक्र करते हुए लिखा कि जब बचाव दल मलबा हटाते हुए सुरंग में थोड़ा और आगे बढ़ा, तो उन्हें अंदर से इंसानी आवाज़ें सुनाई दीं। जब बाहर से रेस्क्यू टीम ने चिल्लाकर कहा, &quot;घबराओ मत, हम तुम्हें बचाने आ रहे हैं!&quot; तो अंदर अँधेरे में फँसे लोगों ने वापस जवाब दिया। यह सुनते ही मौके पर मौजूद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों का हौसला दोगुना हो गया। उन्होंने तुरंत राहत और बचाव कार्य को और तेज़ कर दिया। ज़मीन के नीचे भारी कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थरों को हटाने के लिए भारी-भरकम मशीनें और कटर लगाए गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;TWO MEN RESCUED ALIVE AFTER 9 DAYS IN NEPAL TUNNELSanjay Sah and Kabir Maharjan were rescued alive from the Trishuli 3A hydropower tunnel, nine days after the August 26 flash flood.&amp;nbsp;Rescuers heard voices inside and are continuing the search for others who may remain trapped. pic.twitter.com/ttV3RKbdtd&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Subodh Kumar (@kumarsubodh_) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Nepal Flood 2026: त्रिशूली-3A में अब भी कई लोग लापता&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;26 अगस्त को आई बाढ़ ने रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई थी। त्रिशूली नदी और आसपास के इलाकों में पानी, मिट्टी, पत्थर और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बुरी तरह प्रभावित हुए। त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट में कम से कम 40 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। देश के कम से कम छह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से करीब 900 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि दो लोगों का जिंदा मिलना बाकी बचाव अभियानों के लिए भी उम्मीद जगाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;नेपाल में तबाही कितनी बड़ी? 1,259 मौतें, हजारों अब भी लापता&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल में 26 अगस्त की आपदा का असर बेहद व्यापक रहा। शुक्रवार तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में मृतकों की संख्या 1,259 तक पहुंच चुकी थी, जबकि 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए थे। यह आपदा सिर्फ बाढ़ तक सीमित नहीं थी। ग्लेशियर ढहने के बाद आई भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबे ने नदी घाटी में तबाही मचा दी। कई सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और दूसरी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हुईं। रसुवा क्षेत्र में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट खास तौर पर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;MIRACLE AFTER 9 DAYS! After 9 long days trapped inside the Trishuli 3A tunnel, Sanjay Shah has finally been rescued alive. This is more than a rescue - this is a miracle that has brought tears, hope, and an entire nation together. ❤️&zwj;According to the initial assessment,&hellip; pic.twitter.com/5CW1CBZ369&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Ananda Nepali (@anandanepali99) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Hydropower Tunnel Rescue: मलबे के बीच जिंदगी तलाश रही टीमें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुरंगों में बचाव अभियान आसान नहीं है। बाढ़ ने कई सुरंगों के प्रवेश द्वार को मलबे से बंद कर दिया है। अंदर मिट्टी, पत्थर और पानी जमा है और कई जगह सुरंगों की संरचना भी बदल गई है। रेस्क्यू टीमों को भारी मशीनरी और विशेष उपकरणों की मदद से रास्ता बनाना पड़ रहा है। इंजीनियर सुरंगों के पुराने नक्शे और लेआउट देखकर बचाव दलों को अंदर मौजूद संभावित रास्तों और जगहों की जानकारी दे रहे हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक 500 से ज्यादा इंजीनियरों का एक WhatsApp ग्रुप भी बचाव अभियान में तकनीकी मदद दे रहा है। इसमें सुरंगों के नक्शे, कर्मचारियों की जानकारी और दूसरे जरूरी तकनीकी विवरण साझा किए जा रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Rasuwa Langtang Khola: उम्मीद के बीच मिली दो शवों की खबर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जहां त्रिशूली-3A से दो लोगों को जिंदा निकालने की खबर ने उम्मीद जगाई, वहीं रसुवा लांगटांग खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से दुखद खबर भी सामने आई। नेपाल सेना की खोज और बचाव टीम ने सुरंग के भीतर से दो लोगों के शव बरामद किए। बचाव दल सुरंग के अंदर करीब 150 मीटर तक पहुंच चुका था। इस 20 मेगावाट की परियोजना पर तैनात 41 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया था। ऐसे में उनके परिवार अभी भी किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Families Waiting: हर फोन कॉल से जुड़ी है एक उम्मीद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;त्रिशूली-3A में फंसे कर्मचारियों के परिवारों के लिए पिछले नौ दिन बेहद मुश्किल रहे। कई रिश्तेदार सरकारी कार्यालयों और सेना मुख्यालय के चक्कर लगाते रहे। कुछ परिवार प्रभावित इलाकों तक भी पहुंचे ताकि अपने लोगों की कोई जानकारी मिल सके। किसी के लिए सुरंग के अंदर से आई आवाज उम्मीद बन गई, तो किसी के लिए शव मिलने की खबर ने इंतजार और बढ़ा दिया। एक इंजीनियर की पत्नी ने भी बताया कि कई दिन गुजर गए हैं और परिवार को कोई बड़ी जानकारी नहीं मिल रही थी। इसके बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी थी कि उनके पति और दूसरे कर्मचारी सुरक्षित बाहर आएंगे। अब संजय साह और कबीर महर्जन के जिंदा बाहर आने से उन परिवारों की उम्मीद और मजबूत हुई है, जिनके अपने अभी भी लापता हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Nepal Flood Rescue Operation: क्या बाकी लोगों तक भी पहुंचेगी टीम?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;त्रिशूली-3A से दो कर्मचारियों का रेस्क्यू बचाव अभियान के लिए बड़ा मोड़ है। इससे यह साबित हुआ है कि सुरंगों के अंदर लंबे समय तक फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। रेस्क्यू टीमें अब भी कई प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में खोज अभियान चला रही हैं। करीब 900 लोगों के लापता होने की जानकारी के बीच हर सुरंग, हर मलबे और हर संभावित जगह की जांच की जा रही है। नौ दिन बाद दो जिंदगियां सुरंग से बाहर आई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है&mdash;क्या इस बचाव अभियान में कुछ और लोगों को भी जिंदा खोज लिया जाएगा?&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[BRICS Summit: भारत की लीडरशिप का रूस भी हुआ कायल, बोला- समिट जबरदस्त कामयाब होगा]]></title>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 09:39:39 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;BRICS Summit 2026: रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भारत की BRICS लीडरशिप को 'बड़ी कामयाबी' बताया है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने कई सेक्टर्स में तरक्की के लिए शानदार काम किया है और समिट से पहले कई नई पहल शुरू की हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;India BRICS Presidency: &lt;/strong&gt;भारत में रूस के राजदूत (Ambassador) डेनिस अलीपोव ने शुक्रवार को BRICS ग्रुप में भारत की लीडरशिप की जमकर तारीफ की। उन्होंने आने वाले समिट की कामयाबी पर पूरा भरोसा जताया और इस ग्रुप को आगे बढ़ाने में नई दिल्ली की सक्रिय भूमिका को सराहा। समिट से पहले ANI को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में राजदूत अलीपोव ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में कई सेक्टर्स में तरक्की हुई है और कई अहम ऑपरेशनल फ्रेमवर्क भी पेश किए गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lsquo;काबिल और कामयाब&rsquo; लीडरशिप की तारीफ&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अलीपोव ने कहा, &quot;मैं कहना चाहूंगा कि इस साल BRICS समिट और भारत की अध्यक्षता पूरी तरह से कामयाबी के लिए तैयार है। भारत ने अपनी अध्यक्षता को बहुत काबिलियत और कामयाबी से संभाला है और मंत्री स्तर पर सैकड़ों बैठकें की हैं।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;राजदूत ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले बहुपक्षीय प्रोजेक्ट्स को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाया है और साथ ही नई रफ्तार भी दी है। उन्होंने कहा, &quot;हम उन कई ट्रैक्स और प्रोजेक्ट्स पर आगे बढ़े हैं जो पिछले अध्यक्षों और 2024 में हमारी अध्यक्षता के दौरान प्रस्तावित किए गए थे।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नए प्लेटफॉर्म्स की शुरुआत&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ग्रुप के आर्थिक और तकनीकी एकीकरण के लिए नई दिल्ली के रणनीतिक विजन की ओर इशारा करते हुए, अलीपोव ने भारत के कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए कई नए प्लेटफॉर्म्स का खास तौर पर जिक्र किया। राजदूत ने कहा, &quot;भारत ने अपनी तरफ से भी कई नई पहल की हैं, जैसे स्मार्ट ग्रिड, एनर्जी स्टोरेज, स्टार्टअप इनोवेशन हब, इनक्यूबेटर नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन फ्रेमवर्क।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कई मोर्चों पर हुई तरक्की&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रूसी राजदूत ने कहा कि पिछले BRICS अध्यक्षों की तरफ से सुझाए गए कई प्रस्तावों पर भी चर्चा आगे बढ़ी है। इनमें रूस के प्रस्ताव भी शामिल हैं, जैसे कि ग्रेन एक्सचेंज पहल, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और एक नया इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म। उन्होंने भारत की तरफ से प्रस्तावित स्मार्ट ग्रिड, एनर्जी स्टोरेज, स्टार्टअप इनोवेशन हब, इनक्यूबेटर नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स व सप्लाई चेन फ्रेमवर्क जैसी पहलों का भी जिक्र किया। अलीपोव ने कहा, &ldquo;इन सभी ट्रैक्स पर हम आगे बढ़े हैं, तरक्की हुई है; एजेंडा बहुत बड़ा है। मुझे यकीन है कि चर्चा बहुत ठोस होने वाली है।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;रूसी राजदूत के मुताबिक, BRICS में चर्चा मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों के इर्द-गिर्द घूमती है: सुरक्षा, आर्थिक विकास, और लोगों के बीच संपर्क व सांस्कृतिक सहयोग। उन्होंने कहा, &ldquo;इन सभी ट्रैक्स पर हमने तरक्की की है। और इस नजरिए से, यह कहना पहले से ही सुरक्षित है कि इस साल भारत की अध्यक्षता एक बड़ी कामयाबी रही है और समिट इस बात की पुष्टि करेगा।&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अलीपोव ने जोर देकर कहा कि इस हाई-लेवल मीटिंग से पहले ही अध्यक्षता के नतीजे खुद बयां कर रहे हैं। उन्होंने कहा, &quot;यह कहना पहले से ही सुरक्षित है कि इस साल भारत की अध्यक्षता एक बड़ी कामयाबी बन गई है, और समिट इस बात की पुष्टि करेगा।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आने वाला समिट और इसका इतिहास&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;उम्मीद है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत में होने वाले BRICS समिट में हिस्सा लेंगे। उनके इस दौरे से द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ ग्रुप से जुड़े बड़े मुद्दों पर भी चर्चा का मौका मिलेगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;BRICS अध्यक्ष 2026 के तौर पर, भारत 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS समिट की मेजबानी करेगा। इस समिट में BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के साथ-साथ आउटरीच मेहमान भी शामिल होंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्रालय ने पहले एक प्रेस रिलीज में कहा था कि भारत की BRICS अध्यक्षता का थीम है: &ldquo;Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability&rdquo; (लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण)। यह प्रधानमंत्री के &quot;मानवता पहले&quot; की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;नेता आपसी प्राथमिकताओं पर इंट्रा-ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और आपसी महत्व के वैश्विक और क्षेत्रीय मामलों पर अपने नजरिए साझा करेंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गौरतलब है कि इस साल भारत की अध्यक्षता में, BRICS की रणनीतिक साझेदारी को तीन मुख्य स्तंभों - राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, और सांस्कृतिक व लोगों के बीच आदान-प्रदान - पर और मजबूत करने के लिए भारत के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और हाई-लेवल कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली। साल 2026 इसलिए भी खास है क्योंकि BRICS अपनी स्थापना के बीस साल पूरे कर रहा है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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            <title><![CDATA[Trump के दबाव में झुका South Korea? Hormuz में नौसैनिक तैनाती पर शुरू हुआ मंथन]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/south-korea-hormuz-trump-pressure-iran-war-p8-deployment-articleshow-f1b6qoa</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 09:35:42 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Donald Trump South Korea: &lt;/strong&gt;डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद दक्षिण कोरिया होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनाती पर विचार कर रहा है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस साल के अंत तक P-8 विमान, EOD दल और लॉजिस्टिक्स जहाज भेजे जा सकते हैं. अंतिम फैसला लंबित है और NSC, कैबिनेट व संसद की मंजूरी जरूरी होगी.&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;South Korea Hormuz Strait Deployment:&lt;/strong&gt; अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार दबाव और सार्वजनिक नाराजगी के बीच दक्षिण कोरिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य संसाधनों की संभावित तैनाती पर विचार तेज कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सियोल पहले जहां ईरान युद्ध खत्म होने के बाद ही किसी सैन्य सहायता पर विचार करने की बात कह रहा था, वहीं अब साल के अंत तक क्षेत्र में नौसैनिक संसाधन भेजने की संभावना पर चर्चा हो रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक तैनाती को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। प्रस्ताव फिलहाल शुरुआती विचार-विमर्श के स्तर पर बताया जा रहा है। किसी भी सैन्य तैनाती से पहले दक्षिण कोरिया में निर्धारित मंजूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Trump के दबाव के बीच क्यों बदला रुख?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर दक्षिण कोरिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि सियोल ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के अभियान में पर्याप्त सहयोग नहीं किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अगस्त में ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कम करने की बात कही थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने एक सैन्य अभ्यास समाप्त कर दिया। ट्रंप की टिप्पणियों में ईरान युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया की गैर-भागीदारी को भी इस तनाव से जोड़कर देखा गया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके अलावा, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को लेकर ट्रंप की अचानक सकारात्मक टिप्पणी ने भी सियोल में रणनीतिक चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे माहौल में दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को संतुलित रखना एक अहम चुनौती बन गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Hormuz में क्या भेज सकता है South Korea?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोरिया संभावित तैनाती के तहत P-8 निगरानी विमान भेजने पर विचार कर रहा है। यह विमान समुद्री क्षेत्र में जहाजों और पनडुब्बियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने में सक्षम है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके साथ दक्षिण कोरियाई नौसेना की एक विशेष टीम के EOD (Explosive Ordnance Disposal) दल को भी भेजे जाने की संभावना बताई जा रही है। यह टीम विस्फोटक और खतरनाक आयुध से निपटने के लिए प्रशिक्षित होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक लॉजिस्टिक्स जहाज की तैनाती का विकल्प भी विचाराधीन बताया जा रहा है। इसका इस्तेमाल तैनात विमान और सैन्य दल को जरूरी आपूर्ति तथा अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है। इस तरह संभावित मिशन केवल निगरानी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय अन्य देशों के अभियानों के साथ समन्वय का हिस्सा भी बन सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तैनाती के लिए संसद की मंजूरी जरूरी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अगर दक्षिण कोरियाई सरकार सैन्य तैनाती को मंजूरी देती है, तो इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। प्रस्ताव को पहले National Security Council (NSC) के स्तर पर मंजूरी मिलनी होगी। इसके बाद कैबिनेट की स्वीकृति और फिर संसद की सहमति आवश्यक होगी। दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मुद्दे से जुड़ा प्रस्ताव इसी महीने संसद में लाया जा सकता है। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;खास बात यह है कि दक्षिण कोरिया का शुरुआती रुख ईरान युद्ध समाप्त होने के बाद ही सैन्य मदद पर विचार करने का था। अब Hormuz में संभावित तैनाती पर चर्चा इस नीति में बदलाव का संकेत मानी जा रही है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राष्ट्रपति कार्यालय ने क्या कहा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने सैन्य तैनाती को लेकर चल रही अटकलों पर सावधानी बरती है। कार्यालय की ओर से संकेत दिया गया है कि सरकार ने अभी किसी अंतिम तैनाती का फैसला नहीं किया है। इससे साफ है कि मामला फिलहाल सुरक्षा, कूटनीति और घरेलू राजनीति&mdash;तीनों पहलुओं पर विचार के चरण में है। सरकार को एक तरफ अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को संतुलित करना है, तो दूसरी तरफ ईरान और व्यापक मध्य पूर्व संकट में सीधे सैन्य रूप से शामिल होने के जोखिमों पर भी विचार करना होगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आगे क्या होगा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार, सुरक्षा परिषद, कैबिनेट और संसद के स्तर पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी। यदि तैनाती को मंजूरी मिलती है, तो Hormuz क्षेत्र में दक्षिण कोरिया की भूमिका मुख्य रूप से निगरानी, सुरक्षा और लॉजिस्टिक सहायता पर केंद्रित हो सकती है। फिलहाल अंतिम फैसला बाकी है। इसलिए दक्षिण कोरिया की संभावित सैन्य तैनाती को लेकर सामने आ रही रिपोर्टों को प्रस्ताव और विचार-विमर्श के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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            <title><![CDATA[‘वे मुझे यहां बहुत मारते-पीटते हैं’: कुवैत में फंसी तमिलनाडु की महिला की मदद की गुहार, VIDEO]]></title>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 07:14:48 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Kuwait Tamil Nadu Woman Abuse Case: कुवैत में घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही तमिलनाडु की वनिता पर अत्याचार! दो महीने से सैलरी बंद और तंग कमरे में क़ैद महिला ने तमिलनाडु सरकार से बचाने की गुहार लगाई है। जानिए पूरे मामले की सच्चाई।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1n17hkk4ck9r92cwfq7fkek,imgname-kuwait-tamil-nadu-woman-vanitha-kallakurichi-torture-salary-help-india-return-1788486076019.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Kuwait News:&lt;/strong&gt; सोशल मीडिया पर कुवैत से आया एक वीडियो इस समय लोगों का दिल दहला रहा है। इसमें सिर पर स्कार्फ बांधे और एक छोटे से घुटन भरे कमरे में बैठी महिला हाथ जोड़कर रो रही है। यह वनिता है, जो तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले की रहने वाली है। कुवैत में घरेलू नौकरानी का काम करने गई वनिता वहां नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। वह सीधे अपने ज़िले की कलेक्टर मैडम और पुलिस कप्तान (SP) से गिड़गिड़ाते हुए भारत वापस बुलाने की भीख मांग रही है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Kuwait में Tamil Nadu Woman का Video, हाथ जोड़कर लगाई गुहार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वीडियो में वनिता अपना परिचय देते हुए कहती है कि वह कल्लाकुरिची जिले की रहने वाली है। उसके मुताबिक, कुवैत आए उसे करीब तीन महीने हुए हैं। वह बताती है कि यहां उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा और उसे लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। वनिता ने कहा, &quot;मेरा नाम वनिता है और मैं कल्लाकुरिची जिले से हूँ। मुझे विदेश आए तीन महीने हो गए हैं। वे मुझे यहाँ प्रताड़ित करते हैं। मैं कलेक्टर मैडम और पुलिस अधीक्षक मैडम से अपील करती हूँ कि वे मुझे बचाएँ और मेरे देश भारत वापस लाएँ। उन्होंने पिछले दो महीनों से मेरी सैलरी नहीं दी है। मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती।&quot; उसकी इस अपील के बाद मामला तमिलनाडु के अधिकारियों तक पहुंचा और स्थानीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;கள்ளக்குறிச்சி : சங்கராபுரம் அருகே குடும்ப வறுமையின் காரணமாக குவைத் நாட்டிற்கு வேலைக்கு சென்ற பெண் 2 மாதங்களுக்கு மேலாக உணவின்றி தவித்து வருவதாகவும் பல்வேறு சித்திரவதை அனுபவிப்பதாகவும் வேதனை.. தாயகம் திரும்ப நடவடிக்கை எடுக்க வேண்டும் என வீடியோ வெளியிட்டு குமுறல்!#Kallakurichi&hellip; pic.twitter.com/Ve1I3X1MFW&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; PttvOnlinenews (@PttvNewsX) September 2, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Kuwait में फंसी महिला के परिवार ने भी मांगी मदद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अधिकारियों ने वनिता की पहचान और उसके कल्लाकुरिची निवासी होने की पुष्टि की है। इसके बाद उसके परिवार का पता लगाया गया। परिवार ने भी शिकायत दर्ज कराते हुए वनिता को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है। वनिता की मां वेन्निला का आरोप है कि उनकी बेटी को विदेश भेजने वाले एजेंट ने उसके साथ धोखा किया। उनका कहना है कि वनिता को कुवैत में घरेलू काम के लिए भेजा गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। वेन्निला ने बताया कि वनिता के एक बेटा और एक बेटी है। उन्होंने अधिकारियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनकी बेटी को किसी भी तरह सुरक्षित वापस लाया जाए। उन्होंने कहा, &quot;एजेंट ने उसके साथ धोखाधड़ी की। उसका एक बेटा और एक बेटी है। वे उसे घरेलू काम के लिए ले गए थे लेकिन वे उसे प्रताड़ित करते हैं। कृपया मेरी बेटी को जीवित घर वापस लाएँ, कलेक्टर मैडम। मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Kallakurichi Police ने क्या बताया?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कल्लाकुरिची की पुलिस अधीक्षक (SP) शाहनाज़ ने बताया कि पुलिस ने वनिता के जिले से होने की पुष्टि कर ली है और उसके परिवार से संपर्क भी किया गया है। SP के मुताबिक, परिवार की शिकायत मिल चुकी है और उसे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया है। अब वनिता को कुवैत से सुरक्षित वापस लाने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। शाहनाज़ ने कहा, &quot;हमने पुष्टि की है कि वनिता इसी ज़िले की रहने वाली है। हमने उसके परिवार का पता लगा लिया है और हमें शिकायत भी मिली है। हमने उन्हें सही अधिकारियों से संपर्क कराया है ताकि मामले पर आगे कार्रवाई हो सके और उसे बचाया जा सके।&quot; फिलहाल परिवार को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द हस्तक्षेप करेंगे और वनिता को कुवैत से सुरक्षित भारत वापस लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[News Flash: EOS-05 लॉन्च से अंतरिक्ष में भारत की बड़ी छलांग, ईरान से नेपाल तक क्यों बढ़ा तनाव?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/today-morning-news-radar-isro-eos05-jaishankar-zelensky-mandhana-rain-iran-russia-germany-world-news-articleshow-2z8c3xg</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 06:50:09 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Prime News Tracker: ISRO की बड़ी कामयाबी, जयशंकर-जेलेंस्की मुलाकात और मंधाना का रिकॉर्ड सुर्खियों में हैं। जन्माष्टमी और बारिश के बीच नेपाल बाढ़, ईरान-अमेरिका तनाव, रूस-जर्मनी विवाद और फिलीपींस संकट ने दुनिया का ध्यान खींचा।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सुप्रभात! &lt;/strong&gt;आज 4 सितंबर 2026 की सुबह की शुरुआत देश-विदेश की 10 बड़ी और सनसनीखेज ख़बरों के साथ करते हैं। अंतरिक्ष में भारत की ऐतिहासिक छलांग से लेकर युद्ध के मुहाने पर खड़े देशों के भयानक मंज़र और मौसम के तीखे मिज़ाज तक, हर छोटी-बड़ी अपडेट पर हमारी नज़र बनी हुई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक तरफ़ जहाँ भारत जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ दुनिया में भारी तबाही क्यों मच गई है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;1. अंतरिक्ष में भारत का गगनचुंबी धमाका!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ISRO ने GSLV-F17 रॉकेट के ज़रिए देश के पहले जियो-ऑर्बिट इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 को सीधे भू-समकालिक कक्षा में स्थापित कर इतिहास रच दिया है। अब भारत वास्तविक समय में पृथ्वी की अचूक निगरानी करेगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;       !ISRO&rsquo;s state-of-the-art Earth observation satellite EOS-05, India&rsquo;s first imaging satellite in geosynchronous orbit, was successfully launched aboard a GSLV rocket from&hellip; pic.twitter.com/jqdQ9bsEyt&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; All India Radio News (@airnewsalerts) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;2. कीव में कूटनीति का सबसे बड़ा दांव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। शांति प्रयासों के लिए जेलेंस्की ने भारत का आभार जताया, वहीं भारत ने युद्ध खत्म कराने में हर संभव मदद का वादा किया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;3. मंधाना के तूफ़ान में उड़ा हॉन्गकॉन्ग!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;स्मृति मंधाना ने 124 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर मिताली राज का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भारत ने हॉन्गकॉन्ग को 137 रनों से हराकर महिला एशिया कप के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;स्मृति मंधाना ने 40 गेंद पर फिफ्टी पूरी की। इसके बाद गियर बदल लिया। ताबड़तोड़ खेला। 57 गेंद में सेंचुरी जड़ दी।महिला इंटर नेशनल क्रिकेट में स्मृति अब तक 18 शतक जड़ चुकी हैं। उनसे आगे अब कोई नहीं है।चाइना पहली बार भारत से खेल रहा। इस वक़्त एशिया कप चल रहा।&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Rajesh Sahu (@askrajeshsahu) September 3, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;4. जन्माष्टमी पर कृष्णनगरी से देशभर तक उत्सव!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। मथुरा और द्वारकाधीश में आस्था का सैलाब है, वहीं RBI के आदेश पर कई राज्यों में बैंक और सरकारी दफ्तर पूरी तरह बंद हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्&zwnj;भक्ति, प्रेम एवं धर्म के शाश्वत आलोक, वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण जी के पावन अवतरण दिवस 'श्रीकृष्ण जन्माष्टमी' की सभी प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं।भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण की असीम कृपा से सभी के जीवन में प्रेम, करुणा, धर्म एवं&hellip; pic.twitter.com/tRVpqwatWC&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;5. आसमान से बरसेगी आफ़त: IMD का रेड अलर्ट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR, यूपी, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भारी बारिश और गरज के साथ बौछारों की चेतावनी जारी की है। सक्रिय कम दबाव प्रणाली से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;6. पेंटागन में बड़ा फेरबदल, डोनाल्ड ट्रंप का फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एडम टेले को नया कार्यवाहक सेना सचिव नियुक्त कर तहलका मचा दिया है। वैश्विक सुरक्षा संकट के बीच अमेरिका अपने सैन्य नेतृत्व को तेजी से पुनर्गठित कर रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; : Donald Trump has named Adam Telle as acting Army secretary after Daniel Driscoll's departure amid reported tensions with Defense Secretary Pete Hegseth. Telle, currently Assistant Secretary of the Army for Civil Works, previously served in Trump's first term&hellip; pic.twitter.com/tXnYQgs3UH&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; XPRESS (@Xpress_24_7) September 4, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;7. कुदरत का सबसे भयानक कहर: 1250 से ज़्यादा मौतें!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हाहाकार मचा दिया है। मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय लापता हैं, जबकि बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;नुवाकोट के देवीघाट से सामने आया तबाही का मंजरनेपाल में आई बाढ़ से मची तबाही के दृश्य सामने आए हैं. नुवाकोट जिले के देवीघाट से मिले ड्रोन विजुअल्स में चारों तरफ सिर्फ मलबा, जलमग्न इमारतें और उजड़े हुए घर नजर आ रहे हैं.सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की कुल&hellip; pic.twitter.com/DopXY1phWI&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; zingabad (@zingabad) September 3, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;8. पश्चिम एशिया में महायुद्ध का नगाड़ा!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हमलों में ईरान के 6 नौसैनिकों की मौत हो गई और 100 से ज़्यादा आम नागरिक घायल हुए हैं। जवाब में हुती विद्रोहियों ने लाल सागर में ताबड़तोड़ मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;9. रूस और जर्मनी के बीच सीधे टकराव का ऐलान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रूस ने जर्मनी के प्रतिष्ठित 'गोएथे-इंस्टीट्यूट' सांस्कृतिक केंद्रों को बंद करने का आदेश दे दिया है। बर्लिन और मॉस्को के बीच वाणिज्य दूतावासों को बंद करने को लेकर कूटनीतिक जंग अब चरम पर पहुँच गई है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;10. उपराष्ट्रपति पर शिकंजा, बदलने जा रहे हैं नियम!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;फिलीपींस में उपराष्ट्रपति सारा दुतर्ते के महाभियोग परीक्षण के लिए सीनेटरों ने दोषसिद्धि की मत सीमा घटाने पर विचार शुरू कर दिया है। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से देश की राजनीति में हड़कंप मच गया है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/today-morning-news-radar-isro-eos05-jaishankar-zelensky-mandhana-rain-iran-russia-germany-world-news-articleshow-2z8c3xg"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Nepal Floods: कीचड़ में मिली किताबें, बैग और लंच बॉक्स बयां कर रहे तबाही का दर्द]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-flood-missing-children-books-school-bag-roshan-mijar-articleshow-vg718bo</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 20:26:08 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;नेपाल बाढ़ में अब तक 1252 लोगों की मौत और हजारों लापता हैं। मलबे में मिली बच्चों की किताबें, स्कूल बैग और लंच बॉक्स तबाही का दर्द बयां कर रहे हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal Flood Latest News: &lt;/strong&gt;नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 1252 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4216 लोग अब भी लापता हैं। अचानक आई बाढ़ ने कई जिंदगियां उजाड़ दीं। खासकर, अब कीचड़-मलबे से मिल रही बच्चों की किताबें और स्कूल बैग इस तबाही की ऐसी तस्वीर दिखाते हैं, जिसे देख इस आपदा का दर्द महसूस किया जा सकता है। ये सामान उन बच्चों के हैं, जिनकी जिंदगी कुछ ही पलों में पानी, कीचड़ और पत्थरों के तेज बहाव में बह गई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कीचड़ में मिली कक्षा 7 के छात्र की किताबें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल बाढ़ त्रासदी को भले ही एक हफ्ता हो चुका है, लेकिन तबाही और बर्बादी के निशां अब भी मौजूद हैं। मलबे से बच्चों के स्कूल बैग और कीचड़ से सनी कुछ किताबें मिली हैं। ये सामान उन बच्चों के हैं, जो पानी, कीचड़ और पत्थरों की तेज रफ्तार दीवार को अपनी ओर आता देखकर जान बचाने के लिए भागे होंगे। लेकिन बाढ़ का तेज बहाव अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह करता चला गया। इन किताबों पर कक्षा 7 के छात्र रोशन मिजार का नाम और रोल नंबर 31 लिखा था, जो श्री बागेश्वरी सेकेंडरी स्कूल में पढ़ता है या शायद अब पढ़ता था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;किताबों के बीच फंसा था रूलर और बैग में रखा था खाना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रोशन की किताब के दो पन्नों के बीच एक प्लास्टिक का रूलर फंसा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि शायद शिक्षक ने पिछली क्लास में जहां पढ़ाना खत्म किया था, रूलर उसी जगह रखा गया था। स्कूल बैग के अंदर 2 पेन भी थे। इसके अलावा लंच ब्रेक में खाने के लिए रखा गया खाना भी बैग में मौजूद था। इन चीजों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ आने से पहले रोशन की जिंदगी भी दूसरे बच्चों की तरह सामान्य थी। वह स्कूल गया होगा, पढ़ाई की होगी और लंच ब्रेक में खाना खाने की तैयारी की होगी। लेकिन अचानक आई बाढ़ ने सब कुछ बदल दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रोशन मिजार का क्या हुआ, किसी को नहीं पता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रोशन के साथ क्या हुआ, इसकी कोई जानकारी नहीं है। हो सकता है कि वह किसी तरह सुरक्षित जगह पहुंच गया हो। यह भी संभव है कि वह उन लोगों में शामिल हो, जिनकी बाढ़ में मौत हो गई या जो अब भी लापता हैं। लेकिन एक बात साफ है कि नेपाल की इस आपदा ने रोशन जैसे न जाने कितने बच्चों और परिवारों को गहरा दर्द दिया है। आंकड़ों में किसी व्यक्ति की पहचान भले ही सिर्फ एक संख्या बन जाए, लेकिन उसके पीछे एक परिवार, सपने और पूरी जिंदगी जुड़ी होती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल बाढ़ के बाद सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने बाढ़ और आपदा के बाद के हालात से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। मरने वालों की संख्या 1,300 के करीब पहुंचने के बीच बचाव और राहत अधिकारियों ने जिलावार मौतों की जानकारी दी है। सबसे ज्यादा 355 शव चितवन में मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 208, नुवाकोट में 177 और रसुवा में 127 शव मिले हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;11,993 लोगों को बचाया गया, हजारों अब भी लापता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अब तक 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जबकि 5,135 लोगों का इलाज चल रहा है। लापता लोगों में करीब 900 लोग अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे। इसके अलावा कम से कम 583 विदेशी नागरिक और उनके साथ मौजूद 164 नेपाली नागरिक भी लापता बताए गए हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Ganesh Mishra</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-flood-missing-children-books-school-bag-roshan-mijar-articleshow-vg718bo"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[शव नहीं मिले तो कैसे होता है अंतिम संस्कार? नेपाल से आ रहीं अब तक की सबसे दर्दनाक तस्वीरें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-floods-missing-people-kush-grass-symbolic-last-rites-shav-na-milne-par-hindu-antim-sanskar-garuda-purana-articleshow-x0lqxo1</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 18:46:34 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;नेपाल बाढ़ में कई लापता लोगों के शव नहीं मिले तो परिवार कुश और पुआल से प्रतीकात्मक शरीर बनाकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। जानें इसकी धार्मिक मान्यता।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal Flood Missing People Last Rites:&lt;/strong&gt; नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ को एक हफ्ता पूरा हो गया है। बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी हजारों परिवार अपने लापता रिश्तेदारों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, कई परिवारों की उम्मीद अब टूट चुकी है। शव नहीं मिलने के बावजूद इन परिवारों ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अपने परिजनों का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार शुरू कर दिया है। इस तरह के अंतिम संस्कार में लापता व्यक्ति का पुआल या कुश घास से प्रतीकात्मक शरीर बनाया जाता है और फिर उसका दाह संस्कार किया जाता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;काठमांडू में DNA सैंपल देने पहुंच रहे लोग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी बड़ी संख्या में लोग अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान के लिए DNA सैंपल देने पहुंच रहे हैं। बाढ़ के बाद सैकड़ों शव मिलने से शवगृहों में भी जगह कम पड़ गई है। कुछ शवों को पहले ही दफनाया जा चुका है। वहीं, कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब अपने परिजनों के जीवित मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे परिवार शव मिलने का इंतजार किए बिना ही अंतिम संस्कार कर रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शव नहीं मिला तो भी क्यों करना पड़ा अंतिम संस्कार?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अपने पति का इसी तरह प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने वाली डोलमा नेवार तमंग ने कहा, &quot;हमें यह करना पड़ा ताकि उनकी आत्मा मुक्त हो सके। वह जहां भी हों, शांति और खुशी से रहें।&quot; परिवारों के लिए यह प्रक्रिया बेहद भावनात्मक है। शव नहीं मिलने के बावजूद वे धार्मिक परंपरा के अनुसार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने की कोशिश कर रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;बिहार के राहुल कुमार सिंह का भी हुआ प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल में बाढ़ के दौरान बिहार के रक्सौल जिले के निवासी राहुल कुमार सिंह भी लापता हो गए। राहुल त्रिशूली में 216 मेगावाट के एक प्रोजेक्ट की सुरंग में काम कर रहे थे। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद उनका कोई पता नहीं चला। 7 दिन बाद भी जब राहुल का शव नहीं मिला तो उनके पिता धर्म सिंह ने कुश घास से बने प्रतीकात्मक शरीर का अंतिम संस्कार किया। यह घटना उन कई परिवारों की स्थिति को दिखाती है, जो अपने लापता परिजनों के शव मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय बाद भी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शव नहीं मिलने पर क्या अंतिम संस्कार किया जा सकता है?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;नेपाल से सामने आ रही इन घटनाओं के बाद सवाल उठता है कि अगर किसी व्यक्ति का शव नहीं मिले तो क्या हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जा सकता है? अगर हां, तो ऐसी स्थिति में अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है?&lt;/li&gt; &lt;li&gt;धार्मिक ग्रंथों में इस स्थिति से जुड़ा एक संदर्भ मिलता है। गरुड़ पुराण-सारोद्धार के प्रेतकल्प के अध्याय 10 में श्लोक 88 से 90 के बीच ऐसी परिस्थिति का उल्लेख बताया गया है, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, लेकिन उसका शरीर प्राप्त न हो सके।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;गरुड़ पुराण में शव न मिलने पर क्या विधान बताया गया है?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;इन श्लोकों के संदर्भ में बताया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की किसी निर्जन स्थान, जंगल या दूसरी परिस्थितियों में मृत्यु हो जाए और उसका शव नहीं मिल सके, तो ऐसी स्थिति में दर्भ यानी कुश घास से मृतक की प्रतीकात्मक आकृति बनाकर उसका दाह संस्कार किया जा सकता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसके बाद प्रतीकात्मक दाह संस्कार से प्राप्त राख को गंगा के जल में विसर्जित करने और उसी दिन से आगे की दशगात्र से जुड़ी क्रियाएं शुरू करने का विधान बताया गया है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसके अलावा, जिस तारीख को व्यक्ति की मृत्यु की सूचना मिलती है, उसे वार्षिक श्राद्ध के लिए आधार बनाने की बात भी कही गई है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;यानी इस धार्मिक संदर्भ के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए हर परिस्थिति में वास्तविक शव का उपलब्ध होना अनिवार्य नहीं माना गया है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;कुश घास से ही क्यों बनाया जाता है प्रतीकात्मक शव?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;हिंदू धार्मिक परंपरा में दर्भ यानी कुश घास को पवित्र माना जाता है। कई धार्मिक अनुष्ठानों और कर्मकांडों में भी कुश घास का इस्तेमाल किया जाता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;गरुड़ पुराण से जुड़े इस प्रसंग में भी शव उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कुश घास से मृतक की प्रतीकात्मक आकृति बनाने का उल्लेख बताया जाता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इसलिए शव नहीं मिलने पर कुश या पुआल से प्रतीकात्मक शरीर बनाकर किया जाने वाला अंतिम संस्कार केवल किसी आधुनिक आपदा के समय अपनाया गया उपाय नहीं है। इसके पीछे धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय संदर्भ भी बताए जाते हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Ganesh Mishra</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-floods-missing-people-kush-grass-symbolic-last-rites-shav-na-milne-par-hindu-antim-sanskar-garuda-purana-articleshow-x0lqxo1"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[यूक्रेन पहुंचकर जयशंकर ने रूस को लेकर क्या कहा? भारत ने युद्ध खत्म कराने के लिए बढ़ाया हाथ]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/russia-ukraine-war-india-ready-to-help-end-conflict-s-jaishankar-signals-possible-mediation-role-in-kyiv-articleshow-e94zr1k</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 17:44:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Russia Ukraine War &lt;/strong&gt;को खत्म कराने में भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। कीव दौरे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जरूरत पड़ने पर मदद की पेशकश की। जानिए यूक्रेन में भारत के विदेश मंत्री ने क्या कहा और शांति वार्ता पर इसका क्या असर हो सकता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kezverbsch1qpk3awjeccxnz,imgname-s-jaishankar-1768448024953.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध ने दुनिया की कूटनीति के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक खड़ी कर दी है। अब इस संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के बीच भारत ने एक बार फिर शांति स्थापित करने में मदद की पेशकश की है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में कहा कि अगर भारत किसी भी तरह से युद्ध समाप्त कराने में मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है। उनके इस बयान को भारत की संभावित मध्यस्थ भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;यूक्रेन के विदेश मंत्री के सामने दिया बयान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के साथ बातचीत के दौरान एस. जयशंकर ने कहा कि भारत जरूरत पड़ने पर मदद करने के लिए तैयार है। दोनों नेताओं के बीच ब्लैक सी यानी काला सागर में कमर्शियल शिपिंग पर हो रहे हमलों को लेकर भी चर्चा हुई। यह मुद्दा भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्री तनाव का असर भारतीय नागरिकों और नाविकों पर भी पड़ चुका है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह भी पढ़ें: &lt;strong&gt;CJP में नई फूट? दिल्ली में CJP Democratic की एंट्री, अभिजीत दीपके पर लगे गंभीर आरोप&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;यूक्रेन दौरे पर क्यों पहुंचे जयशंकर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर की यात्रा का उद्देश्य भारत-यूक्रेन संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय घटनाक्रम समेत आपसी हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है। इस दौरे के दौरान उनकी यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत होनी है। भारत लगातार रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संवाद बनाए हुए है और पहले भी बातचीत तथा कूटनीति के जरिए संघर्ष समाप्त करने की बात कहता रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चार साल से जारी युद्ध ने कितना नुकसान किया?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब भी भारी मानवीय और सैन्य नुकसान का कारण बना हुआ है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आकलनों में दोनों देशों के सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की संख्या बेहद अधिक बताई गई है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के आकलन के मुताबिक, युद्ध में दोनों पक्षों के लाखों सैनिक हताहत हुए हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों में हजारों नागरिकों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने का उल्लेख किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत केवल शांति की अपील तक सीमित रहेगा या रूस और यूक्रेन के बीच संवाद की कोई सक्रिय भूमिका भी निभाएगा? जयशंकर का कीव से आया बयान इस बहस को एक बार फिर तेज कर सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह भी पढ़ें: &lt;strong&gt;Donald Trump का चेहरा अब 1 डॉलर के सिक्के पर, परंपरा टूटी या कानून में मिला रास्ता?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Akshansh Kulshreshtha</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/russia-ukraine-war-india-ready-to-help-end-conflict-s-jaishankar-signals-possible-mediation-role-in-kyiv-articleshow-e94zr1k"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Donald Trump का चेहरा अब 1 डॉलर के सिक्के पर, परंपरा टूटी या कानून में मिला रास्ता?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/donald-trump-1-dollar-coin-how-did-a-living-us-president-appear-on-the-new-commemorative-coin-articleshow-vdxdqkv</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:53:27 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Donald Trump 1 Dollar Coin: &lt;/strong&gt;अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाला नया 1 डॉलर का सिक्का जारी होने के बाद विवाद शुरू हो गया है। जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मुद्रा पर कैसे आई और क्या यह कानूनन सही है? जानिए US Mint के इस खास सिक्के की पूरी कहानी।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1kcpnbb348rkttamks7230t,imgname-donald-trump-1-dollar-coin-how-did-a-living-us-president-appear-on-the-new-commemorative-coin-1788430996843.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाला नया 1 डॉलर का सिक्का चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। वजह सिर्फ ट्रंप का चेहरा नहीं, बल्कि अमेरिकी परंपरा है, जिसमें लंबे समय से जीवित लोगों की तस्वीर सरकारी मुद्रा पर नहीं लगाई जाती रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर एक मौजूदा राष्ट्रपति की तस्वीर वाला सिक्का जारी कैसे हो गया और क्या यह अमेरिकी कानून के मुताबिक है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ खास सिक्का&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी टकसाल यानी US Mint ने बुधवार को गोल्डन रंग का विशेष 1 डॉलर का सिक्का बिक्री के लिए उपलब्ध कराया। यह अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के जश्न का हिस्सा है। साल 2026 में अमेरिका अपनी स्थापना के 250 वर्ष पूरे कर रहा है। सिक्के के सामने वाले हिस्से पर डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर बनाई गई है। इसके साथ LIBERTY, IN GOD WE TRUST और 1776~2026 अंकित है। पीछे की ओर अमेरिकी राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर का डिजाइन है, जिसके ऊपर 250 लिखा गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ABD'de bağımsızlığın 250. yılı anısına Trump portreli 1 dolarlık madeni paralar basıldı.&bull; Piyasaya s&uuml;r&uuml;ld&uuml;kten birka&ccedil; sonra t&uuml;kendi. pic.twitter.com/foWKIyre0C&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Boşuna Tıklama (@bosunatiklama) September 3, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह भी पढ़ें: &lt;strong&gt;MiG-21 से दुश्मन का F-16 गिराने वाले अभिनंदन की नई उड़ान, अब Fly91 में भरेंगे उड़ान&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;जीवित व्यक्ति की तस्वीर पर क्या है अमेरिकी नियम?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिका में सरकारी मुद्रा पर जीवित लोगों की तस्वीर लगाने को लेकर पुराने कानूनी प्रतिबंध मौजूद हैं। इसकी पृष्ठभूमि 1866 तक जाती है, जब एक सरकारी अधिकारी द्वारा कथित तौर पर अपनी तस्वीर करेंसी पर लगवाने के बाद नियम बनाए गए थे। इन नियमों को आमतौर पर Thayer Amendment से जोड़ा जाता है। इसके तहत अमेरिकी नोटों पर जीवित व्यक्ति का चित्र लगाने की अनुमति नहीं है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है, ये प्रतिबंध नोटों और सिक्कों पर एक जैसे लागू नहीं होते।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;फिर ट्रंप की तस्वीर वाला सिक्का कानूनी कैसे?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस मामले की सबसे अहम बात सिक्के के डिजाइन से जुड़ी कानूनी व्यवस्था है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए विशेष डिजाइन वाले सिक्के जारी करने की अनुमति पहले से मौजूद कानून के तहत दी गई थी। इस कानून में सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी व्यक्ति की तस्वीर को लेकर प्रतिबंध का प्रावधान है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;लेकिन ट्रंप की तस्वीर सिक्के के सामने वाले हिस्से पर लगाई गई है। यही वजह है कि यह सिक्का अमेरिकी परंपरा से अलग जरूर माना जा रहा है, लेकिन उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के आधार पर इसे शुरुआती तौर पर अवैध नहीं माना जा रहा। हालांकि, ट्रंप की तस्वीर वाले इस सिक्के ने अमेरिका में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है, क्या सरकारी मुद्रा पर जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर लगाना केवल कानूनी सवाल है या फिर यह उस लोकतांत्रिक परंपरा से भी जुड़ा मुद्दा है, जिसे अमेरिका दशकों से मानता आया है?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह भी पढ़ें:&lt;strong&gt; CJP में नई फूट? दिल्ली में CJP Democratic की एंट्री, अभिजीत दीपके पर लगे गंभीर आरोप&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Akshansh Kulshreshtha</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Ganpati in Karachi: पाकिस्तान में बप्पा की धूम, मुस्लिम कलाकार ने मराठी परिवार के लिए बनाई मूर्ति, जीता दिल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/pakistani-muslim-artist-paints-ganpati-idol-for-marathi-family-in-karachi-articleshow-mewwpew</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:26:00 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Ganesh Chaturthi Pakistan: &lt;/strong&gt;पाकिस्तान के एक इन्फ्लुएंसर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक मुस्लिम कलाकार आने वाले गणेश चतुर्थी त्योहार के लिए गणपति की मूर्ति को रंगते हुए दिख रहे हैं. ये वीडियो लोगों का दिल जीत रहा है.&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1k9pm1vbtxq785qbcsezpq6,imgname-untitled-design---2026-09-03t150020.048-1788427849787.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Pakistani artist makes idol: &lt;/strong&gt;पूरे भारत में गणेश चतुर्थी की धूम है. 10 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार को लोग बड़े जोश और उत्साह के साथ मनाते हैं. गणपति बप्पा जब घर आते हैं या पंडालों में उनकी बड़ी-बड़ी मूर्तियां सजती हैं, तो माहौल ही कुछ और होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बप्पा के लिए ये प्यार सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;पाकिस्तानी कलाकार ने बनाई गणपति बप्पा की मूर्ति&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पाकिस्तान के एक इन्फ्लुएंसर ने एक वायरल वीडियो पोस्ट किया है, जो दिलों को छू रहा है. इसमें एक पाकिस्तानी मुस्लिम कलाकार कराची में एक मराठी परिवार के लिए गणपति की मूर्ति को रंगते हुए दिख रहे हैं. ये परिवार वहां गणेश मठ मंदिर चलाता है और आने वाले त्योहार की तैयारी कर रहा है. वीडियो शेयर करते हुए इन्फ्लुएंसर अमर प्रकाश ने लिखा, &ldquo;  .          ,         ..&rdquo; (यह कराची है. एक मुस्लिम कलाकार गणेश मठ मंदिर के अंदर गणपति बप्पा की पेंटिंग कर रहे हैं, यह मंदिर कराची में एक महाराष्ट्रीयन परिवार चलाता है..)&lt;/p&gt;इंस्टाग्राम पर यह पोस्ट देखें&lt;p&gt;A M A R (@theamarparkash) द्वारा साझा की गई पोस्ट&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;लोगों ने ऐसे दिए रिएक्शन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एक यूजर ने लिखा, &ldquo;मैं मुस्लिम हूं लेकिन सभी धर्मों का सम्मान करता हूं.&rdquo; एक और ने लिखा, &ldquo;मूर्ति खूप सुंदर आहे...&rdquo; (यह मराठी में है, जिसका मतलब है 'मूर्ति बहुत सुंदर है'). एक अन्य यूजर ने लिखा, &ldquo;इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है.&rdquo; वहीं एक और यूजर ने लिखा, &ldquo;यह बहुत खूबसूरत है.&rdquo;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;कौन हैं ये मराठी इन्फ्लुएंसर?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमर प्रकाश अपनी पत्नी सुष्मिता प्रकाश निपेंद्र और मां लीला प्रकाश के साथ कराची में रहते हैं. उनके फेसबुक बायो के मुताबिक, उन्होंने कराची, पाकिस्तान के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल से पढ़ाई की है. उन्होंने सर सैयद यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएशन किया है.&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Nepal Floods: उम्मीद टूटी, अब श्राद्ध का सहारा, लापता लोगों को 'मृत' मान रहे परिवार]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-flood-victims-families-perform-last-rites-for-missing-loved-ones-articleshow-gl99tw5</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:18:32 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal flood 2026: &lt;/strong&gt;नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के नौ दिन बाद, लापता लोगों के परिवारों ने अब उनके बचने की उम्मीद छोड़ दी है। वे अपने प्रियजनों को मृत मानकर उनका श्राद्ध कर रहे हैं। एक परिवार 26 अगस्त को लापता हुए दो भाइयों का शोक मना रहा है और बिना शवों के ही अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कर रहा है।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal Flood Death Toll:&lt;/strong&gt; नेपाल के कई हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ के नौ दिन बीत चुके हैं। अब तक जो लोग लापता हैं, उनके परिवारों ने उनके जिंदा होने की उम्मीद छोड़नी शुरू कर दी है। उन्होंने अपने प्रियजनों को मृत मानकर श्राद्ध की रस्में शुरू कर दी हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;लापता भाइयों के लिए परिवार ने छोड़ी उम्मीद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बेत्रावती के बोगटी टार गांव में एक परिवार ने दो भाइयों, 65 साल के केदार प्रसाद आचार्य और 60 साल के मधुसूदन आचार्य, के लिए शोक और श्राद्ध की रस्में कीं। ये दोनों भाई 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से लापता हैं। वे सुबह करीब 8 बजे नदी किनारे जंगल की तरफ घास काटने गए थे, लेकिन फिर कभी घर नहीं लौटे। नौ दिनों की खोज के बाद भी उनके शव नहीं मिले हैं और न ही उनके बारे में कोई जानकारी मिली है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;'हमने मान लिया है कि वो नहीं रहे'&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ANI से बात करते हुए, लापता भाइयों में से एक के भाई ने कहा कि परिवार ने बहुत खोजबीन की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। उन्होंने कहा, &ldquo;हम उन्हें ढूंढ नहीं पाए। वह खेतों में घास काटने गए थे। सरकार को जो शव मिले हैं, उनमें भी वो नहीं हैं।&rdquo;जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार ने मान लिया है कि दोनों भाइयों की मौत हो चुकी है, तो उन्होंने कहा, &ldquo;हां, वो गुजर गए... हमने यह मान लिया है।&rdquo; उन्होंने आगे बताया कि बाढ़ में परिवार के दो सदस्य बह गए और दोनों उनके सगे भाई थे। उन्होंने कहा, &quot;आज नौवां दिन है। हम सिर मुंडवाने और शुद्धिकरण की रस्में कर रहे हैं।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;परिवार के एक अन्य सदस्य ने कहा कि उन्होंने नौ दिनों तक इंतजार किया और हर संभव जगह पर खोजा, लेकिन कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने कहा, &quot;हमने नौ दिनों तक हर जगह इंतजार किया और खोजा, लेकिन कुछ नहीं मिला। जब वे नहीं मिले, तो हमें एहसास हुआ कि वे अब नहीं मिलेंगे।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;उन्होंने आगे कहा, &ldquo;अब तक तो शव सड़ गए होंगे या बह गए होंगे; किसी को नहीं पता कि कहां हैं। इसलिए, हमारी हिंदू परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार, हमने नौवें दिन से शोक की रस्में शुरू कर दी हैं।&rdquo;आचार्य परिवार के सदस्यों ने हिंदू परंपराओं के अनुसार श्राद्ध और शोक की रस्में निभाईं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मौत का आंकड़ा बढ़ा, हजारों अब भी लापता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के एक आधिकारिक अपडेट के अनुसार, 3 सितंबर की दोपहर तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,252 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग 4,216 लोग अभी भी लापता हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यह संकट 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शुरू हुआ था। इस बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में पानी, मलबे और पत्थरों का एक शक्तिशाली सैलाब भेज दिया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई। जैसे-जैसे लापता लोगों की तलाश जारी है, आचार्य जैसे परिवारों को अपने प्रियजनों के शवों के बिना ही शोक की रस्में निभाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[ईरान युद्ध खत्म करने की तैयारी में Trump? Pentagon की बढ़ती तैनाती ने बढ़ाया बड़ा सवाल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/trump-iran-war-over-pentagon-troop-deployment-centcom-strikes-40-ships-articleshow-cg521f3</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/news/trump-iran-war-over-pentagon-troop-deployment-centcom-strikes-40-ships-articleshow-cg521f3</guid>
            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 13:53:56 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[Wall Street Journal के मुताबिक सात महीने बाद Trump ने &lsquo;ईरान युद्ध समाप्त&rsquo; घोषित करने पर विचार किया है, जबकि Defence Secretary Pete Hegseth ने तैनाती बढ़ाई है. CENTCOM ने बुधवार को ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए; 18 की मौत, 142 घायल. मंगलवार को 40 वाणिज्यिक जहाजों को एस्कॉर्ट किया गया.]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m0ab6h9b5zcfps7jvysxe6st,imgname-donald-trump--6--1787053688107.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;US Iran strikes:&lt;/strong&gt; ईरान संघर्ष के करीब सात महीने पूरे होने के बीच अमेरिका की रणनीति को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump निजी तौर पर ईरान युद्ध को &lsquo;समाप्त&rsquo; घोषित करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इसी दौरान Pentagon ने West Asia में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। एक तरफ Washington में युद्ध खत्म करने की संभावित घोषणा पर चर्चा चल रही है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का विस्तार इस बात का संकेत दे रहा है कि संघर्ष आगे भी जारी रह सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Trump के सामने युद्ध खत्म करने का विकल्प&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिपोर्ट के अनुसार Trump ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ इस बात पर चर्चा की है कि क्या ईरान के साथ चल रहे युद्ध को औपचारिक रूप से &lsquo;समाप्त&rsquo; घोषित किया जाए। माना जा रहा है कि मध्यावधि चुनावों से पहले युद्ध को खत्म करने की घोषणा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकती है। Trump का आकलन है कि ईरान पर बढ़ते आर्थिक और सैन्य दबाव के कारण तेहरान अंततः अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए मजबूर हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने पिछले सप्ताह Operation Economic Outcast शुरू किया। इसके तहत ईरान की तेल आपूर्ति, शिपिंग, एविएशन और डिजिटल एसेट्स जैसी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। ईरान पर अमेरिकी निगरानी को लेकर Trump ने दावा किया कि अमेरिका तेहरान की गतिविधियों पर बेहद करीबी नजर रख रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Pentagon ने क्यों बढ़ाई West Asia में तैनाती?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;युद्ध खत्म करने की संभावित चर्चा के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग की गतिविधियां बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Defence Secretary Pete Hegseth ने West Asia में अमेरिकी सैन्य तैनाती को चुपचाप बढ़ाया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसका एक उद्देश्य राष्ट्रपति को सैन्य और कूटनीतिक दोनों विकल्प उपलब्ध कराना माना जा रहा है। यानी Washington एक साथ दो रास्ते खुले रखना चाहता है&mdash;एक तरफ संघर्ष को समाप्त करने का विकल्प और दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने की क्षमता। अमेरिकी अधिकारियों के बीच यह भी आशंका है कि मौजूदा तनाव अगले साल तक खिंच सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ईरान में नए अमेरिकी हमले&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;तनाव के बीच मंगलवार को एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई हुई। United States Central Command यानी CENTCOM ने बुधवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कई ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए। इसके बाद ईरान की ओर से भी Gulf region में अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई। ईरानी अधिकारियों के अनुसार अमेरिकी हमलों के इस चरण में 18 लोगों की मौत हुई, जबकि 142 लोग घायल हुए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Strait of Hormuz में बढ़ी अमेरिकी सक्रियता&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बीच Strait of Hormuz को लेकर भी अमेरिका की गतिविधियां बढ़ी हैं। CNN को अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि Washington ने मंगलवार को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले 40 commercial ships को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया। बताया गया कि यह इस संघर्ष के दौरान एक अभियान में सुरक्षित कराए गए commercial vessels की सबसे बड़ी संख्या थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी सेना ने Strait of Hormuz के आसपास ईरान के करीब 60 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। इनमें air-defence installations, radar systems, maritime infrastructure, mine-laying facilities और communication systems शामिल बताए गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lsquo;War End&rsquo; और सैन्य विस्तार का विरोधाभास&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ईरान संघर्ष को लेकर अमेरिका की मौजूदा रणनीति में सबसे बड़ा विरोधाभास यही दिखाई दे रहा है। एक तरफ Trump युद्ध को &lsquo;समाप्त&rsquo; घोषित करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ Pentagon सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है और अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखे हुए है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इससे संकेत मिलता है कि Washington फिलहाल किसी एक रास्ते पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहता। सैन्य दबाव बनाए रखते हुए कूटनीतिक और राजनीतिक विकल्पों को भी खुला रखने की रणनीति अपनाई जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Trump वास्तव में Iran War को समाप्त घोषित करेंगे या West Asia में बढ़ती सैन्य तैनाती संघर्ष के एक और लंबे चरण की शुरुआत साबित होगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/trump-iran-war-over-pentagon-troop-deployment-centcom-strikes-40-ships-articleshow-cg521f3"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[New York AI Ban: 6 लाख छात्रों के लिए AI बंद...क्या बच्चों को AI से दूर रखना सही फैसला?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/new-york-ai-ban-schools-students-ai-use-measures-mayor-zohran-mamdani-decision-articleshow-wv308mr</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 08:02:02 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;New York AI Ban के तहत पब्लिक स्कूलों में छात्रों के AI इस्तेमाल पर एक साल की रोक लगी है। करीब 6 लाख छात्रों पर असर होगा। जानिए मेयर ज़ोहरान ममदानी के फैसले की वजह और शिक्षकों को मिली AI की छूट।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;New York: &lt;/strong&gt;न्यूयॉर्क शहर के पब्लिक स्कूलों में छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। शहर के अधिकारियों ने एलिमेंट्री और मिडिल स्कूलों में छात्रों के AI इस्तेमाल पर एक साल की रोक लगाने की घोषणा की है। प्रशासन का कहना है कि इस दौरान क्लासरूम में नई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट गाइडलाइंस तैयार की जाएंगी। यह फैसला अमेरिका के सबसे बड़े स्कूल डिस्ट्रिक्ट में लिया गया है। इसे देश में AI को लेकर अब तक उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है। लॉस एंजिल्स समेत कुछ दूसरे स्कूल डिस्ट्रिक्ट भी अपनी मौजूदा AI नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;New York AI Ban: करीब 40 एजुकेशनल AI टूल्स पर रोक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि न्यूयॉर्क शहर के क्लासरूम में फिलहाल इस्तेमाल किए जा रहे करीब 40 एजुकेशनल टूल्स को बंद किया जाएगा। ममदानी ने इस फैसले के पीछे बच्चों की पढ़ाई में मानवीय जुड़ाव को अहम बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए टीचरों के साथ-साथ इंसानी संपर्क की भी जरूरत होती है। उनके मुताबिक, छात्रों को अपने साथियों के साथ कौशल विकसित करने, शिक्षकों के साथ रिश्ते बनाने और कठिन समस्याओं को खुद हल करने का मौका मिलना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;New York City Mayor Zohran Mamdani said children need their teachers and human connection in order to learn and grow, as he announced a one-year ban on generative AI for students in preschool through eighth grade starting this school year pic.twitter.com/wFeyxj7Kzh&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Reuters (@Reuters) September 2, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;AI in Schools: 6 लाख छात्रों पर पड़ेगा असर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नई नीति का प्रभाव आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले करीब 6 लाख पब्लिक स्कूल छात्रों पर पड़ेगा। हालांकि, हाई स्कूल के छात्रों के लिए कुछ परिस्थितियों में AI के इस्तेमाल की अनुमति जारी रहेगी। शहर की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, AI का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म नहीं किया जा रहा है। टीचरों को लेसन प्लान तैयार करने, शेड्यूलिंग और इसी तरह के प्रशासनिक या शैक्षणिक कामों में AI टूल्स इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;Google, Anthropic और Microsoft से भी जुड़ा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;AI सेक्टर की प्रमुख कंपनियों Google, Anthropic और Microsoft से इस फैसले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक तत्काल कोई जवाब नहीं मिला। न्यूयॉर्क का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी स्कूलों में AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर बहस तेज है। एक तरफ AI को पढ़ाई को आसान और व्यक्तिगत बनाने वाला माध्यम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्रों की सोचने-समझने की क्षमता, स्वतंत्र समस्या समाधान और शिक्षक-छात्र संबंधों पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;ChatGPT पर पहले भी लगा था प्रतिबंध&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;न्यूयॉर्क शहर के पब्लिक स्कूलों ने ChatGPT लॉन्च होने के तुरंत बाद 2022 में उस पर अस्थायी रोक लगाई थी। बाद में यह प्रतिबंध हटा दिया गया था। इसके बाद स्कूल सिस्टम में एक विशेष AI आधारित टीचिंग असिस्टेंट को शामिल किया गया। इस बारे में जानकारी ChatGPT की निर्माता कंपनी OpenAI की आंशिक मालिक Microsoft की ओर से दी गई थी। अब शहर ने एक बार फिर छात्रों के AI इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। फिलहाल एक साल की रोक के दौरान नई नीति और गाइडलाइंस तैयार करने पर जोर रहेगा, जबकि शिक्षकों के लिए AI के सीमित इस्तेमाल का रास्ता खुला रहेगा।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Green Mobility: गडकरी से मिलीं नीदरलैंड्स की राजदूत, ग्रीन मोबिलिटी से एनर्जी ट्रांजिशन तक बनी रणनीति]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nitin-gadkari-netherlands-ambassador-marisa-gerards-green-mobility-energy-transition-articleshow-bvmqixc</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 07:38:57 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nitin Gadkari: &lt;/strong&gt;केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा जेरार्ड्स से मुलाकात की। इस बैठक में सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन मोबिलिटी और एनर्जी ट्रांजिशन जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के इस्तेमाल पर जोर दिया।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-external,imgname-image-2435ffa6-0f2c-4337-833f-4c3a39e8fd1b.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Netherlands Ambassador India: &lt;/strong&gt;केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में भारत में नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा जेरार्ड्स से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच भारत-नीदरलैंड्स के सहयोग को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। चर्चा का मुख्य फोकस सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन मोबिलिटी और एनर्जी ट्रांजिशन जैसे अहम मुद्दों पर रहा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि यह मुलाकात बुधवार को हुई। उन्होंने लिखा, &quot;नीदरलैंड्स की राजदूत महामहिम सुश्री मारिसा जेरार्ड्स ने आज नई दिल्ली में मुलाकात की। बैठक में भारत-नीदरलैंड्स के बीच सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन मोबिलिटी और एनर्जी ट्रांजिशन में सहयोग बढ़ाने पर अच्छी चर्चा हुई। साथ ही, द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने और सहयोग के नए रास्ते बनाने के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी बताया कि गडकरी और जेरार्ड्स के बीच ग्रीन मोबिलिटी, एनर्जी ट्रांजिशन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग पर बात हुई। सरकार की नोडल एजेंसी PIB ने X पर लिखा, &quot;नीदरलैंड्स की राजदूत महामहिम सुश्री मारिसा जेरार्ड्स ने केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी से नई दिल्ली में मुलाकात की। चर्चा भारत-नीदरलैंड्स के बीच ग्रीन मोबिलिटी, एनर्जी ट्रांजिशन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग पर केंद्रित रही।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;राजदूत जेरार्ड्स ने कृषि और चुनावी सहयोग पर भी की बात&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इससे पहले मंगलवार को, जेरार्ड्स ने 27 अगस्त को कृषि भवन में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&amp;amp;FW) के सचिव आतिश चंद्रा से भी मुलाकात की थी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक X पोस्ट के मुताबिक, इस बातचीत का मकसद मौजूदा सहयोग को मजबूत करना और कृषि व उससे जुड़े क्षेत्रों में जुड़ाव के अवसरों को तलाशना था। पोस्ट में लिखा गया, &quot;भारत-नीदरलैंड्स के बीच कृषि में सहयोग मजबूत हो रहा है! नीदरलैंड्स की राजदूत सुश्री मारिसा जेरार्ड्स ने 27 अगस्त 2026 को कृषि भवन, नई दिल्ली में DA&amp;amp;FW के सचिव श्री आतिश चंद्रा से शिष्टाचार मुलाकात की। चर्चा मौजूदा सहयोग को मजबूत करने और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में गहरे जुड़ाव के अवसरों पर केंद्रित रही।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जेरार्ड्स ने मुख्य चुनाव आयुक्त और इंटरनेशनल IDEA की सदस्य देशों की परिषद के अध्यक्ष ज्ञानेश कुमार से भी मुलाकात की। यह मुलाकात चुनावी और लोकतांत्रिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के प्रयासों का हिस्सा थी। भारत के चुनाव आयोग (ECI) के अनुसार, कुमार और जेरार्ड्स ने IICDEM 2026 में तय किए गए विजन के अनुरूप, लोकतांत्रिक सहयोग को मजबूत करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। चुनाव आयोग ने X पर एक पोस्ट में कहा, &ldquo;दोनों पक्षों ने IICDEM 2026 में निर्धारित विजन के अनुरूप लोकतांत्रिक सहयोग को मजबूत करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। वे चुनाव प्रबंधन और चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर सहयोग को गहरा करने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए।&rdquo;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Bart De Wever: मोदी के बुलावे पर भारत पहुंचे बेल्जियम PM, रिश्तों में नई उड़ान की तैयारी!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/belgian-pm-bart-de-wever-in-india-to-deepen-trade-and-defence-ties-articleshow-dv9vwwl</link>
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            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 07:32:44 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;Bart De Wever India Visit: बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर तीन दिन के भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। इस दौरे में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और व्यापार, निवेश, रक्षा, टेक्नोलॉजी जैसे कई मुद्दों पर रिश्तों को और मजबूत करने पर बात करेंगे।&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Belgium Prime Minister India Visit: &lt;/strong&gt;बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर 2 से 4 सितंबर तक भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। इस यात्रा का मकसद व्यापार, निवेश, रक्षा, टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में उनके आने की जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा से भारत और बेल्जियम के बीच करीबी और बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने का मौका मिलेगा। एयरपोर्ट पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में लिखा, &quot;भारत में आपका स्वागत है! बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर का नई दिल्ली में आधिकारिक यात्रा पर आगमन पर हार्दिक स्वागत है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उनका स्वागत किया। यह यात्रा भारत-बेल्जियम की करीबी और बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने का एक अवसर है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;उच्च-स्तरीय राजनयिक मुलाकातें&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;फरवरी 2025 में पद संभालने वाले डी वेवर का प्रधानमंत्री के तौर पर यह पहला भारत दौरा है। खास बात यह है कि पिछले दो दशकों में किसी बेल्जियम के प्रधानमंत्री का यह पहला भारत दौरा है। उनके साथ बेल्जियम के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकन के अलावा अधिकारियों और व्यापार जगत के नेताओं का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें बेल्जियम के रक्षा उद्योग के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अपने दौरे के दौरान, डी वेवर 3 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। उम्मीद है कि दोनों नेता भारत-बेल्जियम संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम के साथ-साथ आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बेल्जियम के प्रधानमंत्री भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक बिजनेस इवेंट में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में एक मुख्य भाषण भी देंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;नई दिल्ली में अपनी बैठकों के बाद, डी वेवर 4 सितंबर को मुंबई जाएंगे, जहां वे हीरा, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों के हितधारकों से मिलेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हालिया गति को आगे बढ़ाना&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-बेल्जियम संबंधों में तेजी आई है। इससे पहले मार्च 2025 में राजकुमारी एस्ट्रिड के नेतृत्व में एक बेल्जियम आर्थिक मिशन भारत आया था, जिसमें कंपनियों, वाणिज्य मंडलों, शिक्षाविदों और सार्वजनिक संस्थानों के 338 प्रतिभागी शामिल हुए थे और 38 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके अलावा, 15 जुलाई, 2026 को ब्रुसेल्स में पहली भारत-बेल्जियम मंत्रिस्तरीय सामरिक वार्ता भी हुई थी, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर और बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मैक्सिम प्रीवोट ने की थी। यह नई सामरिक वार्ता द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत और बेल्जियम के ऐतिहासिक संबंध तीन शताब्दियों से भी ज्यादा पुराने हैं। बेल्जियम ने सितंबर 1947 में स्वतंत्र भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। बेल्जियम यूरोप में भारत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार है। 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 13.01 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। हीरे का व्यापार द्विपक्षीय कॉमर्स का एक प्रमुख हिस्सा बना हुआ है, जिसमें एंटवर्प एक वैश्विक हीरा केंद्र के रूप में काम करता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;बेल्जियम भारत में निवेश का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है। अप्रैल 2000 और दिसंबर 2025 के बीच बेल्जियम से लगभग 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का FDI आया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सहयोग के बढ़ते क्षेत्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;व्यापार और निवेश के अलावा, दोनों देश रक्षा और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी, बंदरगाह और समुद्री सहयोग, और लोगों से लोगों के बीच संबंधों में सहयोग का विस्तार करना चाहते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग भी साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ है। मार्च 2023 में, नैनीताल में ARIES में दुनिया के सबसे बड़े लिक्विड मिरर टेलीस्कोप में से एक का उद्घाटन किया गया, जिसे बेल्जियम की अंतरिक्ष कंपनी AMOS की भागीदारी से बनाया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ प्रौद्योगिकी में, बेल्जियम की कंपनी जॉन कॉकरिल काकीनाडा में एक बड़ी इलेक्ट्रोलाइज़र उत्पादन सुविधा का निर्माण कर रही है, जिसकी अनुमानित क्षमता 2 GW है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;समुद्री और रक्षा सहयोग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एक प्रमुख यूरोपीय समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में बेल्जियम की स्थिति बंदरगाहों, शिपिंग और सप्लाई चेन में अधिक सहयोग के अवसर भी प्रदान करती है। भारत के जहाजरानी मंत्रालय और एंटवर्प पोर्ट अथॉरिटी के बीच एक समझौता ज्ञापन भारतीय बंदरगाह अधिकारियों के प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;रक्षा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों के एक नए आयाम के रूप में उभरा है। नई दिल्ली में बेल्जियम द्वारा एक रक्षा अताशे की नियुक्ति इस क्षेत्र में जुड़ाव को गहरा करने के इरादे को दर्शाती है। डी वेवर की यात्रा के दौरान बेल्जियम के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री और बेल्जियम के रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति से भारतीय और बेल्जियम के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिलने की उम्मीद है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;दोनों देश आतंकवाद और सुरक्षा पर भी सहयोग करते हैं और आतंकवाद व उग्रवाद से निपटने के लिए प्रतिबद्धता साझा करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में बेल्जियम में एक विनाशकारी आतंकवादी हमले के तुरंत बाद ब्रुसेल्स का दौरा किया था। बेल्जियम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का भी समर्थन करता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शिक्षा और अकादमिक संबंधों का भी लगातार विस्तार हो रहा है, वर्तमान में लगभग 1,131 भारतीय छात्र बेल्जियम में पढ़ रहे हैं। भारतीय संस्थानों और केयू ल्यूवेन, गेन्ट यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प, हैसेल्ट यूनिवर्सिटी और व्रिजे यूनिवर्सिटिट ब्रसेल जैसी बेल्जियम की यूनिवर्सिटियों के बीच साझेदारी मौजूद है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारतीय मूल के लगभग 35,000 लोगों का भारतीय डायस्पोरा दोनों देशों के बीच एक और महत्वपूर्ण सेतु है। योग, संगीत और नृत्य सहित भारतीय संस्कृति बेल्जियम में काफी लोकप्रिय है, जिससे सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत बने हुए हैं। एंटवर्प और ल्यूवेन में क्रमशः महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की मूर्तियां और प्रतिमाएं इन सांस्कृतिक संबंधों को और दर्शाती हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;प्रथम विश्व युद्ध की साझा विरासत भारत-बेल्जियम संबंधों का एक और महत्वपूर्ण आयाम है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ़्लैंडर्स में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, और य्प्रेस में मेनिन गेट पर भारतीय स्मारक स्तंभ उनके योगदान और बलिदान का सम्मान करता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;डी वेवर की यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों में हालिया गति को आगे बढ़ाने और भारत-बेल्जियम सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह भारत-यूरोपीय संघ और भारत-यूरोप संबंधों को मजबूत करने में बेल्जियम की भूमिका को और गहरा करेगा।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Bimla Kumari</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/belgian-pm-bart-de-wever-in-india-to-deepen-trade-and-defence-ties-articleshow-dv9vwwl"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[युद्ध, बाढ़, टैरिफ और क्रिकेट...Iran-US War से Ukraine तक, भारत पर भी संकट? जानिए 10 बड़ी खबरें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/news-pulse-india-world-september-3-2026-iran-us-war-ukraine-nepal-india-tariff-isro-pakistan-cricket-articleshow-vbisbzd</link>
            <guid isPermaLink="true">https://hindi.asianetnews.com/news/news-pulse-india-world-september-3-2026-iran-us-war-ukraine-nepal-india-tariff-isro-pakistan-cricket-articleshow-vbisbzd</guid>
            <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 06:53:18 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;News Pulse India World: ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, कीव हमले में भारतीय की मौत और नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही। भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, पाकिस्तान में मंदिर विध्वंस पर विरोध, ISRO और BCCI से भी अहम अपडेट सामने आए। आज की सबसे बड़ी खबर कौन-सी है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m1jdk2d91jt5s0m6q9rxpc91,imgname-news-pulse-india-world-september-3-2026-iran-us-war-ukraine-nepal-india-tariff-isro-pakistan-cricket-1788398373289.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नमस्कार! &lt;/strong&gt;टॉप 10 मॉर्निंग न्यूज़: 03 सितंबर, 2026, गुरूवार को दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है, जहां मध्य पूर्व से लेकर पूर्वी यूरोप तक युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। वहीं, जलवायु आपदाएं और नए व्यापारिक प्रतिबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला रहे हैं। इन सबके बीच, क्या दुनिया एक और बड़े युद्ध की कगार पर खड़ी है, या फिर शांति का कोई रास्ता निकलेगा?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;1. मध्य पूर्व में महायुद्ध की दस्तक?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;IRGC के ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद होर्मुज की जलडमरूमध्य के पास भयंकर तनाव फैल गया है। केरमानशाह में 5 सैन्यकर्मियों की मौत के बीच ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन के शांति प्रस्तावों पर युद्ध के काले बादल भारी पड़ते दिख रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;According to a release from U.S. Central Command (CENTCOM), they have completed the wave of strikes against Iran, with air defense sites, radar systems, maritime assets and facilities, mine laying capabilities, and communications sites all being targeted in the strikes. Per the&hellip; pic.twitter.com/RRQDZoYltZ&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Trumpusa1 (@Trumpusa1A1) September 3, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;2. कीव पर भीषण हमला: भारतीय नागरिक की मौत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कीव में रात भर हुए रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों में 12 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। जवाब में यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने रूसी हवाई क्षेत्र को नागरिक उड़ानों के लिए पूरी तरह असुरक्षित बनाने की सख्त चेतावनी दी है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;3. नेपाल में कुदरत का कहर: 1,127 मौतें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 1,127 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बचाव टीमों ने जलप्रलय के बीच फंसे 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, जबकि नेपाल सरकार अब महाशक्तियों से सीधे पर्यावरणीय मुआवजे की मांग कर रही है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;TITLE: THE HIMALAYAN INFORMATION CURTAIN: HOW BEIJING IS CENSORING A HUMANITARIAN TRAGEDYAs the combined death toll from catastrophic flash floods along the Tibet-Nepal border surges past 919&mdash;with more than 4,700 people still officially missing&mdash;a second crisis has emerged. The&hellip; pic.twitter.com/RB3AgH7wci&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; The Geo-Political Arena (@GPoliticalArena) September 1, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;4. रूसी एयरस्पेस पर वैश्विक प्रतिबंध की मांग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिगा ने संयुक्त राष्ट्र की विमानन एजेंसी से रूसी हवाई क्षेत्र को 'अत्यंत असुरक्षित' घोषित करने की अपील की है। यूक्रेन ने इसे हवाई सुरक्षा का मुद्दा बताया, तो वहीं मॉस्को ने इस मांग को सीधे तौर पर राज्य-समर्थित आतंकवाद करार दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;5. बीजिंग का नया दांव: शी जिनपिंग का मिस्र दौरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;एक दशक बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिस्र की ऐतिहासिक यात्रा पर काहिरा पहुंचे हैं। मध्य पूर्व में जारी भारी उथल-पुथल के बीच यह दौरा पश्चिमी प्रभाव को दरकिनार कर चीन और मिस्र के सैन्य व आर्थिक रिश्तों को एक नया रूप देने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;6. अंतरिक्ष में भारत की नई 'आंख': EOS-05 तैयार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;श्रीहरिकोटा से इसरो के अति-महत्वपूर्ण EOS-05 उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह अत्याधुनिक सैटेलाइट भारत की रिमोट सेंसिंग, मौसम निगरानी और आपदा प्रबंधन क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को भी अभूतपूर्व मजबूती देगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;7. अमेरिका का सख्त व्यापारिक पैंतरा: भारी शुल्क की धमकी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50% तक का भारी आयात शुल्क लगाने की चेतावनी से व्यापार जगत में हड़कंप मच गया है। शुक्रवार की समयसीमा से ठीक पहले, भारी आर्थिक नुकसान से बचने के लिए दोनों देशों के राजनयिक पर्दे के पीछे कूटनीतिक समाधान तलाश रहे हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;8. उत्तर भारत में मॉनसून का तांडव: स्कूल बंद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;लगातार मूसलाधार बारिश और भारी जलभराव के चलते दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में स्कूलों को तुरंत बंद करने के आदेश दिए गए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने 24 घंटों का रेड अलर्ट जारी करते हुए जिला प्रशासन को आपात स्थिति से निपटने के पूर्ण अधिकार दिए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;9. पाकिस्तान में मंदिर निर्माण पर बवाल: भारत सख्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 100 साल पुराने ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को गिराए जाने पर भारत ने सख्त कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने इसे अत्यंत निंदनीय और असहिष्णु कृत्य बताते हुए पाकिस्तान से अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; Just IN &amp;nbsp;India has CONDEMNED the reported DESTRUCTION of a century-old Hindu temple in Pakistan.️ &ldquo;We unequivocally CONDEMN this reprehensible act of VANDALISM against a century-old MINORITY place of WORSHIP.&rdquo; pic.twitter.com/Yvs6tayuWH&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Megh Updates &trade; (@MeghUpdates) September 2, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;10. टीम इंडिया में इमरजेंसी समीक्षा: BCCI की बड़ी बैठक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;व्यस्त अंतरराष्ट्रीय सत्र से ठीक पहले BCCI ने मुख्य कोच गौतम गंभीर, चयनकर्ता अजीत अगरकर और VVS लक्ष्मण को अचानक आपात बैठक के लिए तलब किया है। रणनीतिक बदलावों, आंतरिक समीक्षा और खिलाड़ियों की कार्यभार नीति पर इस बैठक में बेहद कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/news-pulse-india-world-september-3-2026-iran-us-war-ukraine-nepal-india-tariff-isro-pakistan-cricket-articleshow-vbisbzd"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Nepal Floods: रुपया-पैसा नहीं नेपाल ने मांगा अनोखा मुआवजा! इन 3 देशों के सामने रखी बड़ी डिमांड]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-climate-compensation-bhotekoshi-flood-loss-and-damage-india-america-china-greenhouse-gas-emissions-glacier-melt-articleshow-gxvs8go</link>
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            <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 19:54:35 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;भोटेकोशी बाढ़ में 1,100 से ज्यादा मौतों के बाद नेपाल ने भारत समेत दुनिया के कई बड़े देशों से मुआवजे के रूप में एक अलग ही डिमांड रखी है। नेपाल का कहना है कि हमने वो चीज भोगी, जिसके हम जिम्मेदार नहीं हैं।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m13sg8dqftwwgeshh12frpct,imgname-nepal-flood-latest-pic-1787907547575.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ में अब तक 1100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5000 से ज्यादा लोग लापता हैं। इस बाढ़ से नेपाल को उसकी कुल अर्थव्यवस्था के लगभग दसवें हिस्से के बराबर नुकसान झेलना पड़ा है। इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए नेपाल ने अब दुनिया के तीन बड़े मुल्कों से मुआवजे की मांग रखी है। हालांकि, सबसे हैरानी वाली बात ये है कि यह मुआवजा कोई रुपए-पैसे को लेकर नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;क्या है मुआवजे में नेपाल की अनोखी डिमांड?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल ने जलवायु परिवर्तन से हुए नुकसान के लिए अमेरिका, भारत और चीन समेत बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों से &lsquo;क्लाइमेट लॉस एंड डैमेज&rsquo; का मुआवजा मांगा है। नेपाल का कहना है कि वह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बहुत कम योगदान देता है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के गंभीर असर का सामना कर रहा है। यह मांग ऐसे समय उठाई गई है, जब करीब एक सप्ताह पहले भोटेकोशी नदी में आई अचानक और जानलेवा बाढ़ ने नेपाल के कम से कम तीन जिलों के कई गांवों को तबाह कर दिया था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;तिब्बत-नेपाल सीमा से आई विनाशकारी बाढ़&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पिछले सप्ताह तिब्बत-नेपाल सीमा के ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फीले पानी, चट्टानों और मलबे की एक विशाल लहर नीचे की ओर आई। इसके बाद भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई और इसने रास्ते में आने वाले कई गांवों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल अब इस आपदा को जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान और क्षति (Loss and Damage) के मुद्दे को मजबूती से उठाने की तैयारी कर रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल ने कहा- मदद नहीं, नैतिक जिम्मेदारी समझी जाए&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद हासिल करने के लिए नेपाल ने कूटनीतिक कोशिशें शुरू कर दी हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि आपदा के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता को सिर्फ &lsquo;दान&rsquo; के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक इसे नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। खनाल ने कांतिपुर टीवी को दिए एक इंटरव्यू में नेपाली भाषा में यह बात कही। इंटरव्यू के कुछ अंश &lsquo;द काठमांडू पोस्ट&rsquo; और समाचार एजेंसी PTI ने पब्लिश किए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल का तर्क- कम उत्सर्जन, फिर भी जलवायु संकट की बड़ी कीमत&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्री ने कहा कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बहुत कम है। इसके बावजूद देश ग्लोबल वार्मिंग के गंभीर परिणाम झेल रहा है। इनमें तेजी से पिघलते ग्लेशियर और हिमालयी क्षेत्रों में आने वाली विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं। PTI द्वारा प्रकाशित इंटरव्यू के अंशों के अनुसार, खनाल ने कहा कि नेपाल ऐसे वैश्विक संकट की भारी कीमत चुका रहा है, जिसे उसने पैदा नहीं किया। उन्होंने ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और पहाड़ों में आने वाली विनाशकारी बाढ़ जैसी घटनाओं को वैश्विक जलवायु परिवर्तन से जोड़ा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;चीन, अमेरिका और भारत का किया जिक्र&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्री खनाल ने ग्रीनहाउस गैसों के बड़े उत्सर्जक देशों के रूप में चीन, अमेरिका और भारत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन दुनिया में सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाला देश है, जबकि अमेरिका और भारत भी बड़े उत्सर्जकों में शामिल हैं। नेपाल का तर्क है कि जिन देशों का ऐतिहासिक और वर्तमान उत्सर्जन ज्यादा रहा है, उन्हें जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव झेल रहे कमजोर देशों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;हिमालयी ग्लेशियर खत्म हुए तो दक्षिण एशिया पर असर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;खनाल ने हिमालयी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के खतरे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर हिमालय के ग्लेशियर खत्म हो जाते हैं तो दक्षिण एशिया के दो अरब से ज्यादा लोगों की पानी की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इनमें गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर बड़ी आबादी शामिल है। नेपाल का कहना है कि वह सिर्फ अपने देश के लिए आवाज नहीं उठा रहा, बल्कि दक्षिण एशियाई सभ्यता के अस्तित्व से जुड़े सवाल को भी सामने रख रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भारत का जलवायु समानता पर क्या रुख है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत लंबे समय से जलवायु समानता (Climate Equity) पर जोर देता रहा है। उसका कहना है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी जिम्मेदारियां तय करते समय देशों के ऐतिहासिक उत्सर्जन, विकास की जरूरतों और उनकी क्षमता के बीच अंतर को ध्यान में रखा जाना चाहिए। भारत प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम होने का मुद्दा भी उठाता रहा है। उसका तर्क है कि विकसित देशों ने औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया में वैश्विक कार्बन बजट का बड़ा हिस्सा पहले ही इस्तेमाल कर लिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल ने &lsquo;Loss and Damage Fund&rsquo; से मांगी तत्काल मदद&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lsquo;द काठमांडू पोस्ट&rsquo; की रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी बेसिन में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद नेपाल ने &lsquo;लॉस एंड डैमेज&rsquo; से जुड़े फंड के बोर्ड से औपचारिक रूप से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। यह व्यवस्था 2022 में COP27 में बनाई गई थी और COP28 में इसे लागू किया गया था। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कारण कमजोर देशों को होने वाले नुकसान और क्षति से निपटने में वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Ganesh Mishra</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-climate-compensation-bhotekoshi-flood-loss-and-damage-india-america-china-greenhouse-gas-emissions-glacier-melt-articleshow-gxvs8go"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Nepal Flood: अपनों की राख तक नहीं मिली! 4800 परिवारों पर अब टूट सकता है नया संकट]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/nepal-flood-mass-graves-dna-sampling-unidentified-bodies-missing-families-crisis-articleshow-qugast7</link>
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            <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 17:32:55 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal Flood Crisis: &lt;/strong&gt;नेपाल में शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। जानिए 'मास ग्रेव्स' के पीछे की मजबूरी और 4800 लापता परिवारों का नया कानूनी संकट क्या आ सकता है।&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01m15yjcbtjp6ym8f91a3tmcv6,imgname-nepal-flood-2026-1787979968889.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Nepal Missing People Crisis: &lt;/strong&gt;नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी। किसी ने अपना घर खोया, किसी ने रोजी-रोटी, तो कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें आज तक यह पता नहीं कि उनके अपने जिंदा हैं या नहीं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 1127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4800 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा दर्द उन परिवारों का है, जिन्हें न अपने परिजन का शव मिला और न ही अंतिम संस्कार की आखिरी रस्म पूरी करने का मौका। दूसरी तरफ, बाढ़ में मिले कई शवों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उनकी पहचान करना मुश्किल है। ऐसे में नेपाल प्रशासन अज्ञात शवों को दफना रहा है, ताकि बाद में DNA जांच के जरिए उनकी पहचान की जा सके। यानी बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी हजारों परिवारों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल में जलाने की बजाय दफनाएं क्यों जा रहे शव?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल के अस्पतालों और मुर्दाघरों में अब पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। राहत दलों को मलबे और कीचड़ से जो शव मिल रहे हैं, उनकी हालत बेहद दर्दनाक है। पानी और मलबे में कई दिनों तक दबे रहने के कारण ज्यादातर शव पूरी तरह फूल चुके हैं और तेजी से खराब हो रहे हैं। किसी का चेहरा देखकर पहचानना अब नामुमकिन हो चुका है। अगर इन अज्ञात शवों को जला दिया जाए, तो उनकी पहचान हमेशा के लिए मिट जाएगी। इसी मजबूरी के चलते प्रशासन शवों का दाह संस्कार करने के बजाय उन्हें सामूहिक कब्रों में दफना रहा है। दफनाने से पहले हर शव का डीएनए (DNA) सैंपल सुरक्षित रखा जा रहा है और कब्रों का बाकायदा नंबर दर्ज हो रहा है। इसका मकसद है कि अगर कभी भी कोई परिवार अपने लापता सदस्य को ढूंढ़ने आए, तो डीएनए मैच कराकर उन्हें अपने अपने की पुष्टि की जा सके।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल बाढ़ में लापता 4800 परिवारों के सामने कौन-सा नया संकट?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;न शव मिला, न डेथ सर्टिफिकेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कानूनी नियम के अनुसार, जब तक शव नहीं मिलता या उसकी कानूनी पहचान नहीं होती, तब तक डेथ सर्टिफिकेट (Death Certificate) जारी नहीं हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अटक सकते हैं बैंक खाते और जमा पूंजी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;जिन परिवारों के कमाने वाले सदस्य लापता हैं, उनके बैंक अकाउंट फ्रीज हो सकते हैं। परिवार को अपनी ही मेहनत की गाढ़ी कमाई निकालने में परेशानी आ सकती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मुआवजा और इंश्योरेंस करना पड़ सकता है लंबा इंतजार&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;सरकार की तरफ से मिलने वाली राहत राशि हो या जीवन बीमा (Life Insurance) का क्लेम, बिना डेथ सर्टिफिकेट के कोई भी कागजी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकती। ऐसे में अगर सरकार कोई रास्ता नहीं निकालती, तो इन परिवारों के सामने नया संकट आ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सुरंगों में दबी उम्मीदें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की गहरी सुरंगों में फंसे सैकड़ों कामगारों के परिजन आज भी इस पशोपेश में हैं कि वे जिंदा बचने की उम्मीद करें या उनके अंतिम संस्कार की रस्मों की तैयारी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल में डेथ सर्टिफिकेट का कानूनी नियम क्या कहता है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल में जन्म, मृत्यु और अन्य व्यक्तिगत घटना (Mrityu Darta Praman Patra) रजिस्ट्रेशन एक्ट 2033 (1976) अधिनियम की धारा 4 और 5 और 'स्थानीय सरकार संचालन ऐन 2074' किसी भी व्यक्ति की मौत की आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराना अनिवार्य है। इस नियम के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की मौत के 35 दिनों के अंदर स्थानीय वार्ड कार्यालय से 'मृत्यु दर्ता प्रमाण पत्र' बनवाना अनिवार्य होता है। इसके लिए मृतक का नागरिकता प्रमाण पत्र और पुलिस या अस्पताल की रिपोर्ट जरूरी होती है। बिना इस प्रमाण पत्र के मुलुकी देवानी संहिता 2074 के तहत न तो बैंक से पैसे निकल सकते हैं और न ही जमीन या बीमा क्लेम परिजनों को मिल सकता है। यही वजह है कि मलबे में लापता 4,800 लोगों के परिवारों के सामने आर्थिक और कानूनी तौर पर हाथ बंध जाने का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;नेपाल बाढ़ में भारत ने क्या मदद की?&lt;/h2&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;इस भयानक मानवीय त्रासदी में भारत अपने पड़ोसी देश के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। भारत सरकार अब तक राहत सामग्री की 5 खेप नेपाल भेज चुकी है। इनके जरिए करीब 68.5 टन जरूरी सामान, दवाइयां, टेंट और राशन नेपाल पहुंचाया गया है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;मलबे और बंद सुरंगों में फंसे लोगों को तलाशने के लिए 11 सदस्यीय स्पेशल रेस्क्यू टीम भी आधुनिक लाइफ-डिटेक्टिंग उपकरणों के साथ ग्राउंड पर दिन-रात जुटी हुई है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;दूसरी ओर गंडक (नारायणी) नदी में बहकर उत्तर प्रदेश की सीमा में आ रहे शवों को भी भारतीय प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ नेपाल पुलिस को सौंप रहा है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;नेपाल में क्या सिस्टम की लापरवाही से आया बाढ़?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में माना है कि हिमालय में बढ़ता तापमान (1.8 डिग्री का उछाल) और तेजी से पिघलते ग्लेशियर इस आपदा की सबसे बड़ी जड़ हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का दर्द यह भी है कि ग्लेशियर टूटने के करीब 38 मिनट बाद अलर्ट मिला। अगर यह अलार्म कुछ मिनट पहले बज गया होता, तो शायद सैकड़ों लोग आज जिंदा होते।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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