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        <title>Asianet News Hindi</title>
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        <description><![CDATA[Hindi News (हिन्दी न्यूज़): Get Latest Breaking News Headlines in Hindi. Exclusive Hindi News on Politics, Business, Bollywood, Technology, Cricket from India & World at Asianet News Hindi. हिंदी में पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें. जाने व्यापार, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल सुर्खियां और राजनीति के समाचार । लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ ।]]></description>
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            <title>Asianet News Hindi</title>
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        <lastBuildDate>Sun, 21 Jun 2026 10:35:36 +0530</lastBuildDate>
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            <title><![CDATA[पाकिस्तान में डबल ब्लास्ट: खैबर पख्तूनख्वा में धमाका से 7 की मौत, घटना के पीछे किसका हाथ?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/pakistan-khyber-pakhtunkhwa-bannu-twin-blasts-ied-attack-7-killed-terrorism-security-crisis/articleshow-25bmgpc</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:55:50 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या खैबर पख्तूनख्वा में दोहरे धमाके किसी बड़े आतंकी नेटवर्क की साजिश हैं? 7 मौतों ने सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। IED ब्लास्ट के बाद दूसरा हमला क्यों हुआ? बचावकर्मियों को निशाना बनाने वाली रणनीति ने बढ़ाई चिंता। पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा का नया चेहरा? 128 आतंकी हमलों के बाद फिर दहला पाकिस्तान! क्या सुरक्षा व्यवस्था नाकाम हो रही है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvj5fbg8tmwa9whb9sx8ctdj,imgname-pakistan-khyber-pakhtunkhwa-bannu-twin-blasts-ied-attack-7-killed-terrorism-security-crisis-1781947411975.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बन्नू (खैबर पख्तूनख्वा): &lt;/strong&gt;पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा से शनिवार को एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बन्नू जिले में सड़क किनारे हुए दो सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे इलाके को कँपा दिया है। इस भयानक 'डबल ब्लास्ट' की चपेट में आने से कम से कम सात बेगुनाह लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी उग्रवादी संगठन ने इस कायरतापूर्ण कृत्य की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन धमाके की टाइमिंग और इसके पीछे की रणनीति ने सुरक्षा एजेंसियों को गहरे सस्पेंस में डाल दिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;यात्री वैन का सफर और अचानक फटा IED: पहला धमाका!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह खौफनाक वारदात बन्नू जिले के मार्का बेरा इलाके में हुई। शनिवार की सुबह एक यात्री वैन मासूम लोगों को लेकर हाथी खेल गाँव से बन्नू शहर की तरफ जा रही थी। वैन में सवार लोग अपनी धुन में सफर कर रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है। बन्नू जिला पुलिस अधिकारी (DPO) यासिर अफरीदी के मुताबिक, सड़क किनारे पहले से ही एक बेहद शक्तिशाली इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) छिपाकर रखा गया था। जैसे ही यात्री वैन उस पॉइंट पर पहुंची, एक जोरदार धमाका हुआ। वैन के परखच्चे उड़ गए और पांच लोगों ने तड़प-तड़प कर मौके पर ही दम तोड़ दिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Another cowardly attack by Indian-sponsored Afghan TTP terrorists in Khyber Pakhtunkhwa in Bannu has left 7 people dead and several others injured.Terrorists affiliated with Fitna al-Khawarij targeted civilians and soft targets in another attack in Khyber Pakhtunkhwa.Security&hellip; pic.twitter.com/uSDV7T0Ptn&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash;     (@intelscope_) June 20, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;बचाव दल को बनाया निशाना: दूसरे धमाके का खौफनाक जाल!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस घटना का सबसे डरावना और सस्पेंस से भरा पहलू पहले धमाके के कुछ ही देर बाद सामने आया। जब चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और बचाव कार्य में लगे मददगार घायल मुसाफिरों को वैन से बाहर निकालने के लिए दौड़े, ठीक उसी जगह पर एक और जोरदार धमाका हुआ। पुलिस जांचकर्ताओं के अनुसार, यह दूसरा धमाका जानबूझकर बचाव दल और इकट्ठा हुई भीड़ को निशाना बनाने के लिए 'जाल' के रूप में प्लान किया गया था। इस दूसरे आत्मघाती चक्रव्यूह ने दो और मददगारों की जान ले ली और राहत कार्य में लगा एक वाहन भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;हिंसा का बदलता खौफनाक पैटर्न और अफगानिस्तान से बढ़ता तनाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;खैबर पख्तूनख्वा में हुआ यह हमला कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में आतंकवाद की यह हिंसा अब एक बेहद चिंताजनक पैटर्न में बदल चुकी है। अकेले मई 2026 में पूरे पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों में 27% की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसमें नागरिकों की मौत के आंकड़ों में 92% का खौफनाक उछाल आया है। इसके साथ ही बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी द्वारा किए गए ट्रेन धमाके (जिसमें 24 की मौत हुई थी) और पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की सीमा के भीतर किए गए हवाई हमलों ने इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;छावनी में तब्दील हुआ बन्नू, मुख्यमंत्री ने दिए सख्त जांच के आदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;डबल ब्लास्ट के तुरंत बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे मार्का बेरा इलाके की घेराबंदी कर उसे छावनी में तब्दील कर दिया है। फॉरेंसिक टीमों ने मलबे और घटनास्थल से रासायनिक सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। इस बीच, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री ने इसे &quot;दिल दहला देने वाला&quot; बताते हुए पुलिस महानिदेशक को गहन जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि घायलों को सर्वोत्तम इलाज दिया जाए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि खुफिया तंत्र की विफलता के बीच क्या पुलिस इस खूनी साजिश के मास्टरमाइंड को बेनकाब कर पाएगी?&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[स्विट्जरलैंड में ऐन वक्त पर क्यों टली अमेरिका-ईरान की सीक्रेट शांति वार्ता?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/us-iran-talks-postponed-switzerland-lebanon-israel-conflict-ceasefire-jd-vance-middle-east-peace/articleshow-2ipdza5</link>
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            <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:40:44 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या स्विट्जरलैंड में टली US-ईरान वार्ता सिर्फ लॉजिस्टिक बहाना है, या पर्दे के पीछे बड़ा कूटनीतिक संकट छिपा है? क्या लेबनान में इज़राइली हमले और सीज़फायर विवाद ने शांति समझौते को खतरे में डाल दिया है? क्या जेडी वेंस की आलोचना US-इज़राइल रिश्तों में बढ़ती दरार का संकेत है? क्या 14-पॉइंट US-ईरान MoU टूटने की कगार पर है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;US Iran Talks:&lt;/strong&gt; मिडल ईस्ट (Middle East) में जारी भीषण बारूद और तबाही के बीच, दुनिया को अमन का रास्ता दिखाने वाली एक बेहद संवेदनशील डिप्लोमैटिक बातचीत ऐन वक्त पर पटरी से उतर गई है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को खत्म करने के लिए अभी दो दिन पहले ही एक 14-पॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर डिजिटल दस्तखत हुए थे। उम्मीद थी कि स्विट्जरलैंड के पहाड़ों पर होने वाली इस बैठक में एक पक्की शांति डील पर मुहर लग जाएगी। लेकिन शुक्रवार को होने वाली इस महा-बैठक के अचानक रद्द होने से पूरी दुनिया स्तब्ध है। इस घटना ने मिडल ईस्ट की नाजुक शांति को गहरे सस्पेंस और अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;बर्गेनस्टॉक रिज़ॉर्ट का सस्पेंस: आखिरी वक्त पर क्यों टूटा वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस का ट्रिप?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस हाई-स्टेक डिप्लोमेसी का मंच बना था स्विट्जरलैंड का बेहद खूबसूरत और सुरक्षित बर्गेनस्टॉक माउंटेनटॉप रिज़ॉर्ट। कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड (कटारा हॉस्पिटैलिटी) के मालिकाना हक वाली यह जगह अपनी प्राइवेसी और कंट्रोल्ड एक्सेस के लिए जानी जाती है, जहां दुनिया के सबसे बड़े सीक्रेट इंटरनेशनल समिट होते रहे हैं। सस्पेंस तब गहराया जब व्हाइट हाउस ने अचानक घोषणा की कि अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा को टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इसके पीछे 'पेचीदा लॉजिस्टिक्स' को जिम्मेदार ठहराया। खुद जेडी वेंस ने एक बयान में कहा, &quot;ईरान कोई ऐसा देश नहीं है जिससे निकलना आसान हो। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहां कब पहुंच पाता है।&quot; न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट भी यही दावा करती है कि ईरानी टीम समय पर वेन्यू तक नहीं पहुंच सकी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;तेहरान के पीछे हटने की असली इनसाइड स्टोरी?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हालांकि, इस लॉजिस्टिकल देरी के पीछे एक बेहद खौफनाक और रणनीतिक वजह भी सामने आ रही है। एक्सियोस (Axios) के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया है कि ईरान ने यह कदम लेबनान में इजरायल द्वारा किए गए सीजफायर के कथित उल्लंघनों के विरोध में उठाया है। हिज्बुल्लाह से जुड़े पैन-अरब चैनल 'अल-मायादीन' के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी समझौते के बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर अपने हमले थामे नहीं हैं। गुरुवार की रात हुए इजरायली हमलों में 16 बेकसूर लोग मारे गए। तेहरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि लेबनान में जब तक खूनखराबा पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक शांति की कोई भी बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;जिद पर अड़े नेतन्याहू: 'सिक्योरिटी ज़ोन' से नहीं हटेगी सेना&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शांति वार्ता टलने के पीछे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का वह अड़ियल रुख भी है जिसने आग में घी का काम किया है। नेतन्याहू ने साफ लफ्जों में कहा है कि इजरायल की सेना दक्षिणी लेबनान के &quot;सिक्योरिटी ज़ोन&quot; में तब तक डटी रहेगी, जब तक इजरायल की सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत होगी। इजरायल के इस आक्रामक रवैये ने कतर और अमेरिका की मध्यस्थता की कोशिशों को तगड़ा झटका दिया है, क्योंकि ईरान इसे सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन मान रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;क्या अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ रही है दूरी?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस रही, जिसमें उन्होंने इजरायली लीडरशिप की सरेआम धज्जियां उड़ा दीं। वेंस के इस बयान से साफ हो गया है कि वॉशिंगटन और उसके सबसे पुराने सहयोगी इजरायल के बीच दरारें अब खाई में बदल चुकी हैं। वेंस ने इजरायली कैबिनेट को चेतावनी देते हुए कहा: &quot;डोनाल्ड जे. ट्रम्प दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इस समय इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं... अगर मैं इजराइली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं शायद उस एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी (अमेरिका) पर हमला या उसकी अवहेलना नहीं करता, जो मेरे पास पूरी दुनिया में बचा है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;60 दिनों का काउंटडाउन और मोजतबा खामेनेई का दावा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;table&gt; &lt;tbody&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;&lt;strong&gt;समझौता/MoU बिंदु&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;&lt;strong&gt;समय सीमा/स्थिति&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;परमाणु कार्यक्रम पर पक्की समझ&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;60 दिनों के भीतर बातचीत पूरी करनी है।&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz)&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;तेल ट्रैफिक को युद्ध से पहले के स्तर पर लाना।&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;खामेनेई का दावा&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'निराशा' में आकर यह डील की है।&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;ईरान के सुप्रीम लीडर, मोजतबा खामेनेई ने हालांकि अमेरिका के साथ इस सीधी बातचीत का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने हताशा और निराशा में आकर अपने सभी हथकंडे अपनाकर इस डील को करने की कोशिश की थी। बहरहाल, 60 दिनों की यह मोहलत अब और पेचीदा हो गई है। अगर यह बातचीत जल्द ही दोबारा शुरू नहीं हुई, तो होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री रास्ता और मिडल ईस्ट की धरती एक बार फिर महायुद्ध की आग में स्वाहा हो सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;ईरान-अमेरिका की शांति वार्ता में अब क्या होगा आगे?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिका और ईरान के बीच 14-बिंदु समझौते के बाद उम्मीद जगी थी कि दशकों पुरानी दुश्मनी धीरे-धीरे बातचीत में बदल सकती है। लेकिन स्विट्जरलैंड वार्ता के टलने से यह साफ हो गया है कि शांति का रास्ता अभी भी बेहद नाजुक है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष जल्द नई तारीख तय करेंगे, या फिर लेबनान, इज़राइल और क्षेत्रीय राजनीति की उलझनें इस संभावित शांति प्रक्रिया को फिर से अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल देंगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[आखिर क्या है ट्रंप का 'गार्जियन एंजेल' प्लान? जिससे होर्मुज पर मंडराया नया संकट!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/trump-hormuz-toll-plan-iran-deal-failure-strait-of-hormuz-ceasefire-us-iran-talks/articleshow-3mg35ds</link>
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            <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 08:16:21 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या ईरान की चेतावनी से दुनिया की सबसे अहम तेल लाइफलाइन होर्मुज बंद होने वाली है? क्या डील फेल होते ही Donald Trump जहाजों पर US टोल लगाकर नया आर्थिक दबाव बनाएंगे? क्या लेबनान में टूटता सीज़फायर अमेरिका-ईरान वार्ता को पटरी से उतार देगा? क्या स्विट्ज़रलैंड की बातचीत शांति लाएगी, या मिडिल ईस्ट को बड़े टकराव और ऊर्जा संकट की ओर धकेल देगी?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Trump Hormuz Strait Toll: &lt;/strong&gt;मिडिल ईस्ट के रणक्षेत्र से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने पूरी दुनिया के बाजारों और कूटनीतिज्ञों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी फैला दी है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान के साथ होने वाली महा-डील फेल होती है, तो अमेरिका दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री रास्ते&mdash;होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)-से गुजरने वाले जहाजों पर 'यूएस टोल' लगाने पर विचार कर सकता है। ट्रंप ने अमेरिका की भूमिका को मिडिल ईस्ट के देशों के लिए एक 'गार्जियन एंजेल' (रक्षक) की तरह बताया है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस समुद्री रास्ते पर अपना एकतरफा पहरा बैठाने की तैयारी में है?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप का धमाका: 60 दिनों का अल्टीमेटम और अरबों का बिल!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर इस नए सस्पेंस की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट लिखी। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि स्विट्जरलैंड में होने वाली शांति वार्ता के तहत 60 दिनों के सीज़फायर के दौरान तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टोल नहीं लगेगा। लेकिन, असली सस्पेंस 60 दिनों के बाद शुरू होगा। अगर ईरान के साथ कोई बड़ा और ठोस समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका इस रास्ते पर भारी-भरकम टोल वसूलना शुरू कर देगा। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका ने 'गार्जियन एंजेल' बनकर मिडिल ईस्ट के देशों को जो सुरक्षा सेवाएं दी हैं, उसकी पिछली, मौजूदा और भविष्य की लागतों की भरपाई इस टोल टैक्स से की जाएगी। इस बयान ने वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई चेन में एक नए खतरे की घंटी बजा दी है, जो दुनिया को बड़े आर्थिक संकट में डाल सकती है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;ईरान की वो खौफनाक चेतावनी: 'हमारे रास्ते आओगे तो जोखिम तुम्हारा होगा'&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ट्रंप के इस बयान से ठीक पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दुनिया को दहलाने वाली घोषणा कर दी थी। ईरान ने दावा किया कि लेबनान में इज़राइल द्वारा किए गए सीज़फायर के उल्लोंघनों के विरोध में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया है। ईरान की तरफ से कमर्शियल जहाजों को चेतावनी दी गई कि वे इस रास्ते से दूर रहें, और जो भी जहाज इसमें प्रवेश करेगा, वह अपनी जान-माल की जिम्मेदारी खुद उठाएगा। इस घोषणा ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि होर्मुज दुनिया के तेल और गैस एक्सपोर्ट का मुख्य मार्ग है। हालांकि, इस दावे के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक दिलचस्प आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि जमीनी हकीकत कुछ और है; शनिवार को भी 55 कमर्शियल जहाज वहां से सुरक्षित गुजरे, जिनमें 17 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल मौजूद था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;लेबनान में सीज़फायर पर गहराता संकट: क्या फिर छिड़ेगी महाजंग?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पूरी तनातनी के बीच लेबनान में हुआ युद्धविराम अब बेहद कमजोर धागे से बंधा नजर आ रहा है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच 60 दिनों की बातचीत शुरू करने की सबसे पहली और अहम शर्त यही थी कि लेबनान में लड़ाई को पूरी तरह रोका जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि सीज़फायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद लेबनान में फिर से बम बरसने लगे। लेबनान की सिविल डिफेंस के मुताबिक, इज़राइली हमलों में 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इज़राइल का कहना है कि यह कार्रवाई हिज़्बुल्लाह के हमलों का जवाब थी, जबकि हिज़्बुल्लाह का दावा है कि वह इज़राइल को आज़ादी से घूमने नहीं देगा। ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहम्मद मोखबेर ने भी 'X' पर चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका इस 14-सूत्रीय समझौते को पूरी तरह लागू नहीं करवाता, तब तक मिडिल ईस्ट से एनर्जी सप्लाई में रुकावटें आती रहेंगी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;स्विट्जरलैंड में महाशक्तियों का जमावड़ा: जेडी वेंस और ईरानी दिग्गजों की गुप्त रणनीति&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस भीषण तनाव के बीच स्विट्जरलैंड की बर्फीली वादियों में एक बेहद गोपनीय और हाई-स्टेक्स मीटिंग का मंच सज चुका है। ईरान का एक बेहद ताकतवर प्रतिनिधिमंडल, जिसकी अगुवाई मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची कर रहे हैं, स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है। इस टीम में ईरान के सुरक्षा तंत्र, केंद्रीय बैंक और तेल क्षेत्र के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हैं। दूसरी तरफ से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के बेहद भरोसेमंद वार्ताकार जेरेड कुशनर व स्टीव विटकॉफ पहले से ही वहां डेरा डाले हुए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;जेडी वेंस ने क्या कहा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए उम्मीद जताई है कि इस बातचीत के जरिए न सिर्फ परमाणु मुद्दे का हल निकलेगा, बल्कि लेबनान का संकट भी सुलझ जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य के असल में बंद होने का कोई संकेत नहीं मिला है। लेकिन सस्पेंस अभी बरकरार है-क्या स्विट्जरलैंड की यह गुप्त वार्ता सफल होगी, या फिर दुनिया होर्मुज में एक नए अमेरिकी टैक्स और ईरान के पलटवार की गवाह बनेगी? ग्लोबल एनर्जी मार्केट की सांसें इस वक्त इसी सवाल पर थमी हुई हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[ईरान डील का सीक्रेट लीक? क्या सच में पाकिस्तान में मीडिया की आजादी नहीं? जेडी वेंस ने खोली पोल]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/jd-vance-pakistan-press-freedom-iran-deal-trump-peace-talks-hormuz-crisis/articleshow-71lgwuh</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:23:19 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;ईरान शांति डील की जानकारी छिपाने पर JD वेंस के बयान से क्यों मचा विवाद? क्या अमेरिका ने कोई बड़ा राज छुपाया? अमेरिका-ईरान समझौते के पीछे क्या है असली रणनीति? होर्मुज संकट से लेकर ईरान डील तक, क्या पश्चिम एशिया में बदलने वाला है शक्ति संतुलन? JD वेंस के बयान ने पाकिस्तान और कतर पर क्यों खड़े किए सवाल? क्या प्रेस आज़ादी बनी बहस का नया मुद्दा?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvj3qafapzxqgc7gvtp643cb,imgname-jd-vance-pakistan-press-freedom-iran-deal-trump-peace-talks-hormuz-crisis-1781945575913.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: &lt;/strong&gt;अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक और गोपनीय शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया और बेहद चौंकाने वाला सस्पेंस खड़ा हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने इस बेहद संवेदनशील समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने में हुई देरी पर एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने न केवल वॉशिंगटन बल्कि इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है। उपराष्ट्रपति वेंस ने ईरान डील की जानकारी छिपाने के पीछे का राज खोलते हुए सीधे तौर पर पाकिस्तान और कतर की व्यवस्था पर तीखा तंज कसा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;ईरान डील छिपाने का रहस्य: वेंस का वो 'फर्स्ट अमेंडमेंट' वाला तीखा वार!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पूरे कूटनीतिक ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब मीडिया ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सवाल किया कि आखिर अमेरिका ने इस महा-समझौते के पब्लिकेशन (प्रकाशन) के समय को लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती? इस पर वेंस ने मज़ाकिया लेकिन बेहद तल्ख अंदाज़ में पाकिस्तान में प्रेस की आज़ादी का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, &quot;पाकिस्तान और कतर के सिस्टम में 'फर्स्ट अमेंडमेंट' (अभिव्यक्ति की आज़ादी) और प्रेस की आज़ादी जैसी कोई चीज़ नहीं है।&quot; वेंस ने साफ किया कि जब अमेरिका इस बेहद नाजुक जानकारी को सार्वजनिक करने की कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर काम कर रहा था, तब दूसरे देशों की तरह इसे तुरंत लीक नहीं किया जा सकता था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;U.S. Vice President JD Vance jokes about Pakistan lacking press freedom as a reason why America delayed releasing terms of Iran peace deal pic.twitter.com/L2oJt4LDWB&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Shashank Mattoo (@MattooShashank) June 20, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;स्विट्जरलैंड जा रहे अमेरिकी दूत: परमाणु समझौते पर आखिरी दौर का सस्पेंस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस बयानबाजी के बीच, परदे के पीछे एक और बड़ी वैश्विक हलचल शुरू हो चुकी है। समाचार एजेंसी 'एक्सियोस' (Axios) ने एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) बहुत जल्दबाजी में स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो रहे हैं। विटकॉफ वहां ईरान के साथ एक और संभावित और बेहद खुफिया 'परमाणु समझौते' पर बातचीत के शुरुआती दौर का नेतृत्व करेंगे। यह कदम इसलिए भी सस्पेंस से भरा है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले खुद जेडी वेंस ने लेबनान में अचानक भड़की लड़ाई के कारण इस बातचीत में शामिल होने का अपना दौरा रद्द कर दिया था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;वर्साय के महल में सीक्रेट डिनर: क्या है 14-सूत्रीय अमेरिका-ईरान समझौता?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जिस मुख्य समझौते को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, उसकी कहानी फ्रांस के पेरिस से जुड़ी है। G7 शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद वर्साय के महल में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक डिनर मीटिंग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इस 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इस समझौते की मुख्य और बेहद गुप्त शर्तें निम्नलिखित हैं:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;यूरेनियम की कटौती:&lt;/strong&gt; तेहरान व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों से राहत पाने के बदले अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) की मात्रा को कम करने पर सहमत है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;60 दिनों का सीज़फायर: &lt;/strong&gt;लेबनान समेत पूरे पश्चिम एशिया में लड़ाई को &quot;तुरंत&quot; रोका जाएगा और युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाया जाएगा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;$300 अरब डॉलर का फंड:&lt;/strong&gt; वॉशिंगटन इस समझौते के तहत तेहरान को $300 अरब डॉलर का भारी-भरकम पुनर्निर्माण फंड उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हुआ है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;होर्मुज जलमार्ग: &lt;/strong&gt;अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और होर्मुज जलडमरूमध्य से कमर्शियल ट्रैफिक के लिए सुरक्षित रास्ता बहाल किया जाएगा।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;28 फरवरी का वो खूनी फ्लैशबैक: जब थम गई थी वैश्विक अर्थव्यवस्था&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पश्चिम एशिया में इस विनाशकारी महायुद्ध की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी, जब तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत रुकने के बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एक साथ भीषण हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और दुनिया की जीवनरेखा माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह बंद कर दिया था। अब जबकि कूटनीतिक बातचीत दोबारा पटरी पर लौट रही है, लेबनान में फिर से शुरू हुए तनाव ने इस शांति समझौते पर नए सिरे से काले बादल मंडरा दिए हैं। क्या स्टीव विटकॉफ की स्विट्जरलैंड यात्रा इस कूटनीतिक सस्पेंस का अंत कर पाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[भारत को छोड़ चीन-मलेशिया क्यों जा रहे तारिक रहमान? बांग्लादेश का चौंकाने वाला कदम]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/bangladesh-pm-tarique-rahman-first-foreign-trip-china-malaysia-india-relations-teesta-project/articleshow-8l8drz3</link>
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            <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 10:35:04 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या बांग्लादेश के PM तारिक़ रहमान की पहली विदेश यात्रा से भारत को बड़ा कूटनीतिक संदेश मिल रहा है? क्या चीन के साथ 15-17 बड़े समझौते बांग्लादेश की विदेश नीति में नया मोड़ लाएंगे? क्या भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव अभी भी बरकरार है? क्या बांग्लादेश ASEAN और RCEP में जगह बनाकर क्षेत्रीय ताकतों के बीच नया संतुलन बनाने की तैयारी कर रहा है?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Bangladesh PM Tarique Rahman First Foreign Visit: &lt;/strong&gt;दक्षिण एशिया की राजनीति में इस वक्त एक ऐसा भूचाल आया है जिसने रणनीतिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर निकलने वाले हैं, लेकिन इस यात्रा के शेड्यूल ने नई दिल्ली के राजनयिक गलियारों में सन्नाटा खींच दिया है। पारंपरिक रूप से बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री की पहली पसंद हमेशा भारत होता रहा है, लेकिन पीएम तारिक़ रहमान ने इस बार परंपरा की बेड़ियों को तोड़ते हुए मलेशिया और चीन को अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चुना है। यह फैसला महज एक दौरा नहीं, बल्कि उपमहाद्वीप की भू-राजनीति में आने वाले बड़े तूफान का संकेत है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;एयरपोर्ट पर 2 घंटे का वो सस्पेंस: क्या एक छोटी सी घटना ने बिगाड़ दिए रिश्ते?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत को अपना सबसे करीबी पड़ोसी मानने वाला बांग्लादेश अचानक रणनीतिक दूरी बनाने लगा? इसके पीछे की कड़वाहट हाल ही में दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई एक घटना से जुड़ी मानी जा रही है। दरअसल, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के बेहद करीबी सहयोगी जाहेद उर रहमान को दिल्ली हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के नाम पर दो घंटे से ज्यादा समय तक रोका गया। यह घटना ढाका को इस कदर नागवार गुजरी कि बांग्लादेश ने अपनी संप्रभुता और राजनयिक संवेदनशीलता का हवाला देते हुए भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर को तलब कर औपचारिक कड़ा विरोध दर्ज करा दिया। राजनयिक पंडितों का मानना है कि इस 'एयरपोर्ट विवाद' ने सुलगती आग में घी का काम किया है, जिससे दोनों देशों के बीच छिपी हुई दूरियां सरेआम आ गईं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;पहली यात्रा में भारत को नजरअंदाज करने के पीछे क्या है रणनीति?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विदेश मंत्रालय के अनुसार, रहमान सबसे पहले मलेशिया जाएंगे और वहां प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन की चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग से होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि बांग्लादेश की बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत हो सकता है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;बीजिंग में होने जा रही है 'महा-डील': तीस्ता नदी पर चीन का मास्टरस्ट्रोक!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रविवार को कुआलालंपुर में मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम से मुलाकात के ठीक बाद, 23 जून से तारिक़ रहमान की चीन की चार दिवसीय महा-यात्रा शुरू होने जा रही है। सस्पेंस इस बात को लेकर है कि इस यात्रा के दौरान बांग्लादेश और चीन के बीच 15 से 17 बड़े द्विपक्षीय समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। रहमान सीधे चीनी प्रीमियर ली कियांग और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। लेकिन सबसे बड़ा झटका भारत के लिए 'तीस्ता प्रोजेक्ट' को लेकर है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी का बंटवारा सालों से लंबित है। अब चीन इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश और नदी मैनेजमेंट के जरिए बांग्लादेश में अपनी पैठ मजबूत करने की ताक में है। हाल ही में बांग्लादेश ने चट्टोग्राम में चीनी आर्थिक क्षेत्र के लिए 340 मिलियन अमेरिकी डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसके लिए चीन भारी-भरकम रियायती लोन दे रहा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;शेख हसीना के पतन के बाद का वो दौर: क्या खो गया है नई दिल्ली का पुराना भरोसा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;साल 2024 में हुए उस तख्तापलट और हिंसक विद्रोह को कोई नहीं भूल सकता, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। उसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में भारत-बांग्लादेश संबंधों में अभूतपूर्व गिरावट आई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;क्या बदल रही है दक्षिण एशिया की भू-राजनीति?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;हालांकि, इस साल की शुरुआत में तारिक़ रहमान की चुनावी जीत के बाद लगा था कि रिश्ते सुधरेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उन्हें बधाई देकर सपरिवार नई दिल्ली आने का न्योता दिया था। यहाँ तक कि भारतीय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ढाका जाकर उनके शपथ ग्रहण में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था। लेकिन, हालिया घटनाक्रमों और आसियान (ASEAN) समूह तथा आरसीईपी (RCEP) में शामिल होने के लिए मलेशिया का समर्थन मांगने की ढाका की जल्दबाजी यह साफ बयां करती है कि बांग्लादेश अब अपनी विदेश नीति का संतुलन पूरी तरह पूर्व की तरफ झुका रहा है। क्या भारत इस डैमेज को कंट्रोल कर पाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[होरमुज़ खुलते ही बदली तस्वीर, पाकिस्तान ने पेट्रोल-डीज़ल के दाम की बंपर कटौती]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/pakistan-slashes-petrol-price-by-rs-74-after-global-oil-market-cools-pakistan-petrol-price-cut-pakistan-fuel-prices/articleshow-a6cbc8n</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:14:03 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के बाद होरमुज़ जलडमरूमध्य के खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर गईं। इसका फायदा जनता को देते हुए पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 74 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती की है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने खुद इसका ऐलान किया।]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvhvnb4peza86dbxpdc10arx,imgname-pakistan-petrol-price-1781937122453.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट का फायदा पाकिस्तान ने अपनी जनता को दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के बाद पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने घोषणा की है कि पेट्रोल के दाम में 74 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। यह फैसला तब आया है जब पिछले शुक्रवार को अमेरिका और ईरान ने हफ्तों चली बातचीत के बाद एक शांति समझौते पर दस्तखत किए। इसके तुरंत बाद ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;सीधा फायदा जनता को&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस कटौती की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई गिरावट का पूरा फायदा सीधे जनता तक पहुंचा रही है। अरब न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, शरीफ़ ने संसद में तेल की कीमतों में &quot;बड़ी&quot; कटौती का वादा किया था और उसके कुछ ही घंटों बाद यह आधिकारिक घोषणा कर दी गई।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है, &quot;पेट्रोल की कीमत 373 रुपये प्रति लीटर से घटकर 299 रुपये हो जाएगी, जबकि डीज़ल की कीमत 378 रुपये से घटकर 311 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए विकास बजट और अन्य खर्चों में कटौती से बचाए गए 129 अरब पाकिस्तानी रुपये का इस्तेमाल किया है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;कैसे टला था बड़ा संकट?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह पूरा संकट 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब इज़रायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई बड़े नेताओं के मारे जाने की खबर थी। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सहयोगियों पर हमला कर दिया और होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;होरमुज़ दुनिया में तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता है। इसके बंद होते ही दुनियाभर में कच्चे तेल के दाम आसमान पर पहुंच गए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान समेत कई देशों में पेट्रोल-डीज़ल का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। अब ईरान-अमेरिका समझौते के बाद यह संकट टलता दिख रहा है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/pakistan-slashes-petrol-price-by-rs-74-after-global-oil-market-cools-pakistan-petrol-price-cut-pakistan-fuel-prices/articleshow-a6cbc8n"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[सामने आ गई कोरोना की असली कहानी? US साइंटिस्ट ने की फंडिंग, चीन में बना वायरस!]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/tulsi-gabbard-covid-origin-claims-fauci-wuhan-lab-funding-documents-release/articleshow-cibcbv0</link>
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            <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 18:00:56 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Tulsi Gabbard Releases Documents Covid-19 Funding:&lt;/strong&gt; तुलसी गबार्ड ने कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर क्या नए दावे किए हैं? एंथनी फौसी पर लगाए गए आरोप क्या हैं और उनका पक्ष क्या रहा है? कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के बीच मतभेद क्यों हैं?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvfvwrgvqympa3wddntqc32j,imgname-tulsi-gabbard-covid-origin-claims-fauci-wuhan-lab-funding-documents-release-1781870256667.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;कोरोना महामारी को शुरू हुए कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इसकी उत्पत्ति को लेकर विवाद अब भी खत्म नहीं हुआ है। इसी बीच अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड द्वारा जारी किए गए कुछ दस्तावेजों ने एक बार फिर कोविड-19 की शुरुआत और उससे जुड़े फैसलों पर बहस तेज कर दी है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गबार्ड ने दावा किया है कि नए सार्वजनिक किए गए दस्तावेज कोरोना वायरस की उत्पत्ति से जुड़े शुरुआती आकलनों और अमेरिकी अधिकारियों की भूमिका पर नए सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने पूर्व अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एंथनी फौसी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों पर पहले भी अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी दलीलें देते रहे हैं और इस विषय पर अंतिम निष्कर्ष अब तक सामने नहीं आया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में क्या है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ODNI) की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के भीतर लंबे समय तक चर्चा चलती रही। कुछ विश्लेषकों ने वायरस के प्राकृतिक रूप से फैलने की संभावना जताई, जबकि कुछ ने लैब से जुड़े संभावित हादसे की थ्योरी को भी जांच के दायरे में रखने की बात कही। गबार्ड का आरोप है कि महामारी की शुरुआत से जुड़े कुछ आकलनों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता को इस मामले में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही मिलनी चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;फौसी पर क्या आरोप लगे?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जारी दस्तावेजों के आधार पर गबार्ड ने दावा किया कि डॉ. एंथनी फौसी ने कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़ी चर्चाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जानकारियां सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाई गईं। हालांकि डॉ. फौसी पहले कई बार इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस के समक्ष अपनी गवाही में कहा था कि उन्होंने किसी तरह की जानकारी छिपाने या खुफिया एजेंसियों को प्रभावित करने का काम नहीं किया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;वुहान लैब थ्योरी पर क्या कहती हैं एजेंसियां?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अमेरिकी एजेंसियों के बीच वर्षों से मतभेद रहे हैं। कुछ एजेंसियां प्राकृतिक संक्रमण को अधिक संभावित मानती हैं, जबकि कुछ का मानना है कि लैब से जुड़ी घटना की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। मई 2020 में तैयार एक आकलन में यह कहा गया था कि वुहान स्थित प्रयोगशाला में ऐसी परिस्थितियां मौजूद थीं, जहां से वायरस के गलती से बाहर आने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इसे निर्णायक निष्कर्ष नहीं माना गया था।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Akshansh Kulshreshtha</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/tulsi-gabbard-covid-origin-claims-fauci-wuhan-lab-funding-documents-release/articleshow-cibcbv0"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[होर्मुज़ में ईरान के नए नियम! 48 घंटे पहले करने होंगे ये 3 काम वर्ना बैन होगी जहाज़ों की एंट्री?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/iran-hormuz-strait-new-shipping-rules-us-iran-deal-vessel-registration-48-hour-clearance/articleshow-g3gxehy</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 08:27:17 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या होर्मुज़ पर ईरान का नया नियंत्रण वैश्विक शिपिंग के लिए बड़ा संकेत है? क्या 48 घंटे पहले अनुमति और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? US-ईरान समझौते के बाद अचानक बढ़ा जहाज़ों का ट्रैफिक आखिर किस ओर इशारा कर रहा है? दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति वाले इस मार्ग पर नए नियमों का तेल बाज़ार और वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvhezq7kq81x2emswb74br2r,imgname-iran-hormuz-strait-new-shipping-rules-us-iran-deal-vessel-registration-48-hour-clearance-1781923831027.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;दुबई/तेहरान:&lt;/strong&gt; अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद दुनिया ने राहत की सांस ली ही थी कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से एक बड़ी खबर सामने आ गई है। ईरान ने इस संकरे और वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए अचानक नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। हालांकि यह मार्ग अभी मुफ्त है, लेकिन ईरान के इस कदम ने समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और व्यापारिक घरानों के बीच एक नया सस्पेंस पैदा कर दिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;नई अथॉरिटी 'PGSA' का गठन: सोशल मीडिया पर जारी हुआ रहस्यमयी नोटिस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सख्त निगरानी के लिए रातों-रात एक नई संस्था 'पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) का गठन किया है। इस नई ईरानी अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक आधिकारिक नोटिस जारी कर सनसनी फैला दी है। नोटिस के अनुसार, 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU)' पर हस्ताक्षर होने के बाद अब केवल उन्हीं जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दी जाएगी, जो उनके द्वारा तय की गई सख्त शर्तों को पूरा करेंगे और पहले रजिस्ट्रेशन करवाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;48 घंटे पहले की डेडलाइन: आखिर फॉर्म में क्या छिपाना चाहता है ईरान?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ईरान द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर एक कमर्शियल जहाज को उस क्षेत्र में प्रवेश करने से कम से कम 48 घंटे पहले एक विस्तृत फॉर्म भरना अनिवार्य होगा। इस फॉर्म में जहाज का नाम, उसका झंडा (Flag), IMO नंबर, डेड वेट क्षमता, ड्राफ़्ट, कार्गो (सामान) का प्रकार, जहाज के असली मालिक का नाम और मैनेजमेंट कंपनी की पूरी कुंडली मांगी गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईरान इन जानकारियों के जरिए इस मार्ग पर अपनी सैन्य और रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;ट्रैफिक दो महीने के उच्चतम स्तर पर: 25 जहाजों की एंट्री से बढ़ी हलचल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मैरीटाइम ट्रैकिंग फर्म AXSMarine द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तुरंत बाद इस जलमार्ग पर कमर्शियल शिपिंग ट्रैफिक अचानक दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में एक ही दिन में रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजरे, जो अप्रैल के मध्य के बाद से सबसे बड़ी संख्या है। सामान्य दिनों में दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा (तेल और गैस) की आपूर्ति इसी संकरे रास्ते से होती है, जिससे इस ट्रैफिक का बढ़ना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;बारूदी सुरंगों (Mines) का खौफ और ट्रंप-पेज़ेश्कियान का वो गुप्त समझौता&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक खौफनाक फ्लैशबैक है। इसी साल 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे, तब इस पूरे जलमार्ग में शिपिंग पूरी तरह ठप हो गई थी। इस युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच एक समझौता (MoU) हुआ, जिसके बाद इसे दोबारा खोला गया। ईरान ने साफ किया है कि समझौते के तहत वह अगले 60 दिनों तक कोई टैक्स या शुल्क नहीं लेगा और पानी के भीतर बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines) को हटाने का काम करेगा। 60 दिनों की इस मुफ्त अवधि के खत्म होने के बाद क्या होगा? क्या ईरान इस मार्ग पर पूरी तरह अपना नियंत्रण स्थापित कर लेगा? इस सस्पेंस ने पूरी दुनिया की नजरें एक बार फिर फ़ारस की खाड़ी पर टिका दी हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Russia-Ukraine War: यूक्रेन ने रूस पर ढाया कहर, एयरपोर्ट बंद-कई इमारतें सुलगीं; तेल संयंत्र को भारी नुकसान]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/ukraine-drone-attack-on-moscow-oil-refinery-airports-russia-war-latest-news-just-after-us-iran-deal/articleshow-g82dgmh</link>
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            <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:49:09 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;मॉस्को पर हुए ताजा ड्रोन हमले में यूक्रेन ने किन ठिकानों को निशाना बनाया? रूस ने कितने यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है? मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर हमले से रूस को कितना नुकसान हुआ? गजप्रोम नेफ्त रिफाइनरी रूस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? क्या यह मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा यूक्रेनी ड्रोन हमला है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvdaq5dzmy8q8dywvvwtm766,imgname-russia-ukraine-war-latest-update-1781785138623.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;मिडिल-ईस्ट में ईरान-अमेरिका के बीच पिछले 110 दिनों से जारी युद्ध को लेकर अभी अंतरिम समझौता हुआ ही था कि दूसरी ओर, यूक्रेन ने रूस की राजधानी मास्को पर भारी बमबारी कर तबाही मचा दी। यूक्रेन की ओर से किए गए भारी ड्रोन अटैक के बाद राजधानी मास्को के कई इलाकों से आग और धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इस हमले में मॉस्को की महत्वपूर्ण ऑयल रिफाइनरियां भी निशाने पर रहीं, जबकि कई एयरपोर्ट्स पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। रूसी अधिकारियों के अनुसार, यह एक सप्ताह के भीतर मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी पर दूसरा हमला है। इसे रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी मॉस्को पर हुए सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक माना जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर हमला, धमाके के बाद लगी भीषण आग&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ड्रोन हमले के बाद मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी में जोरदार विस्फोट हुआ। इसके बाद आग की ऊंची लपटें और घना काला धुआं कई किलोमीटर दूर तक देखा गया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने रातभर में देश के विभिन्न हिस्सों में 555 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। इनमें से करीब 200 ड्रोन मॉस्को के आसपास ही रोक लिए गए थे। हालांकि, कई ड्रोन सुरक्षा घेरे को भेदने में सफल रहे और उन्होंने राजधानी के अहम ठिकानों को निशाना बनाया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रूस का एयर डिफेंस सिस्टम सभी ड्रोन नहीं रोक पाया&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रूसी अधिकारियों के मुताबिक, मॉस्को में तैनात एयर डिफेंस सिस्टम ने बड़ी संख्या में ड्रोन को नष्ट किया, लेकिन सभी को रोक पाना संभव नहीं हो सका। हमले के कारण सैडोवोड (Sadovod) और बेलाया दाचा (Belaya Dacha) जैसे प्रमुख शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तथा कुछ आवासीय इमारतों को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में आग लगने की घटनाएं सामने आईं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हमले से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मॉस्को के मेयर ने क्या कहा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि कई ड्रोन राजधानी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित मॉस्को ऑयल रिफाइनरी से टकराए। उनके अनुसार, हमले का मुख्य निशाना तेल रिफाइनरी और उससे जुड़ा बुनियादी ढांचा था।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;गजप्रोम नेफ्त रिफाइनरी को सबसे ज्यादा नुकसान&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में गजप्रोम नेफ्त (Gazprom Neft) की रिफाइनरी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। यह संयंत्र मॉस्को क्षेत्र में ईंधन आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े प्लांट्स में से एक है। बताया गया है कि 16 जून को हुए पहले हमले के बाद 18 जून को दोबारा हमला किया गया। इस दौरान स्टोरेज टैंकों, क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग यूनिट और डीजल हाइड्रोट्रीटिंग यूनिट को नुकसान पहुंचा है। आग लगने के बाद पूरे क्षेत्र में काला धुआं फैल गया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;मॉस्को के चार प्रमुख एयरपोर्ट्स पर उड़ानें रोकी गईं&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;रूस के परिवहन मंत्रालय ने बताया कि सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख एयरपोर्ट्स पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इनमें शेरेमेतयेवो (Sheremetyevo), डोमोदेदोवो (Domodedovo), व्नुकोवो (Vnukovo) जैसे प्रमुख हवाई अड्डे शामिल हैं। उड़ानें रोके जाने से सैकड़ों यात्रियों और फ्लाइट्स पर असर पड़ा। हमले के बाद कई इलाकों में लगातार विस्फोटों की आवाज सुनाई देती रही। धुएं और आग की वजह से शहर के कुछ हिस्सों में दिन के समय भी अंधेरा जैसा माहौल बन गया। स्थानीय लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ज़ेलेंस्की के बयान के कुछ घंटों बाद हुआ हमला&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक महत्वपूर्ण समन्वय वार्ता की है। ज़ेलेंस्की ने दावा किया था कि इस बातचीत से यूक्रेन के लिए बड़ा बदलाव आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में शामिल विश्व नेताओं से यूक्रेन को अतिरिक्त सहायता का महत्वपूर्ण आश्वासन मिला है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;G7 बैठक में यूक्रेन को समर्थन का भरोसा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वर्साय पैलेस से निकलते समय फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पत्रकारों से कहा कि पिछले कुछ दिन यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा कि G7 देशों के बीच यूक्रेन को लेकर एकजुटता मजबूत हुई है और पश्चिमी देश यूक्रेन को समर्थन देना जारी रखेंगे। मैक्रों के अनुसार, सहयोगी देश यूक्रेन की रक्षा क्षमता और जवाबी कार्रवाई की ताकत बढ़ाने में मदद करते रहेंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ASEAN बैठक में व्यस्त हैं राष्ट्रपति पुतिन&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से लगभग 700 किलोमीटर दूर कज़ान शहर में मौजूद हैं। वह वहां दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन ASEAN के नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। रूस इस मंच के जरिए व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;रूस-ASEAN रणनीतिक साझेदारी पर भी चर्चा&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव के मुताबिक, दो दिवसीय बैठक में रूस और ASEAN देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है। बैठक में जिन देशों की भागीदारी हैं उनमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, पूर्वी तिमोर और वियतनाम हैं। इस बीच मॉस्को पर हुआ यह बड़ा हमला रूस-यूक्रेन युद्ध में एक नए और गंभीर मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और ऊर्जा ढांचे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Ganesh Mishra</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[G7 के बाद अमेरिका-इटली में टकराव! डोनाल्ड ट्रंप और मेलोनी के बीच क्यों छिड़ी जुबानी जंग?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/trump-claims-meloni-begged-for-g7-photo-italy-pm-hits-back-sharply/articleshow-gk2873y</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 09:37:54 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या ट्रंप का यह बयान अमेरिका और इटली के रिश्तों पर लंबे समय तक असर डाल सकता है? क्या विश्व नेताओं के बीच इस तरह के सार्वजनिक बयान कूटनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचाते हैं? इस विवाद में आप किसकी बात को ज्यादा विश्वसनीय मानते हैं- ट्रंप या मेलोनी?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kv9tz84q00ce1y68av9fkscv,imgname-g7-summit-hot-mic-macron-trump-meloni-greenland-conversation-world-leaders-leak-1781667963031.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वॉशिंगटन/रोम:&lt;/strong&gt; &quot;G7 समिट में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी मेरे साथ एक फोटो के लिए गिड़गिड़ाईं। मेरा मन नहीं था, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया और मैंने फोटो खिंचवा ली।&quot; अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह विवादित बयान देकर एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। इस पर इटली की PM मेलोनी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, &quot;ट्रंप का दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत है। मैं और मेरा देश इटली कभी किसी के आगे नहीं गिड़गिड़ाते।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;एक इतालवी मीडिया आउटलेट को दिए फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, &quot;जब मैंने मेलोनी से बात की, तो शायद वह खुश थीं। मुझे उनसे बात नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने मेरे साथ एक फोटो के लिए भीख मांगी। वह मेरे साथ एक फोटो के लिए बहुत बेताब थीं। मुझे उन पर तरस आ गया।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस बयान के तुरंत बाद, मेलोनी ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा, &quot;ट्रंप का बयान पूरी तरह से मनगढ़ंत है। मैं हैरान हूं। मुझे समझ नहीं आता कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही सहयोगी देशों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों करते हैं। यह पहली बार नहीं है। उन्हें एक बात याद रखनी चाहिए, मैं और इटली कभी भीख नहीं मांगते।&quot;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;इटली के उप-प्रधानमंत्री ने अमेरिका का दौरा रद्द किया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ट्रंप के बयान पर पूरे इटली में गुस्सा है। इसी बीच, उप-प्रधानमंत्री एंटोनियो तजानी ने अचानक अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, &quot;प्रधानमंत्री मेलोनी के बारे में ट्रंप के गंभीर और आपत्तिजनक बयानों ने पूरे इटली को नाराज कर दिया है। इसी वजह से, मैंने 21 और 22 जून को होने वाली अपनी अमेरिकी यात्रा रद्द करने का फैसला किया है।&quot;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/trump-claims-meloni-begged-for-g7-photo-italy-pm-hits-back-sharply/articleshow-gk2873y"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[अमेरिका-इजराइल पर भड़का ईरान, उठाया ऐसा कदम जिससे हिल सकती है पूरी दुनिया]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/iran-blocks-strait-of-hormuz-again-after-israel-attack-lebanon-amid-ceasefire-deal-with-america/articleshow-gn9lisg</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 21:47:25 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;ईरान ने अमेरिका-इजराइल पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाकर होर्मुज फिर बंद कर दिया है। US ने कहा इसका कोई सबूत नहीं। इस तनाव से दुनिया में तेल संकट फिर बढ़ सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvjx4a85c0ssfhde6rzaqttq,imgname-strait-of-hormuz-1781972215473.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Iran closes Strait of Hormuz: &lt;/strong&gt;दुनिया में एक बार फिर बड़ी टेंशन शुरू हो गई है। मिडिल ईस्ट (Middle East) से आ रही एक खबर ने पूरी दुनिया के बाजारों और सरकारों को चिंता में डाल दिया है। अमेरिका से शांति समझौते के बाद ईरान ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसका सीधा असर आपकी और हमारी जेब पर भी पड़ सकता है। ईरान की सेना ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते यानी होर्मुज जलडमरू (Strait of Hormuz) को फिर से हर तरह के जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने उनका भरोसा तोड़ा है, इसलिए वे यह कदम उठा रहे हैं। इस फैसले से दुनियाभर में हलचल है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;US से शांति समझौता, फिर ईरान ने अचानक क्यों लिया यह फैसला?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान के सैन्य कमांड का कहना है कि लेबनान में जो सीजफायर (युद्धविराम) हुआ था, इजराइल और अमेरिका उसका पालन नहीं कर रहे हैं। ईरान ने इसे 'भरोसे का कत्ल' बताया है। ईरान के 'इलामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने साफ चेतावनी दी है, कि 'कोई भी जहाज इस रास्ते पर आने की गलती न करे। अगर कोई जहाज यहाँ आता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी।' ईरान ने यह भी कहा है कि यह तो सिर्फ उनका पहला कदम है। अगर अमेरिका और इजराइल नहीं सुधरे, तो आगे और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अमेरिका का क्या कहना है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) का दावा है कि उनके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे लगे कि यह समुद्री रास्ता बंद हुआ है। अमेरिका को अभी भी उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच जो शांति समझौता हुआ था, वह बना रहेगा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;शांति वार्ता के बीच यह ड्रामा क्यों?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यह पूरी टेंशन ऐसे समय पर हुई है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच एक बहुत बड़ी शांति वार्ता (Nuclear Deal Talks) होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ भी इस मीटिंग के लिए स्विट्जरलैंड पहुँचने वाले हैं। ईरान की टीम भी वहां जा रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इस बातचीत पर कहा कि 'कागजों पर समझौता करना आसान है, असली परीक्षा तब होती है जब उसे जमीन पर लागू करना हो।'&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;Hormuz बंद होने से दुनिया को क्या डर?&lt;/h2&gt;&lt;ol&gt; &lt;li&gt;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की तेल की लाइफलाइन है। दुनिया का लगभग एक-तिहाई (One-Third) कच्चा तेल और गैस इसी छोटे से समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;अगर ईरान ने इस रास्ते को सच में पूरी तरह ब्लॉक कर दिया, तो दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई रुक जाएगी।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;सप्लाई रुकते ही पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) के दाम आसमान छू सकते हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ol&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[Top 10 Morning News: वैश्विक तनाव से NEET पर नए बवाल तक, आज सुबह की 10 बड़ी खबरें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/top-10-morning-news-israel-iran-peace-deal-trump-modi-pakistan-neet-shiv-sena-june-20-2026/articleshow-gpnmgqb</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 07:02:02 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या इज़राइल-लेबनान हमलों ने US-ईरान शांति समझौते को खतरे में डाल दिया है? ट्रंप की मोदी पर बड़ी टिप्पणी के पीछे क्या कोई नया वैश्विक रणनीतिक संकेत छिपा है? UN में पाकिस्तान को फ्रेंकस्टीन स्टेट कहने के बाद क्या भारत-पाक तनाव और बढ़ेगा? क्या NEET विवाद और उद्धव ठाकरे के इस्तीफे की पेशकश देश की राजनीति व शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत हैं?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvhafthdrvr0n68gjyc08t95,imgname-top-10-morning-news-israel-iran-peace-deal-trump-modi-pakistan-neet-shiv-sena-june-20-2026-1781919115821.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Top 10 Morning News &lt;/strong&gt;में आज दुनिया और भारत से जुड़ी बड़ी घटनाओं ने सुर्खियां बटोरी हैं। इज़राइल-ईरान तनाव ने शांति प्रयासों पर सवाल खड़े किए हैं, ट्रंप ने मोदी की जमकर तारीफ की है, UN में पाकिस्तान पर भारत का तीखा हमला हुआ है, जबकि NEET विवाद और शिवसेना संकट ने देश की राजनीति और शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। लेकिन क्या ये घटनाएं किसी बड़े वैश्विक और राजनीतिक बदलाव का संकेत हैं?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;1. लेबनान हमलों से US-ईरान शांति समझौते पर संकट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित शांति समझौते पर अचानक अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। लेबनान में इज़राइली हवाई हमलों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति बिगड़ती दिखाई दे रही है। इन हमलों ने न केवल कूटनीतिक प्रयासों को झटका दिया है बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में स्थिरता को लेकर नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं। स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित वार्ता स्थगित होने से शांति प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;2. ट्रंप ने मोदी की नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना की&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विदेश नीति की खुलकर प्रशंसा की। ट्रंप ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने राजनीतिक स्थिरता हासिल की है और वैश्विक संघर्षों से दूरी बनाकर संतुलित विदेश नीति अपनाई है। इस बयान को भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;3. नाइजर एयरपोर्ट पर आतंकी हमला, कई लोगों की मौत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;नाइजर की राजधानी नियामे स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए बड़े आतंकी हमले ने अफ्रीका की सुरक्षा चुनौतियों को फिर उजागर कर दिया है। भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने सैन्य ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया। जवाबी कार्रवाई में कई आतंकियों को मार गिराया गया, जबकि बड़ी संख्या में संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;4. ब्रिटेन में स्टारमर सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर को अपनी ही पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने नेतृत्व परिवर्तन की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग की है। यह स्थिति ब्रिटिश राजनीति में नई अस्थिरता और संभावित सत्ता संघर्ष की ओर संकेत कर रही है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;5. UNESCO ने AI और मीडिया भुगतान पर वैश्विक पहल शुरू की&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;UNESCO ने दुनिया भर के मीडिया संस्थानों और तकनीकी कंपनियों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए व्यापक परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। संस्था का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म समाचार सामग्री का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए मीडिया संस्थानों को उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;6. संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को बताया 'फ्रेंकस्टीन स्टेट'&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत ने पाकिस्तान की आतंकवाद संबंधी नीतियों की कड़ी आलोचना की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देने की नीति अब पाकिस्तान के लिए ही चुनौती बन चुकी है। भारत के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस को जन्म दिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;7. VivaTech 2026 में मोदी ने दिखाई भारत की तकनीकी ताकत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;पेरिस में आयोजित VivaTech 2026 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तकनीकी उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तकनीकी नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;8. उद्धव ठाकरे ने इस्तीफे की पेशकश कर बढ़ाई सियासी हलचल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आया जब उद्धव ठाकरे ने सार्वजनिक मंच से नेतृत्व छोड़ने की इच्छा जताई। पार्टी के भीतर कथित असंतोष और सांसदों के संभावित विद्रोह की खबरों के बीच यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे शिवसेना (UBT) के भविष्य को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;9. पहली पीढ़ी के वकीलों के लिए विशेष कोष पर सुप्रीम कोर्ट का विचार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सुप्रीम Court ने ऐसे युवा वकीलों के लिए विशेष सहायता कोष का सुझाव दिया है जिनका पारिवारिक पृष्ठभूमि से कानून पेशे से कोई संबंध नहीं है। साथ ही महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा और बाल देखभाल संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा का भी निर्णय लिया गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;10. NEET-UG री-एग्जाम से पहले NTA पर बढ़ा दबाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;NEET-UG परीक्षा विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी पर पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है। री-एग्जाम की तैयारियों के बीच प्रशासन ने सुरक्षा उपायों को और कड़ा कर दिया है। लाखों छात्र और अभिभावक अब इस परीक्षा के सफल और निष्पक्ष संचालन पर नजर बनाए हुए हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/top-10-morning-news-israel-iran-peace-deal-trump-modi-pakistan-neet-shiv-sena-june-20-2026/articleshow-gpnmgqb"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[कौन है गौरव चोपड़ा? टेक्सास ट्रिपल मर्डर केस में भारतीय मूल का वो आरोपी छात्र, क्या है सच?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/who-is-gaurav-chopra-texas-triple-murder-indian-student-family-killing-case/articleshow-grssfd4</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 07:57:41 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या 19 वर्षीय गौरव चोपड़ा ने सच में अपने ही माता-पिता और दादी की हत्या की या कहानी में कोई अनदेखा रहस्य छिपा है? क्या वही इस ट्रिपल मर्डर मिस्ट्री की सबसे अहम कड़ी है? पुलिस को अब तक हत्या का मकसद क्यों नहीं मिला, जबकि पूरा परिवार खत्म हो गया? टेक्सास ट्रिपल मर्डर केस में क्या सामने आएगा ऐसा सच, जो भारतीय समुदाय को झकझोर देगा?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;टेक्सास: &lt;/strong&gt;अमेरिका के टेक्सास राज्य से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने न केवल वहां रह रहे भारतीय समुदाय बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। एक 19 वर्षीय भारतीय मूल के होनहार छात्र पर अपने ही माता-पिता और दादी की बेरहमी से गोली मारकर हत्या करने का संगीन आरोप लगा है। इस खौफनाक वारदात के बाद आरोपी छात्र पर 'कैपिटल मर्डर' (गंभीर हत्या) का केस दर्ज किया गया है। आखिर एक हंसते-खेलते परिवार में ऐसा क्या हुआ कि खून के रिश्ते ही एक-दूसरे के दुश्मन बन गए?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;टस्कनी विलेज में आधी रात का सस्पेंस: तीन पीढ़ियों का एक साथ खात्मा!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;घटना 17 जून की है, जब टेक्सास के ऑल्टन के पास स्थित आलीशान टस्कनी विलेज सबडिविजन के एक घर में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। पुलिस को 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास रियो ग्रांडे वैली' (UTRGV) के छात्र गौरव चोपड़ा के घर पर बुलाया गया था। जब हिडाल्गो काउंटी शेरिफ कार्यालय की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का मंजर देखकर अनुभवी अधिकारियों के भी होश उड़ गए। घर के भीतर तीन अलग-अलग पीढ़ियों के सदस्यों की लाशें खून से लथपथ पड़ी थीं। मृतकों की पहचान गौरव के पिता सीता राम (56 वर्ष), मां कमलेश रानी (46 वर्ष) और 73 वर्षीय दादी महिंदर कौर के रूप में हुई। फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि तीनों की मौत सिर में बेहद नजदीक से गोली लगने की वजह से हुई थी।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;911 कॉल का खौफनाक राज: सगे भाई पर भी तान दी बंदूक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पूरी खौफनाक कहानी का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को एक घबराई हुई 911 कॉल मिली। यह कॉल किसी और ने नहीं, बल्कि गौरव के 21 वर्षीय बड़े भाई साजन ने की थी। साजन ने थरथराते हुए पुलिस को बताया कि उसके छोटे भाई ने माता-पिता और दादी को गोली मार दी है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, गौरव की हैवानियत यहीं नहीं रुकी; उसने भागने से पहले अपने सगे भाई साजन पर भी जानलेवा फायर किया, लेकिन खुशकिस्मती से निशाना चूक गया और साजन की जान बच गई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;कौन थे मृतक?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान 56 वर्षीय सीता राम, 46 वर्षीय कमलेश रानी और 73 वर्षीय महिंदर कौर के रूप में हुई है। परिवार स्थानीय भारतीय समुदाय में सम्मानित माना जाता था। शेरिफ एडी गुएरा ने बताया कि सीता राम एक सफल व्यवसायी थे और समुदाय में उनकी अच्छी पहचान थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे। ऐसे परिवार में हुई यह हिंसक घटना लोगों के लिए समझ से परे है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;क्या भाई भी था निशाने पर?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जांच में सामने आया कि आरोपी गौरव चोपड़ा ने कथित रूप से अपने 21 वर्षीय भाई साजन पर भी गोली चलाने की कोशिश की थी। हालांकि वह हमले में बच गया। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि हमले का दायरा केवल तीन लोगों तक सीमित नहीं था। यही वह तथ्य है जिसने जांचकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर उस रात घर के भीतर ऐसा क्या हुआ जिसने पूरे परिवार को निशाना बना दिया।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;हाई-स्पीड चेस और भयानक एक्सीडेंट: कैसे दबोचा गया कातिल?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;वारदात को अंजाम देकर गौरव अपनी गाड़ी से तेजी से फरार हो गया, जिसके बाद पूरी हिडाल्गो काउंटी की पुलिस उसके पीछे लग गई। अमेरिकी सड़कों पर हॉलीवुड फिल्मों की तरह हाई-स्पीड चेस (पीछा करने का सिलसिला) शुरू हुआ। पुलिस से बचने की अपनी आखिरी कोशिश में गौरव ने गाड़ी की रफ्तार इतनी बढ़ा दी कि वह नियंत्रण खो बैठा। 4 माइल लाइन रोड और ग्लासकॉक रोड के चौराहे के पास उसकी गाड़ी एक अन्य कार से भीषण रूप से टकरा गई। इस भयानक हादसे में दूसरी गाड़ी में सवार दो निर्दोष लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने एक्सीडेंट स्पॉट से वह हैंडगन (पिस्तौल) भी बरामद कर ली है, जिससे तीनों हत्याएं की गई थीं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;जांचकर्ताओं के सामने अजीब दावे: आखिर क्या था कत्ल का मकसद?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कोर्ट में गुरुवार को गौरव चोपड़ा की पेशी हुई, जहां उस पर हत्या और हत्या के प्रयास के कई आरोप तय किए गए। इन संगीन जुर्मों के लिए अदालत ने कोई बॉन्ड (जमानत) तय नहीं किया है, जबकि गिरफ्तारी से बचने की कोशिश के आरोप में $250,000 का बॉन्ड लगाया गया है। शेरिफ एडी गुएरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपी गौरव पूछताछ में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहा है और जांचकर्ताओं के सामने ऐसे अजीब दावे कर रहा है जो &quot;पूरी तरह से मनगढ़ंत और असत्य&quot; हैं। पुलिस अभी तक इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे के असली मकसद का पता नहीं लगा पाई है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;पुश्तैनी गांव में मातम और सुरक्षा पर उठते बड़े सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;गौरव के पिता सीता राम पामव्यू इलाके के एक जाने-माने और प्रतिष्ठित व्यवसायी थे, जो हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे। पंजाब के नवांशहर जिले में स्थित उनके पुश्तैनी गांव में जैसे ही इस कत्लेआम की खबर पहुंची, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। यह घटना जॉर्जिया मर्डर केस (जहां विजय कुमार पर पत्नी की हत्या का आरोप है) और कनाडा में विधि मेघा की हत्या जैसी हालिया हिंसक घटनाओं की याद दिलाती है। विदेशों में भारतीय मूल के परिवारों के बीच बढ़ती मानसिक तनाव की घटनाएं और भारतीय छात्रों की सुरक्षा अब एक बेहद चिंताजनक विषय बन चुकी है। इस सक्रिय आपराधिक जांच पर यूनिवर्सिटी (UTRGV) प्रशासन ने भी कानून एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की बात कही है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
            <atom:link href="https://hindi.asianetnews.com/news/who-is-gaurav-chopra-texas-triple-murder-indian-student-family-killing-case/articleshow-grssfd4"/>
        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[UN में भारत का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार, पाकिस्तान को क्यों कहा 'फ्रेंकस्टीन स्टेट'?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/india-slams-pakistan-frankenstein-state-unhrc-terrorism-pok-kashmir-anupama-singh/articleshow-i6xtmdv</link>
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            <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:51:35 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या UNHRC में भारत का &quot;फ्रेंकस्टीन स्टेट&quot; हमला पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर घेर देगा? क्या आतंकियों को समर्थन देने की कथित स्वीकारोक्ति पाकिस्तान के लिए नया संकट बनेगी? PoK में विरोध प्रदर्शनों और मौतों के पीछे आखिर क्या सच छिपा है? क्या कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख उसकी घरेलू नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvfc1pph2p0xvxv036snctrw,imgname-india-slams-pakistan-frankenstein-state-unhrc-terrorism-pok-kashmir-anupama-singh-1781853641425.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;India Pakistan UNHRC:&lt;/strong&gt; संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इतिहास में अब तक की सबसे तीखी और करारी फटकार लगाई है। आतंकवाद को लेकर हमेशा रोना रोने वाले और खुद को पीड़ित बताने वाले पाकिस्तान के पाखंड की परतें भारत ने पूरी दुनिया के सामने उधेड़ कर रख दी हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने बिना किसी झिझक के पाकिस्तान को एक 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' (Frankenstein State) करार दिया। भारत के इस आक्रामक रुख और बेहद सख्त बयानों ने वैश्विक मंच पर तहलका मचा दिया है, जिससे नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच का कूटनीतिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;खुद का बनाया राक्षस जब खुद को ही काटने दौड़े: 'फ्रेंकस्टीन' का खौफनाक सच&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के उस विरोधाभास को बेनकाब किया, जिसे वह सालों से दुनिया के सामने छुपाने की कोशिश कर रहा था। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने सवाल उठाया कि जो देश सरकारी नीति के तहत आतंकवादियों को पालता है, वह खुद को पीड़ित कैसे कह सकता है?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;#WATCH | First Secretary at the Permanent Mission of India to the United Nations, Anupama Singh says, &quot;...Decades of military land grabs, demographic engineering and the denial of basic freedoms have brought matters to a point where where even demand for bread, electricity,&hellip; pic.twitter.com/eTu09borhE&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; DD India (@DDIndialive) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;अनुपमा सिंह ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, &quot;यह एक ऐसे 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' का जीता-जागता उदाहरण है, जो तब हैरान रह जाता है जब उसका अपना ही बनाया राक्षस (आतंकवाद) उसे ही काटने दौड़ता है।&quot; भारत का यह इशारा साफ तौर पर मैरी शेली के मशहूर उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' की तरफ था, जिसमें एक वैज्ञानिक एक ऐसा राक्षस बना देता है जो बाद में खुद उसी के नियंत्रण से बाहर होकर उसी को तबाह कर देता है। भारत ने साफ किया कि पाकिस्तान ने भारत और दुनिया को नुकसान पहुंचाने के लिए जो आतंकी नेटवर्क तैयार किया था, अब वही नेटवर्क खुद पाकिस्तान की बर्बादी का कारण बन रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;रक्षा मंत्री का वो कबूलनामा: 30 साल तक किया अमेरिका का 'गंदा काम'&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत ने UNHRC में पाकिस्तान के ही रक्षा मंत्री के पुराने बयानों को हथियार बनाकर उन पर वार किया। हालांकि सिंह ने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस चौंकाने वाले इंटरव्यू की तरफ था जिसने कुछ समय पहले अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; BREAKING: India raises the situation in Pakistan-occupied Kashmir at the UN Human Rights Council.&ldquo;Demands for bread were met with bullets and brutality,&rdquo; Indian diplomat Anupama Singh said, highlighting the killing of protesters in Rawalakot and the worsening conditions in&hellip; pic.twitter.com/p5Fx51xz7q&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; War &amp;amp; Gore (@Goreunit) June 18, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;ख्वाजा आसिफ ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने तीन दशकों से भी ज्यादा समय तक आतंकवादी संगठनों को न सिर्फ पनाह दी, बल्कि उन्हें ट्रेनिंग और भारी-भरकम फंडिंग भी मुहैया कराई। आसिफ ने बेहद शर्मनाक तरीके से कबूला था कि 9/11 के हमलों के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के इशारों पर उनके लिए &quot;गंदा काम&quot; (Dirty Work) किया था। भारत ने इसी कबूलनामे को दुनिया के सामने रखते हुए पूछा कि जब इनके खुद के रक्षा मंत्री आतंकवाद को पालने की बात गर्व से स्वीकार करते हैं, तो इनका पीड़ित बनने का नाटक अब और कितने दिन चलेगा?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;पीओके में रोटी के बदले गोलियां: कश्मीर पर पाकिस्तान को दो टूक संदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;आतंकवाद के अलावा भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के क्रूर हनन का मुद्दा उठाकर इस्लामाबाद को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। हाल ही में रावलकोट और पूरे पीओके में बढ़ती महंगाई, आटे-चावल की किल्लत और बिजली की आसमान छूती दरों के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई थी।&lt;/p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;बर्बर कार्रवाई: &lt;/strong&gt;जब भूखी जनता ने सरकार से रोटी और सब्सिडी वाले अनाज की मांग की, तो पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने उन पर गोलियां बरसा दीं।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;खौफनाक आंकड़े: &lt;/strong&gt;इस दमनकारी कार्रवाई में 16 बेकसूर नागरिकों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;&lt;strong&gt;संसार से कटे लोग: &lt;/strong&gt;जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के मुताबिक, विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी गई थी। भारत ने साफ कहा कि रोटी मांगने वालों को गोलियां देना ही पाकिस्तान का असली मानवाधिकार रिकॉर्ड है।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;कश्मीर पर प्रोपेगैंडा बंद करो, अपना घर संभालो: भारत की अंतिम चेतावनी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;table&gt; &lt;tbody&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;&lt;strong&gt;भारत का स्पष्ट रुख (India's Stance)&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;&lt;strong&gt;पाकिस्तान की जमीनी हकीकत (Pakistan's Reality)&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न अंग है।&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;घरेलू नाकामियों और आर्थिक तंगाली को छिपाने के लिए कश्मीर का राग अलापना।&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;एकमात्र अनसुलझा मुद्दा PoK पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;रावलकोट जैसी त्रासदियां और दमनकारी नीतियां।&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;अनुपमा सिंह ने अंत में पाकिस्तान को अपनी हरकतों से बाज आने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर फैलाया जाने वाला झूठ असल में पाकिस्तान की अपनी घरेलू और आर्थिक नाकामियों को छिपाने की एक हताश कोशिश मात्र है। भारत ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि पाकिस्तान भारतीय इलाकों पर बेबुनियाद दावे ठोकने के बजाय पहले अपने ढहते हुए घर को संभाले। इस महा-टक्कर के बाद अब देखना यह है कि दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका पाकिस्तान वैश्विक बिरादरी को क्या मुंह दिखाता है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[ढाका में क्यों गूंजे 'जय श्री राम' के नारे? बांग्लादेशी हिंदूओं का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/dhaka-hindu-protest-jai-shri-ram-bangladesh-ram-statue-controversy-minority-rights-news/articleshow-i79qgff</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:56:40 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या ढाका में हिंदू प्रदर्शन बांग्लादेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा करेगा? क्या 81 फुट ऊंची भगवान राम की मूर्ति का रुका निर्माण फिर शुरू होगा या विवाद और गहराएगा? क्या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल बांग्लादेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेंगे? क्या 72 घंटे के अल्टीमेटम के बाद हिंदू संगठनों का आंदोलन देशव्यापी रूप ले सकता है?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvhyjzavn29ygd57pkv6wv7y,imgname-dhaka-hindu-protest-jai-shri-ram-bangladesh-ram-statue-controversy-minority-rights-news-1781940190555.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ढाका: &lt;/strong&gt;मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश बांग्लादेश से इस वक्त की सबसे बड़ी और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है। राजधानी ढाका की सड़कें हजारों हिंदू प्रदर्शनकारियों और जलती हुई मशालों के हुजूम से पट गई हैं। 'जय श्री राम' के गगनभेदी नारों और हाथों में धधकती मशालें लिए अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सनातन धर्म के आराध्य भगवान राम की तस्वीर के कथित घोर अपमान और उनकी एक विशाल मूर्ति के प्रोजेक्ट को जबरन रोके जाने के बाद उपजा यह आक्रोश अब एक बड़े देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; Hindus in Bangladesh roar against Islamists by chanting &quot;Jay Shri Ram&quot; slogan!Thousands of Hindus in Bangladesh went into the streets holding torch and chanting &quot;Jay Shri Ram&quot; slogan against recent notoriety of Islamists against the Sanatan Complex in Gaibandha district&hellip; pic.twitter.com/VCs02k0c1J&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Salah Uddin Shoaib Choudhury (@salah_shoaib) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;80% काम पूरा और फिर&hellip;81 फुट ऊंची राम मूर्ति पर मंडराया बुलडोजर का साया!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पूरे विवाद की शुरुआत उत्तरी गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके से हुई। वहां एक भव्य मंदिर परिसर के हिस्से के रूप में भगवान राम की 81 फुट ऊंची ऐतिहासिक मूर्ति का निर्माण किया जा रहा था। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 22 करोड़ बांग्लादेशी टका (करीब 15.6 करोड़ रुपये) है, जिसमें भगवान कृष्ण और शिव की विशाल मूर्तियां भी शामिल हैं। मूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, लेकिन तभी कट्टरपंथी इस्लामी समूहों और एक उपदेशक ने इस मूर्ति को सीधे 'बुलडोजर' से ढहाने की खौफनाक धमकी दे डाली। मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने रोते हुए बताया कि वे बेहद डरे हुए हैं और इसी खौफ के कारण काम को रोकना पड़ा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;BREAKING | Bangladeshi Hindus launch massive torchlight protest in Dhaka over desecration of Bhagwan Shri RamBangladeshi Hindus staged a massive torchlight procession at Dhaka University tonight, demanding justice after Islamists desecrated an image of Bhagwan Shri Ram by&hellip; pic.twitter.com/rLao3s318V&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Ashwini Shrivastava (@AshwiniSahaya) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;तस्वीर पर जूता और शाहबाग चौराहे पर जलती मशालें: 72 घंटे का अल्टीमेटम!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सस्पेंस और गुस्सा तब सातवें आसमान पर पहुंच गया जब यह दावा किया गया कि इस महीने की शुरुआत में एक प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने भगवान राम की पवित्र तस्वीर पर जूता रखकर उसका सरेआम अपमान किया। इस अपमान की आग शुक्रवार को ढाका की सड़कों पर दिखाई दी। 'हिंदू महाजोत' और छात्रों के आह्वान पर हजारों लोगों ने मुख्य शाहबाग चौराहे को घेर लिया और नेशनल प्रेस क्लब तक एक विशाल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नवनिर्वाचित सरकार को सीधे 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;#BangladeshHindus are protesting in #Dhaka against the insult of Prabhu Sri Ram by Islamists.&amp;nbsp;A few days ago, in rally, Islamists openly insulted Prabhu Sri Ram by slapping shoes in a photo of Prabhu Sri Ram. pic.twitter.com/DydhnDBS8j&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Hindu Voice (@HinduVoice_in) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;'सभी 64 जिलों में बनेगा राम मंदिर'... हिंदुओं का अब तक का सबसे बड़ा पलटवार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ हिंदू संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। हिंदू महाजोत ने बांग्लादेश सरकार को खुली चेतावनी दी है कि अगर पलाशबाड़ी में भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे कानूनी लड़ाई से आगे बढ़कर बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में एक-एक करके भव्य राम मंदिर का निर्माण करेंगे। रंगपुर इलाके में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश के बाद पुलिस और हिंदुओं के बीच मामूली झड़पें भी दर्ज की गई हैं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Dhaka | Hindu community in Bangladesh protest against 'the insult of Lord Ram' and held a torchlight procession in Dhaka, demanding the arrest of the culpritConstruction of an idol of Lord Ram at the Sanatan Complex at Polash Bari in Gaibandha was halted after+1 pic.twitter.com/AQIBpxmczX&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Avinash K S (@AvinashKS14) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;133 सांप्रदायिक घटनाएं और तारिक रहमान सरकार की अग्निपरीक्षा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8% हिस्सा हैं। यह खौफनाक मोड़ ऐसे समय में आया है जब हाल ही में देश में मुहम्मद यूनुस के शासनकाल के बाद राजनीतिक बदलाव हुआ है और फरवरी 2046 में तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री का पदभार संभाला है। हालांकि, पीएम रहमान ने अपने राष्ट्रीय संबोधन में कहा था कि &quot;देश सभी का है&quot;, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच ही सांप्रदायिक हिंसा की 133 दर्दनाक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। धार्मिक मामलों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की आशंका है। पूरी दुनिया की नजरें अब ढाका पर टिकी हैं कि क्या तारिक रहमान सरकार इस सस्पेंस और भारी तनाव को शांत कर पाएगी या बांग्लादेश एक नए आंतरिक गृहयुद्ध की ओर बढ़ जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;HINDU TIGRESS ROARS from Bangladesh! &ldquo;I am a Sanatani. You take taxes from me &mdash; don&rsquo;t I have equal rights? You block roads for namaz with mosques standing empty, yet we must explain installing Shri Ram at home? Bangladesh belongs to us too. Push us further and we&rsquo;ll build&hellip; pic.twitter.com/ylz8aJzpEw&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Dr RK Singh (@DrRupak) June 20, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;मूर्ति निर्माण रोकने पर मंदिर समिति ने क्या कहा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने कहा कि धमकियों के कारण काम रोकना पड़ा। उन्होंने कहा कि समुदाय में डर का माहौल है और सरकार से हस्तक्षेप की अपील की गई है।समिति के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंता ने कहा कि निर्माण रोकने का फैसला सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। समिति का कहना है कि वह किसी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहती, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की इच्छा रखती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
        <item>
            <title><![CDATA[Top 10 Morning News: मॉस्को में आग, इबोला की इंट्री और सूखे का अलर्ट! दुनिया की 10 बड़ी खबरें]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/top-10-morning-news-june-19-2026-us-iran-peace-talks-moscow-drone-attack-india-eu-fta-nse-ipo/articleshow-mwgbdab</link>
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            <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 06:53:13 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या US-ईरान शांति वार्ता वास्तव में मध्य पूर्व का भविष्य बदलने वाली है? क्या मॉस्को पर ड्रोन हमला रूस-यूक्रेन युद्ध को और खतरनाक मोड़ पर ले जाएगा? क्या NSE का ₹30,000 करोड़ IPO और India-EU FTA भारत की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाएंगे? क्या कमजोर मानसून, केरल में इबोला अलर्ट और वैश्विक तनाव 2026 की सबसे बड़ी चुनौतियों का संकेत हैं?&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kveqk05kxf29hy1v5qkqw7gd,imgname-top-10-morning-news-june-19-2026-us-iran-peace-talks-moscow-drone-attack-india-eu-fta-nse-ipo-000-1781832188083.png" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Today Top 10 Morning News:&lt;/strong&gt; यह है शुक्रवार, 19 जून 2026 की सुबह की टॉप 10 बड़ी खबरें-जहां दुनिया की निगाहें अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर टिकी हैं, मॉस्को में ड्रोन हमले ने तनाव बढ़ा दिया है, FIFA वर्ल्ड कप ने रोमांचक शुरुआत की है, और भारत-EU व्यापार समझौता नई आर्थिक दिशा का संकेत दे रहा है। वहीं देश में NSE का मेगा IPO, कमजोर मानसून, केरल में इबोला अलर्ट और रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन सुर्खियों में हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल-क्या ये घटनाएं 2026 की वैश्विक और भारतीय राजनीति का पूरा खेल बदलने वाली हैं?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;1. स्विट्जरलैंड की वादियों में महाशक्तियों का सीक्रेट गेम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में US और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक: स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक माउंटेनटॉप रिज़ॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच आज एक सीक्रेट और बेहद संवेदनशील बातचीत होने जा रही है। क्या ट्रंप का ईरान को सीमित मिसाइल प्रोग्राम की इजाजत देना और पाकिस्तान-कतर की मध्यस्थता पश्चिम एशिया में दशकों पुरानी दुश्मनी को हमेशा के लिए खत्म कर पाएगी?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;2. आधी रात को दहला मॉस्को, आसमान में मंडराया खतरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;यूक्रेन के ड्रोन हमले से मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी में आग लगी, उड़ानें बाधित: एक खौफनाक ड्रोन हमले ने मॉस्को की सबसे अहम ऑयल रिफाइनरी को आग के गोले में तब्दील कर दिया। आसमान में उठे धुएं के गुबार के बीच आनन-फानन में राजधानी के कई हवाई अड्डों पर उड़ानों को रोकना पड़ा। हाई अलर्ट पर बैठी रूसी सेना अब यूक्रेन के इस बड़े और सीधे दुस्साहस का क्या जवाब देगी?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;3. पेरिस की धरती से PM मोदी का दुनिया को बड़ा संदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;PM मोदी ने पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करके G7 और यूरोप का दौरा पूरा किया: स्लोवाकिया और फ्रांस के अपने अहम दौरे के आखिरी पड़ाव पर पीएम मोदी ने पेरिस में प्रवासी भारतीयों के सामने भारत की बढ़ती डिजिटल ताकत का लोहा मनवाया। दुनिया देख रही है कि कैसे भारत अब पश्चिम के देशों के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि एक बराबर का और बेहद शक्तिशाली ग्लोबल पार्टनर बन चुका है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;4. फुटबॉल के महाकुंभ में बड़ा उलटफेर, दिग्गज के छूटे पसीने&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;FIFA वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत: इंग्लैंड ने क्रोएशिया को हराया; रोनाल्डो को संघर्ष करना पड़ा: फीफा वर्ल्ड कप का आगाज ऐसे धमाकेदार तरीके से होगा, किसी ने नहीं सोचा था! जहां इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से रौंदकर अपनी ताकत दिखाई, वहीं पूरी दुनिया की नजरें क्रिस्टियानो रोनाल्डो पर टिक गईं। मैदान पर रोनाल्डो का जादू फीका पड़ता दिखा, जिससे उनके भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;5. ड्रैगन को मात देने के लिए भारत-यूरोप का महा-समझौता&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता 2026 के अंत तक साइन होने की राह पर: बंद कमरों में हुई बेहद गोपनीय बातचीत के बाद एक ऐसी खबर आई है जो ग्लोबल ट्रेड का नक्शा बदल देगी। यूरोपीय संघ ने पुष्टि की है कि भारत के साथ इस साल के अंत तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन हो जाएगा। सप्लाई चेन और व्यापार के नियमों को बदलने वाला यह दांव चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;6. दलाल स्ट्रीट पर अब तक का सबसे बड़ा धमाका, हिलेगा बाजार!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;NSE ने ₹30,000 करोड़ के बड़े IPO के लिए आवेदन किया, भारत का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू: भारतीय कॉर्पोरेट जगत के इतिहास में एक ऐसा भूचाल आने वाला है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने ₹30,000 करोड़ के मेगा IPO के लिए दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं। बाजार में लिक्विडिटी की इस सबसे बड़ी परीक्षा में क्या घरेलू और विदेशी निवेशक इतिहास रच पाएंगे?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;7. तपती धरती और खाली आसमान: भारत पर मंडराया बड़ा संकट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अल नीनो के कारण बारिश में भारी देरी से पूरे भारत में मॉनसून की कमी 40% तक पहुँची: देश के अन्नदाताओं की सांसें अटक गई हैं क्योंकि अल नीनो के खौफनाक असर के चलते मॉनसून में रिकॉर्ड 40% की गिरावट दर्ज की गई है। खरीफ की फसलों पर सूखे का काला साया मंडरा रहा है। सरकार युद्ध स्तर पर आपातकालीन योजनाएं तो बना रही है, लेकिन क्या समय रहते इस बड़े आर्थिक संकट को टाला जा सकेगा?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;8. केरल का नया बजट: वित्तीय संकट के बीच क्या सतीसन दिखा पाएंगे जादू?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;केरल बजट 2026-27: UDF सरकार आज संशोधित वित्तीय रोडमैप पेश करेगी: मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन आज केरल का वो बजट पेश करने जा रहे हैं जो उनकी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा है। एक तरफ राज्य की कंगाली को उजागर करने वाली 'श्वेत पत्र' की रिपोर्ट है, तो दूसरी तरफ 'इंदिरा गारंटी' जैसी लोकलुभावन योजनाएं। क्या सतीसन खाली खजाने के बावजूद इस मुश्किल चक्रव्यूह को भेद पाएंगे?&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;9. एक अनजान महिला और वायरस का साया: हाई अलर्ट पर मेडिकल टीमें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;केरल में इबोला के संदिग्ध मामले के बाद हाई अलर्ट और आइसोलेशन प्रोटोकॉल लागू: दक्षिण सूडान से लौटी एक महिला के शरीर में मिले लक्षणों ने पूरे देश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। संदिग्ध मरीज को तुरंत कड़े आइसोलेशन में डाल दिया गया है और ब्लड सैंपल्स जांच के लिए भेजे गए हैं। क्या भारत में इबोला वायरस की एंट्री हो चुकी है? सस्पेंस गहरा गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;10. हथियारों के आयातक से महाशक्ति बनने तक: भारत का अभूतपूर्व रिकॉर्ड&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचा: कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार देश रहा भारत अब खुद एक घातक मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बन गया है। रक्षा मंत्रालय के इस ऐलान ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है कि भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के पार जा चुका है। भारत की यह आत्मनिर्भरता दुश्मनों के होश उड़ाने के लिए काफी है।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद! क्या महंगा होगा पेट्रोल और LPG, भारत पर कितना पड़ेगा असर?]]></title>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 22:39:49 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;ईरान ने अमेरिका-इजराइल पर डील तोड़ने का आरोप लगा होर्मुज स्ट्रेट फिर से बंद कर दिया है। जानिए भारत पर इसका क्या असर होगा? क्या पेट्रोल-LPG फिर महंगे हो जाएंगे?&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Strait of Hormuz Impact on India: &lt;/strong&gt;मिडिल ईस्ट (Middle East) से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ईरान ने एक बार फिर दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया है। लेबनान पर हो रहे इजराइली हमले से नाराज ईरान ने यह कदम उठाया है। हालांकि, अमेरिका का दावा है कि होर्मुज बंद होने का उसके पास कोई सबूत नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर हालात फिर से बिगड़ते हैं, तो भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या पेट्रोल, डीजल और LPG फिर महंगे हो सकते हैं? आइए जानते हैं पूरा मामला और भारत पर कितना असर पड़ सकता है...&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;ईरान ने फिर से क्यों बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;ईरान की सैन्य कमान और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया। ईरान का आरोप है कि लेबनान में संघर्ष जारी है, इजराइल हमले कर रहा है, इसलिए उसने जवाबी कदम उठाने का फैसला किया है। ईरान ने जहाजों को चेतावनी भी दी है कि वे इस क्षेत्र के पास आने से बचें। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि आगे और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;अमेरिका ने होर्मुज के दोबारा बंद होने पर क्या कहा?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने ईरान के दावे को चुनौती दी है। अमेरिका का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जारी है और उनके 55 कॉमर्शियल जहाज वहां से सुरक्षित निकले हैं और बड़ी मात्रा में तेल लेकर गए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि तेल के टैंकर लगातार चल रहे हैं और रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;होर्मुज स्ट्रेट पश्चिम एशिया का वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल और गैस गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले लाखों बैरल तेल की सप्लाई इसी रास्ते के जरिए दुनिया तक पहुंचती है। यही वजह है कि जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है, पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार की धड़कनें तेज हो जाती हैं। फरवरी आखिरी से चल रहे जंग की वजह से यह रास्ता बंद था, जिससे दुनियाभर में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ गई थीं, लेकिन अमेरिका से शांति समझौते की डील की वजह से इसके खुलने की उम्मीद थी, इस बीच ईरान ने फिर से इस रास्ते को बंद कर दिया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;भारत पर क्या असर होगा? क्या महंगा होगा पेट्रोल और LPG?&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पेट्रोल-डीजल की कीमतें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (Crude Oil) विदेशों से मंगाता है। रास्ता बंद होने या तनाव बढ़ने से माल ढुलाई का खर्च (Shipping Cost) बढ़ जाता है। अगर इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़े, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, अंतिम फैसला कई बातों पर निर्भर करेगा। जैसे तनाव कितने दिन चलता है, होर्मुज स्ट्रेट वास्तव में कितना प्रभावित होता है, तेल उत्पादक देशों की प्रतिक्रिया क्या रहती है, वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता कितनी रहती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रसोई गैस (LPG) पर असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारत पहले अपनी 90% एलपीजी पश्चिम एशिया से मंगाता था, लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग और होर्मुज के बंद होने के चलते भारत ने अपनी रणनीति बदली और अमेरिका, अर्जेंटीना, फ्रांस, नीदरलैंड, चिली समेत कई देशों से गैस और एनर्जी प्रोडक्ट्स खरीदना शुरू कर दिया। इस वजह से देश में गैस की कमी (Shortage) तो नहीं होगी। चूंकि गैस बहुत दूर वाले देशों से आ रही है, इसलिए जहाजों का किराया और सप्लाई चेन का खर्च काफी बढ़ गया है।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;स्विट्जरलैंड में बातचीत पर टिकी दुनिया की नजर&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान की बैठक का क्या नतीजा निकलता है। अगर बातचीत सफल रही और समंदर का रास्ता सुरक्षित रहा, तो आने वाले महीनों में गैस और तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन अगर इजराइल के हमले जारी रहे और ईरान अड़ा रहा, तो बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Satyam Bhardwaj</dc:creator>
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            <title><![CDATA[स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करके भारत पहुंचा पहला LNG कैरियर 'दिशा'-देखें VIDEO]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/lng-carrier-disha-crosses-strait-of-hormuz-reaches-dahej-india-energy-supply-gas-crisis/articleshow-yxl4fdk</link>
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            <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:28:38 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या होर्मुज के संकट के बीच LNG कैरियर दिशा का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए बड़ी राहत है? क्या पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा अब टल गया है? क्या 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर आया यह जहाज समुद्री सुरक्षा में नया भरोसा जगाएगा? क्या अमेरिका-ईरान समझौते से होर्मुज मार्ग फिर से वैश्विक व्यापार के लिए सुरक्षित हो पाएगा?&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvf7avzx59z5jywft73x1raz,imgname-lng-carrier-disha-crosses-strait-of-hormuz-reaches-dahej-india-energy-supply-gas-crisis-1781848698877.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;LNG Carrier Disha Reaches Dahej:&lt;/strong&gt; पश्चिम एशिया में जारी भयानक युद्ध और बारूद की गूंज के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बेहद राहत भरी लेकिन सांसें थाम देने वाली खबर सामने आई है। लगभग साढ़े तीन महीने से भी अधिक समय से बंद पड़े दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते से गुजरकर पहला भारतीय कमर्शियल जहाज सुरक्षित भारत की धरती पर लौट आया है। माल्टा के झंडे वाला विशालकाय लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) कैरियर 'दिशा' (LNGC Disha) सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार करने के बाद गुजरात के दहेज बंदरगाह पर पहुँच चुका है। इस जहाज की वापसी महज़ एक व्यापारिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपी है अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति, युद्धविराम का सस्पेंस और करोड़ों भारतीयों के घरों में जलने वाले चूल्हे की सुरक्षा।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;जब थम गई थीं भारत की सांसें: कतर का वो 'फोर्स मेज्योर' और बंद हुआ समंदर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस पूरे सस्पेंस की शुरुआत इस साल 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर अचानक सैन्य हमले कर दिए थे। इसके जवाब में बौखलाए तेहरान ने दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री लाइफलाइन कहे जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया। यह रास्ता बंद होते ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में हाहाकार मच गया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी मांग को पूरा करने के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है, जिसका लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा कतर जैसे खाड़ी देशों से इसी रास्ते से होकर आता है। रास्ता बंद होते ही कतर ने भारत सहित कई वैश्विक खरीदारों को LNG शिपमेंट देने से हाथ खड़े कर दिए और 'फोर्स मेज्योर' (अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण अनुबंध पूरा न कर पाना) लागू कर दिया। भारत के सामने अचानक एक बहुत बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था, क्योंकि गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच चुकी थी।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;LNG carrier 'Disha', first Indian vessel that crossed Hormuz after US Iran Peace Framework was announced, docks at Gujarat's Dahej Port.pic.twitter.com/CT64AzdPeh&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Sidhant Sibal (@sidhant) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;मौत के मुहाने से गुजरा 62,000 टन बारूद: पेट्रोनेट जेटी पर हाई-अलर्ट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;कड़े तनाव और अनिश्चितता के बीच, 15 जून को LNG कैरियर 'दिशा' ने उस संकरे और युद्ध प्रभावित शिपिंग रास्ते में प्रवेश किया जहाँ किसी भी वक्त मिसाइल या ड्रोन हमला होने का खतरा था। इस जहाज पर 62,370 मीट्रिक टन अत्यधिक ज्वलनशील लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लदी हुई थी, जो किसी बड़े धमाके की सूरत में जलते हुए तबाही के गोले में तब्दील हो सकती थी। शुक्रवार की सुबह जब इस जहाज ने गुजरात के भरूच पोर्ट अथॉरिटी के अंतर्गत आने वाले दहेज बंदरगाह पर लंगर डाला, तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। गुजरात पोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, जहाज को तुरंत पेट्रोनेट LNG जेटी पर खड़ा किया गया और सुरक्षा जांच शुरू की गई।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;ट्रंप-मोदी की सीक्रेट टॉक: कैसे फ्रांस की धरती से खुला बंद समंदर का ताला?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस खतरनाक मिशन की सफलता के पीछे एक बहुत बड़ी और गोपनीय कूटनीतिक जीत छिपी हुई है। दरअसल, यह जहाज इस रास्ते से तब गुजर सका जब अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती युद्धविराम समझौते की घोषणा हुई। समझौते के तहत तेहरान ने 60 दिनों के लिए इस समुद्री रास्ते से बिना किसी टोल के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी और बदले में अमेरिकी सेना ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटा लिया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;First Indian LNG Tanker Disha Arrives at Dahej Port in Gujarat After Crossing Strait of Hormuzhttps://t.co/QOg9TFWOG2 pic.twitter.com/oFtEcd1Pen&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; DeshGujarat (@DeshGujarat) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इस युद्धविराम के ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में आयोजित G7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक बेहद अहम द्विपक्षीय बैठक की थी। इस बैठक में पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में नेविगेशन की आज़ादी और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद आक्रामक तरीके से उठाया था। मोदी और ट्रंप की इसी केमिस्ट्री का नतीजा था कि 'दिशा' को सुरक्षित रास्ता मिल सका।&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;आगे क्या? 60 दिनों की मोहलत और भारत का अगला कदम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने गुरुवार को ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि 'दिशा' शुक्रवार सुबह दहेज पहुंच जाएगा, और ठीक वैसा ही हुआ। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा प्रबंधित यह जहाज अब भारत के लिए एक नई उम्मीद बन चुका है।&lt;/p&gt;&lt;table&gt; &lt;tbody&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;&lt;strong&gt;मुख्य बिंदु (Key Metrics)&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;&lt;strong&gt;विवरण (Details)&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;जहाज का नाम व ध्वज&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;LNGC 'दिशा' (माल्टा का झंडा)&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;कुल कार्गो क्षमता&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;62,370 मीट्रिक टन LNG&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;गैस आपूर्ति का स्रोत&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;खाड़ी देश (कतर आदि)&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;  &lt;tr&gt;   &lt;td&gt;रास्ते का संकट&lt;/td&gt;   &lt;td&gt;ईरान-US युद्ध के कारण साढ़े 3 महीने से बंद&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt; &lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;p&gt;हालांकि, ईरान द्वारा दी गई 60 दिनों की यह मोहलत कब खत्म हो जाए या कब दोनों देशों के बीच दोबारा ठन जाए, यह कोई नहीं जानता। भारत के लिए यह 60 दिन बेहद कीमती हैं, जिनमें उसे अपनी गैस की कमी को पूरा करना होगा। क्या भारत इस समय सीमा के भीतर अपने सभी जहाजों को सुरक्षित निकाल पाएगा, या पश्चिम एशिया का यह बारूद दोबारा सुलग उठेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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        </item>
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            <title><![CDATA[PHOTO: दुनिया का सबसे आलीशान विमान! कतर से ट्रंप को मिले गिफ्ट का होश उड़ाने वाला सच?]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/trump-qatar-gifted-air-force-one-plane-flying-white-house-luxury-jet-controversy-news/articleshow-zargffu</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:53:17 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;क्या कतर से मिला ट्रंप का नया &lsquo;एयर फ़ोर्स वन&rsquo; सच में दुनिया का सबसे शानदार विमान है या इसके पीछे छिपे हैं बड़े विवाद? करोड़ों डॉलर के इस आलीशान जेट को लेकर सुरक्षा, संविधान और विदेशी तोहफे पर क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल? &lsquo;उड़ता हुआ व्हाइट हाउस&rsquo; कहे जाने वाले इस विमान के अंदर छिपी लग्जरी सुविधाएं क्यों बनीं चर्चा का विषय? &amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
            <media:content url="https://static.asianetnews.com/images/w-1280,h-720,format-jpg,imgid-01kvhqcgt4adm9qqgsws8jq56f,imgname-trump-qatar-gifted-air-force-one-plane-flying-white-house-luxury-jet-controversy-news-1781932639044.jpg" type="image/jpeg" height="390" width="690"/>
            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Qatar Gift Luxury Boeing 747 Plane:&lt;/strong&gt; अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक ऐसा कूटनीतिक और आलीशान धमाका किया, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक गलियारों को सन्न कर दिया है। वॉशिंगटन के पास स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज के एक विशाल हैंगर में, राष्ट्रपति ट्रंप ने कतर से मिले नए 'एयर फ़ोर्स वन' विमान को दुनिया के सामने पेश किया। ट्रंप ने गर्व से इसे &quot;दुनिया का सबसे शानदार विमान&quot; और &quot;उड़ता हुआ व्हाइट हाउस&quot; करार दिया। लेकिन, इस बेहिसाब आलीशान तोहफे के पीछे एक ऐसा संवैधानिक और सुरक्षा से जुड़ा सस्पेंस छिपा है, जिसने वॉशिंगटन में तहलका मचा दिया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;.@POTUS makes the inaugural exit from the BRAND NEW AIR FORCE ONE!  pic.twitter.com/jBciB2atAV&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Rapid Response 47 (@RapidResponse47) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;लेदर, महंगी लकड़ी और सोना: नए जेट के भीतर का आलीशान रहस्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;विमान के अनावरण के दौरान ट्रंप इसके इंजन और विशाल आकार की बार-बार तारीफ करते नहीं थक रहे थे। इस विमान के अंदर जाने की इजाज़त पाने वाले एक गिने-चुने पत्रकार ने इसके भीतर के रहस्यमयी और शाही लुक का खुलासा किया है। विमान के अंदर की दीवारें टैन और हल्के भूरे रंग के साथ सुनहरे शेड्स (Golden Shades) से चमचमा रही हैं। आलीशान लेदर की सीटें, बेहद महंगे कालीन और लकड़ी की नक्काशीदार पैनलिंग इसे किसी उड़ते हुए महल जैसा बनाती हैं। दीवारों पर देशभक्ति से जुड़ी कई खास तस्वीरें लगाई गई हैं, जिसमें वॉशिंगटन के मशहूर 'रिफ्लेक्टिंग पूल' की एक बत्तख वाली तस्वीर भी शामिल है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;Trump finally got his dream ride: a shiny $400M Qatar Force One, gifted by his oil buddies. Because nothing says &lsquo;America First&rsquo; like flying around in a foreign prince&rsquo;s hand-me-down jet while taxpayers foot the retrofits. pic.twitter.com/MT7xjUrI3u&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; SpiritualStreetfighter17 (@Spiritual_Sf176) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;कतर का 'करोड़ों डॉलर' का तोहफ़ा: बेवकूफी या कोई बड़ी कूटनीतिक चाल?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस विमान के सामने आते ही अमेरिका में नैतिक, सुरक्षा और संवैधानिक नियमों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। खाड़ी देश कतर द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति को दिए गए इस करोड़ों डॉलर के विमान रूपी तोहफे पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसके बदले कतर को क्या मिलेगा? इन तमाम गंभीर चिंताओं को खारिज करते हुए ट्रंप ने अपने ही अंदाज में कहा कि इतने बड़े और शानदार तोहफे को ठुकराना &quot;सरासर बेवकूफ़ी&quot; होती। उन्होंने इस विवाद को एक नया मोड़ तब दे दिया जब उन्होंने एलान किया कि यह विमान बाद में उनकी 'प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी' को दान कर दिया जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;QATAR'S $400-MILLION &quot;FLYING PALACE&quot; NOW SERVING AS TRUMP'S INTERIM AIR FORCE ONE &mdash; BUT U.S. TAXPAYERS MAY FOOT A BILL OF OVER $1 BILLIONA luxury Boeing 747-8 gifted by Qatar to the United States for use as President Donald Trump's temporary Air Force One has officially entered&hellip; pic.twitter.com/0OIUytCzeG&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; daily netizen (@dailynetizen24) June 19, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;पुराना 'नीला-सफेद' रंग गायब: नए जेट के बाहरी लुक का सस्पेंस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;दशकों से दुनिया भर में अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान 'एयर फ़ोर्स वन' की पहचान उसके क्लासिक नीले और सफेद रंग से होती आई है। गुरुवार को ही व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने दशकों पुराने एक बोइंग 747 विमान को आधिकारिक तौर पर विदाई दी थी। लेकिन, इस नए विमान का लुक पूरी तरह बदल दिया गया है। अब नए जेट का निचला हिस्सा गहरे नेवी ब्लू (Navy Blue) रंग का है, जिसके बीच में एक तीखी लाल पट्टी है और ऊपरी हिस्सा पूरी तरह सफेद रखा गया है। ट्रंप ने दावा किया, &quot;यह नया प्लेन किसी भी पुराने 'एयर फ़ोर्स वन' से कहीं ज़्यादा दूर और दोगुनी तेज़ी से उड़ सकता है।&quot;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;4 जुलाई की डेडलाइन: आज़ादी के 250वें जश्न में पहली उड़ान?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल से ही 1990 के दशक के पुराने पड़ चुके राष्ट्रपतीय विमानों को बदलने पर अड़े हुए थे। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने बोइंग कंपनी को दो नए 747-8 विमान बनाने का आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट दिया था, लेकिन लागत बढ़ने और तकनीकी देरी के कारण वह प्रोजेक्ट लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। ऐसे में कतर से मिला यह विमान ट्रंप के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है। ट्रंप ने सस्पेंस बढ़ाते हुए संकेत दिया है कि यह नया विमान आगामी 4 जुलाई को अमेरिका की आज़ादी के 250वें ऐतिहासिक जश्न (250th Independence Day) के मौके पर होने वाले भव्य फ्लाईओवर में अपनी पहली आधिकारिक उड़ान भर सकता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;विमान या विवाद? ट्रंप के लिए नई चुनौती&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;जब अमेरिकी राष्ट्रपति इस विशेष विमान में यात्रा करते हैं, तभी इसे आधिकारिक रूप से &ldquo;एयर फ़ोर्स वन&rdquo; कहा जाता है। लेकिन कतर से मिले इस विमान के साथ सिर्फ शाही सुविधाएं नहीं आई हैं, बल्कि कई राजनीतिक सवाल भी जुड़ गए हैं। जहां ट्रंप इसे अमेरिकी राष्ट्रपति पद की ताकत और आधुनिकता का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे विदेशी प्रभाव और सुरक्षा जोखिम से जोड़ रहे हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि यह &ldquo;उड़ता हुआ व्हाइट हाउस&rdquo; आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति में ताकत का प्रतीक बनता है या विवाद का केंद्र।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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            <title><![CDATA[हिजबुल्लाह के साथ सीजफायर के बावजूद इज़राइल ने लेबनान पर फिर क्यों किया हमला? 5 की मौत]]></title>
            <link>https://hindi.asianetnews.com/news/israel-lebanon-attack-hezbollah-ceasefire-5-killed-drone-airstrike-conflict-news/articleshow-ziygcg2</link>
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            <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:22:24 +0530</pubDate>
            <description><![CDATA[&lt;p&gt;सीज़फ़ायर के कुछ घंटों बाद ही लेबनान में फिर क्यों गूंजे धमाके? क्या इज़राइल-हिज़्बुल्लाह युद्धविराम टूट गया? 5 मौतों और तबाही के बीच क्या शांति समझौता सिर्फ एक छलावा साबित हुआ? नबातीह पर हमले का असली कारण क्या है? अमेरिका की मध्यस्थता वाला सीज़फ़ायर क्यों हुआ बेअसर? क्या लेबनान फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है?&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]></description>
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            <content:encoded><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बेरुत/यरूशलेम:&lt;/strong&gt; मध्य-पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे चौंकाने वाली और तनाव बढ़ाने वाली खबर सामने आ रही है। लेबनान में शांति स्थापित करने के लिए जिस युद्धविराम (Ceasefire) का दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही थी, वह लागू होते ही ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आ रहा है। अमेरिकी मध्यस्थता के बाद इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह समूह के बीच हुए सीज़फ़ायर समझौते के महज कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल ने दोबारा भीषण बमबारी कर दी है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है और शांति बहाली के दावों पर एक बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;शाम 4 बजे हुआ था समझौता, रात होते ही गूंज उठे धमाके!&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस खूनी ड्रामे की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से खबर आई कि लेबनान में लगातार बढ़ते हिंसक तनाव को रोकने के लिए इज़राइल और हिज़्बुल्लाह आखिरकार एक सीज़फ़ायर समझौते पर सहमत हो गए हैं। इस समझौते की पुष्टि खुद इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी और हिज़्बुल्लाह के दो विश्वसनीय सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से की थी। तय रणनीति के अनुसार, यह ऐतिहासिक युद्धविराम शुक्रवार शाम 4 बजे (1300 GMT) से आधिकारिक तौर पर लागू होना था। पूरी दुनिया को लगा कि अब बेरुत की सड़कों पर बारूद बरसना बंद हो जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;p&gt; Agan, Israel just killed 5 people in Lebanon during a ceasefire.This is not the first violation. Israel has been hitting Lebanon repeatedly since the ceasefire was announced.&amp;nbsp;While US-Iran 60 day deal just few day ago.&amp;nbsp;And Iran has already warned that Israeli strikes&hellip;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&mdash; Ali (@RealAliVoice) June 20, 2026&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;रात भर आसमान से बरसी मौत: ड्रोनों और लड़ाकू विमानों का तांडव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;शांति की उम्मीदें तब मलबे में तब्दील हो गईं जब लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी (NNA) ने शनिवार सुबह एक खौफनाक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, सीज़फ़ायर लागू होने के बावजूद इज़राइली लड़ाकू विमानों और घातक ड्रोनों ने रात भर और शनिवार की सुबह तक दक्षिणी लेबनान के 'नबातीह' इलाके को निशाना बनाया। आसमान से रिहायशी इलाकों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी गईं, जिससे कई हंसती-खेलती इमारतें और रिहायशी घर देखते ही देखते जमींदोज़ हो गए।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;भोर होने से पहले तोपों की गूंज: मलबे से निकलीं 5 लाशें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;सस्पेंस और दहशत का माहौल यहीं खत्म नहीं हुआ। भोर होने से ठीक पहले, जब लोग सो रहे थे, इज़राइली तोपखाने (Artillery) ने नबातीह और उसके आस-पास के पूरे इलाके में भारी गोलाबारी शुरू कर दी। लेबनान के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि इन अचानक हुए हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और गोलाबारी में कम से कम पांच निर्दोष लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिससे मौतों का आंकड़ा और बढ़ने का अंदेशा है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;img&gt;&lt;/p&gt;&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;सबसे बड़ा सस्पेंस: आखिर किसने तोड़ा भरोसा और अब आगे क्या?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;&lt;p&gt;इस खूनी उल्लंघन के बाद अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हड़कंप मच गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब शुक्रवार शाम को सीज़फ़ायर लागू हो चुका था, तो शनिवार सुबह इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई क्यों की गई? क्या ज़मीनी स्तर पर कोई गलतफहमी हुई, या इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच का यह समझौता महज एक दिखावा था? वॉशिंगटन से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक इस उल्लंघन पर पैनी नजर रखी जा रही है। अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि क्या हिज़्बुल्लाह इन 5 मौतों का बदला लेने के लिए इज़राइल पर दोबारा रॉकेट दागेगा? अगर ऐसा होता है, तो मध्य-पूर्व में शांति की आखिरी उम्मीद भी हमेशा के लिए दफन हो जाएगी।&lt;/p&gt;]]></content:encoded>
            <category>World news</category>
            <dc:creator>Surya Prakash Tripathi</dc:creator>
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