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जल शक्ति मंत्री ने कहा-जल आंदोलन' को 'जन आंदोलन' बनाने की जरूरत

पानी की गुणवत्ता के विषय पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने हर गांव में 5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया है और उन्हें फील्ड टेस्टिंग किट प्रदान की है। अब तक 4 लाख 60 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। हमारी सरकार ने हर जिले के हर ब्लॉक में पानी की जांच के लिए एक लेबोरेट्री स्थापित करने की शुरुआत की है।
 

Water power minister said - Water movement 'needs to be made' mass movement 'asa
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Delhi, First Published Mar 19, 2021, 6:56 PM IST
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नई दिल्ली । जल के महत्व को समझते हुए प्रत्येक व्यक्ति को जल संरक्षण का प्रयास करना चाहिए। अब वक्त आ गया है जब 'जल आंदोलन' को 'जन आंदोलन' में बदला जाए। ''यह बातें केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'शुक्रवार संवाद' में व्यक्त किए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से देश के 7 करोड़ 5 लाख ग्रामीण घरों को पीने का साफ पानी मिलने लगा है।

जल समृद्धि से ही देश की समृद्धि संभव
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत के अलावा दुनिया के किसी देश में नदी को ‘मां’ नहीं कहा जाता। हमारी संस्कृति में हर दिन कुछ नया सीखने की परंपरा है। अगर युवा देश की जल संस्कृति को समझना चाहते हैं, तो उन्हें बुंदेलखंड से लेकर कच्छ तक की यात्रा करनी चाहिए। जल समृद्धि से ही देश की समृद्धि संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अगर किसी विषय पर सबसे ज्यादा चर्चा की है, तो वो जल संरक्षण का विषय है।

हर ब्लॉक में पानी की जांच के लिए एक लेबोरेट्री स्थापित 
पानी की गुणवत्ता के विषय पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने हर गांव में 5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया है और उन्हें फील्ड टेस्टिंग किट प्रदान की है। अब तक 4 लाख 60 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। हमारी सरकार ने हर जिले के हर ब्लॉक में पानी की जांच के लिए एक लेबोरेट्री स्थापित करने की शुरुआत की है।

भारत की जल संस्कृति पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक 
आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारत की जल संस्कृति पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक है। हिन्दुस्तान की तमाम नदियां पर्यावरण की पोषक रही हैं। उन्होंने कहा कि पानी को लेकर सरकार, समाज और मीडिया तीनों को सक्रिय होने की जरूरत है। मीडिया एक ऐसा प्रभावी माध्यम है, जो जल संरक्षण के मुद्दे पर जनता को जगाने का काम कर सकता है। संचालन प्रो. संगीता प्रणवेंद्र ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के अपर महानिदेशक (प्रशासन) के. सतीश नंबूदिरीपाड ने किया। इस अवसर पर अपर महानिदेशक (प्रशिक्षण) ममता वर्मा, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार आदि मौजूद रहे।

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