Desi Jugaad  

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    TrendingApr 19, 2021, 1:47 PM IST

    गांव में गर्मी से बचने के लिए गजब का जुगाड़, लोगों ने गंधे का किया ऐसा इस्तेमाल

    वीडियो डेस्क।  गर्मी का मौसम आ चुका है और लोगों को तपती गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।गर्मी से बचने के लिए गांव के लोगों  ने गधे का इस्तेमाल किया। देखा जा सकता है कि लोग खाट पर बैठे हुए हैं. पास में ही एक डंडा लगा हुआ है, जिसमें दो चादरें लटकी हुई हैं. नीचे गधे को बांधा हुआ है. जैसे ही वो घूमना शुरू करता है तो चादर डंडा भी घूमने लगता है. जिससे चादर की मदद से उनको हवा में मिल रही है। आईपीएस ऑफिसर रुपिन शर्मा ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, 'गर्मी का उपाय: देसी उपाय गर्मी से बचने का.'सोशल मीडिया (Social Media) पर वीडियो तेजी से वायरल  हो रहा है

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    HatkeDec 28, 2020, 9:45 PM IST

    6 हजार रुपए में बना दी ऐसी मशीन, जो बिना फसलों को नुकसान पहुंचाए खरपतवार नष्ट कर देती है

    इस संसार में इंसान के दिमाग से तेज कोई दूसरी चीज नहीं चल सकती। इस दुनिया में जो कुछ आविष्कार दिखता है, वो इंसान की दिमाग की ही उपज है। कहते हैं कि संकट में ही समाधान छुपा होता है। यह मशीन भी परेशानी सामने आने के बाद ईजाद हुई। आमतौर पर खरपतवार को नष्ट करने ऊपर से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है। इससे फसलों को भी नुकसान पहुंचता है। इस समस्या को देखते हुए बिहार के सबौर स्थित एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ने एक जुगाड़ से एक ऐसी मशीन बनाई, जो जमीन से सटकर दवा का छिड़काव करती है। कह सकते हैं कि जैसे फर्श पर पोछा लगाते हैं, यह मशीन भी वैसे ही काम करती है। इस मशीन को हर्बीसाइड एप्लीकेटर (Herbicide Applicator) नाम दिया गया है। संस्थान के इंजीनियर सतीश कुमार बताते हैं कि इस मशीन को कोई भी आसानी से चला सकता है। जैसे किसी बच्चे की ट्रॉली चलाई जाती है। इसमें एक टैंक  है, जिसमें कीटनाशक भरा जाता है। यह एक पाइप के जरिये ड्रिपर तक जाता है। इससे कीटनाशक सीधे खरपतवार तक न जाकर पहले नीचे लगे फोम में छिड़कता है और फिर फोम घास के साथ रगड़ खाकर आगे बढ़ती है। आगे पढ़ें इसी मशीन के बारे में...

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    HatkeDec 25, 2020, 11:30 PM IST

    जीरो खर्च पर दिनभर में 500 लीटर गंदा पानी दुबारा इस्तेमाल करने लायक बना देती है यह जुगाड़ की मशीन

    साइंस प्रैक्टिकल मांगता है। यानी किताबी ज्ञान के बावजूद कोई भी आविष्कार तभी संभव हो पाता है, जब प्रयोग किए जाएं। 12वीं के बाद इस शख्स ने IIT में दाखिले का प्रयास किया, लेकिन असफल रहा। इसके बाद शख्स ने  MIT उज्जैन से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। यह तो हुई पढ़ाई की बात। लेकिन इसका यह आविष्कार पढ़ाई-लिखाई से परे है। यह एक ऐसा आविष्कार है, जो देसी जुगाड़ तकनीक का गजब उदाहरण है। यह है बिना बिजली के चलने वाला वॉटर फिल्टर। यह दिनभर में 500 लीटर गंदे पानी को फिल्टर करके नहाने-धोने और अन्य घरेलू काम के इस्तेमाल के लायक बना देता है। बस इसे खाने और पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लेकिन पहले यह पानी किसी काम का नहीं होता था। यह हैं मध्य प्रदेश के रतलाम के रहने वाले जितेंद्र चौधरी। इनका यह सस्ता और किफायती वाटर फिल्टर‘शुद्धम’ के नाम से जाना जाता है। इसे देशभर में सराहा गया है। आगे पढ़ें इन्हीं की कहानी...
     

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    HatkeDec 24, 2020, 9:10 PM IST

    घर में पड़ा था ढेर कबाड़, इससे पहले कि घरवाले कबाड़ी को देते बेटे ने बना दी गजब मशीन

    हर कबाड़ बेकार नहीं होता! कभी-कभार इसी कबाड़ से काम की चीजें बन जाती हैं। अब इसी मशीन को देखिए। किसी अजूबा से कम नही है यह मशीन। देश में किसानों के पिछड़े होने की एक बड़ी वजह उनके पास खेतीबाड़ी के लिए संसाधनों की कमी है। छोटे और गरीब किसानों के पास ट्रैक्टर नहीं है। दवा के छिड़काव के लिए आधुनिक मशीनें नहीं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के उदयपुर जिले के मावली कस्बे के रहने वाले इस युवा किसान ने कबाड़ से यह मशीन बना दी। यह मामला बेशक कुछ साल पहले मीडिया का सुर्खियों में आया था। लेकिन इसे दिखाने का मकसद यही है कि आप भी अपने टैलेंट से कुछ ऐसा ही धमाल कर सकें। आगे पढ़िए इसी जुगाड़ के बारे में...

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    HatkeDec 22, 2020, 11:15 PM IST

    गजब आइडिया: एक छोटे से डिब्बे में समा जाता है किचन का पूरा सामान, चूल्हे से लेकर बर्तन तक

    आदमी के दिमाग की थाह कोई नहीं ले सकता। दुनिया इसकी गवाह है। जरूरी नहीं कि किसी चीज का आविष्कार करने के लिए बड़ी-बड़ी डिग्रियां ही लेनी पड़ीं। रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ीं कई चीजों का आविष्कार इंसान ने जुगाड़ साइंस से किया है। अब इस जादुई डिब्बे को देख लीजिए! ऊपर से दिखने में साधारण और छोटा डिब्बा अंदर सुरसा के मुंह की तरह है। कैसे? इस छोटे-से डिब्बे में किचन का पूरा सामान समा जाता है। चूल्हे से लेकर पकाने और खाने के लिए बर्तन तक। यानी इसमें से आप सामान निकालिए...खाना पकाइए और पूरी फैमिली को खिलाइए। इस डिब्बे का वीडियो एक फेसबुक यूजर ने अपने पेज पर शेयर किया है।

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    HatkeDec 21, 2020, 11:24 AM IST

    लॉकडाउन में काम-धंधा चौपट हो गया, तो जुगाड़ से रोजगार के ऐसे तरीके क्यों नहीं आजमाते

    पुणे. महाराष्ट्र. अगर आदमी में हुनर हो और कुछ करने का माद्दा, तो वो कभी भूखों नहीं मर सकता। यह मामला बेशक लॉकडाउन से पहले का है, लेकिन यह बेरोजगारों को एक आइडिया देता है। थोड़ा-सा दिमाग लगाकर आप अपने काम-धंधे को कैसे बढ़ा सकते हैं, यह कहानी यही बताती है। दुनिया में रोज देसी जुगाड़ से कई चीजें बनती रहती हैं। इनमें से कुछ मिसाल बन जाती हैं। पुणे के रहने वाले युसूफ फारुख शेख अपनी इसी जुगाड़ से चर्चाओं में आए थे। उनके बारे में आपको बताने का मकसद यही है कि अपने काम-धंधे को लेकर मायूस न हों। उसी में कुछ ऐसी जुगाड़ आजमाएं कि कमाई बढ़ जाए। युसूफ गाड़ियों के पंचर सुधारने का काम करते हैं। पहले वो एक गुमटी में दुकान चलाते थे। इससे उतनी कमाई नहीं थी। फिर उन्होंने एक आइडिया लगाया और अपने पुराने स्कूटर में ही एयर टैंक और कम्प्रेसर लगाया। अब वे मोबाइल पंचरवाला बन गए हैं। किसी के बुलाने या रास्ते में किसी की गाड़ी का पंचर सुधारकर वे अब इतना कमाने लगे हैं कि परिवार का खर्च अच्छे से चल सके। आगे पढ़िए इन्हीं की कहानी...

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    HatkeDec 19, 2020, 9:52 AM IST

    पंचर बनाने वाले के बेटे ने जुगाड़ से बना दी बैट्री से चलने वाली बाइक

    मिर्जापुर, यूपी. अगर दिमाग की बत्ती जल जाए, तो जुगाड़ से भी कमाल की चीजें बनाई जा सकती हैं। अब इस युवक को ही देखिए! इसके पिता पंचर बनाने की दुकान चलाते हैं। यह पिता के काम में हाथ बंटाता है और कॉलेज में पढ़ता भी है। एक दिन इसके दिमाग में आइडिया आया। इसने दुकान में पड़े कबाड़ उठाए और महीनेभर की मेहनत के बाद यह जुगाड़ की बाइक तैयार कर दी। एक बार बैट्री चार्ज करने पर यह 50 किमी चलती है। सबसे बड़ी बात यह परिवार इतना गरीब है कि युवक के पास बैट्री खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे। लिहाजा इसने नवरात्रि में देवी मां की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाईं और बेचीं। इसके बाद बाइक बनाने का प्लान किया। पिछले दिनों इसने बाइक बनाकर तैयार कर दी।

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    HatkeDec 16, 2020, 5:21 PM IST

    लुहार ने बनाया टीन-टप्पर की जुगाड़ से देसी गीजर,10 मिनट में गर्म कर देता है पूरे घर के लिए पानी

    दिल्ली. उत्तर भारत की ठंड अच्छे-खासों को ठिठुरा देती है, चाहे वो कोई भी हो। ठंड में खुली सड़क पर धरना-प्रदर्शन करना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है। खैर, इस आंदोलन के दौरान जहां किसानों की सुख-सुविधा के लिए हाईटेक मशीनें या अन्य साधन पहुंचाए गए हैं, वहीं यहां गर्म पानी के लिए मंगाए गए देसी गीजर सोशल मीडिया की सुर्खियों में छा गए हैं। ये गीजर बिना बिजली के और कम लकड़ियों के ईंधन पर चलते हैं। ये गीजर 20 से 40 लीटर की क्षमता वाले हैं। एक बार में इसमें 10-15 मिनट में 5 जनों के लिए पानी गर्म किया जा सकता है। आइए जानते हैं गीजर के बारे में...

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    HatkeDec 14, 2020, 11:47 AM IST

    गजब जुगाड़: एक गड्ढा खोदकर पैदा कर दी बिजली...पूरे गांव में मिल रही 24 घंटे फ्री

    लोहरदगा, झारखंड. यूट्यूब पर फालतू वीडियो देखकर अपना समय बर्बाद करने वाले यही सोचते हैं कि इंटरनेट लोगों को बिगाड़ता है। लेकिन जिनमें कुछ अलग करने का जुनून होता है, वे यूट्यूब को अपना गुरु मान लेते हैं। 28 साल के एक युवक ने देसी जुगाड़ (Desi jugaad science) के जरिये बिजली पैदा करने की ठानी। उसने टरबाइन तकनीक सीखने के लिए यूट्यूब का सहारा लिया। इसके बाद उसने गांव की ढलान वाली जगह पर एक गड्ढा खोदा। उसमें टरबाइन स्थापित किया और आज गांव में 24 घंटे मुफ्त बिजली मिल रही है। रखरखाव पर जो थोड़ा-बहुत खर्चा होता है, वो सब मिलकर भर देते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह युवक कोई इंजीनियर नहीं हैं। यह हैं इंटर पास कमिल टोपनो। इस प्रोजेक्ट में करीब 12 हजार रुपए खर्च हुए। यह 2500 बॉट की बिजली का उत्पादन करता है। पढ़िए देसी जुगाड़ की यह अद्भुत कहानी...
     

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    Other StatesDec 12, 2020, 11:59 AM IST

    जुम्मन मिस्त्री ने कबाड़ और लाउडस्पीकर की जुगाड़ से बना दिया टिड्डियों को भगाने वाला ये गजब यंत्र

    नवादा, बिहार. टिड्डियां हर साल अपना प्रकोप दिखाती हैं। जैसे ही फसलें खेतों में खड़ी होती हैं, टिड्डी दल उन्हें चाटने पहुंच जाता है। यह एक बड़ी समस्या है, जिसका देश-विदेश में उपाय खोजा जा रहा है। लेकिन भारत में कई किसान देसी तकनीक से ऐसी उपकरण बनाते रहे हैं, जो टिड्डियों को भगाने का अचूक तरीका साबित हुए हैं। देसी जुगाड़ का यह आविष्कार कुछ महीने पहले मीडिया की सुर्खियों में आया था। ऐसे आविष्कार आप भी कर सकते हैं। इसे बनाया था जुम्मन मिस्त्री उर्फ अवधेश कुमार ने।  जुम्मन मिस्त्री किसान भी हैं। वे खेतों में मंडराती टिड्डियों को लेकर परेशान थे। आखिरकार उन्होंने दिमाग दौड़ाया और यह मशीन बना ली। इसे नाम दिया टिड्डी रक्षक। उन्होंने दावा किया था कि इस यंत्र से टिड्डियां खेत में एक सेकेंड भी नहीं टिक पाएंगी। आगे पढ़ें इसी आविष्कार के बारे में...

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    Other StatesDec 11, 2020, 3:33 PM IST

    मूंगफली छीलने की टेंशन से यूं मिला छुटकारा, देखिए उल्टी साइकिल का कमाल

    बालोद, छत्तीसगढ़. देसी तकनीकी जुगाड़ से ऐसे-ऐसे आविष्कार हो जाते हैं, जो इंजीनियरों को भी सोचने पर विवश कर देते हैं। कठिन कामों को भी देसी जुगाड़ से बनीं चीजें आसान बना देती हैं। मूंगफली को फसल से अलग करना पेंचीदा काम होता है। इसके लिए महंगी-महंगी मशीनें बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन गरीब किसान हाथों की मेहनत यह काम करते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की बालोद स्थित बटालियन के जवानों ने एक ऐसा प्रयोग किया, जिनसे यह काम आसान कर दिया। यह मामला पिछले दिनों मीडिया की सुर्खियों में आया था। इसमें साइकिल को उल्टा करके जब पिछले पहिये में मूंगफली की फसल फसाई गई, तो वो अलग-अलग हो गई। इससे समय की बचत हुई और महंगी मशीन खरीदने का खर्चा भी बचा। आगे पढ़ें इसी खबर के बारे में...

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    RajasthanDec 8, 2020, 2:37 PM IST

    ये हैं देश को आदर्श युवा किसान, खेतों से कैसे सोना उगलवा सकते हैं, इनसे सीखिए

    चित्तौड़गढ़, राजस्थान. इन दिनों किसानों का मुद्दा देश में छाया हुआ है। इस कृषि प्रधान देश में किसान खासी अहमियत रखते हैं। लेकिन वे खेती-किसानी से जुड़ी तमाम समस्याओं और दिक्कतों का सामना करते हैं। किसानी का बाजिब मूल्य नहीं मिलना या मौसम-बेमौसम की मार और कीटों से नुकसान एक आम समस्या है। लेकिन आपको मिलवाते हैं एक एक ऐसे युवा किसान से, जिसने जुगाड़ की तकनीक से खेती-किसानी को लाभ का धंधा बना दिया। हर बेकार चीज असेंबल करके काम में लाई जा सकती है, कैसे? इस 22 साल के इस किसान से सीखिए। यह हैं नारायण लाल धाकड़। ये जिले के एक छोटे से गांव जयसिंहपुरा में रहते हैं। ये जुगाड़ तकनीक से कई ऐसी मशीनें बना चुके हैं, जो खेती-किसानी में बड़े काम आ रही हैं। ये अपने सारे आविष्कार यूट्यूब चैनल 'आदर्श किसान सेंटर' के जरिये डेमो देते हैं। इनके चैनल को लाखों लोग फॉलो करते हैं।  ये उपकरण फसलों को जानवरों और कीटों के नुकसान से बचाते हैं।
     

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    Other StatesDec 7, 2020, 12:54 PM IST

    कोरोना ने बदली जिंदगी, तो सामने आईं 2020 में देसी जुगाड़ से बनीं ये गजब की चीजें और कमाई के तरीके

    आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है। खासकर, जब इंसान के सिर पर कोई मुसीबत आती है, तो तब वो अपनी सहूलियतों के लिए कुछ न कुछ गजब की चीजें तैयार कर लेता है। वर्ष, 2020 कोरोना काल के लिए जाना जाएगा। लॉकडाउन के कारण लोगों को कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन कहते हैं कि इंसान की सूझबूझ हर समस्या का हल निकाल लेती है। ये जो आविष्कार हैं, वे यह बताते हैं कि इंसान चाहे, तो कुछ भी असंभव नहीं है। वैसे तो दुनिया में देसी जुगाड़ और कबाड़ से कई आविष्कार होते रहे हैं, लेकिन कोरोना काल में कुछ अलग प्रकार के आविष्कार सामने आए। ये तस्वीरें ऐसे ही आविष्कार करने वालों की हैं। सिर्फ आविष्कार ही नहीं, लोगों ने कमाई के जरिये भी खोज निकाले। आइए देखते हैं जुगाड़ के कुछ ऐसे ही कमाल के आविष्कार और कमाई के जरिये...

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    Madhya PradeshDec 5, 2020, 12:14 PM IST

    कभी कबाड़ की जुगाड़ से आप भी कुछ आविष्कार करके देखिए, इन लोगों ने बिजली का विकल्प खोज निकाला

    मंडला, मध्य प्रदेश. आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है! जब कोई परेशानी सिर पर खड़ी हो जाती है, तो आदमी उससे निपटने का उपाय खोजने लगता है। जिनके दिमाग की बत्ती जल जाती है, वे नई चीजें बना देते हैं। एक मामला मंडला से जुड़ा है। यहां बिजली संकट के कारण खेतों में पानी नहीं दे पा रहे किसानों ने ऐसी मशीन बना दी, जो पानी के फोर्स से चलती है। अब किसान इससे ही सिंचाई कर रहे हैं। इस मशीन से 30 हॉर्स पॉवर तक बिजली पैदा हुई। ऐसे आविष्कार पहले भी सामने आए हैं। देसी जुगाड़ साइंस से बनी ये मशीनें लोगों के क्रियेटिविटी और जूननू को दिखाती हैं। आगे पढ़िए कुछ ऐसे ही आविष्कारों के बारे में...

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    RajasthanDec 1, 2020, 5:13 PM IST

    जब बिजली और डीजल ने रुलाया, तो किसान ने एक आइडिया निकाला और चल पड़ा इंजन, पैसा भी बचा

    भीलवाड़ा, राजस्थान. ये कहानियां दिमाग की बत्ती जला देंगी। कहते हैं जब सिर पर कोई समस्या मंडराती है, तो समझदार व्यक्ति उसका उपाय खोज निकालता है। ये मामले भी इससे ही जुड़े हैं। देसी जुगाड़ साइंस से इन लोगों ने ऐसे आविष्कार कर दिए कि इंजीनियर भी हैरान रह गए। आइए पहले जानते हैं राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के अमरगढ़ में रहने वाले किसानों की कहानी। यहां के गांवों में बिजली की बड़ी दिक्कत थी। इसलिए किसान डीजल के इंजन पर निर्भर थे। लेकिन डीजल इतना महंगा पड़ता था कि उन्हें टेंशन होने लगती थी। बस फिर क्या था...कुछ किसानों ने दिमाग लगाया और रसोई गैस से इंजन चलाने का तरीका खोज निकाला। आगे पढ़िए इसी कहानी के बारे में...