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    Madhya Pradesh26, Sep 2020, 9:46 AM

    'भगवान' के आगे सिस्टम ने टेके घुटने, तीन अस्पतालों में मां को लेकर भटकती रही बेटी, कलेक्टरी भी फेल

    भोपाल, मध्य प्रदेश. 'भगवान' होना कोई आसान नहीं! डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि वे लोगों की जान बचाते हैं। लेकिन हर डॉक्टर भगवान नहीं होता और हर अस्पताल जान बचाने वाला मंदिर नहीं! इस बेटी की पीड़ा सुनकर कथित भगवानों के आगे घुटने टेक चुकी सरकार की शर्मनाक तस्वीर सामने आती है। यहां के कोलार स्थित सर्वधर्म कालोनी की रहने वालीं 43 साल की संतोष रजक इसी अराजक सिस्टम का शिकार हो गईं। उनकी बेटी प्रियंका और बेटा हर्ष बीमार मां को लेकर तीन अस्पतालों में भटकता रहा। एक ने एक दिन भर्ती करके मोटी रकम वसूल ली और अगले दिन कोविड (Corona infection) आईसीयू बेड नहीं होने पर सरकारी अस्पताल (government hospital) भेज दिया। वहां बेड न होने पर तीसरे प्राइवेट अस्पताल रवाना किया। यहां इलाज के नाम पर 5 दिनों के लिए 50000 रुपए जमा करा लिए। इसके बावजूद सिर्फ खानापूर्ति की। कलेक्टर के आदेश पर मरीज को फिर सरकारी अस्पताल में बेड मिला, लेकिन बचाया नहीं जा सका। आगे पढ़ें बेबस बेटी की कहानी...

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    Maharashtra11, Sep 2020, 3:16 PM

    एक अफसर के ट्रांसफर की खबर सुनकर जुट गई भीड़, कोई रो रहा था, कोई फूल बरसा रहा था

    किसी अफसर के ट्रांसफर के बाद ऐसा मंजर न के बराबर देखने का मिलता है। नागपुर महानगरपालिका(मनपा) के आयुक्त  तुकाराम मुंढे का मुंबई में ट्रांसफर हो गया है। उन्हें महाराष्ट्र प्राधिकरण(MJP)में सचिव बनाया गया है। मुंढे कोरोना संक्रमण से निकले हैं। लिहाज लंबे समय से लोगों से मुलाकात नहीं हो पा रही थी। अब ट्रांसफर का सुनकर लोग उनस मिलने पहुंच गए।

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    Jharkhand1, Sep 2020, 4:48 PM

    बेटी को उदास देख पिता ने उसे बाइक पर बैठाया और मीलों दूर एग्जाम सेंटर के लिए निकल पड़ा

    रांची, झारखंड. मां-बाप अपने बच्चों के भविष्य के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। यह मामला इसी से जुड़ा है। 1-6 सितंबर तक JEE Main Exams 2020 शुरू हो गए। बोकारो में रहने वाले धनंजय कुमार की बेटी काजोल का सेंटर रांची में था। जब आने का कोई साधन नहीं मिला, तो बेटी उदास हो गई। बेटी का मुरझाया चेहरा पिता से देखा नहीं गया। उन्होंने बाइक उठाई, उस पर बेटी को बैठाया और रांची के लिए निकल पड़े। करीब 12 घंटे के सफर के बाद वे मंगलवार को बेटी का एग्जाम सेंटर पर लाकर ही मानें। पेशे से किसान धनंजय की पत्नी सीआइएसएफ, बोकारो थर्मल में पोस्टेड हैं। बेटी ने सेंटर रांची चुना था। लेकिन कोरोना काल के चलते वहां तक जाने का साधन नहीं मिल पा रहा था। सबसे बड़ी बात..बेटी मां के साथी और पिता नालंदा(बिहार) में। पिता पहले नालंदा से बोकारो पहुंचा और फिर वहां से बेटी को बाइक पर बैठाकर रांची। यानी पिता ने 12 घंटे बाइक चलाई।

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    Hatke18, Aug 2020, 3:25 PM

    दो मर्दों ने करवाई महिला की LIVE डिलीवरी, कैमरे में कैद हुई किराए के कोख की PHOTOS

    हटके डेस्क: मां बनना बेहद खूबसूरत अहसास होता है। हर महिला अपने बच्चे के जन्म के मोमेंट को सबसे ज्यादा करीब से जीती है। लेकिन कई बार महिला को किसी कारण से ये सुख नसीब नहीं होता। ऐसी ही एक बदनसीब मां को जब पता चला कि वो प्रेग्नेंट नहीं हो सकती, तो उसने किराए के कोख से मां बनने का फैसला किया। जब उसका बच्चा सरोगेट मां के कोख से जन्मा तो उसने अपने सारे शौक तभी पुरे कर लिए। महिला ने ना सिर्फ अपने पति के साथ मिलकर उसकी डिलीवरी करवाई बल्कि उस पुरे दर्द में महिला का हाथ भी थामे रखा। दो मां और दो पिता के सामने जन्में इस बच्चे की डिलीवरी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है... 

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    Rajasthan17, Aug 2020, 9:50 AM

    गाड़ी के सामने अचानक 'परछाई' देखकर घबरा गया यह शख्स और इस हादसे के बाद बन गया जिंदा लाश

    कोटा, राजस्थान. सड़कों पर 'मौत'  ने कब्जा जमा रखा है। ऐसा शायद ही कोई शहर हो, जहां आवारा जानवर खतरा बनकर सड़कों पर नहीं घूम रहे हों। प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा है। नतीजा आये-दिन हादसों की खबरें आ रही हैं। यह मामला राजस्थान के कोटा का है। 35 वर्षीय यह व्यापारी 2 अगस्त की रात करीब 8.30 बजे बजरंगनगर में रहने वाले अपने मामा के यहां से थेगड़ा रोड स्थित अपने घर लौट रहा था। सड़क पर जानवर बैठे हुए थे। अचानक एक गाय उठकर दौड़ पड़ी। शख्स अपनी बाइक का संतुलन नहीं बना सका और वो सीधे गाय से जा टकराई। इसके साथ ही शख्स हवा में उछलकर दूर जा फिंका। इसके बाद से उसे होश नहीं आया है। सिर में चोट लगने से वो कोमा में है। शख्स का तलवंडी स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पढ़िए ऐसे ही कुछ दिल दहलाने वाले मामले..

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    Maharashtra10, Aug 2020, 11:06 AM

    केरल विमान हादसा: बहादुर पति की तस्वीर देखकर फूट-फूटकर रो पड़ी पत्नी, कैप्टन ने बचाई थी कइयों की जान

    मुंबई. केरल में हुए विमान हादसे में अपनी जान गंवाने वाले मुख्य पायलट रहे कैप्टन दीपक साठे की पार्थिव देह रविवार दोपहर को मुंबई लाई गई। इस दौरान उन्हें श्रद्धांजलि देने बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अपने दिवंगत पति की तस्वीर देखकर पत्नी सुषमा और उनके बेटे फूट-फूटकर रो पड़े। हालांकि उन्हें गर्व था कि कैप्टन साठे ने अपनी सूझबूझ से कई यात्रियों की जान बचा ली थी। बता दें कि 7 अगस्त को कोझिकोड में हवाई पट्टी पर फिसलने से एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में कैप्टन साठे सहित 18 लोगों की मौत हो गई थी। कैप्टन साठे भारतीय वायु सेना में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। कैप्टन साठे का पार्थिव शरीर विशेष विमान से मुंबई लाया गया था। उसे कुछ समय के लिए श्रद्धांजलि देने छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 के पास स्थित एयर इंडिया इकाई में रखा गया था। आगे देखिए कुछ तस्वीरें...

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    Punjab7, Aug 2020, 3:13 PM

    जन्म के बाद ही मां-बाप तलाक लेकर बेटी को रिश्तेदार की गोद में छोड़ गए..अब 'यशोदा मैया' से बिछुड़ गई ये बच्ची

    पटियाला, पंजाब. अपनी 'यशोदा मैया' से चिपटकर फूट-फूटकर रो रही इस 9 साल की बच्ची की पीड़ा शायद ही कोई समझ सके! मामला जलालपुर गांव से जुड़ा है। यह बच्ची जब पैदा हुई, तब मां-बाप के बीच तलाक हो गया। बच्ची को पालने-पोसने की जिम्मेदारी उसकी एक रिश्तेदार को सौंप दी गई। यशोदा मैया ने बच्ची को अपनी बेटी समझकर खूब लाड़-प्यार किया। अब पिता कानूनी लड़ाई लड़की बेटी की कस्टडी हासिल कर चुका है। पिता जब बेटी को अपने साथ ले जाने के लिए पहुंचा, तो बच्ची रो पड़ी। वो अपनी यशोदा मैया का दामन छोड़ने को राजी नहीं हुई। दोनों घंटों एक-दूसरे से लिपटकर रोते रहे। बड़ी मुश्किल से बेटी को पिता ले जा सका। देखें कुछ इमोशनल तस्वीरें...

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    Hatke5, Aug 2020, 3:19 PM

    मात्र 12 सेकंड में तबाह हो गया ये शहर, सड़कों पर बिखरे पड़े मांस के लोथड़ों दहल जाएगा मन

    हटके डेस्क: कभी आपने सोचा है कि अचानक आपके सामने एक ऐसा मंजर आए, जिसमें घर के दरवाजे हिलने लगे, खिड़कियों के कांच चटकने लगे। लेकिन इसकी वजह भूकंप नहीं थी। मंगलवार को लेबनान की राजधानी बेरुत में लोगों को कुछ ऐसा ही महसूस हुआ। बेरुत में अचानक भीषण धमाका हुआ। इस हादसे ने पूरे बेरूत को हिलाकर रख दिया। ये धमाका हादसा है या साजिश फिलहाल इस बारे में पता नहीं चल पाया है, लेकिन इस धमाके से भारी नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार, इस हादसे में 70 से अधिक लोग मारे गए और 4 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए है। जर्मनी के भू-विज्ञान केंद्र जीएफजेड के अनुसार, यह विस्फोट इतना तीव्र था कि अगर भूकंप से इसकी तुलना करें तो इसकी तीव्रता 3.5 थी। इसे भूमध्य सागर के पार 200 किलोमीटर (180 मील) से अधिक दूर तक सुना और महसूस किया गया। धमाके के बाद बेरुत का जो हाल नजर आया, वो दिल को दहलाने वाला है। इन तस्वीरों को देखने से पहले आपको कलेजा मजबूत करना पड़ेगा। 

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    Other States10, Jul 2020, 2:14 PM

    आतंकवादियों ने खत्म कर दिया हंसता-खेलता परिवार, घर में बची सिर्फ 2 महिलाएं और एक मासूम बच्चा

    बांडीपोरा, जम्मू-कश्मीर. ये तस्वीरें कश्मीर में आतंक के खूनी खेल को दिखाती हैं। सुरक्षाबलों की सख्त मुहिम से घबराए आतंकवादी अब निर्दोष लोगों और उनका सहयोग नहीं करने वालों को निशाना बनाने लगे हैं। इसी खूनी खेल में भाजपा नेता शेख्स वसीम बारी का परिवार बर्बाद हो गया। बुधवार को आतंकी हमले में वसीम बारी, उनके भाई और पिता की मौत हो गई थी। इस परिवार में अब कोई पुरुष नहीं बचा है। परिवार में वसीम की पत्नी, उनका 3 महीने का बेटा और दिव्यांग बहन बचे हैं। घर यूं लगने लगा है जैसे मुर्दाघर हो। जब इन तीनों के जनाजे एक साथ उठे, तो वहां मौजूद कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पाया। उल्लेखनीय है कि कुछ साल पहले वसीम की मां की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसी हादसे में उनकी बहन दिव्यांग हो गई थी। तीनों की हत्या बुधवार रात उस समय की गई थी, जब वे घर के नीचे बनी अपनी दुकान में बैठे थे। उनकी घर की सुरक्षा के लिए कंटीले तार बांधे गए थे। वहीं, 10 से ज्यादा पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात थे। इस घटना ने आतंकवादियों के खिलाफ लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है।

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    Rajasthan9, Jul 2020, 5:13 PM

    भगवान का रूप धरे ये मासूम बच्चे 2 वक्त की रोटी के लिए तरस रहे, कटोरा बजाकर बता रहे अपनी बेबसी

    मासूम थाली बजाते हुए दो वक्त की रोटी के लिए लोगों के आगे हाथ जोड़कर पैसा मांग रहे थे। जो देता उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा देते थे, जो नहीं देता तो उदास होकर खड़े रहते थे। तीनों के चेहरे पर तिलक लगा हुआ था और वह अपना मुंह हनुमान जी की तरह बनाए हुए थे। 

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    Chhattisgarh2, Jul 2020, 9:40 AM

    आधी रात घबरा उठी बेटी, पर मां-बाप कुछ न कर सके, अगले दिन 5 किमी यूं लटकाकर नदी तक पहुंचे..

    कांकेर, छत्तीसगढ़. यह तस्वीर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत दिखाती है। अगर कोई रात-बेरात बीमार हो जाए..तो उसे सुबह तक अपनी तकलीफ को काबू में रखना होगा। अगर नहीं रख सके, तो मौत तय है। 12 साल की यह लड़की मानकी कांकेर जिले की ग्राम पंचायत कंदाड़ी के आश्रित गांव आलदंड की रहने वाली है। दो दिन पहले रात को अचानक इसकी तबीयत खराब हो गई। उसे डॉक्टर के पास ले जाना उस समय संभव नहीं था। गांव में कोई स्वास्थ्य सेवा नहीं है। लिहाजा, मजबूरी में मानकी को रातभर तकलीफ झेलनी पड़ी। इस दौरान परिजनों ने भी जागकर रात काटी। सुबह होते ही परिजन उसे कंधों पर टांगकर इलाज के लिए निकल पड़े। करीब 5 किमी उसे ऐसे ही लटकाकर नदी तक ले गए। वहां, उन्हें घंटेभर तक नाव का इंतजार करना पड़ा। नदी पार करके 6 किमी दूर छोटेबेठिया उपस्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उनके गांव से उपस्वास्थ्य केंद्र की दूरी करीब 14 किमी है। आगे पढ़िये इसी खबर के बारे में...
     

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    Chhattisgarh12, Jun 2020, 11:18 AM

    मालिकों को सिर्फ काम से मतलब, मजदूर मरते हैं, तो मरें..बंधक बनाकर रखी गई एक फैमिली का दर्द

    मुंगली, छत्तीसगढ़. कोरोना संक्रमण काल में गरीबों की हालत बेहद दयनीय हो गई है। काम-धंधा बंद होने से वे दाने-दाने को मोहताज हैं। लाखों मजदूर जिंदगी की उम्मीद में अपने घरों को लौट आए और अभी भी हजारों मजदूरों की घर वापसी जारी है। ऐसे समय में जब गरीबों को मदद की जरूरत है, कुछ मालिक उनका शोषण करने से बाज नहीं आ रहे। यह मामला भी एक ऐसे ही मालिक से जुड़ा है। इस मजदूर फैमिली ने एक वीडियो जारी करके सरकार से मदद मांगी है। इसमें कहा जा रहा है कि उसे ईंट-भट्टा मालिक ने बंधकर बनाकर रखा हुआ है। वो उसे घर नहीं जाने दे रहा है। ये फैमिली पिछले 6 महीने से बंधक बनाकर रखी गई है। मामला यूपी के अंबेडकर नगर जिले के बंदीपुर गांव का है। इस श्रमिक ने वीडियो में बताया कि छत्तीसगढ़ के मुंगेली और बालौदाबाजार के कई मजदूरों को ईंट-भट्टा मालिकों ने बांधकर रखा हुआ है। लॉकडाउन में जब उन्होंने घर वापसी चाही, तो उन्हें मारा-पीटा गया। मजदूर भाग न जाएं, इसलिए सिक्योरिटी गार्ड लगा रखे हैं।

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    Chhattisgarh9, Jun 2020, 5:31 PM

    लकवाग्रस्त पति भूख से न मर जाए, इसलिए महिला ने दिल पर पत्थर रखकर बेच दिया मंगलसूत्र

    रायपुर/भोपाल. पहली तस्वीर अमृतसर से छत्तीसगढ़ के लिए निकली एक प्रवासी महिला मजदूर की है। उसने जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि मेहनत-मजदूरी करने वालों के साथ भगवान ऐसा कुछ करेगा? दूसरी तस्वीर मध्य प्रदेश के भोपाल में रहने वाली एक लाचार महिला की है। इसका पति लकवाग्रस्त है। यह महिला एक मंदिर के बाहर प्रसाद बेचकर अपने परिवार चला रही थी। बेटा किसी पेट्रोल पंप पर काम करता है। वो उतना नहीं कमाता कि घर और पिता की दवाइयों का खर्चा चल सके। बावजूद यह फैमिली जैसे-तैसे अपना काम चला रही थी कि लॉकडाउन ने उनकी जिंदगी पर जैसे पहाड़ तोड़ दिया। घर में खाने को कुछ नहीं बचा और पति की दवाइयों का इंतजाम नहीं हो पा रहा था, तो महिला ने दु:खी होकर 5000 रुपए में अपना मंगलसूत्र बेच दिया। लॉकडाउन में गरीबों की बेबसी दिखातीं तस्वीरें..

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    Other States8, Jun 2020, 2:42 PM

    हर तस्वीर एक हौसला है, ये दुनिया के सबसे ताकतवर लोग हैं, आपको इनमें क्या दिखता है?

    दिल्ली. कोरोना संक्रमण ने सारी दुनिया के हालात खराब किए हैं। क्या अमीर-गरीब और क्या बड़े-बूढ़े..सब इसकी चपेट में आए। संक्रमण को काबू में लगाए गए लॉकडाउन के बाद देश में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिले। काम-धंधा बंद होने से लाखों प्रवासी मजदूर और उनके परिवार निराश होकर अपने-अपने घरों को लौट पड़े। यातायात की सुविधाएं बंद होने से हजारों लोगों को पैदल ही अपने घरों की ओर जाते देखा गया। इनमें गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, मासूम बच्चे, बीमार लोग भी शामिल थे। इनकी तमाम तस्वीरें मीडिया में सामने आईं। लेकिन इसी भीड़ में कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे दिव्यांग लोग भी। कुछ बैसाखियों या छड़ी के सहारे, तो कुछ ट्राइसाइकिल पर। कुछ पैरों से लाचार थे, तो कुछ हाथों से। कुछ देख नहीं सकते थे, तो कई अन्य शारीरिक कमजोरियों का शिकार। लेकिन उनके हौसले नहीं डिगे। वे चलते रहे। ये तस्वीरें बेशक भावुक करती हैं, लेकिन यह भी दिखाती हैं कि इंसान से बड़ी ताकत दुनिया में कोई नहीं। ये तस्वीरें हम सबको सबक देती हैं कि मुसीबतों से डरे नहीं, लड़ें...

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    Other States5, Jun 2020, 10:33 AM

    ब्लास्ट की आवाज सुनकर घर से भागी-भागी फैक्ट्री पहुंची पत्नी..वहां जाकर जो दृश्य देखा, उसके हाथ-पैर कांप उठे

    भरुच, गुजरात. ये तस्वीरें गुजरात के भरुच जिले के दहेज-सेज-2 में एक केमिकल फैक्ट्री में बुधवार को हुए ब्लास्ट के बाद की हैं। पहली तस्वीर ब्लास्ट में जलकर और धुएं से पूरी तरह काले पड़े कर्मचारी की है। दूसरी तस्वीर इस हादसे में अपने पति को खोने वाली एक महिला की है। इसका परिवार फैक्ट्री के पास ही रहता है। जब उसने धमाके की आवाज सुनी, तो घबरा गई। वो दौड़ी-दौड़ी फैक्ट्री पहुंची। वहां जब पति की जलकर पूरी काली पड़ चुकी लाश देखी, तो कांप उठी। बता दें कि इस हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल भी हुए थे। आग पर काबू पाने 15 से ज्यादा फायरब्रिगेड को बुलाना पड़ा था। हादसे में घायल हुए कर्मचारियों में से दो ने गुरुवार को दम तोड़ दिया। मरने वालों में चार बिहार के हैं। इनमें गोपालगंज के सूरजलाल सिंह (34), रोहतास के मुन्ना सिंह (38), समस्तीपुर के त्रिपुरारी कुमार और दरभंगा के हरिदर्शन कुमार शामिल हैं।