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    WorldJun 27, 2021, 4:26 PM IST

    FDA ने शुरू की निगरानी: फाइजर-माडर्ना वैक्सीन लगने के बाद सीने में दर्द-सांस में तकलीफ-धड़कनें हो रही तेज

    अमेरिकी एफडीए ने माडर्ना और फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन के लगने के बाद कई प्रकार की दिक्कतों के होने की रिपोर्ट मिली है। मामले बढ़ने के बाद एफडीए और सीडीसी ने रिपोर्ट्स की निगरानी का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद मायोकार्डिटिस और पेरिकार्डिटिस का जोखिम बढ़ गया है।

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    NationalJun 12, 2021, 4:54 PM IST

    अमेरिका में कोवैक्सिन का क्लीनिकल ट्रायल करेगा भारत बायोटेक, FDA ने मंजूरी देने से किया था इनकार

    भारत में कोवैक्सिन का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका में कोवैक्सिन को मंजूरी क्यों नहीं मिली। FDA ने भारत बायोटेक की Covaxin के इस्तेमाल को इसलिए मंजूरी नहीं दी, क्योंकि कंपनी ने इस साल मार्च से थोड़ा ही टेस्टिंग डाटा दिया था। 

  • <p>Bharat Biotech, Covaxin, Covaxin in America, Bharat Biotech in America, Vaccine in India, Covaxin Approval, Corona in India, Corona Epidemic, Corona Data</p>

    TrendingJun 11, 2021, 1:22 PM IST

    Bharat Biotech वैक्सीन को US में क्यों नहीं मिली मंजूरी? जानें क्या-क्या मांग की गई

    भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को एफडीए ने अमेरिका में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। एफडीए ने वैक्सीन के लिए क्लिनिकल ट्रायल के डेटा मांगे। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस वैक्सीन का इस्तेमाल भारत में किया जा रहा है उसे अमेरिका ने मना क्यों कर दिया?

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    NationalMay 12, 2021, 11:00 PM IST

    बड़ों वाली वैक्सीन क्यों नहीं लगा रहे बच्चों को, किस देश में बच्चों को लग रही वैक्सीन..जानिए ऐसे सवालों के जवाब

    विश्व भर के कई देशों में बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो रहा है। दो देशों में ट्रायल पूरा होने के बाद बच्चों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में जेहन में एक सवाल आता है कि बड़ों की वैक्सीन को बच्चों में क्यों नहीं लगाई जाती है। जैसे बच्चों को कोई अंग्रेजी दवाई देते समय उसकी मात्रा कम कर दी जाती है।

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    NationalApr 20, 2021, 4:12 PM IST

    मुंबई में रेमडेसिविर की कालाबाजारी से पहले ही 2 जगहों पर रेड, 2000 शीशियां जब्त

    कोरोना संक्रमण के इलाज में रामबाण दवा समझे जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर देश में कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। महाराष्ट्र में तो जैसे हाहाकार मचा हुआ है। इसे लेकर सरकार सख्त हुई है। रेमडेसिविर की कालाबाजारी रोकने लगातार छापामार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अधिकारियों ने मुंबई में दो स्थानों पर छापेमारी करके रेडमडेसिविर की 2000 शीशियां जब्त की हैं।

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    Coronavirus WorldApr 13, 2021, 6:27 PM IST

    अमेरिका में जानसन एंड जानसन वैक्सीन इस्तेमाल पर अस्थायी रोक, blood clotting की रिपोर्ट

    अमेरिका में जानसन एंड जानसन कंपनी की वैक्सीन के इस्तेमाल को कुछ दिनों तक रोकने की सिफारिश की गई है। 

  • <p>दुनिया में कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा जूझ रहे अमेरिका में इस घातक वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने फाइजर वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।</p>

    WorldDec 12, 2020, 2:16 PM IST

    अमेरिका में कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी, 24 घंटे के भीतर दी जाएगी पहली डोज

    दुनिया में कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा जूझ रहे अमेरिका में इस घातक वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने फाइजर वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। 

  • <p>दुनिया में कहर बरपाने वाले कोरोना वायरस ने सर्दियां शुरू होते ही फिर से रफ़्तार पकड़ ली है। कई देशों में इसका संक्रमण फिर से तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। भारत समेत कई देशों में तेजी से लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में अमेरिका के खाद्य और औषधि विभाग ने शनिवार को आपातकालीन स्थिति में रेजेनरॉन से उपचार की अनुमति दे दी है। बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना संक्रमित हो जाने पर इसी के जरिए उनका इलाज किया गया था जिसके बाद वो जल्द ही ठीक हो गए थे।&nbsp;<br />
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    WorldNov 22, 2020, 1:09 PM IST

    आम अमरीकी नागरिकों के लिए इस्तेमाल होगी ट्रंप का कोरोना ठीक करने वाली दवा, इस खास तरीके से हुआ था इलाज

    दुनिया में कहर बरपाने वाले कोरोना वायरस ने सर्दियां शुरू होते ही फिर से रफ़्तार पकड़ ली है। कई देशों में इसका संक्रमण फिर से तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। भारत समेत कई देशों में तेजी से लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में अमेरिका के खाद्य और औषधि विभाग ने शनिवार को आपातकालीन स्थिति में रेजेनरॉन से उपचार की अनुमति दे दी है। बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना संक्रमित हो जाने पर इसी के जरिए उनका इलाज किया गया था जिसके बाद वो जल्द ही ठीक हो गए थे। 
     

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    WorldNov 18, 2020, 4:17 PM IST

    घर पर ही कर सकेंगे कोरोना टेस्ट, इस देश में सेल्फ टेस्ट किट को मिली मंजूरी; 30 मिनट में आएगा रिजल्ट

    अमेरिका में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी बीच यहां फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) ने मंगलवार को पहली सेल्फ कोविड टेस्ट किट को मंजूरी दे दी है। इस टेस्ट किट से लोग घर पर ही कोरोना टेस्ट कर सकेंगे। इतना ही नहीं नतीजे सिर्फ 30 मिनट में आ जाएंगे। 

  • <p>Corona virus, hand sanitizer, corona infection, corona, corona figure<br />
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    NationalJul 8, 2020, 4:38 PM IST

    जान लें कैसा सैनिटाइजर इस्तेमाल करना चाहिए, सावधानी नहीं बरती तो हो सकते हैं बीमार

    नई दिल्ली. कोरोना वायरस से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनिटाइजर सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि हैंड सैनिटाइजर खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जानिए कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA)किस तरह के हैंड सैनिटाइजर को बेहतर मानता है। साथ ही यह भी किस तरह का हैंड सैनिटाइजर खरीदने से बचना चाहिए।
     

  • <p><strong>हटके डेस्क।</strong> दुनिया भर में कोरोना महामारी का कहर बढ़ता ही जा रहा है। इससे संक्रमित मरीजों की संख्या 40 लाख, 12 हजार 848 हो गई है, वहीं अब तक इससे 2 लाख 76 हजार से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। वहां अब तक 78 हजार से ज्यादा लोग मौत के शिकार हो चुके हैं, वहीं इंग्लैंड में भी मरने वालों की संख्या 31 हजार से ज्यादा हो गई है। दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना का टीका या इसकी कोई दवा खोजने में लगे हुए हैं, लेकिन अभी इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली है। इस बीच, दूसरी दवाइयों से भी कोरोना का इलाज करने की कोशिश की जा रही है। इसके इलाज में एक एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिवीर काफी असरदार साबित हुआ है। इसे अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने भी अप्रूव कर दिया है। अमेरिका में इस दवा का क्लिनिकल ट्रायल हो चुका है। रेमडेसिवीर को इबोला वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए विकसित किया गया था। ट्रायल से यह पता चला है कि यह दवा कोरोना वायरस के संक्रमण में काफी कारगर है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डिजीज (NIAID) ने इसका ट्रायल शुरू किया था। इस दवा के ट्रायल के परिणामों को सकारात्मक बताते हुए डॉक्टर एंथनी फॉउची ने भी इसके इस्तेमाल की सलाह दी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह दवा काफी कारगर साबित हो रही है। डॉक्टर एंथनी फॉउची कोविड पर वाइट हाउस में ट्रम्प के सलाहकार और अमेरिका के प्रमुख वायरोलॉजिस्ट हैं। रेमडेसिवीर दवा का निर्माण गिलियड साइंसेज कंपनी करती है। इसने अमेरिकी सरकार को इस दवा की 15 लाख खुराक मुफ्त देने की घोषणा की थी, जिससे 1.40 लाख कोरोना मरीजों का इलाज हो सकता है। इस दवा का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में किया जाता है, जिन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत होती है।&nbsp;</p>

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बहरहाल, अब यह खुलासा हुआ है कि इस दवा के 10 दिन के कोर्स की लागत जहां 700 रुपए के करीब है, वहीं अब इसके लिए डॉक्टर 7 लाख 40 हजार रुपए वसूल कर रहे हैं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग &nbsp;गिलियड कंपनी की यह कह कर आलोचना कर रहे हैं कि यह महामारी से मुनाफा कमाने की कोशिश में लग गई है। कैलिफोर्निया की यह कंपनी पहले भी &nbsp;रेमडेसिवीर दवा के लिए अनाप-शनाप कीमत वसूल चुकी है। साल 2013 में इसने रेमडेसिवीर का एक टैबलेट करीब 75,615 रुपए में बेचा था। उस समय इस दवा का इस्तेमाल हेपटाइटिस C के ट्रीटमेंट के लिए किया जा रहा था। वहीं, गिलियड के सीईओ डेनियल ओ' डे ने रेमडेसिवीर की कीमत को लेकर पूछे गए किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। लेकिन शुक्रवार को वाइट हाउस में प्रेसिडेंट ट्रम्प से मुलाकात के दौरान डेनियल ओ' डे ने कहा कि वे इस दवा को उन सभी लोगों को उपलब्ध कराएंगे, जिन्हें इसकी जरूरत है। साथ ही, उन्होंने 140,000 कोविड मरीजों के लिए यद दवा डोनेट करने के अपने वादे को दोहराया भी। देखें इससे जुड़ी तस्वीरें।&nbsp;</p>

    HatkeMay 9, 2020, 3:26 PM IST

    कोरोना में असरदार साबित हुई ये दवाई, 7 सौ रु में होती है तैयार, इलाज के बदले डॉक्टर वसूल रहे 7 लाख 40 हजार

    हटके डेस्क। दुनिया भर में कोरोना महामारी का कहर बढ़ता ही जा रहा है। इससे संक्रमित मरीजों की संख्या 40 लाख, 12 हजार 848 हो गई है, वहीं अब तक इससे 2 लाख 76 हजार से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। वहां अब तक 78 हजार से ज्यादा लोग मौत के शिकार हो चुके हैं, वहीं इंग्लैंड में भी मरने वालों की संख्या 31 हजार से ज्यादा हो गई है। दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना का टीका या इसकी कोई दवा खोजने में लगे हुए हैं, लेकिन अभी इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली है। इस बीच, दूसरी दवाइयों से भी कोरोना का इलाज करने की कोशिश की जा रही है। इसके इलाज में एक एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिवीर काफी असरदार साबित हुआ है। इसे अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने भी अप्रूव कर दिया है। अमेरिका में इस दवा का क्लिनिकल ट्रायल हो चुका है। रेमडेसिवीर को इबोला वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए विकसित किया गया था। ट्रायल से यह पता चला है कि यह दवा कोरोना वायरस के संक्रमण में काफी कारगर है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डिजीज (NIAID) ने इसका ट्रायल शुरू किया था। इस दवा के ट्रायल के परिणामों को सकारात्मक बताते हुए डॉक्टर एंथनी फॉउची ने भी इसके इस्तेमाल की सलाह दी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह दवा काफी कारगर साबित हो रही है। डॉक्टर एंथनी फॉउची कोविड पर वाइट हाउस में ट्रम्प के सलाहकार और अमेरिका के प्रमुख वायरोलॉजिस्ट हैं। रेमडेसिवीर दवा का निर्माण गिलियड साइंसेज कंपनी करती है। इसने अमेरिकी सरकार को इस दवा की 15 लाख खुराक मुफ्त देने की घोषणा की थी, जिससे 1.40 लाख कोरोना मरीजों का इलाज हो सकता है। इस दवा का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में किया जाता है, जिन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। 


    बहरहाल, अब यह खुलासा हुआ है कि इस दवा के 10 दिन के कोर्स की लागत जहां 700 रुपए के करीब है, वहीं अब इसके लिए डॉक्टर 7 लाख 40 हजार रुपए वसूल कर रहे हैं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग  गिलियड कंपनी की यह कह कर आलोचना कर रहे हैं कि यह महामारी से मुनाफा कमाने की कोशिश में लग गई है। कैलिफोर्निया की यह कंपनी पहले भी रेमडेसिवीर दवा के लिए अनाप-शनाप कीमत वसूल चुकी है। साल 2013 में इसने रेमडेसिवीर का एक टैबलेट करीब 75,615 रुपए में बेचा था। उस समय इस दवा का इस्तेमाल हेपटाइटिस C के ट्रीटमेंट के लिए किया जा रहा था। वहीं, गिलियड के सीईओ डेनियल ओ' डे ने रेमडेसिवीर की कीमत को लेकर पूछे गए किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। लेकिन शुक्रवार को वाइट हाउस में प्रेसिडेंट ट्रम्प से मुलाकात के दौरान डेनियल ओ' डे ने कहा कि वे इस दवा को उन सभी लोगों को उपलब्ध कराएंगे, जिन्हें इसकी जरूरत है। साथ ही, उन्होंने 140,000 कोविड मरीजों के लिए यद दवा डोनेट करने के अपने वादे को दोहराया भी। देखें इससे जुड़ी तस्वीरें। 


     

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    Health CapsuleMay 2, 2020, 4:19 PM IST

    जानिए आखिर क्या है कोरोना की वो दवा, जिसके प्रयोग के लिए अमेरिकी सरकार ने दिखाई हरी झंडी

    कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच इसके इलाज के लिए वैक्सीन बनाने की कोशिश में दुनिया भर के हेल्थ सांइटिस्ट्स लगे हुए हैं। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल सितंबर तक कोरोना का वैक्सीन तैयार हो सकता है, वहीं अमेरिका में अगले साल मई तक वैक्सीन बनने की बात कही जा रही है। इस बीच, इबोला वायरस के लिए बनाई गई दवा से कोरोना के सफल इलाज की उम्मीद बन रही है।
     

  • <p>हटके डेस्क। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में भयानक तबाही मचा दी है। दुनिया भर में अब तक इसके 33 लाख मामले सामने आ चुके हैं, वहीं 2.34 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस ने अमेरिका में सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। इससे वहां 63,861 लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लाख 95 हजार, 210 लोग संक्रमित हैं। इसी बीच, अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों में साइंटिस्ट्स कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। अमेरिका में इन्फेक्शियस डिजीज के टॉप एक्सपर्ट डॉक्टर एंथनी फाउची का कहना है कि एक से डेढ़ साल के बीच कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार कर लिया जाएगा। डॉक्टर एंथनी फाउची वाइट हाउस के कोरोना वायरस टास्क फोर्स के मेंबर हैं। डॉक्टर फाउची ने पहले यह चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस को जड़ से खत्म कर पाना संभव नहीं है। वहीं, अब उन पर वैक्सीन विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी आ गई है। उनका कहना है कि अगस्त, 2021 तक कोरोना वायरस का वैक्सीन उपलब्ध करा दिया जाएगा, लेकिन कुछ साइंटिस्ट का कहना है कि यह इतनी जल्दी संभव नहीं हो सकता। कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने में कम से कम 16 साल लग सकते हैं। इसके लिए एकेडमिक रिसर्च के साथ ही कई फेज में क्लिनिकल ट्रायल करने होते हैं। ज्यादातर ट्रायल फेल हो जाने से वैक्सीन का प्रोडक्शन जल्दी नहीं किया जा सकता। प्री-क्लिनिकल ट्रायल के बाद 3 फेज में क्लिनिकल ट्रायल होंगे, इसके बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से अप्रूवल लेना होगा और वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए फैक्ट्रियां लगानी होंगी। इस सबमें काफी समय लगेगा और 2036 के मई-अगस्त के पहले कोरोना के वैक्सीन का आ पाना संभव नहीं लगता है। वैज्ञानिकों की इस बात से लोगों में असमंजस की स्थिति है, वहीं अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने वैक्सीन बनाने के लिए फास्ट ट्रैक डेवलपमेंट इनिशिएटिव लॉन्च किया है। देखें इससे जुड़ी तस्वीरें।&nbsp;</p>

    HatkeMay 2, 2020, 11:15 AM IST

    दावा: अगले 16 साल तक नहीं बन पाएगी कोरोना की वैक्सीन, एक के बाद एक फेल होते जाएंगे टेस्ट

    हटके डेस्क। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में भयानक तबाही मचा दी है। दुनिया भर में अब तक इसके 33 लाख मामले सामने आ चुके हैं, वहीं 2.34 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस ने अमेरिका में सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। इससे वहां 63,861 लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लाख 95 हजार, 210 लोग संक्रमित हैं। इसी बीच, अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों में साइंटिस्ट्स कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। अमेरिका में इन्फेक्शियस डिजीज के टॉप एक्सपर्ट डॉक्टर एंथनी फाउची का कहना है कि एक से डेढ़ साल के बीच कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार कर लिया जाएगा। डॉक्टर एंथनी फाउची वाइट हाउस के कोरोना वायरस टास्क फोर्स के मेंबर हैं। डॉक्टर फाउची ने पहले यह चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस को जड़ से खत्म कर पाना संभव नहीं है। वहीं, अब उन पर वैक्सीन विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी आ गई है। उनका कहना है कि अगस्त, 2021 तक कोरोना वायरस का वैक्सीन उपलब्ध करा दिया जाएगा, लेकिन कुछ साइंटिस्ट का कहना है कि यह इतनी जल्दी संभव नहीं हो सकता। कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने में कम से कम 16 साल लग सकते हैं। इसके लिए एकेडमिक रिसर्च के साथ ही कई फेज में क्लिनिकल ट्रायल करने होते हैं। ज्यादातर ट्रायल फेल हो जाने से वैक्सीन का प्रोडक्शन जल्दी नहीं किया जा सकता। प्री-क्लिनिकल ट्रायल के बाद 3 फेज में क्लिनिकल ट्रायल होंगे, इसके बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से अप्रूवल लेना होगा और वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए फैक्ट्रियां लगानी होंगी। इस सबमें काफी समय लगेगा और 2036 के मई-अगस्त के पहले कोरोना के वैक्सीन का आ पाना संभव नहीं लगता है। वैज्ञानिकों की इस बात से लोगों में असमंजस की स्थिति है, वहीं अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने वैक्सीन बनाने के लिए फास्ट ट्रैक डेवलपमेंट इनिशिएटिव लॉन्च किया है। देखें इससे जुड़ी तस्वीरें। 
     

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    MaharashtraMar 13, 2020, 2:24 PM IST

    FDA ने घटिया सैनिटाइज़र बेचने वालों का किया भंडाफोड़, लाइसेंस और सही रसीद के बिना हो रही थी बिक्री

    महाराष्ट्र में जहां प्रशासन एक ओर कोरोना वायरस के खतरे को कम करने के उपायों में जुटा है वहीं राज्य के स्वास्थ्य नियामक को कुछ ऐसे लोगों के बारे में पता चला है जो घटिया हैंड वॉश और सैनिटाइज़र बेचकर तेजी से पैसा कमाने की होड़ में लगे हैं

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    MaharashtraJan 18, 2020, 1:26 PM IST

    महाराष्ट्र में एफडीए ने जब्त किया 2.74 करोड़ रुपये का गुटखा

     (एफडीए) ने भिवंडी के एक गोदाम से 2.74 करोड़ रुपये मूल्य का गुटखा, पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद जब्त किए।