Health Services  

(Search results - 37)
  • <p>&nbsp;वैश्विक महामारी कोरोना से जंग के बीच एम्स नर्सिंग यूनियन ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस वजह से एम्स के पांच हजार नर्सिंग कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं।&nbsp;</p>

    NationalDec 15, 2020, 8:31 AM IST

    एम्स के 5 हजार नर्सिंग कर्मचारी हड़ताल पर, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा- चिकित्सकीय सेवाओं में न हो कोई रुकावट

    वैश्विक महामारी कोरोना से जंग के बीच एम्स नर्सिंग यूनियन ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस वजह से एम्स के पांच हजार नर्सिंग कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। 

  • undefined

    ChhattisgarhNov 3, 2020, 10:48 AM IST

    'भगवान' न करे ऐसा किसी के साथ हो, जुड़वा बच्चों सहित मर गई प्रसूता, नर्स घोड़े बेचकर सोती रही

    बालोद, छत्तीसगढ़. डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ (medical staff) को लोग भगवान का दर्जा देते हैं, लेकिन ये तस्वीरें शर्मनाक (Embarrassing pictures) हैं। अगर नर्स या डॉक्टर समय पर प्रसूता को देख लेते, तो उसकी और उसके गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत नहीं होती। यह मामला पारागांव(उमरादाह) की रहने वाली 30 वर्षीय प्रसूता बीटन उर्फ बिंदिया देवांगन की मौत से जुड़ा है। वो रविवार रातभर तड़पती रही, लेकिन जब उसके परिजन नर्स को बुलाने गए, तो उसने डटपते हुए कहा कि उसे परेशान मत करो..वो यानी प्रसूता मर तो नहीं रही है? लेकिन प्रसूता सचमुच मर गई। उसके बच्चे भी मर गए। बिंदिया का रविवार को ऑपरेशन होना था, लेकिन डॉक्टर छुट्टी पर थे। सोमवार सुबह तक प्रसूता और जुडवा बच्चे दोनों मर गए। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने माफी मांगकर अपना फर्ज पूरा कर लिया। एसडीएम सिल्ली थॉमस ने नर्स को निलंबित कर दिया। वहीं, पति को प्लेसमेंट के माध्यम से काम दिलाने की बात कही। इसके बाद परिजन दोपहर बाद महिला की बॉडी लेने को राजी हुए। सिविल सर्जन डॉ. बीएल रात्रे ने तर्क दिया कि प्रसूता का बीपी काफी बढ़ा हुआ था। आगे पढ़ें इसी खबर के बारे में...

  • undefined

    HaryanaOct 23, 2020, 3:19 PM IST

    इधर से उधर दौड़ाते रहे डॉक्टर, अंत में मां की गोद में ही मर गया मासूम

    यह तस्वीर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओ की हकीकत दिखाती है। अपने 4 महीने के बच्चे को गोद से चिपकाकर रोये जा रही इस मां की पीड़ा है कि अगर बच्चे का समय पर ऑक्सीजन मिल जाती, तो शायद उसकी जान बच जाती। मामला पानीपत के सिविल अस्पताल से जुड़ा है। 

  • undefined

    RajasthanOct 22, 2020, 10:20 AM IST

    बच्चे के शव को सीने से चिपकाकर रोती रही मां, न भगवान पिघले और न खाकी

    सीकर, राजस्थान. यह तस्वीर डॉक्टर और पुलिस के गैर जिम्मेदाराना बर्ताव (Irresponsible treatment) को दिखाती है। इस महिला का पड़ोसी से झगड़ा हुआ था। मारपीट के चलते उसका गर्भपात (Abortion) हो गया। वो बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची, लेकिन डॉक्टर ने पुलिस केस बताकर इलाज से पल्ला झाड़ लिया। वहीं, पुलिस बोली कि पीड़िता उसके पास नहीं आई। जबकि लोगों ने देखा कि पीड़िता अपने बच्चे का शव सीने से चिपकाए कभी अस्पताल, तो कभी थाने का चक्कर काटती रही। महिला दो दिन तक बच्चे की लाश लिए भटकती रही। आखिरकार पीड़िता परिवार सीधे कोर्ट जा पहुंचा। तब कहीं जाकर पुलिस सक्रिय हुई। मामला नीमकाथाना कस्बे के लुहारवास का है। बुधवार को पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं बच्चे का शव मर्चुरी में रखवाया गया। बता दें कि रास्ते को लेकर बिमला बावरिया और पड़ोसी सरदारा मीणा के परिवार के बीच विवाद चला आ रहा है। इसी बात को लेकर 18 अक्टूबर को विमला की लड़की की गर्भवती बेटी रेखा के साथ भी मारपीट हो गई थी। वो अपनी ससुराल श्रीमाधोपुर से लुहारवास आई थी। आगे पढ़ें इसी घटना के बारे में...

  • undefined

    JharkhandOct 12, 2020, 5:30 PM IST

    कोई जीये-मरे सरकार का क्या? इलेक्शन के वक्त 1000 वादें करते हैं नेता, बाद में 'दुनिया जाए भाड़ में'

    गढ़वा, झारखंड. ये तस्वीरें देश की स्वास्थ्य सेवाओं (health services) की हकीकत दिखाती हैं, देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है, लेकिन उनकी जिंदगी से जैसे सरकारों को कोई वास्ता नहीं है। तमाम गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हैं। सड़क नहीं हैं, नदी-नालों पर पुल-पुलिया नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को खाट पर लिटाकर मीलों दूर अस्पताल तक लाना पड़ता है। यह तस्वीर गढ़वा के बंशीधर नगर ब्लॉक स्थित कोईंदी गांव के खरवारा की है। यहां की रहने वालीं बुजुर्ग सोनिया कुंवर को इलाज के लिए उनके परिजन खाट पर लिटाकर अस्पताल तक ले गए। उनके नाती ने बताया कि उनके गांव में जब भी कोई बीमार होता है, तो लोग खाट पर ही लिटाकर अस्पताल तक ले जाते हैं। बरसात में जब नदी में पानी भर जाता है, तब बड़ी परेशानी होती है। एम्बुलेंस गांव से करीब 2 किमी दूर तक ही पहुंच पाती है। आगे पढ़ें इसी खबर के बारे में...
     

  • undefined

    Madhya PradeshOct 12, 2020, 10:30 AM IST

    उठने लगा है 'भगवान' से भरोसा, ये तस्वीरें कोरोना वॉरियर्स के प्रोफेशन पर एक दाग हैं

    भोपाल, मध्य प्रदेश. कोरोना(Corona infection) ने सारी दुनिया का हिलाकर रख दिया है। इस बीच लोग एक-दूसरे की मदद को आगे आए। शुरुआत में अस्पतालों और डॉक्टरों ने भी अच्छी ड्यूटी निभाई, लेकिन अब तमाम ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जो इनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े करने लगी हैं। इस बेटी की पीड़ा सुनकर कथित भगवानों के आगे घुटने टेक चुकी सरकार की शर्मनाक तस्वीर सामने आती हैं। यहां के कोलार स्थित सर्वधर्म कालोनी की रहने वालीं 43 साल की संतोष रजक इसी अराजक सिस्टम का शिकार हो गई थीं। इससे आहत होकर उनकी 27 वर्षीय बेटी प्रियंका ने एक वीडियो वायरल करके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) से इच्छा मृत्यु (Euthanasia ) मांगी है। प्रियंका ने भावुक होकर कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामा भांजी के नाम को बहुत प्रसिद्ध किया, लेकिन उनकी यह भांजी भटक रही है। उनकी मां ही पूरे परिवार का अंतिम सहारा थीं। प्रियंका ने सिस्टम पर कई सवाल खड़े किए हैं। पढ़ें पूरी कहानी...

  • undefined

    JharkhandOct 5, 2020, 11:26 AM IST

    यह कैसे भगवान, 9 महीने की गर्भवती के लिए 'जेल' बना सरकारी अस्पताल, शर्मनाक तस्वीरें...

    धनबाद, झारखंड. यह तस्वीर देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली (bad health service) को दिखाती है। कोरोना संक्रमण के दौर में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर होना चाहिए था, लेकिन हालत और बुरी हो चली है। ज्यादातर अस्पतालों में कोरोना मरीजों के साथ ठीक बर्ताव नहीं हो रहा। इन सबके बीच पॉजिटिव (Corona positive) निकलीं गर्भवती महिलाओं को अधिक कष्ट उठाना पड़ रहा है। यह हैं कोलहर टुंडी की रहने वालीं विजय लक्ष्मी। ये 9 महीने की गर्भवती हैं। यानी डिलीवरी कभी भी हो सकती है। उन्हें डिलीवरी के लिए एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। वहां ऑपरेशन की तैयारियां होने लगीं। लेकिन जब मालूम चला कि विजय कोरोना पॉजिटिव हैं, तो अस्पताल ने हाथ खड़े कर लिए। इसके बाद उन्हें पीएमसीएच भेज दिया गया। वहां से एसएसएलएनटी अस्पताल रेफर कर दिया गया। यह तस्वीर रविवार की उस वक्त की है, जब विजय लक्ष्मी को अस्पताल में भर्ती हुए पूरा दिन गुजर चुका था और वे ऑपरेशन के इंतजार में बैठी रहीं। परिजन डॉक्टरों के हाथ-पैर जोड़ते रहे, लेकिन वे टालते रहे। आगे पढ़ें इसी घटना के बारे में...

  • undefined

    ChhattisgarhOct 3, 2020, 10:22 AM IST

    पूरे गांव ने मान लिया था कि उसे कोरोना है, मरने तक उसके साथ होता रहा बुरा

    जशपुर, छत्तीसगढ़. यह तस्वीर कोरोना (Corona infection) को लेकर लोगों के डर और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली दिखाती है। बगीचा ब्लॉक के घोघर गांव के 50 वर्षीय दिव्यांग सुखलाल को सर्दी-खांसी हुई, तो पूरे गांव ने मान लिया कि उसे कोरोना हुआ है। बस फिर क्या था, उससे दूरी बना ली। उसे हैंडपंप से पानी तक नहीं भरने दिया जा रहा था। नजदीक के रिश्तेदारों ने भी उससे मुंह मोड़ लिया। जब उसकी तबीयत बिगड़ी, तो पत्नी सीताबाई ने सरपंच से मदद मांगी। इसके बाद उसे पिकअप के जरिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (Primary Health Centre) लाया गया। यहां स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने भी उसे अंदर नहीं आने दिया। पिकअप में ही उसे चेक किया। फिर सीएससी बगीचा रैफर कर दिया। वहां भी बड़ी मुश्किल से उसे भर्ती किया गया। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पढ़ें इसी खबर के बारे में...
     

  • undefined

    ChhattisgarhOct 1, 2020, 12:26 PM IST

    ये कैसे 'भगवान' हैं, जिनके दिल पिघलते नहीं, लालच कभी खत्म नहीं होता, शर्मनाक कहानियां

    बिलासपुर, छत्तीसगढ़. कोरोना काल (Corona era) में डॉक्टरों के बर्ताव और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों को काफी उम्मीदें हैं। लेकिन अब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यह मामला एक गर्भवती से जुड़ा है। उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर दो अस्पतालों ने न सिर्फ भर्ती करने से मना कर दिया, बल्कि उसकी कोई मदद भी नहीं की। वो 37 घंटे प्रसव पीड़ा से तड़पते हुए एक अस्पताल से दूसरे तक चक्कर काटती रही। एक बार सिम्स ने भी लौटा दिया। लेकिन दूसरी बार उसे भर्ती कर लिया। गनीमत रही कि समय पर प्रसव होने से मां-बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं। बता दें कि कोटा ब्लॉक के बहेरामुड़ा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय शारदा रोहिणी को सोमवार की रात 10.30 बजे प्रसव पीड़ा  (Labour pain उठी थी। परिजन उसे महतारी एक्सप्रेस से लेकर बेलगहना स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। यहां महिला का कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर इलाज से मना कर दिया था। इसके बाद वे सिम्स पहुंचे। यहां से भी भगा दिया गया। गर्भवती इसके बाद करगीरोड कोटा स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। जब यहां भर्ती करने से मना किया, तो वो फिर से सिम्स पहुंची। यहां दूसरी बार में महिला को भर्ती किया गया। आगे पढ़ें इसी घटना के बारे में...
     

  • undefined

    ChhattisgarhSep 26, 2020, 11:33 AM IST

    इस पॉलिथीन में कोई चीज नहीं, 2 साल की बच्ची की लाश लिपटी है, जिसे बाइक पर ऐसे ले जाना परिजनों की मजबूरी थी

    यह तस्वीर देश की स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत दिखाती हैं। इस पॉलिथीन में  2 साल की मासूम बच्ची की लाश लिपटी है। उसे सांप ने काटा था, जिससे मौत हो गई थी। बच्ची की लाश को घर तक ले जाने के लिए अस्पताल के पास कोई वाहन उपलब्ध नहीं था। लिहाजा, पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल प्रबंधन ने लाश को पॉलिथीन में लपेटकर परिजनों को सौंप दिया।

  • undefined

    Madhya PradeshSep 26, 2020, 9:46 AM IST

    'भगवान' के आगे सिस्टम ने टेके घुटने, तीन अस्पतालों में मां को लेकर भटकती रही बेटी, कलेक्टरी भी फेल

    भोपाल, मध्य प्रदेश. 'भगवान' होना कोई आसान नहीं! डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि वे लोगों की जान बचाते हैं। लेकिन हर डॉक्टर भगवान नहीं होता और हर अस्पताल जान बचाने वाला मंदिर नहीं! इस बेटी की पीड़ा सुनकर कथित भगवानों के आगे घुटने टेक चुकी सरकार की शर्मनाक तस्वीर सामने आती है। यहां के कोलार स्थित सर्वधर्म कालोनी की रहने वालीं 43 साल की संतोष रजक इसी अराजक सिस्टम का शिकार हो गईं। उनकी बेटी प्रियंका और बेटा हर्ष बीमार मां को लेकर तीन अस्पतालों में भटकता रहा। एक ने एक दिन भर्ती करके मोटी रकम वसूल ली और अगले दिन कोविड (Corona infection) आईसीयू बेड नहीं होने पर सरकारी अस्पताल (government hospital) भेज दिया। वहां बेड न होने पर तीसरे प्राइवेट अस्पताल रवाना किया। यहां इलाज के नाम पर 5 दिनों के लिए 50000 रुपए जमा करा लिए। इसके बावजूद सिर्फ खानापूर्ति की। कलेक्टर के आदेश पर मरीज को फिर सरकारी अस्पताल में बेड मिला, लेकिन बचाया नहीं जा सका। आगे पढ़ें बेबस बेटी की कहानी...

  • undefined

    ChhattisgarhSep 25, 2020, 10:06 AM IST

    शर्मनाक तस्वीरें: कोरोना तो बहाना है, हमें तो बस पैसा कमाना है...नहीं, तो कोई जीये-मरे हमें क्या पड़ी

    पेंड्रा, छत्तीसगढ़. कोरोनाकाल (Corona infection) में मेडिकल स्टाफ की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है, लेकिन कुछ स्टाफ अपनी जिम्मेदारियां नहीं समझ रहे। ये घटनाएं यही दिखाती हैं। कोरोना के बहाने मरीजों का शोषण किया जा रहा है। मरीजों की देखभाल तो दूर...बिना पैसे उनका इलाज तक नहीं किया जा रहा है। प्रसव पीड़ा होने पर इस महिला को जिला अस्पताल लाया गया था। लेकिन यहां स्टाफ ने गर्भ में ही बच्चे की मौत होने का बताकर बिलासपुर सिम्स (Chhattisgarh Institute of Medical Sciences)  रेफर कर दिया। वहां कोरोना के बहाने उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। अपनी पत्नी की जान खतरे में देखकर पति घबरा गया और वो उसे  एम्बुलेंस से गौरेला के एक प्राइवेट अस्पताल ले गया। वहां 20000 रुपए खर्च करने पड़े। पढ़िए पूरी खबर...

  • undefined

    Madhya PradeshSep 22, 2020, 10:15 AM IST

    कफन हटाते ही खड़ा हो गया हंगामा, एक चूहे ने खोल दी सरकारी व्यवस्थाओं की सारी पोल

    इंदौर, मध्य प्रदेश. कोरानाकाल में मेडिकल स्टाफ (medical staff) की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन अब इस दिशा में घोर लापरवाहियां भी सामने आ रही हैं। अस्पतालों में मरीजों के साथ दुर्व्यवहार, इलाज में कोताही के अलावा निजी अस्पतालों में अनाप-शनाप बिल के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण (Corona infection) के लगातार केस बढ़ रहे हैं। बावजूद सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। सबसे शर्मनाक बात यह कि लोगों को अस्पतालों में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नया मामला इंदौर के यूनिक अस्पताल से जुड़ा है। यहां स्टाफ की लापरवाही से चूहे एक लाश को कुतर गए। बता दें कि मध्य प्रदेश में एक्टिव केस 22542 हो गए हैं। इनमें से 9 हजार केस सिर्फ इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में हैं। पढ़िए कोरोना संकट में अव्यवस्थाओं की कहानियां...

  • MBBS students

    CareersSep 21, 2020, 11:01 AM IST

    मेडिकल छात्रों को 3 महीने जिला अस्पताल में सेवा देना हुआ अनिवार्य, जानें 10 बड़ी बातें

    इसके बाद ही उन्हें अंतिम वर्ष की परीक्षा में बैठने के योग्य माना जाएगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ गर्वनेंस ने यह फैसला लेते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है।

  • undefined

    Madhya PradeshSep 11, 2020, 9:33 AM IST

    गर्भवती की चीखें सुनकर दहल उठे लोग, जैसे बना उन्हें उठाकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन कोई बची और कोई 'चल बसी'

    बैतूल, मध्य प्रदेश. देश में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े सुधार की जरूरत है। खासकर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की बहुत बुरी स्थिति है। पहली तस्वीर बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के भंडारपानी गांव की है। यह गांव 1800 फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी पर बसा है। यहां  जाने के कोई रोड नहीं है। लोग पहाड़ी कच्चे रास्ते से होकर आते-जाते हैं। पोटली में एक प्रसूता की लाश है। 28 वर्षीय जग्गोबाई डिलीवरी के तीन दिन पहले अपने मायके आई थीं। जहां उसने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी। लेकिन पहाड़ी से उतरकर नीचे आना उसके लिए संभव नहीं था। परिजन उसे जैसे-तैसे नीचे लाए। फिर एम्बुलेंस नहीं  मिलने पर उसे प्राइवेट वाहन के जरिये अस्पताल लेकर निकले, लेकिन बीच रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। पढ़िए इसके आगे कहानी और देखिए ऐसे ही कुछ और मामले...