Pitru Paksh  

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    Aisa KyunSep 17, 2020, 4:09 PM IST

    38 साल बाद सर्वपितृ अमावस्या पर सूर्य संक्रांति का योग, पितरों की शांति के लिए खास है ये दिन

    17 सितंबर, गुरुवार को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर ग्रह-नक्षत्रों का शुभ योग बन रहा है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार इस बार 38 साल बाद ऐसा हो रहा है, जब पितृ अमावस्या पर ही सूर्य राशि बदलकर कन्या में आ रहा है।

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    Aisa KyunSep 16, 2020, 3:16 PM IST

    17 सितंबर को अमावस्या के साथ कन्या संक्रांति भी, इसी दिन होगी भगवान विश्वकर्मा की पूजा

    उज्जैन. 17 सितंबर, गुरुवार को कई खास योग बन रहे हैं। इस दिन सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या, कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा है। अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है। ऐसा संभव न हो तो घर पर ही नदियों और तीर्थों का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए 17 तारीख को बन रहे खास योगों में कौन-कौन से शुभ कर्म किए जा सकते हैं...

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    UpaySep 16, 2020, 3:07 PM IST

    बचना चाहते हैं पितृ दोष के अशुभ प्रभाव से तो 17 सितंबर को करें इन 7 में से कोई 1 उपाय

    उज्जैन. श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार 17 सितंबर, गुरुवार को यह अमावस्या है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्‌ट के अनुसार, श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर कुछ विशेष उपाय करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष भी कम होता है। इस दिन ये उपाय करें-

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    UpaySep 15, 2020, 11:52 AM IST

    सर्वपितृमोक्ष अमावस्या 17 सितंबर को, पितरों के मोक्ष के लिए इस दिन जरूर करें ये 5 काम

    उज्जैन. 17 सितंबर, गुरुवार को पितृ पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या है। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि पर उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है। साथ ही, इस बार अगर किसी मृत सदस्य का श्राद्ध करना भूल गए हैं तो उनके लिए अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान आदि शुभ कर्म करना चाहिए। मान्यता है कि पितृ पक्ष में सभी पितर देवता धरती पर अपने-अपने कुल के घरों में आते हैं और धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर सभी पितर अपने पितृलोक लौट जाते हैं। अमावस्या तिथि पर ये शुभ कर्म भी जरूर करें-
     

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    Aisa KyunSep 15, 2020, 11:34 AM IST

    श्राद्ध में गाय, कौआ और कुत्ते को क्यों दिया जाता है भोजन? जानिए इस परंपरा से जुड़ी मान्यता

    17 सितंबर को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के साथ ही श्राद्ध पक्ष का समापन हो जाएगा। ये समय पितरों को समर्पित रहता है, इसलिए इसका विशेष महत्व है। श्राद्ध पक्ष से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपराएं हैं। ऐसी ही एक परंपरा है कौओं और गायों के लिए भोजन देने की।

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    Aisa KyunSep 15, 2020, 11:28 AM IST

    16 सितंबर को है श्राद्ध की चतुर्दशी तिथि, इस दिन किन मृत परिजनों का श्राद्ध करें और किनका नहीं?

    हिंदू धर्म के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में परिजनों की मृत्यु तिथि के अनुसार ही श्राद्ध करने का विधान है, लेकिन श्राद्ध पक्ष की चतुर्दशी तिथि (इस बार 16 सितंबर) को श्राद्ध करने की मनाही है। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया है कि इस तिथि पर केवल उन परिजनों का ही श्राद्ध करना चाहिए, जिनकी मृत्यु किसी के द्वारा शस्त्र (हथियार) से हुई हो।

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    Aisa KyunSep 14, 2020, 10:56 AM IST

    परंपरा: पिंडदान करते समय अनामिका उंगली में पहनी जाती है एक खास अंगूठी, जानिए क्या है इसका कारण?

    हिंदू धर्म में कुशा (एक विशेष प्रकार की घास) को बहुत ही पवित्र माना गया है। अनेक कामों में कुशा का उपयोग किया जाता है। पिंडदान-तर्पण करते समय कुशा से बनी अंगूठी (पवित्री) अनामिका उंगली में धारण करने की परंपरा है।

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    Aisa KyunSep 13, 2020, 2:40 PM IST

    तिल के बिना अधूरा होता है श्राद्ध, जानिए इसका धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व

    धर्म ग्रंथों के अनुसार, तिल के बिना पितरों का संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। इसलिए श्राद्ध के दौरान तर्पण और पिंडदान में तिल का इस्तेमाल होता है।

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    Aisa KyunSep 13, 2020, 2:39 PM IST

    पितृमोक्ष अमावस्या के बाद नहीं शुरू होगी नवरात्रि, 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक नहीं मनाया जाएगा कोई बड़ा पर्व

    हर साल पितृ पक्ष की अमावस्या के बाद से ही आश्विन मास की नवरात्रि शुरू हो जाती है। लेकिन, इस साल ऐसा नहीं होगा। 17 सितंबर को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या है। इसके बाद 18 तारीख से अधिकमास शुरू हो जाएगा। ये माह 16 अक्टूबर तक रहेगा।

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    UpaySep 12, 2020, 3:32 PM IST

    श्राद्ध पक्ष में पौधे लगाने से भी प्रसन्न होते हैं पितृ, जानिए कौन-कौन से पौधे लगाए जा सकते हैं

    उज्जैन. श्राद्ध पक्ष में सभी लोग तर्पण, पिंडदान आदि के माध्यम से अपने पितरों को प्रसन्न करते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में यदि पौधे लगाएं तो भी पितरों की कृपा हम पर बनी रहती है। कुछ पेड़-पौधे सकारात्मक उर्जा देते हैं। इसलिए ग्रंथों में बताए गए शुभ पेड़-पौधे पितृपक्ष में लगाए जाए तो पितरों का आशीर्वाद मिलता है। काशी के ज्योतिषाचार्य और धर्म शास्त्रों के जानकार पं. गणेश मिश्र के मुताबिक पीपल में देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास होता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष में पीपल का पेड़ खासतौर से लगाना चाहिए। इसके साथ बरगद, नीम, अशोक, बिल्वपत्र, तुलसी, आंवला और शमी का पेड़ लगाने से पर्यावरण को साफ रखने में तो मदद होगी ही, पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होंगे।

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    Aisa KyunSep 12, 2020, 3:17 PM IST

    पितृ पक्ष के 16 दिनों के अलावा इन 96 दिनों में भी किया जा सकता है पितरों के लिए श्राद्ध

    पितरों की संतुष्टि के लिए पितृ पक्ष के अलावा साल के अन्य दिनों में भी श्राद्ध किया जा सकता है। इस बारे में महाभारत और नारद पुराण में बताए गए दिनों की गिनती करें तो कुछ 96 दिन ऐसे होते हैं जिनमें श्राद्ध किया जा सकता है।

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    Aisa KyunSep 12, 2020, 10:50 AM IST

    इंदिरा एकादशी 13 सितंबर को, मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पितरों को मिलता है स्वर्ग

    हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है और व्रत किया जाता है। इंदिरा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य सब पापों से छूट जाता है और वैकुंठ को प्राप्त होता है व उसके पितरों को भी स्वर्ग में स्थान मिलता है।

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    Aisa KyunSep 11, 2020, 1:01 PM IST

    पुरुष न हो तो महिलाएं भी कर सकती हैं पितरों का श्राद्ध, जानिए क्या कहते हैं धर्म ग्रंथ

    परिवार में पुरुषों के न होने पर महिलाएं भी श्राद्धकर्म कर सकती हैं। इस बारे में सिंधु ग्रंथ के साथ ही मनुस्मृति, मार्कंडेय पुराण और गरुड़ पुराण में भी बताया गया है कि महिलाओं को तर्पण और पिंड दान करने का अधिकार है।

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    Aisa KyunSep 10, 2020, 3:07 PM IST

    पिंडदान-तर्पण के लिए प्रसिद्ध हैं ये 7 तीर्थ, यहां मिलती है पितरों की आत्मा को मुक्ति

    उज्जैन. श्राद्धपक्ष में पितरों के लिए विशेष पूजा करने का महत्व है। कुछ लोग घर में ही पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं, वहीं कुछ तीर्थ स्थानों पर। हमारे देश में कई प्रमुख तीर्थ हैं, जहां पिंडदान और तर्पण करने से पितृ संतुष्ट होते हैं। आज हम आपको 7 ऐसे ही तीर्थ स्थानों के बारे में बता रहे हैं तो पितृ कार्य यानी श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान के लिए प्रसिद्ध हैं। ये हैं वो 7 तीर्थ…
     

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    UpaySep 10, 2020, 2:46 PM IST

    श्राद्ध की नवमी तिथि 11 सितंबर को, इस दिन किया जाता है मृत विवाहित महिलाओं का श्राद्ध, ये उपाय करें

    उज्जैन. आश्विन माह के कृष्ण पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष की नवमी तिथि पर पितरों की प्रसन्नता के लिए नवमी का श्राद्ध किया जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, यह तिथि माता और परिवार की विवाहित महिलाओं के श्राद्ध के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। इसलिए इसे मातृ नवमी भी कहते हैं। इस बार ये तिथि 11 सितंबर, शुक्रवार को है। नवमी तिथि पर श्राद्ध करने से धन, संपत्ति, ऐश्वर्य व मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध करने के बाद कुछ खास उपाय किए जाएं तो परिवार की जितनी भी महिलाओं की मृत्यु सुहागिन अवस्था में हुई है, उनका आशीर्वाद मिलता है। नवमी तिथि पर इस विधि से करें श्राद्ध और उपाय…