Sanjay Gandhi Emergency  

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    Other StatesDec 14, 2020, 10:38 AM IST

    इमरजेंसी में संजय गांधी के इशारे पर जबर्दस्ती करा दी गई थी 62 लाख पुरुषों की नसबंदी, जानिए पूरी कहानी

    नई दिल्ली. संजय गांधी का 14 दिसंबर को जन्मदिन है। इंदिरा के बेटे संजय गांधी की छवि भारत की राजनीति में कड़े फैसले लेने वाली रही है। यह और बात है कि आपातकाल के दौरान लिए गए उनके फैसले गांधी फैमिली के लिए निंदा का कारण बने। यहां तक कि इंदिरा गांधी को अपनी सरकार तक गंवाना पड़ी। इलेक्शन में जनता पर उतना प्रभाव भाषणों का नहीं पड़ता, जितना छोटे-छोटे नारों का होता है। बात इमरजेंसी के दौरान की है। 25 जून, 1975 को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया था। इस दौरान उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने जनसंख्या पर काबू करने 62 लाख पुरुषों की जबर्दस्ती नसबंदी करा दी थी। इस ऑपरेशन में करीब 2 हजार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद के चुनावों में विपक्ष ने एक नारा दिया था- 'जमीन गई चकबंदी में, मकान गया हदबंदी में, द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मेरा मरद गया नसबंदी में!' इसी नसबंदी अभियान के चलते जनता ने 1977 में इंदिरा गांधी को सत्ता से बेदखल कर दिया था। देखिए इंदिरा गांधी और संजय गांधी की कुछ पुरानी तस्वीरें...

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    HaryanaJun 25, 2020, 10:54 AM IST

    'जमीन गई चकबंदी में, मकान गया हदबंदी में, द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मेरा मरद गया नसबंदी में'

    चंडीगढ़. 25 जून, 1975 को इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी, ताकि उनकी सरकार बची रही। आपातकाल को भारतीय राजनीति का सबसे काला अध्याय माना जाता है। इसी का परिणाम था कि इसके बाद 1977 में जब आम चुनाव हुए, तो आक्रोशित जनता ने इंदिरा गांधी की सरकार को उखाड़कर फेंक दिया था। आपातकाल में सरकार ने कई मामलों में क्रूरता की हदें पार कर दी थीं। इनमें से एक थी-जबरिया नसबंदी की मुहिम। यह आइडिया इंदिरा गांधी को किसी और ने नहीं, उनके छोटे बेटे संजय गांधी और उनके खास चौधरी बंसीलाल ने दिया था। बंसीलाल को आधुनिक हरियाणा का जनक कहा जाता है, लेकिन आपातकाल उनकी जिंदगी पर कलंक साबित हुआ। संजय गांधी के लिए भी यह हमेशा एक दाग रहेगा। इस दौरान 62 लाख पुरुषों की जबरिया नसबंदी करा दी गई थी। आपातकाल के दौरान दो नारे तेजी से वायरल हुए थे। पहला-'जमीन गई चकबंदी में, मकान गया हदबंदी में, द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मेरा मरद गया नसबंदी में!' दूसरा-'नसबंदी के तीन दलाल-इंदिरा, संजय बंसीलाल। बता दें कि पुरुषों को पकड़-पकड़कर शिविर में लाया गया था। इस दौरान कई लोगों की मौत भी हो गई थी। जानिए नसबंदी की पूरी कहानी..

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    Madhya PradeshFeb 21, 2020, 2:22 PM IST

    'द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मेरा मरद गया नसबंदी में'...कमलनाथ ने फिर याद दिलाया संजय गांधी का 'दौर'

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का नसबंदी को लेकर दिया गया एक आदेश विवादों में घिर गया है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मचारियों को कड़े शब्दों में कहा है कि सबको हर महीने 5-10 पुरुषों की नसबंदी करानी थी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद कमलनाथ ने यह आदेश वापस ले लिया।