Success Farmer  

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    CareersFeb 10, 2021, 9:48 AM IST

    जरूरी नहीं कि IAS नहीं बन पाए, तो फ्यूचर खराब हो गया, इनसे सीखिए कैसे बदल दी अपनी जिंदगी

    जिंदगी में लगातार संघर्ष चलते रहते हैं। हम लोग बहुत-सारे सपने देखते हैं। इनमें से कुछ पूरे होते हैं और कुछ नहीं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि एक सपना टूट गया, तो हम हर मोर्चे पर फेल हो जाएंगे। अगर करियर या रोजगार की बात की जाए, तो गिनती के लोगों के ही सपने 100 प्रतिशत पूरे होते हैं। बाकी लोग अपनी मेहनत और समझ से दूसरा रास्ता खोज लेते हैं। ऐसे ही किसान हैं मनोज आर्य। ये यूपी के बागपत जिले से करीब 15 किमी दूर ढिकाना गांव में रहते हैं। ये कभी आईएएस बनना चाहते थे। दिल्ली में रहकर तैयारी भी की। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ आंदोलन भी किए। आरटीआई कार्यकर्ता भी रहे। अब ये विशुद्ध किसान बन गए हैं। अपने खेतों में गन्ना उगाते हैं और उसका गुड़ बनाते हैं। ये ऑर्गेनिक तरीके से गुड़ बनाते हैं। लिहाजा इनके गुड़ की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। ये अपने इलाके के रोल मॉडल हैं। दूसरे किसान इनसे गुड़ बनाने का तरीका सीखने आते हैं। अब ये सिर्फ गुड़ से हर साल करीब 6 लाख रुपए कमा लेते हैं।
     

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    CareersJan 22, 2021, 10:55 AM IST

    बीमार पिता की वजह से लौटना पड़ा गांव, कहीं नौकरी भी नहीं मिल रही थी, अब बांस की खेती ने बना दिया करोड़पति

    बेरोजगारी की एक बड़ी समस्या नौकरी के पीछे भागमभाग है। जबकि रोजगार या काम-धंधे के ऐसे कई विकल्प हैं, जो आपको नौकरी में मिलने वाली सैलरी से कई गुना अधिक कमाई करा सकते हैं। महाराष्ट्र के उस्मानाबाद के रहने वाले राजशेखर पाटिल इसी का उदाहरण हैं। इनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है। लेकिन एग्रीकल्चर सब्जेक्ट से ग्रेजुएट राजशेखर शहर में रहकर कोई नौकरी करना चाहते थे। 3-4 साल तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। फिर कोई दूसरी सरकारी या प्राइवेट नौकरी के लिए हाथ-पैर मारते रहे। यहां भी नाकाम रहे। तब तक राजशेखर को लगता था कि खेती-किसानी बेकार का काम है। इसमें कोई लाभ नहीं। राजशेखर के पिता के पास 30 एकड़ खेती थी। जब राजशेखर हर जगह से निराश हो गए, तो रालेगण सिद्धि गांव जाकर अन्ना हजारे के साथ जुड़ गए। अन्ना ने उन्हें मिट्टी और पानी के सरंक्षण में लगा दिया। एक दिन पिता की बीमारी की खबर मिली, तो राजशेखर को गांव लौटना पड़ा। बस, यहीं से उनकी जिंदगी में टर्निंग पॉइंट आया। आज वे अपनी पुश्तैनी खेती में बांस उगाते हैं। इनका सालाना टर्न ओवर 5 करोड़ रुपए के आसपास है।

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    CareersJan 19, 2021, 11:03 AM IST

    25000 रुपए लगाकर 60 साल के 'अंकल' कमा रहे 45 लाख रुपए सालाना, पहले लोगों ने उड़ाई थी हंसी

    शुरुआत हमेशा 'शून्य' से होती है। करियर और रोजगार के मामले में भी यही होता है। अगर आप सही दिशा में और सही ढंग से कोई काम करते हैं, तो निश्चय ही आगे आप सफल रहेंगे। हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले 60 वर्षीय सतबीर पूनिया यह उदाहरण पेश करते हैं। बात सिर्फ 3 साल पुरानी है। उन्होंने अपने 16 एकड़ खेतों में फल उगाना शुरू किए। यह सब काम सिर्फ 25000 रुपए की लागत से शुरू किया गया। आज उनका सालाना टर्न ओवर 45 लाख रुपए है। इसमें से 15-20 लाख रुपए शुद्ध मुनाफा। इनकी सफलता की कहानी दूसरों किसानों को भी आकर्षित करती है। लोग इन्हें प्यार से 'बेर अंकल' कहकर पुकारते हैं।

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    CareersJan 7, 2021, 6:26 PM IST

    महिला हो या पुरुष, आत्मनिर्भर होकर लाखों कमाने का एक बढ़िया आइडिया यह भी है

    पहले तो नौकरियां आसानी से नहीं मिलतीं। अगर मिल भी गईं, तो यह जरूरी नहीं कि सैलरी अच्छी हो, काम मन को हो या बिना तनाव के। ऐसे में खुद के पैरों पर खड़े होने की कोशिश क्यों नहीं करते? जो लोग यह समझते हैं कि खेती-बाड़ी सिर्फ नुकसान का सौदा है, तो यह गलत है। अगर सही तौर-तरीके और सही प्लानिंग से खेती-बाड़ी की जाए, तो आप अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। पहले हम आपको ये दो उदाहरण बताते हैं और फिर बताएंगे कि आत्मनिर्भर होकर आप कैसे अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। ये दोनों लोग एलोवेरा (Aloe vera) की खेती करते हैं। यह सभी जानते हैं कि एलोवेरा एक औषधीय पौधा है। इससे औषधि के अलावा कास्मेटिक सामग्री बनती हैं। सबसे बड़ी बात इसे उगाने में कोई झंझट या अधिक देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। एलोवेरा को घृतकुमारी या ग्वारपाठा भी कहते हैं। पहले जानते हैं इन दोनों किसानों की कहानियां और फिर बताएंगे एलोवेरा लगाकर आप कैसे लखपति बन सकते हैं।
     

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    CareersDec 31, 2020, 12:11 PM IST

    इजरायली की पाठशाला में गरीब किसान ने सीखा ऐसा कि अब कमाता है साल के 10 लाख रुपए

    मोरबी, गुजरात. देश में इस समय किसान आंदोलन चल रहा है। भारत कृषि प्रधान देश है। यह जगजाहिर है कि छोटे किसानों की माली हालत ठीक नहीं हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह खेती-किसानी के नए तौर-तरीके नहीं अपनाना है। अब इस किसान से मिलिए! यह नई तकनीक से अमरूद की खेती कर रहा है। नतीजा, पहले गरीबी में रहने वाला किसान आज 50 एकड़ जमीन पर सालाना 10 लाख रुपए तक के अमरूद उगाकर बेच रहा है। यह हैं मोरबी जिले की टंकारा तहसील के रहने वाले किसान मगन कामरिया। ये इजरायली तकनीक से अमरूद उगा रहे हैं। इनका अमरूद डेढ़ से 2 किलो तक का होता है। पहले मगन खेतों में कपास, मूंगफली और जीरा उगाते थे। इसमें लागत अधिक थी और कमाई कम। 5 साल पहले की बात है, मगन ने इजरायली तरीके से अमरूद की खेती करना सीखा। अब वे एक सफल किसान हैं।
     

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    CareersDec 19, 2020, 1:46 PM IST

    दूसरों की नौकरी करने से बेहतर है आप खेती-किसानी में काम-धंधा तलाशें, पढ़िए एक सक्सेस स्टोरी

    कोशिशें कभी बेकार नहीं जातीं। वहीं, दुनिया में बदलाव के साथ खुद को ढालना ही समझदारी होती है। अब इस किसान से मिलिए! बात तीन साल पुरानी है। यह परंपरागत तरीके से खेतीबाड़ी करता था। ऐसे में मेहनत ज्यादा और मुनाफ न के बराबर होता था। कई बार तो दिमाग में आया कि खेती-किसानी छोड़कर कोई नौकरी कर ली जाए। लेकिन कहते हैं कि जब इंसान कुछ नया करने का ठान ले, तो सब संभव है। तीन साल पहले इस किसान ने परंपरागत खेती के बजाय नई तकनीक से किसानी शुरू की। आज यह किसान न सिर्फ खुद मालामाल है, बल्कि कइयों को रोजगार भी दे रहा है। यह हैं जयंत सिंह। ये यूपी के चंदौली जिले के चहनिया ब्लॉक में रहते हैं। ये मानते हैं कि किसानों को समय के साथ बदलना चाहिए। जयंत केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं कि इससे किसानों की उन्नति होगी। उन्हें खेती-किसानी के नए तौर-तरीके सीखने को मिलेंगे। पढ़िए इसी किसान की सक्सेस कहानी...

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    RajasthanDec 8, 2020, 2:37 PM IST

    ये हैं देश को आदर्श युवा किसान, खेतों से कैसे सोना उगलवा सकते हैं, इनसे सीखिए

    चित्तौड़गढ़, राजस्थान. इन दिनों किसानों का मुद्दा देश में छाया हुआ है। इस कृषि प्रधान देश में किसान खासी अहमियत रखते हैं। लेकिन वे खेती-किसानी से जुड़ी तमाम समस्याओं और दिक्कतों का सामना करते हैं। किसानी का बाजिब मूल्य नहीं मिलना या मौसम-बेमौसम की मार और कीटों से नुकसान एक आम समस्या है। लेकिन आपको मिलवाते हैं एक एक ऐसे युवा किसान से, जिसने जुगाड़ की तकनीक से खेती-किसानी को लाभ का धंधा बना दिया। हर बेकार चीज असेंबल करके काम में लाई जा सकती है, कैसे? इस 22 साल के इस किसान से सीखिए। यह हैं नारायण लाल धाकड़। ये जिले के एक छोटे से गांव जयसिंहपुरा में रहते हैं। ये जुगाड़ तकनीक से कई ऐसी मशीनें बना चुके हैं, जो खेती-किसानी में बड़े काम आ रही हैं। ये अपने सारे आविष्कार यूट्यूब चैनल 'आदर्श किसान सेंटर' के जरिये डेमो देते हैं। इनके चैनल को लाखों लोग फॉलो करते हैं।  ये उपकरण फसलों को जानवरों और कीटों के नुकसान से बचाते हैं।
     

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    ChhattisgarhNov 30, 2020, 11:47 AM IST

    सक्सेस स्टोरी: कभी दो वक्त की रोटी को परेशान थीं ये किसान महिलाएं, आज अमेरिका तक पहुंच

    जांजगीर, छत्तीसगढ़. 'जहां चाह-वहां राह!' इस समय देश में किसान आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि नए कृषि कानून से उनकी फसल का मूल्य ठीक से नहीं मिलेगा। यह हुई किसानों की एक समस्या। हम आपको मिलवाते हैं ऐसी महिला किसानों से जिनकी फसल की अमेरिका, आस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में डिमांड है। ये महिलाएं जैविक खेती से मशरूम उगाती हैं। यह कच्चा मशरूम और उसका पाउडर 2000 रुपए किलो तक में बिक रहा है। एक समय था, जब ये महिलाएं दो वक्त की रोटी को परेशानी थीं, लेकिन आज खुशहाल हैं। यह कहानी है जिले के बलौदा ब्लॉक के बेहराडीह ग्राम पंचायत की। यहां स्व सहायता समूहों के जरिये महिलाएं मशरूम उत्पादन से जुड़ी हैं। जिले में करीब 7 हजार स्व सहायता महिला समूह काम कर रहे हैं। यहां के मशरूम की क्वालिटी इतनी बेहतर है कि उनकी डिमांड बड़े होटलों में अधिक है। आगे पढ़ें इसी सफलता की कहानी...

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    MaharashtraNov 26, 2020, 11:00 AM IST

    संतरा देखकर लोगों की फटी रह गईं आंखें, अमेरिका के बाद भारत में पैदा हुआ इतना बड़ा फल

    नागपुर, महाराष्ट्र. इस संतरे को देखकर आपको क्या लगता है? तस्वीर देखकर यही लगेगा कि कोई बॉल होगी, लेकिन यह असली संतरा है। दावा है कि यह देश का सबसे बड़ा संतरा है। इस दावे की सच्चाई जांची जा रही है। लेकिन संतरा मीडिया की सुर्खियों में आया है। यह संतरा नागपुर में मिला है। नागपुर संतरे के उत्पादन के लिए पहले से ही देशभर में जाना जाता है। इस संतरे का वजन है 1.425 किग्रा है। यह 24 इंच चौड़ा और 8 इंच ऊंचा है। जानिए इस संतरे के बारे में...

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    HaryanaOct 5, 2020, 5:27 PM IST

    नुकसान होने पर रातभर चैन से नहीं सो सका किसान, देसी तकनीक से बना दी यह मशीन

    सोनीपत, हरियाणा. जब सिर पर मुसीबत आ जाती है, तो लोग उसका समाधान भी खोज लेते हैं। इस किसान ने भी यही किया। इसे धान की कुटाई और झड़ाई के दौरान बड़ी परेशानी उठानी पड़ती थी। कभी मजदूर नहीं मिलते, तो कभी अन्य तरह से नुकसान हो जाता। एक बार नुकसान के कारण रातभर नींद नहीं आई। बस फिर क्या था, उसने एक एक मशीन बनाने की ठान ली, जिसने उसकी समस्या का समाधान कर दिया। यह हैं गोहाना के गांव सैनीपुरा के रहने वाले किसान सत्यवान। इन्होंने पुराने थ्रेसर से यह देसी जुगाड़ की मशीन (Desi jugaad machine) बनाई है। इसे ट्रैक्टर से जोड़कर चलाते हैं। इससे धान और पराली आसानी से अलग-अलग हो जाती है। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि खेतों में परानी जलाने की समस्या से भी छुटकारा मिल गया। सत्यवान अब इस मशीन को आधुनिक रंग देना चाहते हैं। आगे पढ़ें सत्यवान की मशीन की कहानी...

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    Other StatesSep 23, 2020, 1:30 PM IST

    पति ने छोड़ी मल्टीनेशनल कंपनी, पत्नी ने एयरहोस्टेस की जॉब...दोनों लंदन छोड़कर गांव में कर रहे खेती-किसानी

    पोरबंदर, गुजरात. इस समय किसान बिल (agriculture bills) को लेकर राजनीतिक हंगामा चल रहा है। सरकार इसे किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला बता रही है, तो विपक्ष इसके नुकसान बता रहा है। भारत कृषि प्रधान देश है। किसान अर्थव्यवस्था (Economy) की रीढ़ हैं। ऐसे में किसानों के जीवन में अच्छा बदलाव जरूरी है। हम आपको एक ऐसे युवा किसान दम्पती से मिलवा रहे हैं, जो लंदन की लग्जरी लाइफ और ऊंची नौकरी छोड़कर अपने गांव लौट आए। अब वे गांव में खेती-किसानी और पशुपालन कर रहे हैं। गांव की अपनी जिंदगी से वे न सिर्फ खुश हैं, तंदुरुस्त हैं, बल्कि पहले से ज्यादा कमा रहे हैं। यह हैं रामदे और भारती खुटी। ये पोरबंदर जिले के बेरण गांव में रहते हैं। इनका तर्क है कि लंदन में लग्जरी लाइफ (Luxury life) होते हुए भी सुकून नहीं था। गांव में खेती-किसानी (Farming) करते हुए उन्हें आनंद मिल रहा है। वहीं, पैसा भी नौकरी से ज्यादा कमा रहे हैं।

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    JharkhandSep 18, 2020, 12:17 PM IST

    दो वक्त की रोटी को तरसता था यह किसान, फिर दिमाग में आया एक आइडिया और अब कमा रहा लाखों

    चाईबासा, झारखंड. सफलता का सिर्फ एक ही मूल मंत्र है, सही दिशा में मेहनत (Hard work)। भारत कृषि प्रधान देश है। एक बड़ी आबादी गांवों में रहती है। लेकिन युवा खेती-किसानी छोड़कर कुछ हजार रुपए की नौकरी-चाकरी या मजदूरी करने शहरों को भागते हैं। जबकि अगर वे खेती-किसानी में ही प्रयोग करें, तो अच्छा-खासा पैसा कमा सकते हैं। चाईबासा के खूंटपानी ब्लॉक के रांगामाटी गांव के किसान राम जोंको ने यही उदाहरण पेश किया है। वे पहले दो वक्त की रोटी को लेकर परेशान रहते थे। लेकिन आज उनके खेत में लाखों रुपए के पपीते उगे हुए हैं। राम जोंको ने अपने खेत में 800 पपीते के पेड़ लगाए हुए हैं। इन पर 8-10 लाख रुपए के फल लगे हुए हैं। बता दें कि लॉकडाउन (Lockdown) में बेरोजगारी (Unemployment) एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। राम जोंको भी पहले अपने काम-धंधे को लेकर चिंतित थे। फिर उन्होंने आत्मनिर्भर होने की ठानी। 4 महीने पहले उन्होंने खेत में पपीते के पेड़ लगाए और आज 50 टन पपीते की उपज तैयार कर ली।

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    RajasthanSep 3, 2020, 4:11 PM IST

    कबाड़ की जुगाड़ से 22 साल के किसान ने बना दीं कई गजब मशीनें, जानिए इनकी खूबियां

    चित्तौड़गढ़, राजस्थान. दिमाग शॉर्प हो, तो कबाड़े का भी सदुपयोग किया जा सकता है। हर बेकार चीज असेंबल करके काम में लाई जा सकती है, कैसे? इस 22 साल के इस किसान से सीखिए। बेशक खेती-किसानी को आसान बनाने कई बड़ी कंपनियां आधुनिक उपकरण बनाने लगी हैं। लेकिन इन मशीनों का खरीद पाना साधारण किसान के वश की बात नहीं होती। इस लड़के ने इसी को ध्यान में रखकर ऐसी चीजें डिजाइन कर दीं, जिनकी लागत न के बराबर है। यह हैं नारायण लाल धाकड़। ये जिले के एक छोटे से गांव जयसिंहपुरा में रहते हैं। ये जुगाड़ तकनीक से कई ऐसी मशीनें बना चुके हैं, जो खेती-किसानी में बड़े काम आ रही हैं। ये अपने सारे आविष्कार यूट्यूब चैनल 'आदर्श किसान सेंटर' के जरिये डेमो देते हैं। इनके चैनल को लाखों लोग फॉलो करते हैं। 
     

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    JharkhandAug 27, 2020, 11:25 AM IST

    किसी की नौकरी-चाकरी से अच्छा है कुछ ऐसा करें, पहले भूखों मरने की नौबत थी, लेकिन आज मालामाल हैं ये लोग

    लोहरदगा, झारखंड. लॉकडाउन में आपने देखा होगा कि लाखों मजदूरों को काम-धंधे से हाथ धोकर वापस गांव लौटना पड़ा। देश में लाखों लोग ऐसे हैं, जिनके पास खेती-किसानी है, लेकिन तौर-तरीके नहीं आने से वे शहरों में मजदूरी करने निकल पड़ते हैं। भारत कृषि प्रधान देश है। जाहिर-सी बात है कि खेती-किसानी और उससे जुड़ीं चीजों का एक बड़ा बाजार है। आवश्यकता आत्मनिर्भर बनने की है। खेती-किसानी और मेहनत से जुड़ीं ये सक्सेस कहानियां आपको आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करेंगी। पहली कहानी झारखंड के लोहरदगा की है। यहां का एक गांव भंडरा प्रखंड का कुम्हरिया चट्टानों पर बसा है। कुछ साल पहले तक यहां रहने वालों को मजदूरी करके अपना जीवन गुजारना पड़ रहा था। उन्हें लगता था कि पत्थरों पर खेती करना नामुमकिन है। लेकिन फिर लोगों में हिम्मत जागी। उन्होंने पथरीली जमीन पर मिट्टी डालना शुरू की। इसके बाद सब्जियां आदि उगाना शुरू किया। आज यहां के किसान बेहतर जिंदगी गुजार रहे हैं। उन्हें किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। पढ़िए ऐसी ही कुछ अन्य कहानियां...

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    JharkhandAug 21, 2020, 11:10 AM IST

    दूसरों की नौकरी करने की जरूरत क्या है, सीखिए इन किसानों से अच्छी-खासी कमाई कैसी की जाती है

    रांची, झारखंड. बेरोजगारी देश की एक बड़ी समस्या है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे दूर करने लोगों से आत्मिनर्भर होने की अपील की है। यानी अपना खुद का कुछ करने की पहल। खासकर, जिन लोगों के पास अपने साधन हैं, जैसे कि जमीन आदि...उन्हें नौकरी से ज्यादा अपने खुद के काम पर फोकस करा चाहिए। इन किसानों ने भी नौकरी करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी और आज कोई करोड़पति है, तो किसी को रोटी के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ रहा। पहली कहानी झारखंड के रांची जिले के देवडी गांव है। इसे लोग एलोवेरा विलेज के रूप में जानते हैं। यहां 2 साल पहले तक गांववाले रोटी-रोटी को मोहताज थे। फिर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की एक एक परियोजना के तहत लोगों को एलोवेरा की खेती करने को प्रोत्साहित किया गया। शुरुआत में किसानों को लगा कि पता नहीं इससे कमाई होगी कि नहीं, लेकिन आज वे खुशहाल जिंदगी गुजार रहे हैं। बता दें कि एलोवेरा का एक पौधा 15-30 रुपए तक में बिकता है। इस गांव में अब आयुर्वेद और कास्मेटिक बनाने वालीं कई बड़ी कंपनियां आने लगी हैं। आगे पढ़ें सैनिटाइजर ने बढ़ाया उपयोग...