World War  

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    Fake CheckerMar 13, 2021, 3:55 PM IST

    FAKE CHECK: क्या दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान खींची गई कुर्सियों के बीच से उगे पेड़ों की ये तस्वीर? जानें सच

    करियर डेस्क. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसे जंगल की तस्वीर, जिसमें कुर्सियों के बैकरेस्ट और सीट के बीच में से पेड़ निकल आए हैं। पिछले कई सालों से शेयर हो रही इस फोटो के साथ एक कहानी भी सुनाई जा रही है। कहा जा रहा है कि ये कुर्सियां साल 1939 में पोलैंड के एक शादी समारोह में मेहमानों के लिए रखी गई थीं। पर, अचानक दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हो गया और मेहमान भाग गए थे। तबसे जंगल में ये कुर्सियां आज तक रखी हुई हैं। फेक चेक में आइए जानते हैं कि आखिर तस्वीर की सच्चाई क्या है?

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    WorldMar 12, 2021, 9:06 AM IST

    बाइडेन बोले- पहले-दूसरे विश्व युद्ध, वियतनाम युद्ध और 9/11 हमले से अधिक लोगों की मौत कोरोना से हुई

    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पहली बार कोरोना वायरस महामारी को लेकर देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या पहले-दूसरे विश्व युद्ध, वियतनाम युद्ध और 9/11 हमले में हुईं कुल मौतों से ज्यादा है। 

  • <p>pm ki pagadi</p>
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    NationalJan 26, 2021, 11:08 AM IST

    पीएम मोदी ने जो खास पगड़ी पहनी है, सेकंड वर्ल्ड वार से है उसका कनेक्शन

    वीडियो डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने अलग और अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह त्योहारों पर सेना के साथ जश्न मनाने का हो या फिर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के मौके अलग-अलग परिधान का। पीएम मोदी हर मौके पर एक अलग ही अंदाज में नजर आते हैं।

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    NationalDec 18, 2020, 9:12 PM IST

    कोरोना के खिलाफ ये वर्ल्ड वार है, इसका इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोरोना महामारी को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, कोरोना के खिलाफ ये वर्ल्ड वार है। इस वर्ल्ड वार में जरूरी है कि इलाज को किफायती बनाया जाए। लेकिन किसी वजह से यह महंगा होता जा रहा है और अब खर्च आम आदमी नहीं उठा पा रहा है।

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    WorldOct 16, 2020, 12:29 PM IST

    चीनी राष्ट्रपति ने अपने सैनिकों से कहा, 'करो युद्ध की तैयारी'

    भारत और चीन के बीच मई की शुरुआत से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्वी लद्दाख में गतिरोध जारी है। इसी बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों को ‘युद्ध की तैयारी पर अपना दिमाग और ऊर्जा लगाने’ का आह्वान किया है। यह टिप्पणी उन्होंने 14 अक्तूबर को दक्षिणी प्रांत गुआंगडोंग में एक सैन्य बेस के दौरे के दौरान कही। एक रिपोर्ट के अनुसार, शी ने चीनी सैनिकों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा और उनसे बिल्कुल वफादार, शुद्ध और विश्वसनीय रहने का आह्वान किया। उन्होंने सैनिकों से कहा, 'अपना पूरा दिमाग और ऊर्जा युद्ध की तैयारी पर लगाओ।' शी गुआंगडोंग में शेनझेन विशेष आर्थिक क्षेत्र की 40वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भाषण देने के लिए गए थे।

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    HatkeOct 1, 2020, 7:24 PM IST

    ऐसा क्या खतरा है यहां कि 100 साल से नहीं गया कोई इंसान?

    दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जो वीरान हैं, लेकिन रहस्यमय लगती हैं। वैसे तो ऐसी जगहों पर ज्यादातर लोग नहीं जाते, क्योंकि वहां से जुड़ी कई डरावनी कहानियां प्रचलित होती हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बिल्कुल वीरान है। वहां कोई भी आता-जाता नहीं है। दरअसल, 100 साल पहले इस जगह लोग रहा करते थे, लेकिन बाद में घटी एक घटना की वजह से अब वहां कोई भी नहीं जाता। यहां तक कि उस जगह पर जानवरों के भी जाने पर पाबंदी है। यह जगह फ्रांस के उत्तर-पूर्वी इलाके में स्थित है। यहां लोगों के नहीं आने के पीछे एक खतरनाक कहानी है, जो हैरान कर देती है। 

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    Other StatesAug 6, 2020, 9:44 AM IST

    PHOTOS: जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा-नागासाकी पर गिराया था परमाणु बम..बादलों से होने लगी थी 'काली बारिश'

    दिल्ली. ये तस्वीरें द्वितीय विश्वयुद्ध-1945 की सबसे भयानक यादें हैं। अमेरिका ने 6 अगस्त को जापान के शहर हिरोशिमा और 9 अगस्त को नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था। इस हमले में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। वहीं, लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई थी। इसे मानव सभ्यता पर सबसे बड़ा इंसानी हमला कहा जा सकता है। उस खौफनाक मंजर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परमाणु बम के हमले का यह असर हुआ कि इन शहरों के अलावा आसपास मीलों दूर तक रेडियोएक्टिव के चलते काली बारिश हुई थी। इस बारिश की चपेट में जो भी आया, वो त्वचा से लेकर कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो गया। इसका असर आज भी देखा जा सकता है। हाल में हिरोशिमा की जिला कोर्ट ने इससे प्रभावित लोगों, जिन्हें हिबाकुशा कहते हैं; को फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट देने की बात कही है। बता दें कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने ईस्ट इंडिया के तेल से भरपूर इलाकों पर कब्जा करने इंडो-चाइना को टार्गेट किया था। अमेरिका से यह सहन नहीं हुआ। उसने जापान को सरेंडर कराने यह परमाणु बम फेंक दिया। आगे देखिए हमले के बाद की कुछ दिल दहलाने वालीं तस्वीरें...

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    WorldAug 4, 2020, 2:52 PM IST

    सो रहे थे सभी लोग, तभी हुआ तेज धमाका, लाखों लोगों की हो गई मौत, हर तरफ थे सिर्फ लाशों के ढेर

    जापान इस हफ्ते परमाणु हमले की 75वीं बरसी मना रहा है। इन हमलों में 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा इससे कहीं ज्यादा लोग आज तक इस हमले का दर्द झेल रहे हैं। नागासाकी में हमले के बाद 60 हजार फीट की ऊंचाई तक धुआं का गुबार उठा था।

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    NationalJul 2, 2020, 3:57 PM IST

    PM मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ फोन पर की बात, दोनों नेताओं के बीच हुई इन अहम मुद्दों पर चर्चा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने 75वें विक्ट्री डे परेड की सफलता और रूस में उनके सत्ता के विस्तार के लिए हुए संवैधानिक संशोधन को लेकर पुतिन को बधाई दी।

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    Other SportJun 29, 2020, 12:00 PM IST

    144 साल में विंबलडन के लिए विश्वयुद्ध की तरह ही खतरनाक साबित हुआ कोरोना, तीसरी बार रद्द हुआ टूर्नामेंट

    टूर्नामेंट के रद्द होने से ऑर्गनाइजर्स को लगभग 2400 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। लेकिन, समझदारी यह रही कि ऑल इंग्लैंड क्लब ने 2003 में सार्स महामारी के बाद अपनी बीमा पॉलिसी को अपडेट कर लिया था। इस लिहाज से ऑर्गनाइजर्स को बीमा के तौर पर करीब 950 करोड़ रुपए मिले हैं। ऐसे में अब यह नुकसान करीब 1450 करोड़ रुपए का ही रहेगा।

  • <p>Rajnath Singh, Soviet Union, Victory Parade, India China dispute, India China, Indian troops, Chinese soldiers, India China border, Indian border, China border, LAC, Government of Maharashtra, Uddhav Thackeray, Maharashtra CM, Gully Engineering, PMI Electro Mobility Solutions JV with Photon, Great Wall Motors<br />
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    NationalJun 22, 2020, 1:22 PM IST

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन को बेनकाब करने की तैयारी में भारत, एस 400 डिफेंस सिस्टम को लेकर हो सकती है बात

    गलवान वैली में भारत के जांबाज सैनिकों ने चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया। अब चीन की चौतरफा घेरेबंदी की तैयारी की जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ऐतिहासिक विक्ट्री परेड में शामिल होने के लिए मास्को के लिए रवाना हुए। इस दौरान यहां पर चीन के प्रतिनिधि, मंत्री भी शामिल होंगे, लेकिन राजनाथ सिंह उनसे मुलाकात नहीं करेंगे।

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    HatkeJun 3, 2020, 5:27 PM IST

    साढ़े 4 करोड़ में बिक रहा है दुनिया का सबसे सुरक्षित घर, खतरनाक बम भी नहीं पहुंचा सकता कोई नुकसान

    हटके डेस्क: एक इंसान कई अरमानों के साथ अपना घर बनाता है। घर में जरूरत की सारी चीजें जोड़ता है और फिर उसमें अपनी जिंदगी बिताता है। एक सच ये भी है कि इंसान अपना घर अपनी जरुरत के हिसाब से बनाता है। जिन देशों में युद्ध जैसी समस्या होती रहती है, वो ऐसे घर बनाने की कोशिश करते हैं, जो मुश्किल समय में आपको बचा ले। आपको कोई नुकसान ना पहुंचने दे। ऐसा ही एक घर जो वर्ल्ड वॉर 2 में बना था, अब बिकने के लिए तैयार है। ये घर कोई ऐसा-वैसा घर नहीं है। खतरनाक बम और हथियारों से इस घर का बाल भी बांका नहीं हो सकता। आइये आपको दिखाते हैं 4 बेडरूम वाले इस मजबूत घर की तस्वीरें... 

  • <p><strong>हटके डेस्क।</strong> कई बार अनजाने में कोई ऐसी खोज सामने आ जाती है, जिसके बारे में पहले से कोई सोच भी नहीं सकता है। ऐसा ही हुआ जब ग्रेट ब्रिटेन के हम्बर माउथ याट क्लब के पास रेत में दो लोग अपने डॉग को घुमाने के लिए निकले थे। ग्राहम होल्डन और उनके साथी डेबी बार्टले अपने डॉग बॉनी के साथ सोमवार को वहां घूम रहे थे। इसी दौरान वहां उन्हें कुछ ऐसा मिला कि वे हैरान रह गए। इस समुद्र तट पर वे पिछले 20 साल से घूमने आ रहे थे। दरअसल, उन्हें वहां सेकंड वर्ल्ड वॉर में क्रैश हुए वॉर प्लेन ब्रिस्टल ब्युफाइटर का मलबा मिला। यह रॉयल एयरफोर्स का फाइटर विमान था। यह 254 स्क्वॉड्रन में शामिल था। इसने दुश्मनों के कई समुद्री जहाजों पर हमला किया था। लेकिन 1944 में इंजन फेल हो जाने से यह इस ब्रिटिश बीच पर क्रैश हो गया और इसका मलबा भी नहीं मिल सका। लेकिन इस दुर्घटना के 76 साल के बाद इस विमान का मलबा मिलने से लोग हैरान हैं। मिलिट्री हिस्टोरियन्स का कहना है कि जब यह प्लेन क्रैश हुआ था, तब इसके पायलट और नेविगेटर बच निकलने में कामयाब हो गए थे। बहरहाल, ऐतिहासिक दृष्टि से यह खोज बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देखें, इस युद्धक विमान के मलबे की तस्वीरें।&nbsp;</p>

    HatkeMay 30, 2020, 3:18 PM IST

    समुद्र किनारे कुत्ते को घुमा रहे लोगों की खोज ने दुनिया को किया हैरान, 76 साल से रेत के अंदर था दफन

    हटके डेस्क। कई बार अनजाने में कोई ऐसी खोज सामने आ जाती है, जिसके बारे में पहले से कोई सोच भी नहीं सकता है। ऐसा ही हुआ जब ग्रेट ब्रिटेन के हम्बर माउथ याट क्लब के पास रेत में दो लोग अपने डॉग को घुमाने के लिए निकले थे। ग्राहम होल्डन और उनके साथी डेबी बार्टले अपने डॉग बॉनी के साथ सोमवार को वहां घूम रहे थे। इसी दौरान वहां उन्हें कुछ ऐसा मिला कि वे हैरान रह गए। इस समुद्र तट पर वे पिछले 20 साल से घूमने आ रहे थे। दरअसल, उन्हें वहां सेकंड वर्ल्ड वॉर में क्रैश हुए वॉर प्लेन ब्रिस्टल ब्युफाइटर का मलबा मिला। यह रॉयल एयरफोर्स का फाइटर विमान था। यह 254 स्क्वॉड्रन में शामिल था। इसने दुश्मनों के कई समुद्री जहाजों पर हमला किया था। लेकिन 1944 में इंजन फेल हो जाने से यह इस ब्रिटिश बीच पर क्रैश हो गया और इसका मलबा भी नहीं मिल सका। लेकिन इस दुर्घटना के 76 साल के बाद इस विमान का मलबा मिलने से लोग हैरान हैं। मिलिट्री हिस्टोरियन्स का कहना है कि जब यह प्लेन क्रैश हुआ था, तब इसके पायलट और नेविगेटर बच निकलने में कामयाब हो गए थे। बहरहाल, ऐतिहासिक दृष्टि से यह खोज बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देखें, इस युद्धक विमान के मलबे की तस्वीरें। 

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    CricketApr 18, 2020, 7:26 PM IST

    कोरोना के कारण टल सकता है T-20 वर्ल्डकप ?, ICC ने क्या कहा सुन लीजिए

    कोरोना वायरस के कारण करीब 115 देशों के लोग अपने घरों में कैद हैं। वे न कहीं जा पा रहे हैं ना ही कुछ कर पा रहे हैं। इस महामारी ने पूरी दुनिया को रोक सा दिया है। ऐसे में खेल जगत में भी मानो ब्रेक लग गया है। ओलंपिक, यूएस ओपन जैसे बड़े टूर्नामेंट द्वितीय विश्व युद्द के बाद पहली बार टले तो वहीं IPL 2020 भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। अब लोगों को इस साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर भी संदेह होने लगा है। क्रिकेट प्रेमियों को डर है कि कही इस बड़े आयोजन का मजा भी किरकिरा न हो जाए। अब इसी संदेह को लेकर ICC ने एक बयान जारी किया है।

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    HatkeApr 16, 2020, 12:58 PM IST

    इस महिला से मौत भी कांपती है! पहले वर्ल्ड वॉर, फिर भुखमरी, अब कोरोना भी डरकर भागा

    कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस का संक्रमण बच्चों और बूढ़ों में जल्दी होता है। इस वायरस का संक्रमण ज्यादा उम्र के लोगों को होने पर उनके बचने की संभावना कम होती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की एक 94 साल की महिला कोरोना का संक्रमण होने के बावजूद बच गई।