इस शहर के लोग रावण को मानते हैं अपना दामाद, यहां है 400 साल पुरानी रावण की मूर्ति

Published : Oct 03, 2019, 09:31 AM IST
इस शहर के लोग रावण को मानते हैं अपना दामाद, यहां है 400 साल पुरानी रावण की मूर्ति

सार

हर साल अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 8 अक्टूबर को है।

उज्जैन. इस दिन रावण का पुतला जलाकर बुराई का अंत किया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर में साल भर रावण की पूजा की जाती है और दशहरे पर प्रतीकात्मक वध किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि यहां के लोग मानते हैं रावण की पत्नी मंदोदरी मंदसौर की थी। इसलिए रावण को यहां जमाई यानी दामाद माना जाता है।

महिलाएं निकालती हैं घूंघट
मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में 41 फीट ऊंची रावण की प्रतिमा का इतिहास 400 साल पुराना बताया जाता है। पूर्व में पहले दो बार प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के बाद 2005 में स्थानीय प्रशासन ने यहां तीसरी बार प्रतिमा का जीर्णोद्धार कराया। यहां के लोग मंदोदरी को शहर की बेटी मानते हैं और रावण को जमाई। यही कारण है कि महिलाएं रावण की प्रतिमा के सामने से गुजरते समय घूंघट निकाल लेती हैं।

ऐसे मनाया जाता है यहां दशहरा
दशहरे पर सुबह लोग ढोल-बाजे से साथ जाकर प्रतिमा की पूजा-अर्चना करते हैं वहीं शाम को गोधुलि वेला में रावण का प्रतीकात्मक वध किया जाता है। इतना ही नहीं वध के बाद महिलाओं द्वारा रावण की प्रतिमा पर प्रतीकात्मक रूप से पत्थर भी मारे जाते हैं। किसी को बुखार आने पर रावण की प्रतिमा के पैर में लच्छा (पूजा का धागा) बांधा जाता है, मान्यता है कि ऐसा करने से बीमारी ठीक हो जाती है। संतान प्राप्ति के लिए भी लोग रावण की पूजा करते हैं।

PREV
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi

Recommended Stories

Mahashivratri ki Hardik Shubhkamnaye: शिव सत्य हैं, शिव अनंत हैं... अपनों को भेजें बेस्ट हैप्पी महाशिवरात्रि विशेज
Happy Mahashivratri 2026 Wishes: ओम नमः शिवाय के साथ भेजें भक्ति संदेश