Mokshada Ekadashi 14 दिसंबर को, इस विधि से करें पूजा और व्रत, ये है शुभ मुहूर्त और महत्व

Published : Dec 10, 2021, 05:59 PM ISTUpdated : Dec 10, 2021, 06:54 PM IST
Mokshada Ekadashi 14 दिसंबर को, इस विधि से करें पूजा और व्रत, ये है शुभ मुहूर्त और महत्व

सार

अगहन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi 2021) कहते हैं। इस बार ये एकादशी 14 दिसंबर, मंगलवार को है। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

उज्जैन. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत के प्रभाव से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्षदा एकादशी पर श्रीकृष्ण द्वारा कहे गए गीता के उपदेश से जिस प्रकार अर्जुन का मोहभंग हुआ था, वैसे ही इस एकादशी के प्रभाव से व्रती को लोभ, मोह, द्वेष और समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है। तभी से इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi 2021) कहा जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में लिखा है कि इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है और पितरों को सद्गति मिलती है। 

मोक्षदा एकादशी का मुहूर्त 
एकदाशी तिथि प्रारंभ: 13 दिसंबर, रात्रि 9: 32 मिनट से 
एकदाशी तिथि समाप्त: 14 दिसंबर रात्रि 11:35 मिनट पर
व्रत का पारण: 15 दिसंबर सुबह 07:05 से सुबह 09:09 तक

इस विधि से करें एकादशी व्रत...
- मोक्षदा एकादशी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र की पूजा करें।
- गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं। माखन-मिश्री का भोग लगाएं। पूरे दिन निराहार (बिना कुछ खाए-पिए) रहें। अगर संभव न हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- रात में सोए नहीं। सारी रात भजन-कीर्तन आदि करें। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण से हमें जाने-अनजाने में किए गए पापों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए।
- अगले दिन (15 दिसंबर, बुधवार) सुबह पुन: भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें व योग्य ब्राह्मणों को भोजन कराकर यथा संभव दान देने के बाद ही स्वयं भोजन करें।
- धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का फल हजारों यज्ञों से भी अधिक है। रात को भोजन करने वाले को उपवास का आधा फल मिलता है, जबकि निर्जल (बिना कुछ खाए-पिए) व्रत रखने वाले का माहात्म्य तो देवता भी वर्णन नहीं कर सकते।

 

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