बसंतोत्सव आज: शिवजी की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव लेकर आए थे बसंत ऋतु

Published : Mar 10, 2020, 08:10 AM IST
बसंतोत्सव आज: शिवजी की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव लेकर आए थे बसंत ऋतु

सार

इस बार धुरेड़ी (होली) 10 मार्च, मंगलवार को होली खेली जाएगी। इसी दिन बसंतोत्सव भी है। होली के बाद से ही बसंत ऋतु का प्रभाव शुरू हो जाता है।

उज्जैन. इस बार धुरेड़ी (होली) 10 मार्च, मंगलवार को होली खेली जाएगी। इसी दिन बसंतोत्सव भी है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार होली के बाद से ही बसंत ऋतु का प्रभाव शुरू हो जाता है। इस ऋतु के संबंध में मान्यता है कि शिवजी का तप भंग करने के लिए कामदेव बसंत ऋतु लेकर आए थे। जानिए ये कथा…

पं. शर्मा के अनुसार शिवपुराण में बताया गया है कि प्राचीन समय में सती ने अपने पिता दक्ष के हवन कुंड में कूदकर देह त्याग दी थी। इसके बाद शिवजी अनिश्चितकाल के लिए तपस्या में बैठ गए थे। उस समय में तारकासुर ने तप करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। तारकासुर जानता था कि शिवजी तप में बैठे हैं, उनका ध्यान टूट पाना असंभव ही है, वे दूसरा विवाह भी नहीं करेंगे। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए, तब तारकासुर ने वर मांगा की उसकी मृत्यु सिर्फ शिवजी के पुत्र के द्वारा ही हो। ब्रह्माजी ने तथास्तु कह दिया।

देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी
वरदान के प्रभाव से तारकासुर अजेय हो गया, उसने सभी देवताओं को पराजित कर दिया, स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। पूरी सृष्टि में तारकासुर का अत्याचार बढ़ रहा था। इससे दुखी होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे, लेकिन वे भी ब्रह्माजी के अवतार की वजह से तारकासुर का वध नहीं कर सकते थे। उस समय शिवजी के तप को भंग करने के लिए देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी।

बसंत को कहते हैं कामदेव का पुत्र
कामदेव शिवजी का तप भंग करने के लिए बंसत ऋतु लेकर आए। इस ऋतु में शीतल हवाएं चलती हैं, मौसम सुहावना हो जाता है, पेड़ों में नए पत्ते आना शुरू हो जाते हैं, सरसों के खेत में पीले फूल दिखने लगते हैं, आम के पेड़ों पर बौर आ जाते हैं। इसी सुहावने मौसम की वजह से इसे ऋतुराज कहा जाता है। कामदेव की वजह से इस ऋतु की उत्पत्ति मानी गई है, इसीलिए इसे कामदेव का पुत्र भी कहते हैं। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि ऋतुओं में मैं बसंत हूं यानी इस ऋतु को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

सुहावने मौसम और कामदेव के काम बाणों से टूटा शिवजी का ध्यान
बसंत ऋतु के सुहावने मौसम और कामदेव के काम बाणों की वजह से शिवजी का ध्यान टूट गया। इससे शिवजी क्रोधित हो गए और उनका तीसरा नेत्र खुल गया। जिससे उनके सामने खड़े कामदेव भस्म हो गए। कुछ देर बाद शिवजी क्रोध शांत हुआ और सभी देवताओं ने तारकासुर को मिले वरदान के बारे में बताया। तब कामदेव की पत्नी रति ने शिवजी से कामदेव को जीवित करने का आग्रह किया। शिवजी ने सती को वरदान दिया कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में कामदेव का जन्म होगा।

शिवजी और पार्वती का विवाह
इस प्रसंग के बाद शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ। विवाह के बाद कार्तिकेय स्वामी का जन्म हुआ। कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया।

PREV
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi

Recommended Stories

Mahashivratri ki Hardik Shubhkamnaye: शिव सत्य हैं, शिव अनंत हैं... अपनों को भेजें बेस्ट हैप्पी महाशिवरात्रि विशेज
Happy Mahashivratri 2026 Wishes: ओम नमः शिवाय के साथ भेजें भक्ति संदेश