बुद्ध जयंती 7 मई को, इन 10 स्थानों से है गौतम बुद्ध का खास कनेक्शन, जानिए आज कहां हैं

Published : May 06, 2020, 03:48 PM IST
बुद्ध जयंती 7 मई को, इन 10 स्थानों से है गौतम बुद्ध का खास कनेक्शन, जानिए आज कहां हैं

सार

भगवान गौतम बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ था। ये तिथि इस बार 7 मई, गुरुवार को है। इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं।

उज्जैन. गौतम बुद्ध जिस-जिस जगह गए, वहां बौद्ध तीर्थ बन गया। बुद्ध ने कश्मीर होते हुए अफगानिस्तान तक की यात्रा की थी। बौद्धकाल में अफगानिस्तान का बामियान क्षे‍त्र बौद्ध धर्म की राजधानी था। मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल प्रारंभिक काल में बौद्ध धर्म का गढ़ था। बुद्ध पूर्णिमा के उत्सव पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं 15 ऐसी जगहों के बारे में, जिनका बहुत ही गहता संबंध भगवान बुद्ध से माना जाता है।

1. लुम्बिनी
गौतम बुद्ध का जन्म ईसा से 563 साल पहले नेपाल के लुम्बिनी वन में वैशाख की पूर्णिमा को हुआ। उत्तर प्रदेश के ककराहा नामक गांव से 14 मील और नेपाल-भारत सीमा से कुछ दूर पर बना रुमिनोदेई नामक गांव ही लुम्बिनी है, जो गौतम बुद्ध के जन्म स्थान के रूप में प्रसिद्ध है। कपिलवस्तु में एक स्तूप था, जहां भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी थीं। उनकी माता कपिलवस्तु की महारानी मायादेवी जब अपने पीहर कोलिय गणराज्य की राजधानी देवदह जा रही थीं तब उन्होंने रास्ते में लुम्बिनी वन में एक शाल वृक्ष के नीचे बुद्ध को जन्म दिया था।

2. बोधगया
यह स्थान बिहार के प्रमुख हिन्दू पितृ तीर्थ 'गया' में स्थित है। गया एक जिला है। गया का नाम गयासुर के नाम पर रखा गया था। इसी स्थान पर बुद्ध ने एक वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया। जब उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया था, तब भी पूर्णिमा ही थी।

3. सारनाथ
यह जगह उत्तरप्रदेश के वाराणसी के पास स्थित है, जहां बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यहीं से उन्होंने धम्मचक्र प्रवर्तन प्रारंभ किया था। सारनाथ में कई दर्शनीय जगहें हैं- अशोक का चतुर्मुख सिंह स्तंभ, भगवान बुद्ध का मंदिर, धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप,सारनाथ का वस्तु संग्रहालय, जैन मंदिर, मूलगंधकुटी और नवीन विहार।

4. कुशीनगर
उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले में स्थित इसी जगह पर महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण (मोक्ष) हुआ था। गोरखपुर जिले में कसिया नामक जगह ही प्राचीन कुशीनगर है। यहां पर बुद्ध के आठ स्तूपों में से एक स्तूप बना है, जहां बुद्ध की अस्थियां रखी थीं।

5. श्रावस्ती का स्तूप
पूर्वोत्तर रेलवे की गोरखपुर-गोंडा लाइन पर बसा बलरामपुर स्टेशन से 12 मील पश्चिम में सहेठ-महेठ नामक गांव ही प्राचीन श्रावस्ती है। यह कौशल देश की राजधानी थी। भगवान श्रीराम के पुत्र लव ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। श्रावस्ती बौद्ध एवं जैन दोनों का तीर्थ है। यहां बुद्ध ने चमत्कार दिखाया था। वे लंबे समय तक श्रावस्ती में रहे थे। अब यहां बौद्ध धर्मशाला है तथा बौद्ध मठ और भगवान बुद्ध का मंदिर भी है।

6. सांची का स्तूप
भोपाल से 28 मील दूर सांची स्टेशन है। यहां कई बौद्ध स्तूप हैं जिनमें एक की ऊंचाई 42 फुट है। सांची से 5 मील सोनारी के पास 8 बौद्ध स्तूप हैं और सांची से 7 मील पर भोजपुर के पास 37 बौद्ध स्तूप हैं। यहां एक सरोवर है जिसकी सीढ़ियां बुद्ध के समय की कही जाती हैं।

7. चंपानेर (पावागढ़)
गुजरात के बड़ौदा से 23 मील आगे चंपानेर स्टेशन है। यहां से 12 मील पर पावागढ़ स्टेशन है। पावागढ़ में प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप हैं, जहां भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी हुई है।यह आठ प्रमुख स्तूपों में से एक है। चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान एक युनेस्को विश्व धरोहर है।

8. पेशावर
यह पश्चिमी पाकिस्तान में शहर है, जिसे बौद्ध काल में पुरुषपुर कहा जाता था। यहां सबसे बड़े और ऊंचे स्तूप के नीचे से बुद्ध भगवान की अस्थियां खुदाई में निकली थीं। यह स्तूप सम्राट कनिष्क ने बनवाया था, जिसे इस्लामिक आक्रांताओं ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।

9. बामियान
अफगानिस्तान में बामियान क्षेत्र बौद्ध धर्म प्रचार का प्रमुख केंद्र था। इसे बौद्ध धर्म की राजधानी माना जाता था। बौद्ध काल में हिन्दूकुश पर्वत से लेकर कंदहार (कंधार) तक अनेक स्तूप थे, जिन्हें इस्लामिक आक्रांताओं ने नष्ट कर दिया। यहां बौद्ध धर्म से संबंधित अनेक गुफाएं हैं, जहां भगवान बुद्ध की बड़ी-बड़ी मूर्तियां आज भी मौजूद हैं। तालिबानियों ने इन मूर्तियों को तोप से तोड़कर खंडित कर दिया था।

10. नालंदा
बौद्ध विश्वविद्यालय नालंदा को देश का प्राचीनतम विश्वविद्यालय माना जाता है, यह पटना के पास है। भगवान बुद्ध अपने जीवन में कई बार नालंदा आए थे। यह स्थान न केवल ज्ञान, बल्कि विभिन्न कलाओं का केंद्र भी रहा है। नालंदा में पुरातत्व संग्रहालय में भी बौद्ध धर्म के देवी-देवता और भगवान बुद्ध की प्रतिमा मौजूद हैं।

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