Dussehra 2022: ब्राह्मण पुत्र होकर भी रावण कैसे बना राक्षसों का राजा, जानें कौन थे रावण के माता-पिता?

Published : Sep 30, 2022, 05:49 PM ISTUpdated : Oct 04, 2022, 03:06 PM IST
Dussehra 2022: ब्राह्मण पुत्र होकर भी रावण कैसे बना राक्षसों का राजा, जानें कौन थे रावण के माता-पिता?

सार

Dussehra 2022: इस बार विजयादशमी का पर्व 5 अक्टूबर, बुधवार को मनाया जाएगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान श्रीराम ने राक्षसों के राजा रावण का वध किया था। तभी ये पर्व मनाया जा रहा है।  

उज्जैन. रावण को हमेशा राक्षसराज कहा जाता है यानी राक्षसों का राजा, लेकिन वास्तविकता ये है कि रावण एक तपस्वी ऋषि का पुत्र था जो ब्रह्मा के वंशज थे। इसलिए ये कहा जा सकता है रावण का जन्म ब्रह्मा के कुल में हुआ था, लेकिन इसके बाद भी वह राक्षस कुल का राजा बना और त्रिलोकों को अपने अत्याचारों से परेशान कर दिया। तब भगवान विष्णु ने श्रीराम अवतार लेकर उसका वध किया। रावण के माता-पिता कौन थे और वह ब्राह्मण होकर भी राक्षसों का राजा कैसे बना? विजयादशमी (5 अक्टूबर, बुधवार) के मौके पर हम आपको रावण के परिवार के बारे में बता रहे हैं…  

ब्रह्मा के कुल में हुआ था रावण का जन्म
वाल्मीकि रामायण के अनुसार ब्रह्मा के कुल में हुआ था। उसके अनुसार ऋषि पुलस्त्य ब्रह्मा के दस मानस पुत्रों में से हैं। इन्हें प्रथम मन्वन्तर के सात सप्तर्षियों में से एक भी माना जाता है। पुलस्त्य ऋषि का विवाह कर्दम ऋषि की पुत्री हविर्भू से हुआ था। उनसे ऋषि के दो पुत्र उत्पन्न हुए- महर्षि अगस्त्य एवं विश्रवा। महर्षि विश्रवा की दो पत्नियां थीं। उनमें से एक राक्षस सुमाली की पुत्री कैकसी थी। रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा विश्रवा और कैकसी के पुत्र थे। इस तरह रावण का जन्म ब्रह्मा के कुल में हुआ था।

धन के स्वामी कुबेर हैं रावण के सौतेले भाई
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, महर्षि विश्रवा की दूसरी पत्नी का नाम इड़विड़ा था। इनके मिलन से एक पुत्र पैदा हुआ, जिसका नाम वैश्रवण रखा गया। वैश्रवण का ही एक नाम कुबेर है। वैश्रवण ने कठिन तपस्या कर ब्रह्मदेव को प्रसन्न किया। तब ब्रह्मदेव ने उन्हें धनाध्यक्ष का पद दिया। कुबेर को शिवजी का परम मित्र कहा जाता है। इनका एक नाम पिंगाक्ष भी है। दीपावली पर धन की देवी लक्ष्मी के साथ कुबेरदेव की पूजा भी की जाती है। 

कुबेर की थी सोने की लंका
रामायण के अनुसार, कुबेर को उनके पिता मुनि विश्रवा ने रहने के लिए लंका प्रदान की। ब्रह्माजी ने कुबेर की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें उत्तर दिशा का स्वामी व धनाध्यक्ष बनाया था। साथ ही, मन की गति से चलने वाला पुष्पक विमान भी दिया था। रावण जब विश्व विजय पर कुबेरदेव के उसका भयंकर युद्ध हुआ। कुबेरदेव को हराकर रावण ने लंका पर अधिकार कर लिया।

मंदोदरी से हुआ था रावण का विवाह
धर्म ग्रंथों के अनुसार, वैसे तो रावण की अनेक पत्नियां थी, लेकिन उन सभी में मंदोदरी प्रमुख थी। मंदोदरी मय दानव की पुत्री थी। मय दानव को दैत्यों का शिल्पकार भी कहा जाता है क्योंकि उन्हें वास्तु शास्त्र का विशेष ज्ञान प्राप्त था। मंदोदरी आदि रानियों से रावण को अनेक पुत्र प्राप्त हुए। उन सभी में मेघनाद बहुत पराक्रमी था। अतिकाय, प्रहस्त, अक्षयकुमार आदि भी रावण के पुत्र थे।  


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