नलों से टपकता पानी बना सकता है कंगाल, जल का दुरुपयोग करने से नाराज होती हैं देवी लक्ष्मी

Published : Apr 17, 2020, 10:42 AM ISTUpdated : Apr 17, 2020, 10:46 AM IST
नलों से टपकता पानी बना सकता है कंगाल, जल का दुरुपयोग करने से नाराज होती हैं देवी लक्ष्मी

सार

हमारे जीवन में पानी का बहुत महत्व है, क्योंकि पानी के बिना जीवन संभव ही नहीं है। धर्म ग्रंथों में भी पानी से संबंधित कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं।

उज्जैन. जिस घर में पानी का दुरुपयोग होता है वहां सदैव धन का अभाव रहता है और धन की देवी मां लक्ष्मी भी ऐसे घर में नहीं ठहरतीं। यही बात वास्तु शास्त्र में भी कही गई है। जानिए पानी का कैसा दुरुपयोग करने पर या उसे गंदा करने पर मां लक्ष्मी रुठ जाती हैं-

1. वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर के नलों में व्यर्थ पानी टपकता रहता है। उस घर में सदा धन का अभाव रहता है। नल से व्यर्थ टपकते पानी की आवाज उस घर के आभा मंडल को भी प्रभावित करती है। इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि घर के नलों से पानी व्यर्थ नहीं टपके।

2. स्कंदपुराण के अनुसार-
मलं मूत्रं पुरीषं च श्लेश्म: निष्ठीनाश्रु च।
गण्डूषाश्चैव मुञ्चन्ति ये ते ब्रह्ममहणै: समा:।।
अर्थात: जो मनुष्य नदी, तालाब या कुंओं के जल में मल-मूत्र, थूक, कुल्ला करते हैं या उसमें कचरा फेंकते हैं, उनको ब्रह्महत्या का पाप लगता है। साथ ही ऐसे लोग कभी संपन्न नहीं होते।

3. बहुत से लोगों को रात में भी स्नान करने की आदत होती है। किंतु शास्त्रों में रात के स्नान को निषिद्ध माना गया है।
निशायां चैव न स्नाचात्सन्ध्यायां ग्रहणं विना।
अर्थात: रात के समय स्नान नहीं करना चाहिए। जिस दिन ग्रहण हो केवल उस दिन ही रात के समय स्नान करना उचित रहता है। रात के समय स्नान करना जल का दुरुपयोग करने के समान है। जो भी जल का ऐसा दुरुपयोग करता है, उसके घर में सदैव धन का अभाव रहता है।

4. श्रीमद्भागवत में एक प्रसंग आता है जब गोपियां निर्वस्त्र होकर यमुना में स्नान कर रही होती हैं तब श्रीकृष्ण कहते हैं-
यूयं विवस्त्रा यदपो धृतव्रता व्यगाहतैत्तदु देवहेलनम्।
बद्ध्वाञ्जलिं मूध्न्र्यपनुत्तयेंहस: कृत्वा नमोधो वसनं प्रगृह्यताम्।।
श्रीकृष्ण ने अपनी परमप्रिय गोपियों से कहा कि तुमने निर्वस्त्र होकर यमुना नदी में स्नान किया इससे जल के देवता वरुण और यमुनाजी दोनों का अपमान हुआ अत:दोनों हाथ जोड़कर उनसे क्षमा मांगों।
भगवान इस प्रसंग से हमें ये सीख देते हैं कि जहां पर भी संग्रहित जल हो उस स्थान के स्वामी वरुण देवता होते है। उसको गंदा करने से या दूषित करने से जल के देवता का अपमान होता है व ऐसे लोग सदैव धन के अभाव में जीते हैं।

 

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