परंपरा: एकादशी पर ये 1 चीज खाने की है मनाही, जानिए क्या है इसका वैज्ञानिक कारण

Published : May 03, 2020, 10:10 AM IST
परंपरा: एकादशी पर ये 1 चीज खाने की है मनाही, जानिए क्या है इसका वैज्ञानिक कारण

सार

इस बार 3 मई, रविवार को मोहिनी एकादशी है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है।

उज्जैन. इस तिथि से जुड़ी एक परंपरा भी है, जो सालों से चली आ रही है। ये परंपरा है एकादशी पर चावल न खाने की। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, एकादशी पर चावल न खाने के पीछे धार्मिक कारण भी हैं और वैज्ञानिक भी। आज हम आपको एकादशी पर चावल न खाने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों के बारे में बता रहे हैं…

ये है एकादशी पर चावल न खाने के वैज्ञानिक कारण...

  • चावल एक ऐसा धान है जो पानी में ही पैदा होता है और पानी में ही पकता है। इसलिए इसमें जल तत्व की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती है।
  • जब हम चावल खाते हैं तो हमारे शरीर में भी जल तत्व की मात्रा थोड़ी अधिक हो जाती है।
  • चंद्रमा में जल तत्व को आकर्षित करने का प्राकृतिक गुण होता है। अमावस्या और पूर्णिमा को चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण समुद्र में ज्वारा-भाटा की स्थिति निर्मित होती है।
  • एकादशी मन पर संयम रखने का दिन है। लेकिन जब इस दिन चावल खाए जाते हैं तो शरीर में जल तत्व की मात्रा बढ़ जाती है।
  • जल तत्व की मात्रा बढ़ने से चंद्रमा की किरणें मन और मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं। इसके कारण मन में तरह-तरह के विचार आते हैं।
  • एकादशी पर जल तत्व की मात्रा अधिक होने से मन अशांत रहता है। चूंकि एकादशी व्रत, संयम और साधना का दिन है। इसलिए मन को विचलित करने वाले पदार्थों से दूर रहने की हिदायत दी जाती है।
  • यही कारण है एकादशी पर चावल न खाने की पंरपरा सालों से हिंदू धर्म में चली आ रही है।

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