Kangna ने किए बांके बिहारी के दर्शन, निधिवन से यहां स्वयं प्रकट हुई थी ठाकुरजी की मूर्ति

Published : Dec 04, 2021, 02:07 PM IST
Kangna ने किए बांके बिहारी के दर्शन, निधिवन से यहां स्वयं प्रकट हुई थी ठाकुरजी की मूर्ति

सार

अपने तीखे बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाली बॉलीवड की धाकड़ एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) शनिवार को मथुर स्थित बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple, Mathura) में पंहुचीं। इस दौरान कंगना की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

उज्जैन. कंगना का मथुरा आना गोपनीय था, इसलिए पहले किसी को इस बात की खबर नहीं थी। कंगना के आने की खबर जैसे ही फैली प्रशंसकों की भीड़ बांके बिहारी मंदिर पर जुट गई। कंगना रनौत की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। पिछले दिनों कंगना पर हुए हमले के चलते उन्हें सुरक्षा घेरे के बीच मंदिर परिसर में ले जाया गया, जहां महंत ने उन्हें पूजा अर्चना करवाई। कंगना ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें भी शेयर की। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें...

बार-बार लगाया जाता है मूर्ति के आगे पर्दा
श्री बांके बिहारी जी की मूर्ति के आगे हर दो मिनट के बाद पर्दा लगाया जाता है। इसके पीछे एक मान्यता है कि एक भक्त उनकी छवि को काफी देर तक निहारता रहा। उसकी भक्ति के वशीभूत होकर श्रीबांकेबिहारी जी मंदिर से उसके साथ ही चले गए। पुजारी जी ने जब मन्दिर की कपाट खोला तो उन्हें श्रीबांकेबिहारी जी नहीं दिखाई दिए। पता चला कि वे अपने एक भक्त के साथ ही चले गए गए हैं। तभी से ऐसा नियम बना दिया कि दर्शन के दौरान ठाकुर जी का पर्दा खुलता एवं बन्द होता रहेगा।

मंदिर का इतिहास
बाँके बिहारी मंदिर मथुरा जिले के वृंदावन धाम में रमण रेती पर स्थित है। यह भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। बाँके बिहारी कृष्ण का ही एक रूप है जो इसमें प्रदर्शित किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण सन 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था। श्रीहरिदास स्वामी उदासीन वैष्णव थे। उनके भजन–कीर्तन से प्रसन्न होकर ही निधिवन से श्री बाँकेबिहारीजी यहां प्रकट हुये थे। 

यहां नहीं होती मंगला आरती
श्री बांके बिहारी के दर्शन प्रातः 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक एवं सायं 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक होते हैं। विशेष तिथि उपलक्ष्यानुसार समय के परिवर्तन कर दिया जाता हैं। यहां पर मंगला आरती नहीं होती। मान्यता है कि ठाकुर जी नित्य-रात्रि में रास में थककर भोर में शयन करते हैं। उस समय इन्हें जगाना उचित नहीं है।
 


 

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