हिंदू धर्म में भगवान को प्रसन्न करने और ग्रहों से शुभ फल पाने के लिए मंत्र जाप किया जाता है। मंत्र जाप के लिए अलग-अलग तरह चीजों से बनी मालाओं का उपयोग किया जाता है जैसे- रुद्राक्ष, तुलसी आदि।
उज्जैन. हिंदू धर्म में भगवान को प्रसन्न करने और ग्रहों से शुभ फल पाने के लिए मंत्र जाप किया जाता है। मंत्र जाप के लिए अलग-अलग तरह चीजों से बनी मालाओं का उपयोग किया जाता है जैसे- रुद्राक्ष, तुलसी आदि। लेकिन इन सभी मालाओं में दानों की संख्या हमेशा 108 ही रहती है। इसके पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। आज हम आपको वही बता रहे हैं-
इसलिए माला में होते हैं 108 मोती
शास्त्रों के अनुसार, माला के बिना किया गया जप संख्याहीन होता है और ऐसे जाप का पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता।
माला के दानों की संख्या निधार्रित होने से मंत्र जाप की संख्या का अनुमान आसानी से लग जाता है। इसलिए मंत्र जाप करते समय माला का उपयोग अवश्य करना चाहिए।
माला के 108 मोती और सूर्य की कलाओं का भी विशेष संबंध है। एक वर्ष में सूर्य लगभग 216000 कलाएं बदलता है।
सूर्य वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है। इस तरह सूर्य छह माह की एक स्थिति में 108000 बार कलाएं बदलता है।
इसी संख्या 108000 से अंतिम तीन शून्य हटा कर माला के 108 मोती निर्धारित किए गए हैं। माला का हर एक मोती सूर्य की हर एक कला का प्रतीक है।
ज्योतिष के अनुसार, ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 राशियों में 9 ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु घूमते रहते हैं।
अगर ग्रहों की संख्या 9 और राशियों की संख्या 12 का गुणा किया जाए तो संख्या 108 मिलती है। इसलिए 108 मोतियों की माला पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक मानी जाती है।
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