Nagchandreshwar Mandir Ujjain: सिर्फ नागपंचमी पर खुलता है ये नाग मंदिर, तक्षक नाग से जुड़ा है इसका रहस्य

Published : Aug 02, 2022, 09:07 AM ISTUpdated : Aug 03, 2022, 07:58 AM IST
Nagchandreshwar Mandir Ujjain: सिर्फ नागपंचमी पर खुलता है ये नाग मंदिर, तक्षक नाग से जुड़ा है इसका रहस्य

सार

Nagchandreshwar Mandir Ujjain: आज (2 अगस्त, मंगलवार) नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन देश के प्रमुख नाग मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ऐसा ही एक मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। 

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) में श्री महाकालेश्वर मंदिर (Mahakal Temple) के शीर्ष शिखर पर नागचन्द्रेश्वर (Nagchandreshwar Mandir Ujjain Live Darshan) भगवान के पट 1 अगस्त, सोमवार की रात्रि को खुले। सबसे पहले श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाडे के महंत विनीत गिरी एवं मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव व मंदिर प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने प्रथम पूजन व अभिषेक किया गया। श्री नागचन्द्रेश्वर भगवान की प्रतिमा के पूजन के पश्चात वहीं गर्भगृह स्थित शिवलिंग का भी पूजन किया गया। इसके बाद आम श्रृद्धालुओं के लिए दर्शन किए। आगे जानिए इस मंदिर की विशेषताएं…

साल में सिर्फ एक बार खुलता है ये मंदिर…
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं। इनके ऊपर ओंकारेश्वर महादेव स्थित है। सबसे ऊपरी तल पर भगवान नागचंद्रेश्वर स्थित हैं। ये मंदिर साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर ही खुलता है। नागपंचमी की रात 12 सबसे पहले मंदिर खुलते ही वरिष्ठ अधिकारी और पुजारी पूजा करते हैं, उसके बाद ही भक्तगण दर्शन पाते हैं। 

ऐसी प्रतिमा अन्य कहीं नहीं
आमतौर पर शेषनाग पर भगवान विष्णु को बैठा हुआ या विश्राम की मुद्रा में दिखाया जाता है। लेकिन नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थित प्रतिमा में शिव-पार्वती शेषनाग पर बैठे हुए नजर आते हैं। शिवशंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं। यह प्रतिमा मराठाकालीन कला का उत्कृष्ट नमूना है। अगर यह कहा जाए कि यह प्रतिमा शिव-शक्ति का साकार रूप है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा देखने को नहीं मिलती।

तक्षक से जुड़ा है ये इस मंदिर का रहस्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाकाल वन में तक्षक नाग ने महादेव को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे अमरत्व का वरदान दिया। तभी से  तक्षक नाग यहां वास कर रहा है। महाकाल वन में वास करने के पीछे तक्षक की यही मंशा थी कि उनकी तपस्या में कोई विघ्न ना हो। इसलिए वर्षों से यही प्रथा है कि मात्र नागपंचमी के दिन ही इस मंदिर के पट खोले जाते हैं।

दर्शन मात्र से दूर होता है कालसर्प दोष का प्रभाव
मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति कालसर्प दोष से मुक्त हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन खुलने वाले इस मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है। सभी की यही मनोकामना रहती है कि नागराज पर विराजे शिवशंभु की उन्हें एक झलक मिल जाए। दो लाख से ज्यादा भक्त एक ही दिन में नागदेव के दर्शन करते हैं।

 

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