Sahastrabahu Arjun Jayanti 2022: कौन थे सहस्त्राबाहु अर्जुन, कैसे उन्हें 1 हजार भुजाएं मिली?

Published : Oct 31, 2022, 06:00 AM IST
Sahastrabahu Arjun Jayanti 2022: कौन थे सहस्त्राबाहु अर्जुन, कैसे उन्हें 1 हजार भुजाएं मिली?

सार

Sahastrabahu Arjun Jayanti 2022: हमारे धर्म ग्रंथों में अनेक पौराणिक पात्रों के बारे में बताया गया है। ऐसे ही एक महावीर योद्धा थे सहस्त्राबाहु अर्जुन। इनके बारे में रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों में बताया गया है। 1 हजार भुजाएं होने के कारण ही इन्हें सहस्त्राबाहु कहा जाता था।  

उज्जैन. इस बार 31 अक्टूबर, सोमवार को राजा सहस्त्राबाहु अर्जुन (Sahastrabahu Arjun Jayanti 2022) की जयंती है। अनेक धर्म ग्रंथों में इनके बारे में बताया गया है। इनकी एक हजार भुजाएं थीं, इसलिए इन्हें सहस्त्राबाहु कहा जाता था। रामायण के अनुसार, ये नर्मदा नदी के किनारे स्थित महिष्मती नगर के राजा था। महिष्मती को वर्तमान में महेश्वर के नाम से जाना जाता है। ये इनके काल के श्रेष्ठ योद्धाओं में से एक थे। आगे जानिए सहस्त्राबाहु अर्जुन से जुड़ी खास बातें…

कैसे मिली इन्हें एक हजार भुजाएं?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, अर्जुन भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय के परम भक्त थे। कई सालों तक कठिन तपस्या करने के बाद जब दत्तात्रेय प्रसन्न हुए तो अर्जुन ने वरदान में उनसे 1 हजार भुजाएं मांग ली। इससे उसका नाम सहस्त्रबाहु अर्जुन हो गया। एक हजार भुजाएं पाकर सहस्त्राबाहु अर्जुन परम शक्तिशाली हो गया। वे अपने काल के श्रेष्ठ योद्धाओं में से एक थे। 

रावण को कर लिया था कैद?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, एक बार रावण युद्ध की इच्छा से सहस्त्राबाहु के पास गया। नर्मदा नदी को देख रावण वहां शिवजी की पूजा करने लगा, तभी अचानक नदी के स्तर तेजी से बढ़ाने लगा। रावण ने जब इसका कारण जानना चाहा तो पता चला कि सहस्त्राबाहु ने खेल ही खेल में नर्मदा का प्रवाह रोक दिया है। रावण ने सहस्त्रबाहु अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा। रावण और सहस्त्रबाहु अर्जुन में भयंकर युद्ध हुआ। पराक्रमी सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को बंदी बना लिया। बाद में रावण के पितामह (दादा) पुलस्त्य मुनि ने आकर उन्हें छुड़वाया।  

ऐसे हुई सहस्त्राबाहु की मृत्यु?
महाभारत के अनुसार, एक बार सहस्त्रबाहु अर्जुन ने ऋषि जमदग्नि से उनकी कामधेनु गाय छिन ली और अपने साथ ले गए। ये बात जब ऋषि जमदग्नि के पुत्र परशुराम को पता चली तो उन्होंने वे अपने पिता का अपमान लेने माहिष्मती पहुंच गए। सहस्त्राबाहु और भगवान परशुराम के बीच भयंकर युद्ध हुआ। परशुराम ने पहले हजार भुजाओं को काटा और अंत सहस्त्रबाहु अर्जुन का वध कर दिया। पिता की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए सहस्त्रबाहु अर्जुन के पुत्रों ने ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया। इस घटना से परशुराम इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहिन कर दिया।


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