Satyanarayan Puja: भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने से घर में रहती है सुख-समृद्धि, इन 5 बातों का रखें ध्यान

Published : Jan 05, 2023, 08:53 AM IST
Satyanarayan Puja: भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने से घर में रहती है सुख-समृद्धि, इन 5 बातों का रखें ध्यान

सार

satyanarayan puja date 2023: हिंदू धर्म में विशेष मौकों पर भगवान की कथाएं सुनने की परंपरा है। भगवान सत्यनारायण की कथा भी इनमें से एक है। ये कथा प्रत्येक महीने की पूर्णिमा तिथि पर सुनने का विधान है। साल 2023 की पहली पूर्णिमा 6 जनवरी, शुक्रवार को है।  

उज्जैन. हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। इस तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा विशेष रूप से करवाई जाती है। भगवान सत्यनारायण (satyanarayan puja date 2023) विष्णु के ही स्वरूप हैं। इस बार साल 2023 की पहली पूर्णिमा 6 जनवरी, शुक्रवार को है। ये पौष मास की पूर्णिमा है। इस दिन देवी शाकंभरी का जयंती पर्व मनाया जाता है और इसी दिन से संगम तट पर माघ मेले का आयोजन भी किया जाता है। इन कारणों से ये तिथि और भी शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए भगवान सत्यनारायण की कथा करवाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें…

1. भगवान सत्यनारायण की कथा करवाने के लिए किसी योग्य ब्राह्मण का चयन करें और अपने दोस्तों, पड़ोसियों व रिश्तेदारों को कथा सुनने के लिए सपरिवार आमंत्रित करें। जितने ज्यादा लोग इस कथा को सुनते हैं, उतना ही धर्म का प्रचार-प्रसार होता है।

2. कथा से पहले घर को साफ-स्वच्छ करें यानी ठीक तरीके से साफ-सफाई करें। इसके बाद पूजा स्थान पर गंगा जल या गौमूत्र छिड़ककर उसे पवित्र करें। इसके बाद ही उस स्थान पर भगवान का चित्र स्थापित कर फूलों व केले के पत्तों से सजाएं।

3. कथा सुनते समय मन को पूरी तरह से शांतें। किसी तरह का कोई बुरा विचार मन में न लाएं। जितना मन लगाकर आप कथा सुनेंगे आपके जीवन में उतनी ही शांति आएगी। कथा में कई गई बातों को अपने जीवन में उतारें ताकि आपका जीवन सुखमय बना रहे।

4. भगवान को जो भी भोग लगाएं वह पूरी तरह से शुद्ध होना चाहिए यानी इसे बनाते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान होना चाहिए। अगर घर में भोग बनाना संभव न हो तो बाजार से केले लाकर उसका भोग लगाएं। धर्म ग्रंथों में केले को शुद्ध भोग माना गया है।

5. कथा करवाने आए ब्राह्मण को आदर सहित वस्त्र, दक्षिणा आदि भेंट करें। संभव हो तो उन्हें सात्विक भोजन भी करवाएं। अगर ये संभव न हो तो कच्चा अनाज जैसे गेहूं, चावल, दाल, घी, नमक-मिर्च आदि चीजें दान करें। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।


 

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