Shankaracharya Jayanti 2022: कौन थे 12 साल की उम्र में वेद पढ़ने वाले शंकराचार्य, क्या वे शिवजी के अवतार थे?

Published : May 05, 2022, 12:13 PM IST
Shankaracharya Jayanti 2022: कौन थे 12 साल की उम्र में वेद पढ़ने वाले शंकराचार्य, क्या वे शिवजी के अवतार थे?

सार

हिंदू धर्म में आदि शंकराचार्य (Shankaracharya Jayanti 2022) का स्थान बहुत ऊंचा है। इन्हें भगवद्पादाचार्य के नाम से भी जाना जाता है। शंकराचार्य ही वेदांत के अद्वैत मत के प्रणेता थे। स्मार्त संप्रदाय में आदि शंकराचार्य को भगवान शिव का अवतार माना जाता है।

उज्जैन. हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आदि शंकराचार्य की जयंती मनाई जाती है। इस बार 6 मई, शुक्रवार को ये तिथि होने से इसी दिन शंकराचार्य जयंती मनाई जाएगी। जिस समय भारत में हिंदू धर्म की उपेक्षा हो रही थी व अन्य धर्मों का प्रभाव बढ़ रहा था, उस समय आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म के उत्कर्ष में महती भूमिका निभाई और पूरे देश में कई कई तीर्थ स्थानों की स्थापना की। साथ ही कई ग्रंथों की भी रचना की। हिंदुओं को एक सूत्र में बांधने के लिए देश में 4 मठों की स्थापना की। वर्तमान में यही चारों मठ पूरे देश के संत संप्रदाय को निर्देशित करते हैं। 

कम उम्र में ही की पूरे देश की यात्रा 
आदि शंकराचार्य ने बहुत कम उम्र में ही पूरे देश की यात्रा की हिंदुओं का जाग्रत किया। उनके बारे में कहा जाता है कि…
अष्टवर्षेचतुर्वेदी, द्वादशेसर्वशास्त्रवित्
षोडशेकृतवान्भाष्यम्द्वात्रिंशेमुनिरभ्यगात्
अर्थ- आदि शंकराचार्य 8 वर्ष की आयु में चारों वेदों में निपुण हो गए, 12 वर्ष की आयु में सभी शास्त्रों में पारंगत, 16 वर्ष की आयु में शांकरभाष्य तथा 32 वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर त्याग दिया। ब्रह्मसूत्र के ऊपर शांकरभाष्य की रचना कर विश्व को एक सूत्र में बांधने का प्रयास भी शंकराचार्य के द्वारा किया गया है, जो कि सामान्य मानव के लिए सम्भव नहीं है।

केरल में हुआ था जन्म
मान्यताओं के अनुसार, केरल के कालड़ी नामक गांव में एक ब्राह्मण घर में आदि शंकराचार्य का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम शिवगुरु नामपुद्र और माता का नाम विशिष्ठा देवी था। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं उन्हें यहां जन्म लिया था। शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद आदि शंकराचार्य ने देखा कि भारत में हिंदू धर्म पर अन्य धर्म के लोग अपना प्रभाव डाल रहे हैं तो उन्होंने घर छोड़कर तीर्थाटन का मार्ग चुना। उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई उनकी टीकाएं काफी प्रसिद्ध हैं। 

केदारनाथ में है समाधि
ऐसा कहा जाता है कि आदि शंकाराचार्य तीर्थ स्थानों की यात्रा करते हुए केदारनाथ पहुंचे तो वही उनकी मृत्यु हुई। केदारनाथ में आज भी आदि शंकराचार्य की समाधि है। हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुगण यहां पर आते हैं, केदारनाथ में शंकराचार्य की समाधि बेहद लोकप्रिय पर्यटक आकर्षणों में से एक है।

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