माघ मास में है संगम स्नान और कल्पवास की परंपरा, धर्म ग्रंथों में भी लिखा है इस महीने का महत्व

Published : Feb 04, 2021, 09:56 AM ISTUpdated : Feb 04, 2021, 09:58 AM IST
माघ मास में है संगम स्नान और कल्पवास की परंपरा, धर्म ग्रंथों में भी लिखा है इस महीने का महत्व

सार

अभी हिन्दी पंचांग का 11वां महीना माघ चल रहा है। ये महीना 27 फरवरी को माघ मास की पूर्णिमा पर खत्म होगा। इस महीने में इलाहाबाद के संगम में स्नान करने का विशेष महत्व है।

उज्जैन. गंगा, यमुना और सरस्वती इन नदियों का संगम प्रयाग में है। माघ महीने में खासतौर पर साधु-संत संगम के तट पर वास करते हैं। इसे कल्पवास कहा जाता है। देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु इस माह में संगम पर स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। इसे माघ मेले के नाम से भी जाना जाता है।

महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि-
माघं तु नियतो मासमेकभक्तेन य: क्षिपेत्।
श्रीमत्कुले ज्ञातिमध्ये स महत्त्वं प्रपद्यते।।
अहोरात्रेण द्वादश्यां माघमासे तु माधवम्।
राजसूयमवाप्रोति कुलं चैव समुद्धरेत्।।
(महाभारत अनुशासन पर्व)

महाभारत के अनुसार जो लोग माघ महीने में एक समय भोजन करके पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें और उनके परिवार को अक्षय पुण्य मिलता है। दुर्भाग्य दूर होता है। इस माह की द्वादशी तिथि पर भगवान माधव या श्रीकृष्ण की पूजा करने वाले भक्त को यज्ञ के समान फल मिलता है।

गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस में लिखा है कि-
माघ मकरगत रबि जब होई। तीरतपतिहिं आव सब कोई।।
देव दनुज किन्नर नर श्रेनीं। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं।।
पूजहिं माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।

इन चौपाइयों में लिखा है कि माघ मास में जल सूर्य मकर राशि में आता है, तब तीर्थराज प्रयाग में सभी लोग पहुंचते हैं। देवता, दानव, मनुष्य, किन्नर सभी त्रिवेणी में स्नान करते हैं। इस माह में माधव भगवान की पूजा करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं।

संगम स्नान नहीं कर सकते तो ये करें-

- जो लोग संगम में स्नान करने नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें अपने आसपास की नदियों में स्नान करना चाहिए।
- अगर ये भी संभव न हो तो अपने घर पर ही सभी तीर्थ और नदियों का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए।
- स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान जरूर करें। किसी मंदिर में पूजा-पाठ करें।
- सूर्य को अर्घ्य दें। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं।

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