नदी के किनारे श्मशान में स्थित है ये भैरव मंदिर, यहां दूर-दूर से साधना करने आते हैं तांत्रिक

Published : Nov 18, 2019, 11:01 AM IST
नदी के किनारे श्मशान में स्थित है ये भैरव मंदिर, यहां दूर-दूर से साधना करने आते हैं तांत्रिक

सार

इस बार 19 नवंबर, मंगलवार को कालभैरव अष्टमी है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। कालभैरव को शिव का पूर्ण रूप माना जाता है।

उज्जैन. इस बार 19 नवंबर, मंगलवार को कालभैरव अष्टमी है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। कालभैरव को शिव का पूर्ण रूप माना जाता है। हमारे देश में भगवान कालभैरव के अनेक मंदिर हैं। इनमें से कई मंदिर अपने चमत्कार के लिए प्रसिद्ध हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी एक ऐसा ही भैरव मंदिर है, जो तंत्र साधना के लिए जाना जाता है।

यहां मिलती हैं तंत्र सिद्धियां
यह मंदिर उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र में नदी किनारे स्थित है। इसे विक्रांत भैरव का मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस स्थान पर की गई तंत्र साधना बहुत ही जल्दी पूरी होती है। दूर-दूर से तांत्रिक इस स्थान पर सिद्धियां प्राप्त करने के लिए साधना करने आते हैं।

श्मशान के पास है ये मंदिर
विक्रांत भैरव का मंदिर शिप्रा नदी के तट पर ओखलेश्वर श्मशान में स्थित है। रात के अंधेरे में जब तांत्रिक इस स्थान पर तंत्र क्रियाएं करते हैं तो यह दृश्य किसी के मन में भय उत्पन्न करने के लिए काफी है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, नदी के किनारे स्थित श्मशान सिद्धियां पाने के लिए उपयुक्त स्थान है। यही विशेषता इस मंदिर में भी देखने को मिलती है।

कैसे पहुंचें उज्जैन?
भोपाल-अहमदाबाद रेलवे लाइन पर स्थित उज्जैन एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां लगभग हर ट्रेन का स्टापेज है। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर से उज्जैन मात्र 60 किलोमीटर दूर है। यह दूरी बस या निजी वाहन से आसानी से तय की जा सकती है।

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