पानी पर तैरने वाले पत्थरों से बना है ये मंदिर, UNESCO ने किया विश्व धरोहर में शामिल

Published : Jul 26, 2021, 03:14 PM IST
पानी पर तैरने वाले पत्थरों से बना है ये मंदिर, UNESCO ने किया विश्व धरोहर में शामिल

सार

25 जुलाई, रविवार को यूनेस्को ने तेलंगाना के पालमपेट में स्थित प्राचीन काकतीय रामप्पा रुद्रेश्वर मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल करने की घोषणा की।

उज्जैन. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की जनता को शुभकामनाएं दी। सरकार ने 2019 में यूनेस्को को इस मंदिर को विश्व धरोहर स्थल के तौर पर मान्यता देने का प्रस्ताव दिया था। पुरातत्व के दस्तावेजों में इस मंदिर को दक्षिण के मध्ययुगीन मंदिरों की आकाशगंगा में सबसे चमकीला तारा भी कहा गया है। जानिए क्या है इस मंदिर की विशेषता…

13 शताब्दी में बना था ये मंदिर
इतिहासकारों के अनुसार, रुद्रेश्वर मंदिर का निर्माण 1213 ईस्वी में काकतीय साम्राज्य के शासनकाल के दौरान हुआ था। यह मंदिर रेचारला रुद्र ने बनवाया था, जो काकतीय राजा गणपति देव के एक सेनापति थे। यह भगवान शिव को समर्पित मंदिर है और मंदिर के अधिष्ठाता देवता रामलिंगेश्वर स्वामी हैं। यह मंदिर विशिष्ट शैली, तकनीक और मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर छह 6 ऊंचे तारे जैसे मंच पर खड़ा है, जिसमें दीवारों, स्तंभों और छतों पर जटिल नक्काशी से सजावट की गई है। ये मंदिर काकतीय मूर्तिकारों के अद्वितीय कौशल का शानदार उदाहरण है। 

शिल्पकार के नाम से जाना जाता है
जब काकतीय वंश के महाराजा गणपति देव को एक शिव मंदिर बनाने का विचार आया तो उन्होनें अपने शिल्पकार रामप्पा को ऐसा मंदिर बनाने को कहा जो वर्षों तक टिका रहे। रामप्पा ने 40 साल की अथक मेहनत और शिल्प कौशल से इस अद्भुत मंदिर का निर्माण किया। इसे देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुए और मंदिर का नाम उन्होने उसी शिल्पी के ही नाम पर रख दिया- रामप्पा मंदिर। 

पानी पर तैरने वाले पत्थरों से बना है ये मंदिर
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि ये लगभग 800 सालों तक बिना किसी नुकसान के खड़ा है। इस रहस्य का पता लगाने के लिए पुरातत्व विभाग मंदिर पहुँचा। विभाग द्वारा जाँच के उद्देश्य से मंदिर से एक पत्थर के टुकड़े को काटा गया और उसकी जाँच की गई। यह पत्थर भार में अत्यंत हल्का था। इस पत्थर की सबसे बड़ी विशेषता थी कि आर्कमिडीज के सिद्धांत के विपरीत यह पानी में तैरता है। वजन कम होने के कारण ये मंदिर आज भी वैसा ही वैसा खड़ा है।

कैसे पहुंचें मंदिर?
- वारंगल में हवाई अड्डा मौजूद है जो रामप्पा मंदिर से लगभग 70 किमी की दूरी पर है। यहाँ से देश के सभी बड़े शहरों के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं। 
- रेलमार्ग से भी वारंगल देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहाँ दो रेलवे स्टेशन हैं, एक वारंगल में और दूसरा काजीपेट में। रामप्पा मंदिर से वारंगल स्टेशन की दूरी लगभग 65 किमी है, जबकि काजीपेट जंक्शन मंदिर से लगभग 72 किमी की दूरी पर है। 
- इसके अलावा वारंगल राष्ट्रीय राजमार्ग 163 और 563 पर स्थित है। साथ ही यहाँ से होकर राज्यमार्ग 3 भी गुजरता है। वारंगल पहुँचने के बाद रामप्पा मंदिर तक पहुँचने के लिए बड़ी संख्या में परिवहन के साधन उपलब्ध हैं। 
 

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