
नई दिल्ली: देश में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार एक नई टेक्नोलॉजी लाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके मुताबिक 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाली सभी नई गाड़ियों में V2V यानी व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इस नियम के दायरे में L, M और N कैटेगरी की गाड़ियां आएंगी। इसका मतलब है कि दोपहिया, तिपहिया वाहन, कार, SUV, बस, माल ढोने वाली गाड़ियां, ट्रक और हल्के कमर्शियल वाहन, यानी लगभग सभी तरह की गाड़ियां इसमें शामिल होंगी।
सरकार इस टेक्नोलॉजी को धीरे-धीरे लागू करेगी ताकि इसे बनाने और सप्लाई करने वाली कंपनियों को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तैयार करने के लिए पूरा समय मिल सके। यह टेक्नोलॉजी गाड़ियों को आपस में 'बात' करने का मौका देगी, जिससे आने वाले समय में सड़क सुरक्षा में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।
V2V सिस्टम की मदद से गाड़ियां आपस में अपनी स्पीड, लोकेशन, दिशा, लेन बदलने और स्पीड कम-ज़्यादा करने जैसी जानकारी शेयर कर पाएंगी। यह सिस्टम ड्राइवर को उन खतरों के बारे में भी अलर्ट करेगा जो उसकी आंखों से ओझल हों या गाड़ी में लगे सेंसर की रेंज से बाहर हों। उदाहरण के लिए, अगर आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, कोई गलत तरीके से लेन बदलता है या टक्कर होने की कोई भी आशंका होती है, तो यह सिस्टम तुरंत ड्राइवर को चेतावनी देगा। इससे हादसों को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
चीन, जापान, अमेरिका और कई यूरोपीय देश पहले से ही V2V या इससे भी एडवांस V2X (व्हीकल-टू-एवरीथिंग) सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट्स और कुछ चुनिंदा मॉडलों में टेस्ट कर चुके हैं।
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