
अगर आप कार खरीदने के लिए लोन ले रहे हैं, तो आमतौर पर आपको गाड़ी की कीमत का कुछ हिस्सा डाउन पेमेंट के तौर पर पहले देना पड़ता है। बैंक और दूसरी फाइनेंस कंपनियां अक्सर गाड़ी की कीमत का 5 से 15% तक डाउन पेमेंट मांगती हैं। लेकिन कुछ बैंक 'ज़ीरो डाउन पेमेंट कार लोन' की सुविधा भी देते हैं, जिसमें आपको शुरुआत में कोई पैसा नहीं देना होता। जो लोग तुरंत कार खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह एक आकर्षक ऑप्शन हो सकता है, लेकिन इसके कुछ फाइनेंशियल रिस्क भी हैं, जिन्हें समझना ज़रूरी है।
आम कार लोन में खरीदार को गाड़ी की कुल कीमत का एक तय हिस्सा अपनी जेब से देना होता है। लेकिन ज़ीरो डाउन पेमेंट लोन में यह शुरुआती रकम देने की ज़रूरत नहीं होती। बैंक या लोन देने वाली कंपनी आपकी योग्यता के आधार पर पूरी रकम फाइनेंस कर देती है। हालांकि, 'बिना डाउन पेमेंट' का मतलब यह नहीं है कि कार खरीदते वक्त आपका कोई और खर्चा नहीं होगा। प्रोसेसिंग फीस, रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन चार्ज और एक्सेसरीज़ का खर्च आपको अपनी जेब से ही देना पड़ सकता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको शुरुआत में एक बड़ी रकम नहीं देनी पड़ती, जिससे आपकी बचत आपके पास ही रहती है। इस पैसे को आप किसी इमरजेंसी या दूसरे ज़रूरी कामों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको डाउन पेमेंट के लिए पैसे जुटाने के लिए महीनों तक इंतज़ार नहीं करना पड़ता। लोन मंजूर होते ही आप तुरंत गाड़ी घर ला सकते हैं। कई बार लोग इस ऑप्शन की वजह से ज़्यादा कीमत वाले मॉडल या वेरिएंट भी खरीद पाते हैं, बशर्ते उनकी लोन चुकाने की क्षमता हो और बैंक लोन मंजूर कर दे।
चूंकि आपने कोई डाउन पेमेंट नहीं दिया है, इसलिए आपको गाड़ी की पूरी कीमत का लोन लेना पड़ता है। इससे आपकी हर महीने की EMI (किस्त) सामान्य लोन के मुकाबले ज़्यादा हो जाती है। लोन की मूल रकम ज़्यादा होने की वजह से आपको पूरे लोन पीरियड में कुल ब्याज भी ज़्यादा चुकाना पड़ता है। यानी, शुरुआत में भले ही पैसे बचते दिखें, लेकिन लंबे समय में यह लोन आपको महंगा पड़ सकता है।
जब बैंक इतनी बड़ी रकम फाइनेंस करता है, तो वह आवेदक की फाइनेंशियल कंडीशन को बहुत बारीकी से जांचता है। आपका क्रेडिट स्कोर, इनकम, नौकरी या बिजनेस कितना स्थिर है, लोन चुकाने की क्षमता और पहले से चल रहे लोन जैसी चीज़ों की पूरी पड़ताल होती है। इसलिए, जिनका क्रेडिट स्कोर अच्छा और इनकम पक्की होती है, उन्हें यह लोन मिलने की संभावना ज़्यादा होती है।
ज़ीरो डाउन पेमेंट कार लोन का एक सबसे बड़ा रिस्क 'नेगेटिव इक्विटी' है। जैसे ही कार शोरूम से सड़क पर आती है, उसकी बाज़ार कीमत कम होने लगती है। लेकिन आपका लोन उतनी तेज़ी से कम नहीं होता। इससे एक ऐसी स्थिति बन सकती है, जब आपकी कार की मौजूदा कीमत आपके बचे हुए लोन अमाउंट से भी कम हो जाए। अगर ऐसे में आपको कार बेचनी पड़े या किसी वजह से इंश्योरेंस कंपनी गाड़ी को 'टोटल लॉस' घोषित कर दे, तो यह आपके लिए एक बड़ा फाइनेंशियल झटका हो सकता है।
जैसे-जैसे समय बीतता है, गाड़ी की कीमत कम होती जाती है, जबकि आपका लोन चलता रहता है। ऐसे में गाड़ी बेचना मुश्किल हो सकता है। हो सकता है कि कार बेचने से मिली रकम आपके पूरे लोन को चुकाने के लिए काफी न हो और बाकी का पैसा आपको अपनी जेब से भरना पड़े।
ज़ीरो डाउन पेमेंट कार लोन के लिए हर बैंक और फाइनेंस कंपनी के नियम अलग-अलग होते हैं। आमतौर पर वे आपकी पक्की इनकम, नौकरी या बिजनेस की स्थिरता, क्रेडिट हिस्ट्री, लोन चुकाने की क्षमता और मौजूदा लोन की देनदारियों को देखते हैं। कुछ कंपनियां गाड़ी की वैल्यू और आवेदक के साथ अपने पुराने संबंधों को भी ध्यान में रखती हैं।
ज़ीरो डाउन पेमेंट कार लोन के लिए अप्लाई करते समय आपको आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या कोई और पहचान पत्र, पते का सबूत, पासपोर्ट साइज़ फोटो, इनकम प्रूफ, पिछले 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट और डीलर से मिला गाड़ी का कोटेशन देना पड़ सकता है। इसलिए, बिना डाउन पेमेंट वाला लोन चुनने से पहले EMI, ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन की अवधि और कुल कितनी रकम चुकानी होगी, यह सब अच्छी तरह जांच लें। शुरुआत में बड़ी रकम बचाना आकर्षक लग सकता है, लेकिन लंबे समय में आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा, यह सोचना ज़्यादा ज़रूरी है।
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