
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस और चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर (Kirron Kher) को ब्लड कैंसर (मल्टीपल मायलोमा) हो गया है। फिलहाल मुंबई में उनका इलाज चल रहा है। बता दें कि पिछले साल 11 नवंबर को उन्हें गिरने की वजह से हाथ में फ्रेक्चर हुआ था। इसके बाद उन्हे PGIMS में भर्ती कराया गया था, जहां ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण पाए गए थे। यह बीमारी उनके बाएं हाथ से लेकर दाएं कंधे तक फैल गई, जिसके बाद उन्हें मुंबई लाया गया। बता दें कि शरीर में सेल बढ़ने से कैंसर का खतरा होता है। ये किसी भी भाग में हो सकता है। ब्लड कैंसर की शुरुआत ब्लड टिश्यू से होती है। इसका असर पहले इम्युन सिस्टम पर पड़ता है।
ब्लड कैंसर क्यों होता है?
ब्लड कैंसर होने की कोई उम्र निर्धारित नहीं है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। ब्लड कैंसर होने पर कैंसर की कोशिकाएं यानि सेल्स व्यक्ति के शरीर में खून को बनने नहीं देतीं। इससे व्यक्ति में खून की कमी होने लगती है। शरीर के खून के साथ कैंसर व्यक्ति की बोन मैरो को भी नुकसान पहुंचाता है।
ब्लड कैंसर के प्रकार :
ल्यूकेमिया :
यह ब्लड कैंसर का प्राथमिक और प्रमुख प्रकार है, जिसमें व्हाइट ब्लड सेल की मात्रा रेड ब्लड सेल की तुलना में काफी ज्यादा हो जाती है। आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि कुछ लोगों में ल्यूकेमिया कैंसर की शुरूआत धीरे-धीरे होती है और बाद में यह खतरनाक हो जाता है। ल्यूकेमिया कैंसर भी कई तरह का होता है और लोग इससे अंजान होते हैं। ल्यूकेमिया कैंसर के 4 मुख्य प्रकार हैं।
1- एक्यूट ल्यूकेमिया :
जब रक्त और बोन मैरो के सेल्स तेजी से बढ़ते और बढ़कर इकट्ठा होने लगते हैं, तो उसी स्थिति को एक्यूट ल्यूकेमिया कहते हैं। इसमें कोशिकाएं बहुत तेजी से बोन मैरो में जमा होने लगती हैं, जो कि बेहद खतरनाक है।
2- क्रोनिक ल्यूकेमिया :
शरीर के बाकी सेल्स के अलावा जब शरीर में कुछ अविकसित सेल्स के बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है तो उसे क्रोनिक ल्यूकेमिया कहते हैं। क्रोनिक ल्यूकेमिया भी समय के साथ बढ़ता रहता है और अगर इलाज न कराया जाए तो यह स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।
3- लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया :
यह वह स्थिति होती है जब बोन मैरो के सेल्स व्हाइट ब्लड सेल्स में बदलना शुरु हो जाते हैं।
4- मायलोजनस ल्यूकेमिया :
बोन मैरो सैल्स द्वारा रेड ब्लड सेल्स और व्हाइट ब्लेड सेल्स के अलावा जब प्लेटलेट्स का निर्माण होता है तो उसे मायलोजनस ल्यूकेमिया कहते हैं।
इसके अलावा ब्लड कैंसर के कुछ और प्रकार हैं :
ल्यूमफोमा :
जब इंसान के शरीर में लिम्फोसाइट का विकास बहुत तेजी से होता है तो ऐसे लक्षण को ल्यूमफोमा कहते हैं। ऐसा देखा गया है कि, इसका उपाचर दवाईयों और रेडिएशन थेरेपी से किया जाता है और यह सफल भी रहा है। अगर इसे अनदेखा किया जाए तो फिर सर्जरी ही इससे बचने का एकमात्र उपाय है।
माइलोमा :
कैंसर के इस प्रकार में व्यक्ति के प्लाज्मा सेल्स प्रभावित होते हैं, जिससे उसकी इम्यूनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम होती जाती है। ब्लड कैंसर के इस प्रकार में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। प्लाज्मा सेल में कैंसर होने से कंट्रोल के बाहर हो जाता है। इसे ही मल्टीपल माइलोमा कहा जाता है। इससे प्लाज्मा सेल में एबनॉर्मल प्रोटीन (एंटीबॉडी) डेवलप होने लगती है। इसके कई नाम हैं, जैसे- मोनोक्लोनल, इम्युनोग्लोबिन, मोनोक्लोनल प्रोटीन, M-स्पाइक या पैराप्रोटीन।
ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण?
- ब्लड कैंसर से प्रभावित रोगी अक्सर थकान और कमजोरी महसूस करता है। इसकी वजह व्यक्ति के खून में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होना है। रोगी के पेट में सूजन आ जाती है। साथ ही साथ भूख भी कम लगती है।
- अगर ब्लड कैंसर शुरु हो गया है तो रोगी के मुंह, गले, चमड़ी और फेफड़ो में कई तरह की समस्याएं आरंभ हो जाती है। अगर बिना एक्सरसाइज या दौड़-भाग के बिना वजन में कमी आने लगे तो यह भी ब्लड कैंसर का एक लक्षण है।
- अगर बल्ड कैंसर हो गया है तो रोगी को अक्सर बुखार हो सकता है और यह कुछ दिनों में बार-बार लौट सकता है। हड्डियों, मांसपेशियों में में दर्द का अनुभव होना भी ब्लड कैंसर का एक शुरुआती लक्षण हैं।
- इसके अलावा ब्लड कैंसर के शुरुआती चरण में माइग्रेन के दर्द की शिकायत भी कई लोगों में देखी गई है। इसी के साथ अचानक उल्टियां या दस्त लगना, चमड़ी में खुजली, धब्बे की शिकायत, जबड़ों में सूजन और खून का आना भी बल्ड कैंसर के शुरुआती लक्षणों में हो सकता है।
ब्लड कैंसर का इलाज :
कैंसर किसी भी प्रकार का हो, उसमें स्टेज जरूर होती है। जैसे पहली, दूसरी, तीसरी या एडवांस स्टेज। ब्लड कैंसर और दूसरे बाकी कैंसर में यहां अंतर है। डॉक्टर के लिए यह जानना अहम चुनौती होती है कि रोगी में ब्लड कैंसर कैसे हुआ? हालांकि अब ऐसी दवाइयां आ गई हैं, जिससे इसकी शुरुआत की पहचान हो सकती है। यह पता लगाया जा सकता है कि कैंसर किस कोशिका से पनपा और कीमोथेरेपी के माध्यम से उस कोशिका को ही खत्म कर दिया जाता है।
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