
मुंबई. महानायक अमिताभ बच्चन चुप रहते हैं। हाजिरजवाब हैं। बोलते भी बहुत हैं, मगर विवादों से बचकर ही रहते हैं। उस पर कुछ नहीं बोलते। कई बार इस चुप्पी पर सवाल भी होते हैं। पर वो हैं कि खामोशी ओढ़ लेते हैं। ऐसी खामोशी जैसे हैं ही नहीं।
पिछले दिनों बहुत समय बाद "आरे" विवाद पर उनका बयान आया था। हैरानी की बात यह थी कि ऐसे मसलों पर लगभग चुप ही रहने वाले अमिताभ अपनी ही इंडस्ट्री के सितारों से अलग राय जाहिर करते दिखे। एक तरह से उन्होंने आरे के जंगलों के काटे जाने का सपोर्ट ही किया। एक तरह से उन्होंने शिवसेना का विरोध भी किया जो आरे को लेकर नजर आ रहे प्रोटेस्ट को कंधा दिए खड़ी थी। जबकि महानायक ऐसा "नहीं" करने के लिए मशहूर हैं। अमिताभ को एक्टिंग के अलावा चुप रहना भी बहुत बढ़िया आता है। सलीका ऐसा कि लोग महानायक की चुप्पी पर भी वाह-वाह कह उठते हैं।
'केबीसी' के शो में कर्मवीर के नाम से हर हफ्ते स्पेशल एपिसोड का प्रसारण होता है। कर्मवीर के रूप में इस बार सोशल एक्टिविस्ट सुनीता कृष्णन अपने पति के साथ पहुंची थीं। सुनीता बच्चियों की तस्करी के खिलाफ अभियान चलती हैं। उन्होंने अब तक हजारों लड़कियों, महिलाओं को बचाया है। वेश्यालय से बाहर निकाला है। केबीसी की ये खास मेहमान खुद भी नाबालिग उम्र में गैंगरेप का शिकार बनी, और फिर ऐसे संत्रास से मासूम लड़कियों को बचाने के मुहिम में जुट गईं।
हमने देखा कि शो के बीच-बीच में अमिताभ सुनीता की कहानी सुनकर भावुक हो जाते हैं। बार-बार अफसोस जताते हैं। बीच-बीच में जब भी सुनीता मासूम बच्चियों के रेस्क्यू और पीड़ा की कहानी सुना रही थीं, महानायक दर्द से कराह आते। सवाल-जवाब के बीच में एक पड़ाव आया जब स्पेशल गेस्ट को एक ऑडियो की आवाज पहचानकर एक्ट्रेस का नाम बताना था। ऑडियो टेप बजा और आवाज गूंजने लगी। आवाज़ तनुश्री दत्ता की थी।
तनुश्री के बारे में महानायक ने बताया कि उन्होंने ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीता। एक्ट्रेस रही हैं। लेकिन इस बात का जिक्र नहीं किया कि उन्होंने कार्यस्थल खासकर मुंबई में मनोरंजन जगत के यौन उत्पीड़न के खिलाफ सशक्त आवाज बुलंद की। वह उद्योग जहां से अमिताभ भी आते हैं। सुनीता ने जब तनुश्री की बहादुरी पर संक्षिप्त टिप्पणी की तो अमिताभ ने (लगभग बात को वहीं खत्म करने की कोशिश) बीच में कहा- "यस, शी इज ब्रेव।"
हालांकि इसके कुछ ही देर बाद एक और सवाल का पड़ाव आया जहां केंद्रीय मंत्री की तस्वीर दिखाई गई। कंटेस्टेंट ने जवाब भी दिया। जैसा कि अमिताभ ऐसे सवालों पर विवरण प्रस्तुत करते हैं, उन्होंने किया भी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का नाम लिया, उनकी प्रोफ़ाइल बताई। यह भी बताया कि वो बढ़िया काम कर रहे हैं। और जोड़ा कि मैं अखबारों में उनके काम को पढ़ता रहता हूं। लेकिन यह विवरण तनुश्री के सवाल पर वैसा नहीं था, संबंधित एपिसोड को देखते हुए जिसकी जरूरत थी। अमिताभ का रवैया लगभग वैसा ही बचने वाला दिखा, जब विवाद को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा था, "ना मैं तनुश्री हूं और ना ही नाना पाटेकर।"
हालांकि ऐसे कमेंट की आलोचना के बाद उनकी बौद्धिक प्रतिक्रिया भी आईं थीं, मगर तब भी महानायक ने इंडस्ट्री का नाम लिए बिना देश और समाज के स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा अपना वक्तव्य दिया था। अमिताभ को बचना खूब आता है। महानायक जो ठहरे। चुप रहकर आगे निकलना भी एक "खेल" है। महानायक अपने शो में कहते भी रहे हैं... "फिर भी हमें खेल को आगे लेकर चलना है।"
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