
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। इसी बीच आयोग ने अक्टूबर 2026 में बेंगलुरु और मुंबई में हितधारक परामर्श की तारीखें तय कर दी हैं। इन बैठकों के जरिए कर्मचारी यूनियनों, फेडरेशनों, पेंशनर संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। हालांकि, बैठकों की तारीख तय होने का मतलब यह नहीं है कि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी पर कोई अंतिम फैसला हो गया है। फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम बेसिक सैलरी या वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आयोग के तय कार्यक्रम के मुताबिक बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर 2026 को हितधारक परामर्श होगा। इस बैठक के लिए संगठनों से मुलाकात के अनुरोध 18 सितंबर तक मांगे गए थे। इसके बाद आयोग 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में बैठक करेगा। मुंबई में परामर्श के लिए इच्छुक कर्मचारी यूनियन, प्रतिनिधि संगठन, पेंशनर एसोसिएशन और अन्य संबंधित समूह 10 अक्टूबर 2026 तक अपने अनुरोध भेज सकते हैं। बैठक का स्थान और विस्तृत एजेंडा बाद में जारी किया जाएगा।
8वें वेतन आयोग की परामर्श प्रक्रिया इससे पहले भी अलग-अलग शहरों में आगे बढ़ी है। जयपुर में 31 अगस्त और 1 सितंबर को परामर्श का कार्यक्रम रखा गया था, जबकि चंडीगढ़ में 16 से 18 सितंबर तक संबंधित पक्षों से चर्चा की गई। इन बैठकों का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों और सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों, संगठनों और पेंशनर्स की राय सुनना और आयोग के सामने उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाना है।
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई हैं। इसके सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष और मेंबर-सेक्रेटरी पंकज जैन हैं। आयोग को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा कर सरकार को अपनी सिफारिशें देनी हैं।
कर्मचारियों के बीच फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर अलग-अलग तरह के दावे सामने आते रहे हैं। लेकिन अभी तक आयोग ने किसी निश्चित फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम बेसिक वेतन या सैलरी बढ़ोतरी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आयोग फिलहाल विभिन्न संगठनों से सुझाव और आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया में है। आगे इन जानकारियों का अध्ययन करने के बाद आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। इसके बाद केंद्र सरकार इन सिफारिशों पर अंतिम फैसला लेगी।
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सैलरी बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर से जुड़े आंकड़ों को तब तक आधिकारिक नहीं माना जाना चाहिए, जब तक उनकी पुष्टि आयोग या सरकार की ओर से न हो।
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