
बिजनेस डेस्क: सीआईआई (CII) का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण लागू लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है और सबसे अच्छी स्थिति में भी भारत की जीडीपी दर चालू वित्त वर्ष में ज्यादा से ज्यादा 1.5 प्रतिशत रह सकती है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने एक रिपोर्ट ‘अ प्लान फोर इकोनॉमिक रिकवरी’ में यह अनुमान व्यक्त किया है।
संगठन ने तीन स्थितियों में वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। उसके अनुसार चालू वित्त वर्ष के दौरान सबसे खराब स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था के आकार में -0.9 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जबकि सबसे अच्छी स्थिति में जीडीपी दर 1.5 प्रतिशत रह सकती है।
फिच रेटिंग्स ने भी घटाई जीडीपी दर
रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भी 2020-21 के लिये भारत की जीडीपी दर का अनुमान घटाकर 0.8 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये दुनिया भर में लागू लॉकडाउन के कारण अप्रत्याशित वैश्विक आर्थिक मंदी आ रही है।
अगर लॉकडाउन बढ़ा तो घटेगी देश की जीडीपी दर
सीआईआई की इस रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के समाप्त होने के बाद भी माल तथा लोगों की आवाजाही के बाधित रहने के अनुमान हैं। यदि ऐसी स्थिति बनी रही और लॉकडाउन के समाप्त होने के बाद भी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित रहीं तो चालू वित्त वर्ष में देश की जीडीपी दर 0.6 प्रतिशत रह सकती है।
देश की जीडीपी दर 1.5 प्रतिशत रह सकती है
रिपोर्ट में कहा गया कि सबसे अच्छी स्थिति होगी जब लॉकडाउन की अवधि के समाप्त होने बाद आर्थिक गतिविधियों में तेजी से सुधार हो। ऐसी स्थिति में देश की जीडीपी दर 1.5 प्रतिशत रह सकती है। संगठन ने कहा कि अगर हालत खराब होती है और संक्रमण के मौजूदा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पाबंदियों की अवधि बढ़ायी जाती है तथा नये हॉटस्पॉट भी उभरकर सामने आते हैं तो ऐसे में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) चालू वित्त वर्ष में -0.9 प्रतिशत कम हो सकता है।
IMF ने घटाया जीडीपी दर का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने फाइनेंशियल ईयर 2021 में भारत की अर्थव्यवस्था में 1.9 फीसदी की वृद्धि दर का अनुमान जताया है। हालांकि आईएमएफ के अनुमान में ही भारत के लिए एक बड़ी उम्मीद जताते हुए कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.4 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह बड़ी छलांग होगी।
सीआईआई ने सुझाए ये रास्ते
सीआईआई ने कहा कि ऐसे में तत्काल वित्तीय हस्तक्षेप करने की जरूरत है। संगठन ने 1.7 लाख करोड़ रुपये के घोषित राहत उपायों के अलावा जन धन खाता धारकों को दो लाख करोड़ रुपये तक की सहायता देने का सुझाव दिया। इसके अलावा संगठन ने बैंकों को परिचालन के लिये अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने, एमएसएमई के लिये रिजर्व बैंक की गारंटी से युक्त कर्ज का प्रावधान करने समेत अन्य सुझाव भी दिए।
(फाइल फोटो)
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