
Crude Oil Price Today: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर पूरी दुनिया के तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब पर हमले, गल्फ में एक जहाज पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान-गल्फ देशों की अहम बैठक टलने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी इसका असर पड़ेगा?
होर्मुज पर अहम बैठक टली, बढ़ी तेल सप्लाई की चिंता
तेल बाजार में ताजा उछाल की बड़ी वजहों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर होने वाली अहम कूटनीतिक बैठक का टलना है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी (Badr Albusaidi) ने बताया कि 14 सितंबर को ईरान और कई गल्फ देशों के बीच प्रस्तावित बैठक को स्थगित कर दिया गया है। इस बैठक में होर्मुज स्ट्रेट के जरिए एक अस्थायी शिपिंग लेन बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। ओमान ने कहा कि बैठक को सहमति बनाने के हित में टाला गया है। हालांकि, उसने क्षेत्र में स्थिरता और लंबे समय तक सहयोग के लिए बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। ये बैठक ऐसे समय टली, जब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर पहले ही चिंता बढ़ी हुई है।
होर्मुज में जहाज पर हमला
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज को प्रोजेक्टाइल (Projectile) से निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और चालक दल को बाहर निकालना पड़ा। ईरान ने भी बताया कि उसके तट के पास एक कॉमर्शियल जहाज को निशाना बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और चार क्रू मेंबर्स घायल हुए।
सऊदी पाइपलाइन और ठिकानों पर हमले
दक्षिणी सऊदी अरब में भी पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा संबंधी अलर्ट लगातार सामने आ रहे हैं। सऊदी स्टेट मीडिया ने जाजान प्रांत (Jazan Province) में घरों और एक मस्जिद को हुए नुकसान की तस्वीरें जारी कीं और इसके लिए यमन के हूती मूवमेंट के क्रॉस बॉर्डर अटैक को जिम्मेदार बताया। हूती ने अलग से एक पड़ोसी प्रांत में सऊदी मिलिट्री बेस को निशाना बनाने का दावा किया। इससे पहले शुक्रवार को ड्रोन स्ट्राइक्स में सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई। ये पाइपलाइन बेहद अहम है, क्योंकि इसके जरिए मिडल ईस्टर्न ऑयल को होर्मुज को बायपास करते हुए दूसरे रास्ते से पहुंचाया जाता है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन अगर लंबे समय तक बंद रहती है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पाइपलाइन चालू नहीं होती है, तो सऊदी अरब के रेड सी पोर्ट यानबु (Yanbu) में मौजूद ऑयल स्टॉक्स से एक्सपोर्ट्स को करीब 5 से 7 दिन तक बनाए रखा जा सकता है। इसके बाद अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई का करीब 4 फीसदी हिस्सा जोखिम में आ सकता है। ये उस तेल के अलावा है, जो होर्मुज के जरिए शिपिंग में आई रुकावट के कारण पहले ही प्रभावित हो रहा है।
इन घटनाओं का असर सोमवार को ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट पर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent crude futures) में 3.62 डॉलर (3.46%) की तेजी आई और ये 108.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, WTI क्रूड ऑयल 3.15 डॉलर (3.15%) बढ़कर 103.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका में डीजल की रिटेल प्राइस भी रविवार को पहली बार 6.20 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई।
जानकारों के अनुसार, भारत अपनी क्रूड ऑयल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। ऐसे में ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर घरेलू फ्यूल प्राइस पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सिर्फ एक दिन की तेजी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी। इसका असर कई दूसरे फैक्टर्स पर भी निर्भर करता है, जिनमें क्रूड ऑयल का स्थिर मूल्य स्तर (Sustained Price Level), रुपए और डॉलर का एक्सचेंज रेट, ऑयल मार्केटिंग कंपनीज की कीमतें और सरकार की टैक्स पॉलिसी शामिल हैं। लेकिन अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100-110 डॉलर के आसपास या इससे ऊपर बना रहता है, तो भारत के लिए इंपोर्ट बिल और महंगाई दोनों को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
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