
Fixed Deposit Rules: एफडी कराना आज भी सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट में से एक माना जाता है। जब भी लोगों के पास कुछ एक्स्ट्रा सेविंग बचती है, तो सबसे पहला ख्याल फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ही आता है। बैंक जाते ही ज्यादातर लोगों का सबसे पहला सवाल होता है, 'ब्याज (Interest Rate) कितना मिल रहा है?' लोग उस जगह एफडी कराना चाहते हैं, जहां ब्याज ज्यादा मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ ब्याज दर के पीछे भागना एक बड़ी गलती हो सकती है? फाइनेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि FD का मतलब हर उम्र के इंसान के लिए अलग-अलग होता है। अगर आप बिना प्लानिंग के पैसा फंसा देंगे, तो जरूरत पड़ने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं आपकी उम्र के हिसाब से एफडी कराने का सही तरीका क्या होना चाहिए और किस एक बात का ध्यान रखना हर उम्र वालों के लिए जरूरी है...
एक साथ न फंसाएं पैसा
रिटायरमेंट के बाद पैसा बढ़ने से ज्यादा अहम यह है कि पैसा सुरक्षित रहे और हर महीने घर का खर्च आसानी से चलता रहे। इसलिए एक ही बड़ी FD कराने के बजाय अलग-अलग समय पर मैच्योर होने वाली कई छोटी-छोटी FD कराएं। इससे आपको बीच-बीच में कैश मिलता रहेगा और जरूरत पड़ने पर बड़ी FD तोड़कर पेनल्टी नहीं देनी पड़ेगी।
ज्यादा ब्याज और टैक्स छूट
बैंकों में बुजुर्गों को ज्यादा ब्याज मिलता है। जैसे SBI नॉर्मल ग्राहकों को 6.40% तो सीनियर सिटीजन को 6.90% ब्याज दे रहा है। इसके अलावा, सेक्शन 80TTB के तहत 50,000 रुपए तक की टैक्स छूट का फायदा जरूर लें।
5 लाख का सेफ्टी रूल
अपना सारा पैसा किसी एक बैंक में न रखें। किसी भी एक बैंक में 5 लाख रुपए से ज्यादा की FD न कराएं, ताकि पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स कहते हैं, अगर आपकी उम्र 20 से 30 के बीच है, तो जान लीजिए कि FD आपको रातों-रात करोड़पति नहीं बनाएगी। महंगाई और टैक्स इसके रिटर्न को कम कर देते हैं। लेकिन फिर भी युवाओं के लिए यह बहुत काम की चीज है।
इमरजेंसी फंड तैयार करें
अपने कम से कम 6 महीने के खर्च जैसे किराया, ईएमआई, राशन और अन्य के बराबर का पैसा FD में जरूर रखें। इससे इमरजेंसी में काफी मदद मिल जाती है और परेशानी भी नहीं उठानी पड़ती है।
मार्केट क्रैश में बनेगा ढाल
जब अचानक नौकरी चली जाए या कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तब यही FD आपके काम आएगी। इसकी वजह से आपको घबराहट में अपने शेयर या म्यूचुअल फंड घाटे में नहीं बेचने पड़ेंगे।
खर्चों की डेट से करें मैच
जिन लोगों के परिवार हैं, उनके सिर पर कई तरह के खर्चे होते हैं। ऐसे में सारी सेविंग एक ही एफडी में डालना स्मार्ट तरीका नहीं है। आपको अप्रैल में बच्चे की स्कूल फीस भरनी है, जुलाई में इंश्योरेंस का प्रीमियम देना है या 3 साल बाद घर के लिए डाउन पेमेंट करना है। आप इन खर्चों की टाइमलाइन के हिसाब से अलग-अलग FD कराएं।
बजट रहेगा सेट
जब जिस खर्च की बारी आएगी, आपकी उस समय वाली FD मैच्योर हो जाएगी और आपके घर का बजट बिल्कुल नहीं बिगड़ेगा।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार, FD कराते समय ब्याज दर सबसे आखिर में देखना चाहिए। सबसे पहले अपना 'मकसद' (Purpose) तय करना बेहतर होता है। सबसे बेहतरीन एफडी वह नहीं है, जो आपको सबसे ज्यादा रिटर्न दे रही हो, बल्कि वो है जो सही वक्त पर, सही काम के लिए आपके हाथ में पैसा दे।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। इसे निवेश की सलाह न मानें। FD की ब्याज दरें, टैक्स नियम और बैंक की शर्तें समय के साथ बदल सकती हैं। निवेश का फैसला लेने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा शर्तें और अपनी वित्तीय जरूरत जरूर चेक करें, हो सके तो मार्केट एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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