Oil Tanker: होर्मुज जलडमरूमध्य का सीना चीर मुंबई पहुंचा तेल का जहाज, हवा में उड़ी ईरान की धमकी

Published : Mar 11, 2026, 05:44 PM IST
Oil Tanker: होर्मुज जलडमरूमध्य का सीना चीर मुंबई पहुंचा तेल का जहाज, हवा में उड़ी ईरान की धमकी

सार

पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर 'शेलॉन्ग' टैंकर मुंबई पहुंच गया है. ईरान की मिसाइल हमले की धमकी के बीच इस जहाज ने अपना आइडेंटिफिकेशन सिस्टम बंद करके खतरनाक 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पार किया.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) लगभग थम सा गया है। S&P ग्लोबल कमोडिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खतरनाक माहौल के बीच, ईरान के अलावा किसी दूसरे देश का कच्चा तेल लेकर पहला टैंकर इस रास्ते से होते हुए भारत पहुंच गया है। ईरान ने धमकी दी थी कि अगर उसके अलावा किसी और देश का तेल टैंकर इस रास्ते से गुजरा तो वह उस पर मिसाइल से हमला कर देगा।

मुंबई पहुंचा 'शेलॉन्ग' टैंकर

S&P के आंकड़ों के अनुसार, 'शेलॉन्ग' (Shenlong) नाम का यह टैंकर 1 मार्च को सऊदी अरब के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्ट टर्मिनल 'रास तनूरा' से निकला था। 10 मार्च को यह टैंकर भारत के मुंबई तट पर पहुंच गया। जब जहाज रास तनूरा में था, तो पानी में उसका ड्राफ्ट (जहाज का पानी में डूबा हुआ हिस्सा) 9।3 मीटर था, लेकिन मुंबई पहुंचने पर यह 15।8 मीटर हो गया। इससे पता चलता है कि जहाज पूरी तरह से तेल से लदा हुआ था। यह जहाज 'शेलॉन्ग शिपिंग लिमिटेड' का है और इसे ग्रीस की कंपनी 'डायनाकॉम टैंकर्स मैनेजमेंट' ऑपरेट करती है।

क्या यह एक सीक्रेट ऑपरेशन था?

ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर से पता चला है कि जहाज ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने से ठीक पहले अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर दिया था। यह सिस्टम जहाज की लोकेशन बताता है। जलडमरूमध्य को पार करने के बाद इसे फिर से चालू कर दिया गया। हालांकि, जहाज की फाइनल डेस्टिनेशन क्या है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

अमेरिकी नौसेना ने नहीं दी कोई सुरक्षा

एक समय अमेरिका के ऊर्जा मंत्री ने ट्वीट किया था कि "अमेरिकी नौसेना ने तेल टैंकर को सुरक्षा देकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कराया है।" लेकिन बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। इस पर व्हाइट हाउस ने सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना ने किसी भी कमर्शियल जहाज को सुरक्षा नहीं दी है।

आसमान पर पहुंचा ढुलाई का खर्च

इस तनाव के कारण होर्मुज के रास्ते तेल लाने-ले जाने का किराया आसमान छू रहा है। 27 फरवरी को जो किराया प्रति मीट्रिक टन $51।42 था, वह 10 मार्च तक बढ़कर $158।63 हो गया। इससे तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

भारत के लिए चिंता की बात क्यों?

दुनिया भर में तेल सप्लाई का 20% हिस्सा और भारत के कुल एनर्जी इंपोर्ट का 50% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से ही होकर गुजरता है। फिलहाल यहां जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। आम दिनों में यहां से रोज 60 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब सिर्फ 2-3 जहाज ही गुजर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फुजैरा और यानबु जैसे वैकल्पिक एक्सपोर्ट रूट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन वे होर्मुज मार्ग के बंद होने से हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते।

S&P ग्लोबल एनर्जी के क्रूड ऑयल रिसर्च हेड जिम बर्खार्ड के मुताबिक, ‘एशियाई बाजार पर दबाव साफ दिख रहा है। एशियाई रिफाइनरियों का आधा तेल खाड़ी देशों से ही आता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य ज्यादा समय तक बंद रहा, तो इसका असर सिर्फ एशिया पर ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में तेल के भंडार और कीमतों पर पड़ेगा।’

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