भारत में सोने की कीमतों में पिछले सात दशकों में जबरदस्त उछाल आया है। 1955 में 10 ग्राम सोने की कीमत सिर्फ 79 रुपये थी। 1980 तक, कीमतें 1,300 रुपये को पार कर गईं और सालों-साल इसकी वैल्यू लगातार बढ़ती रही। अनुमान है कि 2026 में 10 ग्राम सोने की कीमत 1.6 लाख रुपये से भी ज्यादा हो गई।
भारत में सोने की कीमतों ने दशकों में एक शानदार और स्थिर बढ़त दिखाई है, जो आर्थिक बदलाव और इस कीमती धातु में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह सफर 1955 में सिर्फ 79 रुपये प्रति 10 ग्राम से शुरू हुआ और धीरे-धीरे 1960 में 111 रुपये और 1970 में 184 रुपये तक पहुंच गया। 1980 तक, कीमतें 1,330 रुपये तक पहुंच गईं, जो एक मजबूत तेजी की शुरुआत थी। यह सिलसिला जारी रहा और 1990 में सोना 3,200 रुपये, 2000 में 4,400 रुपये और 2010 तक 18,500 रुपये पर पहुंच गया। पिछले दशक में यह तेजी और भी तेज हो गई, 2020 में कीमतें 48,651 रुपये, 2024 में 74,100 रुपये, 2025 में 1.13 लाख रुपये और 2026 में अनुमानित 1.6 लाख रुपये को पार कर गईं। सालों से हो रही यह लगातार बढ़ोतरी भारत के सबसे भरोसेमंद और मूल्यवान संपत्तियों में से एक के रूप में सोने की स्थायी प्रतिष्ठा को दिखाती है।
यह तेज बढ़ोतरी दिखाती है कि कैसे सोना एक पारंपरिक गहने से बढ़कर एक प्रीमियम फाइनेंशियल एसेट बन गया है। आर्थिक विकास, महंगाई और बदलते निवेश पैटर्न, इन सभी ने इस धातु की लॉन्ग-टर्म वैल्यू बढ़ाने में योगदान दिया है।