
IDFC First Bank Stock: 23 फरवरी को IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। बैंक के शेयर करीब 19% टूटकर 68 रुपये प्रति शेयर पर पहुंच गए। इससे एक दिन पहले बैंक ने खुलासा किया था कि उसके कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों ने हरियाणा सरकार के एक अकाउंट से जुड़ा लगभग 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है। इस खबर के बाद सोमवार 23 फरवरी को आईडीएफसी बैंक का शेयर करीब 20% तक लुढ़क गया।
फ्रॉड की खबर के बाद IDFC First Bank का स्टॉक एक समय 66.80 रुपए तक टूट गया। हालांकि, बाद में हल्की रिकवरी दिखी और दोपहर 11 बजे तक यह 69.95 रुपए के आसपास ट्रेड कर रहा है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार 2,152,520 शेयरों के सेल ऑर्डर पेंडिंग थे और इनके लिए कोई खरीदार नहीं मिल रहा था।
IDFC फर्स्ट बैंक ने बताया कि इस मामले की जानकारी बैंकिंग रेगुलेटर को दे दी गई है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। बैंक की फाइलिंग के अनुसार, पहली नजर में चंडीगढ़ की एक खास ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के कुछ अकाउंट्स में बिना अनुमति और धोखाधड़ी से लेन-देन किए। इसमें अन्य लोग, एंटिटी या काउंटरपार्टी के शामिल होने की भी आशंका है। फिलहाल फ्रॉड की अनुमानित राशि 590 करोड़ रुपये बताई गई है। बैंक ने कहा कि एक रिकंसिलिएशन एक्सरसाइज के बाद अंतिम रकम तय की जाएगी, जिसमें क्लेम की जांच और संभावित रिकवरी शामिल होगी।
ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिकंसिलिएशन के तहत यह रकम बैंक की नेट वर्थ का करीब 0.9% है। फिस्कल ईयर 2026 के टैक्स-पूर्व प्रॉफिट का लगभग 20% प्रभावित हो सकता है। UBS का अनुमान है कि यह राशि FY26 के टैक्स-पश्चात मुनाफे का लगभग 22% हो सकती है, हालांकि कैपिटल पर असर नेट वर्थ के करीब 1% तक सीमित रहेगा। मॉर्गन स्टेनली ने भी FY26 के प्री-टैक्स प्रॉफिट पर करीब 20% असर का अनुमान लगाया है। जेफरीज ने कहा कि बैंक को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि यह मामला अन्य क्लाइंट्स तक नहीं फैला है और यह सिस्टेमैटिक फ्रॉड नहीं लगता।
एक ऑफिशियल सर्कुलर के अनुसार, हरियाणा सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी बिजनेस के लिए तुरंत प्रभाव से डी-एम्पैनल कर दिया है। अब अगले आदेश तक इन बैंकों के जरिए कोई सरकारी फंड जमा, निवेश या ट्रांजैक्शन नहीं किया जाएगा। फाइनेंस डिपार्टमेंट के सर्कुलर में साफ कहा गया है कि दोनों बैंकों को हरियाणा में सरकारी कामकाज से हटाया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा सरकार का एक विभाग IDFC फर्स्ट बैंक के साथ बैंकिंग कर रहा था। किसी अनजान तारीख पर बैंक को अकाउंट बंद करने और बैलेंस दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट मिली। इस प्रॉसेस के दौरान अकाउंट बैलेंस में अंतर पाया गया। आगे जांच में हरियाणा सरकार से जुड़े अन्य अकाउंट्स में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई। ये अकाउंट्स 18 फरवरी से बैंक से जुड़े हुए थे। बैंक ने कहा कि शुरुआती इंटरनल रिव्यू में यह मामला चंडीगढ़ ब्रांच के जरिए संचालित सरकार से जुड़े खास अकाउंट्स तक सीमित पाया गया है। यह अन्य ग्राहकों तक नहीं फैला है।
बैंक ने जांच पूरी होने तक चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। दोषी कर्मचारियों और बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। रिकवरी के लिए बैंक ने कुछ बेनिफिशियरी बैंकों को संदिग्ध अकाउंट्स में “लियन मार्क बैलेंस” के लिए रिकॉल रिक्वेस्ट भेजी है। स्टैच्युटरी ऑडिटर्स को सूचना दे दी गई है और एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फोरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा। 20 फरवरी को इस मामले को बोर्ड की स्पेशल कमिटी के सामने रखा गया और उसके बाद ऑडिट कमिटी और बोर्ड को भी जानकारी दी गई।
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