
नई दिल्ली [भारत], 9 जुलाई (एएनआई): भारत में दुनिया का ऑफिस स्पेस बनने की क्षमता है, जो पारंपरिक बैक-ऑफिस संचालन से आगे बढ़कर फ्रंट-एंड जिम्मेदारियों को संभालने में भी अपनी भूमिका का विस्तार करेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि घरेलू इकोसिस्टम में अब दुनिया के कुल ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और उनसे जुड़े वर्कफोर्स का लगभग आधा हिस्सा मौजूद है।
गुरुवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित GCC बिजनेस समिट में बोलते हुए कृष्णन ने कहा, "भारत में सचमुच दुनिया का ऑफिस स्पेस बनने की क्षमता है! सिर्फ एक बैक ऑफिस नहीं, बल्कि असल में फ्रंट-एंड ऑपरेशंस को भी चलाने वाला ऑफिस। यह एक ऐसा अवसर है जिसे हमें चूकना नहीं चाहिए।"
कृष्णन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि हाल के रेगुलेटरी अपडेट्स ने विस्तार को आसान बना दिया है। बिल्डिंग, श्रम और टैक्सेशन फ्रेमवर्क में सरकार के नेतृत्व वाले हस्तक्षेपों ने लंबे समय से चली आ रही इंडस्ट्री की मांगों को हल कर दिया है, जिससे छोटे शहरी केंद्रों और हाई-वैल्यू ऑपरेशंस में तेज ग्रोथ का मंच तैयार हो गया है।
कृष्णन ने कहा, "मुझे लगता है कि सेफ हार्बर प्रावधानों और उनके संचालन के तरीके के संदर्भ में टैक्सेशन में हुए बदलाव महत्वपूर्ण हैं और इन्हें वास्तव में इस बात को बढ़ावा देना चाहिए कि देश में और अधिक GCCs कैसे आ सकते हैं।" उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अब यह मापने का समय आ गया है कि इन बदलावों का किस तरह का प्रभाव पड़ा है और इसके परिणाम क्या रहे हैं, क्योंकि इनमें से कुछ बदलावों के परिणाम के रूप में बहुत कुछ वादा किया गया था।"
केंद्रीय हस्तक्षेपों के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारों की प्रतिस्पर्धी नीतियों ने भी बहुत जरूरी प्रशासनिक स्पष्टता लाई है। महामारी के कारण वर्कफोर्स की प्राथमिकताओं में आए बदलाव भी GCCs के विस्तार को टियर-II और टियर-III शहरों की ओर ले जा रहे हैं, जहां कम रियल एस्टेट और टैलेंट की लागत ग्लोबल फर्मों को फंक्शनल एडवांटेज प्रदान करती है। विभिन्न राज्यों ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी विकास को उत्प्रेरित करने के लिए कर्नाटक के 'बियॉन्ड बैंगलोर' अभियान, तमिलनाडु के 'नियो-टाइडेल पार्क्स' और मध्य प्रदेश तथा गुजरात में समर्पित प्रोत्साहन पैकेजों जैसी लक्षित स्थानीय नीतियां शुरू की हैं।
इस संरचनात्मक बदलाव का एक प्रमुख तत्व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एकीकरण है, जिसे कृष्णन वर्तमान में लगभग 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आईटी सेवा निर्यात क्षेत्र के लिए खतरे के बजाय विकास का एक अवसर मानते हैं। निचले स्तर के कार्यों के ऑटोमेशन से स्थानीय ऑपरेशंस को उन जटिल असाइनमेंट की ओर मोड़ने की अनुमति मिलती है, जिनमें कड़े डोमेन नॉलेज की आवश्यकता होती है।
उन्होंने आगे कहा, "भारत AI को कैसे अपना सकता है और भारत इस क्षेत्र में क्या योगदान दे सकता है? और इसीलिए यह विचार था कि भारत को वास्तव में दुनिया की एप्लीकेशन और AI-आधारित समाधान राजधानी बनने की जरूरत है।" उन्होंने कहा, "AI की तैनाती आपको देश में हाई-वैल्यू वाले कार्यों को लाने और यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है कि यहां हाई-वैल्यू एडेड कार्य भी जोड़े जाएं।"
इस गति को बनाए रखने के लिए, MeitY और इंडिया एआई मिशन व्यापक अकादमिक पुनर्रचना की वकालत कर रहे हैं। हालांकि एआई टूल्स को सभी शैक्षिक स्तरों पर पेश किया जा रहा है, लेकिन ऑटोमेटेड वर्कफ्लो को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए कोर डोमेन नॉलेज में गहरी दक्षता बनाए रखना आवश्यक है। मंत्रालय वर्तमान में इंडस्ट्री बॉडीज के साथ मिलकर टैलेंट पूल को हायर-ऑर्डर मैनेजमेंट फंक्शंस के लिए अनुकूलित करने के लिए टार्गेटेड स्किलिंग प्रोग्राम पर काम कर रहा है। (एएनआई)
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