ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री में 12.7% की ग्रोथ, लेकिन बढ़ते आयात ने बढ़ाई चिंता

Published : Jul 07, 2026, 02:30 PM IST
Representational Image (Photo/ANI)

सार

ACMA की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में भारत की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री 12.7% बढ़ी। OEM और आफ्टरमार्केट में मजबूत ग्रोथ रही। निर्यात 5% बढ़ा, लेकिन आयात में 13% की तेजी से व्यापार घाटा बढ़कर 1.37 अरब डॉलर हो गया।

ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में भारत की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ने 12.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की। इस दौरान निर्यात 5 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि, आयात में निर्यात से ज्यादा तेजी से वृद्धि हुई, जिससे व्यापार घाटा बढ़ गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 में भारत की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री में 12.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह ग्रोथ पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल और टू-व्हीलर के मजबूत प्रोडक्शन के बीच ओईएम (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) को होने वाली सप्लाई में 16.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी से प्रेरित थी। इसी समय, बढ़ते व्हीकल बेस और बाजार के फॉर्मलाइजेशन के सपोर्ट से आफ्टरमार्केट सेगमेंट में 9 प्रतिशत का विस्तार हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, आफ्टरमार्केट सेगमेंट में ग्रोथ पुरानी गाड़ियों की बढ़ती मांग, बड़े और ज्यादा पावरफुल वाहनों की ओर झुकाव और रिपेयर व मेंटेनेंस बाजार के बढ़ते फॉर्मलाइजेशन के कारण हुई।

निर्यात बढ़ा, लेकिन आयात ने चिंता बढ़ाई

भारत के निर्यात में 5 प्रतिशत की अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जबकि आयात में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप 1.37 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ। ईवी सेगमेंट को की गई सप्लाई का ओईएम बिक्री में 4.6 प्रतिशत हिस्सा रहा। निर्यात में वृद्धि मुख्य रूप से यूरोप को होने वाले शिपमेंट में बढ़ोतरी के कारण हुई, जिसकी वजह अनुकूल एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) की उम्मीदें और यूरोपीय ओईएम द्वारा खरीद में वृद्धि थी। इंजन कंपोनेंट्स और ड्राइव ट्रांसमिशन व स्टीयरिंग सिस्टम का निर्यात में आधे से अधिक हिस्सा था। हालांकि, आयात निर्यात से आगे निकल गया, जिसका नेतृत्व चीन, जापान और जर्मनी से होने वाली सप्लाई ने किया। कुल आयात में ड्राइव ट्रांसमिशन व स्टीयरिंग और इंजन कंपोनेंट्स का 56 प्रतिशत योगदान रहा।

सेक्टर के सामने अवसर और चुनौतियां

रिपोर्ट में ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए कई अवसरों (टेलविंड्स) और चुनौतियों (हेडविंड्स) पर प्रकाश डाला गया। प्रमुख ग्रोथ ड्राइवरों में कार्बन न्यूट्रैलिटी पर सरकार का फोकस, नए बाजारों को खोलने वाले एफटीए का विस्तार, बुनियादी ढांचे का विकास, घरेलू वाहनों की बढ़ती मांग, स्थिर निर्यात की संभावनाएं, बढ़ा हुआ निवेश, क्षमता विस्तार और मोबिलिटी स्पेस में नए प्लेयर्स का प्रवेश शामिल है। हालांकि, यह सेक्टर रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के तनाव, अमेरिकी टैरिफ और चीनी व्यापार प्रतिबंधों सहित भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से चुनौतियों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य चुनौतियों में रेयर अर्थ मैग्नेट की सीमित उपलब्धता, कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता, उच्च बीमा और माल ढुलाई लागत, और श्रम की कमी शामिल है।

(Except for the headline, this story has not been edited by Asianetnews Editorial staff and is published from a syndicated feed.)

PREV

अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।

Recommended Stories

GIFT सिटी ने वियतनाम के नए वित्तीय केंद्र VIFC-DN के साथ साझेदारी की
Trent Share Crash: टाटा ग्रुप के इस स्टॉक में मची भगदड़, एक झटके में 12% से ज्यादा टूटा शेयर