
Commercial Gas Cylinder Price Hike Today: 1 अक्टूबर से 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ गई है। दिल्ली में अब इसका दाम ₹2,810 हो गया है। वहीं घर में इस्तेमाल होने वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर करीब ₹942 का है। ऐसे में सवाल है कि जब दोनों सिलेंडर में LPG गैस ही इस्तेमाल होती है, तो कीमत में इतना बड़ा अंतर क्यों है? इसका जवाब सिर्फ सिलेंडर के वजन में नहीं छिपा है। घरेलू और कमर्शियल एलपीजी की कीमत का सिस्टम अलग है। आइए एकदम सिंपल तरह से समझते हैं...
एलपीजी रेट में अंतर?
दिल्ली में 14.2 किलो घरेलू सिलेंडर ₹942 में है, जबकि 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर ₹2,810 का हो गया है। दोनों की कीमतों का अंतर करीब ₹1,868 है। यानी कमर्शियल सिलेंडर की कीमत घरेलू सिलेंडर से काफी ज्यादा है।
वजन का फर्क
घरेलू सिलेंडर में नेट गैस का वजन 14.2 किलोग्राम होता है। जबकि कमर्शियल सिलेंडर में कुल 19 किलोग्राम गैस भरी होती है। अगर सिर्फ प्रति किलो गैस के हिसाब से भी देखें, तो घरेलू गैस आपको करीब ₹66 प्रति किलो के भाव पर पड़ रही है, जबकि कमर्शियल गैस का भाव करीब ₹147 प्रति किलो तक जा रहा है। यानी वजन से अलग भी एक बड़ा खेल है।
सब्सिडी और सरकारी सुरक्षा कवच
घर की रसोई का सिलेंडर सरकार की अनिवार्य और जरूरी लिस्ट में आता है। सरकार नहीं चाहती कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल या गैस महंगी होते ही आम जनता की थाली पर असर पड़े। इसलिए घरेलू गैस के रेट को सरकार सीधे रेगुलेट करती है और जरूरत पड़ने पर तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई करती है। कमर्शियल गैस पूरी तरह बाजार के हवाले (मार्केट ड्रिवन) है। इस पर सरकार कोई सब्सिडी या राहत नहीं देती। दुनिया भर में जब भी कच्चे तेल या गैस के दाम चढ़ते हैं, तेल कंपनियां इसका पूरा बोझ सीधे कमर्शियल सिलेंडर पर डाल देती हैं।
टैक्स और GST का बड़ा खेल
दोनों सिलेंडरों पर लगने वाले टैक्स में जमीन-आसमान का अंतर है। घर के लाल सिलेंडर को जरूरी सामान माना गया है, इसलिए इस पर केवल 5% GST लगता है। जबकि कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल कारोबार, होटल, रेस्टोरेंट और कारखानों में होता है, इसलिए इसे बिजनेस कैटेगरी में रखकर इस पर सीधे 18% GST वसूला जाता है। इसके अलावा राज्यों के अपने-अपने वैट (VAT) और ढुलाई खर्च अलग से जुड़ते हैं।
मिक्स में हल्का फर्क
दिखने में दोनों में एलपीजी ही है, लेकिन इनके मिक्स में हल्का फर्क होता है। दोनों सिलेंडरों में प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होता है। घर वाले सिलेंडर में ब्यूटेन की मात्रा थोड़ी ज्यादा रखी जाती है ताकि धीमी और स्थिर आंच मिले, जिससे घरेलू चूल्हे पर खाना आराम से पके। होटल और रेस्टोरेंट में बड़े-बड़े बर्तनों और तंदूर में खाना बनता है। वहां तेज लौ और ज्यादा प्रेशर चाहिए होता है, इसलिए कमर्शियल सिलेंडर में प्रोपेन का अनुपात ज्यादा रखा जाता है। इसके रेगुलेटर और बर्नर भी हाई-प्रेशर वाले होते हैं।
वेस्ट एशिया का तनाव और ताजा झटका
ताजा बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहा तनाव है। भारत अपनी जरूरत की 50% से अधिक एलपीजी दूसरे देशों से मंगाता है। जंग के माहौल से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम चढ़े हैं। इसी वजह से तेल कंपनियों ने 1 अक्टूबर को कमर्शियल गैस के दाम बढ़ा दिए, जबकि घरेलू सिलेंडर के रेट को नहीं छेड़ा गया।
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