मेटा का नया AI: अब बिना सर्जरी दिमाग पढ़कर लिखेगा टेक्स्ट, जानें सबकुछ

Published : Jun 30, 2026, 10:01 AM IST
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सार

मेटा ने Brain2Qwerty v2 AI पेश किया है, जो बिना सर्जरी के दिमाग की तरंगों को रियल-टाइम में टेक्स्ट में बदल सकता है। यह तकनीक उन लोगों की मदद कर सकती है जो बोलने में असमर्थ हैं। इसकी सटीकता सर्जिकल तरीकों के करीब पहुंच रही है।

नई दिल्ली [भारत], 30 जून (एएनआई): मेटा ने Brain2Qwerty v2 का अनावरण किया है। यह एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम है जो बिना किसी सर्जिकल इम्प्लांट के मस्तिष्क की गतिविधि को टेक्स्ट में बदल सकता है। इसे ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफ़ेस रिसर्च में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कंपनी के अनुसार, Brain2Qwerty v2 अब तक का सबसे बेहतरीन एंड-टू-एंड सिस्टम है, जो बिना चीर-फाड़ (नॉन-इनवेसिव) वाले ब्रेन रिकॉर्डिंग से रियल-टाइम में वाक्यों को डिकोड कर सकता है।

मेटा ने कहा कि यह तकनीक सटीकता के उस स्तर तक पहुंच रही है, जो पहले केवल ब्रेन सर्जरी जैसी तकनीकों से ही संभव थी। कंपनी ने बताया, "Brain2Qwerty v2, नॉन-इनवेसिव ब्रेन रिकॉर्डिंग से रियल-टाइम में वाक्यों को डिकोड करने वाला सबसे बेहतरीन एंड-टू-एंड सिस्टम है, जो सटीकता के उन स्तरों के करीब पहुंच रहा है जो पहले केवल ब्रेन सर्जरी की आवश्यकता वाली तकनीकों के लिए ही संभव थे।"

लाखों लोगों के लिए बन सकती है उम्मीद

कंपनी ने कहा कि यह रिसर्च ब्रेन लीजन (मस्तिष्क की क्षति) और अन्य स्थितियों से पीड़ित लाखों लोगों की मदद कर सकती है, जिनकी वजह से वे संवाद करने में असमर्थ हैं।

यह स्टीरियोटैक्टिक इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी और इलेक्ट्रोकोर्टिकोग्राफी जैसे इनवेसिव (सर्जिकल) तरीकों से बिल्कुल अलग है, जिनमें ब्रेन सिग्नल को पकड़ने के लिए सर्जिकल इम्प्लांट की जरूरत होती है। इसके विपरीत, Brain2Qwerty टेक्स्ट को डिकोड करने के लिए नॉन-इनवेसिव रिकॉर्डिंग का उपयोग करता है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

मेटा ने बताया कि उसने नौ वॉलंटियर पार्टिसिपेंट्स से इकट्ठे किए गए लगभग 22,000 वाक्यों का उपयोग करके Brain2Qwerty v2 को प्रशिक्षित किया। प्रत्येक प्रतिभागी ने एक्टिव रूप से टाइपिंग करते हुए लगभग 10 घंटे तक मैग्नेटोएन्सेफलोग्राफी (MEG) डिवाइस पहना।

कंपनी ने समझाया कि यह सिस्टम न्यूरल घटनाओं की पहचान के लिए मैन्युअल रूप से डिजाइन किए गए पाइपलाइनों पर निर्भर रहने के बजाय, सीधे रॉ ब्रेन सिग्नल से भाषा को डिकोड करने के लिए एंड-टू-एंड डीप लर्निंग का उपयोग करता है।

मेटा के अनुसार, बड़े लैंग्वेज मॉडल्स को न्यूरल डेटा पर फाइन-ट्यून किया गया, जिससे सिस्टम शोर भरे ब्रेन सिग्नल और सुसंगत भाषा के बीच की खाई को पाटने के लिए सिमेंटिक कॉन्टेक्स्ट का उपयोग करने में सक्षम हो गया।

कंपनी ने डिकोडिंग प्रक्रिया में ऑप्टिमाइज़ेशन का पता लगाने के लिए AI एजेंट्स को भी तैनात किया, जिसके फाइनल ट्रेनिंग कॉन्फ़िगरेशन को इंजीनियरों द्वारा चुना गया।

सर्जिकल तरीकों जितनी सटीक

मेटा ने कहा कि नए सिस्टम ने 61 प्रतिशत की शब्द सटीकता दर हासिल की, जो अन्य नॉन-इनवेसिव तरीकों से हासिल की गई 8 प्रतिशत की शब्द सटीकता की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार है।

स्टडी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी के लिए, सिस्टम ने 78 प्रतिशत की शब्द सटीकता दर हासिल की, जिसमें सभी डिकोड किए गए वाक्यों में से आधे से अधिक में एक शब्द की त्रुटि या उससे कम थी।

कंपनी ने यह भी पाया कि जैसे-जैसे अधिक ट्रेनिंग डेटा उपलब्ध हुआ, डिकोडिंग सटीकता में सुधार हुआ। इससे पता चलता है कि बड़े डेटासेट के माध्यम से नॉन-इनवेसिव और सर्जिकल तरीकों के बीच प्रदर्शन के अंतर को और कम किया जा सकता है।

रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा, कोड किया जाएगा जारी

आगे के रिसर्च को सपोर्ट करने के लिए, मेटा ने घोषणा की है कि वह Brain2Qwerty v1 और v2 के लिए पूरा ट्रेनिंग कोड जारी कर रहा है। इसका रिसर्च पार्टनर, बास्क सेंटर ऑन कॉग्निशन, ब्रेन एंड लैंग्वेज (BCBL) भी Brain2Qwerty v1 डेटासेट जारी करेगा।

मेटा ने कहा कि यह काम मस्तिष्क के ओपन फाउंडेशनल मॉडल विकसित करने और न्यूरोलॉजिकल विकारों के निदान, उपचार और समझ में सुधार के उद्देश्य से न्यूरोसाइंस रिसर्च को आगे बढ़ाने के उसके व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

मेटा ने यह भी कहा कि यह रिसर्च मस्तिष्क के ओपन फाउंडेशनल मॉडल बनाने के उसके व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

कंपनी ने परसेप्शन एन्कोडिंग के लिए अपने TribeV2 मॉडल, बड़े पैमाने पर ब्रेन डेटा को प्रोसेस करने के लिए NeuralSet, और ब्रेन मॉडल का व्यवस्थित रूप से मूल्यांकन करने के लिए NeuralBench पर प्रकाश डाला।

मेटा ने कहा कि ये पहल उसके 'डिजिटल ब्रेन प्रोजेक्ट' का हिस्सा हैं, जिसके तहत उसने हाल ही में ओपन न्यूरोसाइंस डेटासेट बनाने में सहायता के लिए 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के फंड की घोषणा की थी। (एएनआई)

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