EPF Pension Hike: जानें कितनी हो सकती है आपकी मिनिमम पेंशन?

Published : Mar 18, 2026, 08:21 AM IST
EPF Pension Hike: जानें कितनी हो सकती है आपकी मिनिमम पेंशन?

सार

संसदीय समिति ने EPS-95 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन ₹1,000 से बढ़ाने की सिफारिश की है। समिति ने मौजूदा राशि को अपर्याप्त बताया है। इसमें कॉन्ट्रैक्ट व गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने जैसे अन्य सुझाव भी शामिल हैं।

नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। श्रम, कपड़ा और कौशल विकास पर बनी संसद की स्थायी समिति ने मंगलवार को एक अहम रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) के तहत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन को तुरंत बढ़ाने की सिफारिश की गई है। समिति का मानना है कि मौजूदा ₹1,000 की न्यूनतम मासिक पेंशन आज की महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए बहुत ही कम है। यह रकम किसी भी व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी नाकाफी है।

आपको बता दें कि पेंशनर्स 9 मार्च से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 किया जाए। समिति ने सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार को इस योजना के लिए बजट के जरिए और ज्यादा आर्थिक मदद देने के तरीकों पर विचार करना चाहिए।

संसदीय समिति की दूसरी बड़ी सिफारिशें

पेंशन बढ़ाने के अलावा भी समिति ने कई और जरूरी सुझाव दिए हैं…

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को सुरक्षा: जो कॉन्ट्रैक्ट वर्कर परमानेंट कर्मचारियों जैसा ही काम करते हैं, उन्हें हादसे के वक्त मुआवजा मिलने में देरी होती है। समिति ने कहा है कि ऐसे कर्मचारियों को ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) का फायदा समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए।

गिग वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन जरूरी: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले गिग वर्कर्स का 'ई-श्रम' (e-Shram) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे उन्हें बीमा और एक्सीडेंट कवर जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।

खनन और सुरक्षा: देश में रजिस्टर्ड और गैर-रजिस्टर्ड, सभी खदानों का एक पूरा डेटाबेस तैयार किया जाए। अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

ESI का दायरा बढ़े: ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी देने के लिए, ईएसआईसी (ESIC) के तहत सैलरी की सीमा को बदलने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

वित्तीय अनुशासन: श्रम मंत्रालय को बजट आवंटन और खर्च के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए। साथ ही, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए बजट में सही तरीके से पैसा अलग रखना चाहिए।

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