
मुंबई : देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का लंबे समय से अटका IPO अब जल्द ही आने की तैयारी में है। यह IPO उन सरकारी वित्तीय संस्थानों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है, जिन्होंने शुरुआती दिनों में NSE में निवेश किया था। उन्हें अपने निवेश पर ऐसा रिटर्न मिलने वाला है, जिसकी शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।
NSE की तरफ से जमा किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, अगर IPO में एक शेयर की कीमत 2,000 रुपये भी मानी जाए, तो भारतीय स्टेट बैंक (SBI) करीब 4,950 करोड़ रुपये के शेयर बेचेगा। और सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन शेयरों को खरीदने में SBI का कुल खर्च सिर्फ 1.98 करोड़ रुपये आया था! इस ड्राफ्ट ने पिछले तीन दशकों में भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज द्वारा बनाई गई अपार संपत्ति की एक दुर्लभ झलक पेश की है।
ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत, SBI अपने 2.475 करोड़ शेयर खुले बाजार में बेचने की योजना बना रहा है। पिछले 30 सालों में हुए कई शेयर डिवीजनों, बोनस शेयरों और कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग के चलते SBI के लिए इन शेयरों की औसत खरीद कीमत सिर्फ 80 पैसे प्रति शेयर रह गई है। अब अगर IPO में एक शेयर का भाव 2,000 रुपये तय होता है, तो SBI की हिस्सेदारी की कुल कीमत 4,950 करोड़ रुपये हो जाएगी। यानी बैंक को सीधे-सीधे 4,948 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुनाफा होगा।
यह बंपर फायदा सिर्फ SBI तक ही सीमित नहीं है। NSE की शुरुआत में उसका साथ देने वाले कई दूसरे सरकारी संस्थानों को भी अब उम्मीद से कहीं ज्यादा मुनाफा मिलने वाला है।
बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB): इस बैंक के लिए एक शेयर की खरीद लागत सिर्फ 54 पैसे आई थी। बैंक ने कुल 59 लाख रुपये का निवेश किया था, जिसके बदले अब वह 2,197 करोड़ रुपये के शेयर बेचेगा।
स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड: इस संस्था ने सिर्फ 46 पैसे प्रति शेयर की दर से शेयर खरीदे थे। अपने करीब 50 लाख रुपये के निवेश से अब यह कंपनी 2,178 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर मोटा मुनाफा कमाएगी।
बीमा सेक्टर की बड़ी कंपनियां जैसे 'द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी' और 'नेशनल इंश्योरेंस कंपनी' ने तो सिर्फ 32 पैसे प्रति शेयर की औसत कीमत पर शेयर खरीदे थे। मौजूदा अनुमान के मुताबिक, न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों की कीमत करीब 2,100 करोड़ रुपये होगी, जबकि नेशनल इंश्योरेंस की हिस्सेदारी लगभग 1,200 करोड़ रुपये की होगी।
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, जिसने 50 पैसे प्रति शेयर की लागत से शेयर खरीदे थे, वह भी करीब 1,200 करोड़ रुपये के शेयर बेचेगी।
जो निवेशक बाजार में थोड़ी देर से और ऊंची कीमत पर आए, वे भी तगड़ा मुनाफा कमाने वाले हैं। मिसाल के तौर पर, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) ने हर शेयर के लिए औसतन 5.26 रुपये खर्च करके कुल 5.6 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अब वह 2,131 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचकर भारी मुनाफा कमाएगी।
NSE में बाद के दौर में पैसा लगाने वाले विदेशी निवेशकों की खरीद लागत भले ही ज्यादा हो, लेकिन 2,000 रुपये के IPO प्राइस पर उन्हें भी 'मल्टीबैगर' यानी कई गुना रिटर्न मिलना तय है।
एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड: इसने औसतन 66.54 रुपये प्रति शेयर पर निवेश किया है।
अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्राइवेट लिमिटेड: इसने प्रति शेयर 62.38 रुपये चुकाए हैं।
कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB): शेयर बेचने वाले निवेशकों में इसकी खरीद लागत सबसे ज्यादा, 324.13 रुपये प्रति शेयर है।
जब IPO आधिकारिक तौर पर बाजार में आएगा, तब इसकी फाइनल कीमत तय होगी। लेकिन ड्राफ्ट में सामने आई ये डिटेल्स साफ बताती हैं कि पिछले तीन दशकों में भारतीय पूंजी बाजार के साथ-साथ NSE ने कितनी बड़ी संपत्ति बनाई है। SBI और दूसरे शुरुआती निवेशकों के लिए यह IPO भारतीय वित्तीय इतिहास की सबसे सफल लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी में से एक के तौर पर दर्ज होने जा रहा है।
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