Sugar Price Hike: 1 महीने में 29% महंगी हुई चीनी, ₹75 किलो तक पहुंचे दाम, चेक करें नए रेट

Published : Aug 25, 2026, 11:03 AM IST
Sugar

सार

Sugar Price Today: पिछले एक महीने में ही चीनी के दाम 29% तक बढ़ गए हैं। जानिए अभी चीनी का रेट क्या चल रहा है? कीमतों में तेजी की वजह और सरकार ने क्या एक्शन लिए हैं।

Sugar Price Surge: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी ने आम लोगों के किचन बजट को झटका दिया है। देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत एक महीने में करीब 29% बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक महीने पहले जो औसत कीमत ₹48.73 प्रति किलो थी, वह बढ़कर ₹63.05 प्रति किलो पहुंच गई है। कई जगह चीनी का रेट ₹75 प्रति किलो तक दर्ज किया गया है। दाम में अचानक आई इस तेजी के बाद केंद्र सरकार भी अलर्ट हो गई है। सरकार ने आयात होने वाली कच्ची चीनी को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं, ताकि चीनी गोदामों में पड़ी न रहे और जल्दी से जल्दी बाजार तक पहुंच सके। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर चीनी इतनी महंगी क्यों हो गई? सरकार क्या कदम उठा रही है और क्या त्योहारों से पहले दाम कम हो सकते हैं?

चीनी कितनी महंगी हुई?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत एक महीने पहले ₹48.73 प्रति किलो थी। अब यह बढ़कर ₹63.05 प्रति किलो हो गई है। यानी औसतन एक किलो चीनी पर करीब ₹14.32 (करीब 29%) का इजाफा हुआ है। वहीं, कुछ बाजारों में चीनी का अधिकतम खुदरा भाव ₹75 प्रति किलो तक पहुंच गया है। मॉडल कीमत करीब ₹65 प्रति किलो दर्ज की गई।

हफ्तेभर में में मिल से निकलने वाली चीनी भी हुई महंगी

चीनी के दाम में तेजी सिर्फ रिटेल मार्केट में नहीं दिख रही है। मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत में भी तेज उछाल आया है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, एक्स-मिल चीनी का भाव करीब 7 से 10 दिन में ₹47-48 प्रति किलो से बढ़कर ₹62 प्रति किलो तक पहुंच गया। सरकार ने इस तेजी को सही नहीं माना है और कीमत बढ़ने की वजहों पर नजर रखी जा रही है।

चीनी जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने क्या एक्शन लिए?

2 महीने की सख्त समयसीमा

चीनी के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कच्ची चीनी (Raw Sugar) के आयात नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब आयातकों को कच्ची चीनी मंगाने के 60 दिनों के अंदर उसे प्रोसेस (रिफाइन) करके घरेलू बाजार में बेचना ही होगा। इसके अलावा सरकार पहले ही 10 लाख टन चीनी के आयात की मंजूरी दे चुकी है। यह मंजूरी 31 अक्टूबर तक के लिए दी गई थी।

गोदामों में दबाकर रखने पर रोक

पहले 31 अक्टूबर तक बेचने की ढीली छूट थी, लेकिन अब फिक्स 2 महीने की डेडलाइन दी गई है ताकि गोदामों में चीनी की जमाखोरी न हो सके। सॉफ्ट-ड्रिंक और आइसक्रीम निर्माताओं जैसे बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा लागू की गई है और राज्य सरकारों को कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

चीनी इतनी महंगी क्यों हो रही है?

बारिश और जलभराव से फसल को नुकसान

कई इलाकों में ज्यादा बारिश और जलभराव ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा कीटों के असर की भी बात सामने आई है। इसका असर उत्पादन के अनुमान पर पड़ा है। सरकार ने 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटा दिया है। पहले उत्पादन करीब 343 लाख टन रहने का अनुमान था। अब इसे घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है।

त्योहारों से पहले बढ़ी मांग

रक्षाबंधन से लेकर दिवाली तक मिठाइयों और खाने-पीने की चीजों की मांग बढ़ती है। ऐसे में त्योहारों के करीब आते ही चीनी की खपत भी बढ़ने लगती है। बढ़ती मांग और सप्लाई को लेकर बनी चिंता ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।

जमाखोरी और सट्टेबाजी का भी असर

सरकार का मानना है कि सिर्फ उत्पादन और मांग ही नहीं, बल्कि बाजार में होने वाली सट्टेबाजी और स्टॉक रोककर रखने जैसी गतिविधियां भी कीमतों को ऊपर ले जा सकती हैं। इसी वजह से सरकार ने आयात की गई कच्ची चीनी को तय समय में बाजार तक पहुंचाने का नियम बनाया है और राज्यों को बाजार पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

क्या देश में सच में चीनी की कमी हो गई है?

चीनी उद्योग ने साफ कहा है कि देश में चीनी की कोई बड़ी कमी नहीं है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि भारत में चीनी की कुल उपलब्धता अभी पर्याप्त है। संगठन का मानना है कि सरकार के हालिया कदमों के बाद कीमतों में नरमी भी आ सकती है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 में इथेनॉल के लिए इस्तेमाल की गई मात्रा को हटाने के बाद देश में करीब 279 लाख टन चीनी का नेट उत्पादन हो सकता है। इसके अलावा सीजन की शुरुआत में करीब 50 लाख टन का स्टॉक मौजूद था। वहीं, देश में सालाना खपत करीब 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है।

इथेनॉल के लिए चीनी भेजने पर भी छिड़ी बहस

चीनी के बढ़ते दाम के बीच इथेनॉल का मुद्दा भी चर्चा में है। विपक्षी दलों का तर्क है कि चीनी और गन्ने से इथेनॉल बनाने के लिए ज्यादा मात्रा भेजे जाने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और दाम बढ़े। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस दावे को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि चीनी के हालिया दाम बढ़ने की पूरी वजह सिर्फ इथेनॉल को नहीं बताया जा सकता। सरकार के मुताबिक, फसल को नुकसान, मौसम और बाजार की स्थिति जैसे दूसरे कारण भी कीमतों में तेजी के लिए जिम्मेदार हैं।

PREV

अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

LPG Cylinder New Rule: क्या बंद होने वाले हैं रसोई गैस सिलेंडर? सरकार का 1 सितंबर से नया मास्टरप्लान
Personal Loan की EMI से छुटकारा पाना चाहते हैं? पहले ये गलती बिल्कुल न करें