
Swiggy Share Price Target: स्विगी के शेयर में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान शेयर करीब 17% तक टूटकर 52 वीक के सबसे लो लेवल ₹174.95 पर पहुंच गया। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। एक तरफ कंपनी की कमाई में अच्छी बढ़त दिख रही है, तो दूसरी तरफ क्विक कॉमर्स बिजनेस में बढ़ते घाटे ने बाजार को परेशान कर दिया है। ऐसे में सवाल है कि जिन निवेशकों के पास स्विगी के शेयर हैं, वे अब क्या करें? और क्या मौजूदा भाव पर शेयर खरीदना सही है? आइए जानते हैं ब्रोकरेज की राय...
शुक्रवार को स्विगी के शेयर पर बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा रहा कि शेयर दिन के कारोबार में ₹174.95 तक फिसल गया। दोपहर करीब 2 बजे NSE पर यह ₹183 के आसपास कारोबार कर रहा था। जबकि यह ₹178 पर बंद हुआ। गुरुवार को यह ₹211.40 पर बंद हुआ था। इस गिरावट का असर कंपनी की कुल बाजार वैल्यू पर भी पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, स्विगी का मार्केट कैप करीब ₹7,837 करोड़ घटकर ₹50,541.34 करोड़ रह गया।
शेयर की गिरावट सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक शेयर करीब 53% गिर चुका है। पिछले एक साल में करीब 57% की गिरावट आई है। वहीं, पिछले एक महीने की बात करें, तो ये करीब 34% तक क्रैश हो चुका है। पिछले एक हफ्ते में ही इसकी गिरावट करीब 22% रही है। यानी जिन निवेशकों ने ऊंचे भाव पर शेयर खरीदा था, उनके लिए ये गिरावट बड़ा झटका हो सकती है।
इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह स्विगी के हालिया तिमाही नतीजे (Q2 Results) हैं। कंपनी की कमाई (Revenue) तो 36% बढ़कर 7,571 करोड़ रुपए हो गई है, लेकिन कंपनी का मुनाफा अभी भी गायब है। कंपनी को इस तिमाही में 922 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ है। हालांकि यह घाटा पिछले साल (1,092 करोड़ रुपए) से कम है, लेकिन असली डर 'स्विगी इंस्टामार्ट' (Quick Commerce) को लेकर है। मैक्वेरी (Macquarie) जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि 10 मिनट में सामान पहुंचाने वाले इस बिजनेस में गलाकाट कॉम्पिटिशन है। इस रेस में बने रहने के लिए स्विगी पानी की तरह पैसा बहा रही है। ग्रोथ तो दिख रही है, लेकिन जिस तरह से घाटा बढ़ रहा है, उसने बड़े निवेशकों को डरा दिया है।
UBS को ₹375 तक जाने की उम्मीद
UBS ने स्विगी के शेयर पर अपनी Buy रेटिंग बरकरार रखी है और ₹375 का टारगेट प्राइस दिया है। हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी के तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। फूड डिलीवरी बिजनेस का प्रदर्शन अनुमान के करीब रहा, लेकिन क्विक कॉमर्स में घाटा उम्मीद से ज्यादा रहा। इसके बावजूद कंपनी के कारोबार की ग्रोथ में सुधार के शुरुआती संकेत दिखाई दिए हैं।
Bernstein ने ₹350 का टारगेट दिया
Bernstein ने स्विगी पर अपनी Outperform रेटिंग बनाए रखी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹430 से घटाकर ₹350 कर दिया है। यानी कंपनी को लेकर पॉजिटिव नजरिया बरकरार है, लेकिन पहले के मुकाबले उम्मीदें कम हुई हैं।
Jefferies और Citi का टारगेट ₹330
जेफरीज ने स्विगी पर Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹435 से घटाकर ₹330 कर दिया है। वहीं, Citi ने भी Buy रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन अपना टारगेट ₹390 से घटाकर ₹330 कर दिया है। दोनों ब्रोकरेज फर्मों के बदले हुए टारगेट बताते हैं कि कंपनी की आगे की ग्रोथ को लेकर उम्मीदों का दोबारा आंकलन किया गया है।
JPMorgan को ₹310 तक जाने की संभावना
जेपी मॉर्गन ने स्विगी के शेयर पर ओवरवेट (Overweight) रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, उसने टारगेट प्राइस ₹360 से घटाकर ₹310 कर दिया है। इसका मतलब है कि ब्रोकरेज की राय पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुई है, लेकिन अब वह शेयर से पहले के मुकाबले कम बढ़त की उम्मीद कर रही है।
CLSA ने ₹262 का टारगेट रखा
CLSA ने स्विगी पर अपनी 'Accumulate' रेटिंग बनाए रखी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस ₹312 से घटाकर ₹262 कर दिया है। ये बदलाव दिखाता है कि कंपनी के कारोबार में ग्रोथ की संभावना के बावजूद कुछ जोखिमों को ध्यान में रखा जा रहा है।
Bank of America और HSBC ने दिखाई सावधानी
बैंक ऑफ अमेरिका ने स्विगी पर न्यूट्रल (Neutral) रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹275 से घटाकर ₹245 कर दिया है। ब्रोकरेज ने कमजोर तिमाही नतीजों और बढ़ते घाटे को चिंता की वजह बताया है। वहीं, HSBC ने शेयर पर होल्ड (Hold) रेटिंग बनाए रखी है। उसने अपना टारगेट प्राइस ₹315 से घटाकर ₹240 कर दिया है। इन दोनों फर्मों की राय बताती है कि फिलहाल शेयर को लेकर बहुत ज्यादा आक्रामक नजरिया अपनाने से बचने की जरूरत हो सकती है।
Macquarie की राय सबसे सतर्क
मैक्वरीज ने स्विगी पर अंडरपरफॉर्म (Underperform) रेटिंग बरकरार रखी है और ₹230 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी की ग्रोथ में सुधार दिख रहा है, लेकिन क्विक कॉमर्स बिजनेस में घाटा और नकारात्मक कैश फ्लो चिंता का विषय हैं। कंपनी को ग्राहकों को छूट देने, नेटवर्क बढ़ाने और कॉम्पटिशन में बने रहने के लिए लगातार निवेश करना पड़ रहा है। इससे मुनाफे तक पहुंचने में ज्यादा समय लग सकता है। मैक्वरीज के मुताबिक, फूड डिलीवरी बिजनेस अपेक्षाकृत स्थिर है, लेकिन क्विक कॉमर्स में कारोबार बढ़ने के साथ मुनाफा कमाना अभी बड़ी चुनौती है।
डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सेबी रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।
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