
नई दिल्ली [भारत], 22 जुलाई (एएनआई): स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट के सफल पहले ही लॉन्च ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय निजी कंपनियां अब जटिल ऑर्बिटल लॉन्च करने में सक्षम हैं। यह बात इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को एएनआई को दिए एक खास इंटरव्यू में कही।
भट ने कहा कि रॉकेट टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करना सबसे कठिन और जटिल क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में स्काईरूट की पहली ही कोशिश में सफलता एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो वैश्विक मंच पर भारत के निजी स्पेस सेक्टर की साख स्थापित करती है।
कौन सी कंपनियां अगली कतार में हैं, इस पर भट ने कहा कि अग्निकुल कॉसमॉस जल्द ही अपना रॉकेट लॉन्च कर सकती है, जिसने पहले ही एक प्री-ऑर्बिटल टेस्ट लॉन्च पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया कि अग्निकुल का रॉकेट दोबारा इस्तेमाल किए जाने लायक बनाया गया है, जिससे लॉन्च की लागत काफी कम हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि एज़िस्टा-बीएसटी एयरोस्पेस, पिक्सल और ध्रुव स्पेस सहित पांच से अधिक अन्य भारतीय कंपनियां पहले ही सैटेलाइट लॉन्च कर चुकी हैं और आने वाले वर्षों में निजी क्षेत्र से और भी लॉन्च की उम्मीद है।
विक्रम-1 के लॉन्च से मिले व्यापक संदेश पर भट ने कहा कि इसका मुख्य निष्कर्ष यह है कि भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग अब न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि विश्व स्तर पर भी स्वतंत्र लॉन्च सेवाएं देने में सक्षम है।
रिलायंस जियो को IN-SPACe से 1,600 लो-अर्थ-ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स का एक समूह लॉन्च करने के लिए मिली सैद्धांतिक मंजूरी के बारे में पूछे जाने पर, भट ने इसे एक बेहद सकारात्मक विकास बताया। उन्होंने कहा कि किसी भारतीय कंपनी द्वारा 1,600 सैटेलाइट्स के समूह की तैनाती अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और उम्मीद जताई कि अन्य भारतीय कंपनियां भी इसी तरह के उपक्रमों के साथ आगे आएंगी। (एएनआई)
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