
अचानक आने वाले बड़े खर्चों में हमारी फाइनेंशियल प्लानिंग गड़बड़ा न जाए, इसके लिए एक इमरजेंसी फंड बहुत मददगार होता है। लेकिन अक्सर लोगों को यह कन्फ्यूजन रहता है कि इस फंड का पैसा कहां रखें। यह सवाल बहुत ज़रूरी है कि इमरजेंसी के लिए रखे गए पैसे से हमें रिटर्न पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए या इस बात पर कि ज़रूरत पड़ने पर पैसा कितनी जल्दी हमारे हाथ में आ सकता है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमरजेंसी फंड में सबसे ज़्यादा अहमियत 'लिक्विडिटी' को दी जानी चाहिए, यानी पैसा कितनी तेज़ी से कैश में बदल सकता है।
इमरजेंसी फंड वो पैसा है जो हम अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग रखते हैं। जैसे, अस्पताल का खर्च, गाड़ी की रिपेयरिंग या अचानक नौकरी चली जाना। यह फंड हमें अपने लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट को छेड़े बिना मुश्किल हालात से निपटने में मदद करता है।
इस सवाल का जवाब देते हुए सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर अविनाश लूथरिया कहते हैं कि 'इमरजेंसी' हर किसी के लिए एक जैसी नहीं होती, इसलिए पैसा कहां लगाना है, यह भी हालात के हिसाब से तय करना चाहिए।
अविनाश लूथरिया बताते हैं कि हॉस्पिटल जैसी एकदम अचानक आई ज़रूरत के लिए पैसा तुरंत चाहिए होता है। ऐसे में फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) सबसे प्रैक्टिकल ऑप्शन है। सेविंग्स अकाउंट में भी पैसा रखा जा सकता है, लेकिन आमतौर पर लोग बड़ी रकम सेविंग्स अकाउंट में नहीं रखते। वहीं, म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने में 2-3 कामकाजी दिन लग सकते हैं। इसलिए, अगर आपके पास कुछ दिनों का समय है, तो आप म्यूचुअल फंड पर विचार कर सकते हैं। खासतौर पर लिक्विड फंड, ओवरनाइट फंड और आर्बिट्राज फंड अच्छे रिटर्न दे सकते हैं।
अब बात करते हैं टैक्स की। इमरजेंसी फंड के मामले में टैक्स को पहली प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए। सबसे ज़रूरी यह है कि पैसा कितनी जल्दी मिल सकता है। जो लोग कम टैक्स स्लैब में आते हैं, वे अपना फंड फिक्स्ड डिपॉज़िट में रख सकते हैं। वहीं, जो लोग ऊंचे टैक्स स्लैब में हैं, वे डेट फंड्स जैसे विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
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